Tag: Iran America conflict

  • West Asia Crisis: युद्धविराम के बावजूद भड़का तनाव, लेबनान में इस्राइल का बड़ा एक्शन; ईरान-अमेरिका आमने-सामने

    West Asia Crisis: युद्धविराम के बावजूद भड़का तनाव, लेबनान में इस्राइल का बड़ा एक्शन; ईरान-अमेरिका आमने-सामने



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू होने के बावजूद हालात लगातार विस्फोटक बने हुए हैं। दक्षिणी लेबनान में इस्राइल ने सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव और गहरा गया है। पूरे क्षेत्र में एक बार फिर बड़े संघर्ष का खतरा मंडराने लगा है।

    लेबनान के गांव को खाली करने का आदेश
    इस्राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के अल-अब्बासियाह गांव के लोगों को तत्काल इलाका खाली करने का आदेश दिया है। इस्राइल के अरबी भाषा के प्रवक्ता अविचाई अद्राई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट जारी कर लोगों से गांव छोड़कर कम से कम 1000 मीटर दूर खुले इलाकों में जाने को कहा।

    युद्धविराम के बावजूद दक्षिण लेबनान में इस्राइली हवाई हमले और सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। हिजबुल्लाह और इस्राइली सेना के बीच रुक-रुक कर झड़पें भी जारी हैं, जिससे स्थानीय लोगों में डर और पलायन का माहौल बना हुआ है।

    दक्षिण लेबनान में हवाई हमला, 11 लोगों की मौत
    अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्राइल ने नबातियेह जिले के दुएर, हारौफ और हब्बौश कस्बों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में 11 लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं। वहीं 36 लोग घायल बताए जा रहे हैं।

    होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका-ईरान आमने-सामने
    उधर, होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया, लेकिन अमेरिकी सेना ने सभी हमलों को नाकाम कर दिया।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के तीन बड़े युद्धपोत सुरक्षित हैं और जवाबी कार्रवाई में ईरानी हमलावरों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने जल्द समझौता नहीं किया तो अमेरिका और कड़ी कार्रवाई करेगा।

    ईरान ने अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप
    ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम उल्लंघन और तेल टैंकरों पर हमला करने का आरोप लगाया है। ईरानी सेना के अनुसार, अमेरिका ने होर्मुज जलमार्ग और फुजैराह के पास जहाजों को निशाना बनाया, जिसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य जहाजों पर जवाबी हमला किया। ईरान ने दावा किया कि उसकी जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी जहाजों को भारी नुकसान पहुंचा है। साथ ही तेहरान ने साफ कहा कि किसी भी हमले का “बिना हिचकिचाहट करारा जवाब” दिया जाएगा।

    खाड़ी क्षेत्र से 5 भारतीयों की सुरक्षित वापसी
    इस बीच लेबनान स्थित भारतीय दूतावास ने खाड़ी क्षेत्र में फंसे पांच भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया है। दूतावास ने लेबनानी प्रशासन के सहयोग के लिए आभार जताया है।पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात के बीच दुनिया की नजर अब अमेरिका, ईरान और इस्राइल की अगली चाल पर टिकी हुई है।

  • सीजफायर की डेडलाइन नजदीक, अमेरिका-ईरान के बीच 24 घंटे में तय होगा जंग या बातचीत का रास्ता

    सीजफायर की डेडलाइन नजदीक, अमेरिका-ईरान के बीच 24 घंटे में तय होगा जंग या बातचीत का रास्ता

    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच लागू सीजफायर 22 अप्रैल को खत्म होने जा रहा है, और ऐसे में दोनों देशों के लिए आने वाले 24 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं। इस दौरान यह साफ हो सकता है कि हालात युद्ध की ओर बढ़ेंगे या कूटनीतिक बातचीत से समाधान निकलेगा।

    अमेरिका की ओर से बातचीत के लिए डेलिगेशन के पाकिस्तान जाने को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। सोमवार को खबरें आई थीं कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल जल्द इस्लामाबाद पहुंच सकता है, लेकिन बाद में ये खबरें गलत साबित हुईं। सीजफायर की समयसीमा खत्म होने से पहले अगर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बनती है, तो एक बार फिर संघर्ष शुरू होने की आशंका है। फिलहाल यह भी तय नहीं है कि इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच कोई बैठक होगी या नहीं।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, जेडी वेंस मंगलवार को पाकिस्तान के लिए रवाना हो सकते हैं। वहीं Bloomberg से बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि सीजफायर अमेरिकी समयानुसार बुधवार रात 8 बजे तक लागू रहेगा। इस हिसाब से दोनों देशों के पास गुरुवार सुबह तक निर्णय लेने का समय होगा।

    दूसरी ओर, ईरान ने साफ किया है कि उसकी कोई भी आधिकारिक या अनौपचारिक टीम बातचीत के लिए पाकिस्तान नहीं गई है। सरकारी मीडिया के अनुसार, इस तरह की सभी खबरें गलत हैं। ईरान का कहना है कि वह धमकियों के माहौल में बातचीत नहीं करेगा और जब तक अमेरिका अपना रुख नहीं बदलता, तब तक वार्ता आगे नहीं बढ़ेगी।

    बातचीत में अड़चन क्यों?
    ईरान के बातचीत से पीछे हटने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। The New York Times की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की आक्रामक और दबाव वाली रणनीति ने हालात को जटिल बना दिया है। ट्रंप अक्सर सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर बड़े दावे करते हैं, जिनका ईरान खंडन कर देता है।
    ईरान के बातचीत से पीछे हटने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। The New York Times की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की आक्रामक और दबाव वाली रणनीति ने हालात को जटिल बना दिया है। ट्रंप अक्सर सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर बड़े दावे करते हैं, जिनका ईरान खंडन कर देता है।

    ट्रंप जहां तेजी से समझौता करना चाहते हैं, वहीं ईरान धैर्य के साथ लंबी रणनीति अपनाए हुए है। ट्रंप का दावा है कि वह ईरान के साथ बराक ओबामा से बेहतर परमाणु समझौता करेंगे, लेकिन ईरान का कहना है कि अमेरिका भरोसेमंद नहीं है, क्योंकि एक सरकार समझौता करती है और दूसरी उसे तोड़ देती है।

    ईरान की चेतावनी
    ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गलिबाफ ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि युद्ध फिर से शुरू होता है, तो ईरान नए तरीकों से जवाब देगा। उन्होंने संकेत दिया कि युद्धविराम के दौरान ईरान ने अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत किया है, जिसमें मिसाइल और ड्रोन क्षमता भी शामिल है। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी तरह के दबाव या थोपे गए शर्तों को स्वीकार नहीं करेगा। अब नजर इस बात पर है कि सीजफायर खत्म होने के बाद हालात टकराव की ओर बढ़ते हैं या कूटनीति से कोई रास्ता निकलता है।