Tag: Iran Threat

  • ईरान को कड़ा संदेश देने निकला अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल, कई देशों में सुरक्षा सहयोग पर जोर

    ईरान को कड़ा संदेश देने निकला अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल, कई देशों में सुरक्षा सहयोग पर जोर

    नई दिल्ली । वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच अमेरिकी कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात, थाईलैंड और फिलीपींस का दौरा कर क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अमेरिकी सांसद जोश गॉटहाइमर ने किया। यात्रा का उद्देश्य सहयोगी देशों के साथ सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर समन्वय बढ़ाना था। इस दौरान विभिन्न देशों के शीर्ष नेताओं और अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें आयोजित की गईं।

    संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े वरिष्ठ नेताओं के साथ विस्तृत बातचीत की। चर्चाओं में क्षेत्रीय सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा सहयोग और मध्य पूर्व की मौजूदा चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया गया। अमेरिकी पक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए सहयोगी देशों के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है। बातचीत के दौरान ईरान की गतिविधियों और उसके पड़ोसी देशों पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। अमेरिकी प्रतिनिधियों ने क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

    अमेरिकी सांसद जोश गॉटहाइमर ने संयुक्त अरब अमीरात की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। उन्होंने क्षेत्रीय तनावों के बीच यूएई की स्थिरता और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को महत्वपूर्ण बताया। साथ ही उन्होंने इजरायल और यूएई के बीच विकसित हो रहे संबंधों को क्षेत्रीय सहयोग का सकारात्मक उदाहरण बताया। उनका कहना था कि सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए साझेदारी का विस्तार समय की आवश्यकता है। इसी क्रम में ऊर्जा और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग पर चर्चा हुई।

    यात्रा के दूसरे चरण में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल थाईलैंड और फिलीपींस पहुंचा, जहां हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर विचार-विमर्श किया गया। बैठकों में समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए साझा रणनीति पर चर्चा हुई। अमेरिकी पक्ष ने इस क्षेत्र में सहयोगी देशों के साथ रक्षा और खुफिया समन्वय को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई। साथ ही नई तकनीकों, साइबर सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को भी बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। अमेरिका का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता वैश्विक आर्थिक और सुरक्षा व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    इस यात्रा ने यह संकेत दिया है कि अमेरिका एक साथ कई क्षेत्रों में अपने रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की नीति पर आगे बढ़ रहा है। मध्य पूर्व और हिंद-प्रशांत दोनों क्षेत्रों में सहयोगी देशों के साथ सुरक्षा, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में अमेरिका अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर क्षेत्रीय चुनौतियों का सामना करने और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

    यह दौरा भविष्य में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच सुरक्षा तथा रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रयास क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने और उभरती वैश्विक चुनौतियों का सामूहिक समाधान खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

  • ईरान ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों पर हमले की दी चेतावनी, स्टूडेंट्स और प्रोफेसर से कैंपस खाली करने की अपील

    ईरान ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों पर हमले की दी चेतावनी, स्टूडेंट्स और प्रोफेसर से कैंपस खाली करने की अपील


    नई दिल्ली । ईरान ने मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिकी विश्वविद्यालयों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है ईरानी सरकार का आरोप है कि अमेरिका और इजरायल जानबूझकर ईरान के विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को टारगेट कर रहे हैं इसी संदर्भ में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स आईआरजीसी ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों को हमला करने की खुली धमकी दी है

    आईआरजीसी ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान की दो प्रमुख यूनिवर्सिटी पहले ही तबाह हो चुकी हैं और अमेरिकी सरकार को 30 मार्च को तेहरान टाइम के अनुसार दोपहर 12 बजे तक एक आधिकारिक बयान में ईरानी यूनिवर्सिटी पर बमबारी की निंदा करनी चाहिए इसके साथ ही आईआरजीसी ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों, प्रोफेसरों और छात्रों से अपील की कि वे कैंपस से कम से कम एक किलोमीटर दूर रहें

    ईरानी मीडिया के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के कई विश्वविद्यालय संचालित हैं इनमें कतर में टेक्सास एएंडएम यूनिवर्सिटी और यूएई में न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी शामिल हैं हाल ही में तेहरान और इस्फहान की यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पर हमले हुए जिनमें भवनों को नुकसान पहुंचा लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ

    ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने युद्ध के दौरान जानबूझकर विश्वविद्यालयों और रिसर्च सेंटर पर हमला किया ताकि ईरान की वैज्ञानिक नींव और सांस्कृतिक विरासत को कमजोर किया जा सके उन्होंने बताया कि इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और तेहरान की यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी उन कई संस्थानों में से दो हैं जिन पर पिछले 30 दिनों में हमले हुए

    बघाई ने यह भी कहा कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम और अन्य संभावित खतरे सिर्फ बहाने हैं और असली मकसद देश की शिक्षा और शोध क्षमता को नुकसान पहुंचाना है ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार युद्ध की वजह से कम से कम 600 शैक्षणिक संस्थानों को नुकसान हुआ है या वे पूरी तरह नष्ट हो गई हैं

    आईआरजीसी की चेतावनी के बाद मिडिल ईस्ट में अमेरिकी विश्वविद्यालयों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और स्टूडेंट्स तथा प्रोफेसरों को सलाह दी गई है कि वे कैंपस से दूरी बनाए रखें ताकि किसी भी अप्रत्याशित हमले से बचा जा सके इस स्थिति ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है और खाड़ी देशों में अमेरिकी शैक्षणिक संस्थानों के संचालन को चुनौतीपूर्ण बना दिया है