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  • ‘दृश्यम 3’ के राजवीर सिंह तोमर बनकर छाए जयदीप अहलावत, ब्लॉकबस्टर के बाद बदलेगी किस्मत, अब बड़े रोल पर नजर

    ‘दृश्यम 3’ के राजवीर सिंह तोमर बनकर छाए जयदीप अहलावत, ब्लॉकबस्टर के बाद बदलेगी किस्मत, अब बड़े रोल पर नजर


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन की फिल्म दृश्यम: द कन्क्लूजन को मिल रही सफलता के बीच अभिनेता जयदीप अहलावत ने अपने अगले करियर प्लान को लेकर अहम बात कही है। फिल्म में राजवीर सिंह तोमर का किरदार निभाकर दर्शकों का ध्यान खींचने वाले जयदीप अब बार-बार पुलिस अधिकारी की भूमिका नहीं निभाना चाहते। अभिनेता की इच्छा है कि उन्हें ऐसे किरदार मिलें जो उनकी अभिनय क्षमता को नई दिशा दें और उन्हें कुछ अलग करने का मौका दें। जयदीप ने फिल्म की सफलता पर खुशी जताते हुए उम्मीद जाहिर की है कि इस फिल्म के बाद उनके पास चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं के प्रस्ताव आएंगे।
    जयदीप अहलावत ने हाल ही में वैरायटी इंडिया के साथ बातचीत में फिल्म और अपने किरदार को लेकर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म का हिस्सा बनना हर अभिनेता का सपना होता है और वह इस उपलब्धि से बेहद खुश हैं। हालांकि उन्हें अभी यह नहीं पता कि दृश्यम 3 की सफलता उनके करियर को किस तरह आगे बढ़ाएगी लेकिन उन्हें उम्मीद है कि इसका सकारात्मक असर जरूर देखने को मिलेगा। अभिनेता चाहते हैं कि निर्माता और निर्देशक अब उन्हें एक ही तरह की भूमिकाओं में सीमित रखने के बजाय नए और चुनौतीपूर्ण किरदारों में आजमाएं।
    जयदीप का कहना है कि वह अच्छे स्क्रीनप्ले और मजबूत कहानी वाले प्रोजेक्ट करना चाहते हैं। उनके लिए किसी फिल्म में किरदार की अहमियत और उसे निभाने की चुनौती काफी मायने रखती है। वह ऐसे रोल की तलाश में हैं जिनमें अभिनय के नए पहलुओं को सामने लाने का अवसर मिले। पुलिस अधिकारी के किरदारों में दर्शकों ने उन्हें पहले भी पसंद किया है लेकिन अब वह इस छवि से आगे निकलकर अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाना चाहते हैं। उनका मानना है कि एक अभिनेता के तौर पर लगातार नए प्रयोग करना जरूरी है ताकि दर्शकों को हर बार उनका अलग रूप देखने को मिले।
    दृश्यम 3 में जयदीप के किरदार राजवीर सिंह तोमर की कहानी में अहम भूमिका है। फिल्म में अजय देवगन एक बार फिर विजय सलगांवकर के रूप में अपने परिवार को बचाने की कोशिश करते नजर आते हैं। जयदीप ने बातचीत के दौरान अजय देवगन की अभिनय शैली और कहानी को लेकर उनके नजरिए की भी तारीफ की। जब उनसे पूछा गया कि कुछ दृश्यों में अजय ने अपने किरदार को पीछे रखकर जयदीप के किरदार को प्रभावी होने का मौका दिया तो उन्होंने कहा कि अजय कहानी की जरूरत को समझते हैं। उनके मुताबिक फिल्म में यह जरूरी था कि विजय सलगांवकर को राजवीर सिंह तोमर से डर महसूस हो। अजय देवगन ने इसी जरूरत के अनुसार अपने किरदार को निभाया और कहानी को प्राथमिकता दी।
    अभिनेता ने यह भी बताया कि दृश्यम 3 का हिस्सा बनना उनके लिए अचानक लिया गया फैसला था। पहले से तय काम और व्यस्त शेड्यूल के बीच इस फिल्म के लिए समय निकालना आसान नहीं था। शुरुआत में उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वह अपनी तारीखों को कैसे व्यवस्थित करेंगे लेकिन निर्माताओं के साथ बातचीत के बाद इसका समाधान निकल आया। जयदीप इस फिल्म को करना चाहते थे और अपने किरदार से संतुष्ट भी थे इसलिए आखिरकार उन्होंने इसके लिए हामी भर दी। अब फिल्म का हिस्सा बनने के फैसले से वह खुश हैं।
    जयदीप अहलावत इससे पहले वेब सीरीज पाताल लोक में पुलिस अधिकारी हाथीराम चौधरी की भूमिका निभाकर काफी लोकप्रियता हासिल कर चुके हैं। फिल्म राजी में भी उनका गंभीर और प्रभावशाली अंदाज देखने को मिला था। अब उनकी अगली बड़ी फिल्म किंग है जिसमें वह शाहरुख खान के साथ नजर आएंगे। ऐसे में दृश्यम 3 की सफलता के बाद दर्शकों की नजर उनके आने वाले प्रोजेक्ट्स पर रहेगी। जयदीप की कोशिश अब अपनी स्थापित छवि से आगे बढ़ते हुए ऐसे किरदार चुनने की है जो उनके अभिनय के नए रंग सामने ला सकें।

  • सच बनाम सनसनी की जंग दिखाती है ये OTT सीरीज! जयदीप अहलावत और सोनाली बेंद्रे की एक्टिंग ने जीता दिल

    सच बनाम सनसनी की जंग दिखाती है ये OTT सीरीज! जयदीप अहलावत और सोनाली बेंद्रे की एक्टिंग ने जीता दिल


    नई दिल्ली। अगर आपको क्राइम सस्पेंस और थ्रिलर से भरपूर सीरीज देखना पसंद है तो ओटीटी पर मौजूद द ब्रोकन न्यूज आपके लिए एक अलग अनुभव लेकर आती है। पत्रकारिता की दुनिया को केंद्र में रखकर बनाई गई यह सीरीज न्यूज रूम के भीतर चलने वाली प्रतिस्पर्धा टीआरपी की दौड़ और सच दिखाने की कोशिश के बीच पैदा होने वाले तनाव को सामने लाती है। सीरीज को दर्शकों की ओर से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है और इसकी IMDb रेटिंग 7.6 बताई गई है।

    द ब्रोकन न्यूज की कहानी मुंबई के दो न्यूज नेटवर्क के बीच की प्रतिस्पर्धा पर आधारित है। एक तरफ आवाज भारती नाम का न्यूज चैनल है जिसकी एडिटर अमीना कुरैशी का किरदार सोनाली बेंद्रे ने निभाया है। अमीना पत्रकारिता में सच्चाई और जिम्मेदारी को प्राथमिकता देती हैं लेकिन उनका चैनल आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है। दूसरी तरफ जोश 24/7 नाम का चैनल है जो टीआरपी और सनसनीखेज खबरों की दौड़ में आगे निकलना चाहता है।

    जोश 24/7 के प्रमुख एंकर दिपांकर सान्याल का किरदार जयदीप अहलावत ने निभाया है। उनका किरदार पत्रकारिता के उस रूप को दिखाता है जहां खबर की प्रस्तुति और टीआरपी का दबाव कई बार खबर की प्राथमिकताओं पर भारी पड़ जाता है। दोनों चैनलों की अलग सोच के बीच एक युवा और प्रतिभाशाली पत्रकार की कहानी भी आगे बढ़ती है। श्रिया पिलगांवकर ने इस पत्रकार का किरदार निभाया है और कहानी में उनके सामने पत्रकारिता के दो अलग रास्ते दिखाई देते हैं।

    सीरीज की कहानी केवल दो न्यूज चैनलों की प्रतिद्वंद्विता तक सीमित नहीं रहती। जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ती है वैसे वैसे दर्शकों को न्यूज रूम के भीतर की राजनीति दबाव फैसलों और पत्रकारिता की नैतिक चुनौतियों की झलक मिलती है। एक तरफ सच्चाई के साथ खबर दिखाने की कोशिश है तो दूसरी तरफ ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंचने के लिए सनसनी का सहारा लेने की होड़ है। यही टकराव सीरीज को दिलचस्प बनाता है।

    द ब्रोकन न्यूज के दो सीजन हैं। पहले सीजन में सच्चाई और सनसनी के बीच की लड़ाई को प्रमुखता से दिखाया गया है। कहानी में कई ऐसे मोड़ आते हैं जो दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखते हैं। दूसरे सीजन में कहानी आगे बढ़ती है और पहले सीजन के घटनाक्रम के बाद किरदारों की जिंदगी में आए बदलावों को दिखाया जाता है।

    इस सीरीज का निर्देशन विनय वायकुल ने किया है। सोनाली बेंद्रे जयदीप अहलावत और श्रिया पिलगांवकर प्रमुख भूमिकाओं में नजर आते हैं। जयदीप अहलावत ने दिपांकर सान्याल के किरदार में खास प्रभाव छोड़ा है। वहीं सोनाली बेंद्रे ने अमीना कुरैशी के किरदार को गंभीरता के साथ निभाया है। श्रिया पिलगांवकर की एक्टिंग भी कहानी के युवा पत्रकार वाले हिस्से को मजबूती देती है।

    द ब्रोकन न्यूज वर्ष 2018 की ब्रिटिश ड्रामा सीरीज प्रेस का हिंदी रूपांतरण है। अगर आप पत्रकारिता की पृष्ठभूमि वाली कहानी के साथ सस्पेंस और ड्रामा देखना चाहते हैं तो यह सीरीज एक विकल्प हो सकती है। इसे ZEE5 पर हिंदी तमिल और तेलुगु भाषाओं में देखा जा सकता है। इसकी IMDb रेटिंग 7.6 है।

  • 'इक्कीस' देखने के बाद यूजर्स ने दिए रिएक्शन, धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म को लेकर कही ये बात

    'इक्कीस' देखने के बाद यूजर्स ने दिए रिएक्शन, धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म को लेकर कही ये बात

    नई दिल्ली। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। यह फिल्म सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की बायोपिक है, जिन्होंने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में मात्र 21 साल की उम्र में शहादत दी थी। फिल्म में अरुण खेत्रपाल का किरदार अगस्त्य नंदा ने निभाया है, जबकि सिमर भाटिया, जयदीप अहलावत और धर्मेंद्र ने भी अहम भूमिकाएं निभाई हैं। फिल्म के निर्देशक श्रीराम राघवन हैं।

    यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रिया

    फिल्म देखने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दर्शकों ने अपने विचार साझा किए। कई यूजर्स ने इसे इमोशनल वॉर ड्रामा करार दिया। एक यूजर ने लिखा कि ‘इक्कीस’ उम्मीद से बेहतर है और यह फिल्म दिल को छू जाती है। कई दर्शक इसे शांतिवाद और राष्ट्रवाद का संतुलन पेश करने वाली फिल्म मान रहे हैं। एक अन्य यूजर ने कहा कि यह फिल्म 2026 के लिए बॉलीवुड में एक सफल शुरुआत साबित होगी।

    कहानी और संदेश की तारीफ

    यूजर्स ने फिल्म की कहानी और संदेश की जमकर तारीफ की। कई ने लिखा कि धुरंधर जैसी फिल्म के बाद ‘इक्कीस’ की तरह की कहानी आनी चाहिए थी जो युद्ध की हिंसा और राष्ट्रवाद को संतुलित दृष्टिकोण से दिखाती है। फिल्म के शांतिवादी संदेश ने दर्शकों को खासा प्रभावित किया।

    कलाकारों की अदाकारी की सराहना

    धर्मेंद्र की अंतिम अदाकारी को दर्शकों ने बेहद पसंद किया। यूजर्स ने लिखा कि मुश्किल शेड्यूल और थकान के बावजूद धर्मेंद्र जी ने हमेशा की तरह अपना सर्वश्रेष्ठ दिया। साथ ही अगस्त्य नंदा और अन्य कलाकारों की प्रदर्शन क्षमता की भी जमकर तारीफ की गई। दर्शकों का कहना है कि फिल्म में नए कलाकारों ने असली भावना और कहानी को पूरी तरह जीवंत किया।

    फिल्म का निर्देशन और तकनीकी पक्ष

    श्रीराम राघवन के निर्देशन में बनी यह फिल्म न केवल कहानी बल्कि विजुअल और तकनीकी दृष्टि से भी प्रभावशाली मानी जा रही है। युद्ध की घटनाओं और भावनाओं को पर्दे पर सटीक तरीके से पेश करने के लिए फिल्म की सिनेमेटोग्राफी और निर्देशन की भी खूब सराहना हुई।

    दर्शकों का समग्र अनुभव

    यूजर्स के अनुसार ‘इक्कीस’ एक ऐसी फिल्म है जो भावनाओं से भरपूर, प्रेरक और सोचने पर मजबूर करने वाली है। युद्ध और शांति के बीच संतुलन, युवा वीरों की कहानी और धर्मेंद्र की अंतिम अदाकारी ने फिल्म को यादगार बना दिया। फिल्म के हर दृश्य में वास्तविकता और भावना की झलक है जो दर्शकों को पूरी तरह बांधे रखती है।