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  • जुलाई में शेयर बाजार का दमदार प्रदर्शन, सेंसेक्स-निफ्टी बढ़े करीब 2 फीसदी; आईटी शेयरों का दबदबा

    जुलाई में शेयर बाजार का दमदार प्रदर्शन, सेंसेक्स-निफ्टी बढ़े करीब 2 फीसदी; आईटी शेयरों का दबदबा


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार ने जुलाई 2026 में मजबूती का प्रदर्शन किया। घरेलू और वैश्विक बाजारों के उतार-चढ़ाव के बीच प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी ने निवेशकों को सकारात्मक रिटर्न दिया। जुलाई महीने में दोनों बेंचमार्क इंडेक्स में करीब 2 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई। महीने के आखिरी कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 0.21 प्रतिशत की तेजी के साथ 78,094.64 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.27 प्रतिशत बढ़कर 24,383.60 अंक के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में बड़ी कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली।

    जुलाई में निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स ने 2.53 प्रतिशत का रिटर्न दिया, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1.81 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इससे पता चलता है कि निवेशकों का भरोसा केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में भी खरीदारी बढ़ी।

    आईटी सेक्टर ने मारी बाजी

    जुलाई महीने में सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो आईटी सेक्टर सबसे शानदार प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 16.77 प्रतिशत की जबरदस्त तेजी दर्ज की गई और यह महीने का सबसे बड़ा गेनर बना। विशेषज्ञों के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े वैश्विक रुझानों के बीच आईटी कंपनियों में दोबारा खरीदारी बढ़ी। इसके अलावा पहली तिमाही के बेहतर नतीजों ने भी निवेशकों का भरोसा मजबूत किया।

    आईटी के अलावा निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में 9.96 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया में 9.49 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी में 8.67 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो इंडेक्स में 8.55 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली। वहीं निफ्टी फार्मा में 4.77 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज में 2.50 प्रतिशत और निफ्टी मेटल में 1.60 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

    इन सेक्टरों में रही कमजोरी

    जहां कई सेक्टरों ने शानदार प्रदर्शन किया, वहीं कुछ क्षेत्रों में दबाव भी देखने को मिला। जुलाई में निफ्टी एनर्जी इंडेक्स 2.54 प्रतिशत गिरावट के साथ सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में रहा। इसके अलावा निफ्टी इंडिया डिफेंस में 1.98 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक में 1.48 प्रतिशत और निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 1.46 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    इन शेयरों ने निवेशकों को दिया बड़ा फायदा

    जुलाई में कई कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली। कल्याण ज्वैलर्स इंडिया के शेयर में 60 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल आया। इसके अलावा ई-क्लार्क्स सर्विसेज, सीई इन्फो सिस्टम्स, लोढ़ा डेवलपर्स, एचईजी, इन्फो एज (इंडिया), एटीएम, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स जैसे शेयरों में भी करीब 50 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई।

    हालांकि कुछ कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट भी देखने को मिली। डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, बंधन बैंक, थर्मैक्स, तेजस नेटवर्क्स, सुजलॉन एनर्जी, जीई वर्नोवा टीएंडडी इंडिया, सीमेंस एनर्जी इंडिया और गुजरात एनर्जी जैसी कंपनियों के बाजार मूल्य में 15 से 20 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।

    आगे बाजार की दिशा पर नजर

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई में चुनिंदा शेयरों में तेजी के पीछे कंपनियों के तिमाही नतीजे और आईटी सेक्टर में बढ़ी खरीदारी प्रमुख कारण रहे। वैश्विक स्तर पर एआई से जुड़े शेयरों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय आईटी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले समय में कंपनियों के तिमाही परिणाम, वैश्विक बाजारों की चाल, ब्याज दरों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का असर भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करेगा।

  • वैश्विक तनाव से शेयर बाजार दबाव में, सेंसेक्स 400 अंक टूटा, आईटी सेक्टर ने संभाली गिरावट

    वैश्विक तनाव से शेयर बाजार दबाव में, सेंसेक्स 400 अंक टूटा, आईटी सेक्टर ने संभाली गिरावट

     नई दिल्ली ।  वैश्विक बाजारों में बढ़ते तनाव और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के बीच मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल देखने को मिला, जिसका सीधा असर प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी पर पड़ा। बाजार खुलते ही सेंसेक्स में 300 से अधिक अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी लाल निशान में कारोबार करता नजर आया।

    सुबह के सत्र में सेंसेक्स करीब 322 अंक गिरकर 73,945 के स्तर पर खुला, जबकि निफ्टी50 में भी लगभग 150 अंकों की गिरावट देखने को मिली। कुछ ही समय बाद बिकवाली का दबाव और बढ़ गया, जिससे सेंसेक्स 400 अंकों से अधिक टूट गया और निफ्टी भी 23,200 के आसपास फिसल गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संकेतों और घरेलू आर्थिक चिंताओं के चलते देखने को मिली है।

    बाजार पर दबाव का प्रमुख कारण पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता में अनिश्चितता माना जा रहा है। इसके साथ ही कमजोर मानसून की आशंका ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। भारतीय मौसम विभाग द्वारा इस वर्ष सामान्य से कमजोर मानसून का अनुमान जताए जाने के बाद कृषि आधारित शेयरों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े सेक्टरों पर दबाव बढ़ गया है।

    सेक्टोरल मोर्चे पर अधिकतर इंडेक्स लाल निशान में नजर आए। ऑटो, रियल्टी और केमिकल सेक्टर में लगभग एक प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। बैंकिंग और सीमेंट सेक्टर में भी बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जिससे व्यापक बाजार में कमजोरी बढ़ी। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी लगभग एक प्रतिशत तक टूटकर कारोबार कर रहे थे, जिससे यह संकेत मिला कि गिरावट केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं है।

    हालांकि इस गिरावट के बीच आईटी सेक्टर ने बाजार को कुछ राहत दी। निफ्टी आईटी इंडेक्स में करीब 2 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली, जिसमें इंफोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक जैसे प्रमुख शेयरों ने मजबूती दिखाई। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक मांग और डॉलर की मजबूती के कारण आईटी कंपनियों में निवेशकों की रुचि बनी हुई है, जिससे इस सेक्टर ने बाजार को सपोर्ट दिया।

    कमोडिटी बाजार में भी हलचल देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, लेकिन यह अभी भी उच्च स्तर पर बनी हुई है, जिससे महंगाई को लेकर चिंता बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई दोनों में हल्की गिरावट के बावजूद वैश्विक आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता कायम है।

    विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा समय में बाजार वैश्विक घटनाक्रमों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है। पश्चिम एशिया में यदि तनाव और बढ़ता है तो इसका असर ऊर्जा कीमतों और वैश्विक इक्विटी बाजारों पर और अधिक देखने को मिल सकता है। वहीं, घरेलू स्तर पर मानसून की स्थिति आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

    विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि इस अस्थिर माहौल में जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय मजबूत बुनियादी कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करें। बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच दीर्घकालिक निवेश रणनीति अपनाना अधिक सुरक्षित माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव और घरेलू आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार फिलहाल दबाव में नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और मानसून से जुड़े अपडेट बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

  • 2026 की पहली छमाही में 76 प्रतिशत भारतीय नियोक्ता करेंगे नई नौकरियों का सृजन

    2026 की पहली छमाही में 76 प्रतिशत भारतीय नियोक्ता करेंगे नई नौकरियों का सृजन


    नई दिल्ली भारत में रोजगार के क्षेत्र में 2026 की पहली छमाही के लिए सकारात्मक संकेत मिले हैं नौकरी इंडिया के द्विवार्षिक सर्वेक्षण के अनुसार 1250 से अधिक रोजगार प्रदाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर 76 प्रतिशत नियोक्ता इस अवधि में नई नौकरियों का सृजन करेंगे

    रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र 88 प्रतिशत नई नौकरियों के साथ अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है इस क्षेत्र में अधिकतर शुरुआती स्तर की भूमिकाओं पर ध्यान दिया जाएगा जिससे नए पेशेवरों को अवसर मिलेंगे वहीं मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में आने वाली नौकरियों में 79 प्रतिशत नई भूमिकाएं होंगी बैंकिंग फाइनेंस सर्विसेज और इंश्योरेंस क्षेत्र में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत और आईटी सेक्टर में 76 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है

    नौकरी डॉट कॉम के चीफ बिजनेस ऑफिसर डॉ पवर गोयल ने कहा कि 2026 की पहली छमाही में अधिकांश रोजगार प्रदाताओं का फोकस नए रोजगार सृजन पर होगा उन्होंने यह भी बताया कि एआई के प्रभाव को लेकर 87 प्रतिशत नियोक्ताओं का मानना है कि इससे नौकरियों पर कोई खास असर नहीं होगा जबकि 18 प्रतिशत नियोक्ता मानते हैं कि एआई से नई नौकरियों के अवसर पैदा हो रहे हैं विशेष रूप से आईटी एनालिटिक्स और मार्केटिंग क्षेत्र मेंगोयल ने कहा कि एआई इन क्षेत्रों में नई भूमिकाओं के सृजन के लिए उत्प्रेरक के रूप में उभर रहा है और यह कार्यबल परिवर्तन की तैयारी के दौरान कौशल विकास के महत्व को दर्शाता है रिपोर्ट में कहा गया है कि भर्ती की मांग में शुरुआती और मध्य स्तर के पेशेवरों की मांग बढ़ने की संभावना है आईटी और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र मध्य स्तर की भर्ती में अग्रणी होंगे जबकि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र शुरुआती स्तर की भूमिकाओं को प्राथमिकता देगा

    रिपोर्ट के अनुसार आईटी रोजगार प्रदाताओं में 69 प्रतिशत मध्य स्तर के पेशेवरों जिनके पास 4 से 7 वर्ष का अनुभव है की सबसे अधिक मांग की उम्मीद कर रहे हैं वहीं स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के 65 प्रतिशत रोजगार प्रदाता 0 से 3 वर्ष के अनुभव वाले उम्मीदवारों को भर्ती करने की योजना बना रहे हैं यह संकेत है कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में नए प्रतिभाओं को अवसर मिलने की संभावनाएं अधिक हैं

  • सेंसेक्स-निफ्टी में हल्की गिरावट, मिडकैप शेयरों ने दिखाई मजबूती..

    सेंसेक्स-निफ्टी में हल्की गिरावट, मिडकैप शेयरों ने दिखाई मजबूती..

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में उतारचढ़ाव भरे कारोबार के बाद हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ। वैश्विक संकेतों की अनिश्चितता और अहम आर्थिक आंकड़ों से पहले निवेशकों की सतर्कता के कारण लार्जकैप शेयरों पर दबाव देखने को मिला। दिन के अंत में बीएसई सेंसेक्स 102.20 अंक यानी 0.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 84961.14 के स्तर पर बंद हुआ जबकि एनएसई निफ्टी 37.95 अंक या 0.14 प्रतिशत फिसलकर 26140.75 पर आ गया।

    हालांकि प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी रही लेकिन बाजार के व्यापक हिस्से में सकारात्मक रुझान देखने को मिला। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अच्छी खरीदारी हुई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 276.15 अंक या 0.45 प्रतिशत की मजबूती के साथ 61424.70 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 70.65 अंक या 0.40 प्रतिशत की तेजी के साथ 17958.50 पर बंद हुआ। इससे साफ है कि निवेशक चुनिंदा शेयरों में अवसर तलाशते नजर आए।सेक्टोरल आधार पर आईटी शेयरों ने बाजार को सहारा दिया। निफ्टी आईटी इंडेक्स 1.87 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ। इसके अलावा निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.69 प्रतिशत निफ्टी फार्मा 0.69 प्रतिशत निफ्टी इंडिया डिफेंस 0.65 प्रतिशत और निफ्टी मीडिया 0.07 प्रतिशत में भी मजबूती देखने को मिली।

    वहीं दूसरी ओर ऑटो और वित्तीय शेयरों में मुनाफावसूली के चलते गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी ऑटो 0.80 प्रतिशत निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.66 प्रतिशत निफ्टी इन्फ्रा 0.50 प्रतिशत निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 0.33 प्रतिशत और निफ्टी कमोडिटीज 0.31 प्रतिशत कमजोर होकर बंद हुए।सेंसेक्स के गेनर्स की सूची में टाइटन एचसीएल टेक टेक महिंद्रा इन्फोसिस सन फार्मा टीसीएस आईसीआईसीआई बैंक एलएंडटी बीईएल और ट्रेंट शामिल रहे। वहीं मारुति सुजुकी पावर ग्रिड एचडीएफसी बैंक एशियन पेंट्स टाटा स्टील एचयूएल एसबीआई भारती एयरटेल एमएंडएम बजाज फाइनेंस इंडिगो और बजाज फिनसर्व प्रमुख लूजर्स रहे।

    जियोजित इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि 2026 की तीसरी तिमाही के नतीजों और अमेरिका के अहम रोजगार आंकड़ों से पहले निवेशक जोखिम से बचने की रणनीति अपना रहे हैं। वैश्विक व्यापार अनिश्चितता और चीन द्वारा दुर्लभ धातुओं के निर्यात पर प्रतिबंध जैसे कारकों से बाजार सीमित दायरे में बना रह सकता है। हालांकि आईटी फार्मा और मिडकैप शेयरों में चुनिंदा खरीदारी से बाजार को कुछ राहत मिली है।