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  • उमर अब्दुल्ला के फैसले से पार्टी में बढ़ी खींचतान, मंत्रिमंडल से बाहर नेताओं की नाराजगी खुलकर आई सामने

    उमर अब्दुल्ला के फैसले से पार्टी में बढ़ी खींचतान, मंत्रिमंडल से बाहर नेताओं की नाराजगी खुलकर आई सामने

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष के सुर तेज हो गए हैं। कैबिनेट में जगह नहीं मिलने से नाराज कई वरिष्ठ विधायकों ने शुक्रवार को श्रीनगर में एक बंद कमरे में बैठक की। इस बैठक में 17 नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायकों के साथ एक निर्दलीय विधायक के शामिल होने की खबर है। बैठक का आयोजन विधायक कैसर जमशेद लोन के आवास पर किया गया। पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी और श्रीनगर से सांसद रूहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे के ऐलान ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बैठक में वरिष्ठ नेता मुबारक गुल और अब्दुल मजीद लर्मी सहित कई विधायक मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि इन नेताओं ने हालिया कैबिनेट विस्तार पर अपनी नाराजगी जाहिर की और आगे की रणनीति पर चर्चा की। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि विधायकों का एक समूह उन मंत्रियों को हटाने की मांग कर रहा है जिन्होंने सरकार में दो साल पूरे कर लिए हैं। उनकी जगह नए चेहरों को मौका देने और मंत्रिमंडल में वरिष्ठता तथा योग्यता को महत्व देने की मांग उठाई गई है। हालांकि बैठक के बाद विधायकों की ओर से कोई साझा आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।

    इस नाराजगी की एक बड़ी वजह मुबारक गुल और अब्दुल मजीद लर्मी जैसे वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलना बताया जा रहा है। मुबारक गुल ईदगाह से विधायक हैं और लंबे समय से पार्टी से जुड़े हुए हैं। कैबिनेट सूची में नाम नहीं आने के बाद उनके समर्थकों ने भी नाराजगी जताई थी। गुल ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उनके कार्यकर्ता और समर्थक उनके साथ हुए व्यवहार से आहत हैं और चाहते हैं कि वह पार्टी छोड़ दें। उन्होंने यह भी कहा था कि वह करीब 50 साल से पार्टी के साथ जुड़े हैं। वहीं अब्दुल मजीद लर्मी ने भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने पर निराशा जाहिर की थी।

    इस बीच पार्टी के भीतर संगठनात्मक पदों को लेकर भी हलचल दिखाई दी। पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने अली मोहम्मद सागर को महासचिव पद पर बने रहने का निर्देश दिया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ जब मुबारक गुल को हाल ही में महासचिव बनाए जाने की चर्चा थी। इस फैसले को पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी के बीच एक अहम संगठनात्मक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

    नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए दूसरी बड़ी चुनौती श्रीनगर के सांसद आगा रूहुल्लाह मेहदी का इस्तीफा देने का ऐलान है। उन्होंने कहा है कि वह 3 नवंबर को पार्टी और लोकसभा सदस्यता दोनों से इस्तीफा देंगे। रूहुल्लाह ने पार्टी नेतृत्व पर चुनावी वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पार्टी ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली और लोगों के अधिकारों की रक्षा जैसे मुद्दों को लेकर जनता से समर्थन मांगा था लेकिन सत्ता में आने के बाद उन वादों पर अपेक्षित काम नहीं हुआ। उनके इस ऐलान ने पार्टी नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

    गौरतलब है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 27 अक्टूबर को मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए अली मोहम्मद सागर मीर सैफुल्ला शमीम फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी को मंत्री पद की शपथ दिलाई थी। इस विस्तार के बाद नौ सदस्यीय मंत्रिमंडल में कश्मीर घाटी का प्रतिनिधित्व बढ़कर सात मंत्रियों तक पहुंच गया जबकि जम्मू क्षेत्र से उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और जावेद राणा शामिल हैं।

    फिलहाल नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर असंतोष की वास्तविक सीमा और आगे की रणनीति स्पष्ट नहीं है। लेकिन वरिष्ठ विधायकों की बैठक और रूहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे के ऐलान ने पार्टी नेतृत्व के सामने संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की चुनौती जरूर बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में नेतृत्व इन मतभेदों को किस तरह सुलझाता है इस पर जम्मू-कश्मीर की राजनीति की नजर रहेगी।

  • कश्मीर में पोस्टर वार से गरमाई राजनीति, फारूक अब्दुल्ला ने लगाए गंभीर आरोप

    कश्मीर में पोस्टर वार से गरमाई राजनीति, फारूक अब्दुल्ला ने लगाए गंभीर आरोप


    नई दिल्ली। 
    जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया है, जब सोशल मीडिया पर “CM उमर अब्दुल्ला लापता” पोस्टरों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। इस घटनाक्रम ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर दिया है।

    विवाद की शुरुआत तब हुई जब भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) की जम्मू-कश्मीर इकाई ने सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्टर साझा किए, जिनमें मुख्यमंत्री Omar Abdullah को लेकर तंज कसा गया था। इन पोस्टरों में दावा किया गया कि मुख्यमंत्री पिछले कई दिनों से “लापता” हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।

    भाजपा के इस कदम पर नेशनल कॉन्फ्रेंस (Jammu and Kashmir National Conference) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने इसे विपक्ष की “सस्ती राजनीति” करार देते हुए कहा कि उनके पास इससे बेहतर कोई मुद्दा नहीं है। श्रीनगर के हजरतबल दरगाह में नमाज के बाद मीडिया से बातचीत में फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि ऐसे अभियान केवल राजनीतिक माहौल बनाने के लिए चलाए जाते हैं और इनका जमीनी हकीकत से कोई संबंध नहीं है।

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी ऐसे आरोपों पर ज्यादा प्रतिक्रिया देने के पक्ष में नहीं है, क्योंकि जनता सब समझती है। फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर फैल रही अफवाहें पूरी तरह गलत हैं और दोनों दलों के बीच सहयोग मजबूत बना हुआ है। उन्होंने कहा कि “ये सब हमारे दुश्मन फैला रहे हैं, गठबंधन कायम है और कुछ नहीं होगा।”

    इस बीच, जम्मू-कश्मीर में चल रहे विभिन्न सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दों पर भी उन्होंने अपनी बात रखी। उन्होंने ईंधन आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का जिक्र करते हुए उम्मीद जताई कि वैश्विक तनाव जल्द समाप्त होगा और हालात सामान्य होंगे।

    जम्मू के सिधरा इलाके में गुर्जर और बकरवाल समुदायों से जुड़े विवाद पर फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि इस मामले में उनकी पार्टी या राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि यह प्रशासनिक कार्रवाई का हिस्सा है और इस पर जांच चल रही है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सीमावर्ती समुदायों को लेकर गलत धारणाएं बनाई जा रही हैं, जबकि ये लोग हमेशा देश के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।

    वहीं पीडीपी (People’s Democratic Party) द्वारा लगाए गए आरोपों पर भी उन्होंने तीखा जवाब दिया। फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जिन्होंने अनुच्छेद 370 और 35A को हटाने में भूमिका निभाई, वे अब सरकार की आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग अब राजनीतिक शोर मचा रहे हैं और उन्हें आत्ममंथन करना चाहिए।

    कुल मिलाकर, “CM उमर अब्दुल्ला लापता” पोस्टर विवाद ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

  • शराबबंदी को लेकर सड़क पर उतरी भाजपा, सीएम आवास के बाहर प्रदर्शन

    शराबबंदी को लेकर सड़क पर उतरी भाजपा, सीएम आवास के बाहर प्रदर्शन


    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में शुक्रवार को उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के आवास के बाहर शराबबंदी की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता सड़क पर उतरे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की और करीब 10 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया।

    BJP का तीखा हमला, बयान ने बढ़ाया विवाद
    प्रदर्शन के दौरान बीजेपी नेताओं ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। पार्टी नेताओं ने कहा कि सरकार राजस्व (रेवेन्यू) के नाम पर शराब की बिक्री को बढ़ावा दे रही है, जो युवाओं के भविष्य के लिए नुकसानदायक है। बीजेपी महासचिव अनवर खान के एक बयान ने विवाद और बढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि “अगर सरकार को सिर्फ रेवेन्यू की चिंता है तो हम मस्जिदों के बाहर बैठकर भीख मांग लेंगे।” इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं और इसे लेकर बहस तेज हो गई है।

    शराबबंदी को लेकर BJP का अल्टीमेटम
    बीजेपी नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने शराबबंदी पर कोई कदम नहीं उठाया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पार्टी ने कहा कि यह विरोध काजीगुंड से लेकर करनाह (LoC क्षेत्र) तक फैलाया जाएगा। नेताओं का कहना है कि कश्मीर की पहचान सूफी और संत परंपरा से जुड़ी है, इसलिए यहां शराब की बिक्री का विरोध जरूरी है।

    सरकार और विपक्ष का जवाब
    इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पहले ही शराबबंदी की मांग को खारिज कर चुके हैं। उनका कहना है कि राजस्व और प्रशासनिक कारणों से इस तरह का फैसला आसान नहीं है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने भी संकेत दिया कि शराब पर प्रतिबंध लगाने से राज्य के राजस्व पर बड़ा असर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बैन लगाने से अवैध तस्करी बढ़ सकती है।

    राजनीतिक टकराव तेज
    नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने पलटवार करते हुए कहा कि मौजूदा आबकारी नीति पहले की सरकारों के समय बनी थी, जिसमें BJP भी शामिल थी। पार्टी का कहना है कि आज जो मुद्दा उठाया जा रहा है, उसकी नींव पहले ही डाली जा चुकी थी।