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  • डेनमार्क में अजान पर बैन की तैयारी! सरकार बोली- ऐसा न लगे कि इस्लामाबाद में हैं

    डेनमार्क में अजान पर बैन की तैयारी! सरकार बोली- ऐसा न लगे कि इस्लामाबाद में हैं


    नई दिल्ली । यूरोप में प्रवासन और धार्मिक पहचान को लेकर जारी बहस के बीच डेनमार्क ने एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। देश की सरकार मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर दी जाने वाली अजान पर कानूनी प्रतिबंध लगाने की संभावना की समीक्षा कर रही है। सरकार का कहना है कि यह फैसला देश की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक वातावरण को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया जा रहा है। हालांकि अभी यह केवल प्रस्ताव के स्तर पर है और इसे अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।

    डेनमार्क के इमिग्रेशन मंत्री मोर्टेन बोडस्कोव ने कहा कि सरकार यह जांच कर रही है कि क्या धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान के प्रावधानों के तहत अजान पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि डेनमार्क की छतों के ऊपर लाउडस्पीकर से अजान की आवाज नहीं सुनाई देनी चाहिए और लोगों को ऐसा महसूस नहीं होना चाहिए कि वे किसी दूसरे देश के धार्मिक माहौल में हैं। उनके इस बयान ने पूरे यूरोप में नई बहस छेड़ दी है।

    सरकार का तर्क है कि सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक उद्घोषणाओं को नियंत्रित करना देश की सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने के लिए जरूरी हो सकता है। वहीं दूसरी ओर इस प्रस्ताव के विरोध में यह दलील दी जा रही है कि डेनमार्क का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और सार्वजनिक रूप से धार्मिक गतिविधियां करने की स्वतंत्रता देता है। ऐसे में किसी विशेष धार्मिक परंपरा पर रोक लगाने का फैसला कानूनी चुनौती का सामना कर सकता है।

    डेनमार्क में लगभग 2.7 लाख मुस्लिम आबादी रहती है और पूरे देश में करीब 100 मस्जिदें हैं। हाल के वर्षों में यूरोप के कई देशों में प्रवासन हिजाब धार्मिक पहचान और सार्वजनिक धार्मिक गतिविधियों को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज हुई है। कई देशों ने पहले भी धार्मिक प्रतीकों और सार्वजनिक आयोजनों को लेकर नए नियम लागू किए हैं।

    सरकार फिलहाल कानूनी विशेषज्ञों की राय ले रही है ताकि यह तय किया जा सके कि प्रस्ताव संविधान और मानवाधिकार संबंधी कानूनों के अनुरूप है या नहीं। यदि कानूनी समीक्षा सकारात्मक रहती है तो सरकार संसद में नया विधेयक ला सकती है। हालांकि इसके लिए राजनीतिक सहमति और संसदीय मंजूरी भी जरूरी होगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा केवल अजान तक सीमित नहीं है बल्कि यूरोप में राष्ट्रीय पहचान धार्मिक स्वतंत्रता और प्रवासन नीति के बीच संतुलन बनाने की चुनौती से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में डेनमार्क सरकार की कानूनी समीक्षा और राजनीतिक निर्णय पर पूरे यूरोप की नजर रहेगी क्योंकि इसका असर अन्य देशों की नीतियों पर भी पड़ सकता है।

  • विवियन डीसेना: धर्म बदलकर इस्लाम अपनाया, रमजान में रोजा और पांच वक्त की नमाज, गुपचुप रचाई दूसरी शादी

    विवियन डीसेना: धर्म बदलकर इस्लाम अपनाया, रमजान में रोजा और पांच वक्त की नमाज, गुपचुप रचाई दूसरी शादी


    नई दिल्ली। टीवी के मोस्ट पॉपुलर स्टार विवियन डीसेना ने साल 2019 में अपने जीवन का बड़ा फैसला लिया और धर्म बदलकर इस्लाम अपनाया। इस बदलाव के बाद उन्होंने मिस्र की नागरिक नौरान से गुपचुप शादी रचाई। विवियन की पहली शादी टीवी अभिनेत्री वाहबिज दोराबजी से 2013 में हुई थी, लेकिन कुछ सालों बाद तलाक हो गया। इसके बाद उन्होंने अपने निजी जीवन और आस्था के अनुसार नई राह चुनी।

    विवियन ने खुलासा किया कि इस्लाम धर्म अपनाने के बाद उन्होंने अपनी आस्था और जीवनशैली में कई बदलाव किए। वे अब पांच वक्त की नमाज नियमित रूप से पढ़ते हैं और रमजान के महीने में रोजा रखते हैं। उन्होंने बताया कि उनका रोजा बहुत सादगी से खुलता है—तीन खजूर, एक गिलास दूध और थोड़ा पानी। इसके अलावा, वे घर पर विशेष ‘डेट मिल्क’ तैयार करते हैं जिसमें खजूर, शहद, सूखे मेवे और ताजे फल मिलाते हैं। इस परंपरा के माध्यम से वे अपनी इफ्तार करते हैं।

    HT को दिए इंटरव्यू में विवियन ने कहा कि रमजान उनका जीवन बदलने वाला महीना रहा। उन्होंने बताया, “रमजान आस्था का महीना है। यह हमें संस्कार और मूल्य सिखाता है। इस दौरान हमें यह भी समझ आता है कि जिन लोगों के पास भोजन नहीं है, वे किस तरह की कठिनाइयों से गुजरते हैं।” विवियन ने यह भी कहा कि रमजान का महीना हमारी आदतों को ‘रीसेट’ करने और आत्म-अनुशासन बढ़ाने का अवसर है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि उन्हें अपनी सुबह की कॉफी छोड़नी पड़ती है, और पानी भी नहीं पीते। इससे शरीर वैज्ञानिक रूप से 30 दिनों के लिए ‘डिटॉक्स मोड’ में चला जाता है।

    विवियन ने जकात (चैरिटी) देने की भी अहमियत पर जोर दिया और कहा कि वह अपनी क्षमता के अनुसार दान करते हैं। उनका मानना है कि चैरिटी का उद्देश्य केवल प्रचारित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे एक जिम्मेदारी के रूप में निभाना चाहिए।

    विवियन की निजी जिंदगी भी चर्चा में रही है। धर्म परिवर्तन और दूसरी शादी के बाद उन्हें ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा, लेकिन इसका असर उनके खुशहाल जीवन पर नहीं पड़ा। विवियन और नौरान अब साथ में संतुलित और खुशहाल जीवन जी रहे हैं। वे अपने करियर और परिवार दोनों में संतुलन बनाए हुए हैं।

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पांच वक्त की नमाज और रोजा उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं, चाहे रमजान का महीना हो या न हो। विवियन का यह अनुभव यह दिखाता है कि चाहे जीवन में कितनी भी चुनौतियाँ आएं, आस्था और अपने सिद्धांतों का पालन हमेशा मार्गदर्शक होता है।

    विवियन डीसेना की कहानी बताती है कि धर्म और आस्था के बदलाव से जीवन में स्थिरता और संतुलन पाया जा सकता है, और निजी निर्णयों को अपनाकर भी कोई व्यक्ति खुशहाल और संतुलित जीवन जी सकता है।

  • मौत के बाद क्या होता है? 10 प्रमुख धर्मों की रहस्यमय मान्यताएं

    मौत के बाद क्या होता है? 10 प्रमुख धर्मों की रहस्यमय मान्यताएं

    नई दिल्ली/मौत के बाद क्या होता है? यह सवाल इंसान के अस्तित्व से जुड़ा सबसे गहरा रहस्य है। अलग-अलग धर्म इस पर अलग-अलग विचार रखते हैं। विश्व में हजारों धर्म हैं, और लगभग हर धर्म में मृत्यु और उसके बाद की जीवन यात्रा पर अलग मान्यता मिलती है। यहाँ 10 प्रमुख धर्मों के दृष्टिकोण पर नजर डालते हैं।

    1. ईसाई धर्म
    ईसाई धर्म में मौत को अंत नहीं बल्कि नई शुरुआत माना जाता है। उनके अनुसार, हर जीव में आत्मा रहती है और मरने के बाद भगवान का न्याय होता है। अच्छे कर्म करने वाले स्वर्ग जाते हैं और पापी नर्क में जन्म लेते हैं।

    2. इस्लाम
    इस्लाम में मृत्यु से डरने की बजाय इसे स्वीकार करना सिखाया जाता है। मुस्लिम मानते हैं कि अल्लाह मृत्यु के समय फरिश्ते भेजते हैं और आत्मा की परीक्षा लेते हैं। पाक आत्मा को बरजख भेजा जाता है, जहां वह कयामत के दिन का इंतजार करती है।

    3. हिंदू धर्म

    हिंदू धर्म में मृत्यु और पुनर्जन्म के चक्र को ‘संसार’ कहा जाता है। आत्मा कई जन्मों में नए शरीर में आती है- कभी इंसान तो कभी जानवर। मोक्ष प्राप्त करने पर पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिलती है।

    4. बौद्ध धर्म

    बौद्ध धर्म में जीवन और मृत्यु सतत प्रक्रिया है। आत्मा मृत्यु के बाद अन्य जन्मों में जाती है। पुनर्जन्म का स्वरूप व्यक्ति के कर्मों पर निर्भर करता है।

    5. सिख धर्म

    सिख धर्म में मृत्यु के बाद आत्मा कर्मों के आधार पर पुनर्जन्म प्राप्त करती है। भगवान का ध्यान और अहंकार पर नियंत्रण पाने से आत्मा पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त हो सकती है।

    6. बहाई धर्म
    बहाई धर्म में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा जारी रहती है। शरीर मिट्टी में मिल जाता है, लेकिन आत्मा स्वतंत्र और खुश रहती है। आत्मा की तरक्की में भगवान की कृपा और जीवित लोगों के नेक कर्म मदद करते हैं। मृत्यु को भय की चीज नहीं माना जाता।

    7. जैन धर्म

    जैन धर्म में आत्मा हमेशा जीवित रहती है। मृत्यु और पुनर्जन्म का चक्र केवल कर्मों से तय होता है। अहिंसा और अच्छे कर्म के माध्यम से आत्मा पुनर्जन्म के बंधन से मुक्त होती है।

    8. जोरोस्ट्रियन धर्म

    जोरोस्ट्रियन धर्म में मृत्यु के बाद आत्मा का न्याय ‘चिनवट ब्रिज’ पर होता है। अच्छे कर्म करने वाले स्वर्ग जाते हैं और बुरे कर्म करने वाले नर्क में। अंततः सभी आत्माएं शुद्ध होकर भगवान के पास लौट जाती हैं।

    9. शिंटो धर्म जापान 

    शिंटो धर्म में आत्मा शरीर की मृत्यु के बाद जीवित रहती है और जिंदा लोगों की सहायता करती है। मरने के बाद व्यक्ति पवित्र आत्मा बन जाता है और परिवार और समुदाय की रक्षा करता है।

    10. अन्य प्राचीन और लोकधर्म

    अफ्रीकी, इंडिजिनस और अन्य लोकधर्मों में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा विभिन्न रूपों में देखी जाती है। कुछ में आत्मा पूर्वजों के साथ मिलती है, कुछ में जीवन और प्रकृति के चक्र में सम्मिलित होती है।
    मृत्यु के बाद जीवन को लेकर इन सभी धर्मों की मान्यताएं भले ही अलग हों, लेकिन एक साझा संदेश है: मृत्यु अंत नहीं, बल्कि नई यात्रा की शुरुआत है। चाहे स्वर्ग, नर्क या पुनर्जन्म हो, सभी धर्म आत्मा के महत्व और उसके कर्मों पर जोर देते हैं।