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  • जावेद अख्तर सोशल मीडिया से क्यों हुए दूर, बेईमान और मूर्खतापूर्ण रवैये पर जताई नाराजगी

    जावेद अख्तर सोशल मीडिया से क्यों हुए दूर, बेईमान और मूर्खतापूर्ण रवैये पर जताई नाराजगी

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के दिग्गज गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स से कुछ दिनों का ब्रेक लेने का ऐलान किया है। उनके इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। जावेद अख्तर ने अपनी पोस्ट में कहा कि वह कुछ समय के लिए सोशल मीडिया से दूरी बनाकर सकारात्मक कामों पर ध्यान देना चाहते हैं। उन्होंने कुछ लोगों के व्यवहार को निराशाजनक बताते हुए कहा कि मूर्खतापूर्ण और बेईमानी भरा रवैया देखकर उन्हें परेशानी होती है। हालांकि उन्होंने अपनी पोस्ट में किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया है लेकिन उनके बयान को लेकर यूजर्स अलग अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

    जावेद अख्तर ने एक्स पर लिखा कि वह कुछ दिनों का ब्रेक ले रहे हैं ताकि कुछ सकारात्मक काम कर सकें। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों का मूर्खतापूर्ण और बेईमानी से भरा रवैया देखना काफी निराशाजनक है। उन्हें इस बात पर भी हैरानी होती है कि ऐसे लोग भी बाकी इंसानों की तरह ही होमो सेपियन्स यानी मानव प्रजाति का हिस्सा हैं। उनके इस बयान से जाहिर होता है कि सोशल मीडिया पर होने वाली कुछ चर्चाओं और लोगों के व्यवहार से वह असहज महसूस कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका यह फैसला किसी एक घटना की वजह से है या लगातार मिल रही प्रतिक्रियाओं के कारण उन्होंने कुछ समय दूर रहने का निर्णय लिया है।

    जावेद अख्तर की पोस्ट सामने आने के बाद कई यूजर्स ने उनका समर्थन किया। एक यूजर ने उन्हें सलाह दी कि वह बेवजह लोगों की बातों पर अपनी ऊर्जा खर्च न करें और मानसिक शांति को प्राथमिकता दें। वहीं एक अन्य यूजर ने उनसे अपील की कि वह नसीरुद्दीन शाह की वजह से नाराज या परेशान न हों। इस टिप्पणी के बाद लोगों के बीच यह सवाल भी उठा कि क्या जावेद अख्तर के ब्रेक का किसी हालिया विवाद से संबंध है। हालांकि जावेद अख्तर ने अपनी पोस्ट में नसीरुद्दीन शाह का नाम नहीं लिया है इसलिए इस तरह की प्रतिक्रियाओं को यूजर्स की अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

    जावेद अख्तर हाल के दिनों में रश्मिका मंदाना के हिंदी उच्चारण को लेकर चल रही ऑनलाइन बहस पर अपनी राय देने के कारण भी चर्चा में रहे थे। उन्होंने अभिनेत्री के हिंदी बोलने के अंदाज का मजाक उड़ाने वालों की आलोचना की थी। उनका कहना था कि किसी की भाषा या उच्चारण के आधार पर उसका मजाक उड़ाना उचित नहीं है। इस दौरान उन्होंने रश्मिका को गलती से तमिल अभिनेत्री कह दिया था जबकि वह कन्नड़ भाषी हैं। इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने जावेद अख्तर की इस गलती को लेकर सवाल उठाए। बाद में उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी भी मांगी थी।

    जावेद अख्तर लंबे समय से अपने विचारों और बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। वह सामाजिक मुद्दों और धर्म से जुड़े विषयों पर खुलकर अपनी राय रखते रहे हैं। उनकी टिप्पणियों पर कभी समर्थन मिलता है तो कभी सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना भी देखने को मिलती है। उनकी पत्नी और अभिनेत्री शबाना आजमी के साथ धर्म और रोजमर्रा की अभिव्यक्तियों को लेकर हुई बातचीत भी पहले चर्चा का विषय बन चुकी है। ऐसे मामलों में उनके विचारों को लेकर सोशल मीडिया पर बहस होती रही है।

    इस बार एक्स से ब्रेक लेने के उनके फैसले ने फिर से यह सवाल खड़ा किया है कि सोशल मीडिया की लगातार चलने वाली बहसें सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को किस तरह प्रभावित करती हैं। जावेद अख्तर ने फिलहाल केवल कुछ दिनों की दूरी बनाने की बात कही है। उन्होंने यह नहीं बताया कि वह दोबारा कब सक्रिय होंगे। फिलहाल उनका कहना है कि वह अपना समय सकारात्मक कामों में लगाना चाहते हैं। उनके प्रशंसक उम्मीद कर रहे हैं कि वह जल्द लौटेंगे और अपने विचारों को पहले की तरह साझा करेंगे।

  • आस्था और धर्म पर जावेद अख्तर का बड़ा सवाल, एलन मस्क के उदाहरण से समझाया क्यों नहीं मानते सभी धर्म समान

    आस्था और धर्म पर जावेद अख्तर का बड़ा सवाल, एलन मस्क के उदाहरण से समझाया क्यों नहीं मानते सभी धर्म समान


    नई दिल्ली। मशहूर लेखक और गीतकार जावेद अख्तर अपनी बेबाक राय के लिए पहचाने जाते हैं। वह अक्सर उन मुद्दों पर खुलकर बात करते हैं जिन पर लोग बिना ज्यादा सवाल किए विश्वास करते हैं। हाल ही में एक बातचीत में उन्होंने धर्म आस्था भगवान और नास्तिकता को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में धर्म और आस्था इंसान को मानसिक सहारा दे सकते हैं लेकिन किसी चीज से सुकून मिलना इस बात का प्रमाण नहीं हो सकता कि वह चीज सच भी है।

    जावेद अख्तर के मुताबिक जब इंसान किसी परेशानी में होता है तो उसे किसी बड़ी शक्ति पर भरोसा करने से भावनात्मक राहत मिल सकती है। उसे लगता है कि कोई ऐसी ताकत मौजूद है जो उसकी देखभाल कर रही है और उसकी मुश्किल दूर कर देगी। उनका सवाल यह है कि केवल इस भरोसे से उस विश्वास को वास्तविक कैसे मान लिया जाए। उनके अनुसार मानसिक शांति और किसी चीज के सच होने के बीच अंतर समझना जरूरी है।

    अपनी बात समझाने के लिए जावेद अख्तर ने कारोबारी एलन मस्क का उदाहरण दिया। उन्होंने एक काल्पनिक स्थिति के जरिए समझाया कि अगर कोई व्यक्ति पूरे विश्वास के साथ यह मान ले कि एलन मस्क उसका भाई है और अगले महीने उसे अरबों रुपये मिलने वाले हैं तो इस सोच से उसे खुशी और सुरक्षा का एहसास हो सकता है। वह लगातार इसी उम्मीद में रह सकता है कि अगले महीने पैसा जरूर आएगा। लेकिन केवल विश्वास करने से यह साबित नहीं हो जाता कि एलन मस्क वास्तव में उसका भाई है या उसे पैसे मिलने वाले हैं। जावेद अख्तर ने इसी उदाहरण के जरिए आस्था और वास्तविकता के बीच अंतर को समझाने की कोशिश की।

    उन्होंने धर्म को लेकर भी एक सवाल उठाया। जावेद अख्तर ने कहा कि दुनिया में बड़ी संख्या में लोग उसी धर्म को मानते हैं जिसमें उनका जन्म हुआ होता है। उन्होंने दावा किया कि करीब 99 फीसदी लोग उसी धर्म में मरते हैं जिसमें उन्होंने जन्म लिया था। उनके मुताबिक यह सवाल खड़ा करता है कि क्या लोगों ने अपने धार्मिक विश्वासों को खुद तर्क और विचार के आधार पर चुना है या फिर उन्हें बचपन से परिवार और समाज के जरिए ये मान्यताएं मिली हैं।

    जावेद अख्तर ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति की बात को सिर्फ इसलिए सही नहीं मान लेना चाहिए क्योंकि हम उस व्यक्ति पर विश्वास करते हैं। उनके अनुसार इंसान समय के साथ अपनी राय बदल सकता है इसलिए जरूरी है कि किसी व्यक्ति की पहचान के बजाय उसके विचार और तर्क को परखा जाए। उनका नजरिया यह है कि कौन बात कह रहा है इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि कही गई बात के पीछे कितना मजबूत तर्क मौजूद है।

    धर्मों की समानता को लेकर भी जावेद अख्तर ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि दुनिया के सभी धर्मों को सिर्फ इसलिए एक जैसा नहीं कहा जा सकता क्योंकि उनमें इंसान को बेहतर बनने की सीख मिलती है। उनके मुताबिक अलग अलग धर्मों की मान्यताएं विचार और सिद्धांत अलग हो सकते हैं। इसलिए सभी धर्म बिल्कुल एक ही बात कहते हैं ऐसा कहना सही नहीं है।

    जावेद अख्तर लंबे समय से धर्म तर्क और आस्था जैसे विषयों पर अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखते रहे हैं। उनके विचारों से जहां कुछ लोग सहमत नजर आते हैं वहीं कई बार उनके बयानों को लेकर असहमति भी सामने आती है। इस बार भी उनका बयान सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में बहस का विषय बना हुआ है।

  • जावेद अख्तर ने फिल्म इंडस्ट्री को घेरने वालों को दिया जवाब, बोले समाज जैसा होगा सिनेमा भी वैसा ही बनेगा

    जावेद अख्तर ने फिल्म इंडस्ट्री को घेरने वालों को दिया जवाब, बोले समाज जैसा होगा सिनेमा भी वैसा ही बनेगा


    नई दिल्ली। जावेद अख्तर अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं और इस बार उन्होंने फिल्मों में बढ़ती बोल्डनेस और वल्गर गानों को लेकर अपनी बात रखी है। फिल्म इंडस्ट्री पर अश्लील या आपत्तिजनक गाने बनाने के आरोप लगाने वालों को जवाब देते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि सिनेमा समाज से अलग नहीं है। उनके मुताबिक जिस तरह का समाज होगा उसी तरह का मनोरंजन भी देखने को मिलेगा। उन्होंने इस बहस का जिम्मेदार केवल फिल्म इंडस्ट्री को मानने के बजाय दर्शकों की पसंद पर भी सवाल उठाया।

    एक इंटरव्यू के दौरान जावेद अख्तर से सवाल किया गया कि सिनेमा अक्सर यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से क्यों बचता है कि जब समाज सुधरेगा तब अच्छा कंटेंट बनेगा। इस सवाल के जवाब में उन्होंने सिनेमा की तुलना समाज की नब्ज से की। उन्होंने कहा कि अगर शरीर में बुखार है तो नब्ज में भी उसका असर दिखाई देगा। इसी तरह समाज में जिस तरह की प्रवृत्तियां मौजूद होंगी उनका असर फिल्मों और मनोरंजन की दुनिया में भी नजर आएगा।

    जावेद अख्तर ने अपनी बात समझाने के लिए पुराने दौर की फिल्मों का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि इसी समाज में दो बीघा जमीन बंदिनी सुजाता हीरा मोती और मदर इंडिया जैसी फिल्मों का निर्माण हुआ था। इन फिल्मों को दर्शकों ने पसंद भी किया। ऐसे में उनके मुताबिक सवाल यह होना चाहिए कि उसी समाज में समय के साथ ऐसी फिल्मों की जगह कुछ अलग तरह के कंटेंट ने कैसे बना ली।

    बोल्ड गानों को लेकर उन्होंने खास तौर पर दर्शकों की भूमिका पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि किसी विवादित या अश्लील गाने को बनाने में केवल एक व्यक्ति शामिल नहीं होता। उसे लिखने से लेकर संगीत तैयार करने गाने उसे फिल्माने और रिलीज करने तक कई लोग जुड़े होते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अगर कुछ लोग ऐसा कंटेंट तैयार करते हैं तो समस्या उतनी बड़ी नहीं है लेकिन जब करोड़ों लोग उसी कंटेंट को पसंद करके उसे सुपरहिट बना देते हैं तब सवाल समाज की पसंद पर उठता है।

    जावेद अख्तर ने चोली के पीछे क्या है जैसे चर्चित गाने का उदाहरण देते हुए पूछा कि ऐसे गानों को फिल्म इंडस्ट्री अकेले हिट नहीं करा सकती। दर्शकों की पसंद और प्रतिक्रिया ही किसी गाने को लोकप्रिय बनाती है। उनके मुताबिक अगर दर्शक ऐसे कंटेंट को स्वीकार नहीं करेंगे तो उसे बनाने वालों के लिए भी उसे बार बार पेश करने की वजह कम हो जाएगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि दर्शकों की पसंद का असर गंभीर और अच्छे सिनेमा पर भी पड़ता है। जावेद अख्तर ने मशहूर फिल्ममेकर श्याम बेनेगल का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने शानदार और विचारोत्तेजक फिल्में बनाईं लेकिन सवाल यह है कि कितने दर्शकों ने उन्हें देखा और बड़े स्तर पर सफल बनाया।

    जावेद अख्तर की इस टिप्पणी ने एक बार फिर सिनेमा और समाज के रिश्ते को लेकर बहस शुरू कर दी है। उनका कहना है कि फिल्मों में बदलाव की चर्चा करते समय केवल कलाकारों और निर्माताओं को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। दर्शकों की पसंद भी तय करती है कि आने वाले समय में सिनेमा किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

  • 27 पैसे लेकर मुंबई पहुंचे थे जावेद अख्तर, तीन दिन तक नहीं मिला खाना, फुटपाथ और स्टूडियो में गुजारे मुश्किल दिन

    27 पैसे लेकर मुंबई पहुंचे थे जावेद अख्तर, तीन दिन तक नहीं मिला खाना, फुटपाथ और स्टूडियो में गुजारे मुश्किल दिन

    नई दिल्ली: मशहूर लेखक, गीतकार और शायर जावेद अख्तर ने भारतीय सिनेमा में अपनी खास पहचान बनाने से पहले बेहद संघर्षपूर्ण दौर देखा था। 4 अक्टूबर 1964 को 19 साल की उम्र में वह मुंबई के बॉम्बे सेंट्रल स्टेशन पहुंचे थे। उस समय उनकी जेब में सिर्फ 27 पैसे थे, लेकिन आंखों में बड़े सपने थे। मुंबई में अपनी पहचान बनाने की कोशिश के दौरान उनके सामने रहने और खाने तक की मुश्किलें खड़ी हो गईं। शुरुआती दिनों में उनके पास कोई तय ठिकाना नहीं था और उन्हें कई बार फुटपाथ, रेलवे स्टेशन तथा अलग-अलग स्टूडियो परिसरों में रात बितानी पड़ी।

    जावेद अख्तर के संघर्ष के उन दिनों को उनकी पत्नी और अभिनेत्री शबाना आजमी ने हाल ही में याद किया। उन्होंने बताया कि मुंबई पहुंचने के बाद जावेद के लिए हालात काफी मुश्किल थे। कई दिनों तक उन्हें फुटपाथ पर रातें गुजारनी पड़ीं। कभी रेलवे स्टेशन तो कभी स्टूडियो परिसर में सोकर उन्होंने समय बिताया। रहने की परेशानी के साथ खाने का संकट भी सामने आया। हालात इतने खराब हो गए थे कि एक समय ऐसा भी आया जब जावेद लगातार तीन दिनों तक कुछ खा नहीं पाए। उनके पास पहनने के लिए भी ज्यादा कपड़े नहीं थे और जो कपड़े थे, उनकी हालत भी अच्छी नहीं थी।

    इन मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद जावेद अख्तर ने हार नहीं मानी। जब वह पूरी तरह निराशा के करीब पहुंच गए थे और उनके सामने संघर्ष छोड़ देने का विकल्प था, तब उन्होंने खुद को यह समझाया कि वह इस तरह मरने के लिए पैदा नहीं हुए हैं और एक दिन यह मुश्किल वक्त जरूर बदल जाएगा। समय के साथ उनकी यह सोच सच साबित हुई। शबाना आजमी ने जावेद के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि कुछ सफर लगभग कुछ भी न होने से शुरू होते हैं और उनके पास सिर्फ एक सपना होता है। उन्होंने लोगों से कभी हार न मानने की अपील करते हुए जावेद के सफर को उदाहरण के तौर पर सामने रखा।

    जावेद अख्तर ने आगे चलकर भारतीय सिनेमा में अपनी अलग और खास पहचान बनाई। सलीम खान के साथ उनकी जोड़ी सलीम-जावेद के नाम से मशहूर हुई। 1970 और 1980 के दशक में इस जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को कई चर्चित फिल्में दीं। जंजीर, दीवार, शोले और डॉन जैसी फिल्मों की सफलता में उनकी लेखनी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इन फिल्मों के जरिए सलीम-जावेद की जोड़ी ने कहानी कहने के तरीके पर अपनी अलग छाप छोड़ी। बाद में जावेद अख्तर ने गीतकार और शायर के तौर पर भी अपनी पहचान बनाई और हिंदी सिनेमा को कई यादगार गीत दिए।

    जावेद अख्तर और शबाना आजमी ने 9 दिसंबर 1984 को शादी की थी। जावेद के शुरुआती संघर्ष से लेकर फिल्म जगत में उनकी पहचान बनने तक का सफर बेहद कठिन परिस्थितियों से होकर गुजरा। 27 पैसे लेकर मुंबई पहुंचने वाले जावेद अख्तर ने शुरुआती दिनों में खाने, रहने और कपड़ों तक की कमी का सामना किया, लेकिन उन्होंने अपने सपनों को छोड़ा नहीं। बाद में सलीम-जावेद की सफल जोड़ी और गीतकार-शायर के रूप में उनकी पहचान ने उन्हें भारतीय सिनेमा की प्रमुख हस्तियों में शामिल कर दिया।

  • फरहान-जोया की परवरिश पर जावेद अख्तर का बड़ा खुलासा! बोले बच्चों को किसी धर्म से नहीं जोड़ा

    फरहान-जोया की परवरिश पर जावेद अख्तर का बड़ा खुलासा! बोले बच्चों को किसी धर्म से नहीं जोड़ा


    नई दिल्ली । मशहूर लेखक और गीतकार जावेद अख्तर अपनी बेबाक राय और स्पष्ट विचारों के लिए जाने जाते हैं। धर्म को लेकर भी वह कई बार खुलकर अपनी बात रख चुके हैं। अब उन्होंने अपने बच्चों फरहान अख्तर और जोया अख्तर की परवरिश से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है। जावेद अख्तर ने बताया कि उन्होंने बचपन से ही अपने दोनों बच्चों को किसी धार्मिक पहचान से नहीं जोड़ा। उनके मुताबिक बच्चों को यह तय करने की आजादी दी गई कि बड़े होने पर वे धर्म और आस्था को किस तरह देखते हैं।

    जावेद अख्तर ने एक बातचीत में बताया कि यह किस्सा उस समय का है जब फरहान अख्तर करीब 7 या 8 साल के थे। एक दिन वह स्कूल से घर लौटे और अपने पिता से एक ऐसा सवाल पूछ बैठे जिसने जावेद को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। फरहान ने उनसे पूछा कि क्या हम मुस्लिम हैं। यह सवाल इसलिए भी स्वाभाविक था क्योंकि बच्चे अपने आसपास के लोगों और समाज से धर्म और समुदाय को लेकर बातें सुनते हुए बड़े होते हैं। लेकिन जावेद ने बेटे को किसी धार्मिक पहचान में बांधने के बजाय उसे एक अलग नजरिया समझाया।

    जावेद अख्तर के मुताबिक उन्होंने फरहान से कहा कि इंसान जिस शहर या समुदाय में पैदा होता है उससे उसकी असली पहचान तय नहीं होती। कोई व्यक्ति मुंबई पुणे आगरा अहमदाबाद लंदन या न्यूयॉर्क में पैदा हो सकता है लेकिन जन्म की जगह उसके व्यक्तित्व की सबसे महत्वपूर्ण पहचान नहीं हो सकती। उनके लिए सबसे अहम बात यह है कि इंसान बड़ा होकर कैसा व्यक्ति बनता है और उसके व्यवहार में किस तरह की इंसानियत दिखाई देती है।

    जावेद ने बताया कि फरहान और जोया को उन्होंने किसी धर्म से जोड़कर नहीं पाला। उनके दोनों बच्चे बड़े होते हुए खुद धर्म और समाज के बारे में समझने लगे लेकिन माता पिता की तरफ से उन पर किसी खास धार्मिक पहचान को अपनाने का दबाव नहीं था। जावेद के अनुसार उनके बच्चे किसी धार्मिक पहचान के बजाय अपनी सोच और अपने फैसलों के साथ बड़े हुए।

    फरहान और जोया जावेद अख्तर और उनकी पहली पत्नी हनी ईरानी के बच्चे हैं। बाद में जावेद ने अभिनेत्री शबाना आजमी से शादी की। फरहान और जोया दोनों ने मनोरंजन जगत में अपनी अलग पहचान बनाई है। फरहान अभिनेता निर्देशक निर्माता और लेखक के तौर पर सफल रहे हैं जबकि जोया अख्तर ने निर्देशन और लेखन के क्षेत्र में अपनी खास जगह बनाई है।

    जावेद अख्तर अपने बच्चों की उपलब्धियों पर गर्व करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि फरहान और जोया ने अपनी सफलता के लिए किसी तरह का समझौता नहीं किया। उनके मुताबिक दोनों ने नाम शोहरत और पैसा हासिल करने के लिए ऐसा काम नहीं किया जिससे उनकी गरिमा प्रभावित हो। उन्होंने अपने दम पर अपनी पहचान बनाई और अपने करियर में लगातार आगे बढ़े।

    जावेद अख्तर का यह किस्सा सिर्फ फरहान के बचपन से जुड़ी एक याद नहीं बल्कि बच्चों की परवरिश को लेकर उनकी सोच को भी सामने रखता है। उन्होंने धार्मिक पहचान को बच्चों पर थोपने के बजाय उन्हें खुद सवाल पूछने समझने और अपनी सोच विकसित करने की आजादी दी। फरहान का बचपन में पूछा गया छोटा सा सवाल और पिता का जवाब आज भी जावेद अख्तर की विचारधारा की एक खास झलक देता है।

  • जावेद अख्तर ने अपने फेंक वीडियो पर जताई नाराजगी… दी कानूनी कार्रवाई की धमकी

    जावेद अख्तर ने अपने फेंक वीडियो पर जताई नाराजगी… दी कानूनी कार्रवाई की धमकी


    मुम्बई।
    मशहूर गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर (Javed Akhtar) ने अपने खिलाफ फैलाए जा रहे एक फर्जी ‘डीपफेक’ वीडियो (Fake ‘deepfake’ videos) पर कड़ी नाराजगी जताई है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर एक AI जेनरेटेड एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन्हें सिर पर टोपी पहने दिखाया गया है और दावा किया गया है कि वे अब आस्तिक हो गए हैं। जावेद अख्तर ने शुक्रवार को एक्स पर इस फर्जी वीडियो को सिरे से खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस मामले में कानूनी कार्रवाई और साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

    वीडियो में दावा किया गया था कि जावेद अख्तर ने आखिरकार “खुदा की राह” अपना ली है। इस पर उन्होंने लिखा, “यह पूरी तरह बकवास है।” उन्होंने कहा कि वे इस फर्जी खबर को बनाने और फैलाने वालों को कोर्ट में घसीटेंगे क्योंकि इससे उनकी प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा है।

    आपको बता दें कि हाल ही में दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में जावेद अख्तर और इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती शमाइल नदवी के बीच ‘क्या ईश्वर का अस्तित्व है?’ विषय पर एक गंभीर बहस हुई थी। माना जा रहा है कि इसी चर्चा के बाद उनके विचारों को तोड़-मरोड़कर पेश करने के लिए यह डीपफेक वीडियो बनाया गया।

    जावेद अख्तर अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो तकनीक के इस गलत इस्तेमाल से परेशान हैं। हाल के दिनों में कई अन्य सितारों ने भी अपनी आवाज उठाई है। कुछ दिनों पहले, भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपनी उन AI जेनरेटेड तस्वीरों की आलोचना की थी जिनमें उन्हें संसद के बाहर साड़ी के बजाय पेंट-सूट में दिखाया गया था। उन्होंने इसे अपनी निजता का उल्लंघन बताते हुए कहा कि यह तय करना उनका अधिकार है कि वे क्या पहनना चाहती हैं।

    वहीं, दिसंबर 2025 में दक्षिण भारतीय अभिनेत्री श्रीलीला और निवेथा थॉमस ने भी अपनी फर्जी तस्वीरों के खिलाफ चेतावनी जारी की थी। निवेथा ने इसे ‘डिजिटल प्रतिरूपण’ करार देते हुए कानूनी कार्रवाई की बात कही थी।


    भारत में डीपफेक के खिलाफ क्या हैं नियम?

    भारत सरकार ने 2025 के अंत तक डीपफेक और AI जेनरेटेड कंटेंट के लिए कड़े दिशानिर्देश लागू किए हैं। आईटी नियम 2021 (संशोधित) के तहत प्लेटफॉर्म्स को शिकायत मिलने के 36 घंटे के भीतर ऐसी भ्रामक सामग्री हटानी होती है। सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि सभी AI-जनित फोटो या वीडियो पर कम से कम 10% हिस्से में यह स्पष्ट लिखा होना चाहिए कि यह ‘सिंथेटिक’ या ‘AI जेनरेटेड’ है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मानहानि और जालसाजी के लिए जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।

  • अनू मलिक ने 'Border 2' में Sandese Aate Hai रीक्रिएशन के लिए क्रेडिट की उम्मीद जताई

    अनू मलिक ने 'Border 2' में Sandese Aate Hai रीक्रिएशन के लिए क्रेडिट की उम्मीद जताई



    Ghar Kab Aaoge में रीक्रिएशन पर अनू मलिक की प्रतिक्रिया
    फिल्म Border 2 में पुराने गाने Sandese Aate Hai का रीक्रिएशन Ghar Kab Aaoge के रूप में किया गया है। इस नए संस्करण में संगीत मिथून ने तैयार किया है और अतिरिक्त बोल मनोज मुनताशिर ने लिखे हैं। मूल गाने के संगीतकार अनू मलिक और गीतकार जावेद अख्तर हैं। अनू मलिक ने PTI को दिए इंटरव्यू में कहा कि वह इस नए गाने के क्रेडिट में अपना नाम देखना चाहते हैं। उनका कहना है किगाने का मूल क्रेडिट अनू मलिक और जावेद अख्तर का है इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। Border 2 बिना Sandese Aate Hai के पूरा नहीं हो सकता।

    गाने में सिंगर्स और अनू मलिक की उम्मीदें

    अनू मलिक ने कहा कि नए गाने में सोनू निगम और अरिजित सिंह की आवाज़ें शामिल हैं जिससे यह एक शानदार अनुभव होगा। उन्होंने कहासोनू एक बेहतरीन गायक हैं और अरिजित जादुई आवाज़ वाले हैं। इन दोनों का मिश्रण गाने को और भी खूबसूरत बना देगा। लेकिन धुन का मूल अनू मलिक का है इसे कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता। गाने में विशाल मिश्रा और दिलजीत दोसांझ की आवाजें भी शामिल हैं।

    Sandese Aate Hai की यादें और महत्व
    मूल गाना Sandese Aate Hai सोनू निगम और रूपकुमार राठौड़ ने गाया था और इसे अपनी मधुरता बोल और फिल्मांकन के लिए याद किया जाता है। अनू मलिक ने कहा कि उन्होंने इस गाने को बनाने में पूरी मेहनत लगाई थी और इसे उन्होंने अपने देश के लिए समर्पित किया।

    Border 2 का विवरण और रिलीज़

    मूल फिल्म Border का निर्देशन जेपी दत्ता ने किया था और इसमें सनी देओल जैकी श्रॉफ सुनील शेट्टी और अक्षय खन्ना जैसे कलाकार थे। नई फिल्म Border 2 का निर्देशन अनुराग सिंह कर रहे हैं और इसमें सनी वरुण धवन दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म T-Series और JP Films के बैनर तले 23 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।