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  • ईरान में हालात बेकाबू, ढाई हजार से ज्यादा मौतें, भारत ने नागरिकों से तुरंत देश छोड़ने की अपील

    ईरान में हालात बेकाबू, ढाई हजार से ज्यादा मौतें, भारत ने नागरिकों से तुरंत देश छोड़ने की अपील


    नई दिल्ली। ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने देश को गहरे संकट में धकेल दिया है। हालात लगातार बेकाबू होते जा रहे हैं और अब तक 2,571 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। सख्त कार्रवाई, गिरफ्तारियों और बढ़ती हिंसा के बीच आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए कड़ी एडवाइजरी जारी करते हुए ईरान तुरंत छोड़ने की अपील की है।
    ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने साफ शब्दों में कहा है कि देश में रह रहे सभी भारतीय नागरिकपर्यटक, छात्र, कारोबारी और PIO (पर्सन ऑफ इंडियन ओरिजिन)उपलब्ध कमर्शियल फ्लाइट्स या सुरक्षित परिवहन के किसी भी माध्यम से जल्द से जल्द ईरान से बाहर निकलें। दूतावास ने स्पष्ट किया कि यह फैसला तेजी से बिगड़ते सुरक्षा हालात और अनिश्चित स्थिति को ध्यान में रखकर लिया गया है।

    भारतीय दूतावास ने ईरान में मौजूद नागरिकों को विरोध प्रदर्शनों, धरनों और भीड़भाड़ वाले इलाकों से पूरी तरह दूर रहने की सख्त सलाह दी है।

    साथ ही कहा गया है कि सभी भारतीय नागरिक दूतावास के नियमित संपर्क में रहें और स्थानीय मीडिया व आधिकारिक घोषणाओं पर नजर बनाए रखें, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके।

    एडवाइजरी में यह भी निर्देश दिया गया है कि सभी भारतीय नागरिक अपने जरूरी दस्तावेजपासपोर्ट, वीजा, पहचान पत्र और अन्य इमिग्रेशन पेपर्सहमेशा तैयार और सुरक्षित रखें। किसी भी तरह की सहायता, जानकारी या आपात स्थिति में भारतीय दूतावास से तत्काल संपर्क करने को कहा गया है।

    इस बीच, अमेरिका स्थित मानवाधिकार संस्था ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी’ ने हालात को और भी चिंताजनक बताया है। संस्था के मुताबिक, अब तक मारे गए 2,571 लोगों में से 2,403 प्रदर्शनकारी हैं, जबकि 147 सरकारी कर्मी भी हिंसा में जान गंवा चुके हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि मृतकों में 12 बच्चे और 9 ऐसे आम नागरिक शामिल हैं, जो किसी भी प्रदर्शन में शामिल नहीं थे।

  • ईरान में गुस्सा: ‘ट्रंप के हाथ ईरानियों के खून से सने’, विरोध प्रदर्शन तेज

    ईरान में गुस्सा: ‘ट्रंप के हाथ ईरानियों के खून से सने’, विरोध प्रदर्शन तेज

    ईरान | ईरान में महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ शुरू हुआ प्रदर्शन अब सीधे सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की सत्ता को चुनौती देने वाले आंदोलन में बदल गया है। विरोध प्रदर्शन में हजारों लोग सड़कों पर उतरकर ईरान के निर्वासित विपक्षी नेता रजा पहलवी के समर्थन में नारे लगा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने देश की सत्ता क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को सौंपने की मांग की।

    सरकारी बयान और अमेरिका-इजरायल पर आरोप

    ईरान के सरकारी टीवी ने पहली बार विरोध प्रदर्शनों को दिखाया और दावा किया कि अमेरिका और इजरायल के ‘आतंकवादी एजेंटों’ ने माहौल बिगाड़ा है। आयतुल्ला अली खामेनेई ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ दंगाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए तोड़फोड़ कर रहे थे। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान विदेशियों के भाड़े के सैनिकों को बर्दाश्त नहीं करेगा।

    खामेनेई का विरोधकारियों और अमेरिका पर बयान

    खामेनेई ने कहा, “लाखों कुर्बानियों के बाद हम सत्ता में आए हैं और इतनी आसानी से झुकने वाले नहीं हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के हाथ हजारों ईरानियों के खून से सने हैं। ईरान के युवाओं को एकता बनाए रखनी होगी।” उन्होंने जून 2025 में ईरान के परमाणु संयंत्रों पर अमेरिकी हमले का भी जिक्र किया। इस दौरान भीड़ ने अमेरिका मुर्दाबाद के नारे लगाए।

    रजा पहलवी का आह्वान और हिंसा की झलक

    निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने सोशल मीडिया पोस्ट में ईरान के लोगों से आह्वान किया कि वे सड़कों पर उतरें, क्योंकि पूरी दुनिया की निगाहें ईरान पर हैं। सरकारी टीवी पर मेट्रो स्टेशनों और बैंकों में आग, जलती हुई बसें और कारें दिखाई गईं। ईरानी मीडिया ने पीपुल्स मुजाहिदीन ऑर्गनाइजेशन (एमकेओ) पर इस अशांति का आरोप लगाया, जो 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद अलग हुआ एक विपक्षी गुट है।

    इंटरनेट और संचार बाधित

    गुरुवार, 8 जनवरी 2026 की रात ईरान सरकार ने इंटरनेट और टेलीफोन लाइनें काट दीं। इंटरनेट कंपनियों क्लाउडफ्लेयर और नेटब्लॉक्स ने इसे रिपोर्ट किया और कहा कि इसका कारण ईरान सरकार का हस्तक्षेप था। इससे पूरे देश में विरोध प्रदर्शन की जानकारी और संचार बाधित हो गया।

    परिस्थितियों का अंतरराष्ट्रीय असर

    महंगाई विरोध से शुरू हुए आंदोलन का असर राजनीतिक अस्थिरता और सरकार की जवाबदेही पर पड़ रहा है। खामेनेई और अमेरिका-इजरायल के बीच आरोप-प्रत्यारोप, देश में इंटरनेट ब्लैकआउट और रजा पहलवी का आह्वान ईरान की आंतरिक स्थिति को और नाजुक बना रहे हैं। विरोध प्रदर्शन ने केवल आर्थिक मुद्दों को नहीं, बल्कि राजनीतिक और सुरक्षा के गंभीर पहलुओं को भी उजागर किया है।