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  • ईरान युद्ध से भारतीय मार्केट भी प्रभावित…., मंगलोर रिफाइनरी को करना पड़ रहा बंद

    ईरान युद्ध से भारतीय मार्केट भी प्रभावित…., मंगलोर रिफाइनरी को करना पड़ रहा बंद


    तेहरान।
    ईरान और अमेरिका-इजराइल (Iran and the US-Israel War) के बीच छिड़ी जंग ने भारतीय मार्केट (Indian Market) को भी प्रभावित किया है। शेयर बाजार से लेकर तेल कारोबार तक में हलचल है। मीडिया में तो ये खबरें भी चल रही थीं कि मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) (Mangalore Refinery and Petrochemicals Limited (MRPL) की रिफाइनरी को बंद किया जा रहा है। अब सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों का कंपनी ने आधिकारिक तौर पर खंडन किया है।


    क्या कहा कंपनी ने?

    कंपनी ने स्पष्ट किया है कि कच्चे तेल की कमी की अटकलों के बावजूद उसका संचालन पूरी तरह से सुचारू रूप से जारी है। सरकारी नियंत्रण वाली इस रिफाइनरी ने शनिवार को ऑयलप्राइस डॉट कॉम द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किए जाने के बाद औपचारिक स्पष्टीकरण जारी किया। वायरल पोस्ट में कहा गया था कि 300,000 बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) की क्षमता वाली रिफाइनरी अपनी इकाइयों को बंद कर रही है क्योंकि क्षेत्रीय तनाव के कारण मध्य पूर्वी कच्चे तेल की आपूर्ति खाड़ी देशों में फंसी हुई है।

    एमआरपीएल ने इन दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है और कहा है कि रिफाइनरी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चल रही है और उसने निकट भविष्य के लिए अपनी आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित कर ली है। एक आधिकारिक बयान में कंपनी ने कहा- हम स्पष्ट करते हैं कि यह तथ्यात्मक रूप से गलत है। एमआरपीएल सामान्य रूप से काम कर रहा है और उसने संचालन जारी रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में कच्चे तेल का इंतजाम कर लिया है। रिफाइनरी बिना किसी यूनिट के बंद हुए अपनी सामान्य क्षमता पर काम कर रही है। कच्चे तेल की कमी की अफवाहों के विपरीत, कंपनी ने पर्याप्त मात्रा में कच्चे तेल का स्टॉक कर लिया है।


    पेट्रोल-डीजल को लेकर अफवाह

    इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और बीपीसीएल जैसी कंपनियों को भी इसी तरह की अफवाहों का सामना करना पड़ा। अफवाह है कि पेट्रोल और डीजल की किल्लत आने वाली है। इसी को लेकर इंडियन ऑयल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया- भारत में पर्याप्त ईंधन भंडार है और आपूर्ति एवं वितरण नेटवर्क सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। इंडियन ऑयल पूरे देश में निर्बाध ईंधन आपूर्ति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। नागरिकों से अनुरोध है कि वे घबराएं नहीं और पेट्रोल पंपों पर भीड़ न लगाएं तथा सटीक जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें। इससे पहले, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि भारत में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है और ऊर्जा उपभोक्ताओं को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।

  • Warning: महामंदी की तरफ बढ़ रही दुनिया…. 7 दिन और चला ईरान युद्ध तो हालात होंगे भयावह!

    Warning: महामंदी की तरफ बढ़ रही दुनिया…. 7 दिन और चला ईरान युद्ध तो हालात होंगे भयावह!


    तेहरान।
    स्कॉटलैंड की संस्था (Scottish Organization) वुड मैकेंजी (Wood Mackenzie) ने मध्य-पूर्व जंग से उपजे संकट को लेकर नई चेतावनी दी है। इसमें दावा किया कि अगर ईरान-इजराइल युद्ध (Iran-Israel War) अगले सात दिन तक और चलता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था 1929 की महा मंदी ‘ग्रेट डिप्रेशन’ के दौर में प्रवेश कर सकती है। इसमें यह भी कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में गतिरोध बने रहने से दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसके परिणाम 1970 के दशक के तेल संकट से भी बड़े होने की संभावना है।


    क्या है महामंदी

    यह 1929 में अमेरिका से शुरू हुई आधुनिक इतिहास की सबसे भयंकर वैश्विक आर्थिक गिरावट थी, जो 1939-40 तक चली। अक्तूबर, 1929 के वॉल स्ट्रीट शेयर बाजार के पतन से शुरू होकर बैंकों के ठप होने, उत्पादन में भारी कमी और रिकॉर्ड तोड़ बेरोजगारी के साथ पूरी दुनिया में फैल गई। सिर्फ अमेरिका में ही 1933 तक 1.5 करोड़ लोग बेरोजगार हो गए थे।

    इसके पीछे 1929 का स्टॉक मार्केट क्रैश, बैंकों का विफल होना, गलत मौद्रिक नीतियां और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कमी जैसे अनेक मिश्रित कारण थे। यह एक दशक तक चलने वाला (1929-1939) आर्थिक संकट था। आर्थिक मंदी द्वितीय विश्व युद्ध (1939) के शुरू होने के साथ समाप्त हुई, जिसने उत्पादन को बढ़ावा दिया और रोजगार के अवसर पैदा किए।


    इस आधार पर आशंका

    वुड मैकेंजी के मुख्य अर्थशास्त्री पीटर मार्टिन के अनुसार, कच्चे तेल के दाम 90 डॉलर प्रति बैरल के पास हैं। हॉर्मुज से गुजरने वाले 1.2 से 1.4 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति रुकने से कीमतें 125-150 डॉलर प्रति बैरेल तक जा सकती हैं। तेल 200 डॉलर प्रति बैरल को पार करता है तो यह 1970 के दशक जैसा झटका होगा।

    मध्य-पूर्व में जारी युद्ध शनिवार को आठवें दिन में प्रवेश कर गया। 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला कर दिया। पिछले एक हफ्ते से जारी लड़ाई में कुल 16 देश प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित हैं, जिससे लाखों लोगों के जीवन और आजीविका को खतरा पैदा हो गया है। हिंसा मध्य एशिया से लेकर यूरोप के छोर तक फैलती जा रही है। अगर ये जंग बढ़ती है तो हालात और भयावह होंगे।

    रिपोर्ट में गैस संकट को लेकर भी चिंता जताई गई है। दुनिया का 20 फीसदी एलएनजी हॉर्मुज से गुजरता है। इसकी रुकावट 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान हुई गैस कटौती से कहीं अधिक गंभीर होगी। इससे यूरोप और एशिया में गैस की कीमतें 130 फीसदी तक बढ़ सकती हैं।

    वुड मैकेंजी का अनुमान है कि तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर रहने से वैश्विक जीडीपी विकास दर 2 फीसदी से नीचे गिर जाएगी। मुख्य अर्थशास्त्री पीटर मार्टिन ने कहा कि यह आधिकारिक तौर पर मंदी और फिर डिप्रेशन जैसे हालात को बढ़ावा देगा। उनके मुताबिक, बेरोजगारी और मुद्रास्फीति के कारण 1930 जैसी लंबी मंदी पैदा हो सकती है।


    ईरान युद्ध के बड़े अपडेट्स

    >>ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार, एक सप्ताह पहले बमबारी शुरू होने के बाद से अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान में 1,230 लोग मारे गए हैं, जबकि पांच हजार से अधिक घायल हैं।
    >>लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने हमलों में 217 की मौत और 798 के घायल हुए, जबकि एक लाख विस्थापित हुए।
    >>इजरायल में 12 नागरिकों की मौत, 1,600 से अधिक घायल हैं
    >>अमेरिका के 6 सैन्य कर्मियों की मौत की पुष्टि हुई और 20 घायल हैं।
    >>कुवैत में चार, यूएई तीन, बहरीन दो और ओमान में एक मौत हुई
    >>युद्ध के पहले 5 दिनों में वैश्विक शेयर बाजारों से लगभग 3.2 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 265 लाख करोड़ रुपये) का नुकसान होने का अनुमान है। इसमें डॉव जोन्स और एशियाई बाजारों में 2 मार्च को गिरावट दर्ज की गई।
    >>हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहने से वैश्विक मुद्रास्फीति में 1 फीसदी तक की वृद्धि का अनुमान है।
    >>ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें शनिवार को 92 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई। संघर्ष लंबा चलने पर 100-130 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है, जिससे पूरी दुनिया में माल ढुलाई 20 फीसदी महंगी हो जाएगी।
    >>हॉर्मुज के रास्ते 20 फीसदी तेल और एलएनजी की सप्लाई रुकने से चीन, भारत, जापान जैसे देशों की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में है।
    >>पिछले एक हफ्ते में दुनियाभर में 21,300 से अधिक उड़ानें रद्द की गई
    >>दुनिया भर के हवाई अड्डों पर 6 लाख से अधिक यात्री फंसे हुए।
    >>एयर इंडिया, इंडिगो, एमिरेट्स और कतर एयरवेज ने अपनी सेवाओं को निलंबित कर दिया है या रूट बदल दिए, जिससे प्रति उड़ान लागत 60,000 डॉलर तक बढ़ गई
    >>भारत से यूरोप जाने वाली उड़ानों को अब लंबा चक्कर काटकर जाना पड़ रहा है, जिससे कीमतें बढ़ गई हैं।

  • ईरान युद्ध के बीच 52 हजार भारतीय लौटे स्वदेश, विदेश मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी

    ईरान युद्ध के बीच 52 हजार भारतीय लौटे स्वदेश, विदेश मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी



    नई दिल्ली। भारत ने शनिवार को कहा कि वह पश्चिम एशिया में उभरती सुरक्षा स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है और विदेश में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय ने देर रात जारी बयान में बताया कि पूरे क्षेत्र में हवाई मार्ग आंशिक रूप से खुलने के बाद 52,000 से अधिक भारतीय स्वदेश लौट आए हैं। मंत्रालय ने क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों से स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों और भारतीय मिशनों द्वारा जारी सलाह का पालन करने का आग्रह किया।

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि सरकार विदेश में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण के लिए हर संभव सहायता प्रदान कर रही है और जरूरत पड़ने पर सभी लोगों को सुविधा उपलब्ध कराने के लिए क्षेत्र की स्थानीय सरकारों के साथ काम कर रही है। वर्तमान में पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति अनिश्चित बनी हुई है क्योंकि अमेरिका और इजराइल ने ईरानी ठिकानों पर बमबारी जारी रखी है, जबकि ईरान ने पूरे क्षेत्र में अमेरिकी और इजराइली ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है।

    मिशनों की हेल्पलाइन और सुरक्षा सलाह

    विदेश मंत्रालय ने बताया कि क्षेत्र में भारतीय मिशनों ने विस्तृत सलाह जारी की है और सहायता के लिए 24 घंटे चालू रहने वाली हेल्पलाइन भी स्थापित की गई है।

    हवाई परिचालन प्रभावित, 100 उड़ानें रद्द

    पश्चिम एशिया संकट के कारण शनिवार को दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों पर कम से कम 100 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गईं। अधिकारियों के अनुसार, मुंबई हवाई अड्डे से 35 प्रस्थान और 36 आगमन उड़ानें रद्द हुईं, जबकि दिल्ली हवाई अड्डे से 22 प्रस्थान और 17 आगमन उड़ानें रद्द हुईं।

    दिल्ली हवाई अड्डे के संचालक डीआईएएल ने कहा कि पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति के कारण पश्चिम की ओर जाने वाली कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में देरी या समय-सारणी में बदलाव हो सकता है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच 28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया में कुछ हवाई क्षेत्र बंद कर दिए गए हैं, जिससे कई एयरलाइन कंपनियां सीमित संख्या में ही उड़ानों का संचालन कर रही हैं।

  • घरेलू गैस सिलेंडर महंगे, ईरान-इजराइल जंग के चलते सप्लाई संकट का खतरा; सरकार ने LPG उत्पादन बढ़ाने का इमरजेंसी आदेश दिया

    घरेलू गैस सिलेंडर महंगे, ईरान-इजराइल जंग के चलते सप्लाई संकट का खतरा; सरकार ने LPG उत्पादन बढ़ाने का इमरजेंसी आदेश दिया



    नई दिल्ली। देश में घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में अचानक बढ़ोतरी हुई है। 14.2 किग्रा वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत अब 913 रुपए हो गई है, जो पहले 853 रुपए में मिलती थी। वहीं, 19 किग्रा वाले कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम 1883 रुपए हो गए हैं, यानी 115 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़ोतरी 7 मार्च से लागू हो गई है।

    अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का असर
    सरकार ने गैस के दामों में इजाफा ऐसे वक्त में किया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ रहा है और देश में रसोई गैस की किल्लत की आशंका जताई जा रही है।

    एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश
    इस खतरे को देखते हुए 5 मार्च को सरकार ने सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया। अब रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल सिर्फ रसोई गैस बनाने के लिए करेंगी। सभी कंपनियों को सप्लाई सरकारी तेल कंपनियोंIOC, HPCL और BPCLको करनी होगी। इसका मकसद आम जनता को बिना रुकावट सिलेंडर उपलब्ध कराना है।

    सप्लाई संकट की दो बड़ी वजहें
    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का लगभग बंद होना
    भारत अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल और 54% LNG स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए आयात करता है। यह 167 किमी लंबा जलमार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के चलते यह रूट अब सुरक्षित नहीं है, जिससे तेल टैंकर नहीं गुजर रहे।

    कतर के LNG प्लांट पर ड्रोन हमले के बाद प्रोडक्शन रुका
    अमेरिका-इजराइल के स्ट्राइक के जवाब में ईरान ने UAE, कतर, कुवैत और सऊदी में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले किए। इसके बाद कतर ने अपने LNG प्लांट का प्रोडक्शन रोक दिया। भारत अपनी सालाना LNG जरूरत का लगभग 40% हिस्सा कतर से ही मंगाता है।सरकार अब इस संकट को देखते हुए एलपीजी उत्पादन बढ़ाकर घरेलू आपूर्ति को सुरक्षित बनाने में जुट गई है।

  • Iran war: पश्चिम एशिया में फंसे लोगो की वापसी की तैयारी में जुटी सरकार.. आज 58 फ्लाइट्स भरेंगी उड़ान

    Iran war: पश्चिम एशिया में फंसे लोगो की वापसी की तैयारी में जुटी सरकार.. आज 58 फ्लाइट्स भरेंगी उड़ान

    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहे तनाव के कारण हवाई सेवाओं पर बड़ा असर पड़ा है। इस बीच केंद्र सरकार (Central Government) ने मंगलवार को जानकारी दी कि एयरलाइनों ने अपनी उड़ानों के शेड्यूल में सावधानीपूर्वक बदलाव किए हैं और 4 मार्च को कुल 58 उड़ानें संचालित करने की योजना बनाई है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) ने बताया कि फंसे हुए यात्रियों की मदद के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर एयरलाइंस अतिरिक्त उड़ानें चला रही हैं और विदेशी विमानन प्राधिकरणों तथा भारतीय दूतावासों के साथ मिलकर काम कर रही हैं, ताकि यात्रियों की सुरक्षित और व्यवस्थित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।

    मंत्रालय के अनुसार, आज भारतीय एयरलाइनों की तरफ से 24 उड़ानें संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा पिछले 24 घंटों में खाड़ी देशों से एमिरेट्स और एतिहाद एयरवेज ने 9 उड़ानें संचालित की हैं। सरकार ने कहा कि वह लगातार एयरलाइनों के संपर्क में है और हवाई किरायों पर नजर रख रही है, ताकि इस संकट के समय टिकट की कीमतों में अनावश्यक बढ़ोतरी न हो। मंत्रालय ने बताया कि भारतीय एयरलाइनों ने लंबी दूरी और अति लंबी दूरी की उड़ानों को वैकल्पिक मार्गों से धीरे-धीरे फिर से शुरू करना शुरू कर दिया है।


    क्या है चार मार्च की योजना?

    ये उड़ानें उन हवाई क्षेत्रों से बचकर चलाई जा रही हैं, जो फिलहाल बंद या प्रतिबंधित हैं। बता दें कि 4 मार्च को कुल 58 उड़ानों की योजना बनाई गई है। इनमें 30 उड़ानें इंडिगो की तरफ से और 23 उड़ानें एअर इंडिया तथा एयर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा संचालित की जाएंगी। भारत और खाड़ी क्षेत्र के बीच विदेशी एयरलाइंस भी सीमित संख्या में उड़ानें चला रही हैं, जो संचालन और हवाई क्षेत्र की स्थिति पर निर्भर हैं। पश्चिम एशिया में अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कई देशों ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ा है।


    डीजीसीए ने दी जानकारी

    मंत्रालय के अनुसार, अब तक भारतीय एयरलाइनों की 1,221 उड़ानें और विदेशी एयरलाइनों की 388 उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं। केवल मंगलवार को ही भारतीय एयरलाइनों ने 104 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कीं। 28 फरवरी से अब तक तीन दिनों में कुल 1,117 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द हुई हैं। सरकार ने सभी एयरलाइनों को निर्देश दिया है कि वे यात्रियों को स्पष्ट और समय पर जानकारी दें तथा रिफंड, री-शेड्यूलिंग और अन्य सहायता से जुड़े नियमों का पालन करें।


    एअर इंडिया ने क्या जानकारी दी?

    इस बीच एअर इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि पश्चिम एशिया की स्थिति को देखते हुए उसने संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इस्राइल और कतर के लिए अपनी अधिकांश उड़ानों को 4 मार्च 2026 की रात 11:59 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया है। एयरलाइन ने कहा है कि वह क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और आगे की स्थिति के अनुसार निर्णय लेगी। इसके साथ ही सरकार ने भरोसा दिलाया है कि वह एयरलाइनों, एयरपोर्ट ऑपरेटरों, नियामक संस्थाओं और विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रही है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और सेवाओं को धीरे-धीरे सामान्य किया जा सके।

  • Iran War: 3 दिन में एक हजार से अधिक फ्लाइट्स हुई रद्द, जानें दिल्ली Airport के हाल?

    Iran War: 3 दिन में एक हजार से अधिक फ्लाइट्स हुई रद्द, जानें दिल्ली Airport के हाल?


    नई दिल्ली।
    ईरान युद्ध (Iran War) के कारण दिल्ली एयरपोर्ट (Delhi Airport) से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हुई हैं। मंगलवार को परिचालन संबंधी बाधाओं की वजह से 80 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें (International Flights) रद्द करनी पड़ीं जिनमें 36 प्रस्थान और 44 आगमन उड़ानें शामिल थीं। पिछले तीन दिनों में कुल 1,117 उड़ानें प्रभावित हुई हैं। दिल्ली एयरपोर्ट प्रशासन डायल ने फंसे हुए यात्रियों की सुविधा के लिए बैठने की अतिरिक्त व्यवस्थाएं अधिक चिकित्सा दल और सफाई टीमें तैनात की हैं ताकि यात्रियों को कम परेशानी हो।

    एक अधिकारी ने बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण मंगलवार सुबह दिल्ली एयरपोर्ट पर कुल 80 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। इनमें 36 प्रस्थान और 44 आगमन उड़ानें शामिल हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि एमिरेट्स जैसी कुछ एयरलाइन्स ने पश्चिम एशिया के लिए अपनी सेवाएं आंशिक रूप से फिर से शुरू कर दी हैं।

    उड़ानों पर नजर रखने वाली वेबसाइट ‘फ्लाइटरडार24 डॉट कॉम’ पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दुबई जा रही एमिरेट्स की उड़ान ईके-513 हवाई क्षेत्र के प्रतिबंधों की वजह से दिल्ली वापस आ गई। दिल्ली एयरपोर्ट प्रशासन डायल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि पश्चिम एशिया की मौजूदा राजनीतिक स्थिति के कारण पश्चिम की ओर जाने वाली कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में देरी हो रही है या समय-सारिणी में बदलाव किया जा रहा है।

    पिछले 3 दिन में पश्चिम एशिया संकट की वजह से भारतीय एयरलाइनों ने 1,117 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी हैं। इसी दौरान एयर इंडिया ने मंगलवार को दुबई से दिल्ली के लिए एक उड़ान भरी जिसमें 149 यात्री शामिल थे। एयरलाइन ने एक्स पर जानकारी दी कि वे उड़ान एआई 916डी से दुबई से आए यात्रियों और चालक दल का स्वागत करते हैं। पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात के बीच यह किसी भारतीय एयरलाइन की पहली उड़ान है जो आज 149 यात्रियों और चालक दल के आठ सदस्यों के साथ नई दिल्ली पहुंची।

    दुबई में फंसे एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस के 143 क्रू सदस्य मंगलवार को एअर इंडिया की विशेष उड़ान एआई918डी से दिल्ली लौट आए। इसके साथ ही दुबई से एमिरेट्स की एक अन्य उड़ान ईके512 भी मंगलवार तड़के दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरी जबकि संकट के कारण रद्द हुई उड़ानों के यात्रियों की मदद के लिए डायल ने कई जरूरी कदम उठाए हैं। अधिकारी ने बताया कि फंसे हुए यात्रियों के लिए बैठने की 400 से अधिक अतिरिक्त व्यवस्थाएं की गई हैं। यही नहीं दो अतिरिक्त मेडिकल टीम भी तैनात की गई हैं।

  • US के लिए लंबी और महंगी चुनौती साबित हो सकता है ईरान युद्ध… अमेरिकी रणनीतिकार नहीं लगा पाए अंदाजा

    US के लिए लंबी और महंगी चुनौती साबित हो सकता है ईरान युद्ध… अमेरिकी रणनीतिकार नहीं लगा पाए अंदाजा


    तेहरान।
    पश्चिम एशिया (West Asia) में छिड़ा संघर्ष अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जिसकी कल्पना शायद अमेरिकी युद्ध नीतिकारों (American War Policymakers) ने नहीं की थी। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी (Operation Epic Fury) के जरिये खामनेई के खात्मे के बाद यह युद्ध अमेरिका के लिए किसी त्वरित जीत के बजाय एक लंबी और महंगी चुनौती साबित हो सकता है। ईरान की रणनीति अमेरिका को लंबे और थका देने वाले युद्ध की ओर धकेलने की दिख रही है। अमेरिकी अड्डों पर हुए मिसाइल हमलों और कुवैत में कई लड़ाकू विमान गिराए जाने की सूचनाओं ने वाशिंगटन की वॉर गेमिंग पर सवाल खड़े किए हैं। अमेरिका सऊदी अरब के तेल क्षेत्रों और व्यापारिक केंद्रों की सुरक्षा ढाल बनने में नाकाम रहा है। यह अमेरिकी योजना के बिल्कुल विपरीत है।


    ईरान की रणनीति

    ईरान की रणनीति वॉर ऑफ एट्रिशन यानी लंबे और थकाऊ युद्ध की है। अमेरिका और इस्राइल की बेहतर एयरपावर से बचाव के लिए उसने अपने अहम हथियार भूमिगत बंकरों में सुरक्षित कर लिए हैं। उसका इरादा ड्रोन एवं मिसाइलों से अमेरिका के प्रतिष्ठित ठिकानों पर निशाना साधने का है। इससे दुश्मन के अजेय होने की छवि को नुकसान पहुंचेगा और घरेलू मोर्चे पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ेगा।

    जमीनी हमला: विशेषज्ञों की राय में ईरान की कोशिश दुश्मन को जमीनी आक्रमण के लिए उकसाने की दिख रही है। युद्ध जमीन पर आने पर ईरान की बड़ी सेना व दुर्गम भौगोलिक परिस्थितयां अमेरिका व इस्राइल के लिए इसे अफगानिस्तान या वियतनाम जैसा अंतहीन युद्ध भी बना सकते हैं।

    अराघची का बयान: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि शीर्ष कमांडरों को खोने के बाद उन्हें फौरन रिप्लेस कर लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि इस युद्ध में दूसरे पक्ष के लिए कोई विजय नहीं है। विकेंद्रीकृत कमान के कारण ईरान का मिसाइल नेटवर्क नेतृत्व की कमी के बावजूद सक्रिय है।

    इस्राइल पर प्रभाव: छोटा देश होने के नाते इस्राइल की अर्थव्यवस्था तेज और निर्णायक युद्ध के लिए बनी है, लंबे युद्ध के लिए नहीं। लाखों नागरिक (रिजर्विस्ट) दफ्तर छोड़कर मोर्चे पर तैनात हैं, जिससे हाई-टेक और उत्पादन क्षेत्र प्रभावित रहेगा। ईरान युद्ध को लंबा खींचने में कामयाब रहा तो इस्राइल की अर्थव्यवस्था पतली हो सकती है, इसलिए इस्राइल युद्ध को जल्द खत्म करने के लिए आक्रामक रुख अपनाता है।


    विशेषज्ञ की राय

    रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल जीडी बख्शी ने कहा कि ट्रंप ने बहुत बड़ी गलती की है। पहली ही स्ट्राइक में ईरान का शीर्ष नेतृत्व साफ कर दिया। अब इस युद्ध पर नियंत्रण नहीं रह गया है। इससे वैश्विक मंदी आ सकती है, जिससे अमेरिका भी अछूता नहीं रहेगा। ईरान ने इनका युद्धपोत हिट किया तो 250 सैनिक मारे जाएंगे। अब यह अपना एयरक्राफ्ट कैरियर लिंकन छुपाते फिर रहे हैं। ट्रंप बुरी तरह फंसने वाले हैं। उनके खिलाफ महाभियोग भी चलाया जाए तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा।