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  • ₹999 में TV बनेगा कंप्यूटर! Jio के इस सस्ते पैक में फ्री मिलेगा वायरलेस कीबोर्ड-माउस

    ₹999 में TV बनेगा कंप्यूटर! Jio के इस सस्ते पैक में फ्री मिलेगा वायरलेस कीबोर्ड-माउस




    नई दिल्ली। Jio ने ऐसा सस्ता पैक लॉन्च किया है, जिसकी मदद से अब लोग अपने पुराने या स्मार्ट टीवी को ही PC में बदल सकेंगे। सिर्फ 999 रुपये वाले JioPC Starter Pack के साथ यूजर्स को 50 दिनों का क्लाउड कंप्यूटर एक्सेस, वायरलेस कीबोर्ड और माउस फ्री में मिलेगा। कंपनी का दावा है कि Jio Fiber या AirFiber यूजर्स बिना महंगा CPU खरीदे टीवी स्क्रीन पर इंटरनेट ब्राउजिंग, डॉक्यूमेंट वर्क और बेसिक कंप्यूटर टास्क कर सकेंगे।

    इस पैक को खरीदने के बाद ग्राहकों को Ant FKBRI05 कंपनी का वायरलेस कीबोर्ड और माउस कॉम्बो घर तक डिलीवर किया जाएगा। इसके अलावा 24 घंटे के अंदर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर SMS के जरिए JioPC का 50 दिनों का एक्टिवेशन कोड भेजा जाएगा। यूजर्स को सिर्फ कीबोर्ड-माउस का रिसीवर Jio सेट-टॉप बॉक्स में लगाना होगा और टीवी में JioPC ऐप ओपन कर कोड एंटर करना होगा। इसके बाद टीवी एक क्लाउड बेस्ड पर्सनल कंप्यूटर की तरह काम करने लगेगा।

    Jio का कहना है कि यह सर्विस खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी होगी जो कम खर्च में कंप्यूटर जैसी सुविधा चाहते हैं। इस सिस्टम पर वर्ड प्रोसेसिंग, ऑनलाइन पढ़ाई, इंटरनेट ब्राउजिंग और बेसिक ऑफिस वर्क आसानी से किए जा सकते हैं। हालांकि हैवी टास्क या एडवांस काम के लिए तेज इंटरनेट स्पीड जरूरी होगी।

    ध्यान देने वाली बात यह है कि यह सुविधा केवल उन्हीं ग्राहकों के लिए उपलब्ध है जिनके घर में पहले से Jio Fiber या Jio AirFiber कनेक्शन मौजूद है। बिना JioHome इंटरनेट सर्विस के इस क्लाउड कंप्यूटर फीचर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

  • बांग्लादेश–पाकिस्तान डील से बढ़ा साउथ एशिया में सस्पेंस, खुफिया सहयोग और सुरक्षा गठजोड़ पर उठे सवाल

    बांग्लादेश–पाकिस्तान डील से बढ़ा साउथ एशिया में सस्पेंस, खुफिया सहयोग और सुरक्षा गठजोड़ पर उठे सवाल




    नई दिल्ली। बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच हाल के समय में बढ़ते सुरक्षा और प्रशासनिक सहयोग ने दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। दोनों देशों के बीच नशे की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और सीमा पार अपराधों से निपटने को लेकर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसे 10 वर्षों के लिए मान्य बताया गया है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, इस समझौते के तहत दोनों देश खुफिया जानकारी साझा करने, संयुक्त अभियान चलाने और नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क को खत्म करने पर काम करेंगे। इसमें उभरते तस्करी रास्तों और नई छिपाने की तकनीकों की जानकारी साझा करने जैसे प्रावधान भी शामिल हैं।

    हालांकि विशेषज्ञ इस समझौते को लेकर सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच कोई सीधी जमीनी सीमा नहीं है, जिससे इस तरह के सहयोग के वास्तविक उद्देश्यों पर चर्चा तेज हो गई है। इसी वजह से इसे केवल अपराध नियंत्रण नहीं बल्कि रणनीतिक और कूटनीतिक बदलाव के रूप में भी देखा जा रहा है।

    रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि बांग्लादेश के कुछ वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पाकिस्तान में प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच संस्थागत स्तर पर संपर्क बढ़ रहा है। कुछ विश्लेषक इसे बांग्लादेश की बदलती विदेश नीति और क्षेत्रीय समीकरणों में संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम में बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका और उसकी क्षेत्रीय रणनीति पर भी नजर रखी जा रही है, क्योंकि यह बदलाव दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

    कुल मिलाकर, बांग्लादेश-पाकिस्तान सहयोग का यह नया दौर केवल सुरक्षा समझौते तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि इसके पीछे क्षेत्रीय कूटनीति और रणनीतिक हितों की एक बड़ी परत जुड़ी हुई मानी जा रही है।