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  • अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ा टकराव, होर्मुज स्ट्रेट में ड्रोन हमलों और जवाबी कार्रवाई का दावा

    अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ा टकराव, होर्मुज स्ट्रेट में ड्रोन हमलों और जवाबी कार्रवाई का दावा


    होर्मुज। होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने दावा किया है कि उसने ईरान के चार ड्रोन को मार गिराया है और एक सैन्य ठिकाने पर भी कार्रवाई की है, जहां ड्रोन लॉन्च की तैयारी की जा रही थी।

    अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई उस समय की गई जब ड्रोन अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों और अमेरिकी वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा बन रहे थे। बताया जा रहा है कि निशाना बनाया गया ठिकाना दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास क्षेत्र में एक ड्रोन नियंत्रण केंद्र था।

    यह एक सप्ताह के भीतर ईरान पर अमेरिका की दूसरी बड़ी सैन्य कार्रवाई मानी जा रही है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा गया है। सेंटकॉम ने इसे आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों की रक्षा करना है।

    दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका के इन दावों की कड़ी निंदा की है और इसे संघर्षविराम का उल्लंघन बताया है। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका जानबूझकर क्षेत्र में तनाव बढ़ा रहा है और उसकी सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है।

    ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, बंदर अब्बास के पास मंगलवार सुबह कई धमाकों की आवाज सुनी गई, जिसके बाद अस्थायी रूप से एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए।

    इसके साथ ही ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने एक अमेरिकी एयरबेस पर जवाबी हमला किया है। IRGC के मुताबिक यह कार्रवाई बंदर अब्बास एयरपोर्ट के पास हुए अमेरिकी हमले के जवाब में की गई।

    हालांकि ईरान ने उस एयरबेस की लोकेशन स्पष्ट नहीं की है, लेकिन इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता भी गहरा दी है।

  • ईरान बोला- अमेरिका की धमकियों से नहीं डरते, इजराइल पर बातचीत बिगाड़ने का आरोप; होर्मुज और समझौते को लेकर बढ़ा तनाव

    ईरान बोला- अमेरिका की धमकियों से नहीं डरते, इजराइल पर बातचीत बिगाड़ने का आरोप; होर्मुज और समझौते को लेकर बढ़ा तनाव




    नई दिल्ली। ईरान ने एक बार फिर अमेरिका के साथ चल रही बातचीत के बीच सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि वह किसी भी तरह की धमकियों से डरने वाला नहीं है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ईस्माइल बघाई ने साफ कहा कि अमेरिका पर भरोसा करना मुश्किल है, क्योंकि यह गारंटी नहीं है कि वह किसी संभावित समझौते का पूरी तरह पालन करेगा।

    ईरान ने आरोप लगाया है कि इजराइल लगातार अमेरिका-ईरान वार्ता को कमजोर करने और उसे पटरी से उतारने की कोशिश कर रहा है। बघाई के मुताबिक, कुछ देश युद्ध और टकराव का माहौल बनाकर बातचीत को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं।

    इसी बीच ईरान ने संकेत दिया है कि हाल के कूटनीतिक बदलावों में कुछ देशों, जिनमें पाकिस्तान और अन्य क्षेत्रीय साझेदार शामिल हैं, की मध्यस्थता की भूमिका रही है, हालांकि तेहरान आने को लेकर कोई आधिकारिक कार्यक्रम तय नहीं है।

    वहीं, पिछले 24 घंटे में बातचीत से जुड़े कई अहम अपडेट सामने आए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच अपेक्षित समझौते पर अभी तक हस्ताक्षर नहीं हो पाए हैं, जबकि ओमान के जरिए दोनों पक्षों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है।

    ईरान ने दोहराया है कि देश में किसी भी बड़े फैसले के लिए सुप्रीम लीडर की मंजूरी जरूरी होती है, जिससे अंतिम निर्णय प्रक्रिया और जटिल हो जाती है।

    उधर, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर इजराइल की चिंता बढ़ी हुई है, खासकर होर्मुज जलमार्ग से जुड़े रणनीतिक मुद्दों को लेकर। ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने बातचीत का स्वागत करते हुए क्षेत्रीय स्थिरता और परमाणु अप्रसार पर जोर दिया है।

    फिलहाल अमेरिका की ओर से भी यह संकेत दिए गए हैं कि बातचीत जारी है और जल्द कोई बड़ा अपडेट सामने आ सकता है, लेकिन अंतिम समझौते पर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।

  • अमेरिकी F-35 को हमने मार गिराया’, ईरान का बड़ा दावा; अमेरिका को दी नई चेतावनी

    अमेरिकी F-35 को हमने मार गिराया’, ईरान का बड़ा दावा; अमेरिका को दी नई चेतावनी


    नई दिल्ली। Abbas Araghchi ने दावा किया है कि ईरान की सेना ने युद्ध के दौरान अमेरिका के अत्याधुनिक Lockheed Martin F-35 Lightning II लड़ाकू विमान को मार गिराया। उन्होंने कहा कि ऐसा करने वाला ईरान दुनिया का पहला देश बन गया है।

    तेहरान में दिए गए बयान में अराघची ने अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ संघर्ष में कई सैन्य विमानों के नुकसान को स्वीकार किया है। ईरानी विदेश मंत्री ने इसे तेहरान के पुराने दावों की पुष्टि बताया और कहा कि युद्ध में ईरान की सैन्य क्षमता दुनिया के सामने आ चुकी है।

    अमेरिकी रिपोर्ट में क्या कहा गया?
    13 मई को प्रकाशित अमेरिकी कांग्रेस की संस्था Congressional Research Service (CRS) की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ संघर्ष के दौरान अमेरिका के करीब 42 सैन्य विमान नष्ट हुए या क्षतिग्रस्त हुए। रिपोर्ट में कहा गया कि वास्तविक संख्या इससे अधिक भी हो सकती है क्योंकि कई जानकारियां अब भी गोपनीय हैं।

    रिपोर्ट में स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट और स्पेशल ऑपरेशन एयरक्राफ्ट को नुकसान पहुंचने का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग ने अब तक आधिकारिक तौर पर F-35 गिराए जाने की पुष्टि नहीं की है।

    ईरान ने दी नई चेतावनी
    अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट ने साबित कर दिया है कि ईरान की सेना ने आधुनिक अमेरिकी तकनीक को चुनौती दी है। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अगर दोबारा युद्ध शुरू हुआ तो दुनिया “और बड़े सरप्राइज” देखेगी।

    ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में बढ़ा तनाव
    रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ “Operation Epic Fury” नाम से 40 दिनों तक संयुक्त हवाई अभियान चलाया था। यह अभियान 28 फरवरी 2026 से शुरू हुआ था।

    सीआरएस ने अपनी रिपोर्ट अमेरिकी रक्षा विभाग, अमेरिकी सेंट्रल कमांड और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार की है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ईरान अभियान पर अमेरिका का सैन्य खर्च बढ़कर 29 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया है कि ईरानी सेना ने युद्ध के दौरान अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान को मार गिराया। अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट में भी ईरान संघर्ष में अमेरिकी सैन्य विमानों के नुकसान का जिक्र किया गया है, जिससे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है।
    हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के दावों और अमेरिकी रिपोर्ट के बीच अब भी कई तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। इसके बावजूद इस बयान ने मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ा दिया है।

  • ईरान का सख़्त संदेश: सरेंडर नहीं करेंगे, ट्रंप की धमकी पर राष्ट्रपति पेजेश्कियान का पलटवार

    ईरान का सख़्त संदेश: सरेंडर नहीं करेंगे, ट्रंप की धमकी पर राष्ट्रपति पेजेश्कियान का पलटवार



    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने स्पष्ट कहा है कि उनका देश किसी भी हालत में सरेंडर नहीं करेगा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों का जवाब देते हुए कहा कि बातचीत का मतलब झुकना नहीं होता, बल्कि अपने अधिकारों और गरिमा के साथ चर्चा करना होता है।

    राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ईरान अपनी संप्रभुता और कानूनी अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि देश पूरी मजबूती और सम्मान के साथ बातचीत की प्रक्रिया में शामिल है, लेकिन दबाव या धमकी के आगे नहीं झुकेगा।

    इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि खाड़ी देशों—कतर, सऊदी अरब और यूएई—के नेताओं के अनुरोध पर ईरान पर प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया गया है। ट्रंप के अनुसार, इस समय क्षेत्र में शांति समझौते को लेकर गंभीर बातचीत चल रही है, लेकिन अगर डील नहीं होती है तो अमेरिका सैन्य विकल्पों के लिए तैयार है।

    ट्रंप ने यह भी कहा कि किसी भी समझौते में सबसे अहम शर्त यह होगी कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके। उन्होंने अमेरिकी सेना को भी निर्देश दिया है कि जरूरत पड़ने पर कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार रहें।

    इस बीच ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि समय तेजी से खत्म हो रहा है और अगर जल्द समझौता नहीं हुआ तो परिणाम गंभीर होंगे। वहीं, दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद कूटनीतिक बातचीत की संभावना अभी भी बनी हुई है।

    फिलहाल हालात यह हैं कि एक तरफ अमेरिका दबाव और चेतावनी की रणनीति अपना रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान अपने रुख पर अडिग रहते हुए बातचीत को “सरेंडर नहीं” मानने की बात दोहरा रहा है।

  • ईरान-अमेरिका तनाव: कैरोलिन लेविट को बधाई के साथ ‘मीनाब स्कूल’ हमले का जिक्र, कूटनीतिक बयानबाजी तेज

    ईरान-अमेरिका तनाव: कैरोलिन लेविट को बधाई के साथ ‘मीनाब स्कूल’ हमले का जिक्र, कूटनीतिक बयानबाजी तेज



    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच पहले से जारी तनाव के बीच एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। ईरान ने व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट को उनकी बेटी के जन्म पर बधाई दी, लेकिन उसी संदेश में “मीनाब स्कूल हमले” का उल्लेख कर अमेरिका पर तीखा राजनीतिक वार भी किया।

    बधाई के साथ तीखा संदेश
    आर्मेनिया स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा, 

    बच्चे मासूम होते हैं और उनकी भावनाएं सार्वभौमिक हैं

    लेविट को अपनी खुशी के साथ उन मांओं का दर्द भी याद रखना चाहिए जिन्होंने संघर्ष में अपने बच्चे खोए

    मीनाब स्कूल में मारे गए बच्चों को भी उतना ही मासूम बताया गया।ईरान ने अपने संदेश में यह भी संकेत दिया कि इस तरह की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    क्या है मीनाब स्कूल हमला मामला?
    ईरान का दावा है कि 28 फरवरी को मीनाब क्षेत्र के एक स्कूल पर हुए हमले में भारी जनहानि हुई थी।ईरान के अनुसार: करीब 168 लोगों की मौत। 

    मृतकों में बच्चे, शिक्षक और आम नागरिक शामिल

    ईरान ने इस घटना के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार बताया

    हालांकि, इस घटना को लेकर अलग-अलग देशों और रिपोर्ट्स में भिन्न दावे सामने आते रहे हैं और आधिकारिक पुष्टि को लेकर मतभेद हैं।



    अमेरिका का रुख
    अमेरिकी पक्ष ने शुरुआती प्रतिक्रिया में कहा था कि,अमेरिका नागरिकों को जानबूझकर निशाना नहीं बनाता। घटना संभवतः तकनीकी चूक या मिसफायर का परिणाम हो सकती हैमामले की अलग-अलग जांच रिपोर्ट सामने आई हैं। 

    ट्रंप के बयानों से बढ़ा विवाद
    इस मामले में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान भी सुर्खियों में रहे! उन्होंने बिना प्रमाण ईरान को जिम्मेदार ठहराया थाबाद में दावा किया कि ईरान के पास ऐसी मिसाइल क्षमता है, जिसे विशेषज्ञों ने गलत बताया।बाद में जब रिपोर्ट पर सवाल हुआ तो उन्होंने अनभिज्ञता जताई


    कूटनीति से ज्यादा संदेश की राजनीति
    विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम केवल शिष्टाचार संदेश नहीं, बल्कि 

    अमेरिका पर नैतिक दबाव बनाने की कोशिश

    मानवीय संवेदनाओं के जरिए वैश्विक विमर्श प्रभावित करने का प्रयास

    पहले से तनावपूर्ण रिश्तों में नई तल्खी जोड़ने वाला कदम

    कैरोलिन लेविट को दी गई बधाई के साथ मीनाब स्कूल हमले का जिक्र एक बार फिर अमेरिका-ईरान संबंधों की जटिलता को सामने लाता है। जहां यह संदेश मानवीय भावनाओं से जुड़ा प्रतीत होता है, वहीं इसके पीछे कूटनीतिक और राजनीतिक संदेश भी साफ तौर पर देखा जा रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और गहराने की आशंका बनी हुई है।

  • ईरान-यूएस टकराव चरम पर: IRGC की सीधी चेतावनी, अमेरिकी ठिकाने और जहाज निशाने पर 14-पॉइंट प्रस्ताव पर तनाव जारी

    ईरान-यूएस टकराव चरम पर: IRGC की सीधी चेतावनी, अमेरिकी ठिकाने और जहाज निशाने पर 14-पॉइंट प्रस्ताव पर तनाव जारी


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं, जहां ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने खुली चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि फारस की खाड़ी या होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया, तो जवाब में सीधे अमेरिकी सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों पर हमला किया जाएगा।

    IRGC नौसेना कमांड ने सोशल मीडिया पोस्ट में साफ कहा है कि क्षेत्र में किसी भी तरह की “आक्रामक कार्रवाई” को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं एयरोस्पेस फोर्स ने दावा किया है कि उसके मिसाइल और ड्रोन पहले से ही अमेरिकी ठिकानों और संभावित लक्ष्यों पर लॉक हैं और केवल आदेश का इंतजार है।

    इस बीच, अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वॉशिंगटन ने ईरान के सामने 14 सूत्रीय प्रस्ताव रखा है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने, यूरेनियम संवर्धन पर रोक और क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को लेकर कई सख्त शर्तें शामिल हैं। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि इस प्रस्ताव पर जल्द जवाब की उम्मीद है, लेकिन ईरान ने किसी समयसीमा को मानने से इनकार कर दिया है।

    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि अमेरिकी प्रस्ताव अभी समीक्षा में है और इसका जवाब “उचित समय पर और राष्ट्रीय हितों को देखते हुए” दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि ईरान किसी बाहरी दबाव में निर्णय नहीं करेगा।

    तनाव के बीच खाड़ी क्षेत्र में स्थिति और भी संवेदनशील हो गई है। कतर के पास एक मालवाहक जहाज पर संदिग्ध प्रोजेक्टाइल से हमला और ईरान के खार्ग द्वीप के पास बड़े तेल रिसाव ने समुद्री सुरक्षा और पर्यावरणीय चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेल रिसाव 20 वर्ग मील तक फैल चुका है, जिससे क्षेत्रीय पारिस्थितिकी पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

    इसी बीच अमेरिका के प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि समझौते की स्थिति में ईरान पर लगे प्रतिबंध धीरे-धीरे हटाए जा सकते हैं और उसकी जमी हुई संपत्ति भी जारी की जा सकती है, लेकिन इसके बदले परमाणु गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण जरूरी होगा।

    क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए ब्रिटेन और फ्रांस ने भी अपनी नौसैनिक तैनाती बढ़ा दी है, जबकि रूस ने प्रस्ताव दिया है कि वह ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम को सुरक्षित रखने के लिए तैयार है।

    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट अब वैश्विक ऊर्जा और व्यापार का सबसे संवेदनशील क्षेत्र बन गया है, जहां किसी भी टकराव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

  • ईरान-अमेरिका टकराव पर सस्पेंस गहराया: हमले के दावे पर नहीं लगी मुहर, दुनिया की नजरें खाड़ी पर टिकीं

    ईरान-अमेरिका टकराव पर सस्पेंस गहराया: हमले के दावे पर नहीं लगी मुहर, दुनिया की नजरें खाड़ी पर टिकीं


    नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच समुद्री टकराव को लेकर बड़ा सस्पेंस खड़ा हो गया है। ईरान ने जहां रणनीतिक जलमार्ग में कार्रवाई का दावा किया है, वहीं अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होने की बात कही है। इससे पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े हो गए हैं और हालात अब भी धुंधले बने हुए हैं।

    सबसे अहम बात यह है कि अमेरिका की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यह साफ नहीं हो पा रहा कि जमीनी स्तर पर वास्तव में क्या हुआ है और दोनों देशों के बीच टकराव किस स्तर तक पहुंच चुका है।

    इससे पहले ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिकी सेना इस रणनीतिक जलमार्ग में प्रवेश करती है तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा। यह बयान उस वक्त आया था जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खाड़ी में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए अभियान शुरू करने की घोषणा की थी।

    मौजूदा हालात में एक ओर ईरान के सख्त तेवर हैं, तो दूसरी ओर अमेरिका की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। दावों और हकीकत के बीच की दूरी ने पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा रहस्यमयी बना दिया है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस संवेदनशील टकराव पर टिकी हैं, जहां हर नया अपडेट हालात को और गंभीर बना सकता है।

  • ट्रम्प की ईरान को सख्त चेतावनी: गलती की तो फिर सैन्य कार्रवाई, 14-पॉइंट प्रस्ताव पर संशय बरकरार

    ट्रम्प की ईरान को सख्त चेतावनी: गलती की तो फिर सैन्य कार्रवाई, 14-पॉइंट प्रस्ताव पर संशय बरकरार



    नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को एक बार फिर कड़ी चेतावनी दी है। फ्लोरिडा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रम्प ने कहा कि अगर ईरान किसी तरह की “गलती” करता है तो उस पर दोबारा सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।ट्रम्प ने कहा कि मौजूदा स्थिति में अमेरिका मजबूत स्थिति में है, जबकि ईरान दबाव में दिख रहा है और बातचीत की ओर झुकाव बढ़ा है।

    पाकिस्तान की मध्यस्थता और 14-पॉइंट प्रस्ताव
    ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए ईरान की ओर से एक 14-पॉइंट प्रस्ताव अमेरिका को मिला है।उन्होंने बताया कि इस प्रस्ताव का विस्तृत ड्राफ्ट अभी समीक्षा में है, लेकिन शुरुआती संकेतों के आधार पर उन्हें नहीं लगता कि यह स्वीकार्य होगा।ट्रम्प के मुताबिक,ईरान ने पिछले कई दशकों में जो रवैया अपनाया है, उसकी अभी तक पूरी कीमत नहीं चुकाई गई है।

    क्या है ईरान का प्रस्ताव?
    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान का यह 14-पॉइंट प्रस्ताव अमेरिका के 9-पॉइंट प्लान के जवाब में तैयार किया गया है। इसमें कई प्रमुख शर्तें शामिल हैं
    30 दिनों के भीतर सभी विवादों का समाधान
    भविष्य में हमले न होने की गारंटी
    ईरान से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी
    फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों की रिहाई
    ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना
    युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा
    होर्मुज स्ट्रेट के लिए नया मैकेनिज्म
    समुद्री नाकेबंदी खत्म करने की मांग
    परमाणु कार्यक्रम पर अलग से बातचीत

    मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ा
    ईरान और अमेरिका के बीच तनाव केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी हालात भी तेजी से बदल रहे हैं।
    ईरान ने अमेरिका के साथ फिर से युद्ध की आशंका जताई है और अपनी सेना को तैयार बताया है
    अमेरिका का दावा है कि पिछले कुछ हफ्तों में कई जहाजों ने ईरानी जलक्षेत्र से दूरी बनाई है
    ईरान होर्मुज स्ट्रेट को लेकर नया कानून लाने की तैयारी में है
    क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ा है

    तेल और वैश्विक बाजार पर असर
    तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC+ की बैठक में उत्पादन बढ़ाने पर चर्चा हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्पादन में प्रतिदिन लगभग 1.88 लाख बैरल की बढ़ोतरी संभव है।वहीं UAE के OPEC से अलग होने के फैसले ने वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है।

    समुद्री रास्तों और सुरक्षा पर दबाव
    अमेरिका ने मिडिल ईस्ट देशों को 8.6 अरब डॉलर के हथियार सौदों को मंजूरी दी है
    इजराइल, कुवैत, कतर और UAE को एडवांस डिफेंस सिस्टम मिलेंगे
    ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में विदेशी जहाजों पर नियंत्रण बढ़ाने का संकेत दिया है
    एक ईरानी टैंकर के अमेरिकी नाकेबंदी को चकमा देने का दावा भी सामने आया है

    बढ़ता तनाव और अनिश्चित भविष्य
    ईरान और अमेरिका के बीच चल रही इस खींचतान में कूटनीति और टकराव दोनों समानांतर चलते दिखाई दे रहे हैं। जहां एक ओर बातचीत के प्रस्ताव सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य तैयारियां और सख्त बयानबाजी भी तेज हो गई है।डोनाल्ड ट्रम्प की चेतावनी और ईरान के प्रस्ताव ने वैश्विक राजनीति में एक बार फिर तनाव बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह मामला बातचीत की ओर बढ़ता है या टकराव और गहराता है।
    ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि गलती होने पर सैन्य कार्रवाई हो सकती है और 14-पॉइंट प्रस्ताव पर भी उन्होंने संदेह जताया है।मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तर पर स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है

  • मिडिल ईस्ट जंग से बदला वैश्विक तेल समीकरण: रूस की चांदी, चीन को 400 अरब डॉलर का झटका

    मिडिल ईस्ट जंग से बदला वैश्विक तेल समीकरण: रूस की चांदी, चीन को 400 अरब डॉलर का झटका


    नई दिल्‍ली । मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के खतरे ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव ला दिया है। कच्चे तेल की कीमतें तेजी से आसमान छू रही हैं शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी जा रही है और कई देशों में ऊर्जा संकट की आशंका गहराने लगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो दुनिया के कई हिस्सों में महंगाई और खाद्य संकट भी गहरा सकता है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा फायदा रूस को होता दिखाई दे रहा है जबकि चीन को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

    दरअसल ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पाबंदी लगाने की आशंका और क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण वैश्विक तेल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले तेल पर संकट गहराने के बाद कई देशों ने वैकल्पिक स्रोतों की तलाश शुरू कर दी है। इसका सीधा फायदा रूस को मिला है। यूक्रेन युद्ध के बाद जिन पश्चिमी देशों ने रूस के तेल पर प्रतिबंध लगा दिया था अब वही देश वैश्विक सप्लाई को स्थिर रखने के लिए रूसी तेल की ओर रुख कर रहे हैं।

    यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस के तेल निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। उस समय रूस को अपने तेल पर भारी छूट देकर बाजार बनाए रखना पड़ा था। भारत और चीन जैसे देशों ने इस मौके का फायदा उठाते हुए रूस से सस्ते दामों पर बड़ी मात्रा में तेल खरीदा। हालांकि बाद में अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर 25 प्रतिशत तक टैरिफ भी लगाया था। लेकिन अब मिडिल ईस्ट संकट के कारण हालात पूरी तरह बदल गए हैं।

    तेल की मांग बढ़ने के साथ ही रूस ने अपने कच्चे तेल पर मिलने वाली छूट को भी कम कर दिया है। पहले रूसी तेल पर 10 से 13 डॉलर प्रति बैरल तक की छूट मिल रही थी लेकिन अब इसे घटाकर 4 से 5 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है। फरवरी में भारतीय कंपनी HPCL ने रूसी तेल के दो कार्गो 13 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर खरीदे थे लेकिन अब भारतीय रिफाइनरियों को इतनी बड़ी छूट मिलना मुश्किल माना जा रहा है। यही स्थिति अन्य देशों के साथ भी है। इससे साफ है कि बढ़ती मांग के कारण रूस का सरकारी खजाना तेजी से भर रहा है और उसका तेल फिर से वैश्विक बाजार में मजबूत स्थिति में आ गया है।

    दूसरी ओर इस युद्ध का सबसे बड़ा झटका चीन को लगा है। चीन लंबे समय से ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है और भारी छूट पर कच्चा तेल खरीदता रहा है। आंकड़ों के मुताबिक ईरान के कुल तेल निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा चीन ही खरीदता था। लेकिन युद्ध के बाद यह आपूर्ति लगभग ठप हो गई है जिससे चीन की ऊर्जा रणनीति को बड़ा झटका लगा है।

    इसके अलावा चीन और ईरान के बीच 2021 में हुई दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी भी संकट में पड़ती दिख रही है। इस समझौते के तहत चीन ने ईरान में इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा परियोजनाओं में लगभग 400 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया था। लेकिन अमेरिका-ईरान तनाव और संभावित सैन्य कार्रवाई के कारण यह पूरा निवेश अब खतरे में पड़ गया है। नतीजतन चीन को एक साथ दोहरा नुकसान झेलना पड़ रहा है—एक तरफ सस्ते तेल की आपूर्ति बंद हो गई है और दूसरी तरफ उसका विशाल निवेश भी फंसता नजर आ रहा है। इस तरह मिडिल ईस्ट की जंग ने वैश्विक तेल राजनीति का पूरा समीकरण बदल दिया है जहां रूस को अप्रत्याशित फायदा मिल रहा है और चीन के लिए स्थिति लगातार मुश्किल होती जा रही है।