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  • जमशेदपुर के बाटालुका गांव में नक्सल विरोधी अभियान पर निकली पुलिस टीम को ग्रामीणों ने बनाया बंधक

    जमशेदपुर के बाटालुका गांव में नक्सल विरोधी अभियान पर निकली पुलिस टीम को ग्रामीणों ने बनाया बंधक

    नई दिल्ली । झारखंड के जमशेदपुर अंतर्गत पटमदा थाना क्षेत्र स्थित बाटालुका गांव में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों को स्थानीय ग्रामीणों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। शनिवार तड़के सर्च ऑपरेशन पर निकली पुलिस और कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम को आक्रोशित ग्रामीणों ने लगभग पांच घंटे तक बंधक बनाए रखा। ग्रामीणों द्वारा एक परिवार के सदस्यों को हिरासत में लिए जाने का विरोध किया जा रहा था, जिसके बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप से मामला शांत हो सका।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, पटमदा थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस और कोबरा बटालियन के जवानों की टीम दलमा रेंज के तराई इलाकों में बड़े नक्सली कमांडरों की तलाश में उतरी थी। सुरक्षा बल एक करोड़ के इनामी भाकपा माओवादी आकाश और 15 लाख के इनामी रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन समेत अन्य संदिग्धों की तलाश में विभिन्न गांवों में सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। इस दौरान पुलिस टीम जब बाटालुका गांव पहुंची तो एक स्थानीय निवासी और उसकी दो पत्नियों को पूछताछ के लिए साथ ले जाने लगी।

    संदेह के आधार पर की जा रही इस कार्रवाई के दौरान घर में मौजूद बालिका के रोने पर आसपास के ग्रामीण एकत्र हो गए। देखते ही देखते लाठी-डंडों से लैस सैकड़ों ग्रामीणों ने पुलिस टीम को चारों तरफ से घेर लिया। ग्रामीणों की मांग थी कि हिरासत में लिए गए लोगों को तुरंत रिहा किया जाए और पूर्व से पुलिस हिरासत में रखे गए एक अन्य ग्रामीण को भी मुक्त किया जाए। बारिश के बीच सुबह पांच बजे से दस बजे तक सुरक्षा बल गांव में फंसे रहे और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का इंतजार करते रहे।

    घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक और राजनीतिक प्रयास शुरू हुए। स्थानीय जिला पार्षद के हस्तक्षेप और मध्यस्थता के बाद पूर्व में हिरासत में लिए गए व्यक्ति को मौके पर लाया गया। इसके पश्चात ग्रामीणों और पुलिस के बीच बातचीत के जरिए सहमति बनी और हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ने के बाद ग्रामीणों ने सुरक्षा बलों को वहां से जाने दिया। लगभग पांच घंटे के भारी तनाव के बाद क्षेत्र में स्थिति सामान्य हो सकी।

    उल्लेखनीय है कि बाटालुका और आसपास के तराई क्षेत्र लंबे समय से नक्सल विरोधी अभियानों के केंद्र में रहे हैं। भौगोलिक दृष्टि से यह इलाका जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जिसका फायदा उठाकर असामाजिक तत्व आवाजाही करते रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस क्षेत्र में लगातार निगरानी बनाए रखती हैं ताकि नक्सली गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

    झारखंड की इस घटना के बाद सीमावर्ती राज्यों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात पुलिस और सुरक्षा बल इस प्रकार के अभियानों के दौरान स्थानीय नागरिकों के साथ संवाद और प्रोटोकॉल को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं। पुलिस प्रशासन अब पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कर रहा है ताकि भविष्य में इस तरह के गतिरोध से बचा जा सके।

  • संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए चलाए जाएंगे राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम

    संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए चलाए जाएंगे राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम

    नई दिल्ली । संत गुरु रविदास महाराज के समता, सेवा और सामाजिक न्याय के संदेश को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने एक राष्ट्रव्यापी पहल की शुरुआत की है। जमशेदपुर में एक औपचारिक घोषणा के दौरान इस ‘समरसता संकल्प अभियान’ की विस्तृत रूपरेखा साझा की गई। यह व्यापक अभियान आषाढ़ पूर्णिमा से प्रारंभ होकर माघ पूर्णिमा तक चलेगा, जिसमें राष्ट्रीय, राज्य, जिला, मंडल और ग्राम स्तर तक विविध सांस्कृतिक व सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

    इस अभियान का मुख्य ध्येय संत रविदास द्वारा प्रतिपादित ‘बेगमपुरा’ के उस दर्शन को साकार करना है, जो शोषण और भेदभाव से मुक्त समाज की परिकल्पना पर आधारित है। संगठन का मानना है कि विकसित भारत के निर्माण में समाज के सभी वर्गों की समान सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए समाज के प्रत्येक स्तर पर सद्भाव और समरसता का वातावरण तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

    अभियान के तहत कई बड़े कार्यक्रमों की योजना तैयार की गई है। इसके शुरुआती चरण में शाम को दीप महोत्सव का आयोजन किया जाएगा, जिसके साथ ही वाराणसी स्थित पवित्र स्थल की पावन मिट्टी से भरे कलश देश भर के विभिन्न क्षेत्रों में भेजे जाएंगे। इसके अलावा पंजाब के जालंधर से वाराणसी तक एक भव्य समरसता यात्रा भी निकाली जाएगी। एक महीने तक चलने वाली इस यात्रा के माध्यम से आम जनमानस को संत रविदास के विचारों से जोड़ने का प्रयास होगा।

    सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करने के लिए पूरे अभियान के दौरान संत संपर्क, छात्रावास संपर्क, समरसता संवाद, भजन-कीर्तन और विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों की श्रृंखला चलेगी। इसके तहत समाज के प्रबुद्ध जनों और संतों से सीधा संवाद स्थापित किया जाएगा। स्थानीय स्तर पर इन सभी गतिविधियों के सुचारू संचालन और समन्वय के लिए जिला और मंडल स्तर पर विशेष आयोजन समितियों का गठन भी शुरू कर दिया गया है।