Tag: Iran Tension

  • अरब सागर में तनाव चरम पर ब्रिटेन की न्यूक्लियर पनडुब्बी से ईरान पर बढ़ा दबाव और युद्ध की आहट

    अरब सागर में तनाव चरम पर ब्रिटेन की न्यूक्लियर पनडुब्बी से ईरान पर बढ़ा दबाव और युद्ध की आहट


    नई दिल्ली: 
    अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है और इस टकराव में अब ब्रिटेन की एंट्री ने हालात को और गंभीर बना दिया है अरब सागर के नजदीक ईरान के आसपास ब्रिटेन की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी HMS Anson की तैनाती ने साफ संकेत दे दिया है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो संघर्ष का दायरा वैश्विक स्तर तक पहुंच सकता है यह तैनाती सिर्फ एक सैन्य कदम नहीं बल्कि एक रणनीतिक संदेश के रूप में देखी जा रही है

    रिपोर्ट्स के अनुसार यह पनडुब्बी ऑस्ट्रेलिया के पर्थ से रवाना होकर अब उत्तरी अरब सागर के गहरे पानी में अपनी स्थिति बना चुकी है इसकी सबसे बड़ी ताकत इसके हथियार हैं जिनमें टॉमहॉक ब्लॉक IV क्रूज मिसाइल शामिल हैं जिनकी मारक क्षमता लगभग 1600 किलोमीटर तक है यह मिसाइलें बेहद सटीक मानी जाती हैं और इन्हें दूर बैठे लक्ष्य को निशाना बनाने के लिए जाना जाता है इसके अलावा इस पनडुब्बी में स्पीयरफिश टॉरपीडो भी मौजूद हैं जो समुद्री युद्ध में बेहद घातक साबित हो सकते हैं

    HMS Anson की सबसे बड़ी खासियत इसकी परमाणु ऊर्जा प्रणाली है जिससे यह बिना रुके महीनों तक समुद्र में रह सकती है इसे बार बार ईंधन भरने की जरूरत नहीं पड़ती और यह पूरी तरह गुप्त तरीके से काम करती है इसकी लोकेशन का पता लगाना बेहद मुश्किल होता है क्योंकि यह साइलेंट मोड में रहकर ऑपरेशन करती है और दुश्मन के लिए यह एक अदृश्य खतरे की तरह होती है

    इस तैनाती का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि इससे पहले ईरान ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे को निशाना बनाने की कोशिश की थी जो अमेरिका और ब्रिटेन का संयुक्त बेस है हालांकि इस हमले में ईरान की मिसाइलें लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकीं लेकिन इस घटना ने तनाव को और बढ़ा दिया है और यह संकेत दिया है कि ईरान अपनी सैन्य क्षमता को और मजबूत कर रहा है

    ब्रिटेन ने पहले अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों का उपयोग करने की अनुमति दी थी जो पहले केवल रक्षात्मक कार्यों तक सीमित थी लेकिन अब इस अनुमति का दायरा बढ़ा दिया गया है जिससे यह स्पष्ट होता है कि अगर जरूरत पड़ी तो ब्रिटेन भी आक्रामक भूमिका में आ सकता है इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका और ब्रिटेन दोनों एक साथ ईरान पर दबाव बनाते नजर आ रहे हैं

    सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि HMS Anson की तैनाती एक रणनीतिक संदेश है और यह संकेत देती है कि पश्चिमी देश किसी भी संभावित खतरे के लिए तैयार हैं अंतिम निर्णय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की मंजूरी के बाद लिया जाएगा और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी

    इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है और यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह तनाव आगे जाकर एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है या फिर कूटनीति के जरिए स्थिति को नियंत्रित किया जाएगा आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होगी लेकिन फिलहाल हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं

    शॉर्ट डिस्क्रिप्शन
    अरब सागर में ब्रिटेन की न्यूक्लियर पनडुब्बी की तैनाती से ईरान के खिलाफ तनाव बढ़ा, डिएगो गार्सिया हमले के बाद हालात और गंभीर

    Tags
    Iran Tension, UK Navy, Nuclear Submarine, Middle East Conflict, Global War Risk

  • ईरान पर दबाव बढ़ाने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भेजा सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर

    ईरान पर दबाव बढ़ाने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भेजा सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर

    नई दिल्ली। ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को स्पष्ट कर दिया कि वह अपने सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड को पूरी टीम के साथ मध्य एशिया की ओर भेज रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम को लेकर मतभेद अभी भी कायम हैं।

    यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड की तैनाती
    ट्रंप ने कहा कि एयरक्राफ्ट कैरियर को जल्द ही रवाना किया जाएगा और यदि ईरान के साथ समझौता नहीं होता है तो इसकी आवश्यकता पड़ेगी। इसके साथ ही यूएसएस अब्राहम लिंकन को भी भेजा गया है, जो पहले से अरब सागर में गाइडेड मिसाइलों के साथ तैनात है। पिछले सप्ताह इसी युद्धपोत ने ईरानी ड्रोन को निशाना बनाकर मार गिराया था।

    ईरान में विरोध और बढ़ता तनाव
    ईरान में हाल के विरोध प्रदर्शनों और उन्हें दबाने के लिए आयातुल्ला खामेनेई के कदमों के बाद अमेरिका-ईरान संबंध और तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिकी शर्तों का पालन नहीं करता है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

    दबाव बढ़ाने की रणनीति
    यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड, जो पहले वेनेजुएला अभियान पर था, अब सीधे मध्य एशिया की ओर भेजा गया है। दोनों देशों के बीच ओमान में हुई बातचीत के बावजूद कोई ठोस समझौता नहीं हुआ। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच वाशिंगटन की सैन्य क्षमता दिखाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि दो विमानवाहक पोतों की एक साथ मौजूदगी अमेरिका की नौसैनिक ताकत को अभूतपूर्व रूप से बढ़ाएगी और ईरान पर कूटनीतिक और सैन्य दबाव मजबूत करेगी। इस तैनाती में गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक और निगरानी विमान भी शामिल हैं।