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  • ट्रंप की धमकी के बीच अराघची बोले- हम जंग बेचने नहीं आए, शांति के लिए तैयार है ईरान

    ट्रंप की धमकी के बीच अराघची बोले- हम जंग बेचने नहीं आए, शांति के लिए तैयार है ईरान


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ किया है कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता। न्यूयॉर्क में उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और वह यहां युद्ध के लिए नहीं, बल्कि शांति और कूटनीति का रास्ता तलाशने आए हैं। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान को नेस्तनाबूद करने की बात कही और तेहरान के ताजा प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

    अराघची बोले- जंग नहीं चाहते, लेकिन जवाब देने को तैयार

    अराघची ने कहा, “राष्ट्रपति पेजेशकियान और मैं न्यूयॉर्क युद्ध बेचने नहीं आए हैं। हम शांति कायम करने आए हैं।” हालांकि, इसके साथ उन्होंने ईरान की सैन्य प्रतिक्रिया को लेकर भी रुख स्पष्ट किया।

    ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि उनका देश किसी भी तरह की आक्रामकता के सामने मजबूती से खड़ा रहेगा। हालात चाहे कितने भी गंभीर क्यों न हो जाएं, ईरान अपनी रक्षा करेगा। उन्होंने एक संभावित ‘एपोकैलिप्टिक वॉर’ तक का जिक्र किया और साथ ही कहा कि तेहरान वास्तविक कूटनीति के लिए तैयार है।

    अराघची का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से ईरान के प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद आया है।

    होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए ईरान ने रखा प्रस्ताव

    ईरान ने अमेरिका के सामने होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और क्षेत्र में जारी लड़ाई रोकने के लिए प्रस्ताव रखा था। इसके तहत सात दिन का काउंटडाउन शुरू करने की बात कही गई थी।

    अराघची के मुताबिक, यदि अमेरिका समझौते को लेकर गंभीर है तो ईरान इसके क्रियान्वयन की तैयारी पूरी कर चुका है। प्रस्ताव लागू होने के बाद दोनों पक्ष उन मुद्दों पर व्यापक बातचीत शुरू कर सकते हैं, जिन पर आपसी सहमति बन सकती है।

    होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के प्रमुख तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। ऐसे में यहां तनाव बढ़ने का असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ तेल की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही पर भी पड़ सकता है।

    ट्रंप ने प्रस्ताव ठुकराया, कहा- दबाव में है ईरान

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि तेहरान तत्काल होर्मुज स्ट्रेट खोलने का समझौता इसलिए करना चाहता है, क्योंकि वह बुरी तरह दबाव में है।

    हालांकि, ट्रंप ने यह भी कहा कि इस सप्ताह अमेरिका और ईरान के बीच आगे बातचीत हो सकती है। ऐसे में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क की संभावना अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

    ईरान की शर्त- पहले मांगें पूरी हों, तभी खुलेगा होर्मुज

    अराघची ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान की शर्त भी स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट तभी खोला जाएगा, जब ईरान की शर्तें पूरी होंगी।

    उनके मुताबिक, मध्यस्थों ने अभी तक अमेरिका की ओर से प्रस्ताव खारिज किए जाने की औपचारिक जानकारी ईरान को नहीं दी है। तेहरान अमेरिकी पक्ष के अंतिम जवाब का इंतजार कर रहा है। इसके बाद ही ईरान आगे की रणनीति तय करेगा।

    इससे संकेत मिलता है कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर गतिरोध दोनों देशों के बीच बातचीत में सबसे अहम मुद्दों में से एक बना हुआ है।

    पेजेशकियान बोले- बातचीत को तैयार, दबाव स्वीकार नहीं

    ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी कहा है कि उनका देश परमाणु कार्यक्रम समेत दूसरे मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान दबाव या धमकी के तहत कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगा।

    पेजेशकियान के मुताबिक ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर उस पर दबाव बनाया जाता है, धमकी दी जाती है या हमला होता है तो वह अपना बचाव करेगा।

    तेल की आवाजाही पर भी पड़ रहा तनाव का असर

    अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की कोशिश ऐसे समय हो रही है, जब होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण तेल की आवाजाही प्रभावित हुई है। दुनिया के लिए यह समुद्री मार्ग इसलिए भी अहम है, क्योंकि यहां किसी लंबे गतिरोध का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और बाजार पर पड़ सकता है।

    फिलहाल ईरान अपने प्रस्ताव पर अमेरिका के अंतिम जवाब का इंतजार कर रहा है। एक तरफ तेहरान कूटनीति के जरिए तनाव कम करने की बात कर रहा है, वहीं वह यह भी स्पष्ट कर रहा है कि दबाव या सैन्य कार्रवाई की स्थिति में वह जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा। ऐसे में आगे की बातचीत और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों देशों का रुख क्षेत्रीय तनाव की दिशा तय करने में अहम होगा।

  • शांति वार्ता फिर विफल…! ईरानी विदेश मंत्री बिना बातचीत लौटे…. US डेलिगेट्स का दौरा भी रद्द

    शांति वार्ता फिर विफल…! ईरानी विदेश मंत्री बिना बातचीत लौटे…. US डेलिगेट्स का दौरा भी रद्द


    इस्लामाबाद।
    ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच जंग और तनाव के बीच शनिवार को नई उम्मीद की किरण दिखी थी. लेकिन अब वह उम्मीद टूट गई है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Iran’s Foreign Minister Abbas Araghchi) अपनी एक बड़ी टीम के साथ पाकिस्तान (Pakistan) की राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad.) में थे. पाकिस्तान (Pakistan) दोनों देशों के बीच बिचौलिया यानी मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाला था. लेकिन, ईरान का डेलिगेशन बिना अमेरिकी प्रतिनिधित्व के इस्लामाबाद में आए हुए ही पाकिस्तान से चले गए. अब अमेरिकी प्रतिनिधित्व ने भी पाकिस्तान का दौरा रद्द करने का ऐलान किया है।

    ईरान सीधे अमेरिका से बात करने को तैयार नहीं है इसलिए पाकिस्तान दोनों के बीच संदेश पहुंचाने का काम कर रहा. अमेरिका से भी स्पेशल दूत इस्लामाबाद आने वाले थे. लेकिन ईरानी प्रतिनिधित्व चले गए हैं तो उन्होंने भी अपने दौरे को रद्द कर दिया है. ये ऐलान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया है।

    अराघची और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मुलाकात हुई. इस मीटिंग में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार और सेना प्रमुख जनरल सैयद आसिम मुनीर भी मौजूद थे. इस मुलाकात के बाद तेहरान के प्रतिनिधत्व पाकिस्तान से ओमान चले गए.

    अराघची इस्लामाबाद के बाद मस्कट यानी ओमान पहुंचे हैं. इसके बाद वह मॉस्को यानी रूस भी जाएंगे. यानी ईरान एक साथ कई देशों से संपर्क करके रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है।


    ईरान ने सीधी बात से किया इनकार

    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने साफ कहा कि इस दौर में ईरान और अमेरिका के बीच कोई सीधी मीटिंग नहीं होगी. ईरान पाकिस्तान के जरिए अपनी बात और अपनी चिंताएं अमेरिका तक पहुंचाएगा. उन्होंने अमेरिका के इस पूरे कदम को ‘अमेरिका का थोपा हुआ हमलावर युद्ध’ बताया और कहा कि पाकिस्तान शांति बहाल करने की कोशिश में जुटा है.


    ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने क्या कहा?

    ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने पाकिस्तान दौरे के बाद बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि उनका पाकिस्तान दौरा ‘काफी फलदायी’ रहा. यानी बातचीत अच्छी रही और कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. उन्होंने यह भी बताया कि ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए एक व्यावहारिक फ्रेमवर्क पेश किया है. यानी ऐसा प्लान दिया गया है, जिससे स्थायी तौर पर संघर्ष खत्म किया जा सके. लेकिन साथ ही उन्होंने एक बड़ी बात भी कही. अभी तक यह साफ नहीं है कि अमेरिका सच में बातचीत को लेकर गंभीर है या नहीं.

    ईरान के फैसले पर डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-ईरान बातचीत को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में 18 घंटे की लंबी यात्रा करके बातचीत करने का कोई मतलब नहीं है. उनके मुताबिक, फोन पर भी बातचीत उतनी ही अच्छी तरह हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान बात करना चाहता है, तो वह खुद फोन कर सकता है. अमेरिका सिर्फ बैठकर बेकार की बातचीत के लिए यात्रा नहीं करेगा.

    जब उनसे पूछा गया कि क्या इसका मतलब है कि अमेरिका फिर से युद्ध शुरू करने जा रहा है, तो ट्रंप ने साफ किया कि ऐसा नहीं है. उन्होंने कहा कि अभी इस बारे में कोई फैसला नहीं लिया गया है. ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका मजबूत स्थिति में है. उनके शब्दों में, ‘हमारे पास सारे पत्ते हैं’ यानी अमेरिका के पास बातचीत में बढ़त है. उन्होंने कहा कि वे बेकार की चर्चा में समय नहीं गंवाना चाहते.

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और उनके प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया है. उन्होंने कहा कि यह मुलाकात काफी अच्छी और पॉजिटिव रही. दोनों नेताओं के बीच मौजूदा क्षेत्रीय परिस्थितियों पर खुलकर चर्चा हुई. साथ ही, पाकिस्तान और ईरान के आपसी संबंधों को और मजबूत करने पर भी बात हुई. यानी सिर्फ मौजूदा तनाव ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के मुद्दों पर भी बातचीत हुई.