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  • ईरान से तनाव कम करने जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने बातचीत बहाल करने पर दिया जोर

    ईरान से तनाव कम करने जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने बातचीत बहाल करने पर दिया जोर

    बर्लिन। जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर ईरान से हमले रोकने और कूटनीतिक बातचीत फिर से शुरू करने की अपील की है। तीनों देशों ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि हालिया घटनाएं हालात को और गंभीर बना सकती हैं।
    संयुक्त बयान में हमलों की निंदा
    तीनों देशों के नेताओं—फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर—ने संयुक्त बयान जारी कर क्षेत्र के अन्य देशों पर ईरानी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। बयान में कहा गया कि हालात को बिगाड़ने वाले कदमों से बचना जरूरी है और संवाद ही समाधान का रास्ता है।
    परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर भी चिंता
    नेताओं ने ईरान से उसके परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने, बैलिस्टिक मिसाइल गतिविधियों पर रोक लगाने और अपने नागरिकों के खिलाफ कथित दमन व हिंसा बंद करने की अपील की।
    उनका कहना है कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए विश्वास बहाली के कदम आवश्यक हैं।
    सैन्य भागीदारी से किया इनकार
    तीनों देशों ने स्पष्ट किया कि वे हालिया हमलों में किसी भी तरह शामिल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे अमेरिका, इजरायल और क्षेत्र के अन्य साझेदारों के साथ लगातार संपर्क में हैं, ताकि स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सके।

    क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर
    बयान में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकता मध्य पूर्व में स्थिरता बनाए रखना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। साथ ही इस बात पर बल दिया गया कि अंततः ईरान की जनता को अपना भविष्य स्वयं तय करने का अवसर मिलना चाहिए।

  • ईरान में तबाही: खामनेई की मौत के बाद अयातुल्ला आराफी बने अंतरिम सुप्रीम लीडर, अमेरिका-इजराइल पर ईरानी पलटवार

    ईरान में तबाही: खामनेई की मौत के बाद अयातुल्ला आराफी बने अंतरिम सुप्रीम लीडर, अमेरिका-इजराइल पर ईरानी पलटवार



    नई दिल्ली। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत के अगले दिन ही देश के राजनीतिक और धार्मिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया। 67 वर्षीय अयातुल्ला अलीरेजा आराफी को अंतरिम सुप्रीम लीडर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आराफी लंबे समय से ईरान की धार्मिक-राजनीतिक व्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वे असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के उपाध्यक्ष हैं और गार्जियन काउंसिल के सदस्य रह चुके हैं। वर्तमान में वे ईरान की सेमिनरी प्रणाली का नेतृत्व कर रहे हैं। अब असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स स्थायी सुप्रीम लीडर का चयन करेगी।

    खामनेई की मौत के बाद ईरान में 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिन की छुट्टी घोषित की गई। ईरानी इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि देश ने एक महान नेता खो दिया है। वहीं, ईरानी सेना ने खतरनाक अभियान की चेतावनी दी और अमेरिकी ठिकानों पर हमले की योजना बनाई।

    अमेरिका-इजराइल ने किया आक्रमण

    इजराइल और अमेरिका ने संयुक्त हमले में ईरान पर 24 घंटे में 1,200 से अधिक बम गिराए। इस हमले में सुप्रीम लीडर खामनेई की मौत हुई। उनके ऑफिस कॉम्प्लेक्स पर 30 मिसाइलों से हमला हुआ। हमले में उनके परिवार के सदस्य और 40 कमांडर्स भी मारे गए। इजराइल के पीएम नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने खामनेई की मौत की पुष्टि की।

    इस हमले में 200 से अधिक लोग मारे गए और 740 से ज्यादा घायल हुए। एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 148 छात्राओं की मौत हो गई।

    ईरान का जवाबी हमला

    ईरान ने अमेरिका और इजराइल के हमलों का जवाब देते हुए 9 देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमला किया। इसमें इजराइल पर करीब 400 मिसाइलें दागी गईं। इसके अलावा कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब, UAE में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। दुबई में पाम होटल एंड रिसॉर्ट और बुर्ज खलीफा के पास ड्रोन हमला हुआ।

    पृष्ठभूमि और विवाद

    ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच विवाद के मुख्य कारण हैं: न्यूक्लियर प्रोग्राम पर शक, बैलिस्टिक मिसाइलों का विकास, क्षेत्रीय अस्थिरता और मिडिल ईस्ट में राजनीतिक दखल। अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई। इसके जवाब में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को तेज करने और कठोर बयान देने जैसे कदम उठाए।

    अयातुल्ला अली खामनेई का जीवन

    खामनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को मशहद में हुआ। उन्होंने 1963 में शाह के खिलाफ भाषण दिया और गिरफ्तार हुए। 1979 की इस्लामी क्रांति में वे प्रमुख आंदोलनकारी बने। 1981 में उन पर बम हमले हुए, उसी वर्ष वे ईरान के राष्ट्रपति बने। 1989 में खोमैनी की मौत के बाद उन्हें सुप्रीम लीडर बनाया गया। समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का मजबूत रक्षक मानते हैं, जबकि आलोचक कट्टर शासन का आरोप लगाते हैं।

  • युद्ध लंबा चला तो ईरान टिक नहीं पाएगा, चीन का समर्थन भी पर्याप्त नहीं, जाने एक्सपर्ट्स का विश्लेषण

    युद्ध लंबा चला तो ईरान टिक नहीं पाएगा, चीन का समर्थन भी पर्याप्त नहीं, जाने एक्सपर्ट्स का विश्लेषण


    नई दिल्ली। अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते सैन्य टकराव और इजरायल पर हुए हमलों के बाद मध्य-पूर्व के कई देशों में युद्ध जैसी स्थिति बन चुकी है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वह लंबे समय तक अमेरिका और इजरायल जैसे शक्तिशाली देशों का मुकाबला कर सके।

    अमेरिका के तीन प्रमुख लक्ष्य
    सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल राजेन्द्र सिंह के अनुसार, अमेरिका के ईरान पर हमले के पीछे तीन मुख्य उद्देश्य हैं: ईरान में सत्ता परिवर्तन लाना, उसके मिसाइल कार्यक्रम को नष्ट करना और परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ने से रोकना। अमेरिका चाहता है कि ईरान भविष्य में किसी भी प्रकार का खतरा न बन सके।

    वहीं, ईरान की जवाबी कार्रवाई केवल उन हमलों का प्रतिकार है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि उसकी ताकत इतनी नहीं कि वह लंबे समय तक संघर्ष जारी रख सके। उसे अपने मिसाइल और सीमित संसाधनों के सहारे अमेरिका और इजरायल का मुकाबला करना कठिन होगा, इसलिए अंततः बातचीत की मेज पर आने की नौबत आएगी।

    ईरान की सीमित ताकत

    पूर्व एयर वाइस मार्शल ओपी तिवारी के अनुसार, ईरान की एयरफोर्स कमजोर है और हिज़बुल्ला तथा कुछ शिया संगठनों का समर्थन पहले जैसा नहीं रहा। जबकि रूस फिलहाल हथियारों की मदद नहीं दे सकता, चीन कुछ हथियारों से सहायता कर सकता है, लेकिन यह भी अमेरिका और इजरायल के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि ईरान के लिए लंबा युद्ध संभव नहीं और उसकी संभावित तबाही तय है।

    तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

    विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध से मध्य-पूर्व में तेल की कीमतों में इजाफा हो रहा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। भारत इन देशों से तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों और आपूर्ति में बाधा देश के लिए चुनौती बनेगी। अमेरिका के पास वेनेजुएला से तेल का विकल्प मौजूद है, जबकि भारत रूस से तेल खरीदने का विकल्प इस्तेमाल कर सकता है।

    भारतीय नागरिकों की सुरक्षा चुनौती
    लेफ्टिनेंट जनरल राजेन्द्र सिंह ने बताया कि ईरान, इजरायल, कतर, सऊदी अरब, बहरीन और यूएई में लाखों भारतीय नागरिक रहते हैं। युद्ध की स्थिति में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण होगा। हालांकि ईरान के हमले ज्यादातर अमेरिकी बेसों को निशाना बना रहे हैं, लेकिन मिसाइलों के भटकने का खतरा भी पूरी तरह टला नहीं जा सकता।
  • इजरायल-ईरान संघर्ष: भारत पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और अर्थव्यवस्था पर असर

    इजरायल-ईरान संघर्ष: भारत पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और अर्थव्यवस्था पर असर


    नई दिल्ली। शनिवार को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई की, जिससे मध्यपूर्व में तनाव चरम पर पहुँच गया है। ईरान दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में से एक है और इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता की चेतावनी सामने आई है। तेल की सप्लाई बाधित होने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिसका असर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर सीधे पड़ेगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस हमले का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिख सकता है। अनिश्चितता के चलते निवेशक बड़े पैमाने पर बिकवाली कर सकते हैं, जिससे बाजार में दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल भारतीय बाजार इस हमले के बाद ईरान की प्रतिक्रिया और अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। बाजार की चाल मुख्य रूप से इस तनाव की अवधि और गंभीरता पर निर्भर करेगी।

    भारत में कच्चे तेल की मौजूदा कीमत लगभग 67 डॉलर प्रति बैरल है, और हाल ही में इसमें लगभग 2% की बढ़ोतरी हुई है। यदि ईरान पर यह तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो शॉर्ट और मीडियम टर्म में भारतीय बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। तेल महंगा होने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, पेट्रोल-डीजल, पेंट, एविएशन और टायर बनाने वाली कंपनियों पर सीधा असर पड़ेगा। उत्पादन लागत बढ़ने से उपभोक्ताओं को महंगे उत्पाद खरीदने पड़ सकते हैं।

    महंगाई पर भी इसका असर देखा जा सकता है। ईंधन, परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से देश में महंगाई बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले हफ्तों में बाजार अस्थिर रहेंगे और निवेशकों में बेचैनी बढ़ सकती है।

    सरकारी स्तर पर भी इस संकट को लेकर निगरानी बढ़ा दी गई है। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्टॉक बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति पर नजर रख रहा है। वित्तीय और निवेश संस्थानों को भी निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    संक्षेप में, ईरान पर इजरायल-यूएस हमला भारत के लिए आर्थिक चुनौती लेकर आया है। तेल की कीमतों में तेजी, शेयर बाजार में दबाव और महंगाई में वृद्धि का खतरा बढ़ गया है। ऑयल, एविएशन, पेंट और टायर जैसे सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, इसलिए निवेशकों और उपभोक्ताओं को सतर्कता और समझदारी से आर्थिक फैसले लेने होंगे।

  • तेहरान समेत कई इलाकों में विस्फोट, इजरायल की बड़ी सैन्य कार्रवाई का दावा

    तेहरान समेत कई इलाकों में विस्फोट, इजरायल की बड़ी सैन्य कार्रवाई का दावा


    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय माहौल आज 28 फरवरी 2026 को अचानक तनावपूर्ण हो गया है जब Israel ने Iran पर एक बड़ा सैन्य हमला शुरू कर दिया। इजरायल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने बताया कि यह हमला पहले से किया गया हमला प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक था जिसका उद्देश्य देश पर संभावित खतरे को दूर करना है। इस कार्रवाई के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है और क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति अत्यधिक नाजुक हो गई है। इजरायल ने देश भर में विशेष और स्थायी आपातकाल लागू कर दिया है और नागरिकों से सतर्क रहने को कहा है क्योंकि संभावित मिसाइलों या जवाबी हमलों का खतरा बना हुआ है।

    तेहरान में जोरदार धमाके राजधानी में तनाव फैल गया
    ईरान की राजधानी तेहरान के केंद्र में आज सुबह कई धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं और धुएं का गुबार भी उठता देखा गया। ईरानी मीडिया के अनुसार राजधानी के रिपब्लिक और यूनिवर्सिटी स्ट्रीट जैसे इलाकों में मिसाइलें गिरीं जिससे इलाके में भारी तनाव का माहौल बन गया है। स्थानीय प्रशासन ने सक्रिय सुरक्षा बलों को मौके पर भेज दिया है लेकिन फिलहाल किसी नुकसान या हताहतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। घटनास्थल से धुएं के काले बादल उठते हुए देखे गए और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की चेतावनी जारी की गई है। इस हमले की पृष्ठभूमि और विस्तृत रणनीतिक वजहों पर अभी तक पूर्ण जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन यह घटना क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है।

    क्या है इस हमले के पीछे कारण? ईरान-इजरायल तनाव की पृष्ठभूमि

    विश्लेषकों का कहना है कि यह हमला उन वर्षों से चल रहे तनावों का नवीनतम चरण है जिसमें इजरायल और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम बैलिस्टिक मिसाइल विकास और सैन्य विवाद शामिल रहे हैं। इजरायल लगातार चेतावनी देता रहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल क्षमताएं उसके राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। पिछले साल दोनों देशों के बीच हवाई संघर्ष और मिसाइल दागे जाने जैसे कई घटनाक्रम भी सामने आ चुके हैं। ऐसे में आज का हमला इसी तनाव की परिणति भी माना जा रहा है।

    आपातकाल के बीच कैसा माहौल? नागरिकों के लिए क्या किया गया ऐलान
    इजरायल में आपातकाल के लागू होने के बाद वहां के नागरिकों को संभावित मिसाइल हमलों से निपटने के लिए चेतावनी जारी की गई है। सेना ने एयर राइड सायरन बजाने के साथ सुरक्षा आश्रयों के पास रहने की सलाह दी है और लोगों से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने को कहा गया है। वहीं ईरान ने भी अपनी एयर स्पेस बंद कर दी है और सुरक्षा बलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। इसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा चिंताओं और राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है जिससे आसपास के देशों की सुरक्षा नीति पर भी प्रभाव दिख सकता है।

  • किन मुस्लिम देशों में नहीं खेली जाती होली? रंग दिखने पर मिलती है इतनी कड़ी सजा

    किन मुस्लिम देशों में नहीं खेली जाती होली? रंग दिखने पर मिलती है इतनी कड़ी सजा


    नई दिल्ली । होली भारत का वह त्योहार है जो खुशियों हंसी मजाक और रंगों से भरा होता है. यह त्योहार गिले शिकवे भूलकर आपसी रिश्तों में मिठास घोलने पुराने मतभेद मिटाने और जीवन में नए उत्साह को लाने का प्रतीक माना जाता है. भारत में होली को खुले मैदानों गलियों और सड़कों पर मनाया जाता है जहां बड़े बड़े जुलूस रंगों का उत्सव और पारंपरिक मिठाइयों के साथ धूमधाम होती है लेकिन जब हम सीमाओं के पार झांकते हैं खासकर उन देशों में जहां मुसलमान बहुसंख्यक हैं तो होली का रंग और उत्साह कई तरह से बदल जाता है.

    कई इस्लामिक देशों में धार्मिक और सामाजिक नियम इतने सख्त हैं कि होली को सार्वजनिक रूप से मनाना नामुमकिन है. कुछ जगहों पर यह पूरी तरह प्रतिबंधित है और अगर कोई खुले तौर पर रंग खेलता है तो उसे भारी सजा का सामना करना पड़ सकता है. तो आइए जानते हैं कि किन मुस्लिम देशों में होली नहीं खेली जाती है और रंग दिखने पर कितनी कड़ी सजा मिलती है.

    किन मुस्लिम देशों में होली नहीं खेली जाती है

    अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के बाद धार्मिक नियम बहुत सख्त हो गए हैं. हिंदू और सिख समुदाय की संख्या बहुत कम रह गई है इसलिए होली अब सार्वजनिक रूप से नहीं मनाई जाती है. रंग खेलना या जुलूस निकालना प्रतिबंधित है. त्योहार सिर्फ घर या मंदिर के भीतर ही सीमित है. प्रशासन ने सुरक्षा का आश्वासन तो दिया है लेकिन खुले मैदानों पर कोई उत्सव नहीं होता है. इसलिए अफगानिस्तान में होली का रंग फीका नहीं बल्कि दबा हुआ है. अगर कोई सार्वजनिक रूप से रंग खेलता है तो कानूनी कार्रवाई का खतरा रहता है.

    इसके अलावा सऊदी अरब में गैर इस्लामी त्योहारों के सार्वजनिक आयोजन पर लंबे समय तक सख्ती रही है. भारतीय प्रवासी भी सिर्फ निजी परिसरों या दूतावास में ही होली मना सकते हैं. वहीं अन्य खाड़ी देश जैसे कतर और ओमान मे धार्मिक स्वतंत्रता सीमित है. सार्वजनिक रूप से रंग खेलना नहीं होता है सिर्फ प्रशासन की अनुमति से निजी कार्यक्रम हो सकते हैं. इन देशों में होली का उत्सव पूरी तरह प्रतिबंधित या बहुत सीमित है. अगर कोई सार्वजनिक रूप से रंग खेलता है तो उसे कानूनी कार्रवाई या भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है.

    रंग दिखने पर कितनी कड़ी सजा मिलती है

    कुछ इस्लामिक देशों में होली में रंग खेलना या सार्वजनिक रूप से मनाना कानूनी अपराध माना जाता है और इसके लिए सजा काफी कड़ी हो सकती है. सजा की सीमा देश के कानून और स्थानीय प्रशासन के नियमों पर निर्भर करती है. जैसे अफगानिस्तान में सार्वजनिक रूप से होली के रंग खेलना या जुलूस निकालना गैरकानूनी है. उल्लंघन करने पर गिरफ्तारी जुर्माना या जेल की सजा हो सकती है.

    विशेष रूप से तालिबानी शासन के तहत धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए कोई भी सार्वजनिक आयोजन कठोर रूप से रोका जाता है. वहीं सऊदी अरब में रंग खेलते पकड़े जाने पर अपराधी को गिरफ्तार किया जा सकता है और कुछ मामलों में जेल या प्रत्यर्पण तक हो सकता है. वहीं कतर और ओमान में सार्वजनिक रूप से होली मनाना भी प्रतिबंधित है. उल्लंघन करने पर जुर्माना प्रशासनिक कार्रवाई या अपवित्रता के आरोप लग सकते हैं.

    होली भारत का वह त्योहार है जो खुशियों हंसी मजाक और रंगों से भरा होता है. यह त्योहार गिले शिकवे भूलकर आपसी रिश्तों में मिठास घोलने पुराने मतभेद मिटाने और जीवन में नए उत्साह को लाने का प्रतीक माना जाता है. भारत में होली को खुले मैदानों गलियों और सड़कों पर मनाया जाता है जहां बड़े बड़े जुलूस रंगों का उत्सव और पारंपरिक मिठाइयों के साथ धूमधाम होती है लेकिन जब हम सीमाओं के पार झांकते हैं खासकर उन देशों में जहां मुसलमान बहुसंख्यक हैं तो होली का रंग और उत्साह कई तरह से बदल जाता है.

    कई इस्लामिक देशों में धार्मिक और सामाजिक नियम इतने सख्त हैं कि होली को सार्वजनिक रूप से मनाना नामुमकिन है. कुछ जगहों पर यह पूरी तरह प्रतिबंधित है और अगर कोई खुले तौर पर रंग खेलता है तो उसे भारी सजा का सामना करना पड़ सकता है. तो आइए जानते हैं कि किन मुस्लिम देशों में होली नहीं खेली जाती है और रंग दिखने पर कितनी कड़ी सजा मिलती है.

    किन मुस्लिम देशों में होली नहीं खेली जाती है

    अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के बाद धार्मिक नियम बहुत सख्त हो गए हैं. हिंदू और सिख समुदाय की संख्या बहुत कम रह गई है इसलिए होली अब सार्वजनिक रूप से नहीं मनाई जाती है. रंग खेलना या जुलूस निकालना प्रतिबंधित है. त्योहार सिर्फ घर या मंदिर के भीतर ही सीमित है. प्रशासन ने सुरक्षा का आश्वासन तो दिया है लेकिन खुले मैदानों पर कोई उत्सव नहीं होता है. इसलिए अफगानिस्तान में होली का रंग फीका नहीं बल्कि दबा हुआ है. अगर कोई सार्वजनिक रूप से रंग खेलता है तो कानूनी कार्रवाई का खतरा रहता है.

    इसके अलावा सऊदी अरब में गैर इस्लामी त्योहारों के सार्वजनिक आयोजन पर लंबे समय तक सख्ती रही है. भारतीय प्रवासी भी सिर्फ निजी परिसरों या दूतावास में ही होली मना सकते हैं. वहीं अन्य खाड़ी देश जैसे कतर और ओमान मे धार्मिक स्वतंत्रता सीमित है. सार्वजनिक रूप से रंग खेलना नहीं होता है सिर्फ प्रशासन की अनुमति से निजी कार्यक्रम हो सकते हैं. इन देशों में होली का उत्सव पूरी तरह प्रतिबंधित या बहुत सीमित है. अगर कोई सार्वजनिक रूप से रंग खेलता है तो उसे कानूनी कार्रवाई या भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है.

    रंग दिखने पर कितनी कड़ी सजा मिलती है

    कुछ इस्लामिक देशों में होली में रंग खेलना या सार्वजनिक रूप से मनाना कानूनी अपराध माना जाता है और इसके लिए सजा काफी कड़ी हो सकती है. सजा की सीमा देश के कानून और स्थानीय प्रशासन के नियमों पर निर्भर करती है. जैसे अफगानिस्तान में सार्वजनिक रूप से होली के रंग खेलना या जुलूस निकालना गैरकानूनी है. उल्लंघन करने पर गिरफ्तारी जुर्माना या जेल की सजा हो सकती है.

    विशेष रूप से तालिबानी शासन के तहत धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए कोई भी सार्वजनिक आयोजन कठोर रूप से रोका जाता है. वहीं सऊदी अरब में रंग खेलते पकड़े जाने पर अपराधी को गिरफ्तार किया जा सकता है और कुछ मामलों में जेल या प्रत्यर्पण तक हो सकता है. वहीं कतर और ओमान में सार्वजनिक रूप से होली मनाना भी प्रतिबंधित है. उल्लंघन करने पर जुर्माना प्रशासनिक कार्रवाई या अपवित्रता के आरोप लग सकते हैं.

  • अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दागी नई बैलिस्टिक मिसाइल

    अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दागी नई बैलिस्टिक मिसाइल


    वॉशिंगटन/तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने नई सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है।
    ‘खैबर’ नाम की इस चौथी पीढ़ी की मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 2000 किलोमीटर बताई जा रही है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार मिसाइल का प्रक्षेपण एक गोपनीय स्थान से किया गया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्रीय सुरक्षा हालात संवेदनशील बने हुए हैं और दोनों देशों के बीच सैन्य तथा कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं। अमेरिका की ओर से खाड़ी क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की खबरें भी सामने आती रही हैं।

    परमाणु वार्ता का तीसरा दौर शुरू

    इसी बीच दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता का तीसरा दौर जेनेवा में शुरू हुआ। यह बातचीत ओमान की मध्यस्थता में हो रही है। वार्ता का उद्देश्य परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को कम करना और कूटनीतिक समाधान तलाशना है।

    ईरान ने परमाणु हथियार बनाने से किया इनकार

    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि उनका देश परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में काम नहीं कर रहा है। उन्होंने दोहराया कि देश के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई पहले ही परमाणु हथियारों के विकास पर प्रतिबंध लगा चुके हैं।

    पेजेशकियन के अनुसार, “जब सर्वोच्च नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि परमाणु हथियार नहीं बनाए जाएंगे, तो ईरान उसी नीति पर कायम है।”

    पुराना विवाद, नई कोशिश

    गौरतलब है कि 2000 के दशक की शुरुआत में खामेनेई ने एक धार्मिक आदेश (फतवा) जारी कर परमाणु हथियारों के निर्माण को प्रतिबंधित बताया था। इसके बावजूद अमेरिका लगातार ईरान पर परमाणु क्षमता हासिल करने की कोशिश करने का आरोप लगाता रहा है।

    विश्लेषकों के अनुसार, एक ओर जहां मिसाइल परीक्षण शक्ति प्रदर्शन का संकेत है, वहीं दूसरी ओर जारी कूटनीतिक वार्ता इस बात का संकेत देती है कि दोनों देश टकराव से बचते हुए समाधान की संभावनाएं भी तलाश रहे हैं।

  • ईरान पर कभी भी हमला कर सकता है US…. मिडल ईस्ट में तैनात किया बड़ा सैन्य बेड़ा!

    ईरान पर कभी भी हमला कर सकता है US…. मिडल ईस्ट में तैनात किया बड़ा सैन्य बेड़ा!


    वाशिंगटन।
    ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi) और उनका प्रतिनिधिमंडल पिछले सप्ताह ओमान (Oman) में हुए अप्रत्यक्ष वार्ता के पहले दौर के बाद रविवार को स्विट्जरलैंड (Switzerland) की राजधानी जिनेवा (Geneva) पहुंचा है। ओमान जिनेवा में होने वाली वार्ता में मध्यस्थता करेगा।
    ×

    अमेरिका (America) ईरान पर कभी भी हमला कर सकता है और अगर दोनों देशों के बीच जारी परमाणु वार्ता फेल हुई तो ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। यह दावे पूर्व अमेरिकी रक्षा अधिकारी (Former US Defense Official) ने किए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बीते कई हफ्तों से जारी तनाव के बीच अमेरिका की पूर्व असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ डिफेंस फॉर इंटरनेशनल सिक्योरिटी अफेयर्स सेलेस्टे ए. वॉलेंडर (Celeste A. Wallander) ने कहा है कि अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में बहुत बड़ा सैन्य बेड़ा तैनात कर दिया है और यह इस बात का इशारा है कि अगर बातचीत फेल होती है तो अमेरिका ईरान पर हमले के लिए पूरी तरह तैयार है।

    पूर्व पेंटागन अधिकारी ने एक इंटरव्यू में यह बातें कही हैं। वॉलेंडर के मुताबिक अमेरिका ने इलाके में अपना सबसे बड़ा सैन्य बेड़ा यूंही नहीं भेजा है या यह सिर्फ संदेश देने के लिए नहीं है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका ने ईरान पर पहले से कहीं ज्यादा दबाव बनाया है और उसे सामान्य डिटरेंस सिग्नलिंग के बजाय संभावित मिलिट्री एक्शन की चेतावनी के तौर पर समझा जाना चाहिए।

    युद्ध की तैयारी कर रहा अमेरिका
    वॉलेंडर ने कहा कि अमेरिका इमरजेंसी की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा, “अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में जिस तरह के मिलिट्री एयरक्राफ्ट कैरियर भेजे हैं, वे ईरान पर दबाव डालने के लिए अमेरिका द्वारा पहले की गई मिलिट्री डिप्लॉयमेंट की तुलना में काफी अलग हैं।” उन्होंने आगे कहा कि हालांकि इस तरह की तैनाती संदेश देने और डराने के लिए काम आ सकती हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति से पता चलता है कि अमेरिका सिर्फ ताकत नहीं दिखा रहा है। बल्कि अमेरिका इमरजेंसी के लिए तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान को अमेरिका के साथ बातचीत करने के तरीके खोजने होंगे।”


    एक और युद्धपोत तैनात

    पूर्व पेंटागन अधिकारी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सबसे उन्नत और परमाणु संचालित विमानवाहक पोत ‘यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड’ और उसके स्ट्राइक ग्रुप को कैरिबियन सागर से हटाकर पश्चिम एशिया में तैनात करने का आदेश दिया है। यह युद्धपोत अब फारस की खाड़ी और अरब सागर क्षेत्र में पहले से मौजूद ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ और उसके सहायक बेड़े के साथ शामिल हो गया है। इससे ईरान पर कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तरों पर दबाव बढ़ गया है। बताया जा रहा है कि ओमान में ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम पर चल रही अप्रत्यक्ष वार्ता में कोई ठोस परिणाम ना मिलने से अमेरिका असंतुष्ट है।


    ट्रंप ने फिर दिया सत्ता परिवर्तन का इशारा

    इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने बीते दिनों एक बार फिर कहा है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन से बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता। ईरान में इस्लामी शासन के अंत के प्रयासों के बारे में पत्रकारों के सवाल पर ट्रंप ने कहा, ”इससे अच्छा और कुछ नहीं हो सकता। वे 47 सालों से सिर्फ बातें कर रहे हैं।” वहीं विमानवाहक पोत की तैनाती के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, “अगर हम कोई समझौता नहीं कर पाए, तो हमें इसकी जरूरत पड़ेगी।” हालांकि अरब देशों ने पहले ही चेतावनी दी है कि किसी भी हमले से क्षेत्रीय संघर्ष भड़क सकता है, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया अब भी गाजा पट्टी में इजराइल-हमास युद्ध के प्रभाव से उबरने की कोशिश कर रहा है।


    दूसरे दौर की बातचीत जल्द

    इस बीच ईरान और अमेरिका मंगलवार को जिनेवा में अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता के दूसरे दौर में प्रवेश करेंगे। ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त रवांची ने तेहरान में बीबीसी को दिए साक्षात्कार में इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि किसी समझौते तक पहुंचने के लिए अमेरिका को अपनी गंभीरता साबित करनी होगी। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ईमानदारी दिखाता है, तो दोनों पक्षों के बीच पुनः शुरू हुई अप्रत्यक्ष वार्ताएं किसी समझौते तक पहुंच सकती हैं। बता दें कि दोनों देशों के बीच वार्ता का पहला दौर छह फरवरी को ओमान की राजधानी मस्कट में हुआ था। रवांची ने कहा कि ईरान की ओर से 60 प्रतिशत तक समृद्ध यूरेनियम को काफी हद तक निष्क्रिय (डायल्यूट) करने की पेशकश इस बात का प्रमाण है कि देश समझौता करना चाहता है। उन्होंने कहा, “अगर वे प्रतिबंधों पर बात करने को तैयार हैं, तो हम इस मुद्दे और अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अन्य विषयों पर चर्चा के लिए तैयार हैं।”

  • ईरान की राजधानी तेहरान के एक बाजार में लगी भीषण आग… मची अफरा-तफरी

    ईरान की राजधानी तेहरान के एक बाजार में लगी भीषण आग… मची अफरा-तफरी


    तेहरान।
    ईरान (Iran) की राजधानी तेहरान (Tehran) से एक बड़ी खबर सामने आई है। मंगलवार को तेहरान के पश्चिमी इलाके, जन्नत आबाद (Jannat Abaad) में स्थित एक बाजार में अचानक भीषण आग (Market Massive Fire) लग गई। आग के कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है, लेकिन जैसे ही आग की सूचना मिली, बचाव कार्य तुरंत शुरू कर दिए गए। दमकल की कई टीमों को मौके पर भेजा गया है और आग बुझाने के प्रयास जारी हैं।


    आग की लपटें और काले धुएं ने मचाई दहशत

    तेहरान की आपातकालीन सेवाओं के अधिकारी मोहम्मद बेहनिया ने बताया कि अब तक इस घटना में किसी की मौत या घायल होने की कोई सूचना नहीं मिली है। हालांकि, आग इतनी भयंकर थी कि उसकी लपटें और काले धुएं के घने बादल शहर के कई हिस्सों से स्पष्ट रूप से देखे जा रहे थे। यह आग जन्नत आबाद इलाके के एक शॉपिंग सेंटर में लगी, जो सैकड़ों दुकानों और छोटे-छोटे स्टॉल से भरा हुआ था।


    सुबह के समय लगी आग, विक्रेताओं और ग्राहकों में अफरातफरी

    आग सुबह करीब 10 बजे जन्नत आबाद शोमाली इलाके के एक बड़े बाजार में लगी। इस दौरान बाजार में विक्रेता और ग्राहक दोनों मौजूद थे। जैसे ही आग फैलने लगी, वहां मौजूद लोग घबराकर इधर-उधर भागने लगे। दमकल विभाग को तुरंत सूचित किया गया और वे घटनास्थल पर पहुंचकर आग बुझाने का प्रयास कर रहे हैं।


    दमकलकर्मियों ने त्वरित प्रतिक्रिया दी

    घटना के बाद, दमकलकर्मियों ने बताया कि आग बहुत तेज़ी से फैल रही थी और मौके पर पहुँचने के बाद वे तुरंत कई दिशाओं से आग को काबू करने का प्रयास करने लगे। सरकारी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दमकल टीमें घटनास्थल पर पहुंची और कई मोर्चों से अग्निशमन कार्य शुरू किया।


    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो

    इस बीच, सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो में बाजार से उठता हुआ घना काला धुंआ और लपटों की ऊंची लहरें साफ देखी जा सकती हैं। आसपास के आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्रों में अफरातफरी का माहौल है। तेहरान के नागरिकों को यह दृश्य बेहद डरावना प्रतीत हो रहा है।


    राहत कार्य जारी, स्थिति नियंत्रण में

    हालांकि अब तक किसी बड़े हादसे की सूचना नहीं है, राहत कार्य जारी है और दमकलकर्मी आग पर काबू पाने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही स्थिति को नियंत्रण में लाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि अभी तक इस घटना में घायलों या संभावित मौतों की संख्या के बारे में सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है और अतिरिक्त जानकारी बाद में जारी की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि आग को आसपास की इमारतों और आवासीय क्षेत्रों में फैलने से रोकने पर मुख्य ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

  • ईरान में दो अलग-अलग धमाकों से पांच की मौत, 14 घायल

    ईरान में दो अलग-अलग धमाकों से पांच की मौत, 14 घायल


    तेहरान।
    ईरान (Iran) में शनिवार को दो अलग-अलग स्थानों पर हुए धमाकों (Strong Explosion) में कम से कम पांच लोगों (Five People) की मौत हो गई, जबकि 14 अन्य घायल हो गए। दोनों घटनाओं के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल पाया है और जांच जारी है।

    ईरानी समाचार चैनल तेहरान टाइम्स के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी शहर अहवाज (Southwestern City Ahvaz) में एक आवासीय इमारत में जोरदार विस्फोट (Strong Explosion) हुआ। शहर के फायर डिपार्टमेंट प्रमुख के हवाले से बताया गया कि इस हादसे में मौके पर ही चार लोगों की मौत हो गई। विस्फोट से इमारत को गंभीर नुकसान पहुंचा और आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

    दूसरी घटना ईरान के दक्षिणी बंदरगाह शहर बंदर अब्बास में सामने आई। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, यहां हुए एक विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 14 लोग घायल हो गए। धमाके की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि एक इमारत की दो मंजिलें पूरी तरह ध्वस्त हो गईं, कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए और आसपास की दुकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा।

    इन घटनाओं के बाद क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। इस बीच, इजराइल ने इन धमाकों से किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है। इजराइल के दो अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ईरान में हुए विस्फोटों से उनका देश किसी भी प्रकार से जुड़ा नहीं है।

    सोशल मीडिया पर इन धमाकों को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं, जिनमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के नौसेना कमांडर को निशाना बनाए जाने की बात भी शामिल है। हालांकि, अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम ने इन दावों को पूरी तरह झूठा बताते हुए खारिज कर दिया है।

    ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, होर्मोजगान प्रांत के क्राइसिस मैनेजमेंट के महानिदेशक मेहरदाद हसनजादेह ने कहा कि दोनों विस्फोटों के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि घायलों को आपातकालीन सेवाओं की मदद से अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।