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  • जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने पर CJP प्रवक्ता सौरव दास ने उठाए सवाल, शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर जताई चिंता

    जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने पर CJP प्रवक्ता सौरव दास ने उठाए सवाल, शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर जताई चिंता

    नई दिल्ली ।दिल्ली में धरना-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों को लेकर किए गए बदलाव के बाद जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया है। इस फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस निर्णय पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए पूछा कि आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जंतर-मंतर से क्यों डरते हैं। दास ने कहा कि जंतर-मंतर भारत के लोगों का है और इस तरह के फैसले से शांतिपूर्ण विरोध करने के अधिकार को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

    सौरव दास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा कर इस बदलाव पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल किया कि क्या गृह मंत्रालय ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का निर्णय लेने से पहले देश के लोगों से सलाह ली थी। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या इस फैसले से जुड़े किसी हितधारक या संगठन से विचार-विमर्श किया गया। दास ने अपने बयान में निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह का कदम उठाने से पहले संबंधित पक्षों की राय जानना जरूरी है।

    अपने पोस्ट में दास ने केंद्र सरकार के फैसले को लेकर कड़ी टिप्पणी भी की। उन्होंने लिखा कि जिस तरह जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित सूची से हटाया जा रहा है, उसी तरह प्रधानमंत्री जल्द ही भारत में लोकतंत्र को भी अधिसूचित सूची से बाहर कर देंगे। उन्होंने इस कार्रवाई को उस दिशा में शुरुआत बताया। दास ने कहा कि उनकी पार्टी इस फैसले को स्वीकार नहीं करती और इसे मनमाना निर्णय मानती है। हालांकि, लोकतंत्र को लेकर की गई उनकी टिप्पणी उनके राजनीतिक विरोध और फैसले पर व्यक्त की गई प्रतिक्रिया का हिस्सा है।

    सौरव दास ने अपने बयान में विरोध करने और शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने के अधिकार का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाना लोगों के मौलिक अधिकारों पर हमला है। उन्होंने इस फैसले के विरोध में कहा कि अब पूरा देश ही जंतर-मंतर बन रहा है। उनकी इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि किसी एक स्थान पर प्रदर्शन की व्यवस्था में बदलाव होने के बावजूद विरोध की भावना समाप्त नहीं होगी।

    दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन आयोजित करने के लिए तीन वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए हैं। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान शामिल हैं। इन स्थानों पर प्रदर्शन करने वाले लोगों को संबंधित नियमों और अनुमति की शर्तों का पालन करना होगा। इस तरह जंतर-मंतर को सूची से हटाए जाने के बाद राजधानी में प्रदर्शन के लिए इन तीन जगहों का विकल्प उपलब्ध कराया गया है।

    जंतर-मंतर लंबे समय से दिल्ली में धरना-प्रदर्शन और विरोध दर्ज कराने का प्रमुख केंद्र रहा है। विभिन्न मुद्दों पर अपनी मांगें रखने के लिए लोग यहां जुटते रहे हैं। ऐसे में इसे आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले पर सौरव दास की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने निर्णय की प्रक्रिया, संबंधित पक्षों से परामर्श और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान को वैकल्पिक स्थान के रूप में निर्धारित किया गया है, जहां नियमों और अनुमति संबंधी शर्तों के अनुसार प्रदर्शन किए जा सकेंगे।

  • सीजेपी के जंतर-मंतर प्रदर्शन पर भाजपा का हमला, संबित पात्रा बोले- दिल्ली में आगजनी और हिंसा की कोशिश की गई

    सीजेपी के जंतर-मंतर प्रदर्शन पर भाजपा का हमला, संबित पात्रा बोले- दिल्ली में आगजनी और हिंसा की कोशिश की गई

    नई दिल्ली । दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रदर्शन की आलोचना करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर हो रही गतिविधियां भारत की वास्तविक तस्वीर पेश नहीं करतीं। उन्होंने दावा किया कि देश में शांति और सुशासन का माहौल है, जबकि दिल्ली के एक हिस्से में कुछ अराजक तत्व अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। पात्रा ने प्रदर्शन को फ्लॉप शो बताते हुए कहा कि इसका प्रभाव पूरी तरह विफल रहा।

    संबित पात्रा ने कहा कि जंतर-मंतर पर जो कुछ हो रहा है और टेलीविजन तथा सोशल मीडिया पर जो दिखाया जा रहा है, उसे भारत की पूरी कहानी नहीं माना जा सकता। उनके मुताबिक, देश में शांति बनी हुई है और सुशासन के साथ व्यवस्था आगे बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजधानी के एक कोने में अराजक तत्वों की ओर से अव्यवस्था पैदा करने की कोशिश की जा रही है। भाजपा प्रवक्ता ने प्रदर्शन को लेकर कहा कि यह पूरी तरह फ्लॉप रहा और इसका उद्देश्य सफल नहीं हुआ।

    प्रदर्शन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया में पात्रा ने आरोप लगाया कि इसके जरिए देश और राजधानी को बंधक बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि दिल्ली में आगजनी कराने, मारपीट की स्थिति पैदा करने और सड़कों पर संघर्ष कराने का प्रयास किया गया था। हालांकि, ये सभी बातें भाजपा प्रवक्ता के आरोपों के रूप में सामने आईं। उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों के समर्थन में किसी अलग जांच रिपोर्ट या आधिकारिक निष्कर्ष का उल्लेख नहीं है।

    भाजपा प्रवक्ता ने अपने बयान में लोकतंत्र और भीड़तंत्र के बीच अंतर पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान राजधानी को बंधक बनाने की कोशिश सफल नहीं हुई और इसे भीड़तंत्र पर लोकतंत्र की जीत के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, जिस तरह की स्थिति पैदा करने का प्रयास किया गया था, वह सफल नहीं हो सकी। उन्होंने प्रदर्शन के आयोजन और उसके प्रभाव को लेकर अपनी पार्टी का विरोध स्पष्ट किया।

    सीजेपी का यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित किया गया था। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके साथियों को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए जाने की खबर भी सामने आई थी। प्रदर्शन को लेकर भाजपा की प्रतिक्रिया इसी घटनाक्रम के संदर्भ में आई है। संबित पात्रा ने अपने बयान में प्रदर्शन को देश की व्यापक स्थिति का प्रतिनिधि मानने से इनकार किया और कहा कि जंतर-मंतर पर दिखाई दे रही गतिविधियां भारत की कहानी नहीं हैं।

    भाजपा की ओर से जारी इस प्रतिक्रिया में प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा, व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाए गए। पात्रा ने दावा किया कि देश में शांति और सुशासन कायम है तथा राजधानी में कथित अराजक गतिविधियों के जरिए स्थिति बिगाड़ने की कोशिश की गई। उन्होंने दोहराया कि प्रदर्शन अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सका। इस तरह सीजेपी के जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर भाजपा ने राजनीतिक विरोध दर्ज कराया और आगजनी, मारपीट तथा राजधानी को बंधक बनाने की कथित कोशिशों का आरोप लगाया। इन आरोपों के संबंध में उपलब्ध विवरण में विपक्ष या प्रदर्शन आयोजकों की प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।

  • जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को CJP के प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस की मंजूरी नहीं, धारा 163 लागू कर सुरक्षा व्यवस्था सख्त

    जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को CJP के प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस की मंजूरी नहीं, धारा 163 लागू कर सुरक्षा व्यवस्था सख्त

    नई दिल्ली ।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करने की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन नहीं दिए जाने और संगठन के पिछले प्रदर्शन के रिकॉर्ड को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। साथ ही, नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू होने की जानकारी दी गई है।

    दिल्ली पुलिस की संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद ने बताया कि CJP की ओर से सौरव दास ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के संबंध में आवेदन दिया था। प्रदर्शन का उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही तय करने की मांग उठाना था। पुलिस ने आवेदन पर विचार करने के बाद पाया कि प्रदर्शन की सूचना बहुत कम समय पहले दी गई थी। निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रस्तावित प्रदर्शन से कम से कम 10 दिन पहले सूचना मिलनी चाहिए। इस प्रक्रिया का पालन नहीं होने के कारण प्रदर्शन को मंजूरी नहीं दी गई।

    नूपुर प्रसाद ने बताया कि नई दिल्ली क्षेत्र में BNSS की धारा 163 लागू है। इसके तहत सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए निवारक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने CJP और उसके समर्थकों को चेतावनी दी है कि बिना अनुमति प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने से बचें। अधिकारियों ने कहा कि प्रतिबंधों का पालन करना जरूरी है और नियम तोड़ने की स्थिति में कार्रवाई हो सकती है।

    पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने के पीछे CJP के पिछले रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया है। संयुक्त पुलिस आयुक्त के अनुसार, पहले संगठन को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, लेकिन उस दौरान कानूनी निर्देशों और दिए गए आश्वासनों का पालन नहीं किया गया। पुलिस का कहना है कि इन परिस्थितियों को देखते हुए इस बार प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहने को लेकर भरोसा नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर 10 अक्टूबर के कार्यक्रम को मंजूरी नहीं देने का फैसला किया गया है।

    दूसरी ओर, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास ने घोषणा की है कि 10 अक्टूबर को प्रदर्शन किया जाएगा। संगठन का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों पर जवाबदेही देनी चाहिए। अभिजीत दीपके ने कहा कि यदि पुलिस या सुरक्षाकर्मी प्रदर्शनकारियों को रोकेंगे, तो वे जिस स्थान पर रोके जाएंगे, वहीं विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता भले ही सरकार के पास हो, लेकिन सड़कें देश की जनता की हैं और नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से नहीं रोका जाना चाहिए।

    प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े कई एहतियाती कदमों की जानकारी भी दी गई है। दिल्ली मेट्रो रेल निगम से 57 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद रखने को कहा गया है। यह प्रतिबंध 9 अक्टूबर की रात 9 बजे से लागू होने हैं और शनिवार को स्थिति सामान्य होने तक जारी रह सकते हैं। संबंधित स्टेशनों पर मेट्रो ट्रेनों की आवृत्ति भी घटाई जा सकती है।

    रेलवे के अनुसार, 10 अक्टूबर 2026 को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर पहुंचने वाली मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। प्रदर्शन के कारण सड़कों पर भारी जाम लगने की आशंका के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है। इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के एहतियाती उपाय के तौर पर दिल्ली में खुदरा शराब की दुकानों को 9 और 10 अक्टूबर को बंद रखने का आदेश दिया गया है।

  • दिल्ली में CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन पर विवाद, मौलाना ने लाउडस्पीकर से मुस्लिम समुदाय से शामिल नहीं होने की अपील की

    दिल्ली में CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन पर विवाद, मौलाना ने लाउडस्पीकर से मुस्लिम समुदाय से शामिल नहीं होने की अपील की


    नई दिल्ली ।दिल्ली में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन को लेकर विवाद सामने आया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को रद्द करने की मांग को लेकर पार्टी ने प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस कार्यक्रम की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। पुलिस की ओर से प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। इसी बीच दिल्ली के हर्ष विहार स्थित एक मस्जिद से मौलाना ने लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों से प्रदर्शन में शामिल नहीं होने की अपील की है।

    मौलाना ने अपने ऐलान में कहा कि जंतर-मंतर पर होने वाला CJP का प्रदर्शन अवैध है और मुस्लिम समुदाय के लोगों को इसमें शामिल नहीं होना चाहिए। उन्होंने लोगों से प्रशासन का सहयोग करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। मौलाना ने कहा कि सरकार ने जंतर-मंतर पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू की है। ऐसे में लोगों को वहां जाने से बचना चाहिए और प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति प्रदर्शन में शामिल होने जाता है और उसके साथ कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी सरकार की नहीं होगी। उन्होंने लोगों से इस चेतावनी को गंभीरता से लेने और प्रस्तावित कार्यक्रम से दूर रहने की अपील दोहराई।

    दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने के पीछे निर्धारित प्रक्रिया और सूचना देने से जुड़े नियमों का हवाला दिया है। दिल्ली पुलिस की संयुक्त आयुक्त नूपुर प्रसाद ने बताया कि CJP की ओर से सौरव दास के नाम से 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने के संबंध में आवेदन प्राप्त हुआ था। इस प्रदर्शन का उद्देश्य मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही की मांग करना बताया गया था। पुलिस ने आवेदन पर विचार करने के बाद पाया कि कार्यक्रम की सूचना बहुत कम समय पहले दी गई थी। निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रस्तावित प्रदर्शन से कम से कम 10 दिन पहले सूचना प्राप्त होनी चाहिए थी। पुलिस के अनुसार, इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई।

    पुलिस ने पार्टी और प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने की योजना बना रहे लोगों को चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद कार्यक्रम को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है कि पुलिस ने इसे आयोजित करने की मंजूरी नहीं दी है। वहीं, मौलाना की अपील भी इसी घटनाक्रम के बीच सामने आई है, जिसमें उन्होंने लोगों से प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और किसी भी तरह की परेशानी से बचने को कहा है।

    दूसरी ओर, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास ने प्रदर्शन करने के अपने फैसले पर कायम रहने की बात कही है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि 10 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और उन्हें अपने ऊपर लगाए गए गंभीर आरोपों पर जवाबदेही देनी होगी। अभिजीत दीपके ने कहा कि यदि पुलिस या सुरक्षाकर्मी प्रदर्शनकारियों को रोकेंगे, तो वे जिस स्थान पर रोके जाएंगे, वहीं जंतर-मंतर जैसा प्रदर्शन स्थल बना देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता सरकार के पास हो सकती है, लेकिन सड़कें देश की जनता की हैं। उनके अनुसार, नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से नहीं रोका जाना चाहिए। इस तरह, एक ओर पुलिस ने अनुमति नहीं दी है और कार्रवाई की चेतावनी दी है, जबकि दूसरी ओर CJP ने प्रदर्शन करने का ऐलान दोहराया है।

  • जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज को जस्टिस उज्जल भुइयां ने बताया चिंताजनक, पुलिस से निष्पक्षता और संयम बरतने की अपील

    जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज को जस्टिस उज्जल भुइयां ने बताया चिंताजनक, पुलिस से निष्पक्षता और संयम बरतने की अपील

    नई दिल्ली ।जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों और युवाओं पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उज्जल भुइयां ने चिंता जताई है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज को परेशान करने वाली घटना बताया और कहा कि अलग विचार रखने वाले छात्रों के खिलाफ दंडात्मक रवैया नहीं अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने पुलिस की भूमिका को लेकर निष्पक्षता, संयम और जनता के भरोसे को बेहद महत्वपूर्ण बताया।

    जस्टिस भुइयां ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों और युवाओं को अपने विचार रखने तथा विरोध दर्ज कराने का अधिकार है। यदि कोई छात्र किसी मुद्दे पर अलग राय रखता है तो उसके साथ ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, जिससे उसके अधिकार प्रभावित हों। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ कथित कठोर व्यवहार को निराशाजनक बताया।

    उन्होंने पुलिस अधिकारियों की निष्पक्षता को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उनके मुताबिक पुलिस से यह अपेक्षा की जाती है कि वह कानून को समान रूप से लागू करे और किसी भी परिस्थिति में निष्पक्षता बनाए रखे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पुलिस की इस भूमिका पर सवाल उठना गंभीर चिंता का विषय है।

    जस्टिस भुइयां ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके लिए जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। पुलिस को परिस्थितियों को समझते हुए संयमित तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पुलिस और आम नागरिकों के बीच विश्वास बना रहना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी है।

    उन्होंने कहा कि आम लोगों के लिए वर्दी पहने पुलिसकर्मी सरकार की शक्ति और अधिकार का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि होता है। जब किसी नागरिक को परेशानी होती है तो वह सहायता के लिए पुलिस के पास जाता है। ऐसे में पुलिस की विश्वसनीयता कमजोर होना समाज और कानून व्यवस्था दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

    जस्टिस भुइयां ने यह भी कहा कि यदि सरकार के अधिकारी ही कानून का उल्लंघन करने लगें तो इसका व्यापक असर पड़ता है। ऐसी स्थिति में लोगों के बीच कानून के प्रति सम्मान कम हो सकता है और अराजकता को बढ़ावा मिलने का खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि किसी भी सभ्य लोकतांत्रिक देश में सरकारी अधिकारियों से कानून का पालन करने की अपेक्षा की जाती है।

    उन्होंने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में पीड़ितों को मुआवजा दिए जाने की आवश्यकता को स्वीकार किया है। उनके मुताबिक, राज्य की संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा हो सके।

    जस्टिस भुइयां ने ये बातें पूर्व सुरक्षा सचिव यशोवर्धन आजाद की पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में कहीं। राजधानी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा के युवा अधिकारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब ऐसे अधिकारी प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट करते दिखाई देते हैं तो यह निराशाजनक स्थिति होती है।

    छात्रों के विरोध के अधिकार को लेकर इससे पहले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत भी टिप्पणी कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि छात्रों को किसी भी मुद्दे पर विरोध करने का अधिकार है। लॉ संस्थान के छात्रों के पंजीकरण पर रोक लगाने से जुड़े एक मामले में भी उन्होंने छात्रों के अधिकारों के संरक्षण पर जोर दिया था।

    जस्टिस भुइयां की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की भूमिका, बल प्रयोग और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों को लेकर बहस जारी है। उनकी टिप्पणियों में कानून व्यवस्था और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने तथा पुलिस की निष्पक्षता पर विशेष जोर दिया गया।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन में संजय कुमार से मारपीट के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज गिरफ्तार, एससी-एसटी और पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई

    जंतर-मंतर प्रदर्शन में संजय कुमार से मारपीट के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज गिरफ्तार, एससी-एसटी और पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर 23 जून को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प के मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को पुलिस ने बुलंदशहर से गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के सिर में चोट लगी थी। इस घटना के बाद से ही स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही थी।

    बताया गया है कि झड़प के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज के हाथ में पहने कड़े से संजय कुमार के सिर पर चोट लगी। चोट लगने के बाद उन्हें उपचार के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया था। घटना को लेकर पुलिस ने मामला दर्ज किया था और इसके बाद जांच आगे बढ़ाई जा रही थी।

    मामले में उस समय नया मोड़ आया जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक पॉडकास्ट वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। वीडियो में वह जंतर-मंतर पर हुई घटना और संजय कुमार को लगी चोट का जिक्र करता नजर आया। वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद मामले में आरोपी की गिरफ्तारी की मांग फिर तेज हो गई।

    शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं ने स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन करीब दो घंटे तक चला। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से आरोपी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने की मांग की और मामले में देरी पर सवाल उठाए।

    पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों को कार्रवाई के लिए 72 घंटे का भरोसा दिया गया था। हालांकि इसके बाद स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच में तेजी आने की उम्मीद है और पुलिस अब घटना से जुड़े तथ्यों तथा उपलब्ध साक्ष्यों को खंगालेगी।

    स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में कई कानूनी प्रावधान शामिल किए गए हैं। इनमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के साथ भारतीय न्याय संहिता के तहत पीछा करने और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने से संबंधित धाराएं शामिल हैं। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है।

    आरोपी के खिलाफ पॉक्सो कानून के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं के आधार पर पुलिस मामले के अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही है। सीजेपी के सह संयोजक सौरभ दास ने भी आरोपी के खिलाफ दर्ज मामलों और गिरफ्तारी की जानकारी दी है।

    हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर पुलिस पहले मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुकी है। 3 सितंबर को पुलिस ने बताया था कि प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति की मेडिकल रिपोर्ट में सिर की हड्डी में फ्रैक्चर या किसी गंभीर चोट की पुष्टि नहीं हुई थी। पुलिस ने कार्रवाई में देरी के पीछे किसी राजनीतिक दबाव से भी इनकार किया था।

    अब गिरफ्तारी के बाद जांच का अगला चरण शुरू होगा। पुलिस घटना के दौरान मौजूद लोगों के बयान, उपलब्ध वीडियो और चिकित्सकीय दस्तावेजों समेत अन्य साक्ष्यों की जांच कर सकती है। इसके आधार पर आरोपों की स्थिति और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।

    घटना के बाद से प्रदर्शन से जुड़े पक्ष स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। गिरफ्तारी के साथ अब यह मामला जांच और कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गया है।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में गतिरोध जारी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गृह मंत्री से सदन में बयान देने की मांग दोहराई।

    जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में गतिरोध जारी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गृह मंत्री से सदन में बयान देने की मांग दोहराई।

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में राजनीतिक टकराव लगातार गहराता जा रहा है। विपक्ष इस पूरे मामले पर सरकार से विस्तृत जवाब की मांग कर रहा है, जबकि सदन की कार्यवाही भी बार-बार बाधित हो रही है। इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह को स्वयं सदन में उपस्थित होकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी देनी चाहिए ताकि सभी सवालों का स्पष्ट उत्तर मिल सके।

    मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्ष पिछले कई दिनों से इस विषय पर चर्चा की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक जवाब सामने नहीं आया है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे संवेदनशील मामलों पर संसद के भीतर खुली चर्चा होना आवश्यक है। उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा के सभापति ने संसदीय कार्य मंत्री को विपक्ष की भावनाओं से गृह मंत्री को अवगत कराने का निर्देश दिया है, जिससे इस विषय पर चर्चा का रास्ता निकल सके।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य केवल राजनीतिक विरोध करना नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जानकारी प्राप्त करना है। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस या अन्य बल प्रयोग किया है तो यह जानना जरूरी है कि ऐसे कदम उठाने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया था। उनके अनुसार संसद इस प्रकार के मुद्दों पर जवाबदेही तय करने का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है और सरकार को यहां विस्तृत स्पष्टीकरण देना चाहिए।

    खड़गे ने अपनी पार्टी की ओर से दो प्रमुख मांगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दें और दूसरी ओर गृह मंत्री अमित शाह सदन में उपस्थित होकर विपक्ष के सवालों का जवाब दें। उनका कहना था कि यदि सरकार इस विषय पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाती है तो राजनीतिक विवाद और गहराने की संभावना बनी रहेगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष संसद की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाना चाहता है, लेकिन महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने की स्थिति में गतिरोध समाप्त होना कठिन है। उनके अनुसार लोकतंत्र में संवाद और जवाबदेही दोनों समान रूप से आवश्यक हैं तथा जनता से जुड़े मामलों पर सरकार को पारदर्शी रुख अपनाना चाहिए।

    अपने बयान के दौरान खड़गे ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छात्रों के हितों और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर लगातार आवाज उठाती रहेगी। उनका कहना था कि किसी भी राज्य में यदि युवाओं और छात्रों से जुड़े प्रश्न सामने आते हैं तो उन पर निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

    जंतर-मंतर की घटना को लेकर संसद में जारी गतिरोध के बीच अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि इस विषय पर सदन में विस्तृत चर्चा होती है तो राजनीतिक दलों के बीच जारी टकराव कम होने की संभावना बन सकती है। फिलहाल विपक्ष अपने रुख पर कायम है और सरकार से आधिकारिक जवाब की मांग लगातार दोहरा रहा है।

  • सीजेपी प्रदर्शन के दौरान बढ़ीं चोरी की वारदातें, फेस रिकॉग्निशन सिस्टम से सैकड़ों संदिग्ध पुलिस के रडार पर

    सीजेपी प्रदर्शन के दौरान बढ़ीं चोरी की वारदातें, फेस रिकॉग्निशन सिस्टम से सैकड़ों संदिग्ध पुलिस के रडार पर


    नई दिल्ली ।
    राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर आयोजित विशाल विरोध प्रदर्शन के दौरान आपराधिक तत्वों द्वारा चोरी और जेबतराशी की घटनाओं को अंजाम देने का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। पुलिस आंकड़ों के अनुसार प्रदर्शन के दौरान 177 से अधिक चोरी की शिकायतें दर्ज की गई हैं। इस अप्रत्याशित बढ़ोतरी के बाद दिल्ली पुलिस ने अत्याधुनिक फेस रिकॉग्निशन सिस्टम की मदद से व्यापक अभियान चलाकर 717 संदिग्धों को चिन्हित किया है।

    प्रदर्शन और मार्च के दौरान सबसे अधिक शिकायतें कीमती स्मार्टफोन्स, पर्स और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के गायब होने से संबंधित प्राप्त हुई हैं। विशेषकर जब जंतर-मंतर और आसपास के मुख्य मार्गों पर प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा चरम पर था, तब शातिर जेबतराशों ने अव्यवस्था का फायदा उठाकर दर्जनों लोगों को अपना शिकार बनाया। पीड़ित नागरिकों की लगातार आती शिकायतों को देखते हुए स्थानीय थाना पुलिस और विशेष शाखाओं ने संयुक्त रूप से मामले की पड़ताल शुरू की है।

    जांच प्रक्रिया के तहत दर्ज एफआईआर और ऑनलाइन ई-दर्ज रिपोर्टों का गहन विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार कई नागरिकों ने सीधे तौर पर चोरी का मामला दर्ज कराया, जबकि कुछ ने अपने कीमती सामान के खोने की सूचना दर्ज कराई है। प्राथमिक आकलन के आधार पर पुलिस का मानना है कि गुमशुदगी की अधिकांश घटनाएं संगठित जेबतराशी गिरोहों का परिणाम हो सकती हैं, जिसके चलते सभी मामलों का एक साथ अध्ययन किया जा रहा है।

    वारदातों को सुलझाने के लिए दिल्ली पुलिस ने तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया है। कार्यक्रम स्थल और पहुंच मार्गों के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों से प्राप्त फुटेज को फेस रिकॉग्निशन सॉफ्टवेयर के माध्यम से स्कैन किया गया। इस डिजिटल जांच के दौरान हजारों चेहरों का मिलान पुलिस के पुराने आपराधिक डेटाबेस से कराया गया, जिसके बाद 717 संदिग्ध व्यक्तियों की संदिग्ध उपस्थिति और संलिप्तता की पुष्टि हुई है।

    पहचाने गए संदिग्धों की धरपकड़ के लिए पुलिस की कई समर्पित टीमों का गठन किया गया है। चिन्हित किए गए आरोपियों के रिकॉर्ड और उनके संबंधित इलाकों की पुलिस इकाइयों के साथ डेटा साझा किया गया है। अधिकारियों का मुख्य लक्ष्य चोरी किए गए मोबाइल और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की जल्द से जल्द बरामदगी सुनिश्चित करना तथा भीड़ का फायदा उठाने वाले ऐसे अंतरराज्यीय गिरोहों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना है।

    फिलहाल तकनीकी साक्ष्यों और सीडीआर के आधार पर संदिग्धों के ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। सुरक्षा तंत्र ने बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भाग लेने वाले नागरिकों से अपनी निजी वस्तुओं के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के उपरांत दोषी पाए जाने वाले सभी आरोपियों के विरुद्ध कठोर कानूनी धाराओं के तहत निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।

  • राहुल गांधी के साथ सामने आए प्रदर्शनकारी छात्र, लाठीचार्ज, पैलेट गन और अभद्र व्यवहार के लगाए आरोप

    राहुल गांधी के साथ सामने आए प्रदर्शनकारी छात्र, लाठीचार्ज, पैलेट गन और अभद्र व्यवहार के लगाए आरोप


    नई दिल्ली ।
    कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े छात्र-छात्राओं के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में अपनी बात रखते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने वाले युवाओं के साथ कथित रूप से बल प्रयोग किया गया और उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया गया। राहुल गांधी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और छात्रों के साथ हुई कथित घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद छात्र-छात्राओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए पुलिस कार्रवाई को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। एक छात्रा ने दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने के बावजूद उन्हें देशद्रोही कहा गया। उनका आरोप था कि प्रदर्शन के दौरान बिना किसी उकसावे के बल प्रयोग किया गया और उन्हें शारीरिक चोटें भी आईं। छात्रा ने कहा कि वे केवल अपनी मांगों को शांतिपूर्ण ढंग से रखना चाहते थे।

    राहुल गांधी ने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों ने कोई गैरकानूनी कार्य नहीं किया और वे केवल शिक्षा व्यवस्था तथा युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को उठा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल युवाओं पर दबाव बनाने और उन्हें माफी मांगने के लिए मजबूर करने जैसी घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि देश को ऐसी शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है जिसमें परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष हो और युवाओं का भविष्य सुरक्षित रहे।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल अन्य प्रदर्शनकारियों ने भी अपनी आपबीती सुनाई। एक छात्रा ने दावा किया कि प्रदर्शन के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर लगातार आपत्तिजनक टिप्पणियों और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना था कि उन्होंने इस संबंध में शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सोशल मीडिया पर महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल पर भी चिंता व्यक्त की।

    एक अन्य छात्रा ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया, जिससे उन्हें चोट लगी। वहीं एक अन्य प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि हिरासत के दौरान उनके नाम और पहचान के आधार पर अलग व्यवहार किया गया। इन सभी आरोपों के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।

    जंतर-मंतर प्रदर्शन और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया है, जबकि इस पूरे मामले पर आगे संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई और आधिकारिक पक्ष का भी इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

  • प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज मामले में आठ राज्यों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, जांच पर दिया जोर

    प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज मामले में आठ राज्यों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, जांच पर दिया जोर

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और बल प्रयोग के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी करते हुए निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह की घटनाओं में तथ्यों की जांच होना आवश्यक है ताकि यह तय किया जा सके कि हिंसा किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जवाबदेही तय करने के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल तैयार करना भी जरूरी है।

    मामले की सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था, लेकिन बाद में हिंसा की स्थिति कैसे बनी, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके पीछे दो संभावनाएं हो सकती हैं। पहली यह कि पुलिस की ओर से आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया गया हो और दूसरी यह कि प्रदर्शनकारियों के बीच ऐसे तत्व शामिल हो गए हों जिन्होंने जानबूझकर हिंसा भड़काने का प्रयास किया हो। अदालत ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और जवाबदेही की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।

    याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि यदि किसी प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग कानून का उल्लंघन करते हैं तो पुलिस उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकती है, लेकिन जहां तक संभव हो बल प्रयोग से बचा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ ऐसे पुलिसकर्मी मौजूद थे जो वर्दी में नहीं थे और उनके पास हथियार भी थे। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि इन लोगों ने भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल का इस्तेमाल किया।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह मांग भी रखी गई कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि प्रदर्शन में शामिल लोगों की डिजिटल तकनीक के माध्यम से पहचान कर उसे सार्वजनिक करने पर रोक लगाई जानी चाहिए, क्योंकि प्रदर्शन में कई छात्र और नाबालिग भी शामिल थे। अदालत ने इन दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए व्यापक पहलुओं पर विचार करने की आवश्यकता जताई।

    सुनवाई के दौरान बिहार में प्रदर्शन से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया गया। एक अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि वहां कई नाबालिगों, यहां तक कि कम उम्र के बच्चों को भी हिरासत में लिए जाने के आरोप सामने आए हैं। इसी दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने जुनैद से जुड़े मामले का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें प्रताड़ित किए जाने की शिकायत है। इस पर केंद्र की ओर से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि यह अलग विषय है और इसे वर्तमान मामले से अलग देखा जाना चाहिए।

    सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सहित आठ राज्यों को नोटिस जारी किया। इन राज्यों में महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, बिहार, असम, केरल और अन्य संबंधित राज्य शामिल हैं। अदालत ने कहा कि उसके समक्ष विभिन्न राज्यों से ऐसे मामले आए हैं जिनमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, जीवन के अधिकार और प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगाए गए हैं। अदालत ने यह भी कहा कि लाठीचार्ज, पैलेट गन और आंसू गैस के इस्तेमाल से कुछ लोगों, जिनमें मीडिया कर्मी भी शामिल हैं, के घायल होने की बातें सामने आई हैं।

    सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संबंधित मामलों की जांच जारी रह सकती है, लेकिन फिलहाल किसी प्रकार की जल्दबाजी में कार्रवाई करने के बजाय पहले तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। अदालत ने संकेत दिया कि भविष्य में ऐसे मामलों के लिए स्पष्ट मानक और जवाबदेही की व्यवस्था विकसित करना न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।