Tag: Jantar Mantar Protest
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CJP के प्रदर्शन से पहले सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, छात्रों और युवाओं की भीड़ जुटाने की आशंका के बीच सरकार ने ऐसे बनाया सुरक्षा चक्र
नई दिल्ली। नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP और विपक्षी INDIA गठबंधन के दिल्ली मार्च को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क रहीं। शनिवार को प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने राजधानी के संवेदनशील इलाकों में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए। जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली के आसपास बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों की आवाजाही पर नजर रखी गई। सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को एक बड़ी भीड़ में एकजुट होने से रोकना और किसी भी संभावित हिंसक स्थिति से निपटना था। हालांकि हिंसा भड़काने की कथित साजिश को लेकर सामने आए दावे सुरक्षा एजेंसियों के आकलन पर आधारित हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।रिपोर्ट के अनुसार खुफिया एजेंसियों को आशंका थी कि प्रदर्शन के आयोजक छात्रों और युवाओं को आगे रखकर सेंट्रल दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में छोटे-छोटे समूहों में विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। इससे कई स्थानों पर एक साथ भीड़ जुटने और कानून व्यवस्था की चुनौती पैदा होने की आशंका जताई गई थी। इसी इनपुट के आधार पर पुलिस ने जंतर-मंतर तक पहुंचने वाले रास्तों और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी। 37 से अधिक स्थानों पर बैरिकेडिंग और अर्धसैनिक बलों की तैनाती किए जाने की जानकारी सामने आई। अधिकारियों की रणनीति यह थी कि अलग-अलग स्थानों पर मौजूद समूह एकजुट होकर बड़ी भीड़ नहीं बना सकें और स्थिति पर समय रहते नियंत्रण रखा जा सके।सुरक्षा एजेंसियों के लिए 20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर हुई झड़पों का अनुभव भी महत्वपूर्ण बताया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उस दौरान प्रदर्शन की अनुमति सीमित अवधि के लिए होने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने लंबे समय तक वहां डेरा जमाए रखा था। इसके बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने प्रदर्शन से जुड़े आयोजनों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिक सतर्कता बरती। रिपोर्ट के मुताबिक आयोजकों के बीच संवाद के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और बर्नर फोन के इस्तेमाल की आशंका भी जताई गई थी। हालांकि इन माध्यमों के इस्तेमाल से संबंधित सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।इस बार दिल्ली पुलिस ने रियल टाइम सूचना और निगरानी व्यवस्था पर भी जोर दिया। रिपोर्ट में बताया गया है कि डिजिटल निगरानी और मैसेजिंग नेटवर्क से जुड़ी सूचनाओं के आधार पर पुलिस कमांड सेंटर को प्रदर्शनकारियों की संभावित आवाजाही और भीड़ के आकार पर नजर रखने में मदद मिली। इसके साथ ही अलग-अलग स्थानों पर पुलिस बल तैनात किए गए ताकि किसी क्षेत्र में अचानक भीड़ बढ़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। प्रदर्शन के प्रमुख आयोजकों और विपक्षी नेताओं को अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिए जाने की भी जानकारी सामने आई। पुलिस की इस कार्रवाई से प्रदर्शनकारियों के एकजुट होने की संभावना प्रभावित हुई।इस पूरे घटनाक्रम के बीच केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विरोध प्रदर्शन और कानून व्यवस्था को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध का अधिकार सभी को है लेकिन अराजकता के लिए कोई जगह नहीं है। संवैधानिक संस्थाओं की साख को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जा सकता। CJP के प्रदर्शन को लेकर उठे सवालों के बीच राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार पर बहस तेज हो गई है। इस मामले में आगे की स्थिति पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन से जुड़े तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि पर निर्भर करेगी। -

वोटर लिस्ट और धार्मिक स्थलों के मुद्दे पर प्रदर्शन 29 सितंबर को जंतर-मंतर पहुंचने की महबूबा की अपील
नई दिल्ली । पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी यानी PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने 29 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में लोगों से शामिल होने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए धर्मनिरपेक्ष सोच रखने वाले लोगों से प्रदर्शन में पहुंचने को कहा है। यह प्रदर्शन मॉनिटरिंग कमिटी फॉर इंडियन मुस्लिम्स की ओर से आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रदर्शन का समय दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक बताया गया है।महबूबा मुफ्ती ने अपने वीडियो संदेश में देश में धार्मिक स्थलों और मतदाता सूचियों से जुड़े कई मुद्दे उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में मस्जिदों दरगाहों और चर्चों को गिराया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि तैयार की जा रही मतदाता सूचियों में विपक्षी समर्थकों धर्मनिरपेक्ष सोच रखने वाले लोगों और खास तौर पर मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। इन आरोपों को महबूबा मुफ्ती ने प्रदर्शन के प्रमुख मुद्दों से जोड़ते हुए लोगों से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की है।
PDP प्रमुख ने कहा कि मॉनिटरिंग कमिटी फॉर इंडियन मुस्लिम्स ने इन मुद्दों को लेकर 29 सितंबर को प्रदर्शन करने का फैसला किया है। उन्होंने धर्मनिरपेक्ष सोच रखने वाले लोगों से इसमें भाग लेने की अपील की। अपने संदेश में उन्होंने लोकतंत्र भाईचारे और देश की समावेशी सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े मूल्यों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक ऐसे मुद्दों पर लोगों को अपनी आवाज उठानी चाहिए।
महबूबा मुफ्ती की यह अपील ऐसे समय आई है जब मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। चुनाव आयोग ने अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए SIR की प्रक्रिया और समयसीमा तय की है। आयोग के आधिकारिक दस्तावेज में दिल्ली और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के लिए SIR से जुड़ी प्रक्रिया का कार्यक्रम दर्ज है। हालांकि किसी मतदाता का नाम हटाया जाना या जोड़े जाना संबंधित चुनावी प्रक्रिया और दावे-आपत्तियों के निपटारे के तहत तय होता है।
महबूबा मुफ्ती ने अपने संदेश में लोगों से अपील करते हुए कहा कि जो भारतीय देश के लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को महत्व देते हैं उन्हें 29 सितंबर को जंतर-मंतर पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के जरिए देश के लोकतंत्र भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब से जुड़े मूल्यों के लिए आवाज उठाई जाएगी।
इस प्रदर्शन में किन संगठनों और कितने लोगों की भागीदारी होगी इसकी अंतिम तस्वीर 29 सितंबर को ही स्पष्ट होगी। फिलहाल महबूबा मुफ्ती की अपील के बाद यह कार्यक्रम दिल्ली में मतदाता सूची धार्मिक स्थलों और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक चर्चा का एक और केंद्र बन गया है। प्रदर्शन के दौरान उठाए जाने वाले मुद्दों और आयोजकों की मांगों पर आगे की स्थिति सामने आने की उम्मीद है।
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‘आरक्षण कोई खैरात नहीं, संवैधानिक अधिकार’, जंतर-मंतर प्रदर्शन पर बोले चिराग पासवान
पटना। जंतर-मंतर पर आरक्षण खत्म करने की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शन के बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने आरक्षण को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। पटना एयरपोर्ट से दिल्ली रवाना होने से पहले मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि आरक्षण कोई खैरात नहीं, बल्कि संविधान से मिला अधिकार है। इसे किसी के कहने या मांग करने भर से खत्म नहीं किया जा सकता।चिराग पासवान ने कहा कि आरक्षण का उद्देश्य उन सामाजिक वर्गों को आगे लाना है, जिन्हें लंबे समय तक भेदभाव और वंचना का सामना करना पड़ा। उन्होंने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान में इन वर्गों को चिन्हित कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने और समान अवसर देने के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया।
‘आज भी भेदभाव की घटनाएं सामने आती हैं’
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि समाज में आज भी भेदभाव की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में आरक्षण की जरूरत और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने आरक्षण खत्म करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों की चिंताओं को भी सुने जाने की बात कही।चिराग ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी समस्या का समाधान बातचीत और संवाद के जरिए निकाला जा सकता है। प्रदर्शनकारियों के साथ बैठकर चर्चा होनी चाहिए, ताकि आरक्षण की जरूरत और इसके पीछे के उद्देश्य को लेकर बातचीत हो सके।
‘प्रदर्शनकारियों की बात सुनी जानी चाहिए’
रामदास अठावले के बयान से जुड़े सवाल पर भी चिराग पासवान ने कहा कि प्रदर्शन करने वालों की बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद बेहद जरूरी है और बातचीत के जरिए ही विवादों का समाधान निकाला जा सकता है।बिहार की आर्थिक स्थिति पर तेजस्वी को घेरा
चिराग पासवान ने बिहार की आर्थिक स्थिति को लेकर तेजस्वी यादव के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष को आंकड़ों के साथ अपनी बात रखनी चाहिए थी। विपक्ष की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार पर आरोप लगाना नहीं है, बल्कि राज्य को आगे बढ़ाने में सरकार के साथ मिलकर भूमिका निभाना भी है।उन्होंने कहा कि बिहार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए सरकार राजस्व बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। आने वाले समय में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर भी जोर दिया जाएगा।
‘डबल इंजन सरकार से बिहार को फायदा’
चिराग पासवान ने केंद्र और राज्य में एक ही गठबंधन की सरकार को बिहार के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के मिलकर काम करने से राज्य को फायदा होगा। सरकार का लक्ष्य विकास को गति देने के साथ निवेश बढ़ाना और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करना है। -

विदेशी फंडिंग और डिजिटल कैंपेन की जांच तेज, जंतर मंतर प्रदर्शन मामले में पांच कंपनियां एजेंसियों के निशाने पर
नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए विवादित प्रदर्शन को लेकर जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे मामले में कथित विदेशी फंडिंग डिजिटल कैंपेन और सोशल मीडिया नेटवर्क की गहन पड़ताल कर रही हैं। शुरुआती जांच के आधार पर पांच से अधिक कंपनियां एजेंसियों के रडार पर बताई जा रही हैं। इनमें कुछ ऐसी कंपनियां भी शामिल हैं जो डिजिटल मार्केटिंग सोशल मीडिया कैंपेन और इंफ्लूएंसर मैनेजमेंट से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्रदर्शन से जुड़ी गतिविधियों के लिए धन किस माध्यम से जुटाया गया और उसका इस्तेमाल किस प्रकार किया गया।सूत्रों के अनुसार बीते तीन दिनों के दौरान दिल्ली गुरुग्राम मुंबई और बेंगलुरु स्थित कई कार्यालयों और परिसरों में तलाशी अभियान चलाया गया। इस दौरान वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेज डिजिटल कैंपेन का रिकॉर्ड सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर के साथ हुए समझौते और अन्य महत्वपूर्ण कागजात की जांच की गई। एजेंसियों ने कई डिजिटल उपकरण भी अपने कब्जे में लिए हैं जिनकी फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा सके।
जांच में कुछ संदिग्ध वित्तीय लेनदेन भी सामने आने की बात कही जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इन लेनदेन के माध्यम से सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार के प्रचार अभियान चलाए गए हो सकते हैं। इसी कारण कई सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर भी जांच के दायरे में आए हैं। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या किसी प्रकार के भुगतान के बदले सोशल मीडिया पर विशेष अभियान संचालित किए गए थे। जांच पूरी होने और पर्याप्त दस्तावेजी तथा डिजिटल साक्ष्य मिलने के बाद संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
जांच एजेंसियों ने सोशल मीडिया गतिविधियों की भी विस्तृत समीक्षा शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में करीब दो हजार संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान किए जाने का दावा किया गया है। इनमें से कई अकाउंट विदेशों से संचालित बताए जा रहे हैं जबकि लगभग सात सौ अकाउंट भारत से सक्रिय होने की जानकारी सामने आई है। जांच का फोकस इन खातों के संचालन भुगतान और डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखने पर भी है ताकि पूरे डिजिटल नेटवर्क की भूमिका स्पष्ट की जा सके।
इसी बीच पश्चिम बंगाल एसटीएफ की जांच में गिरफ्तार जैश ए मोहम्मद के संदिग्ध आतंकी हामिम मंडल से जुड़े मामले ने भी जांच को नया आयाम दिया है। सूत्रों के अनुसार पूछताछ में यह जानकारी सामने आई है कि उसने कथित रूप से जंतर मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान पुलिस की वर्दी पहनकर तोड़फोड़ करने की साजिश रची थी। साथ ही कुछ पुलिस अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी निशाना बनाने की योजना होने की बात सामने आई है। हालांकि इन दावों की जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं।
इसके अलावा कई यूट्यूबर और ऑनलाइन कंटेंट क्रिएटर भी जांच एजेंसियों की निगरानी में हैं। जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि प्रदर्शन और उससे जुड़े डिजिटल प्रचार अभियान में उनकी भूमिका क्या थी और क्या किसी प्रकार का आर्थिक लेनदेन या संगठित अभियान चलाया गया था। फिलहाल एजेंसियां सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने तक मामले की विस्तृत पड़ताल जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित वित्तीय नेटवर्क और डिजिटल गतिविधियों में किसकी क्या भूमिका रही।
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जंतर मंतर से संसद तक गूंजा आंदोलन, राहुल गांधी के प्रदर्शन के बाद सरकार ने वांगचुक से की मुलाकात
नई दिल्ली । जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलन ने देश की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। लंबे समय तक आंदोलन को सीमित मानकर चल रही केंद्र सरकार ने अब अपना रुख बदलते हुए सक्रिय पहल शुरू कर दी है। राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के निकट धरने के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और सरकार ने न केवल अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक से संपर्क किया बल्कि आंदोलन में घायल छात्रों से मिलने के लिए केंद्रीय मंत्रियों को अस्पताल भी भेजा। इसके साथ ही संसद में इस मुद्दे पर चर्चा कराने की विपक्ष की मांग को भी सरकार ने स्वीकार कर लिया।नीट पेपर लीक और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ आंदोलन शुरुआती दिनों में सीमित दायरे में दिखाई दे रहा था। जंतर मंतर पर कम संख्या में प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी को देखते हुए माना जा रहा था कि यह आंदोलन ज्यादा प्रभाव नहीं डाल पाएगा। लेकिन जैसे जैसे छात्रों का समर्थन बढ़ा और संसद मार्च के बाद आंदोलन ने नया स्वरूप लिया वैसे वैसे राजनीतिक माहौल भी बदलने लगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी के धरने ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी। इसके बाद सरकार ने तेजी से अपनी रणनीति में बदलाव किया। कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से मिलने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह पहुंचे और उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की। इससे पहले आंदोलन के प्रतिनिधियों को सरकार से मिलने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा था लेकिन बाद में परिस्थितियां तेजी से बदल गईं।
सरकार ने संसद में इस पूरे मुद्दे पर चर्चा के लिए भी सहमति जताई। हालांकि विपक्ष ने इस पर नई शर्त रखते हुए कहा कि चर्चा तभी सार्थक होगी जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा देंगे। इसके बाद इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
इस बीच सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक पत्र साझा करते हुए बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर या व्यक्तिगत रूप से मिलकर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है। उन्होंने लिखा कि सभी ने उन्हें याद दिलाया है कि देश और शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान अभी बाकी है। वांगचुक ने कहा कि वह भी जीना चाहते हैं और अपने छात्रों तथा शिक्षा से जुड़े कार्यों में जल्द लौटना चाहते हैं लेकिन आंदोलन के उद्देश्यों को लेकर उनकी प्रतिबद्धता बनी हुई है।
विश्लेषकों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को लेकर युवाओं में पहले से ही असंतोष था। यही कारण है कि आंदोलन धीरे धीरे व्यापक समर्थन हासिल करता गया और सरकार को अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा।
फिलहाल सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है लेकिन आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि संसद में होने वाली चर्चा और सरकार के अगले कदम इस पूरे विवाद का क्या समाधान निकालते हैं।