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  • ईरान संकट: खामेनेई की मौत के बीच भोपाल में शिया समुदाय ने दी श्रद्धांजलि, जोहर नमाज़ के बाद विशेष कार्यक्रम

    ईरान संकट: खामेनेई की मौत के बीच भोपाल में शिया समुदाय ने दी श्रद्धांजलि, जोहर नमाज़ के बाद विशेष कार्यक्रम


    भोपाल। भोपाल के शिया समुदाय ने आज शिया मस्जिद में जोहर की नमाज़ के बाद सम्मान और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़े पैमाने पर लोगों ने भाग लिया। इस सभा में ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उनके जीवन, संघर्ष और योगदान पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम शांतिपूर्वक आयोजित किया गया और आयोजकों ने समुदाय के लोगों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की।

    क्या हुआ — घटना और पुष्टि:
    28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों और राज्य‑स्तरीय घोषणाओं में आ चुकी है। संयुक्त आक्रमण में कई वरिष्ठ अधिकारियों व सैन्य नेतृत्व को भी निशाना बनाया गया था। ईरानी सरकारी मीडिया ने खामेनेई की मौत की पुष्टि की और 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है।

    खामेनेई का राजनीतिक व धार्मिक सफर
    खामेनेई ने 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद तेजी से राजनीतिक उभरते हुए नेतृत्व में खुद को स्थापित किया।
    1981‑88 के दौरान उन्होंने राजनीतिक भूमिकाएँ निभाईं और 1989 में ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) बने।
    इस पद पर रहते हुए उन्होंने देश की राजनीतिक, सैन्य और धार्मिक नीतियों को 35 से अधिक वर्षों तक नियंत्रित किया।
    ईरानी शासन व्यवस्था के मुताबिक सुप्रीम लीडर के पद के लिए ‘अयातुल्ला’ का धार्मिक दर्जा आवश्यक है, जो बताता है कि यह पद सिर्फ एक उच्च धार्मिक नेता को ही मिल सकता है।

    अमेरिका और इजरायल का संघर्ष
    अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर पिछले कुछ महीनों से लगातार दबाव बनाया था, विशेष रूप से परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइल विकास और मध्य पूर्व में प्रभाव विस्तार के मद्देनजर। ईरान पर यह हमला उस तनाव का हिस्सा माना जा रहा है जिसने क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

    क्या आगे हो सकता है?
    खामेनेई की मौत न केवल ईरान की आंतरिक राजनीति में विघटन का संकेत है, बल्कि इससे मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव भी आने की आशंका जताई जा रही है। संभावित नेतृत्व संकट और विद्रोही आंदोलन दोनों ही इस क्षेत्र में बढ़ सकती हैं।

  • खामेनेई के निधन के बाद ईरान में सत्ता संकट, सेना में भ्रम; नए सुप्रीम लीडर की जल्द नियुक्ति की मांग तेज

    खामेनेई के निधन के बाद ईरान में सत्ता संकट, सेना में भ्रम; नए सुप्रीम लीडर की जल्द नियुक्ति की मांग तेज

    नई दिल्ली । ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के निधन की पुष्टि के बाद देश की सत्ता और सैन्य ढांचे में गहरा संकट उभर आया है। ईरानी मीडिया में आई खबरों के अनुसार खामेनेई के 47 साल लंबे प्रभावशाली नेतृत्व का अंत होते ही इस्लामिक गणतंत्र की चेन ऑफ कमांड में अस्थिरता और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। अब सत्ता के शीर्ष पद पर नए नेतृत्व की नियुक्ति को लेकर अंदरूनी हलचल तेज हो गई है।

    रिपोर्टों के मुताबिक इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स ने नए सुप्रीम लीडर के चयन की प्रक्रिया को तेज करने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। सूत्रों का दावा है कि IRGC कानूनी प्रक्रिया से हटकर जल्द से जल्द नए नेता को तख्त पर बैठाने के पक्ष में है। सामान्यतः सुप्रीम लीडर का चुनाव संवैधानिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स द्वारा किया जाता है लेकिन जारी हवाई हमलों और अस्थिर सुरक्षा हालात के कारण उसका सत्र बुलाना मुश्किल बताया जा रहा है।

    बताया जा रहा है कि IRGC का बचा हुआ कमांड ढांचा 1 मार्च की सुबह तक नए नेतृत्व पर अंतिम निर्णय चाहता है। सूत्रों का कहना है कि खामेनेई की मौत के बाद सुरक्षा और सैन्य तंत्र में तालमेल की कमी साफ दिख रही है। आदेशों के प्रवाह में बाधा आ रही है और कुछ हिस्सों में कमांड संरचना लगभग बिखर गई है। इससे संकट प्रबंधन और जमीनी स्तर पर फैसले लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

    रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि कुछ सैन्य कमांडर और निचले रैंक के कर्मी अपने बेस पर रिपोर्ट नहीं कर रहे हैं। इस स्थिति ने IRGC की चिंता और बढ़ा दी है। आशंका जताई जा रही है कि रविवार सुबह तक देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग सड़कों पर उतर सकते हैं और विरोध प्रदर्शनों का नया दौर शुरू हो सकता है। राजनीतिक अनिश्चितता और संभावित जन असंतोष ने हालात को और जटिल बना दिया है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ईरान पर हालिया हमले विफल कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम थे। अधिकारी के अनुसार अमेरिका ने ईरान को स्थायी रूप से मुफ्त परमाणु ईंधन देने की पेशकश की थी लेकिन तेहरान ने यूरेनियम संवर्धन की अपनी क्षमता छोड़ने से इनकार कर दिया। अमेरिका इसे परमाणु हथियार विकसित करने की संभावित कोशिश के रूप में देखता रहा है। साथ ही ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय उग्रवादी समूहों के समर्थन जैसे मुद्दों पर भी बातचीत से दूरी बनाए रखी।

    खामेनेई की मौत ऐसे समय में हुई है जब ईरान पहले से ही बाहरी सैन्य दबाव और आंतरिक असंतोष का सामना कर रहा है। नेतृत्व का यह खालीपन न केवल राजनीतिक बल्कि सैन्य और वैचारिक स्तर पर भी बड़ा बदलाव ला सकता है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि क्या ईरान संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नया सुप्रीम लीडर चुनेगा या IRGC के दबाव में कोई त्वरित और असाधारण फैसला लिया जाएगा।