Tag: Iranian President

  • बातचीत चाहते हैं, दबाव नहीं सहेंगे: ईरानी राष्ट्रपति की अमेरिका इजरायल को कड़ी चेतावनी

    बातचीत चाहते हैं, दबाव नहीं सहेंगे: ईरानी राष्ट्रपति की अमेरिका इजरायल को कड़ी चेतावनी


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच इरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने साफ किया है कि ईरान युद्ध नहीं बल्कि बातचीत के जरिए समाधान चाहता है। हालांकि उन्होंने अमेरिका और इजरायल को सख्त संदेश देते हुए कहा कि किसी भी तरह का दबाव या शर्तें थोपने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा ईरान

    ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि उनका देश कभी भी टकराव या अस्थिरता का समर्थक नहीं रहा है। लेकिन यदि किसी ने ईरान को झुकाने या उस पर अपनी शर्तें थोपने की कोशिश की तो वह पूरी तरह विफल होगी। उन्होंने दोहराया कि ईरान अपनी संप्रभुता से किसी भी हाल में समझौता नहीं करेगा।

    नागरिकों पर हमलों पर उठाए सवाल

    ईरानी न्यूज एजेंसी के हवाले से राष्ट्रपति ने अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के तहत नागरिकों बच्चों और बौद्धिक वर्ग को निशाना बनाना साथ ही स्कूलों और अस्पतालों जैसे संस्थानों को नुकसान पहुंचाना किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता।

    संवाद ही रास्ता लेकिन दबाव नहीं

    राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि ईरान का रुख हमेशा से संवाद और सहयोग का रहा है। उन्होंने कहा कि देश न तो युद्ध चाहता है और न ही अस्थिरता लेकिन अगर उसकी संप्रभुता पर दबाव बनाया गया तो ईरानी जनता इसे कभी स्वीकार नहीं करेगी। ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान को झुकाने या सरेंडर करने के लिए मजबूर करने की हर कोशिश नाकाम रहेगी।

    गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था। इस दौरान तेहरान सहित कई बड़े शहरों पर हमले हुए। इसके जवाब में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने इजरायल के ठिकानों और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया।

    इस्लामाबाद वार्ता रहीं बेनतीजा

    तनाव कम करने के लिए 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत हुई। ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबफ ने नेतृत्व किया जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने की। कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। दोनों पक्षों ने माना कि कई अहम मुद्दों पर मतभेद अब भी बने हुए हैं जिससे दीर्घकालिक समाधान फिलहाल संभव नहीं हो पाया है।

  • PAK: PM शहबाज शरीफ ने की ईरानी राष्ट्रपति से फोन पर बात… पश्चिम एशिया तनाव पर जताई चिंता

    PAK: PM शहबाज शरीफ ने की ईरानी राष्ट्रपति से फोन पर बात… पश्चिम एशिया तनाव पर जताई चिंता


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Prime Minister Shahbaz Sharif) ने सोमवार को ईरान के राष्ट्रपति डॉ मसूद पेजेशकियान (Iran’s President Dr. Masoud Pezeshkian) से टेलीफोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए तत्काल सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, शहबाज शरीफ ने खाड़ी क्षेत्र में जारी खतरनाक शत्रुता को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस गंभीर स्थिति के मद्देनजर सभी पड़ोसी देशों को मतभेद सुलझाने, तनाव कम करने और संवाद व कूटनीति की राह अपनाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

    बयान में आगे कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने उम्माह (मुस्लिम समुदाय) में एकता के अत्यधिक महत्व पर बल दिया, जो इस समय पहले से कहीं अधिक जरूरी है। शरीफ ने ईरानी नेतृत्व को आश्वस्त किया कि पाकिस्तान क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए रचनात्मक भूमिका निभाता रहेगा। एक पड़ोसी और मित्र राष्ट्र के रूप में पाकिस्तान ने बहादुर ईरानी जनता के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने ईरानी राष्ट्रपति और ईरान की जनता को ईद-उल-फितर तथा नवरोज की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं। वहीं सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में शहबाज शरीफ ने दोहराया कि पाकिस्तान क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा देने में सक्रिय और रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    इस बीच, ईरानी आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए के हवाले से तेहरान में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने कहा कि कुछ मित्र देशों से संदेश मिले हैं, जो अमेरिका से युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत शुरू करने के अनुरोध का संकेत देते हैं। पाकिस्तान को मिस्र और कतर के साथ-साथ संभावित मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है। शरीफ की पोस्ट के तुरंत बाद पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरगची से अलग बातचीत की और हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की।

    विदेश मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट किया कि दोनों पक्षों ने क्षेत्र तथा उसके बाहर शांति, सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने के लिए संवाद व कूटनीति के महत्व पर जोर दिया। दोनों ने बदलती स्थिति पर निरंतर संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई।

    इससे पहले अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर सैन्य हमले की योजना को पांच दिनों के लिए टाल दिया है और कहा है कि वह इस शत्रुता को सुलझाने के लिए ईरान के एक शीर्ष व्यक्ति से बात कर रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका पश्चिम एशिया में शत्रुता को सुलझाने की कोशिश करने के लिए ईरान की सरकार के एक शीर्ष व्यक्ति के साथ बातचीत कर रहा है। अमेरिका और ईरान हाल की बातचीत में समझौते के प्रमुख बिंदुओं पर पहुंच गए हैं। अगर हमलों में मौजूदा पांच-दिन का विराम ठीक से चलता है, तो इससे पश्चिम एशिया चल रहे संघर्ष का समाधान निकल सकता है।

  • पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर PM मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से की बात, भारतीयों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर जोर

    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर PM मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से की बात, भारतीयों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर जोर

    mod
    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और बिगड़ते हालात के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत कर क्षेत्र की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, बढ़ते संघर्ष और उसके संभावित वैश्विक प्रभावों पर चर्चा हुई।

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ती हिंसा, नागरिकों की मौत और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान को लेकर भारत गहरी चिंता व्यक्त करता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    पीएम मोदी ने बातचीत के दौरान यह भी रेखांकित किया कि सामान और ऊर्जा की निर्बाध आवाजाही भारत के लिए बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि यदि ऊर्जा आपूर्ति या व्यापारिक मार्गों में किसी तरह की रुकावट आती है तो इसका असर न केवल भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता भी प्रभावित हो सकती है।

    प्रधानमंत्री ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि मौजूदा संकट का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने तनाव कम करने और रचनात्मक बातचीत को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि हालात और ज्यादा खराब न हों।

    भारत और ईरान के बीच लंबे समय से गहरे सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। ऊर्जा सहयोग दोनों देशों के रिश्तों का महत्वपूर्ण आधार रहा है। इसके अलावा चाबहार पोर्ट परियोजना भारत के लिए मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक व्यापार और संपर्क का एक अहम रणनीतिक मार्ग मानी जाती है।

    प्रधानमंत्री मोदी की यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार, व्यापार मार्गों और प्रवासी समुदायों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। भारत इन परिस्थितियों में संतुलित कूटनीति के जरिए अपने राष्ट्रीय हितों और क्षेत्रीय शांति, दोनों को साधने की कोशिश कर रहा है।

    भारत लगातार क्षेत्र में शांति, स्थिरता और कूटनीतिक समाधान की वकालत करता रहा है। यह अहम भी है क्योंकि पश्चिम एशिया में अस्थिरता का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वहां रह रहे बड़े भारतीय समुदाय पर सीधे तौर पर पड़ सकता है।