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  • अमेरिका-इजराइल बनाम ईरान जंग: आज रात हो सकता है अब तक का सबसे बड़ा हमला, मिसाइल लॉन्चर और फैक्ट्रियां तबाह?

    अमेरिका-इजराइल बनाम ईरान जंग: आज रात हो सकता है अब तक का सबसे बड़ा हमला, मिसाइल लॉन्चर और फैक्ट्रियां तबाह?



    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग का आठवां दिन है। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने शनिवार को फॉक्स न्यूज से बातचीत में चेतावनी दी कि आज रात ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया जाएगा। इस हमले का उद्देश्य ईरान के मिसाइल लॉन्चर और मिसाइल निर्माण फैक्ट्रियों को नष्ट करना बताया जा रहा है, जिससे देश की मिसाइल क्षमता कमजोर हो जाएगी।

    वहीं शुक्रवार देर रात इजराइल ने तेहरान मेहराबाद एयरपोर्ट पर हवाई हमला किया, जिसके बाद आग और धुएं का गुबार उठता देखा गया। इस हमले के पीछे रूस का खुफिया समर्थन भी सामने आया है, जो ईरान को अमेरिकी युद्धपोतों और विमानों की लोकेशन की जानकारी प्रदान कर रहा है।

    ईरानी युद्धपोत भारत में रुका
    ईरान का युद्धपोत IRIS लावन तकनीकी खराबी के कारण 1 मार्च से कोच्चि बंदरगाह पर रुका हुआ है। इसमें सवार 183 क्रू मेंबर फिलहाल भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहरे हैं। यह जहाज हाल ही में आयोजित अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास IFR 2026 और MILAN 2026 में शामिल था।

    अमेरिका-इजराइल हमलों का आंकड़ा
    अमेरिका लगभग $151.8 मिलियन के हथियार देगा इजराइल को।

    ईरान में अब तक 1,332 मौतें।

    1,300 हमले और 14 मेडिकल सेंटर निशाना बने।

    ईरान के लगभग 300 मिसाइल लॉन्चर तबाह।

    कई शहरों में पानी और बिजली की सप्लाई ठप।

    इजराइल के अनुमान के मुताबिक अब तक ईरान ने लगभग 200 मिसाइलें दागी हैं, जबकि 1,000 मिसाइलों की संभावना थी।

    सऊदी अरब और खाड़ी देशों में हालात
    सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर मिसाइल हमला रोका गया; दो बैलिस्टिक मिसाइलें इंटरसेप्ट कर नष्ट की गईं। देश के दक्षिणी हिस्से में चार ड्रोन भी मार गिराए गए।

    पाकिस्तान पर असर
    ईरान-इजराइल जंग का असर पाकिस्तान पर भी दिख रहा है। पाकिस्तान की दक्षिण-पश्चिम सीमा लगभग 900 किलोमीटर तक ईरान से लगी है। हाल ही में पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ औपचारिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

    ईरान का जवाब
    ईरान ने रात भर कम से कम 5 बैलिस्टिक मिसाइलें इजराइल की ओर दागीं। इसके चलते लाखों इजराइली नागरिकों को बम शेल्टर में रहना पड़ा। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान इजराइल पर लगातार मिसाइलें दागकर सरकार पर दबाव बढ़ाना चाहता है।

  • मिडिल ईस्ट तनाव में रूस की एंट्री! ईरान को दी अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़ी खुफिया जानकारी

    मिडिल ईस्ट तनाव में रूस की एंट्री! ईरान को दी अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़ी खुफिया जानकारी


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच रूस अब खुलकर ईरान के समर्थन में सामने आता दिख रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने ईरान को ऐसी खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई है, जिससे उसे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों, युद्धपोतों और विमानों को निशाना बनाने में मदद मिल सकती है। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में संघर्ष और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।

    एक रिपोर्ट के अनुसार, दो अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि रूस ने तेहरान को अमेरिकी सैन्य गतिविधियों और संपत्तियों से जुड़ी अहम जानकारी साझा की है। इससे ईरान को अमेरिका की सैन्य तैनाती को समझने और संभावित हमले की रणनीति बनाने में मदद मिल सकती है। माना जा रहा है कि यह पहला संकेत है कि मॉस्को उस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल होने की कोशिश कर रहा है, जिसे अमेरिका और इजरायल ने हाल ही में ईरान के खिलाफ शुरू किया है।

    दरअसल, रूस और ईरान के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में और मजबूत हुए हैं। यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस को मिसाइलों और ड्रोन की जरूरत पड़ी, जिसके चलते दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग बढ़ा। वहीं ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और हिज्बुल्लाह, हमास और हूती जैसे समूहों के समर्थन के कारण लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहा है, ऐसे में रूस का समर्थन उसके लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

    पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति से की बातचीत
    इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत भी की। इस दौरान उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और हमलों में आम नागरिकों की जान जाने पर दुख जताया। युद्ध शुरू होने के बाद क्रेमलिन की ओर से ईरान को किया गया यह पहला आधिकारिक फोन कॉल था।

    पुतिन ने बातचीत में तनाव खत्म करने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में कदम बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट से जुड़े मुद्दों को सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।

    अमेरिका की प्रतिक्रिया
    रूस द्वारा ईरान को खुफिया जानकारी दिए जाने की खबरों पर अमेरिका की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इससे उनके सैन्य अभियानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन जारी रहेंगे और अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल किया जाएगा।

    ईरान के लगातार हमले
    वहीं, क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका और इजरायल जहां ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहे हैं, वहीं ईरान भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और मिडिल ईस्ट के कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने अब तक इजरायल समेत करीब 12 देशों में सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इनमें यूएई, कतर, बहरीन, जॉर्डन, इराक, कुवैत, ओमान, सऊदी अरब, साइप्रस, सीरिया और अजरबैजान शामिल हैं। इन हमलों में ईरान ने खोर्रमशहर-4, खेबर और फतेह जैसी मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। यह भी बताया जा रहा है कि इजरायल पर दागी गई कुछ बैलिस्टिक मिसाइलों में क्लस्टर बम लगे थे।

    हालांकि, अब बड़ा सवाल यह है कि बढ़ते दबाव और हमलों के बीच ईरान अपने रुख में नरमी दिखाएगा या टकराव और बढ़ेगा। फिलहाल ईरान के रुख से ऐसा संकेत नहीं मिल रहा कि वह पीछे हटने को तैयार है।

  • सोनू सूद ने दुबई में फंसे नागरिकों के लिए इंसानियत का हाथ बढ़ाया, मुफ्त में सुरक्षित ठहरने की सुविधा दी

    सोनू सूद ने दुबई में फंसे नागरिकों के लिए इंसानियत का हाथ बढ़ाया, मुफ्त में सुरक्षित ठहरने की सुविधा दी



    नई दिल्ली। इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के कारण दुबई में फंसे लोगों के लिए बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद आगे आए हैं। उन्होंने यह घोषणा की है कि युद्ध या संकट के चलते फंसे सभी लोग—चाहे वे भारत से हों या किसी अन्य देश से फ्री में सुरक्षित रहने की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। इस सुविधा के लिए उन्हें केवल इंस्टाग्राम पर @dugastaproperties को मैसेज करना होगा।

    सोनू सूद ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि युद्ध के चलते कई यात्री दुबई में फंसे हुए हैं और उनके पास रहने की जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि मदद किसी भी शर्त या राष्ट्रीयता के बिना इंसानियत के नाते की जा रही है। उन्होंने सभी को आश्वस्त किया कि यह सुविधा पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद है।

    इस समय दुबई में फंसे लोगों में पंजाब के कई नागरिक भी शामिल हैं। पंजाब सरकार के अनुसार, अब तक 150 से अधिक कॉल दुबई में फंसे लोगों की प्राप्त हो चुकी हैं। ज्यादातर लोग होटलों में ठहरे हुए हैं, लेकिन उनका संपर्क सीमित है। मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने बताया कि नवंबर से मार्च तक दुबई में टूरिस्ट सीजन होता है, इसलिए कई लोग छुट्टियों के लिए गए थे और वर्तमान हालात में फंस गए।

    सोनू सूद का यह कदम नया नहीं है। इससे पहले अगस्त 2025 में पंजाब में आई भयंकर बाढ़ के समय भी उन्होंने राहत और बचाव कार्य में सक्रिय योगदान दिया था। तब वह अपनी बहन मालविका सूद के साथ प्रभावित इलाकों जैसे मोगा, धर्मकोट, फाजिल्का, खमाणों और संगेरा में पहुंचे और पीड़ित परिवारों की मदद की।

    बाढ़ के समय उनके द्वारा प्रदान की गई सहायता में खाद्य सामग्री, पीने का पानी, बेबी न्यूट्रिशन किट, कंबल, तिरपाल, हाइजीन किट, मच्छरदानी और पशुओं के लिए चारा शामिल था। साथ ही, उन्होंने मेडिकल कैंप भी लगाए और एक बच्चे का किडनी का इलाज करवाया। निचले इलाकों में राशन और बचाव के लिए दो नावें भी भेजी गई थीं, और प्रभावित परिवारों की आजीविका के लिए 100 भैंसें देने का वादा भी किया गया।

    सोनू सूद के इस कदम ने दुबई में फंसे लोगों को राहत दी है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद की है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी कोशिश है कि किसी भी आम नागरिक को डर और असुरक्षा के माहौल में जीना न पड़े।

    यह पहल दर्शाती है कि सोनू सूद ने हमेशा विपरीत परिस्थितियों में भी इंसानियत और सेवा के लिए आगे आकर मदद करने का संकल्प रखा है। दुबई में फंसे लोगों के लिए यह राहत एक बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई है।

  • पूर्व MLA संजय शुक्ला समेत फंसे यात्री यूएई से लौटे, इजराइल-ईरान युद्ध के बीच राहत की खबर

    पूर्व MLA संजय शुक्ला समेत फंसे यात्री यूएई से लौटे, इजराइल-ईरान युद्ध के बीच राहत की खबर


    नई दिल्ली। यूएई में इजराइल-ईरान युद्ध के बीच फंसे इंदौर के पूर्व MLA संजय शुक्ला समेत कई भारतीय यात्री अब सुरक्षित भारत लौट आए हैं। दुबई और शारजाह में जारी तनाव के कारण सैकड़ों यात्रियों की वापसी रुक गई थी और वे कई दिन होटल में मजबूरी में ठहरे रहे। इस सूची में पूर्व विधायक विशाल पटेल, प्रवीण कक्कड़, उद्योगपति मनीष शाहरा, मनीष अग्रवाल, पिंटू छाबड़ा, गोलू पाटनी, उत्पल गोयल, आदित्य शर्मा सहित अन्य लोग शामिल थे। सभी यात्री अब सुरक्षित अपने घर पहुंचे हैं, जिससे उनके परिवारों में राहत की लहर दौड़ गई।

    यूएई में हालात बिगड़ने के कारण एयर इंडिया एक्सप्रेस की शारजाह-इंदौर फ्लाइट IX-256 28 फरवरी से लगातार कैंसिल हो रही थी। 3 मार्च को भी यह उड़ान नहीं हुई थी, जिससे इंदौर, भोपाल और मध्य प्रदेश के अन्य जिलों से आए सैकड़ों यात्री वहां फंसे रहे। मिसाइल अलर्ट और युद्ध के खतरे ने उन्हें मानसिक तनाव में डाल दिया। कई यात्रियों ने बताया कि धमाकों और सुरक्षा अलर्ट के दौरान वे काफी डर गए थे।

    2 मार्च की शाम से दुबई एयरपोर्ट पर कुछ उड़ानें फिर से शुरू हुईं। फंसे हुए यात्री पहले मुंबई पहुंचे और वहां से दूसरी फ्लाइट लेकर इंदौर आए। हालांकि शारजाह-इंदौर की सीधी उड़ान अभी भी शुरू नहीं हुई है। सरकार और एयरलाइन कंपनियां लगातार स्थिति पर नजर रख रही हैं। इस बीच, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दिल्ली में संबंधित मंत्रालयों से बातचीत कर फंसे लोगों की सुरक्षित वापसी की पहल की। वहीं, कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग की थी।

    पूर्व MLA संजय शुक्ला और अन्य यात्रियों की वापसी से उनके परिवारों ने राहत की सांस ली। अबू धाबी एयरपोर्ट पर फंसे भारतीयों ने भी बताया कि उनके होटल के पास धमाके हुए और तनावपूर्ण माहौल रहा। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए सरकार ने सभी राज्यों में भड़काऊ भाषणों और अशांति के मामलों के लिए अलर्ट जारी किया है।

    इसी बीच, इंडिगो एयरलाइन ने सऊदी अरब के जेद्दा से हैदराबाद, मुंबई, दिल्ली और अहमदाबाद के लिए 10 स्पेशल फ्लाइट्स संचालित करने का निर्णय लिया है ताकि वहां फंसे भारतीय यात्री जल्द से जल्द स्वदेश लौट सकें। इस दौरान यूएई में फंसे लोगों की मदद के लिए भारत सरकार ने विशेष टीम और काउंसलर सहायता भी उपलब्ध कराई।

    इजराइल-ईरान युद्ध के चलते यह संकट चौथे दिन में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव ने पूरे क्षेत्र की हवाई यात्रा को प्रभावित किया। दुबई, शारजाह और अबू धाबी एयरपोर्ट पर कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द हुईं, जिससे विदेशी और भारतीय यात्री दोनों ही फंसे। अब हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं और भारत लौटे सभी यात्री सुरक्षित हैं।

    इस बीच, मध्य प्रदेश के नागरिकों के लिए यह राहत की खबर है कि पूर्व MLA संजय शुक्ला और अन्य यात्री सुरक्षित लौट आए हैं। उनकी वापसी ने उन परिवारों के दिलों को शांति दी है, जो दिनों से उनके लिए चिंतित थे।

  • Israel-Iran युद्ध के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति की चिंता… क्या रूस से आयात बढ़ाएगा भारत?

    Israel-Iran युद्ध के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति की चिंता… क्या रूस से आयात बढ़ाएगा भारत?


    नई दिल्ली।
    ईरान संकट (Israel-Iran War) के बीच भारत (India) समेत दुनिया के तमाम देशों के सामने तेल से जुड़ी समस्याएं खड़ी होने की चिंता है। हालांकि जानकारों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे कच्चे तेल (Crude Oil) के प्रमुख आपूर्ति मार्ग के बंद होने से भारत को निकट भविष्य में कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति में किसी बड़े व्यवधान का सामना करने की आशंका नहीं है। अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए कहा कि कच्चे तेल का भंडार कम से कम 10 दिन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।


    भारत के पास आकस्मिक योजनाएं

    ईरान पर अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों के बाद तेजी से बदलते घटनाक्रम में इस्लामिक गणराज्य के सर्वोच्च नेता के मारे जाने की खबरें भी शामिल हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह संघर्ष बहुत लंबा नहीं चलेगा। हालांकि, शीर्ष अधिकारियों और विश्लेषकों का कहना है कि यदि तनाव बढ़ता है, तो भारत के पास आकस्मिक योजनाएं तैयार हैं।


    रूस से आयात बढ़ा सकता है भारत

    ईरान के सरकारी मीडिया ने 28 फरवरी को कहा था कि अमेरिका और इजरायल के मिसाइल हमलों के जवाब में उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा निकासी बिंदुओं में से एक है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। अधिकारियों ने कहा कि कम अवधि के लिए इसके बंद होने से भारत पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि उसके पास ईंधन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त आपूर्ति है। उन्होंने आगे कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो देश रूसी तेल की खरीद बढ़ाकर अपने आयात स्रोतों में बदलाव कर सकता है।


    भारत के पास कितना तेल भंडार

    हालांकि, इसका तत्काल प्रभाव तेल की कीमतों पर दिखेगा। ब्रेंट क्रूड इस सप्ताह सात महीने के उच्चस्तर लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। यदि आपूर्ति बाधित होती है, तो कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ सकती हैं। एक अधिकारी ने कहा, ”भारतीय रिफाइनरी कंपनियों के पास टैंक और पारगमन में मिलाकर 10 से 15 दिन का कच्चा तेल भंडार है। इसके अलावा, उनके ईंधन टैंक भरे हुए हैं, जो देश की 7-10 दिन की ईंधन जरूरत को आसानी से पूरा कर सकते हैं।” एक अन्य अधिकारी ने कहा कि भारत वेनेजुएला, ब्राजील और अफ्रीका जैसे दूरदराज के देशों से भी तेल खरीद सकता है।