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  • तेहरान में अनूठा विरोध… ट्रंप को पिंजरे में कैद कर ईरानी जता रहे अपना गुस्सा…

    तेहरान में अनूठा विरोध… ट्रंप को पिंजरे में कैद कर ईरानी जता रहे अपना गुस्सा…


    तेहरान।
    ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच बढ़ता तनाव अब केवल कूटनीतिक बयानों और सैन्य सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तेहरान की सड़कों पर एक अनोखे विरोध के रूप में सामने आया है। ईरान की राजधानी के सबसे व्यस्त इलाकों में शुमार तज्रीश स्क्वायर पर एक विशाल इलेक्ट्रॉनिक बिलबोर्ड (Electronic billboard) से लोहे का पिंजरा लटकाया गया है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) का हमशक्ल बंद है।

    ईरान सरकार के तेहरान ब्यूटिफिकेशन ऑर्गनाइजेशन की तरफ से शुरू किए गए 15 दिवसीय इस अभियान का मकसद अमेरिकी हमले की ओर दुनिया का ध्यान खींचना है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी हमलों और ईरान को पाषाण युग में धकेलने जैसे बयानों ने आम ईरानी नागरिकों के गुस्से को भड़का दिया है। अमेरिकी सैन्य ताकत के खिलाफ उपजी एकजुटता को हवा देने के लिए ऐसे प्रदर्शनों को एक नया मनोवैज्ञानिक हथियार माना जा रहा है।

    मास्क और विग पहने कलाकार दिन-रात पिंजरे में रहता है, जहां उसके रहने के लिए बिस्तर, टॉयलेट और सिंक की व्यवस्था की गई है। यह कभी सलाखों को झकझोरता है, तो कभी पॉप म्यूजिक पर डांस करता है।


    यह संदेश न देखना अपराध…

    इस नाटकीय प्रदर्शन के पीछे एक गंभीर राजनीतिक संदेश छिपा है। पिंजरे के पीछे बिलबोर्ड पर लगातार उन तस्वीरों का प्रसारण हो रहा है, जो पिछले महीने ईरान के कुहस्तक कस्बे में एक शादी समारोह पर अमेरिकी बमबारी के भीषण दृश्यों को दिखाती हैं। तस्वीरों के साथ एक पीले रंग की क्राइम सीन टेप पर । लिखा गया है-इस दृश्य को न देखना एक अपराध है।

    चौराहे पर कई जगह पर ऐसे होर्डिंग भी लगाए गए हैं जिसमें ट्रंप के अलावा इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को निशाना बनाया गया है।


    हार्न बजाकर जता रहे समर्थन

    लाइव प्रदर्शन को देखने के लिए राहगीरों और वाहन चालकों की भारी भीड़ जुट रही है। लोग गाड़ियां रोककर वीडियो बना रहे हैं और हॉर्न बजाकर अपना समर्थन जता रहे हैं। अमूमन तेहरान में ऐसे प्रदर्शनों के लिए इंकलाब स्क्वायर का इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन इस बार व्यापारिक और व्यस्त इलाके तज्जीश स्क्वायर को चुना गया है।

  • UN महासभा : कई देशों के प्रतिनिधियों से मिले जयशंकर…, ईरान-रूस के समकक्षों से अलग से की मुलाकात

    UN महासभा : कई देशों के प्रतिनिधियों से मिले जयशंकर…, ईरान-रूस के समकक्षों से अलग से की मुलाकात

    न्यूयार्क। विदेश मंत्री एस. जयशंकर (External Affairs Minister S. Jaishankar) ने शुक्रवार को ईरान और रूस (Iran and Russia) के अपने समकक्षों से मुलाकात की, जिनके साथ द्विपक्षीय मुद्दों, ब्रिक्स समूह में सहयोग और खाड़ी संघर्ष समेत विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। जयशंकर (Jaishankar) ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Russian Foreign Minister Sergey Lavrov) से मुलाकात की और द्विपक्षीय मुद्दों के साथ-साथ ब्रिक्स समूह में सहयोग पर चर्चा की। जयशंकर ने ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के इस समूह का जिक्र करते हुए कहा कि आज रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ सकारात्मक बैठक हुई। कई मौजूदा मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। द्विपक्षीय संबंधों और ब्रिक्स में सहयोग की भी समीक्षा की।

    भारत ने इस महीने की शुरुआत में ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी। इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने हिस्सा लिया था। जयशंकर ने यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र के इतर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ हुई बातचीत उपयोगी रही। हमने खाड़ी संघर्ष से जुड़े ताजा घटनाक्रम पर चर्चा की।

    विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को एक पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल पर कड़ा जवाब दिया, जिसने उनसे आतंकवाद से जुड़ा सवाल पूछा था। यहां पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल का कड़ा जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा कि एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है। आप तो बोलो ही मत। जयशंकर और लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेसोलो न्यंती ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पोत परिवहन और समुद्री कर्मियों की सुरक्षा पर बने ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स’ के बारे में संवाददाताओं को संबोधित किया।

    उनके संबोधन के बाद, पाकिस्तानी पत्रकार ने खड़े होकर जयशंकर से चिल्लाते हुए पूछा कि आपकी सरकार पाकिस्तान में आतंकवाद को प्रायोजित करना कब बंद करेगी? संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने पाकिस्तानी पत्रकार से कहा कि आपने अपना जवाब सुन लिया है। आपने अपना जवाब साफ-साफ सुन लिया है। गुरुवार को, जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ संयुक्त राष्ट्र भवन में दाखिल हो रहे थे, तो एक भारतीय पत्रकार ने उनसे पूछा था कि आप आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेंगे?

  • ईरान की जेल से रिहा हुए गाजियाबाद के मर्चेंट नेवी इंजीनियर केतन मेहता

    ईरान की जेल से रिहा हुए गाजियाबाद के मर्चेंट नेवी इंजीनियर केतन मेहता

    तेहरान। मर्चेंट नेवी इंजीनियर केतन मेहता को 57 दिन बाद ईरान की जेल से रिहा किया गया। फिलहाल वह भारतीय दूतावास की निगरानी में हैं और हालात सामान्य होने पर भारत लौटेंगे।
    मर्चेंट नेवी केतन मेहता खबर
    गाजियाबाद: ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच शहर के लिए खुशखबरी आई है। डीएलएफ कॉलोनी में रहने वाले मर्चेंट नेवी इंजीनियर केतन मेहता को 57 दिन बाद ईरान की जेल से रिहा कर दिया गया।

    केतन फिलहाल ईरान में ही भारतीय दूतावास की निगरानी में एक होटल में रह रहे हैं। स्थिति सामान्य होने पर उन्हें भारत लाया जाएगा।

    उनके घर पर परिवार में जश्न का माहौल है।
    गिरफ्तारी का सिलसिला
    केतन मेहता को 6 जनवरी 2026 को ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट पर ईरानी कोस्ट गार्ड ने गिरफ्तार कर लिया था। तब से वह तेहरान की जेल में बंद थे। उनके पिता मुकेश मेहता ने विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री से उनके सुरक्षित भारत लाने की मदद की गुहार लगाई थी।

    केतन दुबई की तेल कंपनी में थर्ड इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने जून 2025 में मरीन इंजीनियर के रूप में कंपनी जॉइन की थी। इस कंपनी के जहाज ईरान से तेल लाने का कार्य करते हैं।

    परिवार से संपर्क और राहत की खबर
    भारतीय दूतावास के सहयोग से केतन मेहता को जेल से ही अपने परिवार से बात करने की अनुमति मिली थी।

    इस प्रक्रिया के जरिए मुकेश मेहता अक्सर अपने बेटे से संपर्क बनाए रखते थे।

    मुकेश मेहता ने बताया कि 31 दिसंबर को आखिरी बार फोन पर बात हुई थी। केतन ने कहा था कि तीन-चार दिन में वह दुबई लौटेंगे, लेकिन उसके बाद उसका फोन नहीं लगा। 16 जनवरी को पता चला कि उनके बेटे को ईरान कोस्ट गार्ड्स ने गिरफ्तार कर लिया है।

    होली पर मिली खुशी
    अब 4 मार्च, यानी होली वाले दिन फोन की घंटी बजी और बेटे की आवाज आई, पापा मैं छूट गया हूं। इस खबर ने परिवार को बहुत भावुक कर दिया। भारत सरकार की एंबेसी ने कोर्ट में पैरवी कर उन्हें रिहा कराया। केतन को फिलहाल एक होटल में दूतावास की निगरानी में रखा गया है। भारत लौटने के लिए सभी पेपर्स तैयार किए जा रहे हैं और जैसे ही फ्लाइट्स शुरू होंगी, केतन अपने देश लौट जाएंगे।

  • ईरान ने तुर्की की ओर दागी बैलिस्टिक मिसाइल, ईरानी राजदूत तलब

    ईरान ने तुर्की की ओर दागी बैलिस्टिक मिसाइल, ईरानी राजदूत तलब


    अंकारा। मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच तनाव और बढ़ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक Iran ने बुधवार को Turkey की दिशा में एक बैलिस्टिक मिसाइल दाग दी। हालांकि NATO की एयर डिफेंस प्रणाली ने मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर दिया। इस घटना के बाद तुर्की में हड़कंप मच गया और इसे युद्ध में नाटो की पहली प्रत्यक्ष एंट्री के रूप में देखा जा रहा है।

    नाटो की प्रवक्ता Allison Hart ने बयान जारी कर कहा कि संगठन तुर्की को निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा करता है और अपने सभी सहयोगी देशों के साथ मजबूती से खड़ा है।

    इराक और सीरिया के एयरस्पेस से गुजरी मिसाइल

    तुर्की के रक्षा मंत्रालय के अनुसार ईरान की ओर से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल Iraq और Syria के हवाई क्षेत्र से गुजरते हुए तुर्की की ओर बढ़ रही थी। इससे पहले कि वह लक्ष्य तक पहुंचती, पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र में तैनात नाटो एयर डिफेंस सिस्टम ने उसे मार गिराया।

    तुर्की प्रेसिडेंसी के कम्युनिकेशन निदेशालय ने बताया कि इंटरसेप्टर का मलबा देश के दक्षिणी प्रांत Hatay Province में गिरा। इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

    रणनीतिक सैन्य ठिकानों के पास गिरा मलबा

    जिस इलाके में मिसाइल का मलबा गिरा, वह तुर्की के प्रमुख सैन्य अड्डे Incirlik Air Base से लगभग 60 मील दूर बताया जा रहा है। वहीं तुर्की के Kürecik क्षेत्र में नाटो का एक महत्वपूर्ण अर्ली-वॉर्निंग रडार सिस्टम भी मौजूद है, जो बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली का अहम हिस्सा माना जाता है।

    तुर्की ने ईरानी राजदूत को किया तलब

    घटना के बाद तुर्की के विदेश मंत्री Hakan Fidan ने अपने ईरानी समकक्ष Abbas Araghchi से बातचीत कर कड़ी आपत्ति जताई। इसके साथ ही तुर्की ने Iran के राजदूत को विदेश मंत्रालय में तलब कर घटना पर जवाब मांगा।

    तुर्की के अधिकारियों ने चेतावनी दी कि देश के खिलाफ किसी भी दुश्मनी भरे कदम का जवाब देने का अधिकार उनके पास सुरक्षित है।

    विश्लेषकों का मानना है कि अगर ऐसे हमले जारी रहे तो यह संघर्ष और ज्यादा देशों को अपनी चपेट में ले सकता है, जिससे पूरे मध्य पूर्व और यूरोप की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
  • अमेरिका नहीं चाहता भारत बने ताकतवर, ईरानी अधिकारी का बड़ा आरोप

    अमेरिका नहीं चाहता भारत बने ताकतवर, ईरानी अधिकारी का बड़ा आरोप

    वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भारत में ईरानी सुप्रीम लीडर के विशेष प्रतिनिधि Abdul Majid Hakim Elahi ने कहा कि अमेरिका अपने वैश्विक वर्चस्व को बनाए रखने के लिए दुनिया में जानबूझकर युद्ध जैसी स्थितियां पैदा करता है। उनका दावा है कि ईरान के साथ मौजूदा संघर्ष के पीछे भी अमेरिका की यही रणनीति है, ताकि भारत और चीन जैसे देशों को उभरने से रोका जा सके।

    खास बातचीत में इलाही ने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि भारत या चीन जैसे देश वैश्विक ताकत के रूप में सामने आएं। उनके मुताबिक, अमेरिका की कोशिश रहती है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उसकी ताकत को कोई चुनौती न दे और इसी वजह से वह विभिन्न क्षेत्रों में युद्ध की स्थितियां पैदा करता है।

    भविष्य में भारत भी होगा बड़ी ताकत

    इलाही ने कहा कि आने वाले समय में भारत, चीन, रूस और अमेरिका दुनिया के सबसे प्रभावशाली देशों में शामिल होंगे। हालांकि, उनका आरोप है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर अपनी ताकत को साझा नहीं करना चाहता और इसी कारण वह वैश्विक स्तर पर टकराव की स्थितियां बनाए रखता है।

    ईरान ने नहीं, अमेरिका ने शुरू किया संघर्ष

    ईरानी अधिकारी ने यह भी कहा कि मौजूदा युद्ध की शुरुआत ईरान ने नहीं की, बल्कि अमेरिका और इजरायल ने सैन्य कार्रवाई कर इसे शुरू किया। इससे पहले ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी Ali Larijani ने भी कहा था कि ईरान केवल अपनी रक्षा कर रहा है। उनके अनुसार अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरानी नागरिकों और ठिकानों को निशाना बनाया गया है, जिसके जवाब में ईरान प्रतिक्रिया दे रहा है।

    लारिजानी ने यह भी कहा कि चूंकि संघर्ष की शुरुआत अमेरिका की ओर से हुई है, इसलिए इसे खत्म करने की जिम्मेदारी भी उसी की है।

    लंबा खिंच सकता है संघर्ष

    इस बीच विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों, सैन्य ढांचे और नौसैनिक अड्डों पर किए गए हमलों के बाद यह संघर्ष लंबा चल सकता है। इन हमलों में ईरान के कुछ वरिष्ठ नेताओं के मारे जाने की खबरें भी सामने आई हैं।

    जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन हमलों में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत होने और कई अन्य के घायल होने की जानकारी सामने आई है।