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  • कहीं नेता के लिए रुकी जनसुनवाई, कहीं फरियादी खुद विधायक को घर ले गई: अधूरे ब्रिज पर नारे और पंडितजी का बंगला भी चर्चा में

    कहीं नेता के लिए रुकी जनसुनवाई, कहीं फरियादी खुद विधायक को घर ले गई: अधूरे ब्रिज पर नारे और पंडितजी का बंगला भी चर्चा में


    भोपाल । मध्य प्रदेश में राजनीति और नौकरशाही की ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जिनमें कहीं आम और खास के बीच का फर्क दिखाई देता है तो कहीं जनता और जनप्रतिनिधि के बीच सीधे संवाद की एक उम्मीद नजर आती है। शिवपुरी में जनसुनवाई के दौरान भाजपा नेता के पहुंचते ही कलेक्टर का कुर्सी से उठकर उनसे मिलना और फिर उन्हें अपने केबिन में लेकर जाना चर्चा का विषय बन गया। दूसरी ओर गुना में एक बुजुर्ग महिला कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह का हाथ पकड़कर उन्हें अपने आधे अधूरे घर तक ले गई। इन दोनों घटनाओं ने लोकतंत्र और प्रशासन की प्राथमिकताओं पर अपने अपने तरीके से सवाल खड़े किए हैं।

    शिवपुरी में कलेक्टर जनसुनवाई कर रहे थे और आम लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे हुए थे। इसी दौरान भाजपा जिला अध्यक्ष वहां पहुंचे। बताया गया कि कलेक्टर ने उनसे मुलाकात की और फिर जनसुनवाई के बीच ही उन्हें अपने केबिन में लेकर चले गए। कुछ देर बाद कलेक्टर वापस लौटे और लोगों की समस्याएं सुनने का सिलसिला फिर शुरू हुआ लेकिन तब तक यह दृश्य चर्चा में आ चुका था। सवाल यह उठने लगा कि यदि कोई आम व्यक्ति अपनी समस्या लेकर जनसुनवाई में पहुंचता है तो उसे अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है लेकिन किसी राजनीतिक पदाधिकारी के आने पर प्राथमिकता बदल क्यों जाती है। यह घटना भले कुछ मिनटों की रही हो लेकिन आम और खास के बीच व्यवहार के अंतर को लेकर बहस जरूर छेड़ गई।

    इसके विपरीत गुना जिले में राघौगढ़ विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह के सामने एक बुजुर्ग महिला ने अपनी परेशानी सीधे रखी। महिला विधायक का हाथ पकड़कर उन्हें अपने घर तक ले गई और अपना अधूरा मकान दिखाया। उसने बताया कि घर में प्लास्टर और पुताई का काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है। विधायक ने महिला को मदद और घर का काम पूरा कराने का भरोसा दिया। यह दृश्य राजनीति की तस्वीर के रूप में चर्चा में रहा लेकिन इसके पीछे एक बड़ा संदेश भी छिपा है कि जनता को अपने प्रतिनिधियों तक बिना डर और संकोच पहुंचने का अधिकार होना चाहिए। लोकतंत्र की असली खूबसूरती तभी है जब कोई आम नागरिक बेझिझक अपने जनप्रतिनिधि का हाथ पकड़कर अपनी परेशानी बता सके।

    उधर इंदौर जिले के महू में अधूरे रेलवे ओवरब्रिज को लेकर राजनीतिक विरोध का अलग तरीका देखने को मिला। ब्रिज निर्माण में हो रही देरी से नाराज कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उसकी बाउंड्री पर सरकार नेता और ठेकेदार को निशाने पर लेते हुए नारे लिखवा दिए। काम की धीमी रफ्तार और विकास के नाम पर सवाल उठाते इन स्लोगन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गईं। इसके बाद प्रशासन ने बाउंड्री पर लिखे नारों को सफेद रंग से पुतवा दिया। कांग्रेस ने इसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन और कीर्तन भी किया। विपक्ष का तर्क है कि यदि निर्माण कार्य पूरा करने में भी उतनी ही तेजी दिखाई जाती जितनी नारों को मिटाने में दिखाई गई तो शायद विरोध की जरूरत ही नहीं पड़ती।

    राजनीति के इन खुले दृश्यों के बीच भोपाल की अंदरूनी सियासत से जुड़ी चर्चा भी सुर्खियों में रही। खबर में एक ऐसे भाजपा नेता का जिक्र है जिन्हें पंडितजी के नाम से संबोधित किया गया है और जो विधायक या मंत्री न होने के बावजूद अपना सरकारी बंगला 2028 तक बचाने में सफल रहे हैं। चर्चा है कि बंगले को लेकर बदलाव की तैयारी थी लेकिन दिल्ली स्तर पर हस्तक्षेप के बाद मामला बदल गया। बंगला समाज सेवा के नाम पर आवंटित बताया जा रहा है जबकि राजनीतिक गलियारों में इसे भविष्य की सियासत के केंद्र के रूप में भी देखा जा रहा है।

    कुल मिलाकर मध्य प्रदेश की इन घटनाओं ने सत्ता राजनीति और प्रशासन की कई परतें खोल दी हैं। कहीं आम आदमी इंतजार करता दिखाई देता है और खास व्यक्ति को प्राथमिकता मिलती नजर आती है तो कहीं एक बुजुर्ग महिला सीधे अपने विधायक तक पहुंचकर अपनी समस्या बताती है। अधूरे विकास कार्यों पर विपक्ष नारे लिखकर सरकार को घेरता है और दूसरी तरफ सत्ता के गलियारों में बंगले बचाने की सियासत चलती है। यही राजनीति और व्यवस्था की वह तस्वीर है जिसमें सवाल भी हैं और उम्मीदें भी।

  • जयवर्धन सिंह ने महाकाल की भस्म आरती में लिया आशीर्वाद, नंदी हॉल से किए दर्शन

    जयवर्धन सिंह ने महाकाल की भस्म आरती में लिया आशीर्वाद, नंदी हॉल से किए दर्शन


    उज्जैन । उज्जैन में बुधवार सुबह पूर्व मंत्री और राघोगढ़ के वर्तमान विधायक जयवर्धन सिंह बाबा महाकाल की भस्म आरती में शामिल हुए। उन्होंने देहरी पर प्रणाम कर भगवान महाकालेश्वर का आशीर्वाद लिया और नंदी हॉल में बैठकर भस्म आरती का दर्शन किया।

    इस अवसर पर कई कांग्रेस नेता भी मौजूद थे जिनमें राजेंद्र वशिष्ठ और भरत पोरवाल शामिल थे। जयवर्धन सिंह भस्म आरती के दौरान पूरी तरह से भक्ति में लीन दिखाई दिए।

    आरती के बाद उन्होंने मंदिर परिसर में स्थित भगवान वीरभद्र के दर्शन भी किए। यह धार्मिक आयोजन स्थानीय लोगों और भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है और जयवर्धन सिंह की उपस्थिति ने इसे और भी यादगार बना दिया।