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  • सेशन कोर्ट के सुझाव देने के तरीके पर भड़का SC…., मांगा स्पष्टीकरण

    सेशन कोर्ट के सुझाव देने के तरीके पर भड़का SC…., मांगा स्पष्टीकरण


    नई दिल्ली।
    देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) के द्वारा राज्यों के हाईकोर्ट (High Court) और जिला अदालतों (District courts) को आदेश, सलाह या सुझाव देने की बात तो आपने अक्सर सुनी होगी। हालांकि, आज हम जो बताने जा रहे हैं वह थोड़ा अटपटा लग सकता है। सेशन कोर्ट के एक जज ने सुप्रीम कोर्ट को यह सुझाव दे दिया है आपराधिक मामले में आरोपी को कब जमानत देनी चाहिए और कब नहीं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए उस जज से स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा कि वह पश्चिम बंगाल के एक अतिरिक्त सत्र जज के सुझाव वाली पत्र लिखने के तरीके से काफी परेशान है।

    दरअसल, पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना में बतौर अतिरिक्त सत्र जज ने एक आपराधिक मामले में ट्रायल पूरा करने के लिए और समय देने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट को एक पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को यह सुझाव देने का प्रयास किया कि आपराधिक मामले में आरोपी को कब जमानत दी जानी चाहिए और कब नहीं। इसको लेकर जस्टिस जेबी पारदीवाला और के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि ऐसा करना ट्रायल जज का काम नहीं है। पत्र के आखिरी दो पैराग्राफ हमें पसंद नहीं आए।


    ट्रायल पूरा करने के लिए मांगा था समय

    सत्र अदालत ने जज ने गत 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के असिस्टेंट रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर ट्रायल पूरा करने के लिए और समय देने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया कि गत 11 मई के एक आदेश से उसने सत्र अदालत को निर्देश दिया था कि तीन माह में मामले का ट्रायल पूरा किया जाए।


    लालू समेत नौ पर आरोप तय करने का फैसला टला

    एक अन्य मामले में राउज एवेन्यू अदालत ने शनिवार को पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और छह अन्य लोगों के खिलाफ कथित आईआरसीटीसी होटल घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में औपचारिक रूप से आरोप तय करने के फैसले को 30 अक्तूबर तक स्थगित कर दिया। विशेष न्यायाधीश प्रशांत कुमार की अदालत में सभी आरोपी पेश हुए। अदालत ने औपचारिक रूप से आरोप तय करने के निर्णय को अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया।

  • US-भारत ट्रेड डील पर रोड़ा बन सकती है दाल… इंपोर्ट ड्यूटी लगाने से अमेरिका को लगी मिर्ची

    US-भारत ट्रेड डील पर रोड़ा बन सकती है दाल… इंपोर्ट ड्यूटी लगाने से अमेरिका को लगी मिर्ची


    वाशिंगटन।
    अमेरिका और भारत (America and India) के बीच ट्रेड डील (Trade deal) एक बार फिर अटकती नजर आ रही है। इस बार इस डील के रास्ते में रोड़ा बनी है दाल। दो अमेरिकी सांसदों ने इसको लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) को पत्र लिखा है। इसमें ट्रंप से कहा गया है कि वो भारत पर दबाव बनाएं कि अमेरिकी दालों (American pulses) के आयात से 30 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी (30 Percent Import Duty) हटाई जाए। अमेरिकी सांसदों ने भारत द्वारा लगाई गई इंपोर्ट ड्यूटी को गैर-जरूरी बताया गया है। साथ ही इनका यह भी कहना है कि इसकी वजह से अमेरिकी उत्पादकों को काफी नुकसान हो रहा है। बता दें कि भारत ने यह आयात शुल्क अमेरिका द्वारा भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के बाद लगाया है। आशंका है कि इसके चलते अमेरिका-भारत के बीच चल रही ट्रेड डील फिर पटरी से उतर सकती है।


    सांसदों के लेटर में क्या कहा गया

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह पत्र रिपब्लिकन सीनेटरों ने लिखे हैं। इनमें से एक हैं मोंटाना से स्टीव डेन्स और दूसरे हैं उत्तरी डकोटा से केविन क्रेमर। पत्र में कहा गया है कि उनके राज्य दो बड़े दाल उत्पादकों में से हैं, जिसमें मटर भी शामिल है। भारत इनका सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जो विश्व का 27 फीसदी है। इसके मुताबिक भारत में लेंटिल्स, चिकपीज, सूखी दालों और मटर की सबसे ज्यादा खपत है। लेकिन भारत ने इन श्रेणियों में अमेरिकी निर्यात पर टैरिफ लगा रखा है। अमेरिकी सांसदों ने कहा कि भारत ने पिछले साल 30 अक्टूबर को पीली दाल पर भी 30 फीसदी टैरिफ लगा दिया।


    पीएम मोदी से बात करने की सलाह

    अमेरिकी सांसदों ने भारत द्वारा लगाए गए टैरिफ को अनफेयर बताते हुए अमेरिकी दाल उत्पादकों को नुकसान होने की बात कही है। साथ ही अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रंप को सलाह दी है कि वह दाल पर भारत द्वारा लगाए गए टैरिफ को लेकर पीएम मोदी से बात करें। ताकि दोनों देशों के बीच एक सहयोग बने, जिससे अमेरिकी उत्पादकों और भारतीय उपभोक्ताओं दोनों को फायदा मिल सके। दोनों सीनेटरों ने अपने राज्यों में बेहतर कृषि उत्पादों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति का शुक्रिया भी अदा किया।


    लंबे समय से तनाव

    बता दें कि टैरिफ के मुद्दे पर भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से तनाव कायम है। इसकी शुरुआत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत शुल्क (टैरिफ) लगाने के बाद हुई। इस टैरिफ में रूसी कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है। इन तनावों के बीच अमेरिकी अधिकारियों द्वारा भारत के प्रति गलत टिप्पणियां माहौल को और खराब कर रही हैं। कुछ दिन पहले ही वाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने एक बार फिर भारत की आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि अमेरिका के नागरिक भारत में कृत्रिम मेधा (एआई) के लिए भुगतान क्यों कर रहे हैं?