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  • स्विट्जरलैंड वार्ता में दिखे कूटनीतिक संकेत ईरानी डेलिगेशन लौटा वेंस और कतर के मंत्री की मुलाकात बनी चर्चा का विषय

    स्विट्जरलैंड वार्ता में दिखे कूटनीतिक संकेत ईरानी डेलिगेशन लौटा वेंस और कतर के मंत्री की मुलाकात बनी चर्चा का विषय


    नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता को कम करने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड में आयोजित ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता का नया दौर कई वजहों से सुर्खियों में आ गया है। बातचीत का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करना और ऊर्जा बाजार पर पड़ रहे प्रभाव को नियंत्रित करना था लेकिन वार्ता के दौरान सामने आए कुछ घटनाक्रमों ने राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    स्विस रिसॉर्ट बुर्गेनस्टॉक में आयोजित इस बैठक में अमेरिका और ईरान के वरिष्ठ प्रतिनिधि लंबे समय तक बातचीत में शामिल रहे। दोनों पक्षों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई लेकिन किसी ठोस सहमति तक पहुंचने की खबर सामने नहीं आई। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ हालिया बयानों के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने असंतोष जताया और कुछ समय के लिए वार्ता प्रक्रिया से अलग हो गया। हालांकि बाद में यह स्पष्ट किया गया कि बातचीत पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और आने वाले हफ्तों में इस पर आगे विचार विमर्श जारी रहेगा।

    इस बीच सम्मेलन से जुड़े कुछ दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे। इन वीडियो और तस्वीरों के आधार पर कई तरह के दावे और व्याख्याएं सामने आने लगीं। सबसे ज्यादा चर्चा उस समय हुई जब यह दावा किया गया कि कतर के एक वरिष्ठ मंत्री और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बीच औपचारिक अभिवादन के दौरान हाथ नहीं मिलाया गया। हालांकि इस संबंध में किसी भी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कूटनीतिक कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल समय प्रबंधन और मंच व्यवस्था जैसी कई वजहों से ऐसी स्थितियां बन सकती हैं इसलिए किसी एक दृश्य के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जा सकता।

    एक अन्य घटनाक्रम जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया वह ईरानी प्रतिनिधिमंडल का सामूहिक फोटो सत्र में शामिल न होना था। रिपोर्टों के मुताबिक ईरानी प्रतिनिधि कार्यक्रम स्थल से बिना तस्वीर खिंचवाए रवाना हो गए। हालांकि इसके पीछे की वास्तविक वजह सार्वजनिक नहीं की गई है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई बार देश अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं या राजनीतिक संदेशों के तहत कुछ औपचारिक गतिविधियों से दूरी बनाते हैं। इसलिए इस घटना को भी उसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

    बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की मौजूदगी को लेकर भी सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं देखने को मिलीं। वायरल तस्वीरों और वीडियो के आधार पर लोगों ने अलग अलग अनुमान लगाए लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्यक्ति के चेहरे के भाव या शारीरिक हावभाव के आधार पर उसकी मानसिक स्थिति या राजनीतिक रुख का आकलन नहीं किया जा सकता।

    अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अक्सर छोटे दिखने वाले घटनाक्रम भी बड़े संदेशों के रूप में देखे जाते हैं। यही कारण है कि ऐसे सम्मेलनों में नेताओं की गतिविधियां मीडिया और विश्लेषकों की नजर में रहती हैं। हालांकि किसी भी घटना की सही व्याख्या के लिए आधिकारिक बयानों और विश्वसनीय तथ्यों का इंतजार करना जरूरी होता है।

    फिलहाल स्विट्जरलैंड में हुई यह वार्ता किसी निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंची है लेकिन इससे जुड़े कूटनीतिक संकेत और चर्चाएं वैश्विक राजनीति में आने वाले दिनों तक चर्चा का विषय बने रहने की संभावना है।

  • ईरान-अमेरिका वार्ता में पाकिस्तान की एंट्री, शहबाज शरीफ पहुंचे स्विट्जरलैंड, मध्यस्थता की भूमिका पर नजर

    ईरान-अमेरिका वार्ता में पाकिस्तान की एंट्री, शहबाज शरीफ पहुंचे स्विट्जरलैंड, मध्यस्थता की भूमिका पर नजर


    नई दिल्ली ।
    मध्य पूर्व में चल रहे तनाव को कम करने और अमेरिका-ईरान के बीच जारी कूटनीतिक वार्ता को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड में एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय डिप्लोमैटिक घटनाक्रम देखने को मिला है। इस बातचीत के अगले चरण के लिए ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल पहले ही स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं, और अब इस प्रक्रिया में पाकिस्तान की भी एंट्री ने वैश्विक ध्यान खींच लिया है।

    जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर का प्रतिनिधिमंडल भी स्विट्जरलैंड पहुंच चुका है। स्विस विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को लागू कराने की प्रक्रिया में एक मध्यस्थ की भूमिका निभाने जा रहा है।

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि शहबाज शरीफ अपने उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ ज्यूरिख पहुंचे हैं और वे बर्गेनस्टॉक में होने वाली अहम वार्ता में हिस्सा लेंगे। इस बैठक का उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच हुए ज्ञापन समझौते को आगे लागू करने पर चर्चा करना बताया गया है।

    इस बीच, अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी इस वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं, जबकि ईरानी प्रतिनिधिमंडल पहले ही वहां मौजूद है। ईरान की तरफ से इस बातचीत को “मिनाब 168” कोडनेम के तहत संचालित किया जा रहा है।

    स्विस विदेश मंत्रालय ने पहले ही इस वार्ता को लेकर कहा था कि वह दोनों पक्षों के बीच एक सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि बातचीत बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सके।

    हालांकि यह वार्ता पहले निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो सकी थी, लेकिन अब सभी प्रमुख पक्षों की मौजूदगी के साथ इसके आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

    फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस हाई-लेवल डिप्लोमैटिक मीटिंग पर टिकी हुई है, क्योंकि इसमें न केवल अमेरिका-ईरान संबंधों का भविष्य तय हो सकता है, बल्कि मध्य पूर्व की क्षेत्रीय स्थिरता पर भी इसका बड़ा असर पड़ने की संभावना है।

  • ईरान-अमेरिका बातचीत पर दुनिया की नजर, परमाणु मुद्दे और शांति समझौते पर होगी चर्चा

    ईरान-अमेरिका बातचीत पर दुनिया की नजर, परमाणु मुद्दे और शांति समझौते पर होगी चर्चा


    नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को कम करने और संभावित शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से ईरान और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक वार्ता स्विट्जरलैंड में शुरू होने जा रही है। इस बातचीत के लिए ईरान का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल शनिवार देर रात स्विट्जरलैंड पहुंच गया है, जिसे कोडनेम ‘मिनाब 168’ के तहत जाना जा रहा है।

    स्विस विदेश मंत्रालय ने इस वार्ता को लेकर सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि वह ईरानी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करता है और दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल उपलब्ध करा रहा है। यह वार्ता बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में आयोजित की जा रही है, जहां पहले से तय समझौते को लागू करने और आगे की रणनीति पर चर्चा होगी।

    सूत्रों के अनुसार, यह बातचीत अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते के कार्यान्वयन से जुड़ी है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को कम करना और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर समाधान की दिशा तलाशना है। इससे पहले इस वार्ता को स्थगित कर दिया गया था, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।

    इस बीच, अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हो चुके हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि बातचीत में मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और लेबनान में लागू संघर्ष विराम को बनाए रखने जैसे मुद्दों पर फोकस किया जाएगा।

    वेंस ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह बैठक कई दिनों तक चल सकती है और इससे दोनों देशों के बीच संवाद को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की ओर से भी कुछ मुद्दे रखे जाएंगे, जिन पर बातचीत के दौरान चर्चा की जाएगी।

    फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस वार्ता पर टिकी हुई है, क्योंकि इसके परिणाम न केवल ईरान-अमेरिका संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं, बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र की स्थिरता पर भी इसका गहरा असर पड़ सकता है।

  • ईरान-अमेरिका बातचीत में नरमी के संकेत, लेकिन समझौता अभी अधर में; कुछ अहम मुद्दों पर जारी है गतिरोध

    ईरान-अमेरिका बातचीत में नरमी के संकेत, लेकिन समझौता अभी अधर में; कुछ अहम मुद्दों पर जारी है गतिरोध



    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत में हल्की नरमी के संकेत जरूर दिख रहे हैं, लेकिन किसी अंतिम समझौते पर अभी सहमति नहीं बन पाई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिए हैं कि बातचीत में प्रगति हो रही है और जल्द कुछ सकारात्मक जानकारी सामने आ सकती है।

    वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी माना है कि पिछले एक सप्ताह में दोनों देशों के रुख में नजदीकी आई है, लेकिन अहम मुद्दों पर अभी भी मतभेद बने हुए हैं। उनका कहना है कि सिर्फ बातचीत में सुधार का मतलब यह नहीं है कि समझौता तय हो चुका है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी अपने प्रतिनिधियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी समझौते में जल्दबाज़ी न की जाए और बातचीत को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जाए।

    ईरानी सरकारी मीडिया का दावा है कि समझौता अमेरिका की पाबंदियों की वजह से अभी अटका हुआ है, जबकि दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि एक-दो मुद्दों पर अब भी गंभीर मतभेद कायम हैं।

    ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने इस बातचीत का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि किसी ऐसे समझौते पर सहमति बने जिसमें क्षेत्रीय स्थिरता और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर स्पष्ट ढांचा तय हो।फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अंतिम फैसला अभी दूर माना जा रहा है।

  • न्यूक्लियर डील से लेकर सीजफायर बातचीत तक, क्यों माने जाते हैं ईरान के सबसे भरोसेमंद कूटनीतिज्ञ

    न्यूक्लियर डील से लेकर सीजफायर बातचीत तक, क्यों माने जाते हैं ईरान के सबसे भरोसेमंद कूटनीतिज्ञ



    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव और बातचीत के दौर में एक नाम लगातार सुर्खियों में है अब्बास अराघची। ईरान के विदेश मंत्री अराघची को इस वक्त दोनों देशों के बीच चल रही वार्ताओं का सबसे अहम चेहरा माना जा रहा है। उन्हें एक सख्त लेकिन संतुलित ‘डील मेकर’ के रूप में जाना जाता है, जो जटिल हालात में भी बातचीत को दिशा देने की क्षमता रखते हैं।

    अराघची का कूटनीतिक सफर लंबा और बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने 2015 में ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में हुए ऐतिहासिक ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) की बातचीत में अहम भूमिका निभाई थी। उस समय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों और जर्मनी के साथ हुई इस डील में उनका रुख साफ, सख्त और रणनीतिक माना गया था।

    आज के दौर में जब ईरान और अमेरिका के रिश्ते बेहद नाजुक मोड़ पर हैं, अराघची की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। वे न सिर्फ बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, बल्कि ईरान के हितों को मजबूती से सामने भी रख रहे हैं। जानकार मानते हैं कि उनकी रणनीति ही तय करेगी कि यह वार्ता समझौते तक पहुंचेगी या फिर तनाव और बढ़ेगा।

    अराघची की पहचान एक ऐसे कूटनीतिज्ञ के रूप में है जो बैकडोर डिप्लोमेसी और खुले मंच—दोनों जगह समान दक्षता से काम करते हैं। यही वजह है कि उन्हें ईरान की विदेश नीति का ‘क्राइसिस मैनेजर’ भी कहा जाता है

  • सीधी बातचीत नहीं, लेकिन बातचीत जारी ईरान-अमेरिका संकट में पाकिस्तान के जरिए कूटनीतिक प्रयास तेज

    सीधी बातचीत नहीं, लेकिन बातचीत जारी ईरान-अमेरिका संकट में पाकिस्तान के जरिए कूटनीतिक प्रयास तेज


    नई दिल्ली । ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक बार फिर कूटनीतिक बातचीत की संभावना बनती दिखाई दे रही है, हालांकि इस बार दोनों देश सीधे बातचीत से दूरी बनाए रखते हुए अप्रत्यक्ष माध्यमों का सहारा ले सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मंच के रूप में उभरता दिख रहा है।

    जानकारी के अनुसार ईरान से एक प्रतिनिधिमंडल पहले ही पाकिस्तान पहुंच चुका है जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के भी वहां पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। यह बातचीत किसी औपचारिक सीधी बैठक के बजाय मध्यस्थों के जरिए आगे बढ़ सकती है।

    ईरान ने पहले अमेरिका के साथ सीधे बातचीत करने से इनकार कर दिया था जिसके चलते पिछले दौर की वार्ता आगे नहीं बढ़ सकी थी। हालांकि बाद में क्षेत्रीय दबाव और सीजफायर से जुड़े मुद्दों के चलते दोनों पक्षों ने फिर से संवाद की संभावना तलाशनी शुरू की है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार इस पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया में अब्बास अराघची की भूमिका महत्वपूर्ण है जो क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंचे हैं। उनका उद्देश्य सीधी बातचीत से ज्यादा क्षेत्रीय समन्वय और मध्यस्थता के जरिए समाधान तलाशना बताया जा रहा है।

    दूसरी तरफ अमेरिकी पक्ष से भी वरिष्ठ प्रतिनिधियों की सक्रियता देखी जा रही है जिनमें ट्रंप प्रशासन से जुड़े सलाहकार और दूत शामिल हैं। हालांकि दोनों देशों ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल किसी औपचारिक आमने-सामने बैठक की योजना नहीं है।

    इस बीच क्षेत्रीय तनाव भी बना हुआ है जहां समुद्री मार्गों और जहाजों को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति देखी गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।

    पिछले दौर की बातचीत में ओमान जैसे देशों की मध्यस्थता अहम रही थी और अब भी उम्मीद की जा रही है कि पाकिस्तान सहित कुछ अन्य क्षेत्रीय देश इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं।

    व्हाइट हाउस की ओर से संकेत दिए गए हैं कि अमेरिका बातचीत के लिए तैयार है लेकिन अंतिम निर्णय परिस्थितियों और प्रगति पर निर्भर करेगा। वहीं ईरान का रुख अब भी यह है कि वह सीधे नहीं बल्कि मध्यस्थों के जरिए ही अपनी बात रखेगा।

    कुल मिलाकर मौजूदा स्थिति में तनाव और बातचीत दोनों साथ-साथ चलते दिखाई दे रहे हैं जहां एक ओर टकराव की आशंका बनी हुई है वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक समाधान की हल्की उम्मीद भी जिंदा है।

  • अमेरिका-ईरान सीजफायर विवाद: ईरान ने तीन उल्लंघनों की बात कही, 10 पॉइंट्स पर चर्चा जारी

    अमेरिका-ईरान सीजफायर विवाद: ईरान ने तीन उल्लंघनों की बात कही, 10 पॉइंट्स पर चर्चा जारी


    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच 7 अप्रैल को दो हफ्ते के लिए सीजफायर पर सहमति बनी थी। इस समझौते के तहत दोनों पक्ष 10 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर राजी हुए थे लेकिन अब ईरान ने आरोप लगाया है कि इनमें से तीन बिंदुओं का उल्लंघन किया गया है। ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने बुधवार को सोशल मीडिया पोस्ट में अमेरिका पर दो हफ्ते के सीजफायर समझौते को तोड़ने का आरोप लगाया।

    गालिबफ ने कहा कि अमेरिका पर ईरान का गहरा ऐतिहासिक अविश्वास है और अमेरिका बार बार अपने कमिटमेंट्स का उल्लंघन कर रहा है। उन्होंने बताया कि ईरान के 10 पॉइंट सीजफायर प्रस्ताव के तीन हिस्सों का उल्लंघन हुआ है। इसमें शामिल है इजरायल का लेबनान पर लगातार हमला ईरानी एयरस्पेस में ड्रोन का प्रवेश और ईरानी यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को नकारना।

    अमेरिका और ईरान के बीच 10 पॉइंट्स पर बनी सहमति में सबसे पहला बिंदु दोनों पक्षों द्वारा गैर आक्रामकता की गारंटी देना और ईरान के यूरेनियम संवर्धन को स्वीकार करना था। दूसरा ईरान की सेना के साथ तालमेल बनाकर होर्मुज स्ट्रेट से नियंत्रित मार्ग सुनिश्चित करना। तीसरा लेबनान में हिज्बुल्लाह समूह के खिलाफ लड़ाई समेत सभी मोर्चों पर जंग खत्म करना। चौथा इलाके के सभी बेस और डिप्लॉयमेंट पॉइंट से अमेरिकी सुरक्षा बलों को हटाना।

    साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सभी प्रस्तावों को खत्म करना होर्मुज स्ट्रेट में एक सुरक्षित ट्रांजिट प्रोटोकॉल बनाना जो तय शर्तों के तहत ईरानी दबदबे की गारंटी दे संघर्ष के दौरान ईरान को हुए नुकसान की पूरी भरपाई करना और ईरान के खिलाफ सभी मुख्य और द्वितीयक प्रतिबंध हटाना भी शामिल है। इसके अलावा विदेश में सभी ब्लॉक ईरानी संपत्तियों को रिलीज करना और इन सभी शर्तों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बाइंडिंग प्रस्ताव के जरिए मंजूरी देना तय किया गया था।

    ईरान के डेलीगेशन ने इस विवाद के बीच अमेरिका के साथ उच्चस्तरीय बातचीत के लिए गुरुवार रात इस्लामाबाद में पहुंचने की तैयारी की है। पाकिस्तान में ईरानी राजदूत ने सोशल मीडिया पर लिखा पीएम शहबाज शरीफ की बुलाई गई डिप्लोमैटिक पहल को नाकाम करने के लिए इजरायली सरकार द्वारा बार बार सीजफायर तोड़ने की वजह से ईरानी जनता की राय पर शक के बावजूद ईरान के सुझाए गए 10 पॉइंट्स पर आधारित गंभीर बातचीत के लिए ईरानी डेलीगेशन आज रात इस्लामाबाद पहुंच रहा है।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस्लामाबाद की यह पहल दोनों पक्षों के बीच भरोसे का माहौल बनाने और सीजफायर के उल्लंघनों पर स्पष्ट समाधान निकालने में अहम साबित हो सकती है। आने वाली बैठक में इन 10 पॉइंट्स और उल्लंघनों पर चर्चा होगी जो इस क्षेत्र की स्थिरता और सुरक्षा के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।

  • ईरानी राजदूत ने पाकिस्तान में प्रतिनिधिमंडल के आगमन की दी जानकारी, बाद में डिलीट किया पोस्ट

    ईरानी राजदूत ने पाकिस्तान में प्रतिनिधिमंडल के आगमन की दी जानकारी, बाद में डिलीट किया पोस्ट

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर पर सहमति के बाद दोनों देशों के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत की संभावनाएं बढ़ गई हैं। इसी बीच अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान के साथ उच्चस्तरीय बातचीत के लिए अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ पाकिस्तान पहुंच सकते हैं। इस परिप्रेक्ष्य में ईरानी राजदूत रेजा अमीरी मोगादम ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर यह जानकारी दी थी कि अमेरिकी वार्ताकारों के साथ सीजफायर के मुद्दे पर बातचीत के लिए ईरानी डेलिगेशन इस्लामाबाद पहुंच रहा है। हालांकि उन्होंने बाद में यह पोस्ट डिलीट कर दी।

    ईरानी राजदूत के पोस्ट में लिखा गया था कि पीएम शहबाज शरीफ की बुलाई गई डिप्लोमेटिक पहल को नाकाम करने के लिए इजरायल द्वारा बार-बार सीजफायर तोड़ने की वजह से ईरानी जनता की राय पर शक के बावजूद ईरान के सुझाए गए 10 पॉइंट्स पर आधारित बातचीत के लिए यह डेलीगेशन पाकिस्तान पहुंच रहा है। हालांकि अब यह पोस्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उपलब्ध नहीं है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध को खत्म करने के मकसद से बातचीत के लिए पाकिस्तान आ सकते हैं। अमेरिकी मीडिया सीएनएन ने दो वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के हवाले से बताया कि पाकिस्तान के खुद को एक अहम मध्यस्थ के तौर पर पेश करने के बाद इस हफ्ते इस्लामाबाद में बड़ी बैठक की तैयारी चल रही है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि संभव है कि जेडी वेंस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पाकिस्तान का दौरा करें। इससे पहले द फाइनेंशियल टाइम्स ने यह बताया कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर ने रविवार को ट्रंप से बातचीत की थी। इसी बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोमवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से भी बात की।

    व्हाइट हाउस ने बयान में कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान निर्धारित समय से आगे चल रहा है और इसके मुख्य उद्देश्यों के करीब पहुंच रहा है। वहीं वॉशिंगटन ने स्पष्ट किया है कि तेहरान के साथ “सार्थक” बातचीत जारी रखी जा रही है जिसका उद्देश्य इस संघर्ष को समाप्त करना और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना है।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है और इस्लामाबाद की पहल दोनों पक्षों के बीच भरोसे का माहौल बनाने में अहम साबित हो सकती है। ईरानी राजदूत के सोशल मीडिया पोस्ट को डिलीट करना इस बात का संकेत भी माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर संवेदनशीलता और कूटनीतिक सावधानी बरती जा रही है।

    इस तरह अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत और पाकिस्तान की मध्यस्थता ने क्षेत्रीय राजनीति में एक नई दिशा देने की संभावना पैदा कर दी है। आगामी बैठक और उच्चस्तरीय वार्ताएं इस संघर्ष के भविष्य को तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।