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  • झाबुआ के कुएं में बुजुर्ग महिला का शव मिला, एक दिन पहले शादी में जाने निकली थीं

    झाबुआ के कुएं में बुजुर्ग महिला का शव मिला, एक दिन पहले शादी में जाने निकली थीं


    मध्यप्रदेश । झाबुआ जिले के मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर खरडू छोटी गांव के माल फालिया इलाके में सोमवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां एक बिना मुंडेर के कुएं में बुजुर्ग महिला का शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। घटना का पता तब चला जब कुछ बच्चे कुएं के पास नीम के पेड़ पर खेल रहे थे।

    खेल के दौरान बच्चों की नजर अचानक कुएं के अंदर पड़ी, जहां उन्हें एक शव पानी में तैरता हुआ दिखाई दिया। घबराए बच्चों ने तुरंत गांव की ओर दौड़ लगाई और लोगों को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलते ही मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई और पूरे गांव में हड़कंप मच गया।

    ग्रामीणों ने तत्काल मामले की सूचना गांव के तड़वी (ग्राम प्रमुख) को दी, जिन्होंने पुलिस को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही झाबुआ कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से शव को कुएं से बाहर निकाला। इसके बाद शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की गई।

    पुलिस ने मृतका की पहचान झकेला गांव निवासी 70 वर्षीय तितली बाई (पति दूला बामनिया) के रूप में की है। प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि बुजुर्ग महिला मानसिक रूप से अस्वस्थ थीं, जिससे मामले को लेकर कई पहलुओं पर जांच की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, तितली बाई रविवार शाम करीब 5 बजे एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए खरडू बड़ी गांव जा रही थीं। इसी दौरान रास्ते में अनसिग नामक व्यक्ति के खेत में बने बिना मुंडेर के कुएं के पास उनका संतुलन बिगड़ गया, जिससे उनके गिरने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, पुलिस ने अभी इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    घटना स्थल पर मौजूद ग्रामीणों का कहना है कि कुआं बिना मुंडेर का था, जिससे हादसे की संभावना और बढ़ जाती है। वहीं, पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है कि यह दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी हो सकता है।

    झाबुआ कोतवाली थाना प्रभारी आरसी भास्करे ने बताया कि शव का पंचनामा तैयार कर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट पता चल सकेगा।

    इस घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं ग्रामीण प्रशासन से ऐसे खुले कुओं पर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

    फिलहाल पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और सभी संभावित कारणों की गहनता से पड़ताल की जा रही है।

  • एकतरफा कार्रवाई का आरोप, झाबुआ में पटवारी सस्पेंड; कर्मचारियों ने उठाया विरोध का बिगुल

    एकतरफा कार्रवाई का आरोप, झाबुआ में पटवारी सस्पेंड; कर्मचारियों ने उठाया विरोध का बिगुल


    मध्य प्रदेश । झाबुआ जिले के ग्राम गुंदीपाड़ा में 12 वर्षीय बच्ची शिवानी की कुएं में गिरने से हुई दर्दनाक मौत के बाद प्रशासन द्वारा हल्का पटवारी नीलेश अखाड़े को निलंबित किए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। इस कार्रवाई के बाद जिले के राजस्व कर्मचारियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। पटवारी संघ ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने पहले संबंधित पटवारी को कारण बताओ नोटिस तो जारी किया, लेकिन जवाब देने के लिए पर्याप्त समय दिए बिना ही सीधे निलंबन की कार्रवाई कर दी गई। संघ का कहना है कि यह निर्णय एकतरफा और नियमों के विपरीत है।

    संघ का दावा: पहले ही दी गई थी खतरनाक संरचनाओं की जानकारी
    पटवारी संघ ने अपने ज्ञापन में मध्यप्रदेश खुले नलकूप सुरक्षा अधिनियम 2024 का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में प्राथमिक जिम्मेदारी भूमि स्वामी और बोरवेल/कुआं खोदने वाली एजेंसी की होती है। ऐसे में सीधे पटवारी को दोषी ठहराकर निलंबित करना अनुचित है। संघ ने यह भी दावा किया कि जिले के पटवारियों द्वारा पहले ही बिना मुंडेर वाले कुओं और खुले बोरवेल की सूची संबंधित तहसील कार्यालयों को सौंप दी गई थी। इसके बावजूद कार्रवाई केवल एक कर्मचारी पर केंद्रित करना अन्यायपूर्ण है।

    राजस्व कर्मचारियों में बढ़ा असंतोष
    निलंबन आदेश के बाद राजस्व विभाग के कर्मचारियों में असंतोष तेजी से बढ़ा है। कई पटवारियों का कहना है कि यदि प्रशासन इस तरह त्वरित और कठोर कार्रवाई करेगा, तो जमीनी स्तर पर काम करना मुश्किल हो जाएगा। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि फील्ड में संसाधनों की कमी और सीमित अधिकारों के बावजूद पूरी जिम्मेदारी पटवारियों पर डाल दी जाती है, जो सही नहीं है।

    चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
    पटवारी संघ ने प्रशासन के खिलाफ तीन चरणों में आंदोलन की घोषणा की है। पहले चरण में झाबुआ, रामा और रानापुर तहसीलों के सभी पटवारी तीन दिन के सामूहिक अवकाश पर रहेंगे।

    यदि इसके बाद भी निलंबन आदेश वापस नहीं लिया गया तो दूसरे चरण में जिले के सभी पटवारी तीन दिन के सामूहिक अवकाश पर जाएंगे और सरकारी सोशल मीडिया समूहों से भी बाहर हो जाएंगे। संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि फिर भी मांगें नहीं मानी गईं तो आगे अनिश्चितकालीन हड़ताल की स्थिति बन सकती है।

    प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
    फिलहाल इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, यह विवाद अब प्रशासन और राजस्व कर्मचारियों के बीच टकराव का रूप लेता दिख रहा है।

  • झाबुआ में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं, एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल शुरू

    झाबुआ में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं, एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल शुरू


    मध्य प्रदेश । झाबुआ जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। प्रदेशभर के करीब 32 हजार संविदा कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार के बाद स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. वासुदेव पाटीदार ने बताया कि एनएचएम कर्मचारी वर्षों से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर लगातार अनदेखी की जा रही है।

    मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई का आरोप
    कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले वर्ष मुख्यमंत्री की उपस्थिति में उनकी मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी उस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। कर्मचारियों ने कहा कि वे लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं हुआ।

    कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
    हड़ताल पर गए कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं-
    30 जनवरी 2026 की मुख्यमंत्री घोषणा के अनुसार नियमितीकरण
    एनपीएस और स्वास्थ्य बीमा का लाभ (2023 सामान्य प्रशासन विभाग नीति के तहत)
    अन्य राज्यों की तरह 10% वार्षिक वेतन वृद्धि
    नियमित कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता
    वेतन विसंगति का निराकरण
    समान कार्य के लिए समान वेतन
    नियमित कर्मचारियों के समान अवकाश
    इसके अलावा कर्मचारियों ने “सार्थक ऐप” के उपयोग को बंद करने का भी निर्णय लिया है।

    चरणबद्ध आंदोलन के बाद अब अनिश्चितकालीन हड़ताल
    कर्मचारी इससे पहले काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं और प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन भी सौंप चुके हैं। अब अनिश्चितकालीन हड़ताल के बाद आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए 8 जून को प्रदेशभर के कर्मचारी भोपाल में मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने की योजना बना रहे हैं।

    स्वास्थ्य सेवाओं पर असर की आशंक
    हड़ताल के चलते जिला अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे आम मरीजों को परेशानी हो सकती है।

  • ‘वनवासी’ शब्द को लेकर झाबुआ में सियासी बवाल, कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

    ‘वनवासी’ शब्द को लेकर झाबुआ में सियासी बवाल, कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन


    झाबुआ झाबुआ में गुरुवार को आदिवासी अस्मिता को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया। नई दिल्ली में आयोजित ‘जनजातीय गर्जना’ रैली के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा आदिवासियों के लिए ‘वनवासी’ शब्द के इस्तेमाल पर आदिवासी कांग्रेस सड़क पर उतर आई। जिला मुख्यालय के राजवाड़ा चौक पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर प्रदर्शन किया और गृहमंत्री का पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन का नेतृत्व आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने किया।

    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि आदिवासी समाज की पहचान और अस्तित्व को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। डॉ. विक्रांत भूरिया ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जानबूझकर ‘आदिवासी’ शब्द से परहेज कर रही है और ‘वनवासी’ जैसे शब्दों के जरिए समाज को सीमित दायरे में दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी केवल जंगलों में रहने वाला समुदाय नहीं, बल्कि इस देश के मूल निवासी हैं, जिनकी अपनी संस्कृति, परंपरा और गौरवशाली इतिहास है।

    डॉ. भूरिया ने कहा कि जल, जंगल और जमीन से आदिवासियों को दूर करने की साजिश लंबे समय से चल रही है। अब भाषा और शब्दों के माध्यम से भी उनकी पहचान बदलने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों को बड़े औद्योगिक घरानों के हवाले करना चाहती है और आदिवासी समाज को केवल मजदूर बनाकर रखना चाहती है।

    उन्होंने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय विश्व आदिवासी दिवस पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया था, लेकिन वर्तमान सरकार ने उसे समाप्त कर आदिवासी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। डॉ. भूरिया ने कहा कि आज आदिवासी समाज शिक्षा और प्रशासनिक क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। समाज के लोग डॉक्टर, इंजीनियर, कलेक्टर और आईपीएस जैसे बड़े पदों तक पहुंच रहे हैं। ऐसे में उन्हें ‘जंगली’ या ‘वनवासी’ जैसे शब्दों से संबोधित करना अपमानजनक है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    प्रदर्शन के दौरान प्रशासन ने शुरुआती दो बार पुतला दहन रोकने का प्रयास किया, लेकिन कार्यकर्ता पीछे नहीं हटे। तीसरी कोशिश में कार्यकर्ताओं ने अमित शाह का पुतला जलाकर विरोध दर्ज कराया। इस दौरान राजवाड़ा चौक पर काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही।

    कार्यक्रम में जसवंत सिंह भाबर, नटवर डोडियार, नरवेश अमलियार सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और आदिवासी समाज के लोग मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने गृहमंत्री से सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि आदिवासी समाज की पहचान और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल जारी रहा, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

  • झाबुआ जनसुनवाई में अनोखा मामला: ‘मृत’ घोषित दिव्यांग पहुंचा प्रशासन के सामने, सिस्टम पर उठे सवाल

    झाबुआ जनसुनवाई में अनोखा मामला: ‘मृत’ घोषित दिव्यांग पहुंचा प्रशासन के सामने, सिस्टम पर उठे सवाल


    झाबुआ । झाबुआ जिले में प्रशासनिक लापरवाही और निजी बस संचालकों की कथित अमानवीयता का गंभीर मामला सामने आया है। आजाद विकलांग कल्याण समिति ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दिव्यांगजनों की समस्याओं के त्वरित समाधान की मांग की है। मामला तब और गंभीर हो गया जब एक दिव्यांग व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वह स्वयं जनसुनवाई में पहुंचकर अपनी पीड़ा रखता दिखा।

    ग्राम पंचायत मदरानी के बादरसिंह मुणिया, जो 98 प्रतिशत दिव्यांग हैं, और उनकी 85 प्रतिशत दिव्यांग पत्नी को पिछले दो वर्षों से सरकारी दस्तावेजों में मृत दर्शाया गया है। इस गंभीर त्रुटि के कारण दोनों की पेंशन, राशन और अन्य सरकारी सुविधाएं पूरी तरह बंद हो गई हैं, जिससे उनका जीवनयापन मुश्किल हो गया है।

    आधार और योजनाओं से वंचित परिवार, पेंशन और आवास भी अटके
    इसी तरह कंजावानी निवासी गवरसिंह सोलंकी का परिवार भी लंबे समय से खाद्यान्न सहायता से वंचित है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाली किस्तें भी रोक दी गई हैं। नौगावा की 100 प्रतिशत दृष्टिबाधित सवली बेन और नयागांव की सबिस्ता कालिया कटारा के आधार कार्ड अब तक नहीं बन पाए हैं, जिसके चलते वे सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। इन मामलों ने प्रशासनिक प्रणाली में गंभीर खामियों को उजागर किया है, जहां वास्तविक पात्र लोग योजनाओं से वंचित हो रहे हैं।

    व्हीलचेयर परिवहन में भी बाधा, बस स्टाफ पर आरोप
    आजाद विकलांग कल्याण समिति के अध्यक्ष कमलेश राठौर ने बताया कि हाल ही में समिति ने झाबुआ और अलीराजपुर के पांच दिव्यांगजनों को निःशुल्क इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर उपलब्ध करवाई थीं। इन्हें भोपाल से झाबुआ लाया जाना था, लेकिन यहां भी दिव्यांगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

    आरोप है कि पहले से सहमति होने के बावजूद भाबर बस के कंडक्टर ने अंतिम समय पर व्हीलचेयर बस में चढ़ाने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, बस स्टाफ ने बस में रखी दो व्हीलचेयर भी जबरन उतरवा दीं। समिति द्वारा दोगुना किराया देने की पेशकश के बावजूद बस कर्मियों ने बात नहीं मानी और दिव्यांगों को आधी रात को भोपाल बस स्टैंड पर छोड़ दिया।

    टेम्पो से मंगानी पड़ी व्हीलचेयर, प्रशासन से कार्रवाई की मांग
    स्थिति इतनी खराब हो गई कि समिति को 12 हजार रुपये खर्च कर लोडिंग टेम्पो के माध्यम से व्हीलचेयर झाबुआ मंगवानी पड़ी। इस घटना के बाद दिव्यांगजनों और समिति ने प्रशासन से दोषियों पर कार्रवाई और व्यवस्था सुधार की मांग की है। लोगों का कहना है कि ऐसे मामले न केवल सिस्टम की खामियों को उजागर करते हैं, बल्कि समाज में संवेदनशीलता की कमी को भी सामने लाते हैं।

  • झाबुआ में खाद्य सुरक्षा की बड़ी कार्रवाई: 46 सैंपल्स की जांच, मिलावटी मसाले नष्ट

    झाबुआ में खाद्य सुरक्षा की बड़ी कार्रवाई: 46 सैंपल्स की जांच, मिलावटी मसाले नष्ट


    झाबुआ। झाबुआ जिले में खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने मिलावट पर रोक लगाने के लिए चलित खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला के माध्यम से हाट बाजार में औचक निरीक्षण किया। कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित इस विशेष अभियान के तहत खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की मौके पर ही जांच की गई, जिससे व्यापारियों में हड़कंप की स्थिति देखी गई।

    अभियान के पहले दिन अधिकारियों ने करीब 16 छोटे दुकानदारों और फेरी विक्रेताओं की दुकानों का निरीक्षण किया। इस दौरान जीरा, सौंफ, दालचीनी, हल्दी, धनिया, मिर्च और पूजा सामग्री सहित विभिन्न मसालों के नमूने एकत्र किए गए और उनकी मौके पर जांच की गई।

    चलित लैब के माध्यम से कुल 46 नमूनों की जांच की गई, जिसमें विशेष रूप से मसालों में मिलाए जाने वाले कृत्रिम रंगों की जांच पर फोकस किया गया। जांच के दौरान दो नमूने अमानक पाए गए, जिससे संबंधित दुकानदारों में अफरा-तफरी मच गई।

    कार्रवाई के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग ने लगभग 700 ग्राम मिलावटी सामग्री को मौके पर ही नष्ट कर दिया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और किसी को भी नियमों के उल्लंघन की छूट नहीं दी जाएगी।

    खाद्य सुरक्षा अधिकारी राहुल अलावा ने बताया कि लोगों को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि यह चलित प्रयोगशाला अभियान 26 मई तक जारी रहेगा और जिले के विभिन्न क्षेत्रों में इसी तरह औचक निरीक्षण किए जाएंगे।

    विभाग के अनुसार, जिले में अब तक मिलावट से जुड़े 24 प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से 22 मामलों का निराकरण हो चुका है। इसके अलावा काकनवानी क्षेत्र की एक किराना दुकान से 57 एक्सपायरी कन्फेक्शनरी सामग्री भी जब्त की गई थी, जिसमें दुकान संचालक पर 30 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया।

    फिलहाल प्रशासन की इस कार्रवाई से बाजारों में मिलावटखोरों के बीच सतर्कता बढ़ गई है और आने वाले दिनों में ऐसे निरीक्षण और तेज किए जाने की संभावना है।

  • झाबुआ में कृषि जागरूकता अभियान शुरू, कलेक्टर ने किया रथ का शुभारंभ

    झाबुआ में कृषि जागरूकता अभियान शुरू, कलेक्टर ने किया रथ का शुभारंभ

    झाबुआ। जिले में किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों, तकनीकी जानकारी और शासन की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की गई है। 16 मई को कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने कलेक्टर कार्यालय परिसर से 10 दिवसीय कृषि रथ को हरी झंडी दिखाकर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए रवाना किया।

    यह कृषि रथ “किसान कल्याण वर्ष 2026” के अंतर्गत शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है। यह रथ आने वाले 10 दिनों तक झाबुआ जिले के सभी विकासखंडों और गांवों का भ्रमण करेगा और किसानों को कृषि से जुड़ी नई तकनीकों की जानकारी देगा।

    गांव-गांव पहुंचेगी तकनीकी जानकारी
    इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को उन्नत खेती पद्धतियों से अवगत कराना है। रथ के माध्यम से किसानों को उर्वरक वितरण की नई ई-विकास प्रणाली और ई-टोकन व्यवस्था के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

    इसके साथ ही किसानों को एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, पराली प्रबंधन, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूक किया जाएगा। कृषि रथ को इस तरह तैयार किया गया है कि इसमें आधुनिक खेती से जुड़ी सभी जानकारियों को आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

    विशेषज्ञ टीम करेगी किसानों का मार्गदर्शन
    इस रथ के साथ हर दिन कृषि विशेषज्ञों की एक विशेष टीम भी मौजूद रहेगी, जो सीधे गांवों में जाकर किसानों से संवाद करेगी। यह टीम खरीफ फसल की बुआई से पहले आवश्यक तैयारियों पर किसानों को मार्गदर्शन देगी और फसल उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत कम करने के व्यावहारिक उपाय बताएगी। कृषि विशेषज्ञ मौके पर ही किसानों की समस्याओं का समाधान करेंगे और उन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बेहतर खेती के तरीके सुझाएंगे। इससे किसानों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।

    किसानों से भागीदारी की अपील
    उप संचालक कृषि एन.एस. रावत ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि जब कृषि रथ उनके गांव पहुंचे तो वे विशेषज्ञों से अधिक से अधिक संवाद करें और इस अवसर का लाभ उठाएं। इस अवसर पर उप संचालक कृषि एन.एस. रावत, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. जगदीश मोर्य, सहायक संचालक उद्यानिकी बी.एस. चौहान सहित कई जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। कार्यक्रम में किसानों के बीच उत्साह देखने को मिला और इस पहल को कृषि क्षेत्र के लिए उपयोगी बताया गया।

  • MP बोर्ड रिजल्ट 2026 झाबुआ बना नंबर वन 12वीं में पहला स्थान 10वीं में भी जलवा

    MP बोर्ड रिजल्ट 2026 झाबुआ बना नंबर वन 12वीं में पहला स्थान 10वीं में भी जलवा

    झाबुआ । मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल झाबुआ जिले ने इस वर्ष कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणामों में शानदार प्रदर्शन करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। परिणामों में जिले ने अपनी मजबूत शैक्षणिक स्थिति का परिचय देते हुए प्रदेशभर में शीर्ष स्थान हासिल किया है।

    12वीं परीक्षा परिणाम में झाबुआ जिले ने 93.23 प्रतिशत के उत्कृष्ट परिणाम के साथ पूरे मध्यप्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि जिले के लिए गर्व का विषय बन गई है और शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता को भी दर्शाती है। वहीं 10वीं परीक्षा परिणाम में भी जिले ने 87.83 प्रतिशत के साथ प्रदेश में पांचवां स्थान हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

    इस सफलता के बीच झाबुआ की छात्रा कु. सीमा भायडिया ने भी शानदार प्रदर्शन किया है। शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रानापुर की छात्रा सीमा ने प्रावीण्य सूची में प्रदेश स्तर पर पांचवां स्थान प्राप्त कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है।

    इसी क्रम में पड़ोसी जिले अलीराजपुर ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। अलीराजपुर ने 10वीं परीक्षा में 92.14 प्रतिशत परिणाम हासिल कर प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है जो इस क्षेत्र की शिक्षा के बढ़ते स्तर को दर्शाता है।

    शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार आदिवासी बहुल जिलों का यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि सरकारी प्रयासों और शिक्षकों की मेहनत से शिक्षा के स्तर में लगातार सुधार हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में छात्रों की बढ़ती भागीदारी और बेहतर परिणाम भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत हैं।इस ऐतिहासिक सफलता के बाद पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों व अभिभावकों को भी इस उपलब्धि पर गर्व महसूस हो रहा है।