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  • मुझे राजनीति से दूर रहने दो', जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दिलजीत दोसांझ की दोटूक प्रतिक्रिया, बोले- मैं कलाकार हूं, नेता नहीं

    मुझे राजनीति से दूर रहने दो', जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दिलजीत दोसांझ की दोटूक प्रतिक्रिया, बोले- मैं कलाकार हूं, नेता नहीं

    नई दिल्ली। पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे कथित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन पर टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। सोशल मीडिया पर लाइव बातचीत के दौरान जब उनसे इस प्रदर्शन को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह राजनीति से दूरी बनाए रखना चाहते हैं और खुद को केवल एक कलाकार मानते हैं।

    दिलजीत हाल ही में अपने प्रशंसकों के साथ इंस्टाग्राम लाइव के माध्यम से जुड़े थे। इस दौरान उन्होंने अपने आगामी प्रोजेक्ट्स, संगीत और फिल्मों से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए। बातचीत के बीच जब एक दर्शक ने उनसे जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बारे में प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस विषय की पूरी जानकारी नहीं है और वह किसी राजनीतिक विवाद का हिस्सा नहीं बनना चाहते।

    उन्होंने बातचीत में कहा कि उन्हें ऐसे मामलों से दूर ही रखा जाए क्योंकि वह किसी राजनीतिक भूमिका में नहीं हैं। उनका कहना था कि वह एक कलाकार हैं और उनका काम लोगों का मनोरंजन करना है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में हर व्यक्ति किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है और जीवन में सभी परिस्थितियां कभी पूरी तरह अनुकूल नहीं हो सकतीं।

    दिलजीत ने अपने अंदाज में यह भी कहा कि जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, वे भी अपनी बात रखने का अधिकार रखते हैं और जिनके खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है, उनका भी अपना पक्ष हो सकता है। उन्होंने किसी भी पक्ष का समर्थन या विरोध करने से बचते हुए कहा कि बिना पूरी जानकारी के किसी मुद्दे पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। इसी कारण उन्होंने पूरे विवाद पर तटस्थ रुख अपनाया।

    उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया। कई लोगों ने उनके इस रुख को एक कलाकार की पेशेवर सोच बताया, जबकि कुछ लोगों ने सार्वजनिक जीवन से जुड़े चर्चित चेहरों की सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भूमिका को लेकर अलग-अलग राय भी व्यक्त की। हालांकि दिलजीत ने अपने बयान में किसी संगठन, व्यक्ति या प्रदर्शन की प्रकृति पर कोई टिप्पणी नहीं की और केवल राजनीति से दूरी बनाए रखने की बात दोहराई।

    दिलजीत दोसांझ पिछले कुछ समय से अपनी फिल्मों, अंतरराष्ट्रीय कॉन्सर्ट्स और संगीत परियोजनाओं को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। देश और विदेश में उनकी बड़ी प्रशंसक संख्या है और सोशल मीडिया पर भी उनकी सक्रिय मौजूदगी रहती है। ऐसे में उनके किसी भी बयान पर लोगों की नजर रहती है।

    फिलहाल उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता कला और मनोरंजन है तथा वह राजनीतिक या विवादित विषयों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बचना पसंद करते हैं। इसी वजह से उन्होंने जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को लेकर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।

  • लद्दाख से जंतर-मंतर तक पहुंचा आंदोलन, सोनम वांगचुक की नई भूख हड़ताल से तेज हुआ शिक्षा और पर्यावरण सुधार का मुद्दा

    लद्दाख से जंतर-मंतर तक पहुंचा आंदोलन, सोनम वांगचुक की नई भूख हड़ताल से तेज हुआ शिक्षा और पर्यावरण सुधार का मुद्दा


    नई दिल्ली ।
    पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक Sonam Wangchuk ने एक बार फिर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे उनका लंबा चल रहा आंदोलन एक नए चरण में प्रवेश कर गया है। यह आंदोलन अब केवल लद्दाख के अधिकारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और प्रशासनिक सुधारों तक फैल चुका है।

    इस बार वांगचुक की प्रमुख मांगों में शिक्षा व्यवस्था में कथित खामियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की जवाबदेही तय करने की बात शामिल है। वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठा रहे हैं। इसके साथ ही वे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुधार की मांग पर जोर दे रहे हैं, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

    वांगचुक का आंदोलन पहली बार 2024 में लद्दाख के राज्य दर्जे और छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग के साथ शुरू हुआ था। उस समय उन्होंने अत्यधिक ठंड में उपवास कर सरकार का ध्यान क्षेत्रीय अधिकारों और पर्यावरणीय मुद्दों की ओर आकर्षित किया था। इसके बाद यह आंदोलन धीरे-धीरे दिल्ली तक पहुंचा और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

    सितंबर 2024 में उनकी ‘दिल्ली चलो पदयात्रा’ ने आंदोलन को व्यापक पहचान दिलाई, जब उन्हें दिल्ली बॉर्डर पर हिरासत में लिया गया। इसके बाद दिल्ली में 16 दिनों के अनशन के बाद सरकार से बातचीत का आश्वासन मिलने पर उन्होंने उपवास समाप्त किया था। हालांकि, लद्दाख मुद्दों पर स्थायी समाधान न मिलने के कारण आंदोलन लगातार जारी रहा।

    2025 में स्थिति तब और गंभीर हो गई जब लद्दाख में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा की घटनाएं सामने आईं और वांगचुक की संस्था पर कार्रवाई की गई। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया था। कई महीनों की हिरासत के बाद 2026 की शुरुआत में उनकी रिहाई हुई।

    रिहाई के बाद वांगचुक ने अपने आंदोलन को नए मुद्दों से जोड़ते हुए इसे व्यापक सामाजिक अभियान का रूप दिया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलनों के साथ जुड़कर उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को भी अपने एजेंडे में शामिल कर लिया।

    वर्तमान चरण में उनका आंदोलन लद्दाख के पर्यावरण और लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ-साथ देश की शिक्षा प्रणाली की चुनौतियों को भी केंद्र में ला रहा है। उनका कहना है कि जब तक इन मुद्दों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।

    इस आंदोलन ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है कि क्या क्षेत्रीय अधिकारों और शिक्षा सुधार जैसे मुद्दों को एक साझा मंच पर लाकर प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP का सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम, देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

    जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP का सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम, देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

    नई दिल्ली । दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हुए प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपना रुख और सख्त कर लिया है। संगठन ने सरकार को सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को देशव्यापी स्तर पर विस्तारित किया जाएगा।

    CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन के बाद जारी बयान में कहा कि यह आंदोलन यहीं समाप्त नहीं होगा और आगे इसे और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि जंतर-मंतर पर हुआ प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और ऐतिहासिक था, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।

    अभिजीत दीपके ने कहा कि प्रदर्शन में कई ऐसे लोग भी शामिल हुए जिन्होंने पहली बार किसी आंदोलन में हिस्सा लिया। उनके अनुसार, यह इस बात का संकेत है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर समाज में गहरी चिंता मौजूद है। उन्होंने कहा कि यह केवल शुरुआत है और आगे की रणनीति पर लगातार काम किया जाएगा।

    संगठन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई है। CJP का कहना है कि यदि अगले सात दिनों में मंत्री के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

    अभिजीत दीपके ने यह भी कहा कि वह आने वाले दिनों में सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को संबोधित करेंगे और आगे की रणनीति साझा करेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि आंदोलन को डिजिटल और जमीनी दोनों स्तरों पर आगे बढ़ाया जाएगा।

    CJP प्रवक्ता आशीष रांका ने भी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यह अंतिम अवसर है। उन्होंने कहा कि या तो सरकार स्वयं कार्रवाई करे या प्रधानमंत्री स्तर पर निर्णय लिया जाए। उनके अनुसार, यदि मांगें पूरी नहीं होती हैं तो देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।

    जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में कई घंटों तक नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन चला, जिसके बाद कार्यक्रम समाप्त किया गया। हालांकि आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन का अंत नहीं बल्कि शुरुआत है।

    इस बीच राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए कहा गया कि कुछ लोग विदेश में बैठकर देश की युवा नीति और शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे सफल नहीं होने दिया जाएगा।

    यह पूरा मामला अब शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर बहस का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में CJP के अल्टीमेटम और सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।