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  • ₹11200 करोड़ का जेवर एयरपोर्ट और भारी बारिश का दावा! वायरल तस्वीर के बाद सुरक्षा और जलनिकासी पर चर्चा

    ₹11200 करोड़ का जेवर एयरपोर्ट और भारी बारिश का दावा! वायरल तस्वीर के बाद सुरक्षा और जलनिकासी पर चर्चा


    नई दिल्ली । नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को लेकर सोशल मीडिया पर सामने आई एक तस्वीर ने बारिश के दौरान एयरपोर्ट परिसर की तैयारियों और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है। तस्वीर में एयरपोर्ट के आसपास बड़े स्तर पर पानी भरा हुआ दिखाई दे रहा है और पार्किंग तथा सड़क जैसे हिस्से भी जलमग्न नजर आ रहे हैं। तस्वीर के साथ दावा किया जा रहा है कि भारी बारिश के बाद जेवर एयरपोर्ट का बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया। हालांकि तस्वीर और उसके साथ किए जा रहे दावे की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इसे वास्तविक स्थिति का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

    तस्वीर में एयरपोर्ट जैसी इमारत और उसके सामने बड़ी मात्रा में जमा पानी दिखाई देता है। कई वाहन पानी के बीच खड़े नजर आ रहे हैं जबकि आसपास के रास्ते भी जलभराव की चपेट में दिखाई दे रहे हैं। इसी आधार पर सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे भारी बारिश के दौरान जलनिकासी व्यवस्था की परीक्षा के तौर पर देख रहे हैं तो कुछ लोग तस्वीर की वास्तविकता पर सवाल उठा रहे हैं।

    जेवर में विकसित हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में शामिल है। इसे दिल्ली एनसीआर के लिए एक महत्वपूर्ण एयर कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जा रहा है। एयरपोर्ट के निर्माण से क्षेत्र में कारोबार पर्यटन रोजगार और रियल एस्टेट गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जाती रही है। ऐसे में बारिश के दौरान जलभराव से जुड़ी कोई भी तस्वीर स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान खींचती है।

    किसी भी बड़े एयरपोर्ट के लिए बारिश के पानी की निकासी बेहद महत्वपूर्ण होती है। रनवे टैक्सीवे पार्किंग एप्रन और यात्रियों के आवागमन वाले हिस्सों में जलभराव रोकना एयरपोर्ट संचालन की अहम जरूरत होती है। खासतौर पर मानसून के दौरान कम समय में होने वाली तेज बारिश के पानी को तेजी से बाहर निकालने के लिए प्रभावी ड्रेनेज सिस्टम जरूरी होता है। अगर किसी एयरपोर्ट परिसर में लंबे समय तक पानी जमा रहता है तो इससे यातायात और संचालन के साथ बुनियादी ढांचे पर भी असर पड़ सकता है।

    हालांकि वायरल तस्वीर को देखकर सीधे यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि पूरा एयरपोर्ट जलमग्न हो गया या परियोजना की पूरी व्यवस्था विफल हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली तस्वीरों के साथ कई बार गलत संदर्भ भी जोड़ दिए जाते हैं। तस्वीर पुरानी हो सकती है किसी दूसरे स्थान की हो सकती है या डिजिटल रूप से बदली गई हो सकती है। इसलिए आधिकारिक पुष्टि के बिना बड़े दावे को तथ्य मानने से बचना जरूरी है।

    इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि एयरपोर्ट प्रबंधन या संबंधित प्रशासन की ओर से बारिश और जलभराव को लेकर क्या आधिकारिक जानकारी सामने आती है। अगर वास्तव में परिसर के किसी हिस्से में पानी जमा हुआ है तो इसकी वजह और जलनिकासी व्यवस्था की स्थिति की जानकारी भी सामने आनी चाहिए।

    फिलहाल वायरल तस्वीर ने जेवर एयरपोर्ट की बारिश से निपटने की तैयारियों को लेकर बहस जरूर छेड़ दी है। लेकिन तस्वीर के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय रिपोर्ट का इंतजार करना ज्यादा उचित होगा।

  • जेवर एयरपोर्ट पर तेज बारिश के बाद जलभराव, पार्किंग में भरा पानी देख उठे सवाल; 30 मिनट में संभाली गई स्थिति

    जेवर एयरपोर्ट पर तेज बारिश के बाद जलभराव, पार्किंग में भरा पानी देख उठे सवाल; 30 मिनट में संभाली गई स्थिति


    नई दिल्ली। ग्रेटर नोएडा के जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर तेज बारिश के बाद कुछ समय के लिए जलभराव की स्थिति बन गई। एयरपोर्ट के पार्किंग कंपाउंड के पास बड़ी मात्रा में पानी जमा हो गया और टर्मिनल से पार्किंग एरिया की ओर जाने वाले रास्ते पर भी पानी भर गया। जलभराव का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में पार्किंग क्षेत्र के पास पानी जमा दिखाई दे रहा है, जबकि एयरपोर्ट से जुड़े कर्मचारी जल निकासी की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। इस घटना के बाद एयरपोर्ट परिसर में बारिश के पानी की निकासी व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    बताया जा रहा है कि दिन के समय अचानक हुई तेज बारिश के बाद टर्मिनल और पार्किंग को जोड़ने वाले मार्ग पर पानी जमा हो गया। कुछ समय के लिए यात्रियों और एयरपोर्ट परिसर में मौजूद लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि एयरपोर्ट प्रबंधन को जलभराव की जानकारी मिलते ही टीमों को सक्रिय किया गया और पानी निकालने का काम शुरू कर दिया गया।

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रबंधन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि तेज बारिश के कारण टर्मिनल से पार्किंग एरिया को जोड़ने वाले रास्ते पर कुछ समय के लिए पानी जमा हुआ था। एयरपोर्ट की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए करीब 30 मिनट के भीतर जलभराव को पूरी तरह खत्म कर दिया। प्रबंधन के मुताबिक इस दौरान उड़ानों के संचालन पर कोई असर नहीं पड़ा और एयरपोर्ट की अन्य व्यवस्थाएं भी सामान्य रूप से चलती रहीं।

    एयरपोर्ट प्रशासन का कहना है कि यात्रियों की आवाजाही को बनाए रखने के लिए जरूरी कदम तुरंत उठाए गए। जलभराव वाले हिस्से में स्थिति सामान्य होने के बाद आवागमन भी सुचारु हो गया। साथ ही मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि बारिश के दौरान किसी तरह की परेशानी होने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

    हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने एयरपोर्ट की जल निकासी व्यवस्था को लेकर चर्चा जरूर छेड़ दी है। यात्रियों और सोशल मीडिया यूजर्स की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं कि आधुनिक सुविधाओं से लैस एयरपोर्ट परिसर में तेज बारिश के बाद पानी जमा होने की स्थिति क्यों बनी। खास तौर पर टर्मिनल और पार्किंग के बीच के मार्ग में पानी भरने को लेकर लोग व्यवस्था की क्षमता पर सवाल कर रहे हैं।

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पहला चरण 28 मार्च 2026 को उद्घाटित हुआ था और 15 जून से यहां कमर्शियल उड़ान संचालन शुरू हुआ। ऐसे में शुरुआती बारिश के दौरान सामने आई जलभराव की तस्वीरों ने एयरपोर्ट की आधारभूत सुविधाओं और ड्रेनेज सिस्टम को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। हालांकि एयरपोर्ट प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि जलभराव अस्थायी था और महज 30 मिनट में पानी निकाल दिया गया था।

    फिलहाल एयरपोर्ट प्रशासन की प्राथमिकता बारिश के दौरान यात्रियों की आवाजाही को सुचारु बनाए रखना और जलभराव की स्थिति दोबारा बनने पर तत्काल कार्रवाई करना है। वायरल वीडियो के बाद उठे सवालों के बीच आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि भारी बारिश के दौरान एयरपोर्ट परिसर की जल निकासी व्यवस्था किस तरह काम करती है।

  • जेवर एयरपोर्ट की पहली भारी बारिश में जलभराव से मचा हड़कंप, AAP ने उठाए निर्माण और भ्रष्टाचार पर सवाल

    जेवर एयरपोर्ट की पहली भारी बारिश में जलभराव से मचा हड़कंप, AAP ने उठाए निर्माण और भ्रष्टाचार पर सवाल


    उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश के जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मंगलवार को हुई तेज बारिश के बाद टर्मिनल और पार्किंग क्षेत्र को जोड़ने वाले मार्ग पर जलभराव की स्थिति बन गई। अचानक बड़ी मात्रा में पानी जमा होने के बाद एयरपोर्ट का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया और इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई। हालांकि एयरपोर्ट प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई करते हुए करीब 30 मिनट के भीतर जलभराव को दूर कर दिया और यात्री तथा वाहनों की आवाजाही को सामान्य बनाए रखा। एयरपोर्ट अथॉरिटी के मुताबिक जलभराव के दौरान वाहनों को वैकल्पिक मार्ग से निकाला गया था, जिससे उड़ानों के संचालन पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा।

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की ओर से बताया गया कि मंगलवार को अचानक हुई भारी बारिश के कारण टर्मिनल और पार्किंग के बीच के रास्ते पर पानी जमा हो गया था। स्थिति की जानकारी मिलते ही एयरपोर्ट की टीमों ने मौके पर पहुंचकर पानी निकालने का काम शुरू किया। आधे घंटे से भी कम समय में जलभराव को साफ कर दिया गया। प्रशासन के अनुसार इस दौरान यात्रियों के पिकअप और ड्रॉप की व्यवस्था भी जारी रही तथा किसी उड़ान को प्रभावित नहीं होना पड़ा। पानी निकलने के बाद टर्मिनल और पार्किंग के बीच वाहनों और यात्रियों की आवाजाही पहले की तरह सामान्य हो गई।

    एयरपोर्ट प्रशासन ने यह भी कहा कि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। बारिश के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए संबंधित टीमें अलर्ट पर हैं। एयरपोर्ट की ओर से दावा किया गया कि जलभराव के बावजूद परिचालन व्यवस्था सुचारु रही और यात्रियों को किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

    हालांकि जलभराव का वीडियो सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर सरकार और एयरपोर्ट के निर्माण पर सवाल खड़े कर दिए। AAP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि करीब 11,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए एयरपोर्ट की पहली ही भारी बारिश में जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। पार्टी ने इसे कथित तौर पर घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा है। हालांकि AAP के इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

    जेवर एयरपोर्ट को उत्तर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में गिना जाता है। करीब 11,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन 28 मार्च 2026 को हुआ था। इसके बाद 15 जून से इंडिगो की उड़ानों के साथ यहां व्यावसायिक परिचालन शुरू हुआ। एयरपोर्ट से जुड़ी सुविधाओं और कनेक्टिविटी को लेकर इसे दिल्ली एनसीआर के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है।

    ऐसे में एयरपोर्ट परिसर में भारी बारिश के बाद जलभराव की घटना ने निर्माण गुणवत्ता और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर बहस जरूर छेड़ दी है। फिलहाल प्रशासन की ओर से पानी समय रहते निकाल दिया गया और उड़ानों का संचालन प्रभावित नहीं हुआ। आने वाले दिनों में बारिश के दौरान जलनिकासी व्यवस्था किस तरह काम करती है और क्या ऐसी स्थिति दोबारा सामने आती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

  • हाई-स्पीड रेल से बदलेगी NCR की तस्वीर, दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट पहुंचना होगा महज 21 मिनट में आसान

    हाई-स्पीड रेल से बदलेगी NCR की तस्वीर, दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट पहुंचना होगा महज 21 मिनट में आसान

    नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और तेज बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम सामने आया है। प्रस्तावित हाई-स्पीड रैपिड रेल कनेक्टिविटी योजना के तहत दिल्ली और नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बीच यात्रा का समय घटकर मात्र 21 मिनट तक सीमित हो सकता है। इस परियोजना को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी मंजूरी दे दी है और अब इसे अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय को भेज दिया गया है।

    इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम को दिल्ली-जेवर एयरपोर्ट कनेक्टिविटी के लिए प्रमुख माध्यम के रूप में विकसित किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर न केवल यात्रियों के लिए समय की बड़ी बचत करेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के आर्थिक और औद्योगिक विकास को भी नई गति देगा।

    योजना के अनुसार प्रस्तावित कॉरिडोर को एक समर्पित स्टेशन के माध्यम से सीधे एयरपोर्ट टर्मिनल से जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रियों को बिना किसी अतिरिक्त ट्रैफिक या देरी के तेज और सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिलेगा। यह कनेक्टिविटी दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का भी हिस्सा हो सकती है, जिससे भविष्य में इसे और व्यापक परिवहन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

    अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास क्षेत्र के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के शुरू होने के बाद यह पूरा क्षेत्र लॉजिस्टिक्स, कार्गो और औद्योगिक निवेश का एक बड़ा केंद्र बनने की क्षमता रखता है। तेज रफ्तार रेल कनेक्टिविटी इस विकास को और अधिक मजबूती प्रदान करेगी।

    इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि दिल्ली और नोएडा एयरपोर्ट के बीच मौजूदा यात्रा समय, जो सड़क मार्ग से काफी अधिक है, वह घटकर लगभग एक घंटे से भी कम होकर केवल 21 मिनट रह जाएगा। इससे न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी बल्कि एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो सकेगी।

     विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस परियोजना को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल जाती है तो यह एनसीआर क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन का चेहरा पूरी तरह बदल सकती है। इससे सड़क यातायात पर दबाव कम होगा और पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।

    फिलहाल इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अंतिम स्वीकृति का इंतजार है। मंजूरी मिलने के बाद इसके निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाने की योजना है, जिससे आने वाले वर्षों में दिल्ली और जेवर एयरपोर्ट के बीच तेज, आधुनिक और विश्वस्तरीय रेल कनेक्टिविटी स्थापित की जा सके।

  • हवाई चप्पल से आसमान तक भारत की उड़ान मोदी युग में 90 नए एयरपोर्ट से बदली तस्वीर

    हवाई चप्पल से आसमान तक भारत की उड़ान मोदी युग में 90 नए एयरपोर्ट से बदली तस्वीर


    नई दिल्ली: पिछले एक दशक में भारत ने विकास के कई आयाम छुए हैं लेकिन हवाई कनेक्टिविटी के क्षेत्र में जो बदलाव देखने को मिला है वह सबसे उल्लेखनीय माना जा रहा है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को विकास का अहम आधार बनाया और इसका परिणाम आज साफ नजर आता है। जहां वर्ष 2014 में देश में केवल 74 ऑपरेशनल एयरपोर्ट थे वहीं वर्ष 2026 तक यह संख्या बढ़कर 160 से अधिक हो गई है। यह सिर्फ आंकड़ों का बदलाव नहीं बल्कि आम नागरिक के जीवन में आए बड़े परिवर्तन की कहानी है।

    हाल ही में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन इस बदलाव का प्रतीक बनकर सामने आया है। यह एयरपोर्ट न केवल दिल्ली एनसीआर का दूसरा अंतरराष्ट्रीय हब है बल्कि उत्तर भारत के आर्थिक विकास का नया केंद्र भी बनने जा रहा है। शुरुआती चरण में इसकी क्षमता 1.2 करोड़ यात्रियों की है जिसे भविष्य में 7 करोड़ तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

    इस परिवर्तन के पीछे सबसे बड़ी भूमिका उड़ान योजना की रही है जिसने छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों को पहली बार हवाई नक्शे पर जगह दिलाई। पहले जहां हवाई यात्रा केवल संपन्न वर्ग तक सीमित थी वहीं अब आम नागरिक भी कम कीमत में फ्लाइट का लाभ उठा रहा है। इस योजना के तहत लाखों लोगों ने पहली बार हवाई यात्रा का अनुभव किया है जिससे यात्रा संस्कृति में भी बड़ा बदलाव आया है।

    सरकार ने ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नीति के तहत कई नए एयरपोर्ट को मंजूरी दी और पुराने बंद पड़े एयरपोर्ट को भी दोबारा चालू किया। सिक्किम का पाक्योंग एयरपोर्ट से लेकर गोवा का मोपा एयरपोर्ट और अब जेवर एयरपोर्ट तक यह विस्तार एक सुनियोजित रणनीति का परिणाम है। इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय ने इस विकास को गति दी है।

    एयरपोर्ट केवल यात्रा का माध्यम नहीं बल्कि आर्थिक गतिविधियों के बड़े केंद्र भी बनते हैं। जहां भी नया एयरपोर्ट बना वहां रोजगार के अवसर बढ़े पर्यटन को बढ़ावा मिला और स्थानीय व्यापार को नई ऊर्जा मिली। जेवर एयरपोर्ट जैसे प्रोजेक्ट से आसपास के शहरों जैसे आगरा मेरठ अलीगढ़ और मथुरा को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे कृषि उत्पाद और उद्योगों को भी वैश्विक बाजार तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।

    भविष्य की बात करें तो सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक 350 से 400 एयरपोर्ट तैयार करने का है। इसके तहत हेलिपोर्ट और वॉटर एयरोड्रोम को भी बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि देश का कोई भी क्षेत्र कनेक्टिविटी से वंचित न रहे। यह पूरी रणनीति विकसित भारत के विजन का हिस्सा है जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर को विकास की रीढ़ माना गया है।

    स्पष्ट है कि भारत की यह एयरपोर्ट क्रांति केवल संख्या बढ़ाने की कहानी नहीं बल्कि एक ऐसे बदलाव की मिसाल है जिसने आम आदमी को आसमान से जोड़ा है और देश की अर्थव्यवस्था को नई उड़ान दी है।

  • उत्तर प्रदेश में निवेश का बड़ा तोहफा: जेवर एयरपोर्ट पर दो प्रोजेक्ट्स में 4,458 करोड़ रुपए का निवेश

    उत्तर प्रदेश में निवेश का बड़ा तोहफा: जेवर एयरपोर्ट पर दो प्रोजेक्ट्स में 4,458 करोड़ रुपए का निवेश


    नई दिल्ली। लखनऊ । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सिंगापुर दौरे के दूसरे दिन राज्य को वैश्विक निवेश का एक और बड़ा तोहफा मिला। सीएम योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने एविएशन सर्विस सेक्टर की अग्रणी कंपनी सैट्स लिमिटेड के साथ एक महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

    इस समझौते के तहत कंपनी गौतमबुद्ध नगर स्थित जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर दो प्रमुख परियोजनाएं स्थापित करेगी। पहले प्रोजेक्ट में अत्याधुनिक कार्गो कॉम्प्लेक्स का निर्माण शामिल है और दूसरे में विश्वस्तरीय एयर कैटरिंग किचेन स्थापित की जाएगी। इन दोनों परियोजनाओं पर कुल निवेश 4,458 करोड़ रुपए होगा।

    एमओयू के अनुसार, जेवर एयरपोर्ट परिसर में बनने वाला अत्याधुनिक कार्गो कॉम्प्लेक्स न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए एयर फ्रेट और लॉजिस्टिक्स का प्रमुख केंद्र बनेगा। इस परियोजना से निर्यात-आयात गतिविधियों को गति मिलेगी और विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, कृषि उत्पाद जैसे क्षेत्रों को लाभ पहुंचेगा। जेवर एयरपोर्ट को मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के साथ विकसित किया जा रहा है, जिससे यह कार्गो कॉम्प्लेक्स अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए रणनीतिक हब के रूप में उभरेगा।

    एमओयू के दूसरे प्रमुख निवेश के तहत नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ही एक अत्याधुनिक एयर कैटरिंग किचेन स्थापित किया जाएगा। इस किचेन से उच्च गुणवत्ता वाला भोजन जेवर एयरपोर्ट से संचालित होने वाली उड़ानों के लिए उपलब्ध होगा। खास बात यह है कि यहां तैयार किया गया भोजन केवल जेवर एयरपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसकी सप्लाई पूरे उत्तर भारत के विभिन्न एयरपोर्ट्स तक की जाएगी। इससे फूड प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन नेटवर्क को मजबूती मिलेगी और हजारों प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

    मुख्यमंत्री के सिंगापुर दौरे का उद्देश्य वैश्विक निवेशकों को उत्तर प्रदेश की संभावनाओं से जोड़ना है। दूसरे दिन हुए इस एमओयू को राज्य के एविएशन, लॉजिस्टिक्स और सर्विस सेक्टर के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

    जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के चालू होने के साथ ही यह कार्गो कॉम्प्लेक्स और एयर कैटरिंग सुविधा उत्तर भारत के आर्थिक परिदृश्य को नई दिशा देंगे। यह न केवल राज्य की आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देगा, बल्कि प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर और मजबूत स्थिति में स्थापित करेगा। निवेश से जुड़े ये प्रोजेक्ट्स रोजगार सृजन, व्यापार संवर्द्धन और क्षेत्रीय विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

    सीएम योगी ने इस अवसर पर कहा कि वैश्विक निवेशकों को राज्य की संभावनाओं और बुनियादी ढांचे से जोड़कर उत्तर प्रदेश को एक निवेश-अनुकूल केंद्र बनाया जा रहा है। सैट्स जैसी अग्रणी कंपनियों के साथ समझौते से राज्य में लॉजिस्टिक्स, एविएशन और सर्विस सेक्टर में निवेश का नया दौर शुरू होगा।