Tag: Iran US tension

  • बाजार पर मंडरा रहा वैश्विक तनाव का साया, ईरान-अमेरिका टकराव और कच्चे तेल से तय होगी अगली चाल

    बाजार पर मंडरा रहा वैश्विक तनाव का साया, ईरान-अमेरिका टकराव और कच्चे तेल से तय होगी अगली चाल

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां घरेलू मजबूती से अधिक वैश्विक घटनाक्रम उसकी दिशा तय करते दिखाई दे रहे हैं। आने वाले सप्ताह में बाजार की चाल कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर रहने वाली है, जिनमें ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां और देश के प्रमुख आर्थिक आंकड़े शामिल हैं। इन सभी कारकों के कारण निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और बाजार में सतर्कता बढ़ती जा रही है।

    वैश्विक स्तर पर ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव ने ऊर्जा बाजारों को सबसे अधिक प्रभावित किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग को लेकर उठ रहे विवादों ने अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति पर चिंता बढ़ा दी है। इसी अनिश्चितता के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका भी गहरा रही है। ऊर्जा कीमतों में यह अस्थिरता सीधे तौर पर भारतीय बाजारों पर भी असर डाल रही है, क्योंकि भारत अपनी बड़ी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है।

    इसी बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी बाजार की धारणा को कमजोर किया है। लगातार हो रही निकासी ने घरेलू बाजार में तरलता और विश्वास दोनों पर दबाव बनाया है। निवेशक फिलहाल सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे इक्विटी बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक विदेशी निवेशकों की रणनीति में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

    घरेलू स्तर पर आने वाले आर्थिक आंकड़े भी बाजार की दिशा को प्रभावित करने वाले हैं। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की गतिविधियों से जुड़े संकेतक निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। इसके अलावा बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े आंकड़े, क्रेडिट ग्रोथ और विदेशी मुद्रा भंडार जैसी जानकारियां भी बाजार की धारणा को प्रभावित करेंगी। इन आंकड़ों के आधार पर यह तय होगा कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक दबावों के बीच कितनी मजबूती से खड़ी है।

    बीते सप्ताह बाजार में गिरावट का रुख देखने को मिला, जहां प्रमुख सूचकांक दबाव में रहे। कई सेक्टर्स में बिकवाली हावी रही, विशेषकर रियल्टी, आईटी और ऑटो जैसे क्षेत्रों में कमजोरी देखने को मिली। हालांकि कुछ क्षेत्रों जैसे फार्मा और मेटल में अपेक्षाकृत स्थिरता बनी रही, लेकिन समग्र रूप से बाजार नकारात्मक रुझान में बंद हुआ।

  • ईरान-अमेरिका तनाव: शांति प्रस्ताव पर टकराव, ट्रंप ने बताया पूरी तरह अस्वीकार्य

    ईरान-अमेरिका तनाव: शांति प्रस्ताव पर टकराव, ट्रंप ने बताया पूरी तरह अस्वीकार्य



    नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता एक बार फिर विवादों में आ गई है। ईरान की ओर से पेश किए गए नए शांति प्रस्ताव को अमेरिकी पक्ष ने खारिज कर दिया है, जिससे क्षेत्र में कूटनीतिक स्थिति और जटिल हो गई है।

    क्या है पूरा मामला?
    रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने अमेरिका के सामने एक शांति प्रस्ताव रखा है, जिसमें तत्काल युद्धविराम, प्रतिबंधों में राहत और सुरक्षा गारंटी जैसी मांगें शामिल हैं। इस प्रस्ताव को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया है।ईरान का कहना है कि किसी भी स्थायी शांति के लिए उसकी सुरक्षा और संप्रभुता को सम्मान देना जरूरी है।

    ईरान की प्रमुख शर्तें
    ईरान के प्रस्ताव में कई अहम मांगें शामिल बताई जा रही हैं:

    तुरंत युद्धविराम लागू किया जाए

    ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटाई जाए

    भविष्य में ईरान पर दोबारा हमला न करने की गारंटी दी जाए

    युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाए

    होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर ईरान की संप्रभुता स्वीकार की जाए

    अमेरिका का रुख क्यों सख्त है?
    अमेरिकी पक्ष का मानना है कि ईरान की कुछ मांगें क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए अमेरिका कुछ सैन्य और रणनीतिक शर्तों पर पहले सहमति चाहता हैईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए हैबिना ठोस सुरक्षा गारंटी के किसी समझौते के पक्ष में नहीं है डोनाल्ड ट्रम्प ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि यह अमेरिका की सुरक्षा नीति के खिलाफ है।

    इजरायल की भूमिका
    इस मुद्दे पर बेंजामिन नेतन्याहू ने भी सख्त बयान दिया है। उनका कहना है कि ईरान के संवर्धित यूरेनियम(समृद्ध यूरेनियम) को खत्म किए बिना क्षेत्र में स्थायी शांति संभव नहीं है।

    तनाव की मौजूदा स्थिति
    दोनों देशों के बीच पहले भी सीमित सैन्य तनाव देखा गया हैकुछ दौर की वार्ता और अस्थायी युद्धविराम लागू हुए थेलेकिन भरोसे की कमी के कारण स्थायी समाधान अभी भी दूर है
    ईरान का प्रस्ताव शांति और सुरक्षा गारंटी पर आधारित है, जबकि अमेरिका इसे रणनीतिक रूप से अस्वीकार्य मान रहा है। इसी टकराव के कारण मध्य-पूर्व में तनाव बरकरार है। फिलहाल स्थिति यह है कि दोनों पक्ष बातचीत के बावजूद किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं, जिससे क्षेत्रीय शांति की राह अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।

  • ईरान की अमेरिका को खुली धमकी, बोला- तेल टैंकरों पर हमला हुआ तो US ठिकानों और जहाजों पर बरसेंगी मिसाइलें

    ईरान की अमेरिका को खुली धमकी, बोला- तेल टैंकरों पर हमला हुआ तो US ठिकानों और जहाजों पर बरसेंगी मिसाइलें



    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने अमेरिका को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर फारस की खाड़ी या Strait of Hormuz में ईरानी तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया, तो अमेरिकी सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों पर बड़ा हमला किया जाएगा।

    IRGC की नौसेना इकाई ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर दावा किया कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी जहाज अब ईरानी मिसाइलों और ड्रोन की रेंज में हैं। इसके बाद IRGC की एयरोस्पेस फोर्स ने भी कहा कि उनके ड्रोन और मिसाइल सिस्टम अमेरिकी ठिकानों पर “लॉक” किए जा चुके हैं और अब सिर्फ आदेश का इंतजार है।

    इस बीच The Wall Street Journal की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ने ईरान को 14 बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव भेजा है, जिस पर तेहरान के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने उम्मीद जताई थी कि जल्द जवाब मिल सकता है, लेकिन ईरान ने फिलहाल किसी समयसीमा को मानने से इनकार कर दिया है।

    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि अमेरिकी प्रस्ताव की समीक्षा जारी है और जवाब “उचित समय” पर दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान किसी बाहरी दबाव या समयसीमा के तहत फैसला नहीं करेगा।

    उधर, क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। दक्षिणी Lebanon में इजराइली हमलों और Hezbollah की जवाबी कार्रवाई ने हालात और गंभीर बना दिए हैं। वहीं होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ते सैन्य तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार भी प्रभावित हुआ है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है।

    कुवैत ने भी अपने एयरस्पेस में संदिग्ध ड्रोन देखे जाने की पुष्टि की है, जबकि कतर से पाकिस्तान जा रहे एक गैस जहाज के होर्मुज स्ट्रेट पार करने के दौरान कुछ समय तक उसका सिग्नल गायब रहने से क्षेत्र में चिंता और बढ़ गई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल सप्लाई, समुद्री व्यापार और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।

  • वेस्ट एशिया में तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- ईरान विवाद जल्द होगा खत्म; परमाणु मुद्दे पर अमेरिका का सख्त रुख

    वेस्ट एशिया में तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- ईरान विवाद जल्द होगा खत्म; परमाणु मुद्दे पर अमेरिका का सख्त रुख



    नई दिल्ली। 28 फरवरी से जारी संघर्ष के बीच क्षेत्र में हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं, हालांकि युद्धविराम के प्रयासों और अमेरिका-ईरान बातचीत की कोशिशों ने कूटनीतिक हलचल बढ़ा दी है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान विवाद जल्द सुलझ सकता है।

    ट्रंप का दावा: जल्द खत्म होगा विवाद
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने अपने समर्थकों से बातचीत में कहा कि ईरान के साथ युद्ध जैसी स्थिति जल्द खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है और इसी वजह से कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

    ट्रंप ने अपनी नीति का बचाव करते हुए कहा कि यह कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है और अधिकतर लोग इसे सही मानते हैं।

    क्षेत्र में लगातार हिंसा जारी
    हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं

    दक्षिणी तेहरान में अमेरिकी-इस्राइली हमलों में 12 लोगों की मौत

    लेबनान में पिछले 24 घंटों में 33 लोगों की मौत, जिनमें एक किशोर भी शामिल

    लेबनान से उत्तरी इस्राइल पर रॉकेट हमले में 1 व्यक्ति की मौत और 2 घायल

    ईरानी हमले में बहरीन में मोरक्को के सैनिक की मौत और कई घायल

    ईरान का पलटवार और बयान
    ईरान की संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उन्हें अफवाह बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान वैश्विक वित्तीय और तेल बाजार को प्रभावित करने के लिए दिए जा रहे हैं।उन्होंने अमेरिकी सैन्य अभियानों पर तंज कसते हुए इन्हें “ऑपरेशन ट्रस्ट मी ब्रो” और “ऑपरेशन फॉक्सियोस” कहा और कहा कि ये रणनीतियां विफल साबित हो रही हैं।


    अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जर्मनी के राष्ट्रपति के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें अमेरिका-इस्राइल की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया गया था।

    वेस्ट एशिया में हालात अभी भी विस्फोटक बने हुए हैं। एक तरफ सैन्य टकराव और जवाबी हमले जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदें भी जिंदा हैं, जिससे आने वाले दिनों में बड़ा बदलाव संभव माना जा रहा है।

  • ईरान अमेरिका तनाव के बीच इजरायल लेबनान वार्ता क्या बदलने वाली है मध्य पूर्व की तस्वीर

    ईरान अमेरिका तनाव के बीच इजरायल लेबनान वार्ता क्या बदलने वाली है मध्य पूर्व की तस्वीर


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में जारी भू राजनीतिक तनाव के बीच एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है जहां इजरायल और लेबनान के बीच करीब 33 साल बाद सीधी बातचीत शुरू हुई है। यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है।

    इस पूरी बातचीत को एक बड़े कूटनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है जिसकी मध्यस्थता अमेरिका कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मौजूदगी में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई।

    दरअसल इजरायल और लेबनान के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है जिसकी एक बड़ी वजह दक्षिणी लेबनान में सक्रिय संगठन हिजबुल्लाह है। यह संगठन ईरान का समर्थक माना जाता है और समय समय पर इजरायल पर हमले करता रहा है।

    विशेष रूप से 7 अक्टूबर 2023 हमास हमला के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया था जब हमास के हमलों के साथ ही हिजबुल्लाह ने भी इजरायल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।

    हाल के घटनाक्रमों में अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान की स्थिति कुछ कमजोर मानी जा रही है। ऐसे में अमेरिका और इजरायल इस मौके का फायदा उठाकर क्षेत्रीय समीकरण बदलने की कोशिश में हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि लेबनान के साथ सीधी बातचीत का मकसद हिजबुल्लाह के प्रभाव को कम करना है। यदि लेबनानी सरकार इस दिशा में सख्त कदम उठाती है तो यह ईरान के लिए बड़ा झटका हो सकता है क्योंकि हिजबुल्लाह को उसका प्रमुख सहयोगी माना जाता है।

    हाल ही में लेबनान सरकार ने गैर सरकारी हथियारों को हटाने के निर्देश दिए हैं जिसकी सराहना बेंजामिन नेतन्याहू ने भी की है। यह संकेत देता है कि लेबनान धीरे धीरे हिजबुल्लाह के प्रभाव को सीमित करने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।

    इसके साथ ही अमेरिका और इजरायल अन्य मोर्चों पर भी ईरान को घेरने की रणनीति अपना रहे हैं जिसमें समुद्री मार्गों पर दबाव बनाना भी शामिल है।हालांकि इजरायल ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित सीजफायर का असर लेबनान पर नहीं पड़ेगा यानी दक्षिणी लेबनान में सैन्य कार्रवाई जारी रह सकती है।

    कुल मिलाकर यह वार्ता केवल दो देशों के बीच संवाद नहीं बल्कि पूरे मध्य पूर्व की राजनीति को प्रभावित करने वाला बड़ा कदम है। अगर यह बातचीत सफल होती है तो इससे क्षेत्र में लंबे समय से जारी संघर्ष की दिशा बदल सकती है और हिजबुल्लाह के प्रभाव को कमजोर किया जा सकता है।

  • अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर? सुप्रीम लीडर खामेनेई का बड़ा दांव, लारिजानी को सौंपी अहम जिम्मेदारी

    अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर? सुप्रीम लीडर खामेनेई का बड़ा दांव, लारिजानी को सौंपी अहम जिम्मेदारी


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और संभावित टकराव की आशंकाओं के बीच ईरान की सत्ता संरचना में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े व्यापक अधिकार अपने भरोसेमंद सहयोगी अली लारीजानी को सौंप दिए हैं। इस कदम को संभावित युद्ध परिस्थिति में कमान को केंद्रीकृत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

    लारिजानी के हाथ में सैन्य और कूटनीतिक कमान

    रिपोर्ट के अनुसार लारिजानी अब सुरक्षा सैन्य संचालन और कूटनीतिक पहलुओं से जुड़े अहम फैसले लेने की स्थिति में हैं। वे सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख पद पर रहते हुए परमाणु वार्ताओं क्षेत्रीय सहयोगियों से समन्वय और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। माना जा रहा है कि संभावित संघर्ष की स्थिति में तेज और एकीकृत निर्णय प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए यह बदलाव किया गया है।

    राष्ट्रपति की भूमिका सीमित उत्तराधिकार की तैयारी
    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन की भूमिका इस बदलाव के बाद अपेक्षाकृत सीमित बताई जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व ने आकस्मिक परिस्थितियों यहां तक कि नेतृत्व स्तर पर किसी अप्रत्याशित घटना को ध्यान में रखते हुए उत्तराधिकार की बहुस्तरीय व्यवस्था पर काम शुरू किया है। सेना को हाई अलर्ट पर रखने मिसाइल सिस्टम की रणनीतिक तैनाती और आंतरिक सुरक्षा बलों को तैयार रखने की खबरें भी सामने आई हैं।

    होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ी गतिविधियां
    रणनीतिक दृष्टि से अहम  क्षेत्र में ईरान की सैन्य गतिविधियों में तेजी देखी जा रही है। मिसाइल परीक्षण और नौसैनिक अभ्यासों की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। यह जलमार्ग विश्व के बड़े हिस्से के तेल निर्यात का प्रमुख रास्ता है इसलिए यहां की हलचल का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।

    क्षेत्रीय समीकरण और वैश्विक नजर

    मध्य पूर्व पहले से ही संवेदनशील भू-राजनीतिक समीकरणों का केंद्र रहा है। ऐसे में तेहरान का यह कदम संकेत देता है कि ईरान संभावित टकराव की आशंका को गंभीरता से ले रहा है। हालांकि आधिकारिक स्तर पर व्यापक युद्ध की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन सैन्य और सुरक्षा ढांचे में यह पुनर्संरचना बताती है कि देश किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने की रणनीति अपना रहा है।