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  • एलटीसीजी टैक्स हटाने पर चर्चा से शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 1,109 अंक उछला और निफ्टी 22,721 के पार पहुंचा

    एलटीसीजी टैक्स हटाने पर चर्चा से शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 1,109 अंक उछला और निफ्टी 22,721 के पार पहुंचा

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को जोरदार तेजी दर्ज की गई। कारोबार के दौरान प्रमुख सूचकांकों में मजबूत बढ़त देखने को मिली। सेंसेक्स 1,109.10 अंक यानी 1.54 प्रतिशत चढ़कर 73,033.78 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 358.60 अंक यानी 1.60 प्रतिशत की तेजी के साथ 22,721.95 पर बंद हुआ। बाजार में खरीदारी का प्रमुख केंद्र आईटी शेयर रहे। इसके साथ ही अन्य क्षेत्रों के शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली।

    बाजार के प्रदर्शन में आईटी क्षेत्र सबसे आगे रहा। निफ्टी आईटी सूचकांक 5.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ दिन का सबसे बड़ा लाभ दर्ज करने वाला क्षेत्रीय सूचकांक बना। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी ऑटो और निफ्टी मेटल में भी तेजी दर्ज की गई। ज्यादातर क्षेत्रीय सूचकांक हरे निशान में रहे, जबकि निफ्टी फार्मा लगभग बिना बदलाव के बंद हुआ।

    बड़ी कंपनियों के शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप श्रेणियों में भी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 624.65 अंक यानी 1.06 प्रतिशत बढ़कर 59,459.20 पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक 21.60 अंक यानी 0.11 प्रतिशत की मामूली तेजी के साथ 19,447.40 पर बंद हुआ। इन आंकड़ों से बाजार की विभिन्न श्रेणियों में सकारात्मक रुख दिखाई दिया, हालांकि स्मॉलकैप शेयरों में बढ़त तुलनात्मक रूप से सीमित रही।

    सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में एचसीएल टेक, टीसीएस, टेक महिंद्रा और इन्फोसिस समेत कई प्रमुख शेयरों में तेजी रही। हिंदुस्तान यूनिलीवर, ट्रेंट, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, टाइटन, बीईएल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारती एयरटेल, एसबीआई, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचडीएफसी बैंक, टाटा स्टील, आईटीसी, आईसीआईसीआई बैंक, एशियन पेंट्स, एक्सिस बैंक और अदाणी पोर्ट्स भी बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर, कोटक महिंद्रा बैंक, मारुति सुजुकी और इटरनल के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

    बाजार में तेजी की एक प्रमुख वजह लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स यानी एलटीसीजी टैक्स को लेकर सामने आई चर्चा रही। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि बजट से संबंधित बातचीत के दौरान सरकार एलटीसीजी टैक्स हटाने को लेकर लोगों की राय जानना चाहती है। इक्विटी निवेश पर लगने वाले कर को लेकर निवेशकों की ओर से लगातार सवाल उठाए जाने के बीच इस बयान को बाजार की धारणा से जोड़कर देखा गया। हालांकि, टैक्स हटाने के किसी अंतिम फैसले की जानकारी नहीं दी गई।

    इसके अतिरिक्त, प्रौद्योगिकी कंपनियों की उम्मीद से बेहतर कमाई ने कॉर्पोरेट मुनाफे में बढ़ोतरी को लेकर निवेशकों का भरोसा मजबूत किया। इससे बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी को समर्थन मिला। रुपये में स्थिरता और बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने भी बाजार के माहौल को बेहतर बनाने में भूमिका निभाई। इन परिस्थितियों के बीच वित्तीय क्षेत्र के शेयरों पर भी निवेशकों का ध्यान बढ़ा।

    मंगलवार के कारोबार में आईटी शेयरों की अगुवाई, एलटीसीजी टैक्स पर चर्चा और कंपनियों की कमाई से जुड़ी उम्मीदों ने बाजार को सहारा दिया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। अब निवेशकों की नजर एलटीसीजी टैक्स को लेकर आगे होने वाली चर्चाओं और कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन से जुड़े संकेतों पर बनी रहेगी।

  • चार दिन की तेजी पर लगा ब्रेक, सेंसेक्स 330 अंक टूटा और निफ्टी गिरा, जानिए बाजार में दबाव की बड़ी वजहें

    चार दिन की तेजी पर लगा ब्रेक, सेंसेक्स 330 अंक टूटा और निफ्टी गिरा, जानिए बाजार में दबाव की बड़ी वजहें

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में पिछले कारोबारी सत्र की तेजी के बाद मंगलवार को एक बार फिर गिरावट देखने को मिली। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए। आईटी और वित्तीय शेयरों में दबाव के चलते बाजार की चार दिन से जारी तेजी का सिलसिला भी टूट गया।

    कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 329.91 अंक यानी 0.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,529.08 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी50 में 85.30 अंक यानी 0.36 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,329.00 के स्तर पर पहुंच गया।

    व्यापक बाजार में भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.08 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.23 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। इससे बाजार के बड़े शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सीमित कमजोरी दर्ज हुई।

    सेक्टरवार कारोबार की बात करें तो निफ्टी आईटी, निफ्टी सीमेंट, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी फार्मा में गिरावट रही। दूसरी ओर निफ्टी मीडिया, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मेटल में तेजी दर्ज की गई।

    निफ्टी50 के शेयरों में कोल इंडिया सबसे अधिक बढ़ने वाले शेयरों में रहा। कंपनी के शेयर में 3.2 प्रतिशत की तेजी दर्ज हुई। इसके अलावा इटरनल, इंडिगो, टाइटन और डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज भी बढ़त वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे।

    दूसरी तरफ टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, नेस्ले इंडिया, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, सन फार्मा, ग्रासिम, ट्रेंट, आयशर मोटर्स और टीसीएस में दबाव रहा। इन शेयरों में गिरावट ने प्रमुख सूचकांकों पर भी असर डाला।

    बाजार के जानकारों के मुताबिक, लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत दोबारा 99 से 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ विदेशी निवेश की निकासी और भू-राजनीतिक अनिश्चितता भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही है।

    इन परिस्थितियों में महंगाई और आयात लागत को लेकर चिंता बनी हुई है। रुपये की स्थिति भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। मंगलवार को रुपया करीब 95.8 रुपये प्रति डॉलर के स्तर के आसपास रहा।

    वैश्विक ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों के बीच सोने और चांदी की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव जारी रहा। इन अंतरराष्ट्रीय संकेतकों का असर घरेलू बाजार के निवेशकों की धारणा पर देखने को मिल रहा है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी के 23,300 से 23,350 के दायरे में रहने के कारण निवेशकों को अल्पकालिक तेजी का पीछा करने के बजाय सावधानी बरतने की जरूरत है। निवेश को अलग-अलग हिस्सों में बांटने, मजबूत कंपनियों पर ध्यान देने और पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखने की सलाह दी गई है।

    इसके साथ ही बाजार में बड़ी गिरावट की स्थिति में अवसरों का इस्तेमाल करने के लिए पर्याप्त नकदी बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। मंगलवार की गिरावट के बाद अब निवेशकों की नजर आगामी कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेश के रुख पर रहेगी।

  • पश्चिम एशिया तनाव और महंगे कच्चे तेल के दबाव में शेयर बाजार लगातार तीसरे दिन गिरा, सेंसेक्स 813 अंक टूटा

    पश्चिम एशिया तनाव और महंगे कच्चे तेल के दबाव में शेयर बाजार लगातार तीसरे दिन गिरा, सेंसेक्स 813 अंक टूटा

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंचने के कारण निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ी रही। कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक दबाव में रहे और बाजार लाल निशान में बंद हुआ। सेंसेक्स में एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट रही, जबकि निफ्टी भी कमजोर होकर 23,500 के स्तर से नीचे चला गया।

    बाजार बंद होने पर बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 813.35 अंक यानी 1.08 प्रतिशत टूटकर 74,764.23 पर पहुंच गया। एनएसई का निफ्टी 50 भी 203.60 अंक यानी 0.86 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,431.50 पर बंद हुआ। लगातार तीसरे सत्र की गिरावट ने बाजार में बनी कमजोर धारणा को और मजबूत किया।

    सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के 75,577.58 के स्तर के मुकाबले 361.36 अंक यानी 0.47 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75,216.22 पर खुला था। कारोबार के दौरान बिकवाली बढ़ने से यह दिन के निचले स्तर 74,764.23 तक पहुंच गया। इस स्तर पर सूचकांक में 813.35 अंक यानी 1.08 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।

    निफ्टी 50 भी अपने पिछले बंद स्तर 23,635.10 के मुकाबले 113 अंक यानी 0.47 प्रतिशत नीचे 23,522.05 पर खुला। दिन के कारोबार में यह और फिसलकर 23,431.50 के निचले स्तर तक पहुंच गया। इस तरह निफ्टी में दिन के दौरान 203.60 अंक यानी 0.86 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    व्यापक बाजारों में भी निवेशकों का रुख कमजोर रहा। निफ्टी मिडकैप 0.51 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 0.48 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। क्षेत्रवार कारोबार में निफ्टी आईटी सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ और इसमें 3.24 प्रतिशत की गिरावट रही। निफ्टी रियल्टी 2.23 प्रतिशत तथा निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 1.23 प्रतिशत कमजोर हुए। निफ्टी एफएमसीजी, प्राइवेट बैंक, मीडिया और फार्मा सूचकांक भी गिरावट के साथ बंद हुए।

    इसके विपरीत निफ्टी मेटल में 1.79 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी 50 में अदाणी एंटरप्राइजेज, मैक्स हेल्थ, अदाणी पोर्ट्स, कोल इंडिया, टाटा स्टील, हिंडाल्को, अपोलो हॉस्पिटल और एनटीपीसी प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में रहे। इन कंपनियों के शेयरों में करीब पांच से एक प्रतिशत तक की तेजी दर्ज हुई। दूसरी तरफ इंफोसिस, एचडीएफसी लाइफ, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा सबसे ज्यादा कमजोर शेयरों में शामिल रहे।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक पश्चिम एशिया में लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की आशंका को ध्यान में रखते हुए बाजार की कीमतों का आकलन कर रहे हैं। लगातार जारी लड़ाई और जवाबी कार्रवाई के कारण निकट भविष्य में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहने की संभावना बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

    विशेषज्ञों ने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता लंबे समय तक बनी रहने पर प्रमुख केंद्रीय बैंकों के सामने आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन कायम करने की चुनौती बढ़ सकती है। ऊर्जा की बढ़ती लागत आर्थिक गतिविधियों और कीमतों की स्थिरता दोनों के लिए जोखिम पैदा कर रही है। बॉन्ड यील्ड और करेंसी बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों के सतर्क रहने की संभावना है। इससे जोखिम लेने की उनकी क्षमता सीमित रह सकती है और बाजार की धारणा पर दबाव बना रह सकता है।

  • कमजोर वैश्विक संकेतों और प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली के चलते सेंसेक्स 183.15 अंक और निफ्टी 126.80 अंक गिरकर बंद हुए।

    कमजोर वैश्विक संकेतों और प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली के चलते सेंसेक्स 183.15 अंक और निफ्टी 126.80 अंक गिरकर बंद हुए।

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबारी सप्ताह के तीसरे दिन गिरावट देखने को मिली। पिछले सत्र में तेजी के बाद घरेलू बाजार बुधवार को कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच दबाव में रहा। आईटी, एफएमसीजी और ऑटो शेयरों में कमजोरी ने प्रमुख सूचकांकों पर असर डाला। कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 183.15 अंक यानी 0.24 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,472.94 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी 50 भी 126.80 अंक यानी 0.52 प्रतिशत टूटकर 24,207.75 अंक पर पहुंच गया।

    बुधवार के सत्र की शुरुआत हालांकि सकारात्मक रुख के साथ हुई थी। सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के 77,656.09 अंक के स्तर से 236 अंक की बढ़त के साथ 77,892.10 अंक पर खुला। शुरुआती कारोबार में खरीदारी बढ़ने से यह 330.75 अंक तक चढ़कर 77,986.84 अंक के इंट्रा-डे उच्च स्तर पर पहुंच गया। हालांकि बाद में बाजार की शुरुआती बढ़त कायम नहीं रह सकी और सूचकांक फिसलकर 77,472.94 अंक के दिन के निचले स्तर पर बंद हुआ।

    निफ्टी 50 भी 24,334.55 अंक के पिछले बंद स्तर की तुलना में मामूली बढ़त के साथ 24,341.95 अंक पर खुला। कारोबार के दौरान यह 24,378.60 अंक के उच्च स्तर तक पहुंचा, लेकिन बाद में बिकवाली का दबाव बढ़ने से 24,207.75 अंक के निचले स्तर तक आ गया। अंत में निफ्टी 0.52 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।

    व्यापक बाजार में भी एक समान रुख नहीं रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.81 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। इससे संकेत मिला कि बड़े शेयरों में दबाव के बावजूद कुछ छोटे शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही।

    सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी आईटी इंडेक्स सबसे कमजोर क्षेत्रों में रहा। एफएमसीजी, ऑटो और रियल्टी शेयरों पर भी दबाव देखा गया। इसके विपरीत मेटल, प्राइवेट बैंक और सीमेंट से जुड़े शेयरों में मजबूती रही। बैंकिंग और मेटल क्षेत्र की कुछ कंपनियों में खरीदारी ने बाजार की गिरावट को सीमित करने में मदद की।

    निफ्टी 50 के प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक, जेएसडब्ल्यू स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचडीएफसी लाइफ और एसबीआई लाइफ शामिल रहे। दूसरी ओर भारती एयरटेल, पावरग्रिड, इंफोसिस, एलएंडटी, नेस्ले इंडिया और श्रीराम फाइनेंस कमजोर प्रदर्शन करने वाले प्रमुख शेयरों में रहे।

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, शुरुआती बढ़त के बाद अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग रुझान बनने से प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ा। वैश्विक बाजारों के संकेतों के साथ कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक घटनाक्रम भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहे।

    ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों में संभावित ढील से महंगाई को लेकर कुछ चिंताएं कम होने की बात कही गई। इससे घरेलू बॉन्ड यील्ड में नरमी और बैंकिंग शेयरों में मजबूती देखने को मिली। बेहतर कमाई की उम्मीदों से मेटल शेयरों में भी खरीदारी रही। हालांकि आईटी शेयरों में गिरावट ने इन क्षेत्रों की तेजी का असर काफी हद तक कम कर दिया।

    अमेरिका में आव्रजन नियमों को लेकर सख्ती और वीजा अपॉइंटमेंट से जुड़े घटनाक्रम के कारण आईटी कंपनियों के मार्जिन पर दबाव की आशंकाएं बनी हुई हैं। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी महंगाई के प्रमुख आंकड़ों पर रहेगी। विशेष रूप से कोर पीसीई आंकड़ों से ब्याज दरों की दिशा को लेकर बाजार को संकेत मिलने की उम्मीद है। इन आंकड़ों के आधार पर वैश्विक निवेश धारणा और उभरते बाजारों में पूंजी प्रवाह की दिशा प्रभावित हो सकती है।

  • Stock Market Today: सेंसेक्स 281 अंक गिरकर 78 हजार से नीचे, निफ्टी भी कमजोर; आईटी और एफएमसीजी शेयरों में बिकवाली

    Stock Market Today: सेंसेक्स 281 अंक गिरकर 78 हजार से नीचे, निफ्टी भी कमजोर; आईटी और एफएमसीजी शेयरों में बिकवाली


    नई दिल्ली । 
    भारतीय शेयर बाजार सोमवार को लगातार दबाव के बीच लाल निशान में बंद हुआ। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 281.09 अंक यानी 0.36 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,728.16 पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी 78.35 अंक यानी 0.32 प्रतिशत टूटकर 24,287.65 के स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट के बावजूद बाजार के मिडकैप और स्मॉलकैप वर्ग में खरीदारी का रुझान देखने को मिला।

    सोमवार के कारोबार में आईटी और एफएमसीजी शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव दिखाई दिया। निफ्टी आईटी और निफ्टी एफएमसीजी प्रमुख कमजोर सेक्टरों में रहे। इनके अलावा निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी फार्मा और निफ्टी पीएसयू बैंक भी गिरावट के साथ बंद हुए।

    इसके विपरीत रियल्टी और मेटल शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी रियल्टी, निफ्टी मेटल, निफ्टी मीडिया, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग मजबूती के साथ बंद हुए। निफ्टी कमोडिटीज और निफ्टी पीएसई में भी तेजी दर्ज की गई।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में टाटा स्टील, एक्सिस बैंक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एचडीएफसी बैंक, एलएंडटी और बजाज फाइनेंस बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर इन्फोसिस, एचसीएल टेक, सन फार्मा, टीसीएस और टेक महिंद्रा जैसे प्रमुख शेयरों में कमजोरी रही।

    आईटी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों पर दबाव का असर पूरे बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर पड़ा। इसके अलावा आईटीसी, ट्रेंट, एनटीपीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, महिंद्रा एंड महिंद्रा और भारती एयरटेल समेत कई बड़े शेयर भी लाल निशान में बंद हुए। बजाज फिनसर्व, इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स और मारुति सुजुकी में भी गिरावट दर्ज की गई।

    बड़े शेयरों में कमजोरी के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 34.85 अंक यानी 0.05 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 63,817.00 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 70.70 अंक यानी 0.36 प्रतिशत चढ़कर 19,809.25 पर पहुंच गया।

    बाजार के मौजूदा रुख में ऊर्जा लागत एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण कंपनियों की इनपुट लागत पर दबाव बना हुआ है। इसका असर निकट अवधि में निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है। हालांकि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कई कंपनियों के उम्मीद से बेहतर परिणामों ने आगे की कमाई को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए हैं।

    पहली तिमाही में कम लागत वाली इन्वेंट्री से कई कंपनियों के मुनाफे को सहारा मिला। हालांकि आने वाली तिमाहियों में महंगी इन्वेंट्री की खरीद बढ़ने पर कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आने की आशंका बनी हुई है। इसलिए निवेशक कंपनियों की कमाई और लागत के रुझान पर विशेष नजर रख रहे हैं।

    बाजार में निवेशकों का रुझान अब उन सेक्टर और कंपनियों की ओर बढ़ रहा है, जहां भविष्य की कमाई अपेक्षाकृत स्पष्ट दिखाई देती है। इसी वजह से मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में चुनिंदा खरीदारी देखने को मिल रही है।

    घरेलू स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में बदलाव बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। वहीं वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और अपेक्षाकृत नरम उपभोक्ता आंकड़ों ने निकट अवधि में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका को कुछ कम किया है। ऐसे संकेत लंबी अवधि में जोखिम लेने की क्षमता को समर्थन दे सकते हैं, लेकिन घरेलू लागत और वैश्विक घटनाक्रम के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।

  • भारतीय शेयर बाजार ने सपाट रुख के साथ की शुरुआत, आईटी सेक्टर में खरीदारी से बाजार को मिला सहारा

    भारतीय शेयर बाजार ने सपाट रुख के साथ की शुरुआत, आईटी सेक्टर में खरीदारी से बाजार को मिला सहारा

    नई दिल्ली । सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने लगभग सपाट रुख के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी सीमित बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। बाजार में निवेशकों का रुझान संतुलित रहा, जबकि आईटी क्षेत्र के शेयरों में अच्छी खरीदारी ने प्रमुख सूचकांकों को शुरुआती समर्थन प्रदान किया। दूसरी ओर, ऊर्जा, रक्षा और सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े कुछ प्रमुख सेक्टरों में दबाव भी देखने को मिला।

    कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स करीब 32 अंकों की मामूली बढ़त के साथ 76,861 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 6 अंकों की बढ़त के साथ 24,002 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार से संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल बड़े फैसले लेने के बजाय चुनिंदा सेक्टरों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और बाजार सीमित दायरे में बना हुआ है।

    आईटी सेक्टर ने शुरुआती कारोबार में सबसे मजबूत प्रदर्शन किया। निफ्टी आईटी सूचकांक दो प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ सबसे अधिक लाभ दर्ज करने वाला सेक्टर रहा। इसके अलावा रियल्टी, एफएमसीजी, मीडिया, सर्विसेज, हेल्थकेयर और फार्मा से जुड़े शेयरों में भी सकारात्मक रुख दिखाई दिया। इन क्षेत्रों में खरीदारी से बाजार को स्थिरता मिली और प्रमुख सूचकांक शुरुआती बढ़त बनाए रखने में सफल रहे।

    इसके विपरीत रक्षा, ऊर्जा, सार्वजनिक उपक्रम, पीएसयू बैंक, मैन्युफैक्चरिंग, कमोडिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, मेटल और ऑटो सेक्टर के शेयरों में दबाव देखने को मिला। इन क्षेत्रों में बिकवाली के कारण बाजार की तेजी सीमित रही और निवेशकों ने सतर्कता के साथ कारोबार किया। इससे स्पष्ट हुआ कि विभिन्न सेक्टरों में निवेशकों का रुख फिलहाल एक समान नहीं है।

    लार्जकैप कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता रहा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में हल्की कमजोरी दर्ज की गई। इससे संकेत मिला कि व्यापक बाजार में भी निवेशकों की गतिविधि संतुलित बनी हुई है और फिलहाल बड़े उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिल रहे हैं।

    सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में टीसीएस, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एशियन पेंट्स, सन फार्मा, इंडिगो, आईटीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट, एलएंडटी और बजाज फिनसर्व के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। वहीं भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एनटीपीसी, पावर ग्रिड, एसबीआई, टाटा स्टील, टाइटन, भारती एयरटेल, ट्रेंट, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में शुरुआती कमजोरी देखी गई।

    वैश्विक बाजारों का रुख भी मिश्रित रहा। एशियाई बाजारों में टोक्यो, शंघाई, हांगकांग और सोल के प्रमुख सूचकांक दबाव में कारोबार करते दिखाई दिए, जबकि अमेरिकी शेयर बाजार पिछले कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए थे। अंतरराष्ट्रीय संकेतों का असर भारतीय बाजार पर सीमित रूप से दिखाई दिया और निवेशकों ने घरेलू कारकों पर अधिक ध्यान दिया।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है, लेकिन बीच-बीच में मुनाफावसूली और सीमित दायरे का कारोबार जारी रह सकता है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बाद ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बना हुआ है, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 82 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। कम होती तेल कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार की धारणा को आगे भी समर्थन दे सकती हैं।