Tag: Jammu and Kashmir

  • पहाड़ों पर भारी बर्फबारी… जम्मू-कश्मीर में दो हाईवे बंद, मैदानी इलाकों में आंधी-बारिश का अलर्ट

    पहाड़ों पर भारी बर्फबारी… जम्मू-कश्मीर में दो हाईवे बंद, मैदानी इलाकों में आंधी-बारिश का अलर्ट


    नई दिल्ली।
    उत्तरी ईरान और उससे सटे कैस्पियन सागर (Caspian Sea) के ऊपर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से उत्तर-पश्चिम भारत (North-West India.) में मौसम के मिजाज में बदलाव आया है। जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) और हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी और घाटी व मैदानी इलाकों में बारिश हुई है। पंजाब और हरियाणा समेत मैदानी राज्यों में तेज हवा और गरज-चमक के साथ छिटपुठ बारिश दर्ज की गई है। संभावना है कि आने वाले हफ्ते में मौसम का मिजाज ऐसा ही बना रहेगा। हिमाचल प्रदेश के शिमला, कुल्लू और मंडी में सोमवार को आंधी का येलो अलर्ट जारी किया गया है।

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी राजस्थान और उसके आसपास के क्षेत्रों में निचले क्षोभमंडलीय स्तर पर तेज चक्रवाती हवाएं चल रही हैं। उत्तर-पश्चिमी राजस्थान से लेकर उत्तरी मध्य प्रदेश तक निचले क्षोभमंडलीय स्तर पर एक कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। 2 अप्रैल को उत्तर-पश्चिम भारत में एक नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है। मौसम संबंधी इन प्रणालियों के प्रभाव से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित, बाल्टिस्तान, मुजफ्फरबाद में रविवार को हल्की बारिश हुई। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, पूर्वी व पश्चिमी राजस्थान में हल्की बारिश हुई और कुछ स्थानों पर ओले गिरे।


    हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कैसा रहेगा मौसम?

    आईएमडी के अनुसार, 30 मार्च और 2-3 अप्रैल को गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और बर्फबारी होने और 30-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 4 अप्रैल को भी यही स्थिति रहेगी। उत्तराखंड में 30 मार्च को ओलावृष्टि की भी संभावना है। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में 30-31 मार्च के दौरान छिटपुट से मध्यम वर्षा के साथ गरज, बिजली चमकने और 30-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है। वहीं, पूर्वोत्तर भारत और इससे सटे पूर्वी भारत में इस सप्ताह छिटपुट से लेकर व्यापक वर्षा के साथ गरज, चमक और तेज हवा चलने की संभावना है। पूर्वोत्तर भारत में 30 मार्च से 1 अप्रैल के दौरान छिटपुट भारी वर्षा भी हो सकती है। दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में इस सप्ताह छिटपुट वर्षा के साथ गरज, बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने की संभावना है।

    हिमाचल प्रदेश: रोहतांग में बर्फबारी
    हिमाचल प्रदेश के रोहतांग दर्रा समेत ऊंचाई वाले अन्य क्षेत्रों में रविवार को बर्फबारी हुई। कुल्लू और लाहौल-स्पीति जिले में रविवार सुबह से दोपहर तक ऊंची चोटियों पर हिमपात हुआ। रोहतांग दर्रा में 20, कोकसर में 3, शिकुंला में 15, कुंजुम पास में 15 और बारालाचा में 20 सेंटीमीटर तक बर्फबारी हुई। हिमपात के कारण शिंकुला टॉप से वाहनों की आवाजाही बंद रही। पर्यटन नगरी मनाली से दोपहर तक अटल टनल रोहतांग की तरफ वाहनों की आवाजाही बाधित रही। शिमला, धर्मशाला समेत मध्यम और निचले क्षेत्रों में बारिश हुई। इससे हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर ठंड बढ़ गई है।


    श्रीनगर-लेह और बांदीपोरा-गुरेज हाईवे बंद

    जम्मू-कश्मीर में रविवार सुबह मैदानी इलाकों में बारिश तो पहाड़ों पर बर्फबारी हुई। बर्फबारी से श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग और बांदीपोरा-गुरेज मार्ग बंद हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार 31 मार्च तक हल्की बारिश और बर्फबारी के आसार बने हुए हैं। वहीं कुछ इलाकों में हिमस्खलन और भूस्खलन की भी आशंका जताई जा रही है।


    पंजाब-हरियाणा में भी गिरा पारा

    पंजाब और हरियाणा में रविवार को हल्की बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग ने बताया कि दोनों राज्यों की साझा राजधानी चंडीगढ़ में हल्की बारिश हुई, जिससे वहां तापमान में गिरावट आई। हालांकि, बारिश के इस दौर ने क्षेत्र के किसानों में चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि उन्हें डर है कि तेज हवाओं के साथ बारिश होने पर खड़ी गेहूं की फसल को नुकसान पहुंच सकता है।

  • लुधियाना में दर्दनाक हादसा: खाना खाने जा रहे ड्राइवर को पिकअप ने रौंदा, मौके पर मौत; आरोपी गिरफ्तार

    लुधियाना में दर्दनाक हादसा: खाना खाने जा रहे ड्राइवर को पिकअप ने रौंदा, मौके पर मौत; आरोपी गिरफ्तार


    नई दिल्ली। Ludhiana के मोती नगर स्थित ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में सोमवार दोपहर एक तेज रफ्तार महिंद्रा पिकअप ने पैदल जा रहे ड्राइवर को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी चालक को गिरफ्तार कर वाहन को कब्जे में ले लिया।

    मृतक की पहचान राम प्रसाद पाटीदार के रूप में हुई है, जो मध्य प्रदेश का निवासी था और पिछले तीन वर्षों से ट्रांसपोर्ट कारोबारी रसील चंद के यहां ड्राइवर के रूप में कार्यरत था। जानकारी के मुताबिक 2 मार्च को दोपहर करीब 3 बजे राम प्रसाद पैदल ही खाना खाने के लिए जा रहा था। इसी दौरान ट्रांसपोर्ट नगर के पास अचानक तेज टक्कर की आवाज सुनाई दी।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिंद्रा पिकअप तेज और लापरवाही से चलाई जा रही थी। वाहन चालक ने सामने पैदल जा रहे राम प्रसाद को नहीं देखा और सीधे टक्कर मार दी। सिर और शरीर पर गंभीर चोटें लगने के कारण राम प्रसाद की मौके पर ही मौत हो गई।

    जांच अधिकारी ने बताया कि आरोपी चालक की पहचान गणेश कुमार निवासी गांव नड्ड, जिला सांबा, जम्मू-कश्मीर के रूप में हुई है। पुलिस ने उसे मौके से ही हिरासत में ले लिया। प्रारंभिक जांच में लापरवाही से वाहन चलाना हादसे की मुख्य वजह सामने आई है।

    थाना मोती नगर पुलिस ने शिकायतकर्ता के बयान के आधार पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 281 और धारा 106(1) के तहत मामला दर्ज किया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले की आगे की जांच जारी है।

    यह हादसा एक बार फिर शहर में लापरवाह ड्राइविंग पर सवाल खड़े करता है। पुलिस का कहना है कि दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

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  • जम्मू-कश्मीर को जल्द मिल सकता है राज्य का दर्जा, केंद्र के संकेत ने बढ़ाई उम्मीदें

    जम्मू-कश्मीर को जल्द मिल सकता है राज्य का दर्जा, केंद्र के संकेत ने बढ़ाई उम्मीदें


    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा जल्द मिलने की संभावना फिर से सुर्खियों में आ गई है। केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने हाल ही में कहा कि यह मुद्दा अत्यंत संवेदनशील है, लेकिन जब संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आश्वासन दिया है, तो जम्मू-कश्मीर को उसका अधिकार निश्चित रूप से मिलेगा। मेघवाल ने यह भी संकेत दिए कि प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही इस पर फैसला सुनने को मिल सकता है।

    अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त कर जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था। इसके साथ ही तत्कालीन राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित किया गया। तब से ही क्षेत्रीय राजनीतिक दल लगातार पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि राज्य का दर्जा लौटने से स्थानीय प्रशासनिक निर्णयों में जनता की भागीदारी बढ़ेगी और विकास की गति तेज होगी।

    मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस मामले पर अपनी चिंता और उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र के साथ इस मुद्दे पर लगातार बातचीत कर रही है और लंबे इंतजार के बावजूद वे उम्मीद नहीं खो रहे हैं। अब, केंद्रीय मंत्री के हालिया बयान के बाद उन्हें विश्वास है कि राज्य का दर्जा जल्द ही बहाल किया जा सकता है। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह मामला जनता की संवेदनशील भावनाओं से जुड़ा हुआ है और देर होने से लोगों में बची हुई उम्मीद भी खत्म हो सकती है।

    राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा बहाल होना न केवल प्रशासनिक और संवैधानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता और विकास को भी मजबूती मिलेगी। स्थानीय प्रशासन को अधिक अधिकार मिलेंगे, जिससे विकास योजनाओं और कानून-व्यवस्था के मामलों में बेहतर निर्णय लेने में सुविधा होगी।

    हालांकि, अभी तक कोई निश्चित तारीख या आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से लगातार सकारात्मक संकेत दिए जा रहे हैं। मेघवाल के बयान और पहले दिए गए लोकसभा आश्वासनों से यह स्पष्ट होता है कि राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रक्रिया पूरी तरह बंद नहीं हुई है और यह मुद्दा उच्च स्तरीय समीक्षा के बाद जल्द ही संसद या केंद्र सरकार के माध्यम से अंतिम रूप ले सकता है।

    निष्कर्ष: जम्मू-कश्मीर के लोगों और राजनीतिक दलों के लिए यह बड़ी उम्मीद की खबर है। लंबे समय से प्रतीक्षित यह फैसला क्षेत्रीय राजनीति, प्रशासनिक सुधार और विकास की दिशा में एक नया अध्याय खोल सकता है। केंद्रीय मंत्रियों के संकेतों और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की उम्मीदों के बीच लगता है कि अब राज्य के दर्जे की बहाली बहुत दूर नहीं है।

  • शाहपुर कंडी बांध लगभग तैयार, रावी का पानी अब भारत की जमीन करेगा हरी-भरी, पाकिस्तान तरसेगा

    शाहपुर कंडी बांध लगभग तैयार, रावी का पानी अब भारत की जमीन करेगा हरी-भरी, पाकिस्तान तरसेगा


    नई दिल्‍ली। दशकों से बहते पानी की सियासत अब बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है। पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर बन रहे शाहपुर कंडी बांध का काम अंतिम चरण में है। इस परियोजना के शुरू होते ही रावी नदी का वह पानी, जो अब तक पाकिस्तान जाता था, अब जम्मू-कश्मीर और पंजाब की सूखी जमीन को सींचने में इस्तेमाल होगा। जम्मू-कश्मीर के मंत्री जावेद अहमद राणा ने बताया कि बांध का काम 31 मार्च तक पूरा होने की उम्मीद है। यह विशेष रूप से कठुआ और सांबा जिलों के लिए जीवनरेखा साबित होगा।

    सिंचाई और आर्थिक लाभ
    बांध से जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जिलों की 32,173 हेक्टेयर से अधिक भूमि और पंजाब की लगभग 5,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी। केंद्र सरकार ने इसके लिए 485.38 करोड़ रुपये की सहायता राशि मंजूर की है। बांध केवल पानी संचयन ही नहीं करेगा, बल्कि बिजली उत्पादन और कृषि विकास को भी नई दिशा देगा।

    सिंधु जल संधि और भारत की नई नीति
    1960 की सिंधु जल संधि के तहत रावी, ब्यास और सतलज जैसी पूर्वी नदियों पर भारत का पूर्ण अधिकार है। तकनीकी बाधाओं और बांध न होने के कारण अब तक रावी का काफी पानी पाकिस्तान चला जाता था।

    जम्मू-कश्मीर के विधायक डॉ. रामेश्वर सिंह ने कहा कि बांध के काम पूरा होने के बाद, पानी अब पाकिस्तान नहीं जाएगा और कठुआ क्षेत्र की विशाल भूमि को हरा-भरा करेगा।

    अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के प्रति कड़ा रुख अपनाया और डेटा शेयर करना बंद कर दिया है। अब भारत पश्चिमी नदियों के पानी के अधिकतम उपयोग की संभावनाएं तलाश रहा है।

    दशकों का इंतजार
    2001: परियोजना को पहली बार मंजूरी मिली, लेकिन अंतर्राज्यीय विवादों के कारण काम रुका।

    2018: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल से पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच समझौता हुआ।

    वर्तमान: परियोजना मिशन मोड में है ताकि पाकिस्तान को जाने वाला पानी रोका जा सके।

    अधिकारियों का मानना है कि यह कदम न केवल कृषि के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत के रणनीतिक दबाव का भी हिस्सा है। पाकिस्तान पहले से ही जल संकट से जूझ रहा है। भारत द्वारा अपने हिस्से का पूरा पानी इस्तेमाल करने से पाकिस्तान के निचले इलाकों में पानी की भारी कमी होने की संभावना है।

  • 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ी वाराणसी में स्वागत से खुश

    72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ी वाराणसी में स्वागत से खुश


    वाराणसी । वाराणसी में 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप का आयोजन काशी के सिगरा स्टेडियम में चल रहा है। इसमें देशभर की 58 संस्थाओं की 1,000 से ज्यादा टीमों के खिलाड़ी हिस्सा लेने पहुंचे हैं। खासकर जम्मू-कश्मीर की महिला टीम ने यहां अपने स्वागत को लेकर काफी खुशी व्यक्त की।

    जम्मू-कश्मीर महिला टीम के मुख्य कोच बलविंदर सिंह जंबाल ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा”सरकार और हमारी एसोसिएशन के सहयोग से जम्मू-कश्मीर में खेल को बढ़ावा मिला है। यही वजह है कि हम यहां तक पहुंचे हैं। वाराणसी में हमें जो स्वागत मिला हैवह बहुत दिलचस्प और प्रेरणादायक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के नातेयह धार्मिक नगरी है और हम यहां आकर बहुत खुश हैं।

    टीम की सदस्य सदफ मंजूर ने बताया”यहां प्रतियोगिता काफी कठिन हैक्योंकि देश भर से मजबूत टीमें आई हैं। हम भी अपनी पूरी कोशिश करेंगे।” उन्होंने कहा कि यह उनका पहला मौका है जब वे वाराणसी आई हैं और यहां के लोगों ने उन्हें दिल से स्वागत कियाजिसके लिए वे आभारी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पहले लड़कियों के लिए खेल के क्षेत्र में आना बहुत मुश्किल थालेकिन केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से अब जम्मू-कश्मीर में लड़कियों की खेलों में भागीदारी बढ़ी है।

    सदफ ने हिजाब पहनकर खेलने पर भी चर्चा की और कहा”हम हिजाब पहनकर खेलते हैं और हमें कोई समस्या नहीं होती। हमारी संस्कृति और पहनावे का सम्मान किया जाता है।कश्मीर की आयत ने भी प्रतियोगिता की चुनौतीपूर्ण प्रकृति को स्वीकार किया और कहा”यह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता हैऔर हम अच्छी सुविधाओं के लिए सरकार का धन्यवाद करते हैं। हमें यहां बहुत अच्छा लगाऔर स्वागत बहुत अच्छा हुआ।

    चैंपियनशिप का आयोजन

    यह चैंपियनशिप 4 जनवरी से 11 जनवरी तक चलेगी। उद्घाटन कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्चुअली किया जाएगा।

  • उत्तर भारत में सर्दी की मार, कोहरे और बर्फबारी से जीवन प्रभावित, शीतलहर के कारण अलर्ट जारी

    उत्तर भारत में सर्दी की मार, कोहरे और बर्फबारी से जीवन प्रभावित, शीतलहर के कारण अलर्ट जारी


    नई दिल्ली । उत्तर भारत के कई हिस्सों में सर्दी और कोहरे के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। दिल्ली उत्तर प्रदेश पंजाब हरियाणा और अन्य मैदानी इलाकों में घना कोहरा और शीतलहर ने दिनचर्या को अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारतीय मौसम विभाग IMD के अनुसार अगले कुछ दिनों तक यह स्थिति बनी रहने की संभावना है।

    दिल्ली और उत्तर प्रदेश

    दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में इस समय घना कोहरा छाया हुआ है जिससे विजिबिलिटी बहुत कम हो गई है। राजधानी दिल्ली में न्यूनतम तापमान 8-9 डिग्री सेल्सियस के आसपास है जबकि अधिकतम तापमान 16-18 डिग्री तक पहुँच रहा है। कोहरे की वजह से हवाई और रेल यातायात पर भी असर पड़ा है कई उड़ानें देरी से चल रही हैं। इसके अलावा यूपी के लखनऊ वाराणसी और प्रयागराज जैसे शहरों में ट्रैफिक जाम और सड़क हादसों का खतरा बढ़ गया है। मौसम विभाग ने यूपी के लगभग 30 जिलों में शीतलहर का अलर्ट जारी किया है और 4-6 जनवरी तक यह स्थिति बनी रहने की संभावना जताई है।

    पंजाब और हरियाणा

    पंजाब और हरियाणा में भी घना कोहरा और शीतलहर जारी है। यहां विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम हो गई है। मौसम विभाग ने इन राज्यों में शीतलहर की स्थिति को 6 जनवरी तक जारी रहने का अनुमान जताया है। न्यूनतम तापमान इन क्षेत्रों में सामान्य से काफी नीचे जा चुका है और ठंड के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश

    जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी का सिलसिला जारी है। गुलमर्ग सोनमर्ग पहलगाम और अन्य ऊपरी इलाकों में नए साल के मौके पर ताजा बर्फबारी हुई है जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी है। जम्मू-कश्मीर में ‘चिल्लई कलां’ के दौरान कड़ाके की ठंड ने तापमान को और नीचे गिरा दिया है लेकिन पर्यटक बर्फबारी का आनंद ले रहे हैं। वहीं हिमाचल प्रदेश के मनाली रोहतांग पास लाहौल-स्पीति जैसे क्षेत्रों में भी हल्की से मध्यम बर्फबारी हो रही है जिससे ठंड का असर बढ़ा है लेकिन पर्यटकों की भीड़ बनी हुई है।

    कोहरा और ठंड की चुनौती

    उत्तर प्रदेश में विशेष रूप से 30 से अधिक जिलों में घना कोहरा छाया रहेगा और शीतलहर के कारण सामान्य जनजीवन में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। मौसम विभाग ने लखनऊ समेत कई जिलों में अगले तीन दिनों के लिए शीतलहर का अलर्ट जारी किया है। घना कोहरा और शीतलहर का प्रभाव कृषि ट्रांसपोर्ट और दैनिक गतिविधियों पर भी पड़ा है और इससे बचने के लिए लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।अगले कुछ दिनों तक मौसम में कोई खास राहत की उम्मीद नहीं जताई गई है इसलिए उत्तर भारत के लोग खासकर यात्री और स्कूलों के छात्र अपनी यात्रा और अन्य गतिविधियों को लेकर सतर्क रहें।

  • जेल में सुरंग खोदने की विफल कोशिश पर मसूद अजहर ने खुद खोली पोल, बताया कैसे पीटा गया

    जेल में सुरंग खोदने की विफल कोशिश पर मसूद अजहर ने खुद खोली पोल, बताया कैसे पीटा गया


    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान(Pakistan) स्थित आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के सरगना मसूद अजहर ने 1990 के दशक में जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir)की जेल से भागने की अपनी कोशिश की विफलता पर पछतावा व्यक्त किया है। एक ऑडियो क्लिप में संभवतः पाकिस्तान में हुए एक कार्यक्रम में उसे जेल से सुरंग खोदकर भागने की अपनी असफल कोशिश का विवरण देते हुए सुना गया है। उसकी आवाज लाउडस्पीकर(Loudspeaker) में गूंज रही थी, जिससे संकेत मिलता है कि यह कार्यक्रम एक खुले क्षेत्र में आयोजित किया गया था।

    खुफिया सूत्रों ने भारत के सबसे वांटेड आतंकवादी की इस ऑडियो क्लिप को प्रामाणिक बताया है। मसूद अजहर 2001 में संसद, 2008 में मुंबई और कई अन्य हमलों का मास्टरमाइंड है।

    ऑडियो में मसूद अजहर को यह याद करते हुए टूटते हुए सुना गया कि जम्मू-कश्मीर की कोट भलवाल जेल से सुरंग खोदकर भागने की उसकी योजना कैसे विफल हो गई। यह जेल जम्मू क्षेत्र में एक उच्च सुरक्षा वाली सुविधा है जो भारत द्वारा पकड़े गए कुछ सबसे वांटेड आतंकवादियों को रखने के लिए जानी जाती है।

    जैश सरगना ने ऑडियो क्लिप में बताया कि वह कोट भलवाल में कुछ उपकरणों का इस्तेमाल करके काफी समय से सुरंग खोद रहा था। जिस दिन उसने सुरंग के रास्ते भागने की योजना बनाई थी, उसी दिन जेल अधिकारियों ने उसकी इस गतिविधि का पता लगा लिया।

    मसूद अजहर ने कहा कि आज भी वह उन जेल अधिकारियों से डरता है, जिन्होंने भागने की योजना बनाने के लिए उसे और अन्य आतंकवादियों को पीटा था। उसने रोते हुए कहा, “भागने की मेरी योजना के आखिरी दिन उन्हें सुरंग के बारे में पता चल गया था।”

    भागने की नाकाम कोशिश के बाद जेल उसके और कुछ अन्य कैदियों के लिए एक कठिन जगह बन गई, क्योंकि नियमों को सख्ती से लागू किया गया, जिसमें उल्लंघन के लिए शारीरिक दंड भी शामिल था। मसूद अजहर को यह कहते हुए सुना गया कि उसे जंजीरों से बांधा गया था, और नियमित गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगा दिए गए थे।

    आतंकवादी द्वारा अपनी विफलता को स्वीकार करना एक बार फिर यह साबित करता है कि पाकिस्तान आतंकवाद को भारत को परेशान करने के लिए एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करता रहा है।

    मसूद अजहर फरवरी 1994 में एक नकली पहचान और पुर्तगाली पासपोर्ट के साथ भारत आया था। उसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में जिहाद फैलाना और आतंकवादियों की भर्ती करना था। उसी साल उसे अनंतनाग में गिरफ्तार कर लिया गया था। वह 1994 से 1999 तक जेल में रहा। हालांकि, दिसंबर 1999 में इंडियन एयरलाइंस की उड़ान IC-814 के अपहरण के बाद, भारत सरकार ने बंधकों के बदले में मसूद अजहर को रिहा कर दिया था। इसके बाद उसने आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की और तब से वह भारत में कई आतंकवादी हमलों से जुड़ा रहा है।

    मसूद अजहर ने यह भी बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर भारत के क्रूज मिसाइल हमलों में उसके परिवार के कम से कम 10 सदस्य और चार करीबी सहयोगी मारे गए थे। यह हमला जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में जैश आतंकवादियों द्वारा 26 नागरिकों की हत्या के जवाब में किया गया था।