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  • Iran-US Deal में नया पेंच: ‘संवर्धित यूरेनियम नहीं सौंपेंगे’, तेहरान ने परमाणु मुद्दे पर झुकने से किया इनकार

    Iran-US Deal में नया पेंच: ‘संवर्धित यूरेनियम नहीं सौंपेंगे’, तेहरान ने परमाणु मुद्दे पर झुकने से किया इनकार



    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच नया विवाद सामने आ गया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (Highly Enriched Uranium) के भंडार को किसी भी देश को नहीं सौंपेगा। तेहरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम मौजूदा प्रारंभिक समझौते का हिस्सा नहीं है।

    एक  रिपोर्ट के मुताबिक एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने कहा कि अमेरिका के साथ अभी जो बातचीत चल रही है, उसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव और युद्ध जैसी स्थिति को खत्म करना है, न कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम फैसला लेना। सूत्र ने कहा कि परमाणु मुद्दे पर चर्चा आगे होने वाली औपचारिक वार्ताओं में की जाएगी।

    इससे कुछ घंटे पहले अमेरिकी मीडिया, खासकर न्यूयॉर्क टाइम्स में दावा किया गया था कि ईरान अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को छोड़ने के लिए सैद्धांतिक रूप से तैयार हो गया है। रिपोर्ट में दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया था कि दोनों देशों के बीच समझौते का ढांचा लगभग तैयार है और अब तकनीकी प्रक्रियाओं पर बातचीत होनी बाकी है।

    हालांकि ईरान ने इन रिपोर्टों को पूरी तरह सही मानने से इनकार कर दिया। ईरानी मीडिया और सरकारी सूत्रों का कहना है कि फिलहाल बातचीत का फोकस होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य जहाजरानी बहाल करना और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत हासिल करना है।

    ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम के अनुसार संभावित समझौते में यह प्रस्ताव शामिल है कि 30 दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही युद्ध-पूर्व स्तर पर वापस लाई जाएगी। इसके बदले अमेरिका ईरानी तेल पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में राहत दे सकता है।

    इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते का “फ्रेमवर्क” तैयार हो चुका है। ट्रंप के मुताबिक इस डील का मकसद दोनों देशों के बीच तनाव कम करना और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करना है।

    फिलहाल दोनों देशों के बयानों में अंतर साफ दिखाई दे रहा है। जहां अमेरिका इसे परमाणु समझौते की दिशा में बड़ी प्रगति बता रहा है, वहीं ईरान लगातार यह संकेत दे रहा है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है।

  • पश्चिम एशिया जंग के बीच अमेरिका ने रूस को दी चेतावनी, ईरान संघर्ष से दूर रहने को कहा

    पश्चिम एशिया जंग के बीच अमेरिका ने रूस को दी चेतावनी, ईरान संघर्ष से दूर रहने को कहा


    वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच अमेरिका ने रूस को साफ संदेश दिया है कि वह ईरान से जुड़े संघर्ष में दखल न दे। अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने पेंटागन में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई फोन बातचीत में इस मुद्दे पर स्पष्ट बातें हुई हैं। अमेरिका का मानना है कि मौजूदा संघर्ष को और बढ़ने से रोकना जरूरी है और रूस को इसमें शामिल नहीं होना चाहिए।

    ट्रंप-पुतिन की बातचीत में पश्चिम एशिया का जिक्र
    रूस के राष्ट्रपति के सलाहकार यूरी उशाकोव के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच नौ मार्च को फोन पर बातचीत हुई थी। इस दौरान ईरान के आसपास बढ़ते संघर्ष और सुरक्षा हालात पर चर्चा हुई। पुतिन ने कहा कि इस संकट का हल केवल राजनीतिक और कूटनीतिक तरीके से ही निकाला जा सकता है। वहीं ट्रंप ने इस्राइल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई पर अपनी स्थिति स्पष्ट की और युद्ध की वर्तमान स्थिति पर अपनी राय साझा की।

    ईरान के नए सुप्रीम लीडर को चेतावनी
    अमेरिकी युद्ध सचिव ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई को भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, क्योंकि ऐसा करने पर हालात और खतरनाक हो सकते हैं। अमेरिका ने यह भी दोहराया कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगातार नजर रखे हुए है।

    मिनाब स्कूल हमले की जांच का आश्वासन
    ईरान के मिनाब शहर में एक प्राथमिक स्कूल पर हुए मिसाइल हमले में कम से कम 168 बच्चों की मौत हो गई। इस पर अमेरिका ने कहा कि घटना की पूरी जांच की जाएगी। पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिकी सैन्य अभियानों में नागरिकों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है और हर हमले की समीक्षा होती है।

    हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा रणनीति
    पेंटागन के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने कहा कि अमेरिका हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विचार कर रहा है। यह क्षेत्र विश्व के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। जरूरत पड़ने पर अमेरिकी सेना जहाजों को सुरक्षा देने के लिए एस्कॉर्ट मिशन भी चला सकती है। पेंटागन ने कहा कि लड़ाकू विमानों, बमवर्षकों और मिसाइल हमलों की संख्या बढ़ाई जा रही है और जब तक निर्धारित लक्ष्य पूरे नहीं होते, सैन्य अभियान जारी रहेगा।

  • ईरान पर हमला क्यों था जरूरी? इजरायली पीएम बोले– खतरा बढ़ने से पहले लिया एक्शन

    ईरान पर हमला क्यों था जरूरी? इजरायली पीएम बोले– खतरा बढ़ने से पहले लिया एक्शन


    नई दिल्ली। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ हालिया सैन्य कार्रवाई को “जरूरी और समयबद्ध” बताते हुए कहा कि अगर अभी कदम नहीं उठाया जाता, तो भविष्य में कार्रवाई करना लगभग असंभव हो जाता। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि ईरान जानबूझकर आम नागरिकों को निशाना बना रहा है, जबकि इजरायल और अमेरिका “आतंकियों” पर फोकस कर रहे हैं।

    बैलिस्टिक मिसाइलों पर तीखी टिप्पणी
    नेतन्याहू ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों को बेहद खतरनाक बताते हुए कहा कि ऐसी मिसाइल “टीएनटी से भरी बस की तरह होती है, जो मैक 8 की रफ्तार से आकर गिरती है।”

    उन्होंने दावा किया कि हालिया हमलों में नौ लोगों की जान गई और कहा:
    “यही तेहरान और हमारे बीच फर्क है। तेहरान के सामूहिक हत्यारे नागरिकों को निशाना बनाते हैं, जबकि इजरायल और अमेरिका आतंकियों को निशाना बनाते हैं।”

    “परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम रोकना जरूरी था”
    नेतन्याहू के मुताबिक, इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर पहले भी प्रहार किया था, लेकिन तेहरान ने अपनी सैन्य क्षमताओं को आगे बढ़ाना जारी रखा। उनका दावा है कि ईरान नए भूमिगत ठिकाने बना रहा था, जिससे उसका परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम भविष्य की सैन्य कार्रवाई से सुरक्षित हो सकता था।

    उन्होंने कहा,
    “अगर हम अभी कार्रवाई नहीं करते, तो भविष्य में ईरान को रोकना संभव नहीं होता। वह अमेरिका को निशाना बना सकता था, ब्लैकमेल कर सकता था और हमें व अन्य देशों को धमका सकता था।”

    ट्रंप की सराहना
    नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाई के लिए “पक्के इरादों वाले राष्ट्रपति” की जरूरत थी। उन्होंने कहा, हमारा गठबंधन आज बेहद मजबूत है। हमें अभी कार्रवाई करनी थी और हमने की।”

    बढ़ता क्षेत्रीय तनाव
    ईरान पर हमले और उसके बाद जवाबी कार्रवाइयों के चलते पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। इजरायल का कहना है कि यह कदम आत्मरक्षा और वैश्विक सुरक्षा के लिए जरूरी था, जबकि तेहरान इसे आक्रामक और गैरकानूनी कार्रवाई बता रहा है।

  • ओमान में बातचीत खत्म होते ही अमेरिका का ईरान पर नए तेल प्रतिबंधों का ऐलान, तेहरान सकते में

    ओमान में बातचीत खत्म होते ही अमेरिका का ईरान पर नए तेल प्रतिबंधों का ऐलान, तेहरान सकते में


    वॉशिंगटन। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच ओमान की राजधानी मस्कट में हुई अप्रत्यक्ष बातचीत खत्म होने के तुरंत बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नए तेल प्रतिबंधों की घोषणा कर दी। इन प्रतिबंधों का मकसद ईरान के तेल निर्यात को और सीमित करना बताया गया है, और इसके बाद तेहरान सकते में है।

    अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के अवैध तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात को रोकने के लिए अधिकतम दबाव की नीति पर कायम हैं। अमेरिका ने 14 जहाजों को निशाना बनाया है, जिन पर ईरानी तेल ढोने का आरोप है। इनमें तुर्की, भारत और यूएई के झंडे वाले जहाज भी शामिल हैं। इसके अलावा 15 कंपनियों और 2 व्यक्तियों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। अब इन जहाजों और संस्थाओं से जुड़े कोई भी लेन-देन अमेरिका में अवैध माना जाएगा।

    ट्रंप नीति जारी
    अमेरिका पहले भी ईरान पर इसी तरह के प्रतिबंध लगाता रहा है। इनका उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाकर उसे अपने परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों में बदलाव के लिए मजबूर करना है। दिलचस्प बात यह है कि यह घोषणा ऐसे समय हुई जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ओमान में बातचीत का माहौल सकारात्मक था। बावजूद इसके अमेरिका ने दबाव की नीति में कोई ढील नहीं दी।

    तनाव की पृष्ठभूमि
    ओमान में बातचीत के समय ईरान में हाल के वर्षों की सबसे बड़ी जन-आंदोलन जैसी घटनाओं को सरकार ने बलपूर्वक दबाया है। अमेरिका ने ईरान के तटों के पास अपनी सैन्य मौजूदगी भी बढ़ाई है और राष्ट्रपति ट्रंप ने बल प्रयोग की चेतावनी दी है। विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका की रणनीति साफ संकेत देती है कि वह कूटनीतिक बातचीत जारी रखते हुए आर्थिक और सैन्य दबाव के जरिए ईरान को झुकाने की कोशिश कर रहा है।