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  • इटली में सख्त कानून: नाबालिगों की लूटपाट पर माता-पिता भरेंगे हर्जाना, हिंसक प्रदर्शन में 5 साल तक जेल

    इटली में सख्त कानून: नाबालिगों की लूटपाट पर माता-पिता भरेंगे हर्जाना, हिंसक प्रदर्शन में 5 साल तक जेल


    नई दिल्ली। इटली में हिंसक प्रदर्शनों और तोड़फोड़ की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने सुरक्षा से जुड़े कई कड़े प्रावधानों को मंजूरी दी है। नए कानून के तहत प्रदर्शन के दौरान हिंसा करने वालों को पांच साल तक की जेल और 20 हजार यूरो तक का जुर्माना हो सकता है। वहीं, तोड़फोड़ और लूटपाट में शामिल नाबालिगों के माता-पिता को भी नुकसान की भरपाई करनी पड़ सकती है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी इटली के कई शहरों में हुई हिंसा के बाद सरकार ने ये कदम उठाए हैं। इनमें देश की आर्थिक राजधानी मिलान भी शामिल है। यहां युवाओं के समूहों ने दुकानों के शीशे तोड़े, सामान लूटा और पुलिस पर हमले किए। प्रधानमंत्री मेलोनी ने सोशल मीडिया पर नए कानून की जानकारी देते हुए कहा कि तोड़फोड़ और चोरी कोई क्रांतिकारी काम नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तोड़फोड़ और चोरी प्रदर्शन नहीं, बल्कि अपराध हैं।

    पांच साल तक जेल और 20 हजार यूरो जुर्माने का प्रावधान
    नए प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। इनके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के समूह में प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले व्यक्ति को पांच साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा अधिकतम 20 हजार यूरो का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

    यदि प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति ने अपना चेहरा ढका हो या किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुंची हो, तो सजा और बढ़ सकती है। नए नियमों के तहत अधिकारियों को सार्वजनिक संपत्ति या अन्य स्थानों को हुए नुकसान की भरपाई तत्काल सुनिश्चित करने के आदेश देने का अधिकार भी दिया गया है।

    नाबालिगों की तोड़फोड़ पर माता-पिता की भी जवाबदेही
    सरकार ने नाबालिगों की ओर से की जाने वाली तोड़फोड़ और लूटपाट को लेकर भी सख्ती बढ़ाई है। यदि ऐसी घटनाओं में नाबालिग शामिल पाए जाते हैं, तो उनके माता-पिता को नुकसान की भरपाई के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

    इसके अलावा पुलिस को 14 से 17 साल की उम्र के उन किशोरों को हिरासत में लेने की अनुमति भी दी गई है, जिन्होंने कोई अपराध नहीं किया है, लेकिन उनके खतरनाक होने के सबूत मौजूद हैं। इससे पहले यह अधिकार केवल वयस्कों के मामले में लागू होता था।

    मिलान में पुलिस के साथ तैनात होंगे 500 सैनिक
    सरकार को शनिवार को होने वाले प्रदर्शनों के दौरान फिर से हिंसा भड़कने की आशंका है। इसे देखते हुए मिलान में 2026 के अंत तक पुलिस की मदद के लिए 500 सैनिक तैनात किए जाएंगे।

    रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, सेना महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा, संवेदनशील इलाकों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में पुलिस की मदद करेगी।

    2022 से सुरक्षा के मुद्दे पर सख्त कदम उठा रही सरकार
    प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार वर्ष 2022 में सत्ता में आने के बाद से सुरक्षा के मुद्दे पर कई सख्त फैसले ले चुकी है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि ऐसे कदम अपराध और हिंसा की मूल वजहों को दूर करने में पर्याप्त साबित नहीं होते। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार वर्षों में इटली की जेलों में कैदियों की संख्या 17 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है।

    महंगाई और डीजल की कीमतों पर ट्रक ड्राइवरों का प्रदर्शन
    इटली के दक्षिणी हिस्से में बढ़ती महंगाई और डीजल की कीमतों को लेकर ट्रक ड्राइवरों के प्रदर्शन भी जारी हैं। सड़कें जाम किए जाने से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। कुछ पास्ता कंपनियों को उत्पादन रोकना पड़ा है, जबकि कृषि संगठनों ने फल और सब्जियों के खराब होने की आशंका जताई है।

    सरकार ने ट्रांसपोर्ट कंपनियों को नई सहायता देने का भरोसा दिया है। ऐसे में एक ओर सरकार हिंसक प्रदर्शनों पर सख्ती बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर महंगाई और परिवहन से जुड़े विरोध प्रदर्शनों से भी निपटने की चुनौती बनी हुई है।

  • मिलान में हिंसा की आशंका से लग्जरी स्टोर बंद, सुरक्षा के लिए 500 अतिरिक्त सैनिक तैनात करने की तैयारी

    मिलान में हिंसा की आशंका से लग्जरी स्टोर बंद, सुरक्षा के लिए 500 अतिरिक्त सैनिक तैनात करने की तैयारी

    नई दिल्ली । इटली के प्रमुख शहर मिलान में सप्ताहांत के दौरान हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने की तैयारी की गई है। उप प्रधानमंत्री मातेओ साल्विनी ने शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 500 अतिरिक्त सैनिक तैनात करने की घोषणा की है। हिंसा दोबारा भड़कने की आशंका के बीच शहर के प्रमुख लग्जरी शॉपिंग क्षेत्रों में कई दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान समय से पहले बंद कर दिए। कुछ दुकानों ने शोकेस से महंगे उत्पाद भी हटा लिए हैं।

    मिलान में शनिवार को शुरू हुआ प्रदर्शन शुरुआती दौर में शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में कई इलाकों में स्थिति बिगड़ गई। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। कुछ लोगों ने कूड़ेदानों में आग लगाई और पुलिसकर्मियों पर पथराव किया। इस दौरान दुकानों में लूटपाट और सार्वजनिक तथा निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी सामने आईं। इसके बाद प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी और सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए।

    साल्विनी ने सोमवार को अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की जानकारी देते हुए कहा कि मिलान में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया जाएगा। मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में सुरक्षा उपायों के व्यापक पैकेज के तहत इस प्रस्ताव को शामिल किए जाने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य शहर में शांति बहाल करना और संभावित हिंसक घटनाओं को रोकना है।

    मिलान इटली का प्रमुख वित्तीय और फैशन केंद्र है। यहां के प्रसिद्ध वाया मोंटेनापोलियोने क्षेत्र में शैनल, टिफनी और दिओर जैसे अंतरराष्ट्रीय लग्जरी ब्रांडों के स्टोर स्थित हैं। सप्ताहांत की घटनाओं के बाद कारोबारियों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। सोमवार को कई दुकानों ने सामान्य समय से पहले शटर गिरा दिए। कुछ प्रतिष्ठानों ने अपनी खिड़कियों को लकड़ी और गत्ते से ढक दिया, जबकि अन्य दुकानदारों ने महंगे सामान को शोकेस से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर रख दिया।

    हिंसा के बाद पुलिस ने शहर के प्रमुख हिस्सों में गश्त बढ़ा दी है। रविवार को हुई कार्रवाई के दौरान 271 युवाओं को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। इनमें से 32 लोगों को गिरफ्तार किया गया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, गिरफ्तार लोगों में 23 नाबालिग और 13 विदेशी नागरिक शामिल थे। इसके अतिरिक्त 28 लोगों के खिलाफ न्यायिक कार्रवाई के लिए रिपोर्ट दर्ज की गई। इन आंकड़ों के बीच गिरफ्तार लोगों की श्रेणियों में संभावित ओवरलैप को लेकर अलग-अलग संख्या को जोड़कर कुल संख्या निर्धारित नहीं की जा सकती।

    प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने हिंसा की निंदा की है। उन्होंने सोमवार को मंत्रियों और सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति पर चर्चा की। सरकार विशेष रूप से नाबालिगों से जुड़ी हिंसक गतिविधियों और युवा गिरोहों पर नियंत्रण के उपायों पर विचार कर रही है। मीडिया में सामने आई जानकारी के अनुसार, नाबालिगों को एहतियातन हिरासत में रखने की अवधि बढ़ाने के विकल्प पर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, इन प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    मिलान के अलावा उत्तरी इटली के बोलोन्या, ब्रेसिया, बर्गामो और ट्यूरिन जैसे शहरों में भी प्रदर्शनों के दौरान झड़पें हुईं। शनिवार को हुई घटनाओं के सिलसिले में इन इलाकों में 28 प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई थी। लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद सरकार सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखने और हिंसा पर अंकुश लगाने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की तैयारी कर रही है।

  • इटली: मेलोनी सरकार ने स्कूलों के लिए बदले नियम… भाषा की सीमा तय, नकाब पर भी रोक

    इटली: मेलोनी सरकार ने स्कूलों के लिए बदले नियम… भाषा की सीमा तय, नकाब पर भी रोक


    रोम।
    इटली (Italy) में स्कूलों (Schools) को लेकर प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Prime Minister Giorgia Meloni) की सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने स्कूलों (Schools) में इटैलियन भाषा (Italian language) की कम जानकारी रखने वाले बच्चों की संख्या पर एक सीमा तय कर दी है. इसके साथ ही स्कूलों में नकाब पर भी रोक लगाने का फैसला लिया गया है।

    फैसले के पक्ष में मेलोनी प्रशासन का कहना है कि इन नियमों से छात्रों में इटैलियन भाषा को सीखने और स्कूलों में एकीकरण को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी. लेकिन विपक्ष के साथ ही कुछ शिक्षक संगठनों और यूनियनों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि इस फैसले से छात्रों और उनके परिवारों पर असर पड़ सकता है।

    सरकार के नए प्लान के मुताबिक किसी भी क्लास में इटैलियन भाषा पर कम पकड़ वाले बच्चों की संख्या 30 फीसदी होगी. इस फैसले में खास बात यह है कि बच्चों की सीमा नागरिकता के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी भाषा की क्षमता के आधार पर तय की जाएगी। यानी अगर किसी दूसरे यूरोपीय संघ के देश का छात्र भी इटैलियन भाषा अच्छी तरह नहीं बोलता, तो वह भी इस नियम के दायरे में आएगा. सरकार का तर्क है कि इससे स्कूलों में ऐसी क्लासेज कम होंगी, जहां ज्यादातर बच्चों को भाषा समझने में दिक्कत हो।


    स्कूलों में चेहरा ढकने पर भी रोक

    इन्हीं नियमों में स्कूलों में ऐसे इस्लामिक पहनावे पर भी रोक लगाने का फैसला किया गया है, जिससे चेहरा पूरी तरह ढक जाता हो. नियम का हवाला देते हुए सरकार का कहना है कि इससे स्कूलों में कम्यूनिकेशन और एकीकरण को बढ़ावा मिलेगा. मेलोनी ने इन फैसलों को सोशल मीडिया पर “कॉमन सेंस” वाले उपाय बताए. उनके मुताबिक इनका मकसद छात्रों को अलग-अलग समूहों में बांटना नहीं, बल्कि सभी को समान अवसर देना है।


    विपक्ष ने नियमों पर उठाए सवाल

    सरकार के फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है. आलोचकों का कहना है कि 30 फीसदी की सीमा के चलते कुछ छात्रों को अपने घर के आसपास के स्कूल के बजाय दूसरे इलाके के स्कूल में जाना पड़ सकता है. विपक्षी दलों और कुछ शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया है कि सरकार इमिग्रेशन के मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला रही है।

    सरकार का डिक्री तुरंत लागू हो गया है, लेकिन इसे 60 दिनों के भीतर संसद की मंजूरी लेनी होगी. संसद में मेलोनी के गठबंधन के पास बहुमत है. ऐसे में आने वाले दिनों में इटली की इमिग्रेशन और पहचान पर भी इस फैसले का असर दिख सकता है।

  • इटली के स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर लगेगा प्रतिबंध… PM मेलोनी ने किया ऐलान

    इटली के स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर लगेगा प्रतिबंध… PM मेलोनी ने किया ऐलान


    रोम।
    इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Italian Prime Minister Giorgia Meloni) ने एक बड़ा नीतिगत बदलाव प्रस्तावित किया है। उन्होंने घोषणा की कि उनकी सरकार जल्द ही एक उपाय पेश करेगी। इस उपाय के तहत इतालवी स्कूलों (Italian schools) में बुर्का और नकाब (Burqa and Niqab) पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। साथ ही, कक्षाओं में विदेशी छात्रों (Foreign Students) की संख्या भी सीमित की जाएगी। यह घोषणा प्रवासन और सांस्कृतिक एकीकरण को लेकर उनकी सरकार के सख्त रुख को दर्शाती है।

    इटली आने वाले लोगों को हमारी भाषा सीखनी चाहिए
    मेलोनी ने अपनी राष्ट्रवादी रूढ़िवादी पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली के युवा विंग को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित उपाय में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान होगा। इसके तहत उन विदेशी छात्रों के माता-पिता के लिए इतालवी भाषा के पाठ अनिवार्य किए जाएंगे। ये वे माता-पिता होंगे जिन्हें ‘स्कूल प्रणाली में एकीकृत होने में गंभीर कठिनाइयां’ आ रही हैं। मेलोनी ने रोम में जियोवेंटु नाज़ियोनेल राष्ट्रीय उत्सव में एक जोरदार तालियों के बीच कहा। उन्होंने स्पष्ट किया, ‘हमारे लिए, जो कोई भी इटली आता है और यहां अपना भविष्य बनाना चाहता है, उसे हमारी भाषा सीखनी चाहिए।’ उन्होंने आगे कहा, ‘उन्हें हमारी संस्कृति को समझना चाहिए और हमारे नियमों का सम्मान करना चाहिए।’ मेलोनी ने इस बात पर जोर दिया कि ‘यह उनका स्वागत करने का एकमात्र गंभीर तरीका है।’


    क्या है बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध का प्रस्ताव?

    मेलोनी ने विशेष रूप से बुर्का पर प्रतिबंध का उल्लेख किया है। बुर्का एक ऐसा पहनावा है जो कुछ मुस्लिम महिलाएं पहनती हैं और पूरे शरीर को ढकता है। उन्होंने नकाब पर भी प्रतिबंध की बात की। नकाब सबसे रूढ़िवादी मुस्लिम महिलाएं पहनती हैं, जिसमें केवल आंखें ही दिखती हैं। हालांकि, मेलोनी ने रविवार को (20 सितंबर) अपने संबोधन में हिजाब का कोई जिक्र नहीं किया। हिजाब एक सिर पर पहना जाने वाला स्कार्फ है जो कुछ मुस्लिम महिलाएं पहनती हैं। सरकार द्वारा इस उपाय को मंजूरी मिलने के बाद, इसे कानून बनने के लिए संसदीय अनुमोदन की आवश्यकता होगी। यह अनुमोदन 60 दिनों के भीतर प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

    प्रवासन पर मेलोनी का क्या रुख है?
    मेलोनी की राजनीतिक जड़ें धुर-दक्षिणपंथी विचारधारा में गहराई से जमी हुई हैं। वह प्रवासन के मुद्दे पर लगातार सख्त और आक्रामक रुख अपनाती रही हैं। प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने अपनी राजनीतिक स्थिति में बदलाव देखा है। वह एक राष्ट्रवादी बाहरी व्यक्ति से यूरोपीय संघ के राजनेताओं के बीच एक स्थापित और प्रभावशाली व्यक्ति बन गई हैं। उनकी नीतियां अक्सर इटली की राष्ट्रीय पहचान और सुरक्षा को प्राथमिकता देती हैं। यह उनके राजनीतिक एजेंडे का एक केंद्रीय बिंदु रहा है।


    क्यों उठाए जा रहे हैं ये नए नीतिगत कदम?

    मेलोनी अगले साल होने वाले आम चुनाव से पहले अपनी लोकप्रियता को और बढ़ाना चाहती हैं। इसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वह कई नई नीतियां पेश कर रही हैं। इन नीतियों में छोटे और मध्यम आकार की कारों और स्कूटरों पर लगने वाले संपत्ति कर से छूट देना भी शामिल है। यह एक ऐसा कर है जिससे लोग काफी नाखुश थे। इस महीने की शुरुआत में, मेलोनी का रूढ़िवादी प्रशासन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इटली का सबसे लंबे समय तक निर्बाध रूप से सेवा करने वाला सरकार बन गया। यह उपलब्धि उनकी राजनीतिक स्थिरता और देश में उनके बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है। ये कदम मतदाताओं को आकर्षित करने और उनकी सरकार की छवि को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाए जा रहे हैं।

  • जॉर्जिया मेलोनी ने बनाया इटली में नया रिकॉर्ड, पीएम मोदी ने सबसे लंबे कार्यकाल पर मित्रता और रणनीतिक साझेदारी को सराहा

    जॉर्जिया मेलोनी ने बनाया इटली में नया रिकॉर्ड, पीएम मोदी ने सबसे लंबे कार्यकाल पर मित्रता और रणनीतिक साझेदारी को सराहा

    नई दिल्ली । इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने देश के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मेलोनी शुक्रवार को लगातार 1413 दिन तक सरकार का नेतृत्व करने के साथ इटली गणराज्य बनने के बाद सबसे लंबे समय तक लगातार सत्ता में रहने वाली प्रधानमंत्री बन गई हैं। उनकी इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी है और भारत तथा इटली के बीच संबंधों को मजबूत करने में उनकी भूमिका की सराहना की है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में जॉर्जिया मेलोनी को अपनी मित्र बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि इटली के लोगों के उनके नेतृत्व में भरोसे और विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि मेलोनी की मित्रता भारत और इटली के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण रही है।

    मोदी ने भारत और इटली के लोगों के बेहतर भविष्य के लिए दोनों देशों के साथ मिलकर आगे भी काम करने की उम्मीद जताई। उन्होंने मेलोनी को आने वाले वर्षों के लिए सफलता की शुभकामनाएं भी दीं। प्रधानमंत्री के संदेश में दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग और व्यक्तिगत स्तर पर नेताओं के संबंधों को भी प्रमुखता मिली।

    मेलोनी सरकार ने शुक्रवार को लगातार सत्ता में रहने के 1413 दिन पूरे किए। इसके साथ ही उनकी सरकार ने इटली के पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। बर्लुस्कोनी की सरकार वर्ष 2001 से 2005 के बीच लगातार 1412 दिन तक सत्ता में रही थी। मेलोनी की सरकार ने एक दिन अधिक लगातार सत्ता में रहकर नया रिकॉर्ड कायम किया है।

    यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इटली का राजनीतिक इतिहास लंबे समय तक सरकारों की अस्थिरता से जुड़ा रहा है। देश में गठबंधन सरकारों के टूटने और राजनीतिक बदलाव के कारण सरकारों का औसत कार्यकाल करीब 13 महीने बताया जाता है। ऐसे राजनीतिक माहौल में मेलोनी की सरकार का लगातार इतने लंबे समय तक सत्ता में बने रहना उनके लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि है।

    जॉर्जिया मेलोनी इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री भी हैं। उन्होंने तीन दक्षिणपंथी और कंजरवेटिव पार्टियों वाले गठबंधन के नेतृत्व में सरकार बनाई थी। गठबंधन की सरकार के सामने अलग-अलग राजनीतिक विचारों और प्राथमिकताओं के बीच तालमेल बनाए रखने की चुनौती रही है। इसके बावजूद सरकार का लगातार बने रहना मेलोनी के नेतृत्व की स्थिरता के रूप में देखा जा रहा है।

    मेलोनी खुद भी इस उपलब्धि को अपनी सरकार की महत्वपूर्ण सफलता के तौर पर पेश कर रही हैं। इसी सिलसिले में उनकी पार्टी की ओर से शुक्रवार शाम बारी शहर में एक बड़ी रैली आयोजित की जानी है। मेलोनी इस कार्यक्रम में शामिल होकर भाषण भी देंगी। माना जा रहा है कि रैली के दौरान वह सरकार के कार्यकाल और अब तक की उपलब्धियों को लेकर अपना पक्ष सामने रखेंगी।

    भारत और इटली के बीच संबंधों के लिहाज से भी मेलोनी का कार्यकाल महत्वपूर्ण रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और मेलोनी के बीच कई मौकों पर द्विपक्षीय सहयोग तथा रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने को लेकर बातचीत हुई है। मोदी के ताजा संदेश से संकेत मिलता है कि भारत दोनों देशों के बीच सहयोग को भविष्य में भी मजबूत बनाए रखने को महत्व देता है। मेलोनी की रिकॉर्ड उपलब्धि के बीच भारत की ओर से दी गई यह बधाई दोनों देशों के राजनीतिक संबंधों में निरंतरता का संदेश देती है।

  • स्यूटा माइग्रेशन संकट के बाद इटली ने स्पेन से आने वालों पर बढ़ाई निगरानी, सीमा जांच हुई सख्त

    स्यूटा माइग्रेशन संकट के बाद इटली ने स्पेन से आने वालों पर बढ़ाई निगरानी, सीमा जांच हुई सख्त

    नई दिल्ली । स्पेन के स्यूटा क्षेत्र में हाल ही में बढ़े अवैध प्रवासन संकट का असर अब पूरे यूरोप की राजनीति और सीमा सुरक्षा व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। बड़ी संख्या में प्रवासियों के स्यूटा पहुंचने के बाद इटली ने स्पेन से समुद्र और हवाई मार्ग के जरिए आने वाले यात्रियों की जांच को अस्थायी रूप से सख्त करने का फैसला लिया है। इस कदम ने यूरोपीय संघ के भीतर सीमा नियंत्रण और शेंगेन व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    स्यूटा, अफ्रीका में मोरक्को की सीमा से सटा स्पेन का स्वायत्त क्षेत्र है और लंबे समय से यूरोप में प्रवेश का एक प्रमुख मार्ग माना जाता रहा है। हाल के घटनाक्रम में बड़ी संख्या में प्रवासियों के इस क्षेत्र में पहुंचने के बाद कई यूरोपीय देशों ने अपनी सीमा सुरक्षा और प्रवासन नीतियों की समीक्षा शुरू कर दी है। इटली का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में प्रवासी स्पेन पहुंच जाते हैं तो शेंगेन क्षेत्र के मुक्त आवागमन के कारण वे अन्य सदस्य देशों तक भी पहुंच सकते हैं।

    इसी आशंका को देखते हुए इटली सरकार ने स्पेन से आने वाले समुद्री और हवाई यात्रियों की अतिरिक्त जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, यह व्यवस्था फिलहाल एक महीने के लिए लागू की गई है। इस अवधि में प्रमुख बंदरगाहों और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर गैर-यूरोपीय संघ के नागरिकों के दस्तावेजों की गहन जांच की जाएगी। पहचान पत्र के साथ वैध वीजा या निवास परमिट की भी जांच की जा रही है ताकि अनियमित प्रवासन पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके।

    इटली सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम शेंगेन व्यवस्था को समाप्त करने के उद्देश्य से नहीं उठाया गया है। सरकार का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में सुरक्षा कारणों से उपलब्ध विशेष प्रावधानों का उपयोग करते हुए सीमित अवधि के लिए सीमा नियंत्रण को मजबूत किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इससे अवैध प्रवासन और मानव तस्करी से जुड़े नेटवर्क की गतिविधियों पर नजर रखने में सहायता मिलेगी।

    दूसरी ओर, स्पेन ने इटली के इस निर्णय पर असहमति जताई है। स्पेन सरकार का कहना है कि यूरोप के सामने मौजूद प्रवासन संकट का समाधान सदस्य देशों के बीच समन्वित प्रयासों से ही संभव है। इसी उद्देश्य से स्पेन ने यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व से हस्तक्षेप की मांग करते हुए साझा रणनीति तैयार करने पर जोर दिया है। स्पेन का मानना है कि एकतरफा सीमा नियंत्रण से यूरोपीय सहयोग की भावना प्रभावित हो सकती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि स्यूटा में उत्पन्न स्थिति केवल स्पेन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरे यूरोप की सुरक्षा और प्रवासन नीति पर पड़ सकता है। सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ मानव तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई, प्रवासियों के मूल देशों के साथ सहयोग और कानूनी प्रवासन व्यवस्था को प्रभावी बनाना भी आवश्यक माना जा रहा है। यूरोपीय संघ के लिए यह चुनौती सुरक्षा, मानवीय दायित्व और सदस्य देशों के बीच मुक्त आवाजाही के सिद्धांतों के बीच संतुलन बनाए रखने की है।

    आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के बीच व्यापक चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सदस्य देश साझा नीति और समन्वित रणनीति अपनाते हैं तो सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ मानवीय दायित्वों का भी बेहतर तरीके से पालन किया जा सकेगा। स्यूटा संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अवैध प्रवासन केवल किसी एक देश की समस्या नहीं, बल्कि पूरे यूरोप के लिए साझा चुनौती बन चुका है।

  • ईरान मुद्दे पर मतभेद के बावजूद इटली की प्रधानमंत्री की तारीफ, डोनाल्ड ट्रंप बोले- मेलोनी मुझे बहुत पसंद, रिश्तों में आई नरमी के संकेत

    ईरान मुद्दे पर मतभेद के बावजूद इटली की प्रधानमंत्री की तारीफ, डोनाल्ड ट्रंप बोले- मेलोनी मुझे बहुत पसंद, रिश्तों में आई नरमी के संकेत


    नई दिल्ली ।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ हाल के मतभेदों को स्वीकार करते हुए उनके प्रति सकारात्मक रुख भी जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि ईरान से जुड़े मुद्दे पर दोनों देशों के बीच असहमति जरूर रही, लेकिन इसके बावजूद वह मेलोनी को पसंद करते हैं और उन्हें एक अच्छी नेता मानते हैं। ट्रंप के इस बयान को दोनों नेताओं के संबंधों में नरमी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय बैठक के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ईरान से जुड़े घटनाक्रम के दौरान इटली ने अमेरिका की अपेक्षित मदद नहीं की, जिससे दोनों नेताओं के रिश्तों में कुछ तनाव पैदा हुआ था। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हाल के दिनों में दोनों के बीच बातचीत सकारात्मक रही है और संबंधों में सुधार की संभावना बनी हुई है।

    ट्रंप ने कहा कि जॉर्जिया मेलोनी एक अच्छी इंसान हैं और उनके साथ व्यक्तिगत स्तर पर उनके संबंध सकारात्मक रहे हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक मतभेदों के बावजूद संवाद जारी रहा। उनके अनुसार किसी एक मुद्दे पर असहमति का अर्थ यह नहीं है कि व्यापक द्विपक्षीय संबंध प्रभावित हो जाएं।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में दोहराया कि ईरान से जुड़े हालिया संकट के दौरान उन्होंने इटली से सहयोग की अपेक्षा की थी। उनका कहना था कि अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने से उन्हें निराशा हुई। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर इटली की सरकार पर किसी प्रकार का अत्यधिक दबाव नहीं बनाया और प्रत्येक देश अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होता है।

    पिछले कुछ सप्ताहों में दोनों नेताओं के संबंधों को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई थीं। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ईरान, नाटो और अन्य वैश्विक मुद्दों को लेकर दोनों देशों की प्राथमिकताओं में अंतर दिखाई दिया था। इसके अलावा कुछ सार्वजनिक टिप्पणियों के बाद दोनों नेताओं के बीच दूरी बढ़ने की अटकलें भी लगाई जा रही थीं।

    जॉर्जिया मेलोनी को लंबे समय तक ट्रंप के करीबी सहयोगियों में गिना जाता रहा है। दोनों नेताओं के बीच कई वैश्विक मुद्दों पर पहले भी समान दृष्टिकोण देखने को मिला था। हालांकि हालिया घटनाक्रम के दौरान ईरान से जुड़े फैसलों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक रुख को लेकर दोनों के बीच मतभेद स्पष्ट रूप से सामने आए।

    विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के ताजा बयान का उद्देश्य मतभेदों को स्वीकार करने के साथ-साथ सहयोग की संभावनाओं को भी खुला रखना है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सहयोगी देशों के बीच कई मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण होना सामान्य माना जाता है, लेकिन संवाद और कूटनीतिक संपर्क बनाए रखना संबंधों की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण होता है।

    आने वाले समय में अमेरिका और इटली के बीच रक्षा, व्यापार, नाटो सहयोग तथा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर होने वाली बातचीत दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करेगी। फिलहाल ट्रंप के बयान से यह संकेत मिला है कि मतभेदों के बावजूद दोनों पक्ष संवाद बनाए रखने और भविष्य में सहयोग बढ़ाने की संभावना से इनकार नहीं कर रहे हैं।

  • G7 विवाद के बाद ट्रंप और मेलोनी आमने-सामने, इटली की प्रधानमंत्री ने दो टूक कहा- राष्ट्रीय सम्मान किसी भी रिश्ते से ऊपर

    G7 विवाद के बाद ट्रंप और मेलोनी आमने-सामने, इटली की प्रधानमंत्री ने दो टूक कहा- राष्ट्रीय सम्मान किसी भी रिश्ते से ऊपर

    नई दिल्ली । अमेरिका और इटली के बीच कूटनीतिक रिश्तों को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया दावों पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार राष्ट्रीय सम्मान और संप्रभुता के मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। दोनों नेताओं के बयानों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस विवाद पर नजर रखी जा रही है।

    विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए कई बार आग्रह किया था। उन्होंने यह भी कहा कि इटली में मेलोनी की लोकप्रियता घट रही है और वह अमेरिका के साथ अपनी नजदीकी दिखाकर राजनीतिक लाभ लेना चाहती हैं। ट्रंप के इन बयानों के बाद इटली की राजनीति और कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई।

    एक मीडिया साक्षात्कार में जॉर्जिया मेलोनी ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी सरकार अमेरिका विरोधी नहीं है, लेकिन इटली के राष्ट्रीय हित और संप्रभुता सर्वोपरि हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी विदेशी नेता के सामने झुकना उनकी कार्यशैली का हिस्सा नहीं है। उनके अनुसार मजबूत अंतरराष्ट्रीय संबंध बराबरी, आपसी सम्मान और स्पष्ट संवाद पर आधारित होने चाहिए, न कि व्यक्तिगत दावों या सार्वजनिक टिप्पणियों पर।

    मेलोनी ने अपनी लोकप्रियता को लेकर भी ट्रंप की टिप्पणी का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में जनता ही सरकार का मूल्यांकन करती है और उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता इस बात पर निर्भर करती है कि वह इटली के हितों की कितनी प्रभावी ढंग से रक्षा करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी दूसरे देश के नेता को इटली की आंतरिक राजनीति पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बचना चाहिए।

    इस विवाद के बीच इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने अपनी प्रस्तावित अमेरिका यात्रा स्थगित कर दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले को रोम की ओर से एक स्पष्ट कूटनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि दोनों देशों ने आधिकारिक रूप से अपने रणनीतिक सहयोग को जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने दोनों पक्षों के संबंधों पर नई चर्चा शुरू कर दी है।

    मेलोनी ने दोनों देशों के बीच रक्षा और सैन्य सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इटली ने अमेरिका के साथ हुए सभी रक्षा समझौतों का सम्मान किया है, लेकिन किसी भी समझौते में एकतरफा बदलाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनके अनुसार इटली एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है तथा उसकी विदेश नीति का निर्धारण राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल दो नेताओं के व्यक्तिगत बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यूरोप और अमेरिका के बीच बदलते कूटनीतिक समीकरणों का भी संकेत देता है। हाल के वर्षों में रक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर यूरोपीय देशों ने अपनी स्वतंत्र भूमिका को अधिक स्पष्ट रूप से सामने रखना शुरू किया है। ऐसे में मेलोनी का रुख इस व्यापक राजनीतिक प्रवृत्ति का हिस्सा माना जा रहा है।

    फिलहाल दोनों देशों के बीच औपचारिक संबंध सामान्य बने हुए हैं, लेकिन इस विवाद ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में सार्वजनिक बयानों की संवेदनशीलता को एक बार फिर उजागर कर दिया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों सरकारें इस विवाद को संवाद के माध्यम से सुलझाती हैं या यह मुद्दा भविष्य के द्विपक्षीय संबंधों और बहुपक्षीय मंचों पर भी प्रभाव डालता है।

  • भारत-इटली रिश्तों में नई गर्मजोशी: मेलोनी ने हिंदी में कहा-परिश्रम ही सफलता की कुंजी है

    भारत-इटली रिश्तों में नई गर्मजोशी: मेलोनी ने हिंदी में कहा-परिश्रम ही सफलता की कुंजी है



    नई दिल्ली। रोम में इस सप्ताह भारत और इटली के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान दोनों देशों के संबंधों में नई ऊर्जा देखने को मिली। प्रधानमंत्री Narendra Modi की इटली यात्रा में कई अहम समझौते हुए, लेकिन इस दौरे की सबसे ज्यादा चर्चा दोनों देशों के रिश्तों या डील्स से ज्यादा, पीएम मोदी और इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni की “केमिस्ट्री” को लेकर रही।

    रोम में संयुक्त प्रेस बयान के दौरान मेलोनी ने हिंदी में एक प्रसिद्ध कहावत “परिश्रम ही सफलता की कुंजी है” का उल्लेख कर सभी का ध्यान खींच लिया। उन्होंने कहा कि लगातार प्रयासों से ही भारत और रोम के बीच साझेदारी मजबूत हुई है और दोनों देश कई क्षेत्रों में साथ आगे बढ़ रहे हैं।

    दौरे के दौरान पीएम मोदी ने मेलोनी को भारत की प्रसिद्ध “मेलोडी” टॉफी गिफ्ट की, जिसके बाद मेलोनी ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद किया और इसे “बहुत स्वादिष्ट टॉफी” बताया। यह छोटा सा सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी चर्चा का विषय बन गया।

    सोशल मीडिया पर मेलोनी की एक पुरानी तस्वीर फिर वायरल हो गई, जिसमें वह पारंपरिक भारतीय झुमके पहने नजर आ रही हैं। इस तस्वीर को कई यूजर्स ने भारत से उनके जुड़ाव का प्रतीक बताया। इसके अलावा मेलोनी पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर “नमस्ते” करते हुए भारतीय परंपरा का सम्मान दिखा चुकी हैं, खासकर जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान।

  • ऊर्जा संकट के बीच PM मोदी का बड़ा कूटनीतिक मिशन: 5 देशों का दौरा, UAE से होगी शुरुआत

    ऊर्जा संकट के बीच PM मोदी का बड़ा कूटनीतिक मिशन: 5 देशों का दौरा, UAE से होगी शुरुआत



    नई दिल्ली।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 मई से 20 मई तक एक महत्वपूर्ण विदेश दौरे पर जा रहे हैं, जिसमें वे कुल 5 देशों UAE, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा करेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में ईरान संकट और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ा तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और आपूर्ति श्रृंखला पर असर डाल रहा है, ऐसे में इस यात्रा को रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।

    दौरे की शुरुआत 15 मई को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से होगी, जहां प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और भारत-UAE व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। UAE भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और वहां लगभग 45 लाख भारतीय प्रवासी रहते हैं, जो दोनों देशों के रिश्तों को और गहरा बनाते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा वैश्विक हालात में होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के बीच यह दौरा भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए पश्चिम एशिया में स्थिरता उसके लिए रणनीतिक प्राथमिकता है।

    इसके बाद प्रधानमंत्री 15 से 17 मई तक नीदरलैंड में रहेंगे, जहां वे प्रधानमंत्री रॉब जेटन, किंग विलेम-अलेक्जेंडर और क्वीन मैक्सिमा से मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और जल प्रबंधन जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी।

    17 और 18 मई को प्रधानमंत्री मोदी स्वीडन का दौरा करेंगे, जहां तकनीक, नवाचार और ग्रीन एनर्जी पर बातचीत होने की संभावना है। इसके बाद 18 से 19 मई को वे नॉर्वे जाएंगे। नॉर्वे के ओस्लो में 19 मई को तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें ग्रीन ट्रांजिशन, ब्लू इकोनॉमी, रक्षा, अंतरिक्ष और नई तकनीक जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा।

    दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री 19 से 20 मई तक इटली में रहेंगे। यहां वे प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और राष्ट्रपति सर्जियो मातारेला से मुलाकात करेंगे। इस दौरान भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, रक्षा सहयोग और स्वच्छ ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

    कुल मिलाकर यह 5 देशों का दौरा भारत की विदेश नीति, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक साझेदारी को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया भू-राजनीतिक और ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रही है।