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  • IRIS Dena के डूबने से पूर्व भारत ने दूसरे ईरानी जहाज को दी शरण… कोच्चि में 183 क्रू मेंबर्स के ठहरने की व्यवस्था की

    IRIS Dena के डूबने से पूर्व भारत ने दूसरे ईरानी जहाज को दी शरण… कोच्चि में 183 क्रू मेंबर्स के ठहरने की व्यवस्था की


    कोच्चि।
    हिंद महासागर (Indian Ocean) में बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. श्रीलंका के पास एक ईरानी जंगी जहाज (Iranian Warship) के डूबने से कुछ दिन पहले ईरान ने भारत से अपने दूसरे नौसेना के जहाज (Naval Ships) को कोच्चि में तुरंत डॉकिंग (Immediate Docking ) की अनुमति देने का अनुरोध किया था. सूत्रों के अनुसार भारत ने इस अनुरोध को मंजूरी दे दी और जहाज के 183 क्रू मेंबर्स के ठहरने की व्यवस्था भी की है।

    सरकारी सूत्रों के मुताबिक, ईरानी जहाज IRIS लवन में गंभीर तकनीकी दिक्कतें आ गई थीं. ईरान की ओर से किए गए अनुरोध के बाद 1 मार्च को उसे इमरजेंसी डॉकिंग की अनुमति दे दी गई. बताया जाता है कि ईरानी युद्धपोत IRIS डेना को श्रीलंका के तट के पास एक अमेरिकी सबमरीन द्वारा टॉरपीडो से डुबोए जाने से कुछ दिन पहले ही ईरान ने भारत से संपर्क किया था।

    IRIS डेना भारत द्वारा आयोजित मिलान मल्टीलेटरल नेवल एक्सरसाइज में हिस्सा लेने के बाद अपने देश लौट रहा था. इस हमले में कम से कम 87 ईरानी नाविकों के मारे जाने की सूचना है. फिलहाल दक्षिण भारत के कोच्चि में नौसेना की सुविधाओं में ईरानी नौसेना के क्रू मेंबर्स ठहराए गए हैं. उनके जहाज की तकनीकी जांच की जा रही है. जहाज को समय रहते सुरक्षित ठिकाना मिल गया।

    हालांकि, उसका सिस्टर शिप इतनी किस्मत वाला नहीं रहा. IRIS डेना हिंद महासागर में अमेरिकी सबमरीन द्वारा दागे गए टॉरपीडो की चपेट में आकर डूब गया. इस घटना ने क्षेत्र में पहले से बढ़े तनाव को और तेज कर दिया है. यह टकराव ऐसे समय में हुआ है जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है और दोनों पक्षों की ओर से हमले जारी हैं.

    सूत्रों के मुताबिक, यह घटना 4 मार्च को श्रीलंका के गाले बंदरगाह के दक्षिण में करीब 40 नॉटिकल मील दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई. बताया गया कि जंगी जहाज ने सुबह एक डिस्ट्रेस कॉल जारी कर धमाके की सूचना दी थी. हालांकि, जब तक श्रीलंका के बचाव दल मौके पर पहुंचे, तब तक ईरान का जंगी जहाज समुद्र में डूब चुका था और कई क्रू मेंबर्स की मौत हो चुकी थी।

    हिंद महासागर में हुई इस घटना ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं. एक तरफ ईरान का एक जंगी जहाज भारत के बंदरगाह में तकनीकी वजहों से शरण लिए हुए है, तो दूसरी ओर उसका सिस्टर शिप समुद्र की गहराइयों में समा चुका है. यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव अब हिंद महासागर क्षेत्र तक असर दिखाने लगा है।

  • IRIS DENA पर मोदी सरकार की चुप्पी से भड़के खरगे, कहा-देश की विदेश नीति को बर्बाद कर रहे…

    IRIS DENA पर मोदी सरकार की चुप्पी से भड़के खरगे, कहा-देश की विदेश नीति को बर्बाद कर रहे…

    नई दिल्‍ली। इजरायल और अमेरिका द्वारा मिलकर ईरान पर किए गए हमले ने वैश्विक राजनीति के साथ-साथ भारत की घरेलू राजनीति को भी तेज कर दिया है। ईरानी जहाज को हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा डुबोए जाने पर भारत सरकार की चुप्पी को लेकर विपक्ष ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि हिंद महासागर में हुई इस घटना पर पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की चुप्पी से साफ है कि देश के रणनीतिक और राष्ट्रीय हितों की घोर उपेक्षा की जा रही है। यह न सिर्फ भारत के राष्ट्रीय सिद्धांतों का अपमान है, बल्कि हमारी उस विदेश नीति का भी अपमान है, जिसे तमाम सरकारों ने बड़ी मेहनत से बनाया और अपनाया है।

    सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखे एक पोस्ट में खरगे ने मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “ईरान का जो जहाज टारपीडो की चपेट में आने से डूबा है यह जहाज बिना सैन्य साजो सामान के था और भारत में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू 2026 से लौट रहा था।

    ईरानी नौसेना का जहाज ईरिस डेना भारत का आमंत्रित अतिथि था और यह विशाखापत्तनम में 15 से 26 फरवरी तक आयोजित अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू 2026 में शामिल हुआ था। इस आयोजन में 70 से ज्यादा देशों की नौसेनाएं शामिल हुईं थीं।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि आश्चर्य की बात यह है कि इस अतिथि के डूबने पर भारत की तरफ से कोई चिंता या संवेदना व्यक्त नहीं की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पर चुप हैं। पीएम मोदी पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि जब आप अपने ही आंगन में हो रही घटनाओं पर प्रतिक्रिया नहीं दे सकते हैं तो हमें महासागर सिद्धांतों और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ होने के सिद्धांतों पर उपदेश क्यों दे रहे हैं।
    होर्मुज की खाड़ी में फंसे 1100 भारतीय नाविक: खरगे

    कांग्रेस अध्यक्ष ने इस युद्ध की वजह से होर्मुज की खाड़ी में फंसे भारतीयों को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि होर्मुज की खाड़ी में 38 भारतीय ध्वज वाले जहाज और 1100 नाविक फंसे हुए हैं।

    प्टन आशीष कुमार समेत दो भारतीय नाविकों की कथित तौर पर मौत हो गई है। समुद्री बचाव या राहत अभियान क्यों नहीं चलाया जा रहा है? पीएम मोदी कहते हैं कि कच्चे तेल और अन्य तेल का भंडार केवल 25 दिनों के लिए बचा है। तेल की बढ़ती कीमतों के बीच, हमारी ऊर्जा संबंधी इमरजेंसी योजना क्या है, खासकर भारत सरकार द्वारा रूसी तेल का आयात रोकने की मांग को लगभग स्वीकार करने के बाद। खाड़ी देशों के साथ अन्य प्रमुख वस्तुओं के व्यापार का क्या होगा।
    विदेश नीति को बर्बाद कर रहे हैं: खरगे

    कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए और कहा कि विदेश मंत्रालय के 3 मार्च के बयान के अनुसार, “कुछ भारतीय नागरिकों की जान चली गई है या वे लापता हैं”। खाड़ी देशों में एक करोड़ भारतीय रहते हैं। मेडिकल छात्र मदद की गुहार लगाते हुए हताश वीडियो संदेश जारी कर रहे हैं।

    भारत सरकार उनकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित कर रही है? क्या प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को निकालने की कोई योजना बनाई गई है? उन्होंने कहा कि इन सब स्थितियों के बीच “स्पष्ट रूप से, मोदी जी का आत्मसमर्पण राजनीतिक और नैतिक दोनों है। यह भारत के मूल राष्ट्रीय हितों का अपमान करता है और हमारी उस विदेश नीति को खत्म कर रहा है, जिसे वर्षों से लगातार सरकारों द्वारा सावधानीपूर्वक और मेहनत से बनाया और अपनाया गया है।”

    गौरतलब है कि इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले के साथ शुरू हुई यह जंग अब पश्चिम एशिया से आगे बढ़कर हिंद महासागर में पहुंच गई है।

    भारत में फ्लीट रिव्यू कार्यक्रम के तहत आए ईरानी युद्धपोत को अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के करीब डुबो दिया। इस घटना में 80 से ज्यादा ईरानी नौसैनिकों के मारे जाने की आशंका है। बाकियों को श्रीलंकाई नेवी से बचाव अभियान के तहत बचाया था। फिलहाल यह सैनिक श्रीलंका में मौजूद हैं।