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  • आईआरसीटीसी में पर्यटन मॉनिटर के 9 पदों पर भर्ती, 8 और 9 सितंबर को वॉक-इन इंटरव्यू, जानें योग्यता और वेतन

    आईआरसीटीसी में पर्यटन मॉनिटर के 9 पदों पर भर्ती, 8 और 9 सितंबर को वॉक-इन इंटरव्यू, जानें योग्यता और वेतन

    नई दिल्ली । इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन ने पर्यटन क्षेत्र में काम करने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए भर्ती का अवसर जारी किया है। कंपनी ने संविदा के आधार पर पर्यटन मॉनिटर के कुल नौ पदों को भरने के लिए अधिसूचना जारी की है। इन पदों पर चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति दो वर्ष की अवधि के लिए की जाएगी। उपलब्ध पदों में छह रिक्तियां कॉरपोरेट ऑफिस और तीन पद नॉर्थ जोन के लिए निर्धारित किए गए हैं।

    इन पदों के लिए उम्मीदवारों का चयन वॉक-इन इंटरव्यू, दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल फिटनेस के आधार पर किया जाएगा। चयन प्रक्रिया में सफल रहने वाले अभ्यर्थियों को उनकी योग्यता और निर्धारित मानकों के अनुसार लगभग 30 हजार से 35 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त पद और नियमों के अनुसार अन्य लाभ तथा भत्ते भी उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

    पर्यटन मॉनिटर के पद के लिए शैक्षणिक योग्यता और कार्य अनुभव को महत्वपूर्ण रखा गया है। उम्मीदवार के पास पर्यटन विषय में तीन वर्ष की बैचलर डिग्री होनी चाहिए। इसके अलावा किसी भी विषय में तीन वर्ष की स्नातक डिग्री के साथ ट्रैवल एंड टूरिज्म में एक वर्ष का डिप्लोमा और टूर ऑपरेशन या ट्रैवल एजेंसी से जुड़े काम में कम से कम एक वर्ष का अनुभव रखने वाले उम्मीदवार भी पात्र होंगे।

    एक अन्य निर्धारित योग्यता के अनुसार किसी भी विषय में तीन वर्ष की बैचलर डिग्री के साथ ट्रैवल एंड टूरिज्म में दो वर्ष की पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री या डिप्लोमा रखने वाले अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकते हैं। इस श्रेणी में उम्मीदवार के पास टूर ऑपरेशन या ट्रैवल एजेंसी फर्म में कम से कम दो वर्ष का कार्य अनुभव होना आवश्यक है।

    आयु सीमा की बात करें तो उम्मीदवार की अधिकतम उम्र एक सितंबर 2026 को 35 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन से पहले अपनी शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और आयु संबंधी सभी निर्धारित शर्तों को ध्यान से जांच लें।

    वॉक-इन इंटरव्यू 8 और 9 सितंबर को आयोजित किया जाएगा। दोनों दिनों इंटरव्यू का समय सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक निर्धारित किया गया है। इंटरव्यू का आयोजन आईआरसीटीसी नॉर्थ जोन कार्यालय, बी-148, 11वीं मंजिल, स्टेट्समैन हाउस, बाराखंबा रोड, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली में किया जाएगा।

    इंटरव्यू में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को निर्धारित समय से पहले केंद्र पर पहुंचना होगा। उन्हें भरे हुए आवेदन पत्र की हार्ड कॉपी के साथ शैक्षणिक योग्यता, अनुभव, आयु और अन्य जरूरी दस्तावेजों की मूल प्रतियां तथा उनकी फोटोकॉपी साथ ले जानी होगी। इसके अलावा पासपोर्ट साइज फोटो भी रखना जरूरी होगा। इंटरव्यू से पहले अभ्यर्थियों का पंजीकरण और दस्तावेज सत्यापन किया जाएगा।

    आवेदन पत्र के लिए उम्मीदवार संबंधित भर्ती अधिसूचना में उपलब्ध फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं। फॉर्म का प्रिंट निकालने के बाद उसमें मांगी गई सभी जानकारियां सावधानीपूर्वक भरनी होंगी। उम्मीदवारों को यह आवेदन पत्र इंटरव्यू के दिन निर्धारित दस्तावेजों के साथ लेकर जाना होगा। भर्ती संविदा आधार पर होने के कारण उम्मीदवारों को नियुक्ति की अवधि और अन्य शर्तों को भी अधिसूचना के अनुसार समझना चाहिए।

  • भारतीय रेलवे की बड़ी डिजिटल पहल, अब टिकट बुकिंग के साथ ही ऑनलाइन बुक होगा अतिरिक्त सामान, पार्सल काउंटर के चक्कर खत्म

    भारतीय रेलवे की बड़ी डिजिटल पहल, अब टिकट बुकिंग के साथ ही ऑनलाइन बुक होगा अतिरिक्त सामान, पार्सल काउंटर के चक्कर खत्म

    नई दिल्ली । भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को और बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल करते हुए अतिरिक्त सामान की ऑनलाइन बुकिंग की नई सेवा शुरू कर दी है। अब ट्रेन का कन्फर्म टिकट बुक कराने वाले यात्री उसी समय निर्धारित मुफ्त सीमा से अधिक सामान ले जाने के लिए ऑनलाइन बुकिंग और भुगतान भी कर सकेंगे। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों को पार्सल कार्यालय की लंबी कतारों और अतिरिक्त कागजी प्रक्रिया से राहत देना है, जिससे पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल, तेज और सुविधाजनक हो जाएगी।

    अब तक रेलवे में मुफ्त सीमा से अधिक सामान लेकर यात्रा करने वाले यात्रियों को स्टेशन के पार्सल कार्यालय में जाकर अलग से बुकिंग करानी पड़ती थी। इसके लिए अतिरिक्त समय और औपचारिकताओं का सामना करना पड़ता था। नई ऑनलाइन सुविधा लागू होने के बाद यह पूरी प्रक्रिया टिकट बुकिंग के साथ ही पूरी की जा सकेगी। इससे यात्रियों का समय बचेगा और यात्रा से पहले होने वाली असुविधा भी काफी हद तक कम होगी।

    रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा केवल कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों के लिए उपलब्ध होगी। साथ ही इसका लाभ केवल उन श्रेणियों में मिलेगा, जहां मुफ्त सीमा से अधिक सामान निर्धारित शुल्क देकर ले जाने की अनुमति है। एसी फर्स्ट क्लास, एसी टू-टियर, फर्स्ट क्लास, स्लीपर क्लास और सेकेंड क्लास के यात्री इस सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। वहीं एसी थ्री-टियर और एसी चेयर कार में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी, क्योंकि इन श्रेणियों में मुफ्त सामान की सीमा और अधिकतम अनुमत सीमा समान निर्धारित है।

    रेलवे के मौजूदा नियमों के अनुसार एसी फर्स्ट क्लास के यात्री बिना अतिरिक्त शुल्क के 70 किलोग्राम तक सामान ले जा सकते हैं, जबकि निर्धारित शुल्क देकर अधिकतम 150 किलोग्राम तक सामान ले जाने की अनुमति है। एसी टू-टियर और फर्स्ट क्लास में 50 किलोग्राम तक मुफ्त तथा अधिकतम 100 किलोग्राम तक सामान ले जाया जा सकता है। स्लीपर क्लास में यात्रियों को 40 किलोग्राम तक मुफ्त सामान ले जाने की अनुमति है और अतिरिक्त शुल्क देकर यह सीमा 80 किलोग्राम तक बढ़ाई जा सकती है। सेकेंड क्लास में 35 किलोग्राम तक सामान मुफ्त है, जबकि अधिकतम 70 किलोग्राम तक सामान ले जाने की अनुमति दी गई है।

    दूसरी ओर, एसी थ्री-टियर और एसी चेयर कार के यात्रियों के लिए 40 किलोग्राम की सीमा ही मुफ्त और अधिकतम अनुमत सीमा दोनों है। इसी कारण इन श्रेणियों में अतिरिक्त सामान की ऑनलाइन बुकिंग का विकल्प उपलब्ध नहीं कराया गया है। रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि मुफ्त सीमा से अधिक लेकिन अधिकतम अनुमत सीमा के भीतर सामान ले जाने पर यात्रियों को निर्धारित अतिरिक्त शुल्क देना अनिवार्य होगा।

    रेलवे ने सामान के आकार को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सामान्य श्रेणियों में यात्री 100 सेंटीमीटर × 60 सेंटीमीटर × 25 सेंटीमीटर तक के ट्रंक, सूटकेस या बक्से अपने साथ ले जा सकते हैं। वहीं एसी थ्री-टियर और एसी चेयर कार में सामान का अधिकतम आकार 55 सेंटीमीटर × 45 सेंटीमीटर × 22.5 सेंटीमीटर निर्धारित किया गया है।

    रेलवे का मानना है कि यह नई डिजिटल सुविधा यात्रियों के लिए यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था से न केवल स्टेशन पर भीड़ कम होगी, बल्कि पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध भी बनेगी। डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ भारतीय रेलवे यात्रियों को आधुनिक और बेहतर यात्रा अनुभव उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार नए कदम उठा रहा है।

  • दिल्ली से भोपाल आ रही शताब्दी में एक्सपायरी ब्रेड परोसी गई छोटे बच्चों समेत दर्जनों यात्रियों को फूड पॉयजनिंग का डर शिकायत के बाद जांच शुरू

    दिल्ली से भोपाल आ रही शताब्दी में एक्सपायरी ब्रेड परोसी गई छोटे बच्चों समेत दर्जनों यात्रियों को फूड पॉयजनिंग का डर शिकायत के बाद जांच शुरू


    नई दिल्ली। दिल्ली से भोपाल आ रही नई दिल्ली रानी कमलापति शताब्दी एक्सप्रेस में शनिवार सुबह यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी लापरवाही सामने आई। ट्रेन में नाश्ते के दौरान यात्रियों को ऐसी ब्रेड परोसी गई जिसकी उपयोग अवधि एक दिन पहले ही समाप्त हो चुकी थी। घटना का पता चलते ही पूरे कोच में हड़कंप मच गया और यात्रियों ने रेलवे की खानपान व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

    जानकारी के अनुसार ट्रेन के सी फोर कोच में यात्रा कर रहे करीब चौहत्तर यात्रियों को नाश्ते के साथ ब्रेड दी गई थी। इनमें छोटे बच्चे भी शामिल थे। अधिकांश यात्रियों ने बिना पैकेट देखे ब्रेड खा ली। बाद में एक यात्री की नजर ब्रेड के पैकेट पर लिखी उपयोग अवधि पर पड़ी तो पता चला कि उसकी अंतिम तिथि दस जुलाई थी जबकि इसे ग्यारह जुलाई को यात्रियों को परोसा गया। इसके बाद यात्रियों में फूड पॉयजनिंग की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई।

    यात्रियों का कहना है कि यह मामला केवल एक कोच तक सीमित नहीं था। ट्रेन के अन्य हिस्सों में रखे गए कैटरिंग पैकेटों में भी उसी तारीख वाली ब्रेड मौजूद थी। इससे आशंका जताई जा रही है कि कई अन्य कोचों में भी यात्रियों को एक्सपायरी खाद्य सामग्री परोसी गई होगी। इस घटना ने रेलवे की कैटरिंग व्यवस्था की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

    दिल्ली से भोपाल यात्रा कर रहे एक यात्री ने बताया कि नाश्ता करने के बाद जब एक्सपायरी डेट का पता चला तो सभी यात्री हैरान रह गए। उन्होंने तुरंत रेल मदद ऐप के जरिए शिकायत दर्ज कराई ताकि मामले की तत्काल जांच हो सके। कई अन्य यात्रियों ने भी ऑनलाइन उपभोक्ता आयोग के पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

    यात्रियों का कहना है कि यदि इस तरह की लापरवाही एक प्रीमियम ट्रेन में हो सकती है तो अन्य ट्रेनों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। उनका मानना है कि यात्रियों की जान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता और रेलवे को खाद्य सामग्री की गुणवत्ता जांच के लिए और अधिक सख्त व्यवस्था लागू करनी चाहिए।

    मामले में आईआरसीटीसी के क्षेत्रीय अधिकारी ने कहा कि संबंधित ट्रेन का संचालन नॉर्दर्न रेलवे के अधीन है और भोजन भी वहीं से लोड किया जाता है। हालांकि उन्होंने स्थानीय स्तर पर जांच या कार्रवाई को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। इसके बाद यात्रियों में नाराजगी और बढ़ गई क्योंकि वे जिम्मेदारी तय कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

    गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले भी इसी शताब्दी एक्सप्रेस के भोजन की गुणवत्ता और मात्रा को लेकर शिकायत सामने आई थी। एक यात्री ने सोशल मीडिया पर रेल मंत्री और आईआरसीटीसी को टैग करते हुए भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। लगातार दो दिनों में सामने आई इन घटनाओं ने रेलवे की खानपान व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यात्रियों को उम्मीद है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा देखने को नहीं मिलेगी।

  • IRCTC की काशी तीर्थ यात्रा: सिर्फ 16,700 रुपये में काशी, अयोध्या और प्रयागराज के दर्शन, रहने-खाने की पूरी व्यवस्था

    IRCTC की काशी तीर्थ यात्रा: सिर्फ 16,700 रुपये में काशी, अयोध्या और प्रयागराज के दर्शन, रहने-खाने की पूरी व्यवस्था


    नई दिल्ली । देशभर के श्रद्धालुओं के लिए इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) ने एक विशेष आध्यात्मिक यात्रा पैकेज लॉन्च किया है। ‘काशी तीर्थ यात्रा’ नाम से शुरू की गई यह 9 दिवसीय धार्मिक यात्रा श्रद्धालुओं को भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन कराने का अवसर देगी। खास बात यह है कि इस पैकेज में यात्रा, भोजन, ठहरने और स्थानीय परिवहन जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं शामिल हैं, जिससे यात्रियों को अलग से किसी व्यवस्था की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।

    यह विशेष यात्रा 9 सितंबर 2026 को तिरुनेलवेली से शुरू होकर 17 सितंबर 2026 तक चलेगी। यात्रा के दौरान श्रद्धालु गया, बोधगया, वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन करेंगे। IRCTC की भारत गौरव ट्रेन योजना के तहत संचालित इस टूर का उद्देश्य देश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से लोगों को जोड़ना है।

    यात्रा के पहले दिन ट्रेन तिरुनेलवेली से रवाना होगी। रास्ते में कई प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को चढ़ने और उतरने की सुविधा दी जाएगी। तीसरे दिन श्रद्धालु गया पहुंचेंगे, जहां उनके ठहरने और भोजन की व्यवस्था की जाएगी। इसके बाद बोधगया स्थित विश्व प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर के दर्शन कराए जाएंगे। यह वही स्थान है जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और यह बौद्ध धर्म के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में गिना जाता है।

    इसके बाद यात्रा वाराणसी पहुंचेगी, जहां श्रद्धालु काशी विश्वनाथ मंदिर, अन्नपूर्णा देवी मंदिर, काशी विशालाक्षी मंदिर और काल भैरव मंदिर के दर्शन करेंगे। वाराणसी की प्रसिद्ध गंगा आरती भी इस यात्रा का प्रमुख आकर्षण होगी। शाम के समय गंगा घाटों पर होने वाली यह आरती श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा और अद्भुत अनुभव प्रदान करती है।

    वाराणसी के बाद यात्रा अयोध्या पहुंचेगी। यहां श्रद्धालु राम जन्मभूमि, हनुमानगढ़ी और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन करेंगे। भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या देशभर के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। इसके बाद ट्रेन प्रयागराज पहुंचेगी, जहां यात्री त्रिवेणी संगम में स्नान कर सकेंगे और प्रसिद्ध बड़े हनुमान मंदिर के दर्शन भी करेंगे।

    IRCTC ने इस पैकेज को तीन श्रेणियों में उपलब्ध कराया है। स्लीपर क्लास का किराया 16,700 रुपये प्रति व्यक्ति रखा गया है। वहीं थर्ड एसी के लिए 26,100 रुपये और सेकंड एसी के लिए 34,100 रुपये निर्धारित किए गए हैं। बच्चों के लिए अलग रियायती दरें लागू होंगी। पैकेज में रेल यात्रा, होटल में ठहरने की व्यवस्था, भोजन, स्थानीय परिवहन और दर्शनीय स्थलों का भ्रमण शामिल है।

    धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और श्रद्धालुओं को सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया यह पैकेज उन लोगों के लिए बेहतरीन अवसर है, जो एक ही यात्रा में भारत की प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के दर्शन करना चाहते हैं। काशी, अयोध्या और प्रयागराज जैसे पवित्र स्थलों की यात्रा निश्चित रूप से श्रद्धालुओं के लिए एक यादगार और आध्यात्मिक अनुभव साबित हो सकती है।

  • 17 लाख यात्रियों के भोजन पर नहीं पड़ेगा असर, LPG कमी के बीच IRCTC ने अपनाया इलेक्ट्रिक कुकिंग मॉडल

    17 लाख यात्रियों के भोजन पर नहीं पड़ेगा असर, LPG कमी के बीच IRCTC ने अपनाया इलेक्ट्रिक कुकिंग मॉडल

    नई दिल्ली । देश में एलपीजी आपूर्ति पर बढ़ते दबाव का असर अब रेलवे की खानपान सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। स्थिति को देखते हुए भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। गैस आधारित कुकिंग पर निर्भरता कम करते हुए अब ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर बड़े स्तर पर बिजली से संचालित इंडक्शन कुकिंग सिस्टम को अपनाया जा रहा है।

    रेलवे अधिकारियों के अनुसार, एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता प्रभावित होने के कारण भोजन तैयार करने की पारंपरिक व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में यात्रियों को मिलने वाली कैटरिंग सेवाओं में किसी प्रकार की रुकावट न आए, इसके लिए वैकल्पिक कुकिंग मॉडल लागू किया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत खाना गैस की बजाय इंडक्शन स्टोव और अन्य विद्युत उपकरणों की मदद से तैयार किया जा रहा है।

    भारतीय रेलवे प्रतिदिन लाखों यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराता है। देशभर में संचालित बड़ी संख्या में ट्रेनों में खानपान सेवाएं दी जाती हैं और प्रतिदिन लगभग 17 लाख यात्रियों के लिए भोजन तैयार किया जाता है। इतने बड़े स्तर की व्यवस्था को बनाए रखने के लिए निरंतर ईंधन आपूर्ति आवश्यक होती है। एलपीजी संकट के बीच रेलवे ने समय रहते वैकल्पिक उपायों को लागू कर परिचालन पर असर पड़ने से बचाने की कोशिश की है।

    रेलवे प्रशासन ने बताया कि एलएचबी पैंट्री कारों में पहले से मौजूद आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं और बेहतर विद्युत प्रणाली को देखते हुए वहां इंडक्शन आधारित खाना पकाने की अनुमति दी गई है। राजधानी, शताब्दी, दुरंतो और वंदे भारत जैसी प्रमुख ट्रेनों में उपयोग किए जाने वाले एलएचबी कोच इस तकनीक के लिए उपयुक्त माने जा रहे हैं। इसके कारण चलती ट्रेनों में भी सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से भोजन तैयार किया जा सकेगा।

    केवल ट्रेनों तक ही नहीं, बल्कि प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर भी बिजली आधारित कुकिंग व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। विभिन्न स्टेशन परिसरों में स्थापित फूड प्लाजा, रिफ्रेशमेंट रूम और जन आहार केंद्रों को इंडक्शन कुकर तथा माइक्रोवेव जैसे उपकरणों का अधिक उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे भोजन उत्पादन क्षमता बनाए रखने के साथ-साथ गैस पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

    रेलवे से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था सफल रहती है तो भविष्य में रेलवे की बड़ी भोजन उत्पादन प्रणाली स्थायी रूप से इलेक्ट्रिक कुकिंग मॉडल की ओर बढ़ सकती है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, आने वाले समय में लगभग 60 प्रतिशत भोजन तैयारी बिजली आधारित तकनीक पर स्थानांतरित की जा सकती है। इससे ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण होगा और ईंधन आपूर्ति संबंधी जोखिम भी कम होंगे।

    रेलवे की कैटरिंग व्यवस्था के लिए देशभर में संचालित क्लस्टर किचन, बेस किचन और अन्य भोजन उत्पादन केंद्रों में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की आवश्यकता पड़ती है। वर्तमान परिस्थितियों में आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ने के कारण रेलवे ने प्रमुख तेल विपणन कंपनियों के साथ समन्वय भी मजबूत किया है ताकि आवश्यक गैस सिलेंडरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इंडक्शन आधारित कुकिंग न केवल आपूर्ति संकट के समय उपयोगी विकल्प साबित हो सकती है, बल्कि यह ऊर्जा दक्षता, सुरक्षा और परिचालन स्थिरता के लिहाज से भी लाभकारी है। रेलवे द्वारा उठाया गया यह कदम भविष्य की चुनौतियों के बीच सार्वजनिक सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

  • ट्रेन में चाहिए कंफर्म लोअर बर्थ? अपनाएं ये 5 आसान ट्रिक्स, सफर हो जाएगा आरामदायक

    ट्रेन में चाहिए कंफर्म लोअर बर्थ? अपनाएं ये 5 आसान ट्रिक्स, सफर हो जाएगा आरामदायक


    नई दिल्ली। ट्रेन में सफर करने वाले ज्यादातर यात्री लोअर बर्थ को सबसे आरामदायक मानते हैं। खासतौर पर बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और लंबी दूरी के यात्री लोअर सीट को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन टिकट कन्फर्म होने के बाद भी कई बार अपर या मिडिल बर्थ मिल जाती है। अगर आप भी हर बार लोअर बर्थ चाहते हैं, तो IRCTC की टिकट बुकिंग के दौरान कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

    1. Reservation Choice में जरूर चुनें Lower Berth
    टिकट बुक करते समय “Reservation Choice” सेक्शन में “Lower Berth” का विकल्प जरूर चुनें। इससे रेलवे का कंप्यूटराइज्ड सिस्टम आपकी प्राथमिकता को रिकॉर्ड करता है और सीट अलॉटमेंट के दौरान उसे ध्यान में रखता है। हालांकि यह 100% गारंटी नहीं देता, लेकिन संभावना काफी बढ़ जाती है।

    2. जितनी जल्दी बुकिंग, उतने ज्यादा चांस
    लोअर बर्थ पाने का सबसे बड़ा नियम है  जल्दी टिकट बुक करना। जैसे-जैसे सीटें भरती जाती हैं, लोअर बर्थ उपलब्धता कम होती जाती है। Tatkal या आखिरी समय की बुकिंग में अक्सर मिडिल और अपर बर्थ ही बचती हैं।

    3. सीनियर सिटीजन कोटे का लें फायदा
    भारतीय रेलवे बुजुर्ग यात्रियों और 45 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए विशेष लोअर बर्थ कोटा देता है। अगर बुकिंग के दौरान सही उम्र और विवरण भरे जाएं तो सिस्टम प्राथमिकता के आधार पर लोअर बर्थ अलॉट कर सकता है।

    4. ज्यादा लोगों की बजाय छोटे ग्रुप में करें बुकिंग
    अगर आप एक साथ बहुत ज्यादा लोगों की टिकट बुक करते हैं, तो सिस्टम सभी को साथ सीट देने की कोशिश करता है। ऐसे में लोअर बर्थ मिलने की संभावना कम हो सकती है। कम यात्रियों के साथ अलग-अलग बुकिंग करने पर लोअर सीट मिलने के चांस बढ़ सकते हैं।

    5. चार्ट बनने के बाद TTE से जरूर बात करें
    कई बार अंतिम समय में यात्रियों के टिकट कैंसिल हो जाते हैं या सीटें खाली रह जाती हैं। ऐसे में चार्ट बनने के बाद TTE से विनम्रता से बात करने पर लोअर बर्थ मिल सकती है। विशेष परिस्थितियों में TTE सीट एडजस्ट करने में मदद कर सकते हैं।

    ध्यान रखें ये जरूरी बात
    रेलवे का सीट अलॉटमेंट पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से होता है, इसलिए हर बार लोअर बर्थ मिलना तय नहीं होता। लेकिन सही विकल्प, समय पर बुकिंग और रेलवे नियमों की जानकारी आपकी यात्रा को ज्यादा आरामदायक बना सकती है।