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  • IVF को लेकर मन में हैं सवाल? जानें कब पड़ती है जरूरत, कितनी है सफलता और क्या हैं सच-झूठ

    IVF को लेकर मन में हैं सवाल? जानें कब पड़ती है जरूरत, कितनी है सफलता और क्या हैं सच-झूठ


    नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, देर से शादी, पीसीओएस, एंडोमेट्रियोसिस, मोटापा और पुरुषों में शुक्राणुओं की गुणवत्ता में गिरावट जैसी समस्याओं के कारण इनफर्टिलिटी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में इन विट्रो फर्टिलाइजेशन यानी IVF लाखों दंपतियों के लिए माता-पिता बनने का एक भरोसेमंद विकल्प बनकर सामने आया है। हालांकि IVF जितना लोकप्रिय हुआ है, उससे जुड़े भ्रम और मिथक भी उतनी ही तेजी से फैले हैं। कई लोग मानते हैं कि IVF से पैदा होने वाले बच्चे कमजोर होते हैं या यह प्रक्रिया हर बार सफल हो जाती है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन धारणाओं का वैज्ञानिक आधार नहीं है।

    IVF एक आधुनिक प्रजनन तकनीक है जिसमें महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को प्रयोगशाला में निषेचित कर भ्रूण तैयार किया जाता है। इसके बाद स्वस्थ भ्रूण को महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है, जहां आगे की गर्भावस्था सामान्य तरीके से ही विकसित होती है।

    सबसे बड़ा मिथक यह है कि IVF कराने के बाद गर्भधारण तय होता है। जबकि वास्तविकता यह है कि इसकी सफलता कई कारकों पर निर्भर करती है। महिला की उम्र, अंडाणु और शुक्राणु की गुणवत्ता, भ्रूण की स्थिति, गर्भाशय का स्वास्थ्य और अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियां सफलता की संभावना तय करती हैं। कई मामलों में पहली कोशिश सफल नहीं होती और दूसरी या तीसरी बार सफलता मिलती है।

    एक और आम धारणा यह है कि IVF से पैदा होने वाले बच्चे शारीरिक या मानसिक रूप से कमजोर होते हैं। विशेषज्ञ इस दावे को पूरी तरह गलत बताते हैं। उनका कहना है कि IVF में केवल निषेचन की प्रक्रिया प्रयोगशाला में होती है। इसके बाद भ्रूण का विकास गर्भाशय में बिल्कुल उसी तरह होता है, जैसा प्राकृतिक गर्भधारण में होता है। वैज्ञानिक शोध भी बताते हैं कि अधिकांश IVF से जन्मे बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होते हैं और उनका शारीरिक तथा मानसिक विकास सामान्य बच्चों की तरह ही होता है। बच्चे का स्वास्थ्य माता-पिता की आनुवंशिक स्थिति, गर्भावस्था के दौरान मां के पोषण, जीवनशैली, संक्रमण और प्रसव की परिस्थितियों पर अधिक निर्भर करता है।

    कई लोगों को लगता है कि IVF से हमेशा जुड़वां या तीन बच्चे पैदा होते हैं। पहले सफलता की संभावना बढ़ाने के लिए एक से अधिक भ्रूण गर्भाशय में स्थापित किए जाते थे, इसलिए मल्टीपल प्रेग्नेंसी की संभावना अधिक रहती थी। लेकिन आधुनिक तकनीकों में डॉक्टर अधिकतर मामलों में केवल एक स्वस्थ भ्रूण ही प्रत्यारोपित करते हैं। इससे जुड़वां गर्भावस्था की संभावना कम होती है और मां तथा बच्चे दोनों के लिए जोखिम भी घट जाता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि IVF उन दंपतियों के लिए एक प्रभावी विकल्प है जिन्हें लंबे समय तक प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण नहीं हो पा रहा हो। हालांकि इस प्रक्रिया को अपनाने से पहले किसी अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञ से पूरी जांच और सलाह लेना जरूरी है। सही समय पर उपचार, स्वस्थ जीवनशैली और सकारात्मक मानसिक स्थिति IVF की सफलता की संभावना को बेहतर बना सकती है।

    आज की आधुनिक चिकित्सा ने लाखों परिवारों की जिंदगी में खुशियां लौटाई हैं। इसलिए IVF को लेकर फैली अफवाहों और मिथकों पर भरोसा करने के बजाय सही और वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर निर्णय लेना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।

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  • 150 इंजेक्शन, लंबा इंतजार और कई भावनात्मक उतार-चढ़ाव, अनुष्का रंजन ने साझा किया IVF के जरिए मां बनने का कठिन सफर

    150 इंजेक्शन, लंबा इंतजार और कई भावनात्मक उतार-चढ़ाव, अनुष्का रंजन ने साझा किया IVF के जरिए मां बनने का कठिन सफर

    नई दिल्ली । अभिनेत्री अनुष्का रंजन ने मां बनने के अपने सफर को लेकर खुलकर बात करते हुए आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान झेली गई शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक चुनौतियों का अनुभव साझा किया है। हाल ही में अपनी प्रेग्नेंसी की घोषणा करने वाली अनुष्का ने बताया कि मातृत्व तक पहुंचने का उनका सफर बिल्कुल आसान नहीं था। इसके पीछे लंबा इलाज, लगातार चिकित्सकीय प्रक्रियाएं और कई भावनात्मक उतार-चढ़ाव शामिल रहे। उन्होंने अपने अनुभव को साझा कर उन महिलाओं का हौसला बढ़ाने की कोशिश की है, जो इसी तरह की परिस्थितियों का सामना कर रही हैं।

    अनुष्का रंजन ने बताया कि उन्होंने और उनके पति आदित्य सील ने परिवार बढ़ाने की योजना पर गंभीरता से विचार करने के बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों से सलाह ली। सामान्य रूप से गर्भधारण नहीं होने पर दोनों ने आईवीएफ प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया। उनके अनुसार, यह उपचार केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी बेहद थकाने वाला साबित हुआ। कई बार उन्हें लगा कि इस पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना उनके लिए बेहद कठिन हो जाएगा।

    अभिनेत्री ने बताया कि उपचार के दौरान उन्हें 150 से अधिक इंजेक्शन लेने पड़े। कई बार इंजेक्शन का दर्द इतना अधिक होता था कि आंखों में आंसू आ जाते थे। शुरुआती चरण में उनके पति आदित्य सील स्वयं उन्हें इंजेक्शन लगाने में मदद करते थे और हर कठिन पल में उनका हौसला बढ़ाते थे। अनुष्का के मुताबिक, लगातार दवाइयों, जांचों और उपचार के बीच कई ऐसे क्षण आए जब उन्होंने मानसिक रूप से खुद को बेहद कमजोर महसूस किया, लेकिन परिवार के सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।

    उन्होंने कहा कि आईवीएफ केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि भावनात्मक परीक्षा भी है। इस दौरान महिलाएं शारीरिक पीड़ा के साथ-साथ मानसिक दबाव, चिंता और अनिश्चितता से भी गुजरती हैं। इसलिए इस विषय को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि समाज में आईवीएफ को लेकर सही जानकारी और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि इस उपचार से गुजर रही महिलाओं को बेहतर समझ और भावनात्मक सहयोग मिल सके।

    अनुष्का ने बताया कि इस विषय पर उनकी बहन आकांक्षा ने भी उन्हें कई महत्वपूर्ण बातें समझाईं। उनके अनुसार, समाज में अक्सर यह धारणा बना दी जाती है कि विवाह के बाद गर्भधारण आसानी से हो जाता है, जबकि वास्तविकता कई बार इससे अलग होती है। विशेषज्ञों से बातचीत के दौरान उन्हें यह समझ आया कि प्रत्येक ओव्यूलेशन चक्र में गर्भधारण की संभावना सीमित होती है। इस जानकारी ने उन्हें प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को बेहतर तरीके से समझने में मदद की।

    अभिनेत्री का कहना है कि इस पूरे अनुभव ने उन्हें महिलाओं की मानसिक और शारीरिक क्षमता का नया एहसास कराया। उनका मानना है कि मातृत्व का सफर हर महिला के लिए अलग होता है और किसी की परिस्थितियों का आकलन बिना पूरी जानकारी के नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने उन महिलाओं से भी सकारात्मक बने रहने की अपील की जो किसी कारणवश गर्भधारण में कठिनाइयों का सामना कर रही हैं।

    अनुष्का रंजन ने इस अवसर पर पुरुषों से भी संवेदनशीलता और सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि उनकी पत्नी या जीवनसाथी आईवीएफ जैसी प्रक्रिया से गुजर रही हैं, तो उन्हें धैर्य, समझ और भावनात्मक समर्थन देना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, परिवार का साथ इस कठिन सफर को काफी हद तक आसान बना सकता है। उन्होंने कहा कि अपने अनुभव को सार्वजनिक करने का उद्देश्य आईवीएफ से जुड़ी झिझक को कम करना और इस विषय पर खुलकर संवाद को बढ़ावा देना है।

  • सात असफल IVF प्रयासों के बाद मिली खुशियों की सौगात, संभावना सेठ और अविनाश द्विवेदी बने जुड़वां बच्चों के माता-पिता

    सात असफल IVF प्रयासों के बाद मिली खुशियों की सौगात, संभावना सेठ और अविनाश द्विवेदी बने जुड़वां बच्चों के माता-पिता

    नई दिल्ली । टीवी और मनोरंजन जगत की चर्चित अभिनेत्री संभावना सेठ के जीवन में आखिरकार वह खुशी आ गई है जिसका उन्हें और उनके परिवार को वर्षों से इंतजार था। करीब दस वर्षों तक मातृत्व की राह में लगातार चुनौतियों और असफलताओं का सामना करने के बाद संभावना सेठ और उनके पति अविनाश द्विवेदी जुड़वां बच्चों के माता-पिता बन गए हैं। सरोगेसी के माध्यम से मिले इस सुखद उपहार ने न केवल उनके परिवार को नई खुशियां दी हैं, बल्कि उनके लाखों प्रशंसकों को भी भावुक कर दिया है।

    इस खुशखबरी की जानकारी कपल ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की। अस्पताल से साझा की गई तस्वीरों में दोनों के चेहरे पर लंबे संघर्ष के बाद मिली सफलता और संतोष साफ दिखाई दे रहा था। तस्वीरों में संभावना की आंखों में खुशी के आंसू नजर आए, जबकि अविनाश उनके साथ खड़े होकर इस विशेष पल को महसूस करते दिखाई दिए। सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेश में कपल ने इस खुशी की तुलना समय से पहले आई दीपावली से करते हुए बताया कि उनके घर लक्ष्मी और गणेश के रूप में दो नई खुशियों का आगमन हुआ है।

    संभावना सेठ का मातृत्व का सफर आसान नहीं रहा। अभिनेत्री ने पहले भी कई अवसरों पर खुलकर बताया था कि मां बनने की उनकी इच्छा ने उन्हें वर्षों तक मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक संघर्षों से गुजरने पर मजबूर किया। उन्होंने लगातार चिकित्सा उपचार कराए और सात बार आईवीएफ प्रक्रिया का सहारा लिया, लेकिन हर बार उन्हें निराशा का सामना करना पड़ा। कई बार गर्भधारण के बाद गर्भपात जैसी पीड़ादायक परिस्थितियों ने भी उनके जीवन को प्रभावित किया। इन असफलताओं के बावजूद उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी और अपने लक्ष्य की ओर लगातार प्रयास करती रहीं।

    लगातार असफल चिकित्सा प्रयासों के बाद संभावना और अविनाश ने सरोगेसी का विकल्प चुना। यह निर्णय उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। लंबे इंतजार और धैर्य के बाद आखिरकार उनके घर जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ, जिसने उनके वर्षों पुराने सपने को साकार कर दिया। इस उपलब्धि को कपल ने भगवान की कृपा और अपने संघर्ष की जीत बताया है।

    उनकी इस खुशी में मनोरंजन जगत की कई हस्तियां भी शामिल हुईं। गौहर खान ने परिवार और नवजात बच्चों के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनके सुखद भविष्य की कामना की। वहीं उर्फी जावेद, देबिना बनर्जी, किश्वर मर्चेंट और रोहित पुरोहित सहित कई कलाकारों ने उन्हें बधाई संदेश भेजे। सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने भी इस नए अध्याय के लिए कपल को शुभकामनाएं दीं।

    संभावना सेठ की यह कहानी केवल एक सेलिब्रिटी के माता-पिता बनने की खबर नहीं है, बल्कि उन हजारों दंपतियों के लिए प्रेरणा भी है जो लंबे समय तक संतान सुख के लिए संघर्ष करते हैं। उनका सफर यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों, असफलताओं और निराशाओं के बावजूद धैर्य, विश्वास और सही निर्णय जीवन में नई उम्मीदों के द्वार खोल सकते हैं। जुड़वां बच्चों के आगमन के साथ संभावना और अविनाश के जीवन में खुशियों का नया अध्याय शुरू हो गया है, जिसका इंतजार उन्होंने पूरे दस वर्षों तक किया था।