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  • ट्रंप ने जताई नाराजगी, बोले- अमेरिका को पैसों से ज्यादा वफादारी की जरूरत

    ट्रंप ने जताई नाराजगी, बोले- अमेरिका को पैसों से ज्यादा वफादारी की जरूरत


    वॉशिंगटन। नाटो शिखर सम्मेलन से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों को लेकर बड़ा बयान दिया है। व्हाइट हाउस में नाटो महासचिव मार्क रूटे के साथ हुई मुलाकात के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बढ़े तनाव और संघर्ष के दौरान कई नाटो सहयोगी देशों ने अमेरिका को निराश किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका को किसी सैन्य सहायता की जरूरत नहीं थी लेकिन सहयोगी देशों से जिस तरह के समर्थन और एकजुटता की उम्मीद थी वह देखने को नहीं मिली।

    ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी रणनीति और ताकत के दम पर हालात को नियंत्रित किया और किसी बाहरी मदद की आवश्यकता नहीं पड़ी। इसके बावजूद उन्होंने माना कि अगर सहयोगी देश खुलकर समर्थन जताते तो यह अमेरिका के लिए सकारात्मक संदेश होता। उन्होंने इटली ब्रिटेन जर्मनी और फ्रांस जैसे प्रमुख सहयोगी देशों का नाम लेते हुए कहा कि उनके रवैये से वे खासे निराश हुए हैं।

    नाटो महासचिव मार्क रूटे ने हालांकि यूरोपीय देशों का बचाव करते हुए कहा कि कई देशों ने अमेरिका को महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक और रणनीतिक सहयोग प्रदान किया। रूटे ने बताया कि संघर्ष के दौरान यूरोप स्थित सैन्य अड्डों से हजारों अमेरिकी विमानों ने उड़ान भरी और अमेरिका को आवश्यक सैन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। उन्होंने कहा कि यूरोपीय सहयोग के बिना ऐसे बड़े अभियान को अंजाम देना आसान नहीं होता।

    बैठक के दौरान ट्रंप ने एक बार फिर नाटो सदस्य देशों पर रक्षा बजट बढ़ाने का दबाव बनाया। उन्होंने कहा कि कई देशों ने अपनी जीडीपी का पांच प्रतिशत रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र पर खर्च करने का वादा किया था लेकिन अधिकांश देश अब तक इस लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाए हैं। ट्रंप का कहना था कि अमेरिका लंबे समय से नाटो का सबसे बड़ा वित्तीय और सैन्य योगदानकर्ता रहा है जबकि अन्य देशों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

    हालांकि ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका की पहली अपेक्षा आर्थिक सहयोग नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है और उसे किसी के पैसों की जरूरत नहीं है। अमेरिका को अपने सहयोगियों से केवल वफादारी और भरोसेमंद साझेदारी चाहिए।

    ईरान को लेकर ट्रंप ने कहा कि तेहरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रगति देखने को मिल रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान कुछ बड़ी रियायतें देने को तैयार है। हालांकि ट्रंप ने साफ कर दिया कि किसी भी स्थिति में ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

    तुर्किए के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन को लेकर भी ट्रंप ने सकारात्मक टिप्पणी की और उन्हें अपना मित्र बताया। वहीं एफ-35 लड़ाकू विमान कार्यक्रम में तुर्किए की संभावित वापसी को लेकर अमेरिकी प्रशासन कानूनी प्रक्रियाओं की समीक्षा कर रहा है।

    यूक्रेन संकट पर पूछे गए सवाल के जवाब में ट्रंप ने राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की सराहना की और उन्हें साहसी नेता बताया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद जेलेंस्की मजबूती से डटे हुए हैं।

    अब 7 और 8 जुलाई को होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं जहां रक्षा खर्च बढ़ाने यूक्रेन को समर्थन जारी रखने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

  • चीन दौरे से पहले ट्रंप का बड़ा बयान, कहा- ईरान संकट सुलझाने में शी जिनपिंग की जरूरत नहीं

    चीन दौरे से पहले ट्रंप का बड़ा बयान, कहा- ईरान संकट सुलझाने में शी जिनपिंग की जरूरत नहीं

    नई दिल्ली । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज तीन दिवसीय चीन दौरे पर रवाना हो रहे हैं। इस यात्रा के दौरान उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कई अहम वैश्विक मुद्दों पर द्विपक्षीय बातचीत होगी। हालांकि बीजिंग रवाना होने से पहले ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान संकट को हल करने के लिए उन्हें शी जिनपिंग की किसी मदद की जरूरत नहीं है। ट्रंप ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि ईरान को अब सही रास्ता चुनना होगा, नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

    चीन दौरे पर हाई-प्रोफाइल डेलिगेशन
    13 से 15 मई तक चलने वाले इस दौरे में ट्रंप के साथ अमेरिका का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी चीन जा रहा है। इसमें उनके परिवार के सदस्य एरिक ट्रंप और लारा ट्रंप के अलावा कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। डेलिगेशन में विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी पीट हेगसेथ, और अन्य कूटनीतिक व सुरक्षा सलाहकार जैसे जेमीसन ग्रीर, स्टीफन मिलर, स्टीवन चेउंग, जेम्स ब्लेयर और अन्य प्रमुख नाम शामिल हैं।

    ईरान मुद्दा प्राथमिकता में नहीं
    रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि चीन में शी जिनपिंग के साथ उनकी बातचीत का मुख्य फोकस ईरान मुद्दा नहीं होगा, हालांकि इस पर चर्चा जरूर होगी। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हो चुकी है और किसी भी समझौते का उद्देश्य अमेरिका और ईरान दोनों देशों के हित में होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि “हम सिर्फ अच्छी डील करेंगे।”

    रूस-यूक्रेन युद्ध पर दावा
    ट्रंप ने यह भी दावा किया कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध जल्द ही समाप्त होने की दिशा में है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वैश्विक हालात में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि चीन दौरे के दौरान ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात से वैश्विक राजनीति और खासकर ईरान संकट पर क्या नई दिशा निकलती है।

  • तेहरान में फंसे बुजुर्ग सिख दंपति, भारत वापसी पर संकट: बीजेपी प्रवक्ता ने की अपील

    तेहरान में फंसे बुजुर्ग सिख दंपति, भारत वापसी पर संकट: बीजेपी प्रवक्ता ने की अपील


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान में फंसे भारतीयों की वापसी को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए विदेश मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है उन्होंने खास तौर पर तेहरान में फंसे बुजुर्ग सिख दंपतियों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है जो इस समय वहां के गुरुद्वारा साहिब में फंसे हुए हैं

    शेरगिल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए अपनी अपील में कहा कि ये सिख दंपति लंबे समय से भारत लौटने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन जरूरी अनुमति नहीं मिलने के कारण उनकी वापसी संभव नहीं हो पा रही है उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है ताकि इन परिवारों को सुरक्षित भारत लाया जा सके

    बताया जा रहा है कि ईरान से भारत के लिए महान एयरवेज की एक फ्लाइट 5 मई को संचालित होने वाली है लेकिन एयरलाइन ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना भारत सरकार की अनुमति के इन यात्रियों को साथ लाना संभव नहीं होगा यही कारण है कि यह मामला अब और गंभीर हो गया है और तत्काल समाधान की जरूरत महसूस की जा रही है

    दरअसल ईरान में हालिया हालात के चलते वहां का एयरस्पेस काफी समय तक बंद रहा था जिसकी वजह से कई लोग वहीं फंस गए थे हालांकि अब धीरे-धीरे उड़ानों का संचालन शुरू किया जा रहा है और अलग-अलग देशों के नागरिकों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया भी जारी है लेकिन कई मामलों में प्रशासनिक औपचारिकताओं के कारण देरी हो रही है

    इस बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच हाल ही में फोन पर बातचीत भी हुई है इस बातचीत में दोनों नेताओं ने मौजूदा हालात के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की और संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई इससे उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में फंसे भारतीयों की वापसी को लेकर कुछ सकारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं

    ईरानी दूतावास की ओर से भी इस बातचीत की पुष्टि की गई है जिसमें बताया गया कि दोनों देशों के बीच सीजफायर क्षेत्रीय हालात और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई है ऐसे में यह कूटनीतिक संवाद भी इस पूरे मामले में अहम भूमिका निभा सकता है

    गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है बल्कि आम नागरिकों की जिंदगी पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है खासकर वे लोग जो विदेश में फंसे हुए हैं उनके लिए हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं ऐसे में सरकारों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करें फिलहाल सभी की निगाहें भारत सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही कोई ठोस निर्णय लेकर इन फंसे हुए सिख परिवारों को राहत दी जाएगी

  • ईरान संकट का असर: केले के दाम धराशायी, 2 रुपये किलो तक पहुंचे, महाराष्ट्र के किसान संकट में

    ईरान संकट का असर: केले के दाम धराशायी, 2 रुपये किलो तक पहुंचे, महाराष्ट्र के किसान संकट में

    मुंबई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत के कृषि व्यापार पर भी साफ दिखने लगा है।
    खासतौर पर ईरान से जुड़े हालात और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते संकट ने महाराष्ट्र के केला उत्पादक किसानों की कमर तोड़ दी है। निर्यात ठप होने से बाजार में सप्लाई बढ़ गई है और कीमतें गिरकर बेहद निचले स्तर पर पहुंच गई हैं।

    निर्यात रुका, घरेलू बाजार में बढ़ा दबाव

    महाराष्ट्र के प्रमुख केला उत्पादक जिले जलगांव और सोलापुर इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। बेहतर मौसम और अच्छी बारिश के कारण इस बार उत्पादन अच्छा हुआ था, लेकिन खाड़ी देशों में जारी संकट के चलते निर्यात लगभग ठप पड़ गया।

    कोल्ड स्टोरेज में बड़ी मात्रा में केले फंसे हुए हैं और शिपमेंट रुकने से किसानों को मजबूरन माल घरेलू बाजार में उतारना पड़ रहा है।

    कीमतों में भारी गिरावट

    फरवरी तक केले के दाम 18 से 22 रुपये प्रति किलो के बीच थे, लेकिन हालात तेजी से बिगड़े।

    मार्च में कीमतें घटकर 8–10 रुपये प्रति किलो रह गईं
    अप्रैल के पहले हफ्ते में ये गिरकर सिर्फ 2–3 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गईं

    कीमतों में यह गिरावट तब और तेज हुई जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव बढ़ा और आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई।

    किसानों को भारी नुकसान

    सोलापुर जिले के करमाला क्षेत्र के एक किसान के मुताबिक, उन्होंने 10 एकड़ में केले की खेती पर करीब 20 लाख रुपये का निवेश किया था। फरवरी में जहां उन्हें 22 रुपये प्रति किलो तक भाव मिला, वहीं अब कीमतें 2–3 रुपये पर आ गई हैं।
    ऐसे में उन्हें कुल मिलाकर सिर्फ 2.5 से 3 लाख रुपये मिलने की उम्मीद है, यानी 17 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान झेलना पड़ सकता है।

    सालभर की फसल, जोखिम भी बड़ा

    केले की खेती अन्य फसलों की तरह मौसमी नहीं होती, बल्कि इसमें सालभर निवेश करना पड़ता है। ऐसे में कीमतों में अचानक गिरावट किसानों के लिए भारी संकट खड़ा कर देती है। लागत निकलना भी मुश्किल हो जाता है।

    सरकार से मदद की मांग

    निर्यात पर निर्भर किसान अब सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि

    मुआवजा दिया जाए
    नए निर्यात बाजार तलाशे जाएं
    खाड़ी देशों के विकल्प विकसित किए जाएं

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही निर्यात के रास्ते नहीं खुले, तो किसानों की आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है।

  • ईरान संकट के बीच MSME को री-फाइनेंस का प्रस्ताव… CII ने पेश किया 20 सूत्रीय एजेंडा

    ईरान संकट के बीच MSME को री-फाइनेंस का प्रस्ताव… CII ने पेश किया 20 सूत्रीय एजेंडा


    नई दिल्ली।
    ईरान संकट (Iran Crisis) का भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) से लेकर आम आदमी तक पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए उद्योग निकाय भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) (Industry body Confederation of Indian Industry – CII) ने रविवार को एक 20 सूत्रीय एजेंडा पेश किया। इसमें आरबीआई की ओर से सूक्ष्म, लघु एवं मझौले उद्यमों (एमएसएमई-MSME) और अन्य प्रभावित क्षेत्रों के लिए एक विशेष पुनर्वित्त (री-फाइनेंस) खिड़की स्थापित करना भी शामिल है। इससे बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को उत्पादक क्षेत्रों को उचित लागत पर कर्ज देना जारी रखने में मदद मिलेगी।

    उद्योग निकाय ने सुझाव दिया कि वित्त मंत्रालय कोविड महामारी के दौरान लागू की गई योजना की तर्ज पर एक समयबद्ध संघर्ष से जुड़ी आपातकालीन ऋण सुविधा गारंटी योजना (सीएल-ईसीएलजीएस) शुरू कर सकता है। इसकी मदद से एमएसएमई, निर्यातकों और गैस पर निर्भर क्षेत्रों को सरकारी गारंटी के जरिये कार्यशील पूंजी दी जा सकेगी।


    सीआईआई के एजेंडे में क्या-क्या?

    साथ ही, एमएसएमई के लिए तीन महीने तक ऋण स्थगन जैसे उपाय भी किए जा सकते हैं। सीआईआई ने अपने एजेंडे में कहा, बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता के दौरान प्राथमिक बाजारों में विदेशी पूंजी प्रवाह बनाए रखने के लिए वित्त मंत्रालय विदेशी निवेशकों को दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी) से अस्थायी छूट दे सकता है। इसके लिए पात्र होल्डिंग अवधि को दो से बढ़ाकर तीन साल किया जा सकता है।

    यह नपातुला प्रोत्साहन स्थिरता का संकेत देगा और धैर्यवान पूंजी को प्रोत्साहित करेगा। साथ ही, किसी भी तरह की उथल-पुथल के कारण पैदा होने वाली सुरक्षित ठिकाने की ओर भागने की भावना को कम करने में भी मदद करेगा। भारतीय उद्योग परिसंघ ने कहा, प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) मानदंडों पर पुनर्विचार किया जा सकता है, ताकि बैंक बाहरी व्यवधानों के दौरान क्षेत्र विशिष्ट तनाव के प्रति अधिक लचीले ढंग से प्रतिक्रिया दे सकें। अन्य सुझावों में बिजली शुल्कों में अस्थायी राहत, नकद ऋण सीमा में 20 फीसदी तक की वृद्धि और लोन प्रोसेसिंग शुल्क में छूट शामिल है। सीआईआई ने लंबित जीएसटी रिफंड और शुल्क वापसी दावों को तेजी से निपटाने का भी आग्रह किया।


    सभी भारतीय नाविक सुरक्षित

    अभी 17 भारतीय जहाज और 460 नाविक पश्चिमी फारस की खाड़ी में मौजूद हैं। इनमें सवार सभी नाविक सुरक्षित हैं। 1,479 से अधिक नाविक सुरक्षित वापस लाए गए हैं। 345 भारतीय मछुआरे ईरान से सुरक्षित लौट कर शनिवार को चेन्नई पहुंच गए। उड़ान सेवाएं धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं। 28 फरवरी से अब तक 7,02,000 से अधिक यात्री भारत लौट चुके हैं।

  • केन्द्र ने ईरान संकट से उपजी स्थिति से निपटने के लिए गठित किया मंत्रियों का अनौपचारिक समूह

    केन्द्र ने ईरान संकट से उपजी स्थिति से निपटने के लिए गठित किया मंत्रियों का अनौपचारिक समूह


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया संघर्ष (West Asia conflict) के कारण उत्पन्न मुद्दों पर गौर करने के लिए केंद्र सरकार (Central Government) ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) के नेतृत्व में मंत्रियों का एक ‘अनौपचारिक समूह’ (IGOM) गठित किया है। सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह, निर्मला सीतारमण और हरदीप सिंह पुरी मंत्रियों के अनौपचारिक समूह के सदस्यों में शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभाव से उत्पन्न होने वाले मुद्दों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।

    अमेरिका-इजरायल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर हमले के बाद तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र में जवाबी हमले किए। इसके बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज हो गया है। इस संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है, जिसमें तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हुई हैं और कीमतें बढ़ी हैं। इसका असर देश भर के नागरिकों के जीवन पर पड़ा है।


    पीएम ने मुख्यमंत्रियों संग की बैठक

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने शुक्रवार की शाम चुनावी राज्यों को छोड़कर बाकी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनजर तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा की। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, डिजिटल माध्यम से आयोजित इस बैठक का उद्देश्य ‘टीम इंडिया’ की भावना के तहत समन्वय सुनिश्चित करना था। प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद पहली बार मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की है।


    देश में तेल और गैस के पर्याप्त भंडार

    23 मार्च को लोकसभा में दिए गए बयान में प्रधानमंत्री ने कहा था कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उत्पन्न वैश्विक हालात लंबे समय तक बने रह सकते हैं और देश को एकजुट व तैयार रहने की जरूरत है, जैसे कोविड-19 महामारी के दौरान रहा था। वहीं, 24 मार्च को मोदी ने संघर्ष के संभावित दीर्घकालिक प्रभावों से निपटने के लिए सात अधिकार प्राप्त समूहों के गठन की घोषणा की और राज्यों से संकट को टालने के लिए एकजुट दृष्टिकोण के तहत केंद्र के साथ काम करने का आग्रह किया। इससे पहले बुधवार को सरकार ने पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई थी और देशवासियों को भरोसा दिया था कि देश में तेल और गैस के पर्याप्त भंडार हैं और घबराने की जरूरत नहीं है।

  • ईरान में युद्ध का कहर: तेहरान सहित देशभर में हमलों की संख्या 80,000 से ऊपर

    ईरान में युद्ध का कहर: तेहरान सहित देशभर में हमलों की संख्या 80,000 से ऊपर


    नई दिल्ली । ईरान के रेड क्रेसेंट सोसायटी के अध्यक्ष पीरहुसैन कोलिवंद ने एक बयान में कहा है कि युद्ध की शुरुआत के बाद से अमेरिका और इजरायल ने ईरान में 80 000 से अधिक नागरिक स्थलों पर हमला किया है। इन हमलों में अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन भी शामिल है। कोलिवंद ने बताया कि इनमें से 20 000 से अधिक हमले तेहरान में हुए हैं जबकि शेष 60 000 अन्य इलाकों में दर्ज किए गए हैं।

    उन्होंने कहा कि इन हमलों में करीब 18 790 व्यापारिक प्रतिष्ठान 266 मेडिकल सेंटर और 498 स्कूल निशाने पर रहे। हमलों में कम से कम 12 स्वास्थ्यकर्मी मारे गए और 90 से अधिक घायल हुए। युद्ध की शुरुआत से अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है जिनमें बच्चे और 231 महिलाएं भी शामिल हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस संघर्ष में अब तक 1 500 से अधिक लोग मारे गए हैं।

    इसी बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने देश के मध्य हवाई क्षेत्र में इजरायल के एफ-16 लड़ाकू विमान को निशाना बनाने का दावा किया है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार तेहरान की सेना ने तेल अवीव के पास बेन गुरियन एयरपोर्ट पर सैन्य विमानों के ईंधन टैंकों पर भी हमला किया।

    ईरान के खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता इब्राहिम ज़ोल्फ़ागरी ने चेतावनी दी कि यदि संयुक्त अरब अमीरात से दक्षिणी ईरानी द्वीपों पर हमले दोहराए गए तो रास अल-खैमाह पर भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर हमला उसी जगह पर जवाब देगा जहां से हमला हुआ।

    28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर तेहरान और ईरान के कई अन्य शहरों पर हमला किया था। इस हमले में ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और आम नागरिक मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।

    इन घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक तेल और ऊर्जा बाजार पर भी गहरा प्रभाव डाला है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस पर चिंता व्यक्त की है और युद्ध की तत्काल समाप्ति की आवश्यकता को रेखांकित किया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश अपने नागरिकों और संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई का जवाब देगा।

    इस संघर्ष ने न केवल क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित किया है बल्कि वैश्विक मानवाधिकार और युद्ध कानून की स्थितियों को भी चुनौती दी है। नागरिक इलाकों स्वास्थ्य केंद्रों और स्कूलों पर हमले ने एक मानवीय संकट को जन्म दिया है जिसे तत्काल अंतरराष्ट्रीय ध्यान की आवश्यकता है।

  • भारत ने दुनिया में तेल की कीमतें स्थिर रखने में अमेरिका के लिए निभाई अहम भूमिका: राजदूत सर्जियो गोर

    भारत ने दुनिया में तेल की कीमतें स्थिर रखने में अमेरिका के लिए निभाई अहम भूमिका: राजदूत सर्जियो गोर


    नई दिल्ली । अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में भारत की वैश्विक ऊर्जा बाजार में भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में तेल की कीमतें स्थिर रखने में अमेरिका का बहुत बड़ा साथी रहा है। गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह बात साझा करते हुए विशेष रूप से भारत की रूस से लगातार तेल खरीद को वैश्विक ऊर्जा स्थिरता के लिए जरूरी बताया।

    राजदूत गोर ने लिखा भारत तेल के सबसे बड़े कंज्यूमर और रिफाइनर में से एक है। अमेरिका और भारत के लिए मार्केट में स्थिरता लाने के लिए मिलकर काम करना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार भारत की नीति न केवल घरेलू स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी गहरा असर डालती है।

    यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक तेल बाजार में ईरान संकट के चलते भारी अस्थिरता देखी जा रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संभावित बंदी की वजह से तेल आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है और कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में भारत की सक्रिय भूमिका और रूस से तेल खरीद की नीति को अमेरिका ने विशेष महत्व दिया है।

    व्हाइट हाउस ने पहले ही प्रेस बयान में कहा था कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए तत्कालीन छूट दी थी। प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने स्पष्ट किया कि यह फैसला राष्ट्रपति ट्रेजरी विभाग और नेशनल सिक्योरिटी टीम के संयुक्त विचार-विमर्श के बाद लिया गया। लेविट के अनुसार भारत में हमारे सहयोगी अच्छे रहे हैं और वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया।

    उन्होंने बताया कि ईरान संकट के कारण दुनिया भर में तेल सप्लाई में पैदा हुए अस्थायी अंतर को कम करने के मकसद से यह तत्कालीन उपाय किया गया। छूट मिलने से पहले ही भारत को शिपमेंट भेज दिए गए थे। व्हाइट हाउस का मानना है कि इस व्यवस्था से मास्को को आर्थिक रूप से कोई खास लाभ नहीं होगा।

    विश्लेषकों का कहना है कि भारत का यह कदम न केवल घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करता है बल्कि वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता लाने में भी मददगार साबित होता है। भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल कंज्यूमर और रिफाइनर है। ऐसे में देश की नीति और तेल खरीद की रणनीति वैश्विक स्तर पर भावनाओं और कीमतों को प्रभावित करती है।

    इस पूरे परिप्रेक्ष्य में अमेरिका और भारत के बीच ऊर्जा सहयोग की नई चुनौतियों और अवसरों का संकेत मिलता है। वैश्विक तेल बाजार की अस्थिरता और ईरान-संबंधी संकट के बीच भारत की भूमिका और रणनीतिक महत्व बढ़ गया है। राजदूत गोर के बयान से यह भी साफ होता है कि अमेरिका भारत को एक भरोसेमंद और सक्रिय साझेदार के रूप में देखता है जो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

  • ईरान में हालात बेकाबू, ढाई हजार से ज्यादा मौतें, भारत ने नागरिकों से तुरंत देश छोड़ने की अपील

    ईरान में हालात बेकाबू, ढाई हजार से ज्यादा मौतें, भारत ने नागरिकों से तुरंत देश छोड़ने की अपील


    नई दिल्ली। ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने देश को गहरे संकट में धकेल दिया है। हालात लगातार बेकाबू होते जा रहे हैं और अब तक 2,571 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। सख्त कार्रवाई, गिरफ्तारियों और बढ़ती हिंसा के बीच आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए कड़ी एडवाइजरी जारी करते हुए ईरान तुरंत छोड़ने की अपील की है।
    ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने साफ शब्दों में कहा है कि देश में रह रहे सभी भारतीय नागरिकपर्यटक, छात्र, कारोबारी और PIO (पर्सन ऑफ इंडियन ओरिजिन)उपलब्ध कमर्शियल फ्लाइट्स या सुरक्षित परिवहन के किसी भी माध्यम से जल्द से जल्द ईरान से बाहर निकलें। दूतावास ने स्पष्ट किया कि यह फैसला तेजी से बिगड़ते सुरक्षा हालात और अनिश्चित स्थिति को ध्यान में रखकर लिया गया है।

    भारतीय दूतावास ने ईरान में मौजूद नागरिकों को विरोध प्रदर्शनों, धरनों और भीड़भाड़ वाले इलाकों से पूरी तरह दूर रहने की सख्त सलाह दी है।

    साथ ही कहा गया है कि सभी भारतीय नागरिक दूतावास के नियमित संपर्क में रहें और स्थानीय मीडिया व आधिकारिक घोषणाओं पर नजर बनाए रखें, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके।

    एडवाइजरी में यह भी निर्देश दिया गया है कि सभी भारतीय नागरिक अपने जरूरी दस्तावेजपासपोर्ट, वीजा, पहचान पत्र और अन्य इमिग्रेशन पेपर्सहमेशा तैयार और सुरक्षित रखें। किसी भी तरह की सहायता, जानकारी या आपात स्थिति में भारतीय दूतावास से तत्काल संपर्क करने को कहा गया है।

    इस बीच, अमेरिका स्थित मानवाधिकार संस्था ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी’ ने हालात को और भी चिंताजनक बताया है। संस्था के मुताबिक, अब तक मारे गए 2,571 लोगों में से 2,403 प्रदर्शनकारी हैं, जबकि 147 सरकारी कर्मी भी हिंसा में जान गंवा चुके हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि मृतकों में 12 बच्चे और 9 ऐसे आम नागरिक शामिल हैं, जो किसी भी प्रदर्शन में शामिल नहीं थे।