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  • फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान जयपुर डायवर्ट, हाईजैक अलर्ट के बाद विमान की सुरक्षा जांच शुरू

    फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान जयपुर डायवर्ट, हाईजैक अलर्ट के बाद विमान की सुरक्षा जांच शुरू

    नई दिल्ली ।फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान को बुधवार, 14 अक्टूबर की सुबह सुरक्षा अलर्ट मिलने के बाद जयपुर में आपातकालीन लैंडिंग करानी पड़ी। विमान में कथित हाईजैक खतरे से संबंधित संकेत मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं। एहतियात के तौर पर विमान को दिल्ली ले जाने के बजाय जयपुर की ओर मोड़ दिया गया। वहां सुरक्षित उतरने के बाद विमान को जांच के लिए अलग निर्धारित स्थान पर ले जाया गया।

    यह उड़ान एआई-2030 फ्रैंकफर्ट से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी। भारतीय हवाई क्षेत्र के करीब पहुंचने के दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) को सुरक्षा से जुड़ा अलर्ट मिला। इसके बाद विमान की सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। अधिकारियों ने विमान को जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतारने का निर्णय लिया। लैंडिंग के बाद विमान को आइसोलेशन बे में रखा गया, ताकि सुरक्षा संबंधी जांच की जा सके।

    उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अहमदाबाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल को सुबह करीब 9 बजे कुछ सेकंड के लिए इमरजेंसी सिग्नल मिला था। इसके लगभग 10 मिनट बाद, सुबह 9:10 बजे, विमान को जयपुर की ओर मोड़ने का फैसला किया गया। इसके बाद विमान ने करीब 9:45 बजे जयपुर हवाई अड्डे पर सुरक्षित लैंडिंग की। अलर्ट मिलने से लेकर विमान के उतरने तक सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाओं को प्राथमिकता दी गई।

    बताया गया कि विमान से कथित तौर पर 7500 कोड का सिग्नल प्रसारित हुआ था। विमानन क्षेत्र में इस कोड का इस्तेमाल संभावित हाईजैकिंग या विमान में अवैध हस्तक्षेप की स्थिति का संकेत देने के लिए किया जाता है। इसके जरिए पायलट एयर ट्रैफिक कंट्रोल को गोपनीय तरीके से ऐसी स्थिति की जानकारी दे सकते हैं। हालांकि, इस मामले में यह स्पष्ट नहीं हुआ कि विमान से यह संकेत किस परिस्थिति में प्रसारित हुआ और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या था।

    जयपुर में विमान के उतरने के बाद विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों ने उसकी विस्तृत जांच शुरू कर दी। विमान को अलग स्थान पर रखने के बाद यह पता लगाने की प्रक्रिया शुरू हुई कि कहीं उसमें कोई संदिग्ध वस्तु या सुरक्षा से जुड़ी गतिविधि तो नहीं है। शुरुआती जानकारी में किसी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि की पुष्टि नहीं हुई थी। इसके बावजूद जांच जारी रखी गई, ताकि अलर्ट से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा सके।

    विमान में सवार यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकालकर हवाई अड्डे के निर्धारित सुरक्षित क्षेत्र में पहुंचाया गया। घटना में किसी के घायल होने या किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं मिली। हालांकि, अचानक विमान का मार्ग बदलने और सुरक्षा अलर्ट की जानकारी सामने आने से यात्रियों के बीच कुछ समय के लिए चिंता की स्थिति बनी। सुरक्षा एजेंसियों और हवाई अड्डा प्रशासन ने इस दौरान स्थिति को नियंत्रित रखा।

    फिलहाल जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि हाईजैक अलर्ट किस वजह से सक्रिय हुआ। जांच में यह स्पष्ट किया जाना है कि सिग्नल किसी तकनीकी गड़बड़ी, गलत संकेत या किसी अन्य कारण से प्रसारित हुआ था। घटना के समय तक एयर इंडिया और जयपुर हवाई अड्डा प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। जांच पूरी होने के बाद ही अलर्ट के कारण और पूरे घटनाक्रम से संबंधित स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • ममता कुलकर्णी का नया डांस वीडियो वायरल, 54 की उम्र में पुराने गानों पर थिरकती अभिनेत्री ने खींचा यूजर्स का ध्यान

    ममता कुलकर्णी का नया डांस वीडियो वायरल, 54 की उम्र में पुराने गानों पर थिरकती अभिनेत्री ने खींचा यूजर्स का ध्यान

    नई दिल्ली । 90 के दशक की चर्चित अभिनेत्री ममता कुलकर्णी एक बार फिर अपने नए अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। अभिनेत्री के कुछ वीडियो सामने आए हैं, जिनमें वह अपने पुराने फिल्मी गानों पर डांस करती नजर आ रही हैं। उनके इस अंदाज को देखकर सोशल मीडिया यूजर्स ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। कई लोगों ने उनके पुराने फिल्मी दौर को याद किया और उनकी तारीफ की।

    ममता कुलकर्णी हाल ही में 14वें जयपुर फिल्म फेस्टिवल में शामिल हुई थीं। इस कार्यक्रम में उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान अभिनेत्री मंच पर मौजूद थीं और उन्होंने अपने फिल्मी करियर से जुड़े कई लोकप्रिय गानों पर डांस किया।

    इस दौरान ममता कुलकर्णी को फिल्म ‘घातक’ के गाने ‘कोई जाए तो ले आए मेरी लाख दुआएं पाए’ पर थिरकते देखा गया। इसके अलावा उन्होंने ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’ के गाने ‘भोली भाली लड़की’ और ‘करण अर्जुन’ के लोकप्रिय गाने ‘भांगड़ा पा ले’ पर भी डांस किया। उनके साथ कार्यक्रम में मौजूद कई छात्र भी थिरकते नजर आए।

    ममता ने कार्यक्रम के कुछ वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा किए। वीडियो सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों और अन्य यूजर्स ने अभिनेत्री के नए अंदाज पर प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने उनकी उम्र का जिक्र करते हुए कहा कि 54 साल की उम्र में भी वह आज की अभिनेत्रियों को टक्कर देती नजर आ रही हैं।

    एक यूजर ने ममता के इस बदले हुए अंदाज पर प्रतिक्रिया देते हुए उनके संन्यास लेने की बात का जिक्र किया। वहीं दूसरे यूजर्स ने उनके नए रूप की तारीफ की। कुछ लोगों ने उनके पुराने फिल्मी दौर को याद करते हुए यह इच्छा भी जताई कि ममता दोबारा फिल्मों में नजर आएं।

    ममता कुलकर्णी का यह रूप इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पिछले कुछ समय में वह आध्यात्मिक जीवन को लेकर सुर्खियों में रही थीं। साल 2025 में कुंभ मेले के दौरान उन्होंने संन्यास लिया था। इस दौरान उन्होंने अपना पिंडदान किया और अपना नाम यमाई ममता नंद गिरी रखा था। उन्हें किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर भी बनाया गया था।

    हालांकि, फरवरी 2025 में ममता कुलकर्णी ने इस पद से इस्तीफा देने की जानकारी दी थी। इसके बाद अब उनका फिल्मी गानों पर डांस करते हुए आधुनिक अंदाज में नजर आना चर्चा का विषय बना हुआ है।

    ममता कुलकर्णी लंबे समय तक भारत से बाहर और फिल्मी दुनिया से दूर रही थीं। वह करीब 24 साल बाद 2024 में भारत लौटी थीं। उनके लंबे समय तक देश से बाहर रहने के दौरान उनका नाम ड्रग केस से जुड़े विकी गोस्वामी के साथ जोड़ा गया था। हालांकि, अभिनेत्री ने इस मामले से अपना कोई संबंध होने से इनकार किया था।

    भारत लौटने के बाद ममता धीरे-धीरे सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखाई देने लगी हैं। जयपुर फिल्म फेस्टिवल में उनकी मौजूदगी और मंच पर पुराने गानों पर डांस का वीडियो उनके फिल्मी दौर की यादें फिर से सामने ले आया है। एक ओर उनके आध्यात्मिक जीवन को लेकर चर्चा हुई, वहीं अब उनका यह डांस वीडियो उनके पुराने फिल्मी अंदाज की वजह से लोगों का ध्यान खींच रहा है।

    कार्यक्रम में ममता ने नए कलाकारों को पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया। इस दौरान उनके डांस और अलग अंदाज के कई वीडियो सामने आए, जिन पर यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रियाएं साझा कीं। इस तरह ममता कुलकर्णी एक बार फिर मनोरंजन जगत से जुड़ी चर्चाओं में नजर आ रही हैं।

  • जयपुर के खोह नागोरियान में पैंथर की हलचल से बढ़ी दहशत, वायरल वीडियो के बाद ग्रामीणों ने की निगरानी की मांग

    जयपुर के खोह नागोरियान में पैंथर की हलचल से बढ़ी दहशत, वायरल वीडियो के बाद ग्रामीणों ने की निगरानी की मांग

    नई दिल्ली । जयपुर के खोह नागोरियान इलाके में पैंथर की हलचल का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि रात के समय इलाके में पैंथर की गतिविधियां देखी गई हैं। इस बीच पैंथर की कथित मौजूदगी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद आसपास के लोगों में डर का माहौल बन गया है।

    स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, इलाके में पैंथर की आवाजाही पहले भी कई बार देखे जाने की बात सामने आती रही है। इस बार पैंथर की गतिविधि कैमरे में कैद होने का दावा किया जा रहा है। वीडियो के सामने आने के बाद ग्रामीणों ने इसकी जानकारी वन विभाग को दी है और क्षेत्र में सुरक्षा तथा निगरानी बढ़ाने की मांग की है।

    ग्रामीणों का कहना है कि आबादी वाले क्षेत्र के आसपास पैंथर की मौजूदगी चिंता का विषय है। रात के समय लोगों की आवाजाही और आसपास रहने वाले परिवारों की सुरक्षा को लेकर स्थानीय लोगों में आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों ने वन विभाग से संभावित पैंथर मूवमेंट वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां नियमित निगरानी रखने की मांग की है।

    स्थानीय लोगों ने इलाके में वन विभाग की गश्त बढ़ाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि संभावित गतिविधियों वाले स्थानों पर नजर रखी जाए, ताकि पैंथर की मौजूदगी और उसके आने-जाने के रास्तों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। इससे आबादी वाले क्षेत्र में पैंथर की आवाजाही की स्थिति पर नजर रखना आसान हो सकता है।

    पैंथर की कथित लगातार गतिविधियों को देखते हुए ग्रामीणों ने कैमरा ट्रैप लगाने की मांग भी की है। उनका कहना है कि कैमरा ट्रैप के माध्यम से इलाके में पैंथर की वास्तविक मौजूदगी और उसके मूवमेंट का पता लगाया जा सकता है। इससे वन विभाग को आगे की कार्रवाई के लिए जरूरी जानकारी मिल सकेगी।

    इसके अलावा ग्रामीणों ने पैंथर को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पैंथर आबादी के आसपास लगातार सक्रिय पाया जाता है तो उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग स्थिति का आकलन कर उचित कार्रवाई करे।

    वायरल वीडियो में रात के अंधेरे में पैंथर जैसी गतिविधि दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद इलाके में इसकी चर्चा बढ़ गई है। हालांकि, पैंथर की लगातार मौजूदगी और उसके वास्तविक मूवमेंट की स्थिति वन विभाग की निगरानी और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    फिलहाल खोह नागोरियान क्षेत्र में पैंथर की कथित हलचल को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों ने वन विभाग से जल्द निगरानी बढ़ाने, संभावित स्थानों पर कैमरा ट्रैप लगाने और जरूरत पड़ने पर पिंजरा लगाने की मांग की है। वन विभाग की ओर से की जाने वाली निगरानी और आगे की कार्रवाई से ही यह स्पष्ट होगा कि पैंथर इलाके में लगातार सक्रिय है या आसपास के वन क्षेत्र से आबादी की ओर आया है।

  • Miss Universe India 2026 का खिताब केरल की केजिया लिज मेजो ने जीता, वैष्णवी गणेश और अनुश्री सातवलेकर बनीं रनर-अप

    Miss Universe India 2026 का खिताब केरल की केजिया लिज मेजो ने जीता, वैष्णवी गणेश और अनुश्री सातवलेकर बनीं रनर-अप

    नई दिल्ली ।केरल की 19 वर्षीय केजिया लिज मेजो ने मिस यूनिवर्स इंडिया 2026 का प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम कर लिया है। जयपुर में आयोजित ग्रैंड फिनाले में देशभर से आईं प्रतिभागियों के बीच मुकाबले के बाद केजिया को विजेता घोषित किया गया। मिस यूनिवर्स इंडिया 2025 की विजेता मनिका विश्वकर्मा ने उन्हें ताज पहनाया। खिताब जीतने के बाद केजिया भावुक नजर आईं और उन्होंने इस उपलब्धि को अपने लिए बड़ी जिम्मेदारी बताया।

    जयपुर के जी-स्टूडियो में रविवार देर रात आयोजित फिनाले में प्रतिभागियों ने टैलेंट, आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और मंच पर अपनी प्रस्तुति के जरिए निर्णायकों को प्रभावित किया। प्रतियोगिता में देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंची सुंदरियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। अंतिम दौर में पहुंचीं प्रतिभागियों में केजिया लिज मेजो, वैष्णवी गणेश, तेजस्विनी श्रीवास्तव, अनुश्री सातवलेकर और अनुभा वशिष्ठ शामिल थीं।

    अंतिम परिणाम में तमिलनाडु की वैष्णवी गणेश ने फर्स्ट रनर-अप का स्थान हासिल किया। गुजरात की अनुश्री सातवलेकर सेकंड रनर-अप रहीं। इसके साथ ही केरल की केजिया लिज मेजो ने प्रतियोगिता का विजेता खिताब हासिल किया। इस जीत के साथ अब केजिया इस साल होने वाली 75वीं मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।

    खिताब जीतने के बाद केजिया ने कहा कि यह ताज उनके लिए केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने को गर्व और सम्मान का अवसर बताया। केजिया का कहना है कि वह इस मंच के माध्यम से भारत की विविधता, संस्कृति, प्रतिभा और नई पीढ़ी की शक्ति को दुनिया के सामने प्रस्तुत करना चाहती हैं।

    केजिया लिज मेजो की पहचान सिर्फ ब्यूटी पेजेंट तक सीमित नहीं है। वह कानून की छात्रा हैं और मॉडलिंग के साथ क्लासिकल डांस से भी जुड़ी हुई हैं। वह फिलहाल बेंगलुरु में कानून की पढ़ाई कर रही हैं और उनका संबंध कोच्चि से है। उनके माता-पिता के नाम मेजो अब्राहम और सुजा मेजो बताए गए हैं।

    केजिया ने वर्ष 2026 में मिस यूनिवर्स केरल का खिताब भी जीता था। इससे पहले वह मिस टीन इंटरनेशनल 2025 में फर्स्ट रनर-अप रह चुकी हैं। उन्होंने मिस टीन इंडिया का खिताब भी अपने नाम किया था और अंतरराष्ट्रीय टीन ब्यूटी पेजेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। कम उम्र में लगातार मिल रही सफलताओं ने उन्हें ब्यूटी पेजेंट की दुनिया में एक अलग पहचान दिलाई है।

    केजिया सोशल मीडिया पर भी सक्रिय हैं। वह इंस्टाग्राम पर अपनी तस्वीरें और वीडियो साझा करती हैं। इसके अलावा वह मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत विकास जैसे विषयों पर भी अपनी बात रखती हैं। सोशल मीडिया पर उनके हजारों फॉलोअर्स हैं और उनकी ऑनलाइन मौजूदगी लगातार चर्चा में रहती है।

    मिस यूनिवर्स इंडिया 2026 का ताज मिलने के बाद केजिया के सामने अब अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की चुनौती है। राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस सफलता के बाद वह भारत की ओर से मिस यूनिवर्स के वैश्विक मंच पर उतरेंगी। देशभर में अब उनके अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं।

  • निर्मला सीतारमण आज जयपुर में BRICS वित्त मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगी, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर होगा मंथन

    निर्मला सीतारमण आज जयपुर में BRICS वित्त मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगी, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर होगा मंथन

    नई दिल्ली ।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बुधवार को जयपुर में आयोजित BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की दो दिवसीय बैठक में शामिल होंगी। भारत की BRICS अध्यक्षता के तहत हो रही यह बैठक वैश्विक आर्थिक और वित्तीय चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में समूह के सभी 11 सदस्य देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक के गवर्नर हिस्सा लेंगे।

    जयपुर के रामबाग पैलेस में आयोजित होने वाली बैठक का उद्घाटन सत्र बुधवार सुबह 11:15 बजे शुरू होगा। इसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। आर्थिक विकास, वित्तीय उदारीकरण, जोखिम प्रबंधन और वैश्विक वित्तीय स्थिरता जैसे मुद्दे चर्चा के प्रमुख केंद्र में रहेंगे।

    भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा भी बैठक में हिस्सा लेने के लिए जयपुर पहुंच चुके हैं। उद्घाटन सत्र के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और आरबीआई गवर्नर सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं तथा केंद्रीय बैंकिंग से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगे।

    बैठक में प्रतिनिधि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में सामने आ रही चुनौतियों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सामने मौजूद अवसरों पर भी चर्चा करेंगे। निवेश बढ़ाने, वित्तीय सहयोग मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था को अधिक स्थिर बनाने से जुड़े विषयों पर सदस्य देशों के बीच विचारों का आदान-प्रदान होगा।

    जयपुर पहुंचने पर वित्त मंत्री का स्वागत राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने किया। बैठक के आयोजन को देखते हुए जयपुर में विदेशी प्रतिनिधियों के लिए विशेष कार्यक्रम भी तैयार किए गए हैं।

    दो दिवसीय बैठक गुरुवार दोपहर 12:30 बजे तक चलेगी। इस दौरान BRICS सदस्य देशों के प्रतिनिधि आर्थिक और वित्तीय क्षेत्र में आपसी सहयोग के संभावित रास्तों पर चर्चा करेंगे। बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल में निवेश, वित्तीय जोखिम और आर्थिक स्थिरता जैसे विषयों का महत्व लगातार बढ़ा है, ऐसे में बैठक को महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है।

    विदेशी प्रतिनिधियों को राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के लिए भी विशेष कार्यक्रम रखा गया है। बुधवार शाम पांच बजे सभी प्रतिनिधि जयपुर सिटी पैलेस का दौरा करेंगे। इस दौरान राजस्थान की संस्कृति, परंपराओं और विरासत को प्रदर्शित करने वाला सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

    BRICS वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की वार्षिक बैठक की शुरुआत करीब 18 वर्ष पहले वैश्विक वित्तीय संकट के दौर में हुई थी। समय के साथ यह बैठक वैश्विक आर्थिक और वित्तीय मामलों पर सदस्य देशों के बीच संवाद और सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बन गई है।

    जयपुर दूसरी बार इस बैठक की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले वर्ष 2021 में कोविड-19 महामारी के दौरान भी जयपुर में इस बैठक का आयोजन हुआ था। उस समय आर्थिक पुनरुद्धार, टीकाकरण, डिजिटल स्वास्थ्य, सामाजिक अवसंरचना और वित्तीय समावेशन जैसे मुद्दे प्रमुख चर्चा में रहे थे।

    2021 की बैठक में यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म से जुड़े विषय पर भी विचार-विमर्श हुआ था। इस बार बदलती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच वित्तीय स्थिरता, निवेश और सहयोग से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों की प्राथमिकताएं चर्चा के केंद्र में रहने की उम्मीद है।

    भारत की अध्यक्षता में हो रही यह बैठक ऐसे समय आयोजित हो रही है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई तरह की अनिश्चितताओं से गुजर रही है। ऐसे में BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों के बीच समन्वय बढ़ाने की कोशिशों पर बैठक का विशेष ध्यान रहेगा।

  • लंदन में नीलामी के लिए तैयार जयपुर राजघराने का ‘सुपरकंप्यूटर’, 25 करोड़ तक लग सकती है बोली

    लंदन में नीलामी के लिए तैयार जयपुर राजघराने का ‘सुपरकंप्यूटर’, 25 करोड़ तक लग सकती है बोली


    जयपुर। राजस्थान के शाही इतिहास और वैज्ञानिक विरासत से जुड़ा एक दुर्लभ खगोलीय यंत्र ‘एस्ट्रोलेब’ अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। 17वीं सदी का यह ऐतिहासिक उपकरण 29 अप्रैल को लंदन में नीलामी के लिए पेश किया जाएगा। विशेषज्ञ इसे उस दौर का ‘सुपरकंप्यूटर’ और ‘प्राचीन स्मार्ट डिवाइस’ बता रहे हैं।

    बताया जा रहा है कि यह यंत्र कभी जयपुर राजघराने के शाही संग्रह का हिस्सा था। सवाई मानसिंह द्वितीय के निधन के बाद यह महारानी गायत्री देवी के पास रहा और बाद में निजी संग्रह में शामिल हो गया। अब पहली बार इसे सार्वजनिक नीलामी में उतारा जा रहा है।

    आकार, बनावट और कीमत खास

    पीतल से निर्मित यह एस्ट्रोलेब आकार और उपयोगिता दोनों में विशेष माना जा रहा है। इसका वजन करीब 8.2 किलोग्राम और ऊंचाई लगभग 46 सेंटीमीटर है, जो सामान्य यंत्रों की तुलना में काफी बड़ा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार इसकी दुर्लभता और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इसकी कीमत 1.5 से 2.5 मिलियन पाउंड (करीब 15 से 25 करोड़ रुपये) तक जा सकती है।

    17वीं सदी का बहुउपयोगी यंत्र

    जानकारों के मुताबिक, यह यंत्र अपने समय में कई जटिल गणनाओं के लिए उपयोग किया जाता था। इसके माध्यम से सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तारों की स्थिति, इमारतों की ऊंचाई तथा कुओं की गहराई तक मापी जा सकती थी।

    इसके अलावा धार्मिक दिशा निर्धारण और पंचांग आधारित ज्योतिषीय गणनाओं में भी इसका उपयोग होता था।

    मुगलकालीन विरासत की झलक

    यह एस्ट्रोलेब 17वीं सदी की शुरुआत में लाहौर के प्रसिद्ध कारीगर कायम मुहम्मद और मुहम्मद मुकीम द्वारा तैयार किया गया था। इसकी विशेषता यह है कि इसमें तारों के नाम फारसी भाषा तथा उनके संस्कृत समकक्ष देवनागरी लिपि में अंकित हैं, जो उस दौर में विज्ञान और संस्कृति के अद्भुत संगम को दर्शाते हैं।

    वैश्विक स्तर पर बढ़ी दिलचस्पी

    इस यंत्र में 94 शहरों के अक्षांश-देशांतर और 38 तारों के संकेतक अंकित हैं, जिन्हें आज भी काफी सटीक माना जाता है। यही वजह है कि दुनिया भर के संग्रहालयों और निजी कलेक्टरों में इसे लेकर खास रुचि देखी जा रही है।

  • तेज लाउडस्पीकर से आमजन परेशान, जयपुर के परकोटा इलाके को लेकर विधानसभा में गूंजा मामला

    तेज लाउडस्पीकर से आमजन परेशान, जयपुर के परकोटा इलाके को लेकर विधानसभा में गूंजा मामला

    जयपुर।  राजस्थान की राजधानी जयपुर में मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकरों की तेज आवाज को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। बुधवार को राजस्थान विधानसभा के शून्यकाल के दौरान हवामहल विधायक बालमुकुंद आचार्य ने यह मुद्दा जोरदार तरीके से उठाते हुए परकोटा क्षेत्र की कई मस्जिदों में नियमों से अधिक तेज आवाज में चल रहे लाउडस्पीकरों पर आपत्ति जताई।

    विधायक ने सदन में कहा कि परकोटा इलाके में कुछ मस्जिदों पर बड़े और अधिक संख्या में लाउडस्पीकर लगाए गए हैं, जिनकी आवाज निर्धारित ध्वनि मानकों से कहीं अधिक है। इससे आसपास रहने वाले नागरिकों, विद्यार्थियों और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    नींद और पढ़ाई हो रही प्रभावित
    बालमुकुंद आचार्य ने बताया कि तेज आवाज के कारण स्थानीय लोगों की नींद प्रभावित हो रही है और विद्यार्थियों की पढ़ाई में भी व्यवधान आ रहा है। उन्होंने इसे आम नागरिकों के स्वास्थ्य और मौलिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताया।

    विधायक ने यह भी कहा कि कई बार स्थानीय लोग मस्जिद प्रबंधन से लाउडस्पीकर की आवाज कम करने का अनुरोध करते हैं, लेकिन अक्सर इस पर विवाद की स्थिति बन जाती है। इस संबंध में प्रशासन को पहले भी कई शिकायतें दी जा चुकी हैं, इसके बावजूद अब तक कोई ठोस और स्थायी कार्रवाई नहीं हो सकी है।

    रमजान के दौरान अतिरिक्त लाउडस्पीकरों पर चिंता
    विधायक ने विशेष रूप से रमजान माह के दौरान लगाए जाने वाले अतिरिक्त लाउडस्पीकरों पर चिंता जताई। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की कि लाउडस्पीकरों के उपयोग को लेकर स्पष्ट नीति बनाई जाए, जिसमें तय समय और कानूनी ध्वनि सीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।उन्होंने कहा कि यदि नियमों का उल्लंघन होता है तो प्रशासन को कानून के तहत कार्रवाई करते हुए ऐसे लाउडस्पीकरों को हटाना चाहिए।

    ‘यह धर्म नहीं, आमजन की शांति का मुद्दा’
    बालमुकुंद आचार्य ने सदन में स्पष्ट किया कि यह मामला किसी धर्म विशेष के विरोध से जुड़ा नहीं है, बल्कि आम जनता की शांति, स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता से संबंधित है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आमजन में असंतोष बढ़ सकता है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

    अन्य विधायकों ने भी जताई चिंता
    इस मुद्दे पर सदन में मौजूद अन्य विधायकों ने भी सहमति जताई। उन्होंने कहा कि जयपुर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के कई शहरी इलाकों में लाउडस्पीकरों की तेज आवाज एक गंभीर समस्या बन चुकी है। विधायकों ने सरकार से मांग की कि मौजूदा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए और आम लोगों की शिकायतों को प्राथमिकता दी जाए।

    गौरतलब है कि धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकरों की आवाज को लेकर पहले भी कई बार विवाद और मांगें सामने आती रही हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। विधायक बालमुकुंद आचार्य ने एक बार फिर प्रशासन से अपील की है कि कानून के दायरे में रहकर लाउडस्पीकरों की आवाज नियंत्रित की जाए, ताकि आम नागरिक बिना किसी परेशानी के सामान्य जीवन जी सकें।

  • फरवरी में घूमने की परफेक्ट लिस्ट: न ठंड की मार, न गर्मी की तपिश, ये 6 जगहें बना देंगी ट्रिप यादगार

    फरवरी में घूमने की परफेक्ट लिस्ट: न ठंड की मार, न गर्मी की तपिश, ये 6 जगहें बना देंगी ट्रिप यादगार



    नई दिल्ली। अगर भारत में घूमने का सबसे परफेक्ट महीना कोई है, तो वह फरवरी है। इस दौरान सर्दी धीरे-धीरे विदा लेने लगती है, गर्मी आने में अभी समय होता है और मौसम एकदम सुहावना रहता है। यही वजह है कि फरवरी में नॉर्थ से साउथ तक भारत की कई जगहें घूमने के लिए बेस्ट बन जाती हैं। साथ ही इस महीने देशभर में कला, साहित्य, संगीत और संस्कृति से जुड़े बड़े आयोजन भी होते हैं, जो यात्रा को और खास बना देते हैं।
    1. जयपुर – इतिहास और रंगों की रॉयल झलक
    फरवरी में जयपुर की सुबहें हल्की ठंडक लिए होती हैं और दिन धूप से भरे रहते हैं। आमेर किला, सिटी पैलेस, हवा महल और जंतर-मंतर घूमने का यही सबसे अच्छा वक्त है।
    इसी महीने होने वाला जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल और जयपुर आर्ट वीक शहर को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाते हैं। हेरिटेज वॉक, लोक संगीत और हस्तशिल्प जयपुर को एक यादगार अनुभव बना देते हैं।

    2. दिल्ली – इतिहास, संस्कृति और आधुनिकता का संगम
    फरवरी की हल्की ठंड दिल्ली को एक्सप्लोर करने के लिए परफेक्ट बना देती है। लाल किला, कुतुब मीनार, इंडिया गेट और लोधी गार्डन इस मौसम में बेहद खूबसूरत लगते हैं।
    इंडिया आर्ट फेयर, म्यूजियम्स और कैफे कल्चर दिल्ली को सांस्कृतिक रूप से जीवंत बना देते हैं। पुरानी दिल्ली की गलियों में घूमना और स्ट्रीट फूड का मजा लेना फरवरी की खास पहचान है।

    3. अहमदाबाद – विरासत और स्वाद का शहर
    गुजरात का अहमदाबाद फरवरी में घूमने के लिए शानदार है। साबरमती रिवरफ्रंट, ऐतिहासिक पोल्स, बावड़ियां और साबरमती आश्रम शहर की ऐतिहासिक पहचान को दर्शाते हैं।
    उत्तरायण के बाद भी उत्सव का माहौल बना रहता है और उंधियू जैसे पारंपरिक गुजराती व्यंजन स्वाद को यादगार बना देते हैं।

    4. मुंबई – समुद्र, कला और संगीत
    फरवरी में मुंबई की समुद्री हवा मौसम को बेहद खुशनुमा बना देती है। कला घोड़ा आर्ट्स फेस्टिवल और महिंद्रा ब्लूज़ फेस्टिवल शहर को रचनात्मक ऊर्जा से भर देते हैं।
    आर्ट डेको इमारतें, गैलरी, ईरानी कैफे और मरीन ड्राइव की शामें मुंबई को घूमने के लिए खास बनाती हैं।

    5. ओडिशा – संस्कृति और प्रकृति का अनोखा मेल
    फरवरी में ओडिशा का मौसम बेहद सुखद रहता है। कोणार्क डांस एंड म्यूजिक फेस्टिवल सूर्य मंदिर की पृष्ठभूमि में शास्त्रीय नृत्य और संगीत का अद्भुत अनुभव देता है।
    चिलिका झील में हजारों प्रवासी पक्षी दिखाई देते हैं, जो नेचर और फोटोग्राफी लवर्स के लिए किसी जन्नत से कम नहीं।

    6. काजीरंगा – वाइल्डलाइफ का रोमांच
    असम का काजीरंगा नेशनल पार्क फरवरी में घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। यहां सफारी के दौरान एक-सींग वाला गैंडा, हाथी, हिरण और कभी-कभी बाघ भी देखने को मिल जाते हैं।ठंड कम होने के कारण जंगल सफारी आरामदायक और रोमांचक दोनों होती है।
    फरवरी यात्रा के लिए ऐसा महीना है, जहां मौसम, संस्कृति और प्रकृति का परफेक्ट बैलेंस मिलता है। अगर आप सुकून, रोमांस या एडवेंचर की तलाश में हैं, तो ये 6 जगहें आपकी ट्रैवल बकेट लिस्ट में जरूर होनी चाहिए।

  • जयपुर में नगर निगम की सख्त कार्रवाई: किशनपोल जोन में पांच अवैध भवन और दुकानें सीज

    जयपुर में नगर निगम की सख्त कार्रवाई: किशनपोल जोन में पांच अवैध भवन और दुकानें सीज


    जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में नगर निगम ने शहर में बढ़ते अवैध निर्माणों के खिलाफ शनिवार को सख्त कार्रवाई की। किशनपोल जोन में नगर निगम की टीम ने बिना अनुमति और अवैध तरीके से निर्माण किए जा रहे पांच भवन और दुकानों को सीज कर दिया। इस कार्रवाई का नेतृत्व किशनपोल जोन के राजस्व अधिकारी सुनील कुमार ने किया, जबकि नगर निगम उपायुक्त विजेन्द्र सिंह ने इसे सीधे निर्देशित किया।

    नगर निगम के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि इन भवनों और दुकानों में निर्माण कार्य स्वीकृत नक्शे और उपविधियों के विपरीत चल रहा था। इससे पहले संबंधित भवन मालिकों और दुकानदारों को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन वे निर्माण रोकने के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे थे। ऐसे में निगम ने कठोर कदम उठाते हुए अवैध निर्माण को सीज करने का निर्णय लिया।

    इस दौरान निगम टीम ने पुलिस जाब्ता के साथ संयुक्त निरीक्षण किया और निर्माण स्थल पर अवैध गतिविधियों को तुरंत रोका। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई नगर निगम की शहरी नियोजन और सुरक्षा मानकों के पालन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नगर निगम का कहना है कि शहर में अवैध निर्माण की रोकथाम के लिए आगे भी नियमित निरीक्षण और सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

    विशेष रूप से नगर निगम ने चेतावनी दी है कि शहर में बिना अनुमति निर्माण करने वालों के खिलाफ भविष्य में और भी कड़े कदम उठाए जाएंगे। इसके साथ ही नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे ऐसे मामलों की सूचना तुरंत नगर निगम को दें ताकि समय रहते अवैध निर्माण रोका जा सके। किशनपोल जोन में यह कार्रवाई नगर निगम की शहर में अवैध निर्माण पर नजर रखने की नीति को दर्शाती है। निगम का लक्ष्य है कि जयपुर शहर का शहरी ढांचा नियामक ढांचे के अनुसार सुरक्षित और सुव्यवस्थित रहे।

  • जयपुर के खेतों में फैक्ट्री का जहर, मिट्टी हो रही काली, सब्जियां बन गईं 'स्लो पॉइजन'

    जयपुर के खेतों में फैक्ट्री का जहर, मिट्टी हो रही काली, सब्जियां बन गईं 'स्लो पॉइजन'


    जयपुर । जयपुर(Jaipur) में फैक्ट्रियों से निकल रहा केमिकल (Chemical)और ब्लीच मिला पानी लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है. सवाल यह है कि जो हरी सब्जियां(green vegetables) और फल लोग सेहत के लिए खाते हैं, क्या वे सच में उन्हें स्वस्थ बना रहे हैं या धीरे-धीरे बीमार कर रहे हैं.

    अगर इन सब्जियों और फलों की खेती ऐसे पानी से हो रही हो, जिसमें फैक्ट्रियों का जहरीला कचरा और रसायन मिले हों, तो इसका सीधा असर आम लोगों की सेहत पर पड़ता है. ऐसा पानी किडनी फेल होने, दिल की बीमारियों और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है.

    स्लो पॉइजन का काम कर रही सब्जियां
    जयपुर के सांगानेर इलाके में सांगानेर से चांदलई तक करीब 20 किलोमीटर के दायरे में दो दर्जन से ज्यादा गांव आते हैं. यहां कपड़ों की रंगाई, छपाई और ब्लीच का काम करने वाली फैक्ट्रियां आसपास के जल स्रोतों में केमिकल और ब्लीच वाला पानी छोड़ रही हैं. इससे पूरे इलाके में भारी प्रदूषण फैल गया है. जानकारी के मुताबिक, इस दूषित पानी से उगाई गई फसलें धीमे जहर की तरह काम कर रही हैं, जो समय के साथ गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती हैं.

    काली हो चुकी है खेतों की मिट्टी
    मीडिया की टीम जब जयपुर की सांगानेर तहसील के शिकारपुरा और मुहाना समेत कई इलाकों में पहुंची, तो वहां काले रंग का पानी खेतों में पंप किया जा रहा था. इन खेतों में पत्तागोभी, बैंगन, पालक और लगभग हर तरह की मौसमी सब्जियों की खेती हो रही थी. कई जगहों पर इस गंदे पानी की वजह से मिट्टी का रंग भी ग्रे और काला हो चुका है. किसान सीताराम का कहना है कि इससे खाने वाली सभी फसलों को नुकसान हो रहा है, लेकिन जांच के लिए अब तक कोई अधिकारी नहीं आया है.

    ‘कई साल से छोड़ा जा रहा पानी, कोई कार्रवाई नहीं’
    जानकारी यह भी है कि कुछ फैक्ट्रियों में गंदे पानी को साफ करने की व्यवस्था जरूर है, लेकिन ज्यादातर फैक्ट्रियां बिना किसी सफाई के केमिकल और रंग मिला पानी सीधे नालों और जल स्रोतों में छोड़ रही हैं. इसका असर सीधे खेतों और फसलों पर पड़ रहा है.

    स्थानीय लोगों का कहना है कि सालों से फैक्ट्रियों का जहरीला पानी इन खेतों में छोड़ा जा रहा है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. एक फैक्ट्री कर्मचारी सिकंदर का दावा है कि उनके यहां गंदे पानी को साफ करने की व्यवस्था है और फिल्टर के बाद ही पानी बाहर छोड़ा जाता है. हालांकि, जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयान कर रहे हैं.