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  • मध्य पूर्व में शांति समझौते की उम्मीद से चमकी बुलियन मार्केट, सोना 1.50 लाख के पार तो चांदी ने भी दिखाई जोरदार तेजी

    मध्य पूर्व में शांति समझौते की उम्मीद से चमकी बुलियन मार्केट, सोना 1.50 लाख के पार तो चांदी ने भी दिखाई जोरदार तेजी

    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच शांति समझौते की संभावनाओं ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में नई ऊर्जा का संचार किया है। इसी सकारात्मक माहौल का असर भारतीय कमोडिटी बाजार में भी दिखाई दिया, जहां सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई। निवेशकों के बीच बढ़े विश्वास और वैश्विक जोखिम धारणा में सुधार के कारण दोनों कीमती धातुओं में खरीदारी का रुझान मजबूत रहा।

    शुक्रवार सुबह मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर अगस्त डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव में तेजी देखने को मिली। कारोबार की शुरुआत से ही सोना मजबूत स्तर पर खुला और दिन के शुरुआती सत्र में 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्तर निवेशकों की मनोवैज्ञानिक धारणा के लिहाज से काफी अहम माना जाता है और इसके ऊपर टिके रहना बाजार की मजबूती का संकेत देता है।

    चांदी के बाजार में भी इसी तरह का रुख देखने को मिला। जुलाई डिलीवरी वाली चांदी ने मजबूत शुरुआत की और कारोबार के दौरान 2.40 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से ऊपर पहुंच गई। औद्योगिक मांग, निवेशकों की दिलचस्पी और वैश्विक बाजारों में सुधरते संकेतों ने चांदी को भी मजबूती प्रदान की। बाजार विश्लेषकों के अनुसार चांदी में फिलहाल रिकवरी का क्रम जारी है, हालांकि इसमें उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है।

    कीमती धातुओं में यह तेजी उस समय सामने आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। हालिया बयानों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है। इससे वैश्विक निवेशकों के बीच जोखिम लेने की क्षमता में सुधार हुआ है, जिसका प्रभाव शेयर बाजारों के साथ-साथ कमोडिटी बाजारों पर भी दिखाई दिया।

    बुलियन बाजार के आंकड़ों के अनुसार शुद्धता के आधार पर सोने और चांदी की कीमतों में भी मजबूती बनी हुई है। घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की मांग और अंतरराष्ट्रीय संकेतों के संयुक्त प्रभाव से निवेशकों की रुचि लगातार बनी हुई है। बाजार में यह धारणा मजबूत हुई है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं तो आने वाले समय में कीमतों को और समर्थन मिल सकता है।

    तकनीकी विश्लेषण के अनुसार सोने के लिए 1.52 लाख रुपये का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि कीमतें इस स्तर के ऊपर स्थिर रहने में सफल होती हैं तो आगे और तेजी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, 1.50 लाख रुपये से नीचे फिसलने की स्थिति में मुनाफावसूली और बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। इसी तरह चांदी के लिए 2.48 लाख से 2.51 लाख रुपये का दायरा प्रमुख प्रतिरोध क्षेत्र माना जा रहा है। इस स्तर को पार करने पर तेजी और मजबूत हो सकती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम, निवेशकों की जोखिम धारणा, मुद्रा बाजार की चाल और सुरक्षित निवेश की मांग सोने तथा चांदी की कीमतों को प्रभावित करती रहेगी। फिलहाल दोनों धातुओं का निकट अवधि का रुख सकारात्मक दिखाई दे रहा है, हालांकि निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर लगातार नजर बनाए रखने की आवश्यकता होगी।

  • ईरान-डील विवाद के बीच ट्रंप का सख्त रुख: डेमोक्रेट्स पर निशाना, कहा- बातचीत में बाधा डालना बंद करें

    ईरान-डील विवाद के बीच ट्रंप का सख्त रुख: डेमोक्रेट्स पर निशाना, कहा- बातचीत में बाधा डालना बंद करें

    नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत के बीच एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। मध्य पूर्व में पहले से ही तनावपूर्ण हालात के बीच ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान समझौता करना चाहता है और ऐसा समझौता अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में अनावश्यक राजनीतिक टिप्पणियां बातचीत को प्रभावित कर रही हैं और इससे कूटनीतिक प्रयासों में कठिनाई पैदा हो रही है। ट्रंप ने अपने बयान में विपक्षी डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि लगातार नकारात्मक बयानबाजी से स्थिति और जटिल हो जाती है। उनके अनुसार जब राजनीतिक वर्ग बार-बार यह कहता है कि तेज कार्रवाई होनी चाहिए या फिर रुक जाना चाहिए, तो इससे वास्तविक वार्ता प्रक्रिया प्रभावित होती है और निर्णय लेने में बाधाएं उत्पन्न होती हैं। उन्होंने लोगों से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि अंततः परिणाम सकारात्मक होंगे और स्थिति नियंत्रण में रहेगी।

    इसी बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से जारी बयान में कहा गया कि उसने ईरान के गोरुक शहर और केश्म द्वीप के पास आत्मरक्षा में कुछ सैन्य कार्रवाई की है। इस कार्रवाई को ईरान की कथित आक्रामक गतिविधियों के जवाब के रूप में बताया गया है। सेंट्रल कमांड के अनुसार ईरान द्वारा एक ड्रोन को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में गिराए जाने के बाद यह कदम उठाया गया। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने एयर डिफेंस सिस्टम, एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और कई ड्रोन को निष्क्रिय करने का दावा किया है, जिन्हें क्षेत्रीय समुद्री मार्गों के लिए खतरा बताया गया था।

    दूसरी ओर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा करते हुए कहा है कि उसने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। हालांकि ईरान ने इन ठिकानों के स्थान को स्पष्ट नहीं किया है। दोनों देशों की ओर से ऐसे दावे सामने आने के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

    विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान और जवाबी कार्रवाइयों से कूटनीतिक प्रयासों पर दबाव बढ़ सकता है। ईरान और अमेरिका के बीच पहले से चले आ रहे मतभेदों के बीच यह ताजा घटनाक्रम स्थिति को और जटिल बना रहा है। राजनीतिक और सैन्य दोनों स्तरों पर जारी यह तनाव आने वाले दिनों में वैश्विक कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बातचीत की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या दोनों पक्ष किसी साझा समझौते की ओर बढ़ पाते हैं या नहीं।