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  • भारत की कूटनीति में अक्टूबर के आखिरी सप्ताह बड़ा बदलाव, अमेरिका से यूरोप तक कई अहम मुलाकातों ने बढ़ाई हलचल|

    भारत की कूटनीति में अक्टूबर के आखिरी सप्ताह बड़ा बदलाव, अमेरिका से यूरोप तक कई अहम मुलाकातों ने बढ़ाई हलचल|

    नई दिल्ली ।अक्टूबर 2026 का आखिरी सप्ताह भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण रहा। 25 से 31 अक्टूबर के बीच भारत ने यूरोप, पश्चिम एशिया, उत्तरी अमेरिका और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों के साथ कूटनीतिक संपर्क तेज किए। इस दौरान उच्चस्तरीय यात्राओं, द्विपक्षीय बैठकों और बहुपक्षीय सम्मेलनों के जरिए व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई। सप्ताह के दौरान भारत ने पुराने साझेदारों के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने के साथ नए सहयोग की संभावनाओं पर भी ध्यान केंद्रित किया।

    इस सप्ताह की सबसे महत्वपूर्ण गतिविधि 30 और 31 अक्टूबर को अमेरिका के अटलांटा में आयोजित जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक रही। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने वैश्विक संघर्षों, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा।

    जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों का समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीति और बातचीत के माध्यम से तलाशा जाना चाहिए। उन्होंने युद्धों के व्यापक आर्थिक प्रभावों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, किसी क्षेत्र में होने वाला संघर्ष केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खाद्य आपूर्ति, ऊर्जा और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को प्रभावित करता है। इसका असर विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के विकासशील देशों पर पड़ता है।

    अटलांटा में ही क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक भी हुई। इसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक समन्वय से जुड़े विषयों पर चर्चा की। इस बैठक को आगामी क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना गया।

    जी-20 बैठक के दौरान जयशंकर ने कई देशों के प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय मुलाकातें कीं। 30 अक्टूबर को उन्होंने यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास से बातचीत की। इस दौरान यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

    कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ हुई मुलाकात में दोनों देशों के बीच सहयोग की प्रगति की समीक्षा की गई। वहीं, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ भी बातचीत हुई। इन संपर्कों में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और भारत के बीच प्रौद्योगिकी एवं नवाचार साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।

    जयशंकर ने अर्जेंटीना, ब्राजील, मैक्सिको और जर्मनी के विदेश मंत्रियों से भी मुलाकात की। अर्जेंटीना के साथ व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज, रक्षा और परमाणु सहयोग जैसे विषय चर्चा में रहे। मैक्सिको के साथ बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों को और गति देने पर जोर दिया गया। इन बैठकों के जरिए भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के अवसर तलाशे।

    इससे पहले 25 से 28 अक्टूबर तक लिकटेंस्टीन के वंशानुगत राजकुमार एलोइस अपनी पत्नी राजकुमारी सोफी के साथ भारत की राजकीय यात्रा पर आए थे। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद हाउस में उनसे मुलाकात की। बातचीत में व्यापार, निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच हुए समझौते के तहत आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाना भी प्रमुख विषय रहा।

    यूरोप के साथ संबंधों को लेकर ऑस्ट्रिया की विदेश मंत्री बीट माइनल-राइजिंगर की भारत यात्रा भी महत्वपूर्ण रही। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उनकी बातचीत में व्यापार, प्रौद्योगिकी और यूरोपीय देशों के साथ सहयोग बढ़ाने से जुड़े मुद्दे शामिल रहे। इसके साथ ही खाड़ी देशों के साथ भारत के बढ़ते संपर्क भी व्यापक कूटनीतिक गतिविधियों का हिस्सा रहे।

    पूरे सप्ताह की गतिविधियों से भारत की विदेश नीति की तीन प्रमुख प्राथमिकताएं सामने आईं। पहली, अमेरिका, यूरोप और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख साझेदारों के साथ रणनीतिक संवाद बनाए रखना। दूसरी, व्यापार, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते तलाशना। तीसरी, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों के बीच बातचीत तथा कूटनीतिक समाधान को बढ़ावा देना।

    इस तरह अक्टूबर का अंतिम सप्ताह भारत के लिए केवल बैठकों और यात्राओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक मंचों पर अपनी प्राथमिकताएं रखने और विभिन्न देशों के साथ साझेदारी को आगे बढ़ाने का अवसर भी बना।

  • आइवरी कोस्ट के राष्ट्रपति से मिले विदेश मंत्री जयशंकर, रक्षा और कृषि में सहयोग बढ़ाने पर हुई चर्चा

    आइवरी कोस्ट के राष्ट्रपति से मिले विदेश मंत्री जयशंकर, रक्षा और कृषि में सहयोग बढ़ाने पर हुई चर्चा


    अबिदजान।
    विदेश मंत्री एस जयशंकर (External Affairs Minister S. Jaishankar) ने कहा कि भारत (India) और आइवरी कोस्ट (Ivory Coast) की साझेदारी आपसी सम्मान पर आधारित है। दोनों देशों की विकास और समृद्धि के लिए साझा प्रतिबद्धता है। जयशंकर ने पश्चिम अफ्रीकी देश की अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति अलासाने औटारा (President Alassane Ouattara) से मुलाकात की। वह तीन अफ्रीकी देशों की यात्रा पर हैं। इसमें घाना, आइवरी कोस्ट और इथियोपिया शामिल हैं।

    जयशंकर बुधवार को घाना से आइवरी कोस्ट पहुंचे थे। यह उनकी तीन देशों की यात्रा का दूसरा पड़ाव है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, आइवरी कोसट के राष्ट्रपति अलासाने औटारा से मुलाकात कर सम्मानित महसूस किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत शुभकामनाएं उन्हें दीं।

    विदेश मंत्री ने कहा, भारत-आइवरी कोस्ट साझेदारी आपसी सम्मान और विकास तथा समृद्धि के लिए साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है। उन्होंने राष्ट्रपति औटारा को ‘मजबूत, लंबे समय तक चलने वाली और दोनों के लिए फायदेमंद साझेदारी के अपने दृष्टिकोण को साझा करने’ के लिए धन्यवाद दिया।


    रक्षा सहयोग पर क्या हुई बात?

    बुधवार को जयशंकर ने अबिदजान में आइवरी कोस्ट के उप प्रधानमंत्री तेने बिराहिमा औटारा से भी मुलाकात की। दोनों ने दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग पर चर्चा की। बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया पर लिखा, हमने आपसी भरोसे, क्षमता निर्माण और साझा हितों पर आधारित अपने बढ़ते रक्षा सहयोग पर बात की।

    उन्होंने कहा, हमने रक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग को और बढ़ाने के अवसरों पर विचार साझा किए। इसमें प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और संस्थागत स्तर पर बढ़े हुए आदान-प्रदान के जरिए सहयोग शामिल है।

    औटारा आइवरी कोस्ट के रक्षा मंत्री भी हैं। उन्होंने कहा कि जयशंकर के साथ बातचीत आइवरी कोस्ट और भारत के बीच सहयोग मजबूत करने पर केंद्रित रही। औटारा ने सोशल मीडिया पर लिखा, यह बैठक शांति, सुरक्षा और विकास के लिए रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की हमारी साझा प्रतिबद्धता को दोहराती है।


    व्यापार और स्वास्थ्य पर भी चर्चा

    जयशंकर ने आइवरी कोस्ट की विदेश मामलों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की राज्य मंत्री नियाले काबा से भी बातचीत की। इसमें दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई। इसमें व्यापार, बुनियादी ढांचा, कृषि और स्वास्थ्य सेवा पर खास ध्यान रहा। जयशंकर ने कहा कि काबा के साथ भारत-आइवरी कोस्ट साझेदारी को आगे बढ़ाने पर ‘व्यापक चर्चा’ हुई। इसमें व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचा, कृषि, स्वास्थ्य सेवा और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध शामिल हैं।

    उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया पर कहा, मैंने इस बात पर जोर दिया कि लोगों को केंद्र में रखकर होने वाला हमारा सहयोग कोट द’आइवोर की प्राथमिकताओं के अनुसार आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने बहुपक्षीय मंचों पर अपने सहयोग को और गहरा करने पर भी चर्चा की।


    अफ्रीका में क्षमता निर्माण पर जोर

    जयशंकर ने बुधवार को आइवरी कोस्ट में भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग यानी आईटीईसी के पूर्व छात्रों से भी बातचीत की। उन्होंने कहा कि भारत की विकास साझेदारी हमेशा से अफ्रीका के साथ उसके संबंधों का अहम हिस्सा रही है। उन्होंने कहा कि भारत का सहयोग उसके अफ्रीकी साझेदारों की जरूरतों और प्राथमिकताओं के अनुसार होना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग यानी आईटीईसी कार्यक्रम 1964 में शुरू हुआ था। यह दूसरे देशों के साथ क्षमता निर्माण और सहयोग के लिए भारत के सबसे महत्वपूर्ण मंचों में से एक बन गया है। जयशंकर ने आइवरी कोस्ट में भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी बातचीत की।

    उनकी यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत अफ्रीकी देशों के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत करना चाहता है। भारत वैश्विक दक्षिण के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। साथ ही व्यापार और निवेश से लेकर क्षमता निर्माण, रक्षा और स्वास्थ्य सेवा तक कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

  • UN महासभा : कई देशों के प्रतिनिधियों से मिले जयशंकर…, ईरान-रूस के समकक्षों से अलग से की मुलाकात

    UN महासभा : कई देशों के प्रतिनिधियों से मिले जयशंकर…, ईरान-रूस के समकक्षों से अलग से की मुलाकात

    न्यूयार्क। विदेश मंत्री एस. जयशंकर (External Affairs Minister S. Jaishankar) ने शुक्रवार को ईरान और रूस (Iran and Russia) के अपने समकक्षों से मुलाकात की, जिनके साथ द्विपक्षीय मुद्दों, ब्रिक्स समूह में सहयोग और खाड़ी संघर्ष समेत विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। जयशंकर (Jaishankar) ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Russian Foreign Minister Sergey Lavrov) से मुलाकात की और द्विपक्षीय मुद्दों के साथ-साथ ब्रिक्स समूह में सहयोग पर चर्चा की। जयशंकर ने ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के इस समूह का जिक्र करते हुए कहा कि आज रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ सकारात्मक बैठक हुई। कई मौजूदा मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। द्विपक्षीय संबंधों और ब्रिक्स में सहयोग की भी समीक्षा की।

    भारत ने इस महीने की शुरुआत में ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी। इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने हिस्सा लिया था। जयशंकर ने यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र के इतर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ हुई बातचीत उपयोगी रही। हमने खाड़ी संघर्ष से जुड़े ताजा घटनाक्रम पर चर्चा की।

    विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को एक पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल पर कड़ा जवाब दिया, जिसने उनसे आतंकवाद से जुड़ा सवाल पूछा था। यहां पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल का कड़ा जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा कि एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है। आप तो बोलो ही मत। जयशंकर और लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेसोलो न्यंती ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पोत परिवहन और समुद्री कर्मियों की सुरक्षा पर बने ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स’ के बारे में संवाददाताओं को संबोधित किया।

    उनके संबोधन के बाद, पाकिस्तानी पत्रकार ने खड़े होकर जयशंकर से चिल्लाते हुए पूछा कि आपकी सरकार पाकिस्तान में आतंकवाद को प्रायोजित करना कब बंद करेगी? संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने पाकिस्तानी पत्रकार से कहा कि आपने अपना जवाब सुन लिया है। आपने अपना जवाब साफ-साफ सुन लिया है। गुरुवार को, जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ संयुक्त राष्ट्र भवन में दाखिल हो रहे थे, तो एक भारतीय पत्रकार ने उनसे पूछा था कि आप आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेंगे?

  • ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत का ट्रेड प्लान, जयशंकर बोले- कारोबार के लिए स्थिर, पारदर्शी और भरोसेमंद माहौल जरूरी

    ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत का ट्रेड प्लान, जयशंकर बोले- कारोबार के लिए स्थिर, पारदर्शी और भरोसेमंद माहौल जरूरी


    नई दिल्ली ।
    ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत ने सदस्य देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए स्थिर, पारदर्शी और भरोसेमंद कारोबारी माहौल बनाने पर जोर दिया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में आर्थिक गतिविधियों और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए देशों के बीच सहयोग बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच मजबूत सप्लाई चेन तैयार करने और अलग-अलग भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने की दिशा में काम करने की बात कही।

    एस जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स अपनी सदस्यता, एजेंडे और सहयोग के तरीकों के लिहाज से लगातार विकसित हो रहा है। ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में अस्थिरता और अनिश्चितता बनी हुई है, सदस्य देशों के लिए आर्थिक सहयोग को मजबूत करना महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने कहा कि दुनिया बड़े राजनीतिक और आर्थिक बदलावों के दौर से गुजर रही है और जटिल परिस्थितियां वैश्विक व्यवस्था की पहचान बन गई हैं।

    विदेश मंत्री के अनुसार, ब्रिक्स देशों के लिए आर्थिक गतिविधियों और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने का अर्थ अपनी आत्मनिर्भरता बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े और प्रतिस्पर्धी बने रहते हुए आर्थिक झटकों को सहने की क्षमता को मजबूत करना है। इसके लिए कारोबारी व्यवहार को बाजार के वास्तविक सिद्धांतों के अनुरूप बनाए रखना और व्यापारिक साझेदारियों में भरोसे को बढ़ाना जरूरी है।

    उन्होंने विविध व्यापारिक संबंधों, पारदर्शी व्यापार और निवेश व्यवस्था तथा ऐसे कारोबारी वातावरण की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसका अनुमान लगाया जा सके। उनके मुताबिक, कारोबारियों के लिए स्पष्ट और भरोसेमंद परिस्थितियां तैयार होने से उन्हें नए साझेदार तलाशने, नए बाजारों तक पहुंच बनाने और अलग-अलग देशों की क्षमताओं को व्यावहारिक कारोबारी साझेदारी में बदलने में मदद मिलेगी।

    जयशंकर ने ब्रिक्स देशों के बीच आपूर्ति नेटवर्क को जोड़ने की जरूरत भी बताई। मजबूत सप्लाई चेन तैयार होने से सदस्य देशों के कारोबारियों के लिए आपसी व्यापार और सहयोग के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि देशों को अपनी क्षमताओं को व्यावहारिक कारोबारी साझेदारी में बदलने के लिए समन्वित प्रयास करने चाहिए।

    व्यापार और निवेश में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ निष्पक्ष बाजार व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। भारत की ओर से ब्रिक्स देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में विविधता लाने और आर्थिक सहयोग को अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत बताई गई। इसके साथ ही सदस्य देशों की भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ने का सुझाव भी दिया गया।

    भारत नई दिल्ली में शनिवार और रविवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। ब्रिक्स में शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को इसमें शामिल किया गया। इसके बाद 2025 में इंडोनेशिया भी संगठन का सदस्य बना।

    ब्रिक्स के विस्तार के साथ संगठन के भीतर व्यापार और निवेश सहयोग का दायरा भी बढ़ा है। ऐसे में भारत ने सदस्य देशों के कारोबारियों के लिए अधिक बाजारों तक पहुंच, बेहतर सप्लाई नेटवर्क, पारदर्शी व्यापार व्यवस्था और भरोसेमंद कारोबारी माहौल को महत्वपूर्ण आधार के रूप में सामने रखा है। आर्थिक अनिश्चितता के दौर में इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को सदस्य देशों की आर्थिक क्षमता मजबूत करने से जोड़ा गया है।

  • ब्रिक्स बिजनेस फोरम में पीयूष गोयल और एस. जयशंकर ने व्यापार नियम सरल करने, बाजार खोलने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की बात कही

    ब्रिक्स बिजनेस फोरम में पीयूष गोयल और एस. जयशंकर ने व्यापार नियम सरल करने, बाजार खोलने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की बात कही

    नई दिल्ली । दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम की बैठक में भारत ने ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बढ़ाने और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बदलते वैश्विक व्यापारिक और राजनीतिक माहौल के बीच सदस्य देशों के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने को महत्वपूर्ण बताया।

    बैठक के दौरान पीयूष गोयल ने कहा कि ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्था में व्यापार की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि ब्रिक्स देशों में दुनिया की करीब आधी आबादी रहती है और ये देश वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। दुनिया के कुल व्यापार में भी ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत बताई गई।

    गोयल ने भारत की व्यापारिक क्षमताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत बड़ी मात्रा में इंजीनियरिंग सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स दूसरे देशों को भेजता है। दवाओं के क्षेत्र में भी भारत की मजबूत स्थिति है और वह ब्रिक्स देशों को आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने वाला भरोसेमंद देश बन सकता है।

    केंद्रीय मंत्री ने ब्रिक्स के सदस्य और साझेदार देशों से अपने बाजारों तक पहुंच आसान बनाने की अपील की। उनका कहना था कि केवल टैक्स कम करने से व्यापार में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होगी। इसके साथ ही सामान के आयात-निर्यात से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं को भी सरल बनाने की आवश्यकता है।

    गोयल ने कहा कि कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए सामान की मंजूरी की प्रक्रिया में कम समय लगना चाहिए। उनका मानना है कि यदि व्यापार से जुड़ी प्रक्रियाएं आसान होंगी और मंजूरी में तेजी आएगी तो कंपनियों के लिए अलग-अलग ब्रिक्स देशों के बाजारों में कारोबार करना अधिक सुविधाजनक हो सकता है।

    बैठक में सप्लाई चेन को मजबूत बनाने का मुद्दा भी प्रमुख रहा। गोयल ने कच्चे माल और जरूरी खनिजों के लिए अलग-अलग देशों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने की जरूरत बताई। बदलते वैश्विक हालात के बीच आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत और अधिक भरोसेमंद बनाने को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।

    विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी ब्रिक्स देशों के बीच मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के संस्थागत सहयोग के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं और यह संगठन के लिए महत्वपूर्ण समय है। उनके अनुसार, इन वर्षों में ब्रिक्स के सदस्य, इसके काम और चर्चा के मुद्दों में बदलाव आया है।

    जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय राजनीतिक तनाव, महामारी और मौसम में बदलाव जैसी कई बड़ी चुनौतियों से गुजर रही है। इन परिस्थितियों का असर कारोबार पर भी पड़ रहा है। ऐसे समय में देशों को तेजी से बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को तैयार करना होगा।

    विदेश मंत्री ने डिजिटल तकनीक के बढ़ते महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नई तकनीक कारोबार करने के तरीकों को बदल रही है। डिजिटल सुविधाओं के विस्तार से कंपनियों का काम तेजी से हो सकता है और उत्पादन बढ़ाने के साथ आर्थिक विकास के नए अवसर भी सामने आ सकते हैं।

    बैठक में भारत का मुख्य संदेश ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने पर केंद्रित रहा। बाजारों तक पहुंच सरल करने, व्यापार नियमों को सुगम बनाने, सामान की मंजूरी में तेजी लाने और सप्लाई चेन मजबूत करने को आपसी व्यापार बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

  • रूसी तेल खरीद पर जयशंकर का स्पष्ट रुख, बोले युद्ध ऊर्जा कारोबार से नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति से खत्म होगा

    रूसी तेल खरीद पर जयशंकर का स्पष्ट रुख, बोले युद्ध ऊर्जा कारोबार से नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति से खत्म होगा

    नई दिल्ली ।विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर भारत का रुख एक बार फिर स्पष्ट करते हुए कहा है कि यूक्रेन युद्ध का समाधान किसी देश के तेल खरीदने या नहीं खरीदने से नहीं निकलेगा। उन्होंने कहा कि करीब पांचवें वर्ष में पहुंच चुका यह संघर्ष संवाद, कूटनीति और गंभीर बातचीत के जरिए ही समाप्त हो सकता है।

    कीव में गुरुवार को जयशंकर ने कहा कि भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है। करीब 1.4 अरब आबादी वाले देश के लिए पर्याप्त और सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन का अपना दृष्टिकोण है और भारत उसका सम्मान करता है, लेकिन युद्ध खत्म करने का रास्ता केवल तेल खरीदने या रोकने से नहीं निकल सकता।

    अमेरिका की ओर से रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर संभावित प्रतिबंध या अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने के सवाल पर भी विदेश मंत्री ने भारत की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि संघर्ष को समाप्त करने के लिए उन उपायों पर ध्यान देना जरूरी है, जो सीधे शांति और बातचीत की दिशा में आगे बढ़ते हों।

    जयशंकर ने कहा कि रूस से तेल, खनिज, धातु, एल्यूमिना या उर्वरक खरीदना अथवा नहीं खरीदना युद्ध का समाधान नहीं है। उनके मुताबिक वास्तविक समाधान बातचीत के जरिए ही संभव है और भारत दोनों पक्षों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करने की अपनी नीति पर कायम है।

    रूस और यूक्रेन के बीच 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से भारत की रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिका और यूरोपीय देशों की ओर से सवाल उठाए जाते रहे हैं। भारत ने लगातार कहा है कि उसकी प्राथमिकता अपने नागरिकों के लिए ऊर्जा की उपलब्धता और उचित कीमत सुनिश्चित करना है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलाव के बीच रूसी तेल भारत के लिए एक व्यावहारिक ऊर्जा विकल्प भी बना है।

    जयशंकर इन दिनों तीन दिवसीय यूक्रेन और पोलैंड यात्रा पर हैं। कीव में उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की और विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा से मुलाकात की। यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करना है।

    उन्होंने भारत की उस नीति को भी दोहराया कि यह युद्ध का युग नहीं है और किसी संघर्ष का स्थायी समाधान युद्ध के मैदान में नहीं खोजा जा सकता। भारत दोनों पक्षों के साथ संपर्क बनाए हुए है। जयशंकर ने हाल में मॉस्को में हुई उच्चस्तरीय बातचीत के बाद अब कीव में भी सीधे संवाद किया है।

    विदेश मंत्री ने हाल में कीव पर हुए हमले का उल्लेख करते हुए वहां हुई भारतीय नागरिक की मौत पर भी शोक जताया। उन्होंने कहा कि संघर्ष में जान गंवाने वाले सभी लोगों के परिवारों के प्रति भारत की संवेदनाएं हैं। इस घटना ने यूक्रेन में मौजूद भारतीय नागरिकों और वहां काम करने वाले लोगों की सुरक्षा के मुद्दे को भी महत्वपूर्ण बना दिया है।

    जयशंकर ने यूक्रेनी विदेश मंत्री के साथ बातचीत में काला सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि भारतीय नाविक विभिन्न देशों के जहाजों पर काम करते हैं और ऐसे हमलों से उनकी सुरक्षा प्रभावित होती है।

    भारत ने काला सागर में नागरिक और व्यावसायिक जहाजों पर किसी भी पक्ष की ओर से किए जाने वाले हमलों को अस्वीकार्य बताया है। समुद्री मार्ग बाधित होने से ईंधन, उर्वरक और खाद्य सामग्री की आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है। भारत का जोर इसलिए युद्धविराम, संवाद और कूटनीतिक समाधान के साथ नागरिकों तथा वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर भी बना हुआ है।

  • जयशंकर और मंटुरोव की बैठक में भारत रूस व्यापार, ऊर्जा, परमाणु, तकनीक और कनेक्टिविटी सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति

    जयशंकर और मंटुरोव की बैठक में भारत रूस व्यापार, ऊर्जा, परमाणु, तकनीक और कनेक्टिविटी सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति


    नई दिल्ली ।
    भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों में नई दिशा देने के उद्देश्य से व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग से जुड़े अंतर-सरकारी आयोग की 27वीं बैठक मॉस्को में हुई। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने बैठक की सह-अध्यक्षता की। इस दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग से जुड़े अहम दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए और कई प्रमुख क्षेत्रों में व्यावहारिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

    दो दिवसीय रूस यात्रा पर पहुंचे जयशंकर ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव से मुलाकात की। बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि मौजूदा जटिल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद भारत और रूस के संबंधों में लगातार मजबूती और अनुकूलन क्षमता दिखाई दी है। दोनों देशों के बीच आपसी हित और विश्वास को रणनीतिक साझेदारी का आधार बताया गया।

    जयशंकर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और रूस के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2021-22 में करीब 13 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार 2025-26 में बढ़कर लगभग 60 अरब डॉलर तक पहुंच गया। व्यापार में यह वृद्धि दोनों देशों के आर्थिक संबंधों की क्षमता को दर्शाती है, लेकिन इसके साथ व्यापार असंतुलन भी काफी बढ़ा है।

    विदेश मंत्री ने बताया कि व्यापार घाटे का अंतर करीब 6.6 अरब डॉलर से बढ़कर 50 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। उन्होंने इस असंतुलन को दूर करना भारत और रूस के बीच आर्थिक संबंधों की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल बताया। दोनों पक्षों के बीच व्यापार को अधिक संतुलित और टिकाऊ बनाने के लिए नए अवसर तलाशने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।

    बैठक में ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु सहयोग, कनेक्टिविटी, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और मानव संसाधन की आवाजाही जैसे क्षेत्रों को विशेष महत्व दिया गया। जयशंकर ने कहा कि बदलते वैश्विक आर्थिक और तकनीकी माहौल में दोनों देशों को नए क्षेत्रों की संभावनाओं की पहचान करते हुए सहयोग का दायरा बढ़ाना होगा।

    उन्होंने भारत और रूस के बीच आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने में उद्योग जगत की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार सरकारें व्यापार और निवेश के लिए आवश्यक ढांचा तैयार कर सकती हैं, लेकिन वास्तविक निवेश, नवाचार और रोजगार सृजन में कारोबारी क्षेत्र की केंद्रीय भूमिका रहती है। इसलिए संस्थागत तंत्र को उद्योग की प्राथमिकताओं के साथ लगातार जोड़े रखने की आवश्यकता है।

    जयशंकर ने कहा कि अंतर-सरकारी आयोग के विभिन्न कार्य समूहों और उप-समूहों को केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि तय लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने समस्या समाधान और व्यावहारिक परिणामों को भविष्य की बैठकों की सफलता का प्रमुख आधार बताया।

    बैठक के बाद जयशंकर ने मंटुरोव को आयोग की सह-अध्यक्षता के लिए धन्यवाद दिया और चर्चा को उत्पादक बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में बैठक उपयोगी रही। भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों में आर्थिक सहयोग को और व्यापक बनाने तथा नई तकनीकी और रणनीतिक जरूरतों के अनुरूप साझेदारी विकसित करने पर दोनों पक्षों का जोर रहा।

  • टैरिफ दबाव के बीच जयशंकर का रूस दौरा अहम, लावरोव से मुलाकात में तेल व्यापार और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा संभव

    टैरिफ दबाव के बीच जयशंकर का रूस दौरा अहम, लावरोव से मुलाकात में तेल व्यापार और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा संभव

    नई दिल्ली । विदेश मंत्री एस. जयशंकर 23 अगस्त से दो दिन के रूस दौरे पर जा रहे हैं। उनका यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और रूस के संबंधों के साथ-साथ भारत के ऊर्जा हित भी अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच चर्चा में हैं। यात्रा के दौरान जयशंकर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात करेंगे और दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर बातचीत करेंगे।

    जयशंकर व्यापार, विज्ञान, तकनीक और संस्कृति से जुड़े भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की 27वीं बैठक की सह-अध्यक्षता भी करेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक और कारोबारी सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ विभिन्न क्षेत्रों में चल रही साझेदारी की समीक्षा किए जाने की उम्मीद है।

    जयशंकर का रूस दौरा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूस से तेल, गैस और यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी के बीच हो रहा है। ऐसे में भारत-रूस ऊर्जा कारोबार इस यात्रा के महत्वपूर्ण संदर्भों में शामिल है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है और रूस पिछले कुछ समय में उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहा है।

    यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों की पाबंदियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बदलाव के बीच भारत ने रूसी तेल की खरीद जारी रखी थी। हालांकि अमेरिकी दबाव और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बीच रूसी तेल आयात में बदलाव की स्थिति बनी रही। इसके बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने से ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ी और भारत के लिए रूसी तेल का महत्व फिर बढ़ गया।

    जुलाई में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक पहुंचने की बात सामने आई। यह आंकड़ा बताता है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा में रूसी आपूर्ति कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ऐसे में जयशंकर की यात्रा के दौरान ऊर्जा सहयोग और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत को विशेष महत्व मिल सकता है।

    दौरे का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू रक्षा और सैन्य तकनीकी सहयोग है। भारत और रूस लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में साझेदार रहे हैं। हाल ही में दोनों देशों के अंतर-सरकारी आयोग के सैन्य और सैन्य-तकनीकी सहयोग से जुड़े कार्य समूह की बैठक भी हुई थी। इसमें दोनों पक्षों ने सशस्त्र बलों के बीच सहयोग बढ़ाने और आगामी गतिविधियों की योजना पर चर्चा की थी।

    इस पृष्ठभूमि में जयशंकर की रूस यात्रा दोनों देशों के व्यापक रणनीतिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, तकनीकी सहयोग और सैन्य साझेदारी से जुड़े विषय भी द्विपक्षीय बातचीत के एजेंडे में रह सकते हैं, हालांकि किसी विशेष नई रक्षा डील की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    भारत और रूस के संबंध केवल रक्षा और ऊर्जा तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश व्यापार, विज्ञान, तकनीक, संस्कृति और आर्थिक सहयोग के नए क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। अंतर-सरकारी आयोग की बैठक इसी व्यापक सहयोग को संस्थागत स्तर पर आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच है।

    रूसी नेतृत्व भी हाल के समय में भारत के आर्थिक और तकनीकी विकास की सराहना करता रहा है। ऐसे में जयशंकर की यात्रा को दोनों देशों के बीच पारंपरिक रणनीतिक संबंधों को मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है। अमेरिकी टैरिफ दबाव, ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत के लिए रूस के साथ संवाद बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

  • कारगिल विजय दिवस पर देश ने याद किया वीरों का शौर्य, जयशंकर और राजनाथ सिंह ने बलिदान को दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

    कारगिल विजय दिवस पर देश ने याद किया वीरों का शौर्य, जयशंकर और राजनाथ सिंह ने बलिदान को दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

    नई दिल्ली । देश ने रविवार को 27वां कारगिल विजय दिवस पूरे सम्मान और गर्व के साथ मनाया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने कारगिल युद्ध के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों के अदम्य साहस और समर्पण को नमन करते हुए कहा कि उनका शौर्य आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

    विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर अपने संदेश में कहा कि यह दिन उन बहादुर सैनिकों के साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति को याद करने का अवसर है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिकों की सेवा और त्याग को देश हमेशा सम्मान और गर्व के साथ याद रखेगा। उनके अनुसार कारगिल के वीरों की गाथा केवल सैन्य इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प और आत्मविश्वास की पहचान भी है।

    कारगिल विजय दिवस भारत की उस ऐतिहासिक जीत की याद दिलाता है, जब वर्ष 1999 में भारतीय सेना ने दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए दुश्मन के कब्जे से रणनीतिक चोटियों को दोबारा अपने नियंत्रण में लिया था। बर्फ से ढकी ऊंची पहाड़ियों, प्रतिकूल मौसम और लगातार हो रही गोलाबारी के बीच भारतीय जवानों ने अद्वितीय साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। 26 जुलाई को मिली इस विजय ने भारतीय सेना की क्षमता और राष्ट्र की एकजुटता का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाया।

    कारगिल विजय दिवस के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कारगिल युद्ध स्मारक पहुंचकर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने ध्वजारोहण समारोह में भाग लिया और शौर्य विजय यात्रा के समापन कार्यक्रम में भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने भारतीय सेना के जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि कारगिल युद्ध स्मारक पर लहराता तिरंगा उन वीर सैनिकों के अद्वितीय बलिदान का प्रतीक है, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्ष 1999 में भारतीय सीमा पर हुई घुसपैठ का भारतीय सेना ने अदम्य साहस और रणनीतिक कौशल के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि दुश्मन ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का लाभ उठाने की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय सैनिकों ने असाधारण वीरता का परिचय देते हुए सभी चुनौतियों को परास्त कर दिया। उन्होंने कहा कि कारगिल के योद्धाओं ने केवल ऊंची चोटियां ही नहीं जीतीं, बल्कि पूरे देश का विश्वास और सम्मान भी मजबूत किया।

    राजनाथ सिंह ने कैप्टन विक्रम बत्रा, कैप्टन मनोज पांडे सहित अनेक वीर सैनिकों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी वीरगाथाएं आज भी देश के युवाओं को राष्ट्रसेवा, कर्तव्य और त्याग का संदेश देती हैं। उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य जीत का स्मरण नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक को देश के प्रति अपने दायित्वों का एहसास कराने वाला अवसर भी है। उनके अनुसार सेवा, समर्पण और बलिदान जैसे मूल्य ही किसी भी मजबूत राष्ट्र की आधारशिला होते हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सशस्त्र बल लगातार देश की सुरक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हर मोर्चे पर सजग हैं। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर पूरे देश ने वीर शहीदों के अद्वितीय योगदान को स्मरण करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। यह दिवस एक बार फिर देशवासियों को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने और वीर सैनिकों के बलिदान से प्रेरणा लेने का संदेश देता है।

  • मनीला में जयशंकर की कूटनीतिक सक्रियता, श्रीलंका-बांग्लादेश समेत कई देशों के नेताओं से अहम मुलाकातें

    मनीला में जयशंकर की कूटनीतिक सक्रियता, श्रीलंका-बांग्लादेश समेत कई देशों के नेताओं से अहम मुलाकातें

    नई दिल्ली । विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित आसियान से जुड़ी उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान कई देशों के विदेश मंत्रियों और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ व्यापक कूटनीतिक संवाद किया। इस दौरान उन्होंने श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिथा हेराथ, बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान तथा यूरोपीय संघ की वरिष्ठ प्रतिनिधि काजा कैलास से अलग-अलग मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की। इन बैठकों को भारत की सक्रिय विदेश नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक भागीदारी के महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    दो दिवसीय मनीला दौरे के दौरान विदेश मंत्री ने आसियान-इंडिया, ईस्ट एशिया समिट और आसियान रीजनल फोरम की विदेश मंत्री स्तरीय बैठकों में हिस्सा लिया। इन बैठकों का उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना, सुरक्षा चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करना तथा आर्थिक और समुद्री साझेदारी को नई दिशा देना रहा। भारत ने इन मंचों पर अपने सहयोगी देशों के साथ बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    श्रीलंका और बांग्लादेश के विदेश मंत्रियों के साथ मुलाकात के दौरान आपसी संबंधों, क्षेत्रीय विकास और सहयोग के विभिन्न आयामों पर चर्चा हुई। भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ पारस्परिक विश्वास और सहयोग को आगे बढ़ाने की नीति पर जोर दिया। इसके साथ ही यूरोपीय संघ की वरिष्ठ प्रतिनिधि काजा कैलास के साथ हुई बैठक में भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक चुनौतियों तथा साझा हितों से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

    मनीला प्रवास के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने कई अन्य प्रमुख देशों के विदेश मंत्रियों से भी द्विपक्षीय मुलाकातें कीं। इनमें फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया, चीन, अमेरिका, रूस, सिंगापुर, कनाडा, थाईलैंड और न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री शामिल रहे। इसके अलावा उन्होंने आसियान के महासचिव से भी मुलाकात कर क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की। इन बैठकों का उद्देश्य विभिन्न देशों के साथ भारत के रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को नई गति देना था।

    विदेश मंत्री ने क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी भाग लिया। इस दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री सहयोग और हालिया भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में नई दिल्ली में पहले हुई क्वाड वार्ता के निर्णयों की समीक्षा की गई और स्वतंत्र, समावेशी तथा नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोहराई गई। साथ ही आसियान की केंद्रीय भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया।

    भारत सरकार का मानना है कि यह दौरा एक्ट ईस्ट नीति के तहत आसियान देशों के साथ बढ़ते सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण है। भारत और आसियान के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से दोनों पक्ष व्यापार, संपर्क, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को लगातार विस्तार दे रहे हैं। वर्ष 2026 को आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, जिससे समुद्री संपर्क, ब्लू इकोनॉमी और क्षेत्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच सहयोग को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। मनीला में हुई ये बैठकें भारत की सक्रिय कूटनीति और बहुपक्षीय मंचों पर उसकी बढ़ती भूमिका को भी स्पष्ट रूप से रेखांकित करती हैं।