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  • संसदीय समिति की चौंकाने वाली रिपोर्ट जेलों के भीतर मोबाइल और प्रतिबंधित सामान का खेल नहीं थम रहा

    संसदीय समिति की चौंकाने वाली रिपोर्ट जेलों के भीतर मोबाइल और प्रतिबंधित सामान का खेल नहीं थम रहा


    नई दिल्ली । देश की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्रीय गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति की ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि मोबाइल फोन समेत कई प्रतिबंधित सामान बड़ी आसानी से जेलों के भीतर पहुंच रहे हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि आधुनिक सुरक्षा उपकरण जैमर और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के बावजूद यह सिलसिला थम नहीं रहा है। रिपोर्ट के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में जेल स्टाफ के साथ अस्पताल से जुड़े कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आई है जिससे जेल सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।

    समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जेलों में लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनात रहने वाले कर्मचारियों और कैदियों के बीच नजदीकियां बढ़ जाती हैं। यही कारण है कि कई मामलों में सांठगांठ विकसित हो जाती है और प्रतिबंधित सामान अंदर पहुंचाने का रास्ता आसान बन जाता है। समिति ने सुझाव दिया है कि जेल कर्मचारियों का नियमित अंतराल पर तबादला किया जाए ताकि इस तरह की मिलीभगत की संभावना कम हो सके।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि देश की अधिकांश जेलों में आधुनिक सुरक्षा संसाधनों की कमी है। कई स्थानों पर लगे जैमर प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रहे हैं जबकि सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है। इसलिए गृह मंत्रालय से सिफारिश की गई है कि राज्यों को पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए ताकि डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर हैंड हेल्ड स्कैनर बैगेज स्कैनर बॉडी वॉर्न कैमरे आधुनिक सीसीटीवी सिस्टम और अन्य सुरक्षा उपकरण खरीदे जा सकें। साथ ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कैदियों की पेशी को बढ़ावा देने की भी सलाह दी गई है जिससे जेल से बाहर ले जाने की जरूरत कम हो सके।

    हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिन्होंने जेल सुरक्षा पर गंभीर चिंता बढ़ा दी है। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जेल के भीतर से मोबाइल फोन और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए आपराधिक नेटवर्क संचालित करने के आरोपों ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी भी पहले कई बार यह संकेत दे चुकी है कि कुछ संगठित अपराधी जेल के भीतर से ही उगाही ड्रग तस्करी हवाला और टारगेट किलिंग जैसी गतिविधियों का संचालन करते रहे हैं।

    पूर्व वरिष्ठ जेल अधिकारियों का भी मानना है कि जेल मैनुअल में समय के अनुसार बदलाव की जरूरत है। उनका कहना है कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं होगा क्योंकि कई मामलों में प्रभावशाली लोगों का संरक्षण भी ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देता है। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी और भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी तब तक सुधार की प्रक्रिया अधूरी रहेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जेल केवल अपराधियों को बंद रखने का स्थान नहीं बल्कि सुधार गृह भी हैं। यदि जेलों के भीतर ही आपराधिक गतिविधियां संचालित होती रहेंगी तो कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए खतरा बढ़ेगा। ऐसे में संसदीय समिति की सिफारिशों को गंभीरता से लागू करना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है ताकि जेलों की सुरक्षा मजबूत हो सके और अपराधियों के नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

  • बैतूल जेल में महिला कैदी ने चूड़ियां निगलकर आत्मघाती प्रयास किया, गम्भीर हालत में भोपाल रेफर

    बैतूल जेल में महिला कैदी ने चूड़ियां निगलकर आत्मघाती प्रयास किया, गम्भीर हालत में भोपाल रेफर

    नई दिल्ली। बैतूल जिला जेल की महिला बैरक में शनिवार सुबह हड़कंप मच गया, जब पति की हत्या के आरोप में बंद 21 वर्षीय कैदी पूनम उईके ने कांच की चूड़ियां पीसकर निगल लीं। घटना के बाद जेल प्रशासन तुरंत सक्रिय हुआ और महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थिति गंभीर होने के कारण उसे भोपाल रेफर कर दिया गया।

    पूनम अपने पति राजू उईके की हत्या के मामले में 18 दिसंबर 2025 से जेल में बंद है। घटना के समय बैरक में 18 अन्य महिला कैदी मौजूद थीं, लेकिन किसी को इसका पता नहीं चला। जेल में कड़ा सुरक्षा नियम होने के बावजूद पूनम के पास चूड़ियां कैसे पहुंचीं, यह एक गंभीर सवाल बन गया है। प्रभारी जेलर योगेश शर्मा ने बताया कि उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी गई है और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।

    जिला अस्पताल के सिविल सर्जन के अनुसार, पूनम के गले के अंदरूनी हिस्से में कांच के टुकड़ों से गहरे जख्म हुए हैं। इन जख्मों को और गंभीर नुकसान न पहुंचे, इसके लिए महिला को बेहतर इलाज के लिए भोपाल रेफर किया गया है।

    पूनम की पर्सनल लाइफ और आपराधिक रिकॉर्ड काफी जटिल है। वह अपने पति की हत्या में महाराष्ट्र के तीन युवकों के साथ शामिल थी। शुरुआती जांच में ऐसा प्रतीत होता है कि पूनम ने आत्मग्लानि या मानसिक तनाव के चलते यह कदम उठाया। चर्चा है कि पूनम का जेल में बॉयफ्रेंड भी मौजूद है, और यह घटना किसी दबाव या डिप्रेशन का नतीजा हो सकती है।

    घटना के बाद जेल प्रशासन ने महिला बैरक की निगरानी बढ़ा दी है। पुलिस और प्रशासन दोनों ही महिला के स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए हैं और उसके विस्तृत बयान लेने की तैयारी कर रहे हैं। इस घटना ने न केवल जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और कैदियों की सुरक्षा के महत्व को भी उजागर किया है।