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  • किताबों से कंप्यूटर तक, माछिल में सेना ने खोले शिक्षा और रोजगार के नए रास्ते

    किताबों से कंप्यूटर तक, माछिल में सेना ने खोले शिक्षा और रोजगार के नए रास्ते


    नई दिल्ली । भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती कुपवाड़ा जिले के माछिल क्षेत्र में शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आधुनिक स्टडी हब और स्किल डेवलपमेंट सेंटर का उद्घाटन किया है। इस पहल का उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं, महिलाओं और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुखी कौशल उपलब्ध कराना है। इस नई सुविधा को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है और उन्होंने सेना की इस पहल की खुले दिल से सराहना की है।

    नवनिर्मित स्टडी हब में कंप्यूटर प्रशिक्षण, आईटी शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, लाइब्रेरी और हाई स्पीड वाई-फाई जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा महिलाओं के लिए कालीन बुनाई, सिलाई और अन्य कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की गई है, जिससे वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें।

    स्थानीय युवतियों ने कहा कि पहले इस तरह की सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। कंप्यूटर सीखने या व्यावसायिक प्रशिक्षण लेने के लिए उन्हें कुपवाड़ा शहर जाना पड़ता था, जिसमें काफी समय लगता था और कई बार परिवार की अनुमति भी नहीं मिल पाती थी। अब गांव में ही आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र खुलने से नई-नई तकनीक और हुनर सीखने का अवसर मिलेगा, जिससे उनके भविष्य को नई दिशा मिलेगी।

    एक अन्य युवती ने सेना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कंप्यूटर सेंटर, कालीन बुनाई केंद्र और अन्य प्रशिक्षण सुविधाएं शुरू होने से अब स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिल सकेगा। इससे समय और संसाधनों की बचत होगी तथा अधिक से अधिक लड़कियां शिक्षा और कौशल विकास से जुड़ सकेंगी।

    स्थानीय युवकों ने भी इस पहल को क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि इस केंद्र में माताओं और बहनों के लिए सिलाई और अन्य रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध होगा, जिससे महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि समाज के विकास और युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    गांव के एक निवासी ने बताया कि इस परियोजना में समाज के हर वर्ग को ध्यान में रखा गया है। विद्यार्थियों के लिए आधुनिक लाइब्रेरी और वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे वे प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकेंगे। डिजिटल संसाधनों तक आसान पहुंच मिलने से ग्रामीण छात्रों को अब बड़े शहरों जैसी सुविधाएं अपने क्षेत्र में ही मिलेंगी।

    स्थानीय लोगों का मानना है कि इस स्टडी हब और स्किल डेवलपमेंट सेंटर से आने वाले वर्षों में क्षेत्र के युवाओं को शिक्षा, तकनीकी ज्ञान और रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों ने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि सीमावर्ती गांव में कंप्यूटर शिक्षा और आधुनिक प्रशिक्षण की ऐसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। भारतीय सेना की यह पहल न केवल शिक्षा को बढ़ावा देगी बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • जम्मू-कश्मीर में सीमा पर हाई अलर्ट, LoC पार करते पकड़ा गया PoK निवासी; जांच शुरू

    जम्मू-कश्मीर में सीमा पर हाई अलर्ट, LoC पार करते पकड़ा गया PoK निवासी; जांच शुरू


    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा पर सुरक्षाबलों ने एक संदिग्ध घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करते हुए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के एक नागरिक को हिरासत में लिया है। सुरक्षा एजेंसियां पकड़े गए व्यक्ति से गहन पूछताछ कर रही हैं ताकि उसके भारत में प्रवेश के उद्देश्य और संभावित संपर्कों का पता लगाया जा सके। घटना ऐसे समय सामने आई है जब अमरनाथ यात्रा और श्री माता वैष्णो देवी यात्रा को लेकर पूरे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही हाई अलर्ट पर है।

    अधिकारियों के अनुसार पकड़े गए व्यक्ति की पहचान मोहम्मद सज्जाद के रूप में हुई है जो रफीक का पुत्र और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के पोलास क्षेत्र का निवासी बताया जा रहा है। नियमित गश्त और निगरानी के दौरान सुरक्षाबलों ने उसकी संदिग्ध गतिविधियां देखीं जिसके बाद उसे रोककर हिरासत में ले लिया गया। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं और यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि वह गलती से सीमा पार आया या किसी विशेष उद्देश्य से भारतीय सीमा में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था।

    इस बीच जम्मू-कश्मीर में आगामी श्री अमरनाथ यात्रा और श्री माता वैष्णो देवी यात्रा को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। उधमपुर रियासी रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक शिव कुमार शर्मा ने कटड़ा में उच्चस्तरीय संयुक्त सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में पुलिस सेना सीआरपीएफ इंटेलिजेंस ब्यूरो सीआईडी रेलवे ट्रैफिक पुलिस और श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

    बैठक में कटड़ा शहर यात्रा मार्ग और भवन क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई। सीसीटीवी निगरानी प्रणाली जवानों की तैनाती आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को और मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त निगरानी और सुरक्षा बलों की रणनीतिक तैनाती के निर्देश दिए।

    कटड़ा से भवन तक पूरे यात्रा मार्ग की सुरक्षा व्यवस्था का भी बारीकी से आकलन किया गया ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और निर्बाध यात्रा का अनुभव मिल सके। इसके अलावा होटल लॉज गेस्ट हाउस होमस्टे और अन्य ठहरने की जगहों के नियमित सत्यापन और निरीक्षण के निर्देश भी दिए गए हैं ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।

    सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि तीर्थयात्रा के दौरान किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और खुफिया सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को पूरी तरह सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और जम्मू-कश्मीर में धार्मिक यात्राओं को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना है।

  • बाबा बर्फानी यात्रा होगी ग्रीन, पॉलीथिन और सिंगल यूज प्लास्टिक पूरी तरह बैन

    बाबा बर्फानी यात्रा होगी ग्रीन, पॉलीथिन और सिंगल यूज प्लास्टिक पूरी तरह बैन


    नई दिल्ली । इस वर्ष होने वाली श्री अमरनाथ यात्रा को स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए प्रशासन ने कई अहम फैसले लिए हैं। यात्रा के दौरान बालटाल और पहलगाम आधार शिविरों से लेकर पवित्र अमरनाथ गुफा तक पॉलीथिन बैग थर्माकोल और सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। प्रशासन का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र के प्राकृतिक सौंदर्य को सुरक्षित रखना और यात्रा मार्ग को प्रदूषण मुक्त बनाना है।

    श्रद्धालुओं को यदि आधार शिविर पर पॉलीथिन बैग के साथ पाया जाता है तो उन्हें उसे आगे ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसे यात्रियों को किसी तरह की असुविधा न हो इसके लिए प्रशासन ने निशुल्क कपड़े के थैलों की व्यवस्था की है। दोनों प्रमुख आधार शिविरों बालटाल और पहलगाम में करीब डेढ़ लाख कपड़े के बैग तैयार रखे गए हैं जिन्हें जरूरतमंद श्रद्धालुओं को मुफ्त वितरित किया जाएगा।

    यात्रा मार्ग पर संचालित होने वाले सभी भंडारों और दुकानदारों को भी पर्यावरण संरक्षण संबंधी नियमों का पालन करना होगा। भोजन परोसने के लिए केवल स्टील की प्लेट और गिलास का उपयोग करने की अनुमति होगी। प्लास्टिक के गिलास या अन्य सिंगल यूज प्लास्टिक सामग्री का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

    श्राइन बोर्ड ने इस बार कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को भी पहले से अधिक मजबूत बनाया है। यात्रा मार्ग पर उत्पन्न होने वाले कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की जिम्मेदारी इंदौर की गैर सरकारी संस्था स्वाहा रिसोर्स मैनेजमेंट को सौंपी गई है। वहीं जम्मू कश्मीर के ग्रामीण स्वच्छता विभाग को पूरे अभियान की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है ताकि स्वच्छता व्यवस्था प्रभावी ढंग से संचालित हो सके।

    यात्रा मार्ग पर सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग चार हजार कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा 623 कर्मचारी विशेष रूप से कचरा संग्रहण और उसके प्रबंधन का कार्य संभालेंगे। प्रशासन का लक्ष्य है कि इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में कम से कम 15 प्रतिशत कम कचरा उत्पन्न हो।

    श्रद्धालुओं की सुविधा और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए यात्रा मार्ग पर करीब पांच हजार अस्थायी शौचालय और स्नानघर भी स्थापित किए गए हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य खुले में गंदगी रोकना और यात्रियों को बेहतर स्वच्छता उपलब्ध कराना है।

    पिछले वर्ष अमरनाथ यात्रा के दौरान लगभग 450 टन कचरा एकत्र हुआ था। इस बार प्रशासन ने पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए कचरे की मात्रा कम करने और पूरी यात्रा को अधिक स्वच्छ बनाने का लक्ष्य तय किया है। अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं के सहयोग से ही इस अभियान को सफल बनाया जा सकता है और बाबा बर्फानी की पवित्र यात्रा को स्वच्छ तथा प्रदूषण मुक्त बनाया जा सकेगा।

  • पुलवामा हमले के कथित मास्टरमाइंड हमजा बुरहान की हत्या: PoK में गोलीबारी से मौत

    पुलवामा हमले के कथित मास्टरमाइंड हमजा बुरहान की हत्या: PoK में गोलीबारी से मौत



    नई दिल्ली। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से एक बड़ी और संवेदनशील खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2019 के पुलवामा आतंकी हमले से जुड़े बताए जा रहे हमजा बुरहान की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी है।कहा जा रहा है कि उस पर PoK क्षेत्र में कई राउंड फायरिंग की गई, जिसके बाद उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    कौन था हमजा बुरहान?
    रिपोर्ट्स और सुरक्षा एजेंसियों के दावों के अनुसार:

    असली नाम: अर्जुमंद गुलजार डार

    उर्फ: हमजा बुरहान / “डॉक्टर”

    मूल रूप से: पुलवामा (जम्मू-कश्मीर) का निवासी

    संगठन से जुड़ाव: आतंकी संगठन Al Badr

    उसे 2019 के पुलवामा हमले की साजिश में शामिल माना जाता था, जिसमें 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे।

     भारत की कार्रवाई और दर्ज स्थिति
    भारत सरकार ने 2022 में उसे UAPA के तहत आतंकी घोषित किया था

    उस पर आतंकी भर्ती, फंडिंग और हमलों की साजिश में शामिल होने के आरोप थे

    वह पाकिस्तान और PoK में सक्रिय नेटवर्क चलाने का आरोप झेल रहा था

    किन गतिविधियों में नाम सामने आया था?
    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार उस पर आरोप थे कि वह:

    युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती करता था

    फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट देता था

    CRPF पर ग्रेनेड हमलों जैसी घटनाओं में भूमिका में था

    विस्फोटक बरामदगी मामलों से जुड़ा था

    हत्या को लेकर क्या दावा है?
    रिपोर्ट्स में कहा गया है कि:

    PoK में अज्ञात हमलावरों ने उसे निशाना बनाया

    कई गोलियां लगने से मौके पर ही मौत हो गई

    हमले के पीछे कौन था, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है

     आधिकारिक स्थिति अभी तक:

    किसी भी सरकार ने इस हत्या की स्वतंत्र पुष्टि या जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है

    यह घटना फिलहाल मीडिया रिपोर्ट्स और सुरक्षा सूत्रों के हवाले से सामने आई है

  • कटरा: मां वैष्णो देवी की नगरी, जहां श्रद्धा के साथ खानपान के नियम भी निभाए जाते हैं

    कटरा: मां वैष्णो देवी की नगरी, जहां श्रद्धा के साथ खानपान के नियम भी निभाए जाते हैं

    नई दिल्ली। भारत में खाने की बात हो और प्याज-लहसुन का जिक्र न आए, ऐसा शायद ही कभी होता हो। हर घर की रसोई से लेकर बड़े-बड़े होटलों तक इन दोनों का इस्तेमाल आम माना जाता है। लेकिन जम्मू-कश्मीर का कटरा एक ऐसा शहर है, जहां पहुंचते ही खान-पान की पूरी तस्वीर बदल जाती है। यहां न बाजारों में प्याज-लहसुन बिकता दिखाई देता है, न ढाबों और होटलों के खाने में इसका इस्तेमाल होता है और न ही लोग इसे अपने घरों में रखना पसंद करते हैं। यही वजह है कि कटरा को देश के सबसे अनोखे धार्मिक शहरों में गिना जाता है।

    कटरा माता वैष्णो देवी मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां से माता के दरबार के लिए यात्रा शुरू करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यात्रा शुरू करने से पहले शरीर और मन की पवित्रता बनाए रखना जरूरी माना जाता है। इसी वजह से पूरे शहर में सात्विक भोजन की परंपरा विकसित हुई। स्थानीय लोगों का मानना है कि प्याज और लहसुन तामसिक भोजन की श्रेणी में आते हैं, जो मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। यही कारण है कि वर्षों से यहां इनका इस्तेमाल नहीं किया जाता।

    सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह परंपरा किसी सरकारी आदेश या कानूनी प्रतिबंध के कारण नहीं चल रही, बल्कि लोगों की आस्था और आपसी सम्मान से कायम है। यहां रहने वाले दूसरे धर्मों के लोग, यहां तक कि मुस्लिम परिवार भी स्थानीय परंपराओं का सम्मान करते हुए प्याज-लहसुन से दूरी बनाए रखते हैं। यही सामाजिक सौहार्द कटरा को बाकी शहरों से अलग पहचान देता है।

    अक्सर लोगों को लगता है कि बिना प्याज और लहसुन के खाना स्वादिष्ट नहीं हो सकता, लेकिन कटरा इस सोच को बदल देता है। यहां के रसोइए हींग, अदरक, हरी मिर्च और खास मसालों के इस्तेमाल से ऐसा स्वाद तैयार करते हैं कि श्रद्धालु खाने की तारीफ किए बिना नहीं रहते। दाल, कढ़ी, सब्जियां, पूरी और चटनियों का स्वाद यहां अलग ही अनुभव देता है। कई लोग तो कटरा के सात्विक भोजन को सेहत और स्वाद का बेहतरीन मेल मानते हैं।

    कटरा की यह परंपरा सिर्फ खान-पान तक सीमित नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति और धार्मिक वातावरण का हिस्सा बन चुकी है। दुकानदार भी प्याज-लहसुन का स्टॉक नहीं रखते और यदि कोई पर्यटक इसकी मांग करता है, तो उसे विनम्रता से यहां की परंपरा के बारे में बताया जाता है। यही वजह है कि कटरा आज भी अपनी आध्यात्मिक पहचान और सात्विक जीवनशैली के कारण देश-दुनि

  • कश्मीर के वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता, अब किसान 40 हजार रुपये किलो वाले दुर्लभ मशरूम की कर सकेंगे खेती

    कश्मीर के वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता, अब किसान 40 हजार रुपये किलो वाले दुर्लभ मशरूम की कर सकेंगे खेती

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिसके बाद अब किसान 15 हजार से 40 हजार रुपये प्रति किलो तक बिकने वाला दुर्लभ मशरूम अपने खेतों में भी उगा सकेंगे। श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SKUAST) के वैज्ञानिकों ने पहली बार नियंत्रित वातावरण में इस मशरूम की सफल खेती कर दिखाई है।

    जंगलों पर निर्भरता से मिली मुक्ति

    यह मशरूम मोरल्स या मोरचेला (स्थानीय नाम कंगाच) है, जो अब तक सिर्फ ऊंचे पहाड़ी जंगलों में बारिश के मौसम में प्राकृतिक रूप से उगता था। इसकी उपलब्धता बेहद सीमित और मुश्किल होने के कारण बाजार में इसकी कीमत बेहद अधिक रहती है।

    वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि

    SKUAST के कुलपति प्रोफेसर नजीर अहमद गनई ने इस उपलब्धि को “गेम चेंजर” बताया है। उनके अनुसार, यह तकनीक जंगलों पर निर्भरता खत्म कर नियंत्रित उत्पादन का रास्ता खोलती है, जिससे किसानों, युवाओं और स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर पैदा होंगे।

    पांच साल की मेहनत से मिला परिणाम

    इस शोध में प्रोफेसर तारिक अहमद सोफी, उनके छात्र कमरान मुनीर और प्रोफेसर विकास गुप्ता शामिल रहे। टीम ने पिछले पांच वर्षों में 1000 से अधिक प्राकृतिक स्थलों से मोरचेला के नमूने एकत्र किए और उनके वातावरण, मिट्टी, नमी और पौधों का गहन अध्ययन किया।

    शोध के दौरान 10 किस्मों को चुना गया, जिनमें से 3 किस्मों में सफलतापूर्वक खेती संभव हो सकी।

    पॉलीहाउस से लेकर खुले खेत तक सफलता

    शुरुआत में इस मशरूम की खेती पॉलीहाउस में की गई, जबकि बाद में इसे खुले वातावरण में भी उगाने में सफलता मिली। वैज्ञानिकों के अनुसार इसके लिए पेटेंट प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। यह प्रयोग बारामूला, अनंतनाग और श्रीनगर सहित कई क्षेत्रों में किया गया है।

    खास पर्यावरण की जरूरत वाला मशरूम

    मोरचेला की खेती हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही है क्योंकि इसे विशेष तापमान, नमी और मिट्टी की स्थिति की आवश्यकता होती है। साथ ही अलग-अलग किस्मों के लिए अलग पौधों और प्राकृतिक वातावरण का संतुलन भी जरूरी होता है।

    किसानों के लिए नई आर्थिक संभावना

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक से जम्मू-कश्मीर की कृषि अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग के चलते यह फसल किसानों की आय बढ़ाने का एक मजबूत विकल्प बन सकती है और जैव-अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा दे सकती है।

  • जम्मू कश्मीर में LOC के पास दिखे पाकिस्तानी ड्रोन, इंडियन आर्मी की जवाबी कार्रवाई के बाद वापस लौटे

    जम्मू कश्मीर में LOC के पास दिखे पाकिस्तानी ड्रोन, इंडियन आर्मी की जवाबी कार्रवाई के बाद वापस लौटे

    जम्मू-कश्मीर। जम्मू-कश्मीर के सांबा, राजौरी और पुंछ जिलों में रविवार शाम को लाइन ऑफ कंट्रोल पर कुछ ड्रोन देखे गए। ड्रोन देखने के बाद भारतीय सेना के जवानों ने काउंटर उपाय अपनाए। इसके बाद पाकिस्तानी ड्रोन वापस लौट गए। अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) और नियंत्रण रेखा (एलओसी) से सटे कई अग्रिम क्षेत्रों में सुरक्षा बलों ने संदिग्ध ड्रोन की गतिविधि देखी। अधिकारियों ने बताया कि सभी ड्रोन पाकिस्तान की तरफ से आए थे और भारतीय क्षेत्र के ऊपर कुछ मिनट तक मंडराने के बाद वापस लौट गए।
    सेना के अधिकारियों के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों में संदिग्ध ड्रोन की गतिविधि को देखते हुए सुरक्षा बलों ने जमीन पर तलाश अभियान शुरू किया है। उन्होंने बताया कि राजौरी में नियंत्रण रेखा के पास नौशेरा सेक्टर की रखवाली कर रहे सेना के जवानों ने शाम करीब छह बजकर 35 मिनट पर गनिया-कलसियां ​​गांव के ऊपर ड्रोन की गतिविधि को देखते हुए मध्यम और हल्की मशीन गनों से गोलीबारी की। राजौरी जिले के तेरियाथ के खब्बर गांव में शाम 6.35 बजे एक और ड्रोन देखा गया।

    सैन्य अधिकारियों ने शाम छह बजे ड्रोन देखे
    अधिकारियों ने बताया कि ड्रोन जैसी उड़ने वाली वस्तु कलाकोट के धर्मसाल गांव से आया और भरख की ओर बढ़ गयी। उन्होंने बताया कि शाम करीब 7:15 मिनट पर सांबा के रामगढ़ सेक्टर के चक बाबराल गांव के ऊपर एक ड्रोन जैसी वस्तु कुछ मिनटों तक मंडराती हुई देखी गई। अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार शाम छह बजकर 35 मिनट पर पुंछ जिले के नियंत्रण रेखा (एलओ) पर स्थित मनकोट सेक्टर में तैन से टोपा में भी एक ड्रोन जैसी वस्तु देखी गई थी।

    शुक्रवार को गिराया गया था पाकिस्तानी ड्रोन
    सैन्य अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार रात को सुरक्षा बलों ने सांबा जिले से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) के पास घगवाल के पलोरा गांव में पाकिस्तान से आए एक ड्रोन द्वारा गिराए गए हथियारों की खेप बरामद की। उन्होंने बताया कि इस खेप में दो पिस्तौल, तीन मैगजीन, 16 गोलियां और एक ग्रेनेड शामिल थे।