Tag: ‘Jai Shri Ram’

  • बंगाल में हिंदुत्व को लेकर सियासी संग्राम शुरू, ‘जय महाकाली’ बनाम ‘जय श्रीराम’ का गूंज रहा नारा

    बंगाल में हिंदुत्व को लेकर सियासी संग्राम शुरू, ‘जय महाकाली’ बनाम ‘जय श्रीराम’ का गूंज रहा नारा


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय पहचान और वर्चस्व की लड़ाई में बदलती नजर आ रही है। ऊपर से चुनावी शोर और आरोप-प्रत्यारोप भले ही हावी हों, लेकिन भीतर ही भीतर हिंदुत्व की लहर एक अहम भूमिका निभाती दिख रही है। यह ऐसा कारक बन चुका है, जो स्थापित राजनीतिक समीकरणों को चुनौती दे रहा है और सत्ता के समीकरण बदलने की क्षमता रखता है।

    राज्य की राजनीति अब पारंपरिक मुद्दों से आगे बढ़कर धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के इर्द-गिर्द सिमटती जा रही है। यह मुकाबला एक तरह से शक्ति उपासना और ‘जय श्रीराम’ के नारों के बीच खिंचती रेखा जैसा बन गया है, जहां हर रैली और बयान का अलग राजनीतिक अर्थ निकाला जा रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंदिर दौरों को केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक व्यापक सांस्कृतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। दक्षिणेश्वर, बेलूर मठ, मतुआ धाम और कालीघाट जैसे प्रमुख स्थलों पर उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक माहौल को नया आयाम दिया है। इसके चलते राज्य में ‘जय महाकाली’ के साथ ‘जय श्रीराम’ का नारा भी तेजी से राजनीतिक पहचान का हिस्सा बनता जा रहा है।

    भाजपा का मानना है कि पहले चरण के मतदान में मतदाताओं की सक्रियता बदलाव के संकेत दे रही है। पार्टी रणनीतिकार इसे मौन मतदाता की प्रतिक्रिया के रूप में देख रहे हैं, जो भविष्य के परिणामों को प्रभावित कर सकती है। चुनावी रणनीति के स्तर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने खुद मैदान में उतरकर कमान संभाली है। कोलकाता में लगातार सक्रिय रहते हुए वे उन क्षेत्रों पर फोकस कर रहे हैं, जहां पहले भाजपा की पकड़ कमजोर मानी जाती थी। उनके साथ संगठनात्मक स्तर पर सुनील बंसल बूथ प्रबंधन को मजबूत करने में जुटे हैं, जिससे पार्टी जमीनी स्तर पर अपनी स्थिति बेहतर करने की कोशिश कर रही है।

    जिन सीटों पर मुकाबला होना है, वे तृणमूल कांग्रेस का गढ़ मानी जाती हैं। पिछले चुनाव में भाजपा यहां सीमित सफलता हासिल कर सकी थी, लेकिन इस बार पार्टी को माहौल अपने पक्ष में बदलता नजर आ रहा है। सुरक्षा और चुनाव के बाद भी केंद्रीय बलों की मौजूदगी को लेकर दिए गए संदेश को भाजपा समर्थकों के लिए भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।

    दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस चुनौती का जवाब अपनी अलग रणनीति से देने का प्रयास किया है। उन्होंने बंगाली अस्मिता और धार्मिक समावेश को केंद्र में रखते हुए प्रचार तेज किया है। मंदिरों में जाकर वे यह संदेश दे रही हैं कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान को बाहरी नजरिये से नहीं समझा जा सकता।

    इस रणनीति में अभिषेक बनर्जी की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। वे युवाओं को जोड़ने के लिए नए तरीके अपना रहे हैं और भाजपा के खिलाफ आक्रामक अभियान चला रहे हैं। तृणमूल के अन्य नेता भी जमीनी स्तर पर सक्रिय होकर चुनावी विमर्श को धार्मिक मुद्दों से हटाकर विकास, अधिकार और केंद्र-राज्य संबंधों की ओर मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में यह चुनाव अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रतीकों, पहचान और विचारधाराओं की टकराहट का रूप ले चुका है, जहां हर पक्ष अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है।

  • ‘जय श्री राम’ बोलने पर 500 रुपये की छूट: कोलकाता के डॉक्टर के ऑफर पर सियासी बवाल

    ‘जय श्री राम’ बोलने पर 500 रुपये की छूट: कोलकाता के डॉक्टर के ऑफर पर सियासी बवाल

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक हृदय रोग विशेषज्ञ (Cardiologist) के अनोखे ऑफर ने राजनीतिक गलियारों में विवाद खड़ा कर दिया है। डॉक्टर ने घोषणा की है कि जो भी मरीज उनके क्लिनिक में आकर ‘जय श्री राम’ कहेगा, उसे कंसल्टेशन फीस में 500 रुपये की भारी छूट दी जाएगी। डॉक्टर ने अपने इस कदम को राज्य में ‘राजनीतिक बदलाव’ की उम्मीद से जोड़ा है।
    इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. पी.के. हाजरा ने यह छूट केवल दक्षिण कोलकाता स्थित अपने निजी चेंबर पर लागू की है। वे एक प्राइवेट अस्पताल में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विभाग के निदेशक भी हैं, लेकिन वहां यह छूट लागू नहीं होगी।

    डॉ. हाजरा ने अपने क्लिनिक पर एक पोस्टर लगाया है, जिसमें वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दुपट्टा पहने नजर आ रहे हैं। उन्होंने यह जानकारी सोशल मीडिया पर भी शेयर की है। डॉक्टर के मुताबिक, यह पोस्टर उनके ही एक मरीज ने तैयार किया था।
    डॉ. हाजरा ने कहा कि यह पूरी तरह से उनके दिमाग की उपज है। उन्होंने अपनी मंशा स्पष्ट करते हुए कहा: पिछले कई वर्षों में एक डॉक्टर के तौर पर मैंने मरीजों के सवाल झेले हैं कि आखिर उन्हें इलाज के लिए दूसरे राज्यों में क्यों जाना पड़ता है। जब भी मैं बंगाल के मरीजों को इलाज के लिए असम, ओडिशा या दक्षिण भारत जाते देखता हूं, तो मुझे बहुत बुरा लगता है। इसके विपरीत दूसरे राज्यों से लोग यहां नहीं आते। मुझे लगता है कि इस चलन को बदलने की जरूरत है। डॉक्टर ने आगे कहा कि वह सीधे तौर पर भाजपा से नहीं जुड़े हैं, लेकिन वह भाजपा शासित अन्य राज्यों की प्रगति के प्रशंसक हैं।
    डॉ. हाजरा ने स्वीकार किया कि उन्हें अपने गृह जिले पश्चिम मेदिनीपुर के पिंगला से भाजपा का टिकट मिलने की उम्मीद थी। जब ऐसा नहीं हुआ, तो उन्होंने लोगों को राज्य में बदलाव के लिए वोट करने हेतु प्रेरित करने का यह अनोखा तरीका निकाला। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काम की तारीफ भी की, लेकिन कहा कि अन्य राज्यों की विकास गति को देखते हुए बंगाल पिछड़ रहा है। उनके अनुसार, केंद्र और टीएमसी सरकार के बीच चल रही “खींचतान” का सीधा असर राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली पर पड़ा है।
    तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पेशे से चिकित्सक डॉ. निर्मल माझी ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया: डॉ. हाजरा अपनी जुटाई गई अपार संपत्ति की रक्षा करने के लिए भाजपा का पक्ष लेने की कोशिश कर रहे हैं। वह खुद को बचाने के लिए भाजपा की ‘वाशिंग मशीन’ में घुसकर अपनी छवि साफ करना चाहते हैं। माझी ने यह भी दावा किया कि ऐसे कदमों से भाजपा को चुनाव जीतने में कोई मदद नहीं मिलेगी क्योंकि जनता का समर्थन टीएमसी के साथ है।
    भाजपा के राज्यसभा सांसद और बंगाल के पूर्व भाजपा अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने डॉ. हाजरा के इस कदम की सराहना की। उन्होंने कहा: मुझे लगता है कि यह पहल अन्य डॉक्टरों को भी आगे आने और ऐसे फैसले लेने के लिए प्रेरित करेगी, ताकि राज्य के स्वास्थ्य ढांचे की बेहतरी के लिए बदलाव लाया जा सके। बता दें कि पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है, और मतों की गिनती 4 मई को की जाएगी।