इन कंपनियों की कमाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन्होंने केवल एक तिमाही में वित्त वर्ष 2025-26 के पूरे साल के संयुक्त मुनाफे का करीब 39 प्रतिशत हासिल कर लिया। तीनों कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 77,281 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था। सितंबर तिमाही के नतीजे इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इससे पहले जून तिमाही में इन कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
इस संयुक्त मुनाफे में सबसे बड़ा योगदान इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन का रहा। कंपनी ने सितंबर तिमाही में 21,630 करोड़ रुपये का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा दर्ज किया। वहीं, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन का मुनाफा पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 22.5 प्रतिशत घटकर 4,993 करोड़ रुपये रह गया। सितंबर 2025 की तिमाही में कंपनी ने 6,443 करोड़ रुपये का लाभ कमाया था। हालांकि, जून 2026 की तिमाही में 3,962 करोड़ रुपये के घाटे के बाद कंपनी ने दोबारा मुनाफे में वापसी की है।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के नतीजों में भी सुधार दिखाई दिया। कंपनी का सितंबर तिमाही का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 9.1 प्रतिशत घटकर 3,483 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की समान अवधि में यह 3,830 करोड़ रुपये था। हालांकि, जून तिमाही में कंपनी को करीब 11,526 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ था। ऐसे में दूसरी तिमाही में मुनाफे में वापसी उसके वित्तीय प्रदर्शन में बड़ा बदलाव दर्शाती है।
तीनों कंपनियों की कमाई में सुधार के पीछे केवल पेट्रोल-डीजल की बिक्री नहीं रही। कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव के साथ रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल और गैस कारोबार से मिलने वाले बेहतर मार्जिन ने भी अहम भूमिका निभाई। विशेष रूप से ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) में बढ़ोतरी ने कंपनियों की कमाई को मजबूती दी।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन इसका प्रमुख उदाहरण है। सितंबर तिमाही में कंपनी का जीआरएम बढ़कर 32.15 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 8.80 डॉलर प्रति बैरल था। इस तरह कंपनी के रिफाइनिंग कारोबार से मिलने वाले मार्जिन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन ने तिमाही के मुनाफे को बढ़ाने में योगदान दिया।
मुनाफे के साथ तीनों सरकारी तेल कंपनियों के कारोबार के आकार में भी बढ़ोतरी हुई है। सितंबर तिमाही में इनका संयुक्त रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस करीब 29 प्रतिशत बढ़कर 5.60 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह आंकड़ा 4.35 लाख करोड़ रुपये था। इससे पेट्रोलियम कारोबार में कंपनियों की बिक्री और परिचालन आय में हुई बढ़ोतरी का पता चलता है।
हालांकि, शानदार मुनाफे के बावजूद कंपनियों के सामने एलपीजी कारोबार से जुड़ी वित्तीय चुनौती बनी हुई है। 30 सितंबर 2026 तक इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के एलपीजी प्राइसिंग बफर में 32,505.69 करोड़ रुपये की अंडर रिकवरी दर्ज थी। इसका अर्थ है कि एलपीजी की बिक्री से जुड़ी लागत और प्राप्त राशि के बीच अभी भी बड़ा अंतर बना हुआ है।
इस तरह सितंबर तिमाही में सरकारी तेल कंपनियों ने जून तिमाही के नुकसान से उबरते हुए संयुक्त रूप से 30,106 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया। रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार और कारोबार से बढ़ी आय ने इस वापसी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, हालांकि एलपीजी से जुड़ा वित्तीय दबाव अब भी चुनौती बना हुआ है।



