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  • मार्च में 17 दिन मंत्री सुनेंगे जनता की समस्याएं, पांच मंत्रियों की इस महीने कोई ड्यूटी नहीं

    मार्च में 17 दिन मंत्री सुनेंगे जनता की समस्याएं, पांच मंत्रियों की इस महीने कोई ड्यूटी नहीं

    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश बीजेपी कार्यालय में मार्च महीने के लिए मंत्री ड्यूटी का रोस्टर जारी कर दिया गया है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने शनिवार-रविवार और सरकारी छुट्टियों को छोड़कर रोज़ाना एक मंत्री को कार्यालय में बैठकर आम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनने का निर्देश दिया है।

    कल यानी 2 मार्च को डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक कार्यालय में रहेंगे।

    मार्च में कुल 17 दिन मंत्रियों की ड्यूटी होगी। लेकिन इस महीने पांच मंत्रियों की एक भी दिन ड्यूटी नहीं लगी है। जिन मंत्रियों की ड्यूटी नहीं है, वे हैं:

    राकेश सिंह (PWD मंत्री)

    विश्वास सारंग (सहकारिता एवं खेल मंत्री)

    लखन पटेल (पशुपालन मंत्री)

    प्रतिमा बागरी (नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री)

    दिलीप अहिरवार (वन राज्यमंत्री)

    छुट्टियों के कारण ड्यूटी नहीं लगेगी:
    1 मार्च (रविवार), 3-5 मार्च (होली), 7 मार्च (शनिवार), 8 मार्च (रविवार), 14-15 मार्च (शनिवार-रविवार), 19 मार्च (गुड़ी पड़वा), 21-22 मार्च (शनिवार-रविवार), 27 मार्च (राम नवमी), 28-29 मार्च (शनिवार-रविवार)।

    मंत्रियों की तारीखवार ड्यूटी (मुख्य विवरण):

    2 मार्च, सोमवार – जगदीश देवड़ा (वाणिज्यिक कर, वित्त, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी), गौतम टेटवाल (कौशल विकास एवं रोजगार)

    6 मार्च, शुक्रवार – कुंवर विजय शाह (जनजातीय कार्य, भोपाल गैस त्रासदी राहत), नरेन्द्र शिवाजी पटेल (लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा)

    9 मार्च, सोमवार – राजेन्द्र शुक्ल (डिप्टी सीएम, लोक स्वास्थ्य), नारायण सिंह पंवार (मछुआ कल्याण एवं मत्स्य)

    10 मार्च, मंगलवार – प्रहलाद पटेल (पंचायत एवं श्रम), राधा सिंह (पंचायत राज)

    11 मार्च, बुधवार – उदय प्रताप सिंह (परिवहन एवं स्कूल शिक्षा), दिलीप जायसवाल (कुटीर एवं ग्रामोद्योग)

    12 मार्च, गुरुवार – करण सिंह वर्मा (राजस्व)

    13 मार्च, शुक्रवार – संपतिया उईके (PHE)

    16 मार्च, सोमवार – तुलसी सिलावट (जल संसाधन)

    17 मार्च, मंगलवार – एदल सिंह कंसाना (कृषि)

    18 मार्च, बुधवार – निर्मला भूरिया (महिला एवं बाल विकास)

    20 मार्च, शुक्रवार – नारायण सिंह कुशवाह (सामाजिक न्याय)

    23 मार्च, सोमवार – नागर सिंह चौहान (अनुसूचित जाति कल्याण)

    24 मार्च, मंगलवार – प्रद्युम्न सिंह तोमर (ऊर्जा)

    25 मार्च, बुधवार – राकेश शुक्ला (नवकरणीय ऊर्जा)

    26 मार्च, गुरुवार – चेतन्य काश्यप (MSME)

    30 मार्च, सोमवार – कृष्णा गौर (पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण)

    31 मार्च, मंगलवार – धर्मेन्द्र सिंह लोधी (पर्यटन एवं संस्कृति)

    इस व्यवस्था से आम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं को सीधे मंत्री से मिलने और अपनी समस्याएं साझा करने का अवसर मिलेगा।

  • उज्जैन सिंहस्थ 2028: 3,000 करोड़ का बजट, 128 प्रोजेक्ट में से कई अधूरे, प्रशासन पर समय की चुनौती

    उज्जैन सिंहस्थ 2028: 3,000 करोड़ का बजट, 128 प्रोजेक्ट में से कई अधूरे, प्रशासन पर समय की चुनौती


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार ने उज्जैन सिंहस्थ 2028 के लिए अब तक कुल 5,570 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है, जिसमें हाल ही में पेश 3,060 करोड़ रुपए की राशि पिछले बजट की तुलना में 1,055 करोड़ अधिक है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के अनुसार, सिंहस्थ आयोजन के लिए पहले से ही 13,851 करोड़ के प्रोजेक्ट स्वीकृत हैं और विभिन्न विभागों में काम जारी है। हालांकि, आर्थिक सर्वेक्षण और विभागीय समीक्षा में सामने आया है कि घाटों की मरम्मत, पुल और सड़कों के अपग्रेडेशन, पेयजल और सीवरेज जैसी मूलभूत सुविधाओं के काम अभी भी अधूरे हैं।

    सिंहस्थ आयोजन के लिए बनी कैबिनेट सब-कमेटी ने 128 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है, जिनकी अनुमानित लागत 13,752 करोड़ है। इनमें से 42 प्रोजेक्ट नगरीय विकास एवं आवास विभाग के जिम्मे हैं, लेकिन केवल 33 प्रोजेक्ट पर ही धरातल पर काम शुरू हो पाया है। शेष 26 महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अभी फाइलों में अटके हैं। इन लंबित योजनाओं में सड़क चौड़ीकरण, नए पुलों का निर्माण, घाटों का विस्तार, ट्रैफिक सुधार और श्रद्धालुओं के लिए आवास जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं।

    जल और शिप्रा नदी का शुद्धिकरण राज्य सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। जल संसाधन विभाग पांच बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जिनमें कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट ₹914 करोड़ केवल 52% पूरा हुआ है। उज्जैन और देवास में बैराज निर्माण, शिप्रा को प्रवाहमान बनाने और घाट निर्माण के प्रोजेक्ट भी केवल 15% से 62% तक ही पूरे हुए हैं। इन प्रोजेक्ट्स की डेडलाइन 2027-2028 तक है, इसलिए प्रशासन पर समय की बड़ी चुनौती है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में प्रोजेक्ट की समीक्षा कर तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने पिछले तीन वर्षों से केंद्र से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है और उम्मीद जताई है कि 6,000-7,000 करोड़ रुपए की केंद्र सहायता किश्तों में उपलब्ध हो सकेगी।

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग पर सिंहस्थ तैयारियों का सबसे बड़ा जिम्मा है। विभाग के 42 प्रोजेक्ट में से 33 पर काम चल रहा है, लेकिन 9 प्रोजेक्ट अभी अधूरे हैं। पेयजल, सीवरेज और घाट निर्माण जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी, समय की कमी और भारी वित्तीय बोझ प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है।

    सिंहस्थ की सफलता राज्य की विकास योजनाओं और प्रशासनिक क्षमता का परीक्षण होगी। हालांकि बजट और परियोजनाओं की संख्या प्रभावशाली दिखती है, लेकिन धरातल पर तेजी से काम न होने से आयोजन में संभावित जोखिम बरकरार हैं।

  • मप्र की जीडीपी में 11.14% वृद्धि, प्रति व्यक्ति आय बढ़कर ₹1,69,050 हुई

    मप्र की जीडीपी में 11.14% वृद्धि, प्रति व्यक्ति आय बढ़कर ₹1,69,050 हुई


    भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 सदन में प्रस्तुत किया। सर्वेक्षण के मुताबिक, राज्य की जीडीपी GSDP में 11.14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि प्रति व्यक्ति आय बढ़कर ₹1,69,050 हो गई है।

    देवड़ा ने कहा कि मध्य प्रदेश ने संतुलित और समावेशी विकास का मॉडल प्रस्तुत किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 के अग्रिम अनुमान के अनुसार राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद प्रचलित भाव पर ₹16,69,750 करोड़ आंका गया है, जो 2024-25 के ₹15,02,428 करोड़ की तुलना में 11.14% अधिक है। स्थिर 2011-12 भाव पर जीएसडीपी ₹7,81,911 करोड़ अनुमानित है, जो 8.04% की वास्तविक वृद्धि दर्शाता है।

    प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी

    वर्ष 2011-12 में ₹38,497 रही प्रति व्यक्ति आय 2025-26 में बढ़कर ₹1,69,050 हो गई है। स्थिर भाव पर यह आय ₹76,971 तक पहुंची है।

    क्षेत्रवार योगदान

    प्राथमिक क्षेत्र: 43.09% प्रचलित भाव  द्वितीयक क्षेत्र: 19.79% तृतीयक क्षेत्र: 37.12% स्थिर भाव पर तृतीयक क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक 40.28% रहा।

    कृषि और ग्रामीण विकास
    प्राथमिक क्षेत्र का जीएसवीए ₹6,79,817 करोड़ रहा, जो 7.31% वृद्धि दर्शाता है। फसल उत्पादन में 7.66% और खाद्यान्न उत्पादन में 14.68% वृद्धि दर्ज की गई। दुग्ध उत्पादन 225.95 लाख टन तक पहुंचा। 72,975 किमी ग्रामीण सड़कें और 40.82 लाख ग्रामीण आवास निर्माण से ग्रामीण ढांचे को मजबूती मिली।

    उद्योग और निवेश

    द्वितीयक क्षेत्र का जीएसवीए ₹3,12,350 करोड़ रहा, जो 9.93% वृद्धि दर्शाता है। 1,028 इकाइयों को 6,125 एकड़ भूमि आवंटित की गई, जिससे ₹1.17 लाख करोड़ निवेश और 1.7 लाख रोजगार की संभावनाएं बनीं। एमएसएमई सहायता ₹2,162 करोड़ रही।

    सेवा क्षेत्र में तेज वृद्धि

    तृतीयक क्षेत्र का जीएसवीए ₹5,85,588 करोड़ रहा, जो 15.80% वृद्धि दर्शाता है। पर्यटन क्षेत्र में 13.18 करोड़ पर्यटक आए।

    वित्तीय अनुशासन और सामाजिक क्षेत्र
    राजस्व में 13.57% वृद्धि और ऋण-जीएसडीपी अनुपात 31.3% रहा। अमृत 2.0 के तहत ₹4,065 करोड़ आवंटन प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में 8.75 लाख आवास पूर्ण स्वास्थ्य व्यय ₹34,112 करोड़ जीएसडीपी का 3% ,4.42 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी मातृ मृत्यु दर घटकर 142 प्रति लाख जीवित जन्म

    शिक्षा और कौशल

    कुल बजट का 10.37% शिक्षा के लिए आवंटित। कक्षा 1-5 में ड्रॉपआउट दर शून्य, कक्षा 6-8 में 6.3%। 45,668 विद्यार्थियों को ₹500 करोड़ की सहायता। तकनीकी शिक्षण संस्थान 1,625 से बढ़कर 2,070 हुए।  देवड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री Mohan Yadav के नेतृत्व में राज्य आर्थिक प्रगति की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।

  • मप्र विधानसभा में ₹19,287 करोड़ का तीसरा अनुपूरक बजट पेश, राजस्व और पूंजीगत मद में बड़ा प्रावधान

    मप्र विधानसभा में ₹19,287 करोड़ का तीसरा अनुपूरक बजट पेश, राजस्व और पूंजीगत मद में बड़ा प्रावधान


    भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने वित्तीय वर्ष 2024-25 का तीसरा अनुपूरक बजट पेश किया। यह अनुपूरक बजट 19,287 करोड़ 32 लाख रुपये का है। इसके साथ ही आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 भी सदन के पटल पर रखा गया। प्रस्तुत अनुपूरक बजट में राजस्व मद में 8,934.03 करोड़ रुपये और पूंजीगत मद में 10,353.29 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    प्रमुख विभागों को आवंटन

    सामान्य प्रशासन विभाग ₹100 करोड़

    राजस्व विभाग ₹100 करोड़

    वन विभाग ₹161 करोड़

    औद्योगिक नीति एवं निवेश संवर्धन विभाग ₹1,250 करोड़

    वित्त विभाग ₹1,650 करोड़

    वाणिज्यिक कर विभाग ₹1,388 करोड़

    खनिज विभाग माइनिंग फंड ₹321 करोड़

    रक्षित निधि अंतरण योजना ₹140 करोड़

    ऊर्जा विभाग ₹2,630 करोड़

    श्रम विभाग ₹615 करोड़

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग ₹2,569 करोड़ स्थानीय निकाय  ₹248 करोड़  मिलियन शहर

    नर्मदा घाटी विकास विभाग ₹4,700 करोड़

    जल संसाधन विभाग ₹300 करोड़

    लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ₹300 करोड़

    तकनीकी शिक्षा विभाग ₹720 करोड़

    एमएसएमई विभाग ₹213 करोड़

    सरकार के अनुसार यह अनुपूरक बजट विकास योजनाओं, अधोसंरचना विस्तार और विभिन्न विभागों की अतिरिक्त वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए लाया गया है।