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  • ईरान के पास पहुंचा जेडी वेंस का शांति संदेश, तेहरान की चुप्पी ने बढ़ाई दुनिया की चिंता, क्या खत्म होगा अमेरिका से युद्ध?

    ईरान के पास पहुंचा जेडी वेंस का शांति संदेश, तेहरान की चुप्पी ने बढ़ाई दुनिया की चिंता, क्या खत्म होगा अमेरिका से युद्ध?


    नई दिल्ली। अमेरिका (America)और ईरान (Iran)के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने की कोशिशों के बीच कूटनीतिक हलचल (Diplomatic activity)एक बार फिर तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump)के निर्देश पर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई को एक पत्र भेजा है। इस पत्र के जरिए दोनों देशों के बीच बातचीत दोबारा शुरू करने और सैन्य टकराव रोकने की संभावनाएं तलाशने की कोशिश की गई है। ईरानी मीडिया के अनुसार तेहरान को यह पत्र मिल चुका है लेकिन अभी तक ईरान की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया गया है। ऐसे में पूरी दुनिया की निगाहें अब ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

    समाचार एजेंसी तस्नीम ने एक सूत्र के हवाले से बताया है कि ईरान को अमेरिकी उपराष्ट्रपति का पत्र प्राप्त हो गया है। हालांकि तेहरान ने फिलहाल इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक जेडी वेंस ने राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर यह संदेश भेजा है। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच संवाद का रास्ता खोलना और अमेरिका की ओर से संभावित नए सैन्य हमलों को रोकने की संभावनाओं पर चर्चा करना है। फिलहाल यह पहल किसी अंतिम शांति समझौते की शर्तें तय करने के बजाय बातचीत की रूपरेखा तैयार करने पर केंद्रित बताई जा रही है।

    अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी। उस दिन अमेरिका और इस्राइल ने मिलकर ईरान पर हवाई हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इस्राइल और पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। धीरे-धीरे यह संघर्ष व्यापक रूप लेता गया और क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता चला गया।

    युद्ध का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर देखने को मिला। ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही पर सख्त पाबंदियां लगा दीं। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल है। वैश्विक तेल खपत का करीब पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।

    ईरान ने इस समुद्री रास्ते को दोबारा खोलने और युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका के सामने सात शर्तें रखी हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि इस संबंध में मध्यस्थों के साथ बातचीत जारी है। तेहरान की प्रमुख मांगों में पूरे क्षेत्र में युद्धविराम लागू करना और विदेशों में जमा ईरानी संपत्तियों पर लगी रोक हटाना शामिल है। इसके अलावा ईरान अपने तेल उद्योग पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध खत्म करने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी तत्काल हटाने की मांग भी कर रहा है।

    ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसकी ओर से तय किए गए सख्त ढांचे को कमजोर करने वाली किसी भी स्थिति को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इससे साफ है कि तेहरान बातचीत के लिए तैयार होने के बावजूद अपनी शर्तों पर पीछे हटने के मूड में नहीं है। दूसरी ओर अमेरिका की पहल से कूटनीतिक समाधान की उम्मीद जरूर जगी है लेकिन ईरान की चुप्पी ने स्थिति को अनिश्चित बना दिया है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ईरान अमेरिकी प्रस्ताव पर सकारात्मक जवाब देगा या दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव और बढ़ेगा। यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो पश्चिम एशिया में शांति की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है। लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य और आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद बने रहे तो समझौते की राह मुश्किल हो सकती है। फिलहाल दुनिया को तेहरान के जवाब और वाशिंगटन के अगले कदम का इंतजार है।

  • US का अगला राष्ट्रपति कौन होगा….. ट्रंप ने जेडी वेंस और रुबियो को बताया संभावित दावेदार

    US का अगला राष्ट्रपति कौन होगा….. ट्रंप ने जेडी वेंस और रुबियो को बताया संभावित दावेदार


    मिशिगन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने 2028 के राष्ट्रपति चुनाव (Presidential Election) को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के संभावित दावेदारों के नाम बताए हैं। उन्होंने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (Vice President JD Vance) और विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Foreign Minister Marco Rubio) का नाम लेते हुए कहा कि पार्टी में कई मजबूत नेता हैं। ट्रंप ने रिपब्लिकन पार्टी की टीम को मजबूत बताते हुए डेमोक्रेटिक पार्टी पर निशाना साधा।

    मिशिगन में रैली से पहले एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में ट्रंप से पूछा गया कि 2028 में राष्ट्रपति पद के लिए कौन चुनाव लड़ सकता है। इस पर उन्होंने कहा कि अभी किसी एक नेता को सबसे आगे बताना जल्दबाजी होगी। हालांकि, पार्टी में कई अच्छे नाम मौजूद हैं।

    ट्रंप ने कहा “मैं आपको बता सकता हूं कि मेरी नजर में कौन है, लेकिन अभी थोड़ा जल्दी है।” उन्होंने जेडी वेंस और मार्को रुबियो का नाम लेते हुए कहा कि रिपब्लिकन पार्टी के पास मजबूत नेताओं की कमी नहीं है, जबकि डेमोक्रेट्स के पास ऐसी टीम नहीं है।


    रूस-यूक्रेन युद्ध और तेल को लेकर भी बोले ट्रंप

    मिशिगन रवाना होने से पहले ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध और ऊर्जा सुरक्षा पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अमेरिका तेल उद्योग को मौजूदा संघर्ष के कारण बंधक नहीं बनने देगा। ट्रंप ने दोहराया कि उनके विचार में यह युद्ध शुरू ही नहीं होना चाहिए था।


    3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव पर नजर

    अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव भी ट्रंप प्रशासन के लिए अहम माने जा रहे हैं। इन चुनावों से तय होगा कि कांग्रेस के दोनों सदनों (प्रतिनिधि सभा और सीनेट) में किस पार्टी की स्थिति मजबूत होगी। इसका असर ट्रंप के विधायी एजेंडे और वॉशिंगटन में राजनीतिक शक्ति के संतुलन पर पड़ सकता है।


    ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट की चर्चा

    ट्रंप प्रशासन के सामने आर्थिक चिंताओं और घटती लोकप्रियता जैसी चुनौतियां भी हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की सितंबर में प्रकाशित एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 37 प्रतिशत तक गिर गई थी। अखबार के अनुसार, 1990 से उसके सर्वे रिकॉर्ड में मध्यावधि चुनाव से पहले किसी राष्ट्रपति की रेटिंग का यह सबसे निचला स्तर था।

  • फ्रांस में हिंसक प्रदर्शन से बिगड़े हालात, ट्रंप ने मैक्रों से सीमाएं बंद करने को कहा, वेंस ने भी उठाए सवाल

    फ्रांस में हिंसक प्रदर्शन से बिगड़े हालात, ट्रंप ने मैक्रों से सीमाएं बंद करने को कहा, वेंस ने भी उठाए सवाल

    नई दिल्ली । फ्रांस में महंगाई, शिक्षा व्यवस्था और सरकारी सेवाओं की स्थिति को लेकर शुरू हुए विरोध प्रदर्शन हिंसक घटनाओं में बदल गए हैं। 17 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों के बाद 18 अक्टूबर को देश के कई हिस्सों में तोड़फोड़, दुकानों में लूटपाट और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। इन घटनाओं के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से देश की सीमाएं बंद करने की अपील की। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी फ्रांस में हुई हिंसा को लेकर वहां की सरकारों की नीतियों और विविधता से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए हैं।

    ट्रंप ने फ्रांस में हो रही घटनाओं को लेकर कहा कि देश में बाहर से आने वाले ऐसे लोगों की वजह से हालात बिगड़ रहे हैं, जिनके दिलों में नफरत है। उन्होंने फ्रांस को एक महान देश बताते हुए कहा कि इस तरह की परिस्थितियां देश को कमजोर कर सकती हैं। ट्रंप ने मैक्रों से आग्रह किया कि बहुत देर होने से पहले सीमाओं को बंद कर नियंत्रण स्थापित किया जाए। उनके बयान के बाद फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों और आव्रजन नीतियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

    इससे पहले ट्रंप ने फ्रांस की क्रांति से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा था कि फ्रांस क्रांति के लिए प्रसिद्ध है और लोग वहां जाकर क्रांति में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, हिंसक घटनाओं के बाद उनका रुख अधिक सख्त नजर आया। उन्होंने मौजूदा स्थिति को फ्रांस के लिए गंभीर बताते हुए सीमाओं पर नियंत्रण को जरूरी बताया।

    अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी फ्रांस में हुई हिंसा पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की उदारवादी सरकारों ने दया और विविधता के नाम पर तीसरी दुनिया के लोगों को फ्रांस सहित दूसरे देशों में आने दिया, लेकिन उनके समाज में घुलने-मिलने और अनुकूलता से जुड़े बुनियादी सवालों को नजरअंदाज किया गया। वेंस के अनुसार, सरकारों को पहले ही संभावित समस्याओं को लेकर चेतावनी दी गई थी, लेकिन समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए।

    लिमोजेस शहर के ऐतिहासिक सिटी हॉल में आग लगने की घटना का उल्लेख करते हुए वेंस ने चिंता जताई। यह इमारत करीब 143 साल पुरानी है और आग के कारण इसका कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। वेंस ने उम्मीद जताई कि फ्रांस इस स्थिति पर काबू पाएगा और अपनी ऐतिहासिक इमारतों को आगे होने वाले नुकसान से बचा सकेगा। उन्होंने अमेरिकी नागरिकों से भी फ्रांस में हो रही घटनाओं पर ध्यान देने की अपील की।

    फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों का मुख्य कारण महंगाई, शिक्षा व्यवस्था की समस्याएं और सरकारी सेवाओं की खराब स्थिति बताई गई है। इन मुद्दों को लेकर छात्र, ट्रेड यूनियन और अन्य समूह सड़कों पर उतरे थे। फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, 17 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों में करीब 5 लाख 50 हजार लोग शामिल हुए। वहीं, आयोजकों ने प्रदर्शनकारियों की संख्या लगभग 8 लाख बताई। इस तरह प्रदर्शनों में शामिल लोगों की संख्या को लेकर सरकारी आंकड़ों और आयोजकों के दावों में अंतर सामने आया।

    प्रदर्शन शुरुआत में आर्थिक परेशानियों और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों को लेकर किए गए थे, लेकिन बाद में कई जगहों पर स्थिति हिंसक हो गई। कुछ समूहों की पुलिस के साथ झड़प हुई, दुकानों में लूटपाट की गई और कई शहरों में इमारतों को आग के हवाले कर दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, घटनाओं के बाद करीब 1800 लोगों को गिरफ्तार किया गया। हिंसा के दौरान सैकड़ों पुलिसकर्मी और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े कर्मचारी भी घायल हुए।

    लिमोजेस में ऐतिहासिक सिटी हॉल को नुकसान पहुंचने की घटना ने स्थिति की गंभीरता को और स्पष्ट किया है। विरोध प्रदर्शनों के पीछे आर्थिक और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी शिकायतें हैं, जबकि अमेरिकी नेतृत्व ने आव्रजन और विविधता की नीतियों को लेकर अलग दृष्टिकोण सामने रखा है। फिलहाल फ्रांस में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और हिंसक घटनाओं के बाद स्थिति को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।

  • ईरान समझौते की कमान जेडी वेंस के हाथ: अमेरिकी राजनीति में बढ़ा कद, जोखिम भी उतना ही बड़ा

    ईरान समझौते की कमान जेडी वेंस के हाथ: अमेरिकी राजनीति में बढ़ा कद, जोखिम भी उतना ही बड़ा

    वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक वार्ता ने वैश्विक राजनीति का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में अब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस दिखाई दे रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से ईरान के साथ संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश में वेंस न केवल प्रमुख वार्ताकार बनकर उभरे हैं बल्कि इस पहल की सफलता और असफलता दोनों का राजनीतिक भार भी उनके कंधों पर आ गया है।

    स्विट्जरलैंड में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चल रही बातचीत को ट्रंप प्रशासन एक ऐतिहासिक अवसर के रूप में देख रहा है। अमेरिकी नेतृत्व का मानना है कि यदि यह पहल सफल होती है तो मध्य पूर्व की राजनीति में एक बड़ा बदलाव संभव हो सकता है। इसी कारण जेडी वेंस को इस पूरी प्रक्रिया का प्रमुख चेहरा बनाया गया है।

    वेंस ने हाल ही में कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप चाहते हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों का एक नया अध्याय शुरू हो। उनका कहना था कि यदि ईरान क्षेत्रीय अस्थिरता पैदा करने वाली गतिविधियों और परमाणु हथियारों की महत्वाकांक्षा से पीछे हटता है तो अमेरिका भी संबंधों को पूरी तरह बदलने के लिए तैयार है। इस बयान ने साफ संकेत दिया कि ट्रंप प्रशासन टकराव के बजाय संवाद के रास्ते को प्राथमिकता देना चाहता है।

    पिछले कुछ सप्ताहों में जेडी वेंस की भूमिका और प्रभाव दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विदेश मंत्री समेत कई वरिष्ठ अधिकारी जहां अपेक्षाकृत कम सक्रिय दिखाई दिए वहीं वेंस लगातार सरकार का पक्ष रखते हुए वार्ता को आगे बढ़ाने में जुटे रहे। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी सार्वजनिक रूप से उनकी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि यदि बातचीत सफल रही तो उसका श्रेय वह स्वयं लेंगे और यदि विफल रही तो दोष वेंस को देंगे। हालांकि यह टिप्पणी हल्के अंदाज में की गई थी लेकिन इससे इस वार्ता में वेंस की केंद्रीय भूमिका स्पष्ट हो जाती है।

    दूसरी ओर इस समझौते को लेकर अमेरिकी राजनीति में तीखी बहस भी छिड़ गई है। डेमोक्रेटिक नेताओं ने इसे ईरान के प्रति अत्यधिक नरम रुख बताते हुए आलोचना की है। उनका मानना है कि इससे ईरान को आर्थिक और रणनीतिक लाभ मिल सकते हैं। वहीं रिपब्लिकन पार्टी के कुछ प्रभावशाली नेताओं ने भी चिंता जताई है कि अतिरिक्त संसाधनों का उपयोग ईरान अपनी सैन्य क्षमता और क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने में कर सकता है।

    आलोचनाओं के बावजूद ट्रंप प्रशासन इस पहल को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि मान रहा है। प्रशासन का तर्क है कि वर्षों से जमे गतिरोध को तोड़ते हुए पहली बार उच्च स्तर पर प्रत्यक्ष संवाद स्थापित हुआ है। अधिकारियों का मानना है कि बातचीत के जरिए स्थायी समाधान तलाशने का प्रयास किया जाना चाहिए।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले 60 दिन जेडी वेंस के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं। यदि वार्ता सकारात्मक परिणाम देती है तो उनकी छवि एक प्रभावशाली कूटनीतिक नेता और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के जानकार राजनेता के रूप में मजबूत होगी। वहीं यदि बातचीत विफल होती है तो उन्हें विपक्ष ही नहीं बल्कि अपनी पार्टी के भीतर भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ सकता है।

    यही कारण है कि ईरान के साथ चल रही यह वार्ता केवल दो देशों के संबंधों तक सीमित नहीं रह गई है। इसके परिणाम अमेरिकी राजनीति और जेडी वेंस के भविष्य दोनों पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं। आने वाले सप्ताह यह तय करेंगे कि यह पहल ऐतिहासिक सफलता साबित होगी या फिर अमेरिकी कूटनीति के लिए एक नई चुनौती बनकर सामने आएगी।

  • स्विट्जरलैंड वार्ता में दिखे कूटनीतिक संकेत ईरानी डेलिगेशन लौटा वेंस और कतर के मंत्री की मुलाकात बनी चर्चा का विषय

    स्विट्जरलैंड वार्ता में दिखे कूटनीतिक संकेत ईरानी डेलिगेशन लौटा वेंस और कतर के मंत्री की मुलाकात बनी चर्चा का विषय


    नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता को कम करने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड में आयोजित ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता का नया दौर कई वजहों से सुर्खियों में आ गया है। बातचीत का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करना और ऊर्जा बाजार पर पड़ रहे प्रभाव को नियंत्रित करना था लेकिन वार्ता के दौरान सामने आए कुछ घटनाक्रमों ने राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    स्विस रिसॉर्ट बुर्गेनस्टॉक में आयोजित इस बैठक में अमेरिका और ईरान के वरिष्ठ प्रतिनिधि लंबे समय तक बातचीत में शामिल रहे। दोनों पक्षों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई लेकिन किसी ठोस सहमति तक पहुंचने की खबर सामने नहीं आई। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ हालिया बयानों के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने असंतोष जताया और कुछ समय के लिए वार्ता प्रक्रिया से अलग हो गया। हालांकि बाद में यह स्पष्ट किया गया कि बातचीत पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और आने वाले हफ्तों में इस पर आगे विचार विमर्श जारी रहेगा।

    इस बीच सम्मेलन से जुड़े कुछ दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे। इन वीडियो और तस्वीरों के आधार पर कई तरह के दावे और व्याख्याएं सामने आने लगीं। सबसे ज्यादा चर्चा उस समय हुई जब यह दावा किया गया कि कतर के एक वरिष्ठ मंत्री और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बीच औपचारिक अभिवादन के दौरान हाथ नहीं मिलाया गया। हालांकि इस संबंध में किसी भी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कूटनीतिक कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल समय प्रबंधन और मंच व्यवस्था जैसी कई वजहों से ऐसी स्थितियां बन सकती हैं इसलिए किसी एक दृश्य के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जा सकता।

    एक अन्य घटनाक्रम जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया वह ईरानी प्रतिनिधिमंडल का सामूहिक फोटो सत्र में शामिल न होना था। रिपोर्टों के मुताबिक ईरानी प्रतिनिधि कार्यक्रम स्थल से बिना तस्वीर खिंचवाए रवाना हो गए। हालांकि इसके पीछे की वास्तविक वजह सार्वजनिक नहीं की गई है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई बार देश अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं या राजनीतिक संदेशों के तहत कुछ औपचारिक गतिविधियों से दूरी बनाते हैं। इसलिए इस घटना को भी उसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

    बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की मौजूदगी को लेकर भी सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं देखने को मिलीं। वायरल तस्वीरों और वीडियो के आधार पर लोगों ने अलग अलग अनुमान लगाए लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्यक्ति के चेहरे के भाव या शारीरिक हावभाव के आधार पर उसकी मानसिक स्थिति या राजनीतिक रुख का आकलन नहीं किया जा सकता।

    अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अक्सर छोटे दिखने वाले घटनाक्रम भी बड़े संदेशों के रूप में देखे जाते हैं। यही कारण है कि ऐसे सम्मेलनों में नेताओं की गतिविधियां मीडिया और विश्लेषकों की नजर में रहती हैं। हालांकि किसी भी घटना की सही व्याख्या के लिए आधिकारिक बयानों और विश्वसनीय तथ्यों का इंतजार करना जरूरी होता है।

    फिलहाल स्विट्जरलैंड में हुई यह वार्ता किसी निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंची है लेकिन इससे जुड़े कूटनीतिक संकेत और चर्चाएं वैश्विक राजनीति में आने वाले दिनों तक चर्चा का विषय बने रहने की संभावना है।

  • ईरान को ट्रंप-वेंस की कड़ी चेतावनी: डील नहीं तो सैन्य कार्रवाई, परमाणु हथियारों पर बढ़ा तनाव

    ईरान को ट्रंप-वेंस की कड़ी चेतावनी: डील नहीं तो सैन्य कार्रवाई, परमाणु हथियारों पर बढ़ा तनाव



    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान परमाणु समझौते पर सहमत नहीं होता है तो सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    वॉशिंगटन में मीडिया से बातचीत करते हुए जेडी वेंस ने कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम न सिर्फ पश्चिम एशिया बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उनके अनुसार, अगर ईरान परमाणु हथियार विकसित करता है तो इससे वैश्विक स्तर पर हथियारों की नई होड़ शुरू हो सकती है।

    वेंस ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के सामने एक सरल प्रस्ताव रखा है, जिसमें या तो बातचीत के जरिए समझौता किया जाए या फिर तनाव बढ़ने की स्थिति में परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान किसी भी हाल में परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता।

    उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के साथ सद्भावना के आधार पर बातचीत करना चाहता है और बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद अभी भी बनी हुई है। वेंस के मुताबिक, कुछ संकेत ऐसे मिले हैं जिससे लगता है कि ईरान समझौते की दिशा में आगे बढ़ सकता है, लेकिन अंतिम स्थिति तभी साफ होगी जब किसी समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होंगे।

    जेडी वेंस ने ईरान की आंतरिक राजनीतिक स्थिति को जटिल बताते हुए कहा कि वहां कई शक्तिशाली गुट सक्रिय हैं, जिससे यह समझना मुश्किल हो जाता है कि वास्तव में ईरान की नीति क्या है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान के यूरेनियम भंडार को रूस भेजने जैसी किसी रिपोर्ट की पुष्टि नहीं करता।

    इस बीच पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बयान दिया है कि अमेरिका का लक्ष्य इस संघर्ष को जल्द खत्म करना है और ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि समाधान की दिशा में प्रयास तेज किए जा रहे हैं।

    गौरतलब है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव की स्थिति बनी हुई है। हाल के वर्षों में कई बार सैन्य टकराव और हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, हालांकि कुछ समय के लिए सीजफायर की स्थिति बनी थी। इसके बावजूद स्थायी समझौता अभी तक नहीं हो सका है और हालात फिर से तनावपूर्ण बने हुए हैं।

  • ईरान युद्ध में बैकफुट पर ट्रंप….. जेडी वेंस बोले- लंबे समय तक सैन्य संघर्ष में उलझे रहने का इच्छुक नहीं अमेरिका

    ईरान युद्ध में बैकफुट पर ट्रंप….. जेडी वेंस बोले- लंबे समय तक सैन्य संघर्ष में उलझे रहने का इच्छुक नहीं अमेरिका


    वाशिंगटन।
    अमेरिका और ईरान (America-Iran War) के बीच जारी तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (US Vice President J.D. Vance) ने संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान में लंबे समय तक सैन्य संघर्ष में उलझे रहने का इच्छुक नहीं है और जल्द ही अपने अभियान को समाप्त कर वहां से निकलना चाहता है। एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में वेंस ने कहा कि अमेरिका का लक्ष्य ईरान में अपना काम पूरा करना है, न कि एक या दो साल तक वहां मौजूद रहना।

    उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम एक साल या दो साल आगे की योजना नहीं बना रहे हैं। हम अपना काम कर रहे हैं और जल्द ही वहां से बाहर आ जाएंगे।” उनके इस बयान को अमेरिकी रणनीति में सीमित और त्वरित सैन्य हस्तक्षेप के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    वेंस ने यह भी बताया कि अमेरिकी प्रशासन कुछ समय तक अपना अभियान जारी रखेगा, ताकि भविष्य में फिर से ऐसी कार्रवाई की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने इसे एक ऐसी रणनीति बताया, जिसका उद्देश्य लंबे समय तक चलने वाले युद्ध से बचना है। इस बीच, उन्होंने यह भी दावा किया कि जैसे ही हालात सामान्य होंगे ईंधन की कीमतों में भी गिरावट आएगी। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ा है।

    यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर संभावित हमलों को 10 दिनों के लिए टालने का फैसला किया है। यह समयसीमा अब 6 अप्रैल तक बढ़ा दी गई है। ट्रंप ने कहा कि यह फैसला ईरान के अनुरोध पर लिया गया है और दोनों देशों के बीच बातचीत काफी अच्छी चल रही है।

    दूसरी ओर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने पड़ोसी देशों को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि वे अपने क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ युद्ध संचालन के लिए न होने दें। इसे उन देशों के लिए संदेश माना जा रहा है, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। पेजेशकियान ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी तरह के पूर्व-आक्रमण में विश्वास नहीं करता, लेकिन अगर उसके बुनियादी ढांचे या आर्थिक केंद्रों पर हमला हुआ तो कड़ा जवाब देगा।

    गौरतलब है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा यह संघर्ष अब दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है। यह टकराव 28 फरवरी को अमेरिकी हवाई हमलों के बाद शुरू हुआ था, जिसमें ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत हुई थी।