Tag: ISSF World Cup

  • ओलंपिक में चूके लेकिन उपलब्धियों से चमके रंजन सोढ़ी, वर्ल्ड कप में गोल्ड जीतकर बने भारत के स्टार निशानेबाज

    ओलंपिक में चूके लेकिन उपलब्धियों से चमके रंजन सोढ़ी, वर्ल्ड कप में गोल्ड जीतकर बने भारत के स्टार निशानेबाज


    नई दिल्ली। भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में रंजन सोढ़ी का नाम खास सम्मान के साथ लिया जाता है। डबल ट्रैप शूटिंग में अपनी सटीक निशानेबाजी और शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहचान मजबूत की। कॉमनवेल्थ गेम्स से लेकर एशियन गेम्स और आईएसएसएफ वर्ल्ड कप तक सोढ़ी ने कई महत्वपूर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। उनकी उपलब्धियों ने भारतीय शूटिंग को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

    रंजन सोढ़ी का जन्म 23 अक्टूबर 1979 को पंजाब के फिरोजपुर में हुआ था। बचपन से ही निशानेबाजी के प्रति उनका झुकाव आगे चलकर एक सफल खेल करियर में बदल गया। उन्होंने मेहनत और निरंतर अभ्यास के जरिए डबल ट्रैप शूटिंग में अपनी अलग पहचान बनाई। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया और वह भारतीय निशानेबाजी के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए।

    साल 2010 रंजन सोढ़ी के करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा। दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने दो सिल्वर मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसी वर्ष चीन के ग्वांगझू में आयोजित एशियन गेम्स में उन्होंने डबल ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड मेडल हासिल किया। इसके अलावा डबल ट्रैप टीम स्पर्धा में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल भी जीता। इन उपलब्धियों ने उन्हें देश के प्रमुख निशानेबाजों की कतार में खड़ा कर दिया।

    विश्व स्तर पर भी सोढ़ी का प्रदर्शन शानदार रहा। साल 2010 में इटली के लोनाटो में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में उन्होंने डबल ट्रैप स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद 2011 में चीन की राजधानी बीजिंग में हुए वर्ल्ड कप में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। उसी वर्ष स्लोवेनिया के मेरिबोर में आयोजित प्रतियोगिता में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। लगातार अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतना उनकी निरंतरता और कौशल को दर्शाता है।

    चार अक्टूबर 2011 को संयुक्त अरब अमीरात के अल ऐन में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में सोढ़ी ने फिर गोल्ड मेडल जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। साल 2011 में वह वर्ल्ड कप खिताब का सफलतापूर्वक बचाव करने वाले पहले भारतीय निशानेबाज बने। यह उपलब्धि भारतीय शूटिंग के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है और इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी प्रतिष्ठा और मजबूत हुई।

    विश्व कप में शानदार प्रदर्शन के दम पर रंजन सोढ़ी ने 2012 के लंदन ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई किया। उन्होंने डबल ट्रैप स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि वह पदक जीतने में सफल नहीं रहे। क्वालिफिकेशन राउंड में 134 अंक हासिल कर वह 11वें स्थान पर रहे। प्रतियोगिता की शुरुआत में उन्होंने 48 अंक बनाकर अच्छा प्रदर्शन किया था लेकिन आगे वह अपनी लय बरकरार नहीं रख सके। ओलंपिक पदक भले ही उनके खाते में नहीं आया लेकिन वहां तक पहुंचना भी उनके करियर की बड़ी उपलब्धि रही।

    निशानेबाजी में उनके योगदान और उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन पुरस्कार और राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया। रंजन सोढ़ी की कहानी मेहनत अनुशासन और लगातार बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने साबित किया कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय खिलाड़ी भी अपनी प्रतिभा के दम पर बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

  • हांगझोउ में भारत की शानदार शूटिंग, ईशा सिंह बनीं विश्व कप चैंपियन, मनु भाकर ने कांस्य जीतकर बढ़ाया गौरव

    हांगझोउ में भारत की शानदार शूटिंग, ईशा सिंह बनीं विश्व कप चैंपियन, मनु भाकर ने कांस्य जीतकर बढ़ाया गौरव


    नई दिल्ली । चीन के हांगझोउ में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में भारतीय निशानेबाजों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में भारत की युवा स्टार निशानेबाज ईशा सिंह ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर ने कांस्य पदक जीतकर भारत की झोली में एक और सफलता जोड़ दी। इन दोनों उपलब्धियों के साथ भारतीय टीम के कुल पदकों की संख्या तीन हो गई है और भारत पदक तालिका में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।

    फाइनल मुकाबले में ईशा सिंह ने शुरुआत से ही आत्मविश्वास और सटीक निशानेबाजी का शानदार प्रदर्शन किया। पूरे मुकाबले के दौरान उन्होंने लगातार बढ़त बनाए रखी और 50 शॉट्स में 40 अंक हासिल करते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया। मेजबान चीन की मजबूत चुनौती के बावजूद ईशा ने किसी तरह का दबाव अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और शानदार संयम के साथ मुकाबला अपने नाम किया।

    स्वर्ण पदक की दौड़ में चीन की युयुए झांग ईशा की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी थीं। हालांकि भारतीय निशानेबाज ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए उन्हें तीन अंकों के अंतर से पीछे छोड़ दिया। झांग ने 37 अंक के साथ रजत पदक हासिल किया। चीन की धरती पर मेजबान देश की स्टार निशानेबाज को हराकर स्वर्ण जीतना ईशा सिंह के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।

    दूसरी ओर ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर ने भी एक बार फिर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। कांस्य पदक के मुकाबले में उनका सामना उत्तर कोरिया की ह्योन ग्योंग पाक से हुआ। दोनों खिलाड़ियों के बीच बेहद रोमांचक और कांटे की टक्कर देखने को मिली। मुकाबला इतना करीबी रहा कि विजेता का फैसला डबल शूटऑफ से हुआ। दबाव के इस क्षण में मनु भाकर ने शानदार संयम दिखाया और निर्णायक निशाना लगाकर कांस्य पदक अपने नाम कर लिया।

    ईशा सिंह के स्वर्ण और मनु भाकर के कांस्य पदक के साथ भारत की पदक संख्या तीन हो गई है। इससे पहले भारतीय निशानेबाज संयम ने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में रजत पदक जीतकर भारत का खाता खोला था। लगातार मिल रही इन सफलताओं ने भारतीय शूटिंग दल का आत्मविश्वास और मजबूत कर दिया है।

    आईएसएसएफ वर्ल्ड कप की पदक तालिका में मेजबान चीन फिलहाल पहले स्थान पर बना हुआ है। चीन अब तक 14 पदक जीत चुका है जिनमें छह स्वर्ण पदक शामिल हैं। वहीं भारत तीन पदकों के साथ दूसरे स्थान पर है। भारतीय निशानेबाजों का मौजूदा प्रदर्शन यह संकेत दे रहा है कि आने वाले मुकाबलों में भी देश के खाते में और पदक जुड़ सकते हैं तथा भारतीय दल अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत पहचान बनाए रखेगा

  • पूर्व भारतीय शूटर और द्रोणाचार्य अवॉर्डी जसपाल राणा का निधन, खेल जगत में शोक की लहर

    पूर्व भारतीय शूटर और द्रोणाचार्य अवॉर्डी जसपाल राणा का निधन, खेल जगत में शोक की लहर


    नई दिल्ली। भारतीय शूटिंग जगत को शुक्रवार को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पूर्व अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज और प्रतिष्ठित कोच जसपाल राणा के निधन की खबर सामने आई। 49 वर्ष की उम्र में उनके निधन से खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। जसपाल राणा न केवल भारत के सबसे सफल निशानेबाजों में शामिल थे, बल्कि उन्होंने कोच के रूप में भी भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, जसपाल राणा हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से लौट रहे थे। यात्रा के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर सामने आते ही खेल जगत, खिलाड़ियों और प्रशंसकों के बीच शोक की भावना फैल गई।

    जसपाल राणा भारतीय शूटिंग के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में रहे, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया। उन्होंने एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई चैंपियनशिप में कई पदक जीतकर भारतीय निशानेबाजी को नई पहचान दिलाई। अपने करियर के दौरान उन्होंने चार कॉमनवेल्थ खेलों—1994, 1998, 2002 और 2006—में भारत का प्रतिनिधित्व किया और कुल 15 पदक अपने नाम किए। इनमें 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल रहे। इसके अलावा एशियाई खेलों में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को कई महत्वपूर्ण पदक दिलाए।

    खिलाड़ी के रूप में सफलता हासिल करने के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली और नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करने में जुट गए। भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) ने उन्हें 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के लिए हाई परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया था। उनकी कोचिंग शैली अनुशासन, तकनीकी दक्षता और कड़े प्रशिक्षण के लिए जानी जाती थी। उनके मार्गदर्शन में कई युवा निशानेबाजों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की।

    भारतीय स्टार शूटर मनु भाकर की सफलता में भी जसपाल राणा की भूमिका को बेहद अहम माना जाता है। उनकी देखरेख में मनु ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया और भारतीय शूटिंग को नई पहचान दिलाई। बतौर कोच उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2020 में उन्हें प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया था।

    हाल के वर्षों में भी जसपाल राणा भारतीय शूटिंग टीम के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे। म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में भारतीय पिस्टल टीम ने उनके मार्गदर्शन में दो स्वर्ण और दो रजत पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया था। यह उपलब्धि उनकी कोचिंग क्षमता और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाती है।

    भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के अध्यक्ष कलिकेश नारायण सिंह देव ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जसपाल राणा केवल एक महान खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि उत्कृष्ट मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत भी थे। उनका योगदान हमेशा भारतीय खेल इतिहास में याद रखा जाएगा।

    जसपाल राणा का निधन भारतीय शूटिंग समुदाय के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपने समर्पण, उपलब्धियों और मार्गदर्शन से भारतीय निशानेबाजी को नई दिशा दी। आने वाली पीढ़ियां उन्हें एक महान खिलाड़ी, सफल कोच और खेल के सच्चे दूत के रूप में हमेशा याद रखेंगी।

  • 12 सदस्यीय भारतीय शॉटगन स्क्वॉड तैयार, वर्ल्ड कप स्टेज में दिखेगा निशानेबाजों का जलवा

    12 सदस्यीय भारतीय शॉटगन स्क्वॉड तैयार, वर्ल्ड कप स्टेज में दिखेगा निशानेबाजों का जलवा


    नई दिल्ली।

    भारतीय शॉटगन निशानेबाजी टीम एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी क्षमता दिखाने के लिए तैयार है। 12 सदस्यों वाली यह टीम कजाकिस्तान के अल्माटी में आयोजित होने वाले ISSF वर्ल्ड कप स्टेज में हिस्सा लेने जा रही है। इस प्रतियोगिता को इस साल की सबसे अहम शूटिंग स्पर्धाओं में से एक माना जा रहा है, जिसमें दुनिया भर के शीर्ष निशानेबाज अपनी सटीकता और कौशल का प्रदर्शन करेंगे।

    यह प्रतियोगिता 2 मई से 11 मई 2026 तक आयोजित की जाएगी और इसमें पांच ओलंपिक इवेंट्स शामिल होंगे। कुल मिलाकर 40 से अधिक देशों के लगभग 284 खिलाड़ी इस प्रतिष्ठित आयोजन में भाग ले रहे हैं। भारतीय दल के कई खिलाड़ी ऐसे भी हैं जो रैंकिंग पॉइंट्स के आधार पर मुकाबला करेंगे और अंतरराष्ट्रीय अनुभव को और मजबूत बनाएंगे।

    प्रतियोगिता की शुरुआत पुरुष और महिला स्कीट इवेंट्स से होगी, जिनके क्वालिफिकेशन राउंड पहले दिन खेले जाएंगे। इसके अगले ही दिन फाइनल मुकाबले निर्धारित हैं, जबकि ट्रैप इवेंट्स बाद में आयोजित किए जाएंगे। मिश्रित टीम ट्रैप का फाइनल इस स्पर्धा का अंतिम मुकाबला होगा, जिससे पूरे आयोजन का समापन होगा।

    भारतीय टीम के लिए यह टूर्नामेंट इसलिए भी खास है क्योंकि कई अनुभवी खिलाड़ी इस सीजन में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उतरेंगे। टीम में शामिल प्रमुख निशानेबाजों से उम्मीद की जा रही है कि वे अपने प्रदर्शन से पदक की दौड़ में मजबूत स्थिति बनाएंगे। खिलाड़ियों ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन किया है, जिससे टीम का आत्मविश्वास काफी बढ़ा हुआ है।

    इस बार भारतीय निशानेबाजों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना होगा। इटली, चीन, रूस, फिनलैंड, डेनमार्क और अन्य कई देशों के शीर्ष खिलाड़ी इस प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं। मेजबान कजाकिस्तान की टीम भी मजबूत मानी जा रही है, जिससे मुकाबला और भी रोमांचक हो जाएगा। हर इवेंट में कड़ा संघर्ष देखने की संभावना है और छोटे अंतर से परिणाम तय हो सकते हैं।

    भारतीय शॉटगन टीम का हालिया प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी प्रभावशाली रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय निशानेबाजों ने लगातार पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। इसी वजह से इस प्रतियोगिता में भी उनसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।

    कोचिंग स्टाफ और टीम प्रबंधन का मानना है कि खिलाड़ियों ने तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ी है और वे मानसिक तथा तकनीकी दोनों स्तर पर पूरी तरह तैयार हैं। अब नजर इस बात पर है कि यह टीम दबाव भरे मुकाबलों में कितना स्थिर प्रदर्शन कर पाती है।

    अल्माटी का यह मंच भारतीय निशानेबाजों के लिए न केवल एक चुनौती है, बल्कि खुद को वैश्विक स्तर पर और मजबूत साबित करने का सुनहरा अवसर भी है।