Tag: Jammu Kashmir

  • जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू, पूरे इलाके की घेराबंदी

    जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू, पूरे इलाके की घेराबंदी


    श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेरकर व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। केल्लाम क्षेत्र में शुक्रवार रात हुए इस हमले में छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई। एक श्रमिक ने घटनास्थल के बाद अस्पताल में दम तोड़ा, जबकि दूसरे घायल मजदूर की शनिवार को उपचार के दौरान मौत हो गई।

    बताया गया कि शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे आतंकियों ने केल्लाम इलाके में मजदूरों को निशाना बनाकर गोलीबारी की। हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली है। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर खुफिया सूचनाओं के आधार पर बड़े स्तर पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।

    मृतकों की पहचान छत्तीसगढ़ निवासी 24 वर्षीय दीपक रात्रे और 28 वर्षीय भोपिंदर के रूप में हुई है। दीपक की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि गंभीर रूप से घायल भोपिंदर को इलाज के लिए शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। चिकित्सकों के अनुसार, उनके सीने के दाहिने हिस्से में गोली लगी थी।

    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे कायराना हरकत बताया। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगी।

    वहीं, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी घटना की निंदा करते हुए पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने सुरक्षा बलों को अभियान और तेज करने तथा हमले में शामिल आतंकियों के खिलाफ शीघ्र और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

  • भारत की दो टूक…. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भारतीय क्षेत्रों पर चीन ने कर रखा है अवैध कब्जा

    भारत की दो टूक…. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भारतीय क्षेत्रों पर चीन ने कर रखा है अवैध कब्जा


    नई दिल्ली।
    भारत (India) ने दो टूक शब्दों में कहा है कि उसने कभी भी चीन (China) की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं किया है, उलटा चीन जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) तथा लद्दाख (Ladakh) में भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्जा किए हुए है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल (Randhir Jaiswal) से शुक्रवार को मीडिया ब्रीफिंग में यह सवाल पूछा गया कि हाल ही में मनीला में भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की वार्ता के बाद चीन ने कहा है कि भारतीय विदेश मंत्री ने वार्ता के दौरान कहा कि ताइवान को लेकर भारत के रुख में बदलाव नहीं आया है और वह चीन की संप्रभुता का सम्मान करता है।

    प्रवक्ता जायसवाल ने स्पष्ट किया कि विदेश मंत्री ने साथ ही यह भी कहा कि भारत किसी भी प्रकार से चीन की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं करता है और वह चीन से भी इसी तरह के सम्मान की अपेक्षा करता है लेकिन चीन ने 1963 से भारतीय क्षेत्रों पर अवैध कब्जा कर रखा है।

    प्रवक्ता ने आगे कहा , “विदेश मंत्री ने कहा कि जब संप्रभुता के मुद्दों की बात आती है, तो वास्तव में भारत को ही उन्हें उठाना चाहिए और भारत उन्हें उठाता भी है। भारत किसी भी प्रकार से चीन की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं करता और इस मामले में लगातार एक समान रुख पर कायम रहा है। लेकिन चीन 1963 से जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख में भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्ज़ा किए हुए है, जहां भारत का अधिकार स्वयं चीन द्वारा भी आधिकारिक रूप से स्वीकार किया गया है। इसके अतिरिक्त, जम्मू कश्मीर के उन क्षेत्रों में, जो भारत के हैं, चीन की परियोजनाएं चल रही हैं, और हम इसका विरोध करते हैं।” उल्लेखनीय है कि जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री के बीच मनीला में आसियान क्षेत्रीय मंच की बैठक से इतर द्विपक्षीय वार्ता हुई थी।


    ‘भारत जानबूझकर नहीं छोड़ रहा पानी’

    वहीं, भारत ने पाकिस्तान के मीडिया में आ रही इन रिपोर्टों को पूरी तरह से निराधार बताया है जिनमें, आरोप लगाया गया है कि भारत जानबूझकर पानी छोड़ कर पाकिस्तान में बाढ की स्थिति उत्पन्न कर रहा है। भारत का कहना है कि चेनाब नदी में पानी की वृद्धि जम्मू और आसपास के क्षेत्रों में भारी मॉनसूनी बारिश का नतीजा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को यहां मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि पाकिस्तानी मीडिया का यह आरोप कि भारत जानबूझकर पानी छोड़ कर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न कर रहा है , पूरी तरह से निराधार है। उन्होंने कहा कि 20 से 23 जुलाई के दौरान चेनाब नदी के बहाव में हाल ही में हुई वृद्धि, जम्मू और उसके आसपास केक्षेत्रों में हुई भारी मानसूनी बारिश का सीधा नतीजा है।

    बाढ़ पर विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
    प्रवक्ता ने कहा कि गौर करने वाली बात यह है कि पाकिस्तान के लाहौर स्थित बाढ़ पूर्वानुमान विभाग ने 22 जुलाई को जारी अपनी बाढ़ चेतावनी में, चेनाब नदी में बाढ़ के ऊंचे स्तर का कारण ऊपरी जल क्षेत्र में हुई भारी बारिश को ही बताया था। इसमें यह भी कहा गया था कि मराला में पानी का तेज बहाव बना रहेगा और बारिश कम होने पर यह धीरे-धीरे घटेगा। जायसवाल ने कहा कि इसलिए, नदी के बहाव में यह वृद्धि भारी मानसूनी बारिश की एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है न कि भारत द्वारा जानबूझकर उठाए गए कदम का नतीजा। मौसम की वजह से आई बाढ़ की इस घटना को ऊपरी क्षेत्र से की गई छेड़छाड़ के रूप में पेश करने की कोशिशें गलत और तकनीकी रूप से आधारहीन हैं। उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान की अपनी आधिकारिक बाढ़ चेतावनियों के भी विपरीत है।

  • जम्मू- कश्मीर के बारामूला जिले में महसूस किए गए भूकंप के झटके…. तीव्रता 3.6 दर्ज

    जम्मू- कश्मीर के बारामूला जिले में महसूस किए गए भूकंप के झटके…. तीव्रता 3.6 दर्ज


    श्रीनगर।
    जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के बारामूला जिले (Baramulla district) में सोमवार तड़के भूकंप (Earthquake) के हल्के झटके महसूस किए गए. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता (Earthquake Intensity 3.6) रिक्टर स्केल (Richter scale) पर 3.6 दर्ज की गई. यह भूकंप रात करीब 2 बजे आया और इसका केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई में था.

    भूकंप के झटके बारामूला के अलावा कश्मीर घाटी के कई अन्य इलाकों में भी महसूस किए गए. अचानक आए झटकों से लोगों में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई. एहतियात के तौर पर कई लोग अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए. हालांकि, किसी तरह के जान-माल के नुकसान या किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली।

    राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भूकंप की जानकारी दी. इसी साल फरवरी में भी बारामूला जिले में 4.6 तीव्रता का भूकंप आया था. उस समय पट्टन क्षेत्र भूकंप का केंद्र था और घाटी के कई हिस्सों में झटके महसूस किए गए थे. कश्मीर भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है. यह इलाका उच्च भूकंपीय जोन में स्थित है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की लगातार गतिविधियों के कारण समय-समय पर भूकंप के झटके महसूस होते रहते हैं।

    इससे पहले 9 जुलाई को सुबह-सुबह महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए थे. नांदेड़, हिंगोली और परभणी जिलों में भूकंप के झटके महसूस किए गए. झटके हल्की तीव्रता के थे, लेकिन लोग दाहशत में अपने घरों से बाहर निकल आए.

    गत 27 जून को अफगानिस्तान के हिंदूकुश क्षेत्र में 6.2 तीव्रता का भूकंप आया था. भूकंप का केंद्र पूर्वोत्तर अफगानिस्तान में कालाफगान से करीब 81 किलोमीटर दूर, 36.442° उत्तरी अक्षांश और 70.672° पूर्वी देशांतर पर और धरती की सतह से 215 किलोमीटर की गहराई में था. भूकंप का केंद्र धरती की सतह से अत्यधिक गहराई में होने के कारण इसके झटके पाकिस्तान, भारत के उत्तरी हिस्से, चीन, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और तुर्कमेनिस्तान समेत कई देशों में महसूस किए गए थे।

  • ढाका में भारत ने जताई कड़ी आपत्ति: सेमिनार में जम्मू-कश्मीर का गलत नक्शा दिखाए जाने पर किया विरोध

    ढाका में भारत ने जताई कड़ी आपत्ति: सेमिनार में जम्मू-कश्मीर का गलत नक्शा दिखाए जाने पर किया विरोध


    नई दिल्ली। बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के दौरान भारत ने जम्मू-कश्मीर को लेकर दिखाए गए कथित गलत नक्शे पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। यह मामला उस समय सामने आया जब एक प्रस्तुति के दौरान भारतीय मानचित्र में जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दर्शाया गया।

    यह सेमिनार बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज (BIISS) में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का विषय था ‘सार्क को फिर से मजबूत बनाने के रास्ते’। सेमिनार में भारत में बांग्लादेश के पूर्व उच्चायुक्त रह चुके अहमद तारिक करीम प्रस्तुति दे रहे थे। इसी दौरान प्रदर्शित किए गए नक्शे पर भारतीय पक्ष ने आपत्ति जताई।

    ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग की सेकंड सेक्रेटरी पूजा कुमारी झा ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कहा कि प्रस्तुत किया गया नक्शा गलत है और जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस तरह के चित्रण का विरोध करता है।

    करीम ने अपनी ओर से सफाई देते हुए कहा कि यह नक्शा केवल सांकेतिक (प्रतीकात्मक) उद्देश्य से इस्तेमाल किया गया था और इसमें वास्तविक सीमाओं को प्रदर्शित नहीं किया गया है। हालांकि, भारतीय अधिकारी ने इस स्पष्टीकरण से असहमति जताते हुए दोबारा भारत का आधिकारिक रुख दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है।

    बाद में करीम ने पूछा कि क्या पूजा झा भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। इस पर उन्होंने स्वयं को भारतीय उच्चायोग की अधिकारी बताया। इसके बाद करीम ने कहा कि उनकी आपत्ति को नोट कर लिया गया है और फिर अपनी प्रस्तुति जारी रखी।

    सेमिनार में बांग्लादेश की विदेश मामलों की राज्य मंत्री शमा ओबैद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। अपने संबोधन में उन्होंने दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने और सार्क को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने संगठन की कार्यक्षमता, वित्तीय मजबूती और बेहतर फॉलो-अप व्यवस्था को प्राथमिकता देने की बात कही।

    ओबैद ने यह भी संकेत दिया कि बांग्लादेश आने वाले महीनों में सार्क सदस्य देशों के बीच विश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से कुछ नई पहल पर विचार कर रहा है। इनमें ढाका में मौजूद सार्क देशों के राजदूतों के साथ बैठकें और काठमांडू स्थित सार्क सचिवालय के साथ समन्वय बढ़ाने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स ने पूजा कुमारी झा की तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने मौके पर ही भारत का आधिकारिक पक्ष स्पष्ट रूप से सामने रखा।

  • देशविरोधी कंटेंट पर सरकार का शिकंजा स्कूलों और कोचिंग सेंटरों की किताबों की होगी स्क्रीनिंग

    देशविरोधी कंटेंट पर सरकार का शिकंजा स्कूलों और कोचिंग सेंटरों की किताबों की होगी स्क्रीनिंग


    नई दिल्ली । जम्मू कश्मीर सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा और अहम फैसला लिया है। सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के साथ साथ कोचिंग संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे अपनी लाइब्रेरी कक्षाओं और अन्य शैक्षणिक स्थानों पर रखी सभी किताबों की गहन जांच करें। इस जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों तक ऐसी कोई पुस्तक या अध्ययन सामग्री न पहुंचे जिसमें देशविरोधी विचार अलगाववाद हिंसा या किसी प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री शामिल हो। सरकार का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच वैज्ञानिक दृष्टिकोण और राष्ट्रीय मूल्यों का विकास करना है इसलिए किसी भी प्रकार की भ्रामक सामग्री को शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनने दिया जाएगा।

    स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार सभी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों के प्रमुखों को सात दिनों के भीतर अपनी लाइब्रेरी और कक्षाओं में मौजूद पुस्तकों की जांच पूरी करनी होगी। इसके बाद उन्हें प्रमाणित करना होगा कि उनके संस्थान में ऐसी कोई पुस्तक मौजूद नहीं है जो राष्ट्रीय हितों के खिलाफ हो या छात्रों के मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालती हो। यदि जांच के दौरान कोई संदिग्ध या आपत्तिजनक पुस्तक मिलती है तो उसकी पूरी जानकारी संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध करानी होगी ताकि आगे आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

    यह कदम हाल ही में सामने आए उस विवाद के बाद उठाया गया है जिसमें कुछ पुस्तकों में जम्मू कश्मीर को भारत के कब्जे वाला क्षेत्र बताया गया था और कुछ अलगाववादी व्यक्तियों का सकारात्मक चित्रण किया गया था। इन पुस्तकों के सामने आने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीर मामला मानते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी। इसके बाद उपराज्यपाल ने संबंधित शिक्षा अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया और पूरे प्रदेश में शैक्षणिक सामग्री का ऑडिट कराने के निर्देश दिए।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी शिक्षण संस्थानों में उपयोग होने वाली सामग्री नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप होनी चाहिए। ऐसी किसी भी पुस्तक को स्वीकार नहीं किया जाएगा जो धार्मिक भावनाओं को आहत करे समाज में विभाजन पैदा करे या छात्रों को भटकाने का प्रयास करे। शिक्षा विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और संस्थानों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    इस पूरे मामले पर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे इतिहास और वैचारिक स्वतंत्रता से जोड़कर देखा है। कुछ नेताओं का कहना है कि किताबों की स्क्रीनिंग के नाम पर इतिहास को बदला नहीं जाना चाहिए जबकि सरकार का तर्क है कि छात्रों को तथ्य आधारित और संतुलित शिक्षा देना उसकी जिम्मेदारी है तथा किसी भी प्रकार की भ्रामक या राष्ट्रविरोधी सामग्री को शिक्षा का हिस्सा नहीं बनने दिया जा सकता।

    इस बीच बाल अधिकारों से जुड़े संगठनों ने भी इस विषय को गंभीर बताया है। उनका कहना है कि बच्चों को ऐसी सामग्री उपलब्ध कराना जो हिंसा अलगाववाद या भ्रामक विचारों को बढ़ावा देती हो उनके मानसिक विकास और भविष्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए शैक्षणिक संस्थानों में पाठ्य सामग्री की समय समय पर समीक्षा आवश्यक है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा किसी भी समाज की सबसे मजबूत नींव होती है। ऐसे में स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाई जाने वाली पुस्तकों का तथ्यपरक संतुलित और संविधान की भावना के अनुरूप होना बेहद जरूरी है। यदि किसी सामग्री पर विवाद की आशंका हो तो उसकी निष्पक्ष समीक्षा कर उचित निर्णय लेना शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

  • किताबों से कंप्यूटर तक, माछिल में सेना ने खोले शिक्षा और रोजगार के नए रास्ते

    किताबों से कंप्यूटर तक, माछिल में सेना ने खोले शिक्षा और रोजगार के नए रास्ते


    नई दिल्ली । भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती कुपवाड़ा जिले के माछिल क्षेत्र में शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आधुनिक स्टडी हब और स्किल डेवलपमेंट सेंटर का उद्घाटन किया है। इस पहल का उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं, महिलाओं और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुखी कौशल उपलब्ध कराना है। इस नई सुविधा को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है और उन्होंने सेना की इस पहल की खुले दिल से सराहना की है।

    नवनिर्मित स्टडी हब में कंप्यूटर प्रशिक्षण, आईटी शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, लाइब्रेरी और हाई स्पीड वाई-फाई जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा महिलाओं के लिए कालीन बुनाई, सिलाई और अन्य कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की गई है, जिससे वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें।

    स्थानीय युवतियों ने कहा कि पहले इस तरह की सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। कंप्यूटर सीखने या व्यावसायिक प्रशिक्षण लेने के लिए उन्हें कुपवाड़ा शहर जाना पड़ता था, जिसमें काफी समय लगता था और कई बार परिवार की अनुमति भी नहीं मिल पाती थी। अब गांव में ही आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र खुलने से नई-नई तकनीक और हुनर सीखने का अवसर मिलेगा, जिससे उनके भविष्य को नई दिशा मिलेगी।

    एक अन्य युवती ने सेना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कंप्यूटर सेंटर, कालीन बुनाई केंद्र और अन्य प्रशिक्षण सुविधाएं शुरू होने से अब स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिल सकेगा। इससे समय और संसाधनों की बचत होगी तथा अधिक से अधिक लड़कियां शिक्षा और कौशल विकास से जुड़ सकेंगी।

    स्थानीय युवकों ने भी इस पहल को क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि इस केंद्र में माताओं और बहनों के लिए सिलाई और अन्य रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध होगा, जिससे महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि समाज के विकास और युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    गांव के एक निवासी ने बताया कि इस परियोजना में समाज के हर वर्ग को ध्यान में रखा गया है। विद्यार्थियों के लिए आधुनिक लाइब्रेरी और वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे वे प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकेंगे। डिजिटल संसाधनों तक आसान पहुंच मिलने से ग्रामीण छात्रों को अब बड़े शहरों जैसी सुविधाएं अपने क्षेत्र में ही मिलेंगी।

    स्थानीय लोगों का मानना है कि इस स्टडी हब और स्किल डेवलपमेंट सेंटर से आने वाले वर्षों में क्षेत्र के युवाओं को शिक्षा, तकनीकी ज्ञान और रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों ने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि सीमावर्ती गांव में कंप्यूटर शिक्षा और आधुनिक प्रशिक्षण की ऐसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। भारतीय सेना की यह पहल न केवल शिक्षा को बढ़ावा देगी बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • जम्मू-कश्मीर में सीमा पर हाई अलर्ट, LoC पार करते पकड़ा गया PoK निवासी; जांच शुरू

    जम्मू-कश्मीर में सीमा पर हाई अलर्ट, LoC पार करते पकड़ा गया PoK निवासी; जांच शुरू


    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा पर सुरक्षाबलों ने एक संदिग्ध घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करते हुए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के एक नागरिक को हिरासत में लिया है। सुरक्षा एजेंसियां पकड़े गए व्यक्ति से गहन पूछताछ कर रही हैं ताकि उसके भारत में प्रवेश के उद्देश्य और संभावित संपर्कों का पता लगाया जा सके। घटना ऐसे समय सामने आई है जब अमरनाथ यात्रा और श्री माता वैष्णो देवी यात्रा को लेकर पूरे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही हाई अलर्ट पर है।

    अधिकारियों के अनुसार पकड़े गए व्यक्ति की पहचान मोहम्मद सज्जाद के रूप में हुई है जो रफीक का पुत्र और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के पोलास क्षेत्र का निवासी बताया जा रहा है। नियमित गश्त और निगरानी के दौरान सुरक्षाबलों ने उसकी संदिग्ध गतिविधियां देखीं जिसके बाद उसे रोककर हिरासत में ले लिया गया। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं और यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि वह गलती से सीमा पार आया या किसी विशेष उद्देश्य से भारतीय सीमा में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था।

    इस बीच जम्मू-कश्मीर में आगामी श्री अमरनाथ यात्रा और श्री माता वैष्णो देवी यात्रा को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। उधमपुर रियासी रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक शिव कुमार शर्मा ने कटड़ा में उच्चस्तरीय संयुक्त सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में पुलिस सेना सीआरपीएफ इंटेलिजेंस ब्यूरो सीआईडी रेलवे ट्रैफिक पुलिस और श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

    बैठक में कटड़ा शहर यात्रा मार्ग और भवन क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई। सीसीटीवी निगरानी प्रणाली जवानों की तैनाती आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को और मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त निगरानी और सुरक्षा बलों की रणनीतिक तैनाती के निर्देश दिए।

    कटड़ा से भवन तक पूरे यात्रा मार्ग की सुरक्षा व्यवस्था का भी बारीकी से आकलन किया गया ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और निर्बाध यात्रा का अनुभव मिल सके। इसके अलावा होटल लॉज गेस्ट हाउस होमस्टे और अन्य ठहरने की जगहों के नियमित सत्यापन और निरीक्षण के निर्देश भी दिए गए हैं ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।

    सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि तीर्थयात्रा के दौरान किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और खुफिया सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को पूरी तरह सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और जम्मू-कश्मीर में धार्मिक यात्राओं को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना है।

  • बाबा बर्फानी यात्रा होगी ग्रीन, पॉलीथिन और सिंगल यूज प्लास्टिक पूरी तरह बैन

    बाबा बर्फानी यात्रा होगी ग्रीन, पॉलीथिन और सिंगल यूज प्लास्टिक पूरी तरह बैन


    नई दिल्ली । इस वर्ष होने वाली श्री अमरनाथ यात्रा को स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए प्रशासन ने कई अहम फैसले लिए हैं। यात्रा के दौरान बालटाल और पहलगाम आधार शिविरों से लेकर पवित्र अमरनाथ गुफा तक पॉलीथिन बैग थर्माकोल और सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। प्रशासन का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र के प्राकृतिक सौंदर्य को सुरक्षित रखना और यात्रा मार्ग को प्रदूषण मुक्त बनाना है।

    श्रद्धालुओं को यदि आधार शिविर पर पॉलीथिन बैग के साथ पाया जाता है तो उन्हें उसे आगे ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसे यात्रियों को किसी तरह की असुविधा न हो इसके लिए प्रशासन ने निशुल्क कपड़े के थैलों की व्यवस्था की है। दोनों प्रमुख आधार शिविरों बालटाल और पहलगाम में करीब डेढ़ लाख कपड़े के बैग तैयार रखे गए हैं जिन्हें जरूरतमंद श्रद्धालुओं को मुफ्त वितरित किया जाएगा।

    यात्रा मार्ग पर संचालित होने वाले सभी भंडारों और दुकानदारों को भी पर्यावरण संरक्षण संबंधी नियमों का पालन करना होगा। भोजन परोसने के लिए केवल स्टील की प्लेट और गिलास का उपयोग करने की अनुमति होगी। प्लास्टिक के गिलास या अन्य सिंगल यूज प्लास्टिक सामग्री का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

    श्राइन बोर्ड ने इस बार कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को भी पहले से अधिक मजबूत बनाया है। यात्रा मार्ग पर उत्पन्न होने वाले कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की जिम्मेदारी इंदौर की गैर सरकारी संस्था स्वाहा रिसोर्स मैनेजमेंट को सौंपी गई है। वहीं जम्मू कश्मीर के ग्रामीण स्वच्छता विभाग को पूरे अभियान की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है ताकि स्वच्छता व्यवस्था प्रभावी ढंग से संचालित हो सके।

    यात्रा मार्ग पर सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग चार हजार कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा 623 कर्मचारी विशेष रूप से कचरा संग्रहण और उसके प्रबंधन का कार्य संभालेंगे। प्रशासन का लक्ष्य है कि इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में कम से कम 15 प्रतिशत कम कचरा उत्पन्न हो।

    श्रद्धालुओं की सुविधा और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए यात्रा मार्ग पर करीब पांच हजार अस्थायी शौचालय और स्नानघर भी स्थापित किए गए हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य खुले में गंदगी रोकना और यात्रियों को बेहतर स्वच्छता उपलब्ध कराना है।

    पिछले वर्ष अमरनाथ यात्रा के दौरान लगभग 450 टन कचरा एकत्र हुआ था। इस बार प्रशासन ने पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए कचरे की मात्रा कम करने और पूरी यात्रा को अधिक स्वच्छ बनाने का लक्ष्य तय किया है। अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं के सहयोग से ही इस अभियान को सफल बनाया जा सकता है और बाबा बर्फानी की पवित्र यात्रा को स्वच्छ तथा प्रदूषण मुक्त बनाया जा सकेगा।

  • पुलवामा हमले के कथित मास्टरमाइंड हमजा बुरहान की हत्या: PoK में गोलीबारी से मौत

    पुलवामा हमले के कथित मास्टरमाइंड हमजा बुरहान की हत्या: PoK में गोलीबारी से मौत



    नई दिल्ली। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से एक बड़ी और संवेदनशील खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2019 के पुलवामा आतंकी हमले से जुड़े बताए जा रहे हमजा बुरहान की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी है।कहा जा रहा है कि उस पर PoK क्षेत्र में कई राउंड फायरिंग की गई, जिसके बाद उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    कौन था हमजा बुरहान?
    रिपोर्ट्स और सुरक्षा एजेंसियों के दावों के अनुसार:

    असली नाम: अर्जुमंद गुलजार डार

    उर्फ: हमजा बुरहान / “डॉक्टर”

    मूल रूप से: पुलवामा (जम्मू-कश्मीर) का निवासी

    संगठन से जुड़ाव: आतंकी संगठन Al Badr

    उसे 2019 के पुलवामा हमले की साजिश में शामिल माना जाता था, जिसमें 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे।

     भारत की कार्रवाई और दर्ज स्थिति
    भारत सरकार ने 2022 में उसे UAPA के तहत आतंकी घोषित किया था

    उस पर आतंकी भर्ती, फंडिंग और हमलों की साजिश में शामिल होने के आरोप थे

    वह पाकिस्तान और PoK में सक्रिय नेटवर्क चलाने का आरोप झेल रहा था

    किन गतिविधियों में नाम सामने आया था?
    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार उस पर आरोप थे कि वह:

    युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती करता था

    फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट देता था

    CRPF पर ग्रेनेड हमलों जैसी घटनाओं में भूमिका में था

    विस्फोटक बरामदगी मामलों से जुड़ा था

    हत्या को लेकर क्या दावा है?
    रिपोर्ट्स में कहा गया है कि:

    PoK में अज्ञात हमलावरों ने उसे निशाना बनाया

    कई गोलियां लगने से मौके पर ही मौत हो गई

    हमले के पीछे कौन था, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है

     आधिकारिक स्थिति अभी तक:

    किसी भी सरकार ने इस हत्या की स्वतंत्र पुष्टि या जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है

    यह घटना फिलहाल मीडिया रिपोर्ट्स और सुरक्षा सूत्रों के हवाले से सामने आई है

  • कटरा: मां वैष्णो देवी की नगरी, जहां श्रद्धा के साथ खानपान के नियम भी निभाए जाते हैं

    कटरा: मां वैष्णो देवी की नगरी, जहां श्रद्धा के साथ खानपान के नियम भी निभाए जाते हैं

    नई दिल्ली। भारत में खाने की बात हो और प्याज-लहसुन का जिक्र न आए, ऐसा शायद ही कभी होता हो। हर घर की रसोई से लेकर बड़े-बड़े होटलों तक इन दोनों का इस्तेमाल आम माना जाता है। लेकिन जम्मू-कश्मीर का कटरा एक ऐसा शहर है, जहां पहुंचते ही खान-पान की पूरी तस्वीर बदल जाती है। यहां न बाजारों में प्याज-लहसुन बिकता दिखाई देता है, न ढाबों और होटलों के खाने में इसका इस्तेमाल होता है और न ही लोग इसे अपने घरों में रखना पसंद करते हैं। यही वजह है कि कटरा को देश के सबसे अनोखे धार्मिक शहरों में गिना जाता है।

    कटरा माता वैष्णो देवी मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां से माता के दरबार के लिए यात्रा शुरू करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यात्रा शुरू करने से पहले शरीर और मन की पवित्रता बनाए रखना जरूरी माना जाता है। इसी वजह से पूरे शहर में सात्विक भोजन की परंपरा विकसित हुई। स्थानीय लोगों का मानना है कि प्याज और लहसुन तामसिक भोजन की श्रेणी में आते हैं, जो मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। यही कारण है कि वर्षों से यहां इनका इस्तेमाल नहीं किया जाता।

    सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह परंपरा किसी सरकारी आदेश या कानूनी प्रतिबंध के कारण नहीं चल रही, बल्कि लोगों की आस्था और आपसी सम्मान से कायम है। यहां रहने वाले दूसरे धर्मों के लोग, यहां तक कि मुस्लिम परिवार भी स्थानीय परंपराओं का सम्मान करते हुए प्याज-लहसुन से दूरी बनाए रखते हैं। यही सामाजिक सौहार्द कटरा को बाकी शहरों से अलग पहचान देता है।

    अक्सर लोगों को लगता है कि बिना प्याज और लहसुन के खाना स्वादिष्ट नहीं हो सकता, लेकिन कटरा इस सोच को बदल देता है। यहां के रसोइए हींग, अदरक, हरी मिर्च और खास मसालों के इस्तेमाल से ऐसा स्वाद तैयार करते हैं कि श्रद्धालु खाने की तारीफ किए बिना नहीं रहते। दाल, कढ़ी, सब्जियां, पूरी और चटनियों का स्वाद यहां अलग ही अनुभव देता है। कई लोग तो कटरा के सात्विक भोजन को सेहत और स्वाद का बेहतरीन मेल मानते हैं।

    कटरा की यह परंपरा सिर्फ खान-पान तक सीमित नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति और धार्मिक वातावरण का हिस्सा बन चुकी है। दुकानदार भी प्याज-लहसुन का स्टॉक नहीं रखते और यदि कोई पर्यटक इसकी मांग करता है, तो उसे विनम्रता से यहां की परंपरा के बारे में बताया जाता है। यही वजह है कि कटरा आज भी अपनी आध्यात्मिक पहचान और सात्विक जीवनशैली के कारण देश-दुनि