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  • हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: ट्रैफिक सुधार के लिए वन-वे और पिक-ड्रॉप सिस्टम अनिवार्य

    हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: ट्रैफिक सुधार के लिए वन-वे और पिक-ड्रॉप सिस्टम अनिवार्य


    जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर शहर में बढ़ती ट्रैफिक अव्यवस्था और अदालत परिसरों के आसपास हो रही अवैध पार्किंग को गंभीर समस्या मानते हुए प्रशासन को तत्काल प्रभाव से अंतरिम यातायात व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब तक प्रस्तावित मल्टी-लेवल पार्किंग का निर्माण पूरा नहीं हो जाता, तब तक ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए विशेष व्यवस्थाएं लागू की जाएं।

    ‘पिक एंड ड्रॉप’ सिस्टम अपनाने पर जोर

    हाईकोर्ट ने अदालत आने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए ‘पिक एंड ड्रॉप’ व्यवस्था को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के आदेश के अनुसार, एडवोकेट जनरल राज्य सरकार के सभी विभागों के प्रमुखों को एडवाइजरी जारी करेंगे, ताकि कोर्ट आने वाले अधिकारी अपनी गाड़ियों को लंबे समय तक पार्क करने के बजाय ‘पिक एंड ड्रॉप’ प्रणाली का उपयोग करें।

    इसी तरह, केंद्र सरकार के अधिकारियों के लिए असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेंगे। न्यायालय का मानना है कि इससे अदालतों के आसपास वाहनों की संख्या कम होगी और ट्रैफिक जाम की समस्या में राहत मिलेगी।

    वकीलों से कार-पूलिंग की अपील

    कोर्ट ने अधिवक्ताओं से भी सहयोग की अपेक्षा जताई है। जिन वकीलों के पास निजी ड्राइवर उपलब्ध हैं, उन्हें ‘पिक एंड ड्रॉप’ सिस्टम अपनाने की सलाह दी गई है। साथ ही पार्किंग पर दबाव कम करने के लिए कार-पूलिंग को प्रोत्साहित करने की अपील की गई है।

    सुबह 10 से शाम 6 बजे तक रहेगा ‘वन-वे’

    यातायात को सुचारू बनाने के लिए हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि कलेक्टर ऑफिस क्रॉसिंग से तहसील क्रॉसिंग तक का मार्ग सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक वन-वे घोषित किया जाए। इस दौरान वाहनों की आवाजाही एक ही दिशा में नियंत्रित की जाएगी, जिससे सड़क पर जाम की स्थिति कम हो सके।

    इसके अलावा हाईकोर्ट और जिला अदालत के सामने ट्रैफिक नियंत्रण के लिए पर्याप्त संख्या में ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

    फ्लाईओवर निर्माण पर भी नजर

    याचिका में अदालत के सामने से गुजरने वाली मुख्य सड़क पर फ्लाईओवर निर्माण की मांग भी उठाई गई है। इस संबंध में पहले से दो याचिकाएं न्यायालय में लंबित हैं। हाईकोर्ट ने इस मुद्दे को भी महत्वपूर्ण बताते हुए अगली सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित की है।

    शहरवासियों को मिल सकती है राहत

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ‘पिक एंड ड्रॉप’, कार-पूलिंग और ‘वन-वे’ जैसी व्यवस्थाओं का प्रभावी ढंग से पालन कराया गया, तो अदालत क्षेत्र और आसपास की सड़कों पर लगने वाले जाम में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें प्रशासन द्वारा इन निर्देशों के क्रियान्वयन पर टिकी हैं।
  • शाहजहांनाबाद मासूम हत्याकांड: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दोषी अतुल निहाले का तिहरा मृत्युदंड बरकरार

    शाहजहांनाबाद मासूम हत्याकांड: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दोषी अतुल निहाले का तिहरा मृत्युदंड बरकरार


    जबलपुर/भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी को झकझोर देने वाले शाहजहांनाबाद मासूम बलात्कार और हत्याकांड मामले में न्याय की जीत हुई है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर मुख्य पीठ ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी अतुल निहाले 30 को मिली फांसी की सजा को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत सेशन कोर्ट के फैसले के खिलाफ आरोपी के परिजनों द्वारा दायर की गई अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया।

    यह मामला न केवल अपनी संवेदनशीलता के लिए, बल्कि कानूनी इतिहास के लिए भी विशेष है। भोपाल की विशेष अदालत ने दोषी अतुल निहाले को अपहरण बलात्कार और हत्या, इन तीनों अलग-अलग धाराओं में ‘तिहरा मृत्युदंड सुनाया था। यानी उसे प्रत्येक जघन्य अपराध के लिए अलग से फांसी की सजा दी गई थी। भारतीय न्याय संहिता के लागू होने के बाद मध्यप्रदेश में यह अपनी तरह का पहला मामला है जहां किसी अपराधी को एक साथ तीन मृत्युदंड मिले हों।

    क्या थी दिल दहला देने वाली वह घटना

    घटना भोपाल के शाहजहांनाबाद क्षेत्र की है, जहां एक 5 वर्षीय मासूम बच्ची अचानक लापता हो गई थी। सघन तलाशी के बाद बच्ची का शव पड़ोस में रहने वाले मजदूर अतुल निहाले के घर में पानी की टंकी से बरामद हुआ था। जांच में यह बात सामने आई थी कि आरोपी ने बच्ची का अपहरण किया, उसके साथ हैवानियत की और पकड़े जाने के डर से उसकी बेरहमी से हत्या कर शव को छिपा दिया।

    हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी

    सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर दुर्लभ से दुर्लभतम की श्रेणी में माना। न्यायालय ने कहा कि ऐसे जघन्य कृत्य समाज के लिए खतरा हैं और मासूमों की सुरक्षा के प्रति कोई भी समझौता नहीं किया जा सकता। आरोपी के परिजनों ने उसकी पृष्ठभूमि और कम उम्र का हवाला देकर सजा कम करने की गुहार लगाई थी जिसे अदालत ने अपराध की वीभत्सता को देखते हुए ठुकरा दिया। भोपाल पुलिस और अभियोजन पक्ष ने इस मामले में बेहद कम समय में वैज्ञानिक साक्ष्य और पुख्ता गवाह पेश किए थे, जिसकी बदौलत यह सजा बरकरार रह सकी। इस फैसले के बाद पीड़िता के परिवार और स्थानीय नागरिकों ने न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त किया है।