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  • झाबुआ में ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर पुलिस का शिकंजा, 14 बाइक चालकों पर कार्रवाई; 5 वाहन जब्त

    झाबुआ में ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर पुलिस का शिकंजा, 14 बाइक चालकों पर कार्रवाई; 5 वाहन जब्त


    मध्यप्रदेश । झाबुआ शहर में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ रविवार देर शाम पुलिस ने सख्त अभियान चलाया। सड़क सुरक्षा को लेकर चलाए गए इस विशेष अभियान में तेज रफ्तार से वाहन चलाने, तीन सवारी बैठाने, बिना नंबर प्लेट के वाहन चलाने तथा नियमों के विपरीत नंबर प्लेट का उपयोग करने वाले बाइक चालकों पर कार्रवाई की गई।

    पुलिस अधीक्षक Devendra Patidar के निर्देश पर यातायात विभाग ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सघन चेकिंग अभियान संचालित किया। यातायात सूबेदार धर्मेंद्र पटेल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने प्रमुख मार्गों के साथ-साथ शहर की आंतरिक गलियों में भी निगरानी रखी, ताकि नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों को चिन्हित किया जा सके।

    अभियान के दौरान पुलिस ने ऐसे वाहन चालकों को रोका जो बिना नंबर प्लेट के वाहन चला रहे थे या जिनकी नंबर प्लेट पर निर्धारित मानकों के विपरीत शब्द और प्रतीक अंकित थे। इसके अलावा तेज गति से बाइक चलाने और एक ही वाहन पर तीन लोगों के सवार होने जैसी यातायात नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई।

    यातायात विभाग के अनुसार अभियान के दौरान कुल 14 बाइकों को पकड़ा गया। इनमें से 5 वाहनों को गंभीर नियम उल्लंघन के कारण जब्त कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि इन वाहनों को न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही छोड़ा जाएगा। शेष वाहन चालकों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालानी कार्रवाई की गई।

    पुलिस ने विभिन्न मामलों में जुर्माना लगाते हुए कुल 5 हजार रुपए की राशि वसूल की। अधिकारियों का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और लोगों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया गया।

    यातायात विभाग ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे हेलमेट का उपयोग करें, निर्धारित गति सीमा का पालन करें और वाहन से संबंधित सभी दस्तावेज अपने साथ रखें। साथ ही नंबर प्लेट को निर्धारित मानकों के अनुरूप रखने और यातायात नियमों का पालन करने की भी सलाह दी गई है।

    पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शहर में ऐसे अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।

    इस अभियान में यातायात विभाग के कई पुलिसकर्मियों ने भाग लिया और नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • सोमवती अमावस्या पर श्रृंगेश्वर महादेव में उमड़ी आस्था की भीड़, जोखिम भरे नौका विहार ने बढ़ाई चिंता

    सोमवती अमावस्या पर श्रृंगेश्वर महादेव में उमड़ी आस्था की भीड़, जोखिम भरे नौका विहार ने बढ़ाई चिंता


    मध्यप्रदेश । झाबुआ जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल Shringeshwar Mahadev Temple में सोमवती अमावस्या के अवसर पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है, जिसके चलते सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर और माही नदी तट पर पहुंचने लगे। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार दिन के पहले पहर में ही 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने माही नदी में स्नान कर भगवान भोलेनाथ के दर्शन किए।

    सुबह करीब 4 बजे से मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। पुरुषोत्तम मास में आई सोमवती अमावस्या के कारण श्रद्धालुओं का उत्साह और भी अधिक दिखाई दिया। नदी तट पर धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना और स्नान का क्रम लगातार चलता रहा। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा पड़ोसी जिलों और राज्यों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचे।

    हालांकि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कुछ चिंताजनक दृश्य भी सामने आए। माही नदी में नौका विहार के दौरान कई नावों में निर्धारित क्षमता से अधिक लोगों के बैठने की शिकायतें सामने आईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई श्रद्धालु बिना लाइफ जैकेट के ही नावों में यात्रा करते नजर आए। इससे स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने संभावित हादसे की आशंका जताई।

    मौके पर मौजूद लोगों का कहना था कि धार्मिक उत्साह के बीच कई श्रद्धालु सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रहे थे। प्रशासन द्वारा समय-समय पर सावधानी बरतने की अपील की गई, लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण नियमों का पालन सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण बना रहा।

    श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अमला तड़के से ही सक्रिय था। झकनावदा चौकी प्रभारी सुरेंद्र सिंह सिसोदिया के नेतृत्व में पुलिस बल और विशेष सुरक्षा दल के जवान विभिन्न स्थानों पर तैनात रहे। इसके अलावा राजस्व विभाग, ग्राम पंचायत और स्थानीय प्रशासन के कर्मचारी भी व्यवस्था संभालने में जुटे रहे।

    प्रशासन का मुख्य फोकस भीड़ नियंत्रण, सुगम दर्शन और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने पर था। हालांकि, कुछ स्थानों पर बैरिकेडिंग की कमी और अत्यधिक भीड़ के कारण व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहा। इसके बावजूद श्रद्धालुओं के आवागमन और दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने का प्रयास लगातार जारी रहा।

    चौकी प्रभारी सुरेंद्र सिंह सिसोदिया ने बताया कि पुलिस और प्रशासन की टीम सुबह से ही सुरक्षा व्यवस्था में लगी हुई है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे नौका विहार और अन्य गतिविधियों के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करें तथा प्रशासन के निर्देशों का सहयोग करें।

    श्रद्धालुओं ने धार्मिक आयोजन और प्रशासनिक प्रयासों की सराहना की, लेकिन साथ ही नावों में क्षमता से अधिक लोगों के बैठने और सुरक्षा उपकरणों की कमी को लेकर चिंता भी व्यक्त की। स्थानीय लोगों का मानना है कि भविष्य में ऐसे बड़े आयोजनों के दौरान नौका संचालन और घाट सुरक्षा के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएं की जानी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना की संभावना को कम किया जा सके।

  • झाबुआ में भैंस चोरी के आरोप में पूर्व विधानसभा प्रत्याशी गिरफ्तार, पुलिस रिमांड पर पूछताछ जारी

    झाबुआ में भैंस चोरी के आरोप में पूर्व विधानसभा प्रत्याशी गिरफ्तार, पुलिस रिमांड पर पूछताछ जारी


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Jhabua जिले में मवेशी चोरी के एक मामले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बना दिया है। पुलिस ने भैंस चोरी के आरोप में एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में झाबुआ सीट से उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ चुका था। पुलिस का कहना है कि आरोपी के खिलाफ दर्ज शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई है और मामले की जांच जारी है।

    पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान बालूसिंह के रूप में हुई है। आरोप है कि उसने एक गांव से भैंस चोरी की थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। न्यायालय से पुलिस को आरोपी की रिमांड भी प्राप्त हुई है, जिसके आधार पर उससे पूछताछ की जा रही है।

    जांच अधिकारियों के मुताबिक अब तक दो भैंस चोरी होने की जानकारी सामने आई है। इनमें से एक छोटी भैंस बरामद कर ली गई है, जबकि दूसरी भैंस के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक पूछताछ में संकेत मिले हैं कि दूसरी भैंस को कहीं बेच दिया गया हो सकता है। इस संबंध में विभिन्न स्थानों पर जानकारी एकत्र की जा रही है।

    मामले की एक खास बात यह भी बताई जा रही है कि जिस गांव में चोरी की घटना हुई, वहां आरोपी के रिश्तेदारी संबंध होने की बात सामने आई है। हालांकि पुलिस फिलहाल मामले की जांच तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कर रही है और सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से यह भी पूछा जा रहा है कि चोरी किए गए मवेशियों को कहां ले जाया गया और उनसे जुड़े अन्य लोग कौन-कौन हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या आरोपी का संबंध किसी बड़े मवेशी चोरी गिरोह से है या यह एक अलग घटना थी।

    वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में आरोपी ने झाबुआ सीट से चुनावी मैदान में किस्मत आजमाई थी। राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति का इस प्रकार के आपराधिक मामले में नाम सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही मामले की अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    पुलिस ने बताया कि रिमांड अवधि के दौरान आरोपी से गहन पूछताछ की जाएगी। यदि पूछताछ में अन्य चोरी की घटनाओं या सहयोगियों की जानकारी सामने आती है, तो उस आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस जल्द ही पूरे घटनाक्रम का विस्तृत खुलासा करने की बात कह रही है।

  • झाबुआ बस स्टैंड की 13 दुकानें सील: व्यापारियों ने हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के बावजूद कार्रवाई का लगाया आरोप

    झाबुआ बस स्टैंड की 13 दुकानें सील: व्यापारियों ने हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के बावजूद कार्रवाई का लगाया आरोप


    मध्‍य प्रदेश । झाबुआ शहर में बस स्टैंड स्थित दुकानों को लेकर नगर पालिका और व्यापारियों के बीच विवाद गहरा गया है। नगर पालिका ने शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात बस स्टैंड परिसर में स्थित दुकान क्रमांक 1 से 13 तक को सील कर दिया। इस कार्रवाई के बाद प्रभावित व्यापारियों ने प्रशासनिक कदम पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि उन्हें उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त हो चुका था, इसके बावजूद दुकानों को सील कर दिया गया।

    जानकारी के अनुसार नगर पालिका ने कुछ समय पहले बस स्टैंड स्थित इन दुकानों को जर्जर और क्षतिग्रस्त बताते हुए व्यापारियों को दुकानें खाली करने के नोटिस जारी किए थे। नगर पालिका का तर्क था कि भवन की स्थिति को देखते हुए सुरक्षा की दृष्टि से कार्रवाई आवश्यक है। हालांकि दुकानदारों ने इस निर्णय का विरोध करते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

    व्यापारियों का कहना है कि शुक्रवार को ही Madhya Pradesh High Court की एकल पीठ ने मामले में सशर्त स्थगन आदेश जारी किया था। उनका दावा है कि आदेश मिलने के बाद भी नगर पालिका ने देर रात कार्रवाई करते हुए दुकानों को सील कर दिया। व्यापारियों का आरोप है कि यह कदम न्यायालय के निर्देशों और उसकी भावना के विपरीत है।

    कार्रवाई के बाद प्रभावित दुकानदारों में नाराजगी देखी गई। उनका कहना है कि कई परिवार दशकों से इन दुकानों के माध्यम से अपनी आजीविका चला रहे हैं और अचानक की गई कार्रवाई से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

    मामले में नगर पालिका के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। मुख्य नगर पालिका अधिकारी मिलन पटेल और संबंधित अधिकारियों से बातचीत नहीं हो पाई। वहीं नगर पालिका के सब इंजीनियर धीरेन्द्र रावत ने बताया कि सीएमओ बैठक के सिलसिले में बाहर हैं और उन्हें इस कार्रवाई की विस्तृत जानकारी नहीं है।

    दूसरी ओर नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि शैलेश बिट्टू सिंगार ने कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि दुकानों को खाली कराने के लिए पिछले तीन वर्षों से नोटिस जारी किए जा रहे थे। उनके अनुसार हाल ही में प्राप्त प्रशासनिक निर्देशों के बाद दुकानों को सीज करने की कार्रवाई की गई है।

    व्यापारियों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता Harshvardhan Singh Rathore ने दावा किया कि कार्रवाई में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 221 के तहत आवश्यक प्रक्रिया पूरी किए बिना दुकानों को सील किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित व्यापारी लगभग 30 वर्षों से इन दुकानों में व्यवसाय कर रहे हैं और भवन अभी भी उपयोग योग्य स्थिति में हैं।

    सुनवाई के दौरान न्यायालय ने भी भवन की वास्तविक स्थिति को लेकर सवाल उठाए। न्यायालय ने टिप्पणी की कि नगर पालिका ऐसा कोई ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकी, जिससे यह सिद्ध हो सके कि भवन मरम्मत योग्य नहीं हैं। न्यायालय ने निर्देश दिया कि मुख्य नगर पालिका अधिकारी पहले यह निर्धारित करें कि भवन की मरम्मत संभव है या नहीं। इस प्रक्रिया के पूर्ण होने तक आगे की कार्रवाई पर रोक रहेगी।

    फिलहाल यह मामला प्रशासनिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें न्यायालय के अगले निर्देशों और नगर पालिका के आधिकारिक पक्ष पर टिकी हुई हैं।

  • झाबुआ कलेक्टर बने डॉक्टर, मरीजों का किया इलाज; PHC निरीक्षण में खुद संभाली ओपीडी

    झाबुआ कलेक्टर बने डॉक्टर, मरीजों का किया इलाज; PHC निरीक्षण में खुद संभाली ओपीडी


    मध्य प्रदेश। झाबुआ में एक अनोखा दृश्य देखने को मिला, जब नए कलेक्टर और एमबीबीएस डॉक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने पिटोल स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति और मरीजों की लंबी कतार देखकर कलेक्टर ने खुद डॉक्टर की जिम्मेदारी संभाल ली।

    कलेक्टर ने ओपीडी में बैठकर लगभग 12 से 15 मरीजों का इलाज किया और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने न केवल मरीजों की जांच की, बल्कि गर्भवती महिलाओं से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य, पोषण और नियमित जांच की जानकारी भी ली।

    उन्होंने गर्भवती महिलाओं को आवश्यक सावधानियों, समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह के महत्व के बारे में जागरूक किया। साथ ही हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान कर समय पर उपचार सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।

    निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग के ऑनलाइन रिकॉर्ड और एएनसी (एंटीनेटल केयर) पोर्टल की भी जांच की। रिकॉर्ड में गड़बड़ी पाए जाने पर उन्होंने कर्मचारियों को तुरंत डेटा अपडेट करने के निर्देश दिए और लापरवाही पर नाराजगी जताई।

    इसके अलावा उन्होंने अस्पताल में दवाओं की उपलब्धता और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मरीजों को इलाज के लिए परेशान करना किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    निरीक्षण के अंत में कलेक्टर डॉ. भरसट ने पिटोल में निर्माणाधीन नए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) की बिल्डिंग का भी जायजा लिया। उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा की और अधिकारियों को शेष कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि जल्द से जल्द नए अस्पताल को शुरू किया जा सके।

    इस पहल से स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की उम्मीद जगी है और क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • झाबुआ में अमानवीयता की हद: महिला को ‘तालिबानी सजा’, सिर मुंडवाकर गांव में घुमाया

    झाबुआ में अमानवीयता की हद: महिला को ‘तालिबानी सजा’, सिर मुंडवाकर गांव में घुमाया


    झाबुआ।
    मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। बालवासा गांव में एक महिला को कथित संबंधों के आरोप में ग्रामीणों ने क्रूर और अपमानजनक सजा दी। महिला के साथ मारपीट की गई, उसका सिर मुंडवाया गया और उसे अपने ही पति को कंधे पर बैठाकर पूरे गांव में घुमाने के लिए मजबूर किया गया।


    वीडियो वायरल होने के बाद खुला मामला

    घटना 13 अप्रैल की बताई जा रही है। इसका वीडियो सामने आने के बाद पुलिस हरकत में आई। वीडियो में बड़ी संख्या में लोग मौजूद दिखाई दे रहे हैं, लेकिन किसी ने विरोध नहीं किया, बल्कि कुछ लोग घटना का वीडियो बनाते नजर आए।

    आरोप के नाम पर क्रूरता

    जानकारी के अनुसार, महिला अपने पति से अलग रह रही थी और उस पर किसी अन्य व्यक्ति के साथ रहने का आरोप लगाया गया। इसी को लेकर पति और कुछ ग्रामीण उसे जबरन गांव वापस लाए। इसके बाद उसके साथ मारपीट कर अमानवीय व्यवहार किया गया और सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया।

    गांव में घुमाकर किया अपमान

    ग्रामीणों ने महिला को मजबूर किया कि वह अपने पति को कंधे पर बैठाकर गांव में घूमे। इस दौरान लोग तमाशबीन बने रहे। इस तरह की घटना ने कानून व्यवस्था और मानवाधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    पुलिस की कार्रवाई

    मामला सामने आने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए करीब 10 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। प्रतिपाल सिंह महोबिया के अनुसार, मुख्य आरोपियों—सूर्या डामोर, दिलीप भूरिया, बाबू भूरिया और शैलेश भूरिया—को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

    पीड़िता सुरक्षित, जांच जारी

    पुलिस ने पीड़िता को सुरक्षित स्थान पर रखा है और उसका मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है। पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

    यह घटना न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि समाज में मौजूद कुरीतियों और भीड़ मानसिकता की भयावह तस्वीर भी सामने लाती है। प्रशासन ने सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

  • झाबुआ में धर्म परिवर्तन विवाद: ईसाई बने शख्स को ‘जय श्रीराम’ न बोलने पर पीटा, वीडियो वायरल

    झाबुआ में धर्म परिवर्तन विवाद: ईसाई बने शख्स को ‘जय श्रीराम’ न बोलने पर पीटा, वीडियो वायरल


    मध्य प्रदेश। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें झाबुआ जिले के पाटडी गांव का नजारा दिखाई दे रहा है। वीडियो में रावजी डामर नाम का व्यक्ति स्पष्ट रूप से कहता है, मैं अब ईसाई हूं, जय श्री राम नहीं बोलूंगा।” इसके बाद कुछ गांववालों ने उसे रोकने की कोशिश की और उसे मारपीट शुरू कर दी।

    मामला तब और बढ़ गया जब रावजी अपने धर्म के चुनाव पर अडिग रहे। मारपीट के दौरान उन्हें गालियां भी दी गईं। इस घटना के बाद गांव में तनाव बढ़ गया और मामले को लेकर दोनों पक्षों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

    थांदला थाना के SDOP नीरज नामदेव ने बताया कि मामले की जांच जारी है। फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पुलिस आरोपियों को जल्द पकड़ने की बात कह रही है।

    वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भी विवाद छिड़ गया। लोग अलग-अलग राय दे रहे हैं—कुछ रावजी के समर्थन में हैं, तो कुछ पीटने वाले पक्ष की वजहों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। इस घटना ने सिर्फ गांव में ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी बहस छेड़ दी है कि किसी को अपने धर्म के चुनाव के लिए दबाव देना कितना सही है।

    इस मामले ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि जय श्री राम कहना या न कहना केवल शब्दों का मामला नहीं, बल्कि अधिकार और धर्म के चुनाव से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है।