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  • राज्यसभा चुनाव में NDA का दबदबा, 27 में 19 सीटें जीतकर ऊपरी सदन में बढ़ाई ताकत; INDIA गठबंधन को बड़ा राजनीतिक झटका

    राज्यसभा चुनाव में NDA का दबदबा, 27 में 19 सीटें जीतकर ऊपरी सदन में बढ़ाई ताकत; INDIA गठबंधन को बड़ा राजनीतिक झटका


    नई दिल्ली ।
    10 राज्यों की 27 राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों ने देश की संसदीय राजनीति में नया समीकरण खड़ा कर दिया है। चुनाव परिणामों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए 19 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि विपक्षी INDIA गठबंधन को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। इन नतीजों ने संसद के उच्च सदन में सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिति को और अधिक मजबूत कर दिया है।

    राज्यसभा चुनाव के परिणामों को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इनके जरिए आगामी विधायी और राजनीतिक रणनीतियों की दिशा तय होने की संभावना है। चुनाव परिणामों के बाद 245 सदस्यीय राज्यसभा में NDA की संख्या बढ़कर 152 तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा गठबंधन को पहले की तुलना में अधिक प्रभावशाली स्थिति प्रदान करता है और महत्वपूर्ण विधेयकों पर उसकी रणनीतिक क्षमता को मजबूत बनाता है।

    विपक्षी INDIA गठबंधन को इस चुनाव में केवल पांच सीटों पर सफलता मिली। चुनाव से पहले विपक्ष को कुछ राज्यों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन अंतिम परिणाम उसके पक्ष में नहीं रहे। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम विपक्षी एकजुटता और चुनावी प्रबंधन के लिए एक चुनौती के रूप में देखा जाएगा।

    चुनाव के सबसे चर्चित परिणामों में झारखंड का नाम प्रमुखता से सामने आया। यहां राज्यसभा की दोनों सीटों पर मुकाबला राजनीतिक हलकों में विशेष चर्चा का विषय बना रहा। एक सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की, जबकि दूसरी सीट पर NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार ने विपक्षी खेमे को बड़ा झटका देते हुए विजय हासिल की। इस परिणाम ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दिया है और विपक्षी दलों के भीतर भी रणनीतिक समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है।

    झारखंड का परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि विधानसभा में संख्याबल को देखते हुए विपक्षी गठबंधन को बेहतर स्थिति में माना जा रहा था। इसके बावजूद चुनावी गणित और समर्थन जुटाने की रणनीति ने अंतिम परिणाम को प्रभावित किया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस जीत ने यह संकेत दिया है कि राज्यसभा चुनावों में केवल संख्याबल ही नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रबंधन भी निर्णायक भूमिका निभाता है।

    मध्य प्रदेश में भी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला। यहां संभावित मुकाबले की चर्चा के बीच विपक्षी उम्मीदवार की उम्मीदवारी निरस्त हो जाने के बाद एक सीट पर सत्तारूढ़ दल को निर्विरोध लाभ मिला। इससे NDA के कुल प्रदर्शन को अतिरिक्त मजबूती मिली और राज्यसभा में उसकी संख्या बढ़ाने में सहायता मिली।

    चुनाव परिणामों के बाद अब राजनीतिक चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि उच्च सदन में सत्तारूढ़ गठबंधन की बढ़ती ताकत का असर आगामी संसदीय सत्रों पर किस प्रकार पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि NDA को कुछ क्षेत्रीय और तटस्थ दलों का समर्थन मिलता रहा तो कई महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत प्रस्तावों को पारित कराने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान हो सकती है।

    राजनीतिक दृष्टि से यह चुनाव केवल सीटों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आगामी राष्ट्रीय राजनीति के संकेत भी देता है। राज्यसभा में मजबूत स्थिति किसी भी सरकार के लिए विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में हालिया परिणामों को सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए रणनीतिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है।

    विश्लेषकों का मानना है कि इन नतीजों के बाद विपक्षी दलों को अपने संगठनात्मक ढांचे, समन्वय और चुनावी रणनीति पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है। वहीं NDA के लिए यह परिणाम राजनीतिक आत्मविश्वास बढ़ाने वाला साबित हुआ है, जिसने उच्च सदन में उसकी स्थिति को पहले से अधिक मजबूत कर दिया है।

  • RS चुनावः झारखंड से 2 सीट और 3 उम्मीदवार… आज मतदान के बाद शाम तक साफ हो जाएगी तस्वीर

    RS चुनावः झारखंड से 2 सीट और 3 उम्मीदवार… आज मतदान के बाद शाम तक साफ हो जाएगी तस्वीर


    रांची।
    झारखंड में राज्यसभा की 2 सीटों के लिए आज वोटिंग होनी है. मतदान सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक विधानसभा परिसर में बने मतदान केंद्र पर होगा. शाम तक रिजल्ट भी आ जाएगा. झारखंड की दो सीटों पर तीन उम्मीदवार होने की वजह से चुनाव दिलचस्प हो गया है।

    तीसरे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परिमल नाथवानी है, जिनका समर्थन एनडीए कर रहा है. एनडीए के पास 24 विधायक हैं. इनमें बीजेपी के 21, AJSU, जेडीयू और LJP(R) का 1-1 विधायक है. वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के पास 34 विधायक हैं।

    राज्यसभा की सीट जीतने के लिए 28 विधायकों का समर्थन चाहिए. पहली सीट पर JMM उम्मीदवार बैद्यनाथ राम की जीत तय है. लेकिन असली लड़ाई दूसरी सीट के लिए है. दूसरी सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी हैं. एनडीए को जीत के लिए सिर्फ 4 वोट और चाहिए, जबकि कांग्रेस के पास 14 वोट कम पड़ रहे हैं।

    राज्यसभा चुनाव के लिए इंडिया और एनडीए के बीच अपना कुनबा बचाना सबसे बड़ी चुनौती है. सोमवार को सीएम आवास पर कांग्रेस प्रभारी के राजू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात के बाद साफ कर दिया था कि गठबंधन की सरकार को समर्थन दे रहे सभी 56 विधायकों को 16 और 17 जून को सीएम हाउस में हाजिरी लगानी होगी. के राजू ने बताया था कि वहां डिनर के दौरान मॉक पोल भी होगा. विधायकों को भी शहर में ही रहने का निर्देश दिया गया है.

    इधर NDA ने भी अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए सभी 24 विधायकों को एक साथ रांची के रेडिसन ब्लू में रहने के निर्देश दिए है. दो दिन से विधायक यहीं हैं और यहीं से वोटिंग के लिए जाएंगे. यानी पॉलिटिक्स होटल में शिफ्ट हो गई है.

    जाहिर है ऐसा इसलिए किया गया है कि पोचिंग की संभावना न हो. एनडीए के नेता भी बीजेपी प्रदेश कार्यालय में सोमवार को आयोजित गठबंधन के बैठक के बाद चौंकन्ना हो गए हैं. बैठक से 7विधायक नदारद थे. चंपई सोरेन समेत सरयू राय सरीखे नेता बैठक में नहीं थे।

    कांग्रेस के नेता भी आग में घी का काम ये कहकर डालते रहे कि NDA के तीन विधायक संपर्क में है. हालांकि बाद में चंपई सोरेन के साथ नाथवानी की तस्वीर सामने सोशल मीडिया पर आई और सरयू राय की भी तस्वीर देखने को मिली।


    इंडिया ब्लॉक के 56 विधायक, फिर क्यों चिंता?

    वहीं, कांग्रेस और JMM के दावे हैं कि जब हेमंत सरकार को 56 विधायकों का समर्थन है तो कहां चिंता का विषय है? 2सीट के लिए जीत के लिए 56 विधायकों की ही जरूरत है. लिहाजा दोनों सीट पर उनके ही उम्मीदवार जीतेंगे।

    दोनों गठबंधन ने बैठके की है. दोनों ने मॉक पोल भी किया है. संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्णा किशोर ने मंगलवार रात सीएम हाउस में बैठक के बाद बताया था कि दोनों सीट पर उनकी जीत होगी. मॉक पोल में कांग्रेस को 27 और JMM को 27 मत मिले थे.


    एनडीए को क्रॉस वोटिंग से उम्मीद

    इस बीच NDA की उम्मीदें कोर्स वोटिंग पर टिकी है और इंडिया ब्लॉक क्रॉस वोटिंग रोकने के लिए हर कोशिश कर रहा है. इसी कोशिश पर उसकी जीत का दारोमदार है. एनडीए समर्थित परिमल नाथवानी का कहना है कि भले ही 4 वोट कम है लेकिन झारखंड से वो 2008 और 2014 में भी राज्यसभा जा चुके हैं और सभी ने उनका काम देखा है. उनका कहना है कि अंतरात्मा की आवाज पर उन्हें जीत के लिए 28 वोट मिल जाएंगे।


    दो सीटों पर क्यों हो रहे हैं चुनाव?

    बीजेपी के सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल खत्म हो रहा. दूसरी सीट शिबू सोरेन की थी, जिनका निधन हो चुका है. हालांकि, शिबू सोरेन अगर होते तो उनका कार्यकाल भी खत्म हो जाता।

  • नामांकन मंजूर होने पर विधानसभा परिसर में हंगामा, परिमल नथवाणी को लेकर आमने-सामने आए कांग्रेस और भाजपा

    नामांकन मंजूर होने पर विधानसभा परिसर में हंगामा, परिमल नथवाणी को लेकर आमने-सामने आए कांग्रेस और भाजपा

    नई दिल्ली । झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं। चुनावी प्रक्रिया के बीच निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी के नामांकन को वैध घोषित किए जाने के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। नामांकन को लेकर पहले से जारी बहस अब खुलकर राजनीतिक टकराव में बदलती दिखाई दे रही है। विधानसभा परिसर में कांग्रेस और भाजपा समर्थकों के प्रदर्शन ने इस मुद्दे को और अधिक चर्चा में ला दिया है।

    राज्यसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया के दौरान परिमल नथवाणी के दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाए गए थे। जांच के दौरान कुछ आपत्तियों के कारण उनके नामांकन को तत्काल अंतिम स्वीकृति नहीं मिली थी और मामले की समीक्षा की जा रही थी। इस वजह से राजनीतिक हलकों में लगातार अटकलों का दौर जारी रहा। हालांकि समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद नामांकन को वैध मान लिया गया, जिसके बाद विवाद और तेज हो गया।

    कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस फैसले पर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि नामांकन से जुड़े जिन बिंदुओं पर सवाल उठाए गए थे, उनकी पर्याप्त और पारदर्शी जांच होनी चाहिए थी। पार्टी के नेताओं का आरोप है कि विभिन्न राज्यों में समान परिस्थितियों में अलग-अलग निर्णय लिए जा रहे हैं, जिससे निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस का मानना है कि चुनावी प्रक्रिया में एकरूपता और पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है।

    नामांकन को मंजूरी मिलने की सूचना सामने आते ही कांग्रेस कार्यकर्ता विधानसभा परिसर में विरोध प्रदर्शन के लिए पहुंच गए। हाथों में झंडे और बैनर लेकर कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की तथा फैसले के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग करते हुए मामले की पुनर्समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।

    दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए विरोध प्रदर्शन का जवाब प्रदर्शन से ही दिया। भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और कानूनी प्रावधानों के तहत संचालित होती है तथा संबंधित अधिकारियों द्वारा लिया गया निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस चुनावी माहौल को प्रभावित करने के उद्देश्य से अनावश्यक विवाद पैदा कर रही है।

    विधानसभा परिसर के बाहर दोनों पक्षों की सक्रियता ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर दिया। विभिन्न नेताओं ने अपने-अपने पक्ष में बयान दिए और चुनावी प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग दावे किए। इस घटनाक्रम ने राज्यसभा चुनाव को केवल एक संसदीय चुनाव न रहने देकर उसे व्यापक राजनीतिक बहस का विषय बना दिया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनावों में संख्या बल के साथ-साथ राजनीतिक संदेश भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में किसी उम्मीदवार के नामांकन को लेकर उठे विवाद का प्रभाव केवल चुनावी गणित तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह दलों की रणनीति और राजनीतिक धारणा को भी प्रभावित करता है।

    फिलहाल परिमल नथवाणी का नामांकन वैध घोषित होने के बाद चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन इस फैसले को लेकर पैदा हुआ विवाद अभी थमता दिखाई नहीं दे रहा। आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों की रणनीति, चुनावी समीकरण और संभावित प्रतिक्रियाएं इस मुद्दे को और अधिक महत्वपूर्ण बना सकती हैं। राज्यसभा चुनाव के बीच झारखंड की राजनीति में यह मामला फिलहाल सबसे चर्चित विषयों में शामिल हो गया है।

  • राज्यसभा की 26 सीटों पर मुकाबले से पहले तेज हुई रणनीतिक जंग, भाजपा के दांव से कांग्रेस सतर्क

    राज्यसभा की 26 सीटों पर मुकाबले से पहले तेज हुई रणनीतिक जंग, भाजपा के दांव से कांग्रेस सतर्क

    नई दिल्ली । राज्यसभा की रिक्त हो रही 26 सीटों के लिए 18 जून को होने वाले चुनाव से पहले देश की राजनीति में गतिविधियां तेज हो गई हैं। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन राज्यसभा में अपनी स्थिति और मजबूत करने की दिशा में सक्रिय दिखाई दे रहा है, जबकि विपक्षी दल अपने मौजूदा संख्या बल को सुरक्षित रखने और संभावित राजनीतिक चुनौतियों से निपटने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही कई राज्यों में राजनीतिक समीकरणों और संभावित क्रॉस-वोटिंग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    इस बार सबसे अधिक चर्चा मध्य प्रदेश और झारखंड की हो रही है, जहां भाजपा के कुछ फैसलों ने विपक्षी दलों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन दोनों राज्यों में उम्मीदवारों के चयन और चुनावी गणित ने मुकाबले को अपेक्षा से अधिक दिलचस्प बना दिया है। भाजपा की कोशिश केवल अपनी सीटें सुरक्षित करने तक सीमित नहीं दिख रही, बल्कि वह विपक्षी दलों पर मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक दबाव बनाने का प्रयास भी कर रही है।

    मध्य प्रदेश में भाजपा द्वारा तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को मैदान में उतारना राजनीतिक हलकों में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। विधानसभा में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है और वह दो सीटों पर सहज जीत की स्थिति में मानी जा रही है। हालांकि तीसरे उम्मीदवार की एंट्री ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, को सतर्क कर दिया है। कांग्रेस का मानना है कि यह कदम चुनावी मुकाबले को जटिल बनाने और विपक्षी खेमे में असहजता पैदा करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

    राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट बनाए रखने के लिए विशेष कदम उठा सकती है। संभावित क्रॉस-वोटिंग या अनुपस्थिति की आशंकाओं के बीच पार्टी नेतृत्व लगातार अपने विधायकों के संपर्क में बताया जा रहा है। इसी कारण राज्यसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश की राजनीति में गतिविधियां सामान्य से अधिक तेज हो गई हैं।

    विधानसभा के वर्तमान गणित के अनुसार किसी उम्मीदवार को जीत के लिए निर्धारित संख्या में मतों की आवश्यकता होगी। ऐसे में अतिरिक्त उम्मीदवार की मौजूदगी चुनाव को केवल औपचारिक प्रक्रिया न बनाकर रणनीतिक मुकाबले में बदल सकती है। यही कारण है कि दोनों प्रमुख दल लगातार एक-दूसरे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी कर रहे हैं।

    झारखंड में भी राजनीतिक तस्वीर कम दिलचस्प नहीं है। यहां दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय स्वरूप ले चुका है। झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को समर्थन देकर चुनावी समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है। इस फैसले ने राज्य में राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

    झारखंड में अब नजर इस बात पर रहेगी कि उपलब्ध संख्या बल और सहयोगी दलों के समर्थन के आधार पर कौन-सा उम्मीदवार बढ़त हासिल कर पाता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि मतदान के दौरान कोई अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आता है तो परिणामों पर उसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

    दूसरी ओर राजस्थान में स्थिति अपेक्षाकृत शांत दिखाई दे रही है। यहां रिक्त सीटों के मुकाबले उतने ही उम्मीदवार मैदान में होने के कारण निर्विरोध निर्वाचन की संभावना मजबूत मानी जा रही है। वहीं गुजरात में भी भाजपा के उम्मीदवारों की राह अपेक्षाकृत आसान दिखाई दे रही है और वहां बड़े मुकाबले की संभावना कम नजर आ रही है।

    राज्यसभा चुनाव भले ही प्रत्यक्ष जनमत से नहीं लड़े जाते, लेकिन इनका राजनीतिक महत्व बेहद व्यापक होता है। संसद के उच्च सदन में संख्या बल किसी भी सरकार की विधायी क्षमता को प्रभावित करता है। यही कारण है कि चुनाव से पहले प्रत्येक सीट को लेकर राजनीतिक दल पूरी ताकत और रणनीति के साथ मैदान में उतरते हैं। इस बार भी मध्य प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में विकसित हो रहे समीकरण चुनावी प्रक्रिया को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना रहे हैं।

  • झारखंड राज्यसभा सीटों पर सियासी गतिरोध खत्म, JMM-कांग्रेस में 1-1 सीट पर बनी निर्णायक सहमति

    झारखंड राज्यसभा सीटों पर सियासी गतिरोध खत्म, JMM-कांग्रेस में 1-1 सीट पर बनी निर्णायक सहमति

    नई दिल्ली । झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों को लेकर महागठबंधन के दो प्रमुख घटक दल, झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के बीच जारी विवाद अब समाप्त हो गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बताया कि दोनों दलों के लिए एक-एक सीट पर चुनाव लड़ने की सहमति हो गई है। इससे पहले झामुमो के विधायकों ने दोनों सीटों पर दावा ठोक दिया था, जिससे गठबंधन में तनातनी बढ़ गई थी।

    पूर्व विधायक बैद्यनाथ राम को झामुमो ने राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया है। बैद्यनाथ राम लातेहार से पूर्व विधायक रह चुके हैं और आदिवासी एवं पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने में उनका योगदान सराहनीय माना जाता है। झामुमो के प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि बैद्यनाथ राम पार्टी के मजबूत और समर्पित कार्यकर्ता हैं और उनकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।

    जानकारी के अनुसार, इस विवाद को सुलझाने में पार्टी के वरिष्ठ पर्यवेक्षक, भूपेश बघेल और अजय शर्मा ने सीएम हेमंत सोरेन से लंबी चर्चा की। इसके बाद सीएम ने दोनों दलों के लिए एक-एक सीट पर उम्मीदवार तय करने पर सहमति दे दी। राज्यसभा की दो सीटों पर अब कांग्रेस और जेएमएम के एक-एक उम्मीदवार मैदान में होंगे।

    बताया जा रहा है कि झारखंड में पहले कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार प्रणव झा का नाम घोषित कर दिया था, जिससे जेएमएम नेतृत्व में नाराजगी उत्पन्न हो गई थी। पार्टी के नेताओं का आरोप था कि कांग्रेस ने जेएमएम को विश्वास में लिए बिना नाम की घोषणा की थी। हालांकि अब दोनों पार्टियों के बीच सभी मतभेद दूर होते दिख रहे हैं और सहमति से उम्मीदवार तय हो गए हैं।

    सीएम हेमंत सोरेन ने रविवार रात गठबंधन के सभी विधायकों को डिनर पर बुलाया। इस बैठक का मकसद गठबंधन के भीतर आपसी सामंजस्य बनाए रखना और भविष्य में सहयोग को मजबूत करना बताया गया है। इससे पहले JMM की ओर से दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने की संभावना जताई गई थी, लेकिन अब विवाद खत्म होकर गठबंधन में स्थिरता लौट आई है।

    राज्यसभा चुनाव से पहले इस तरह का समाधान महागठबंधन के लिए राहत भरा है। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों दलों की आपसी सहमति से न केवल राज्यसभा में प्रतिनिधित्व तय होगा, बल्कि भविष्य में झारखंड में गठबंधन को भी मजबूती मिलेगी। बैद्यनाथ राम के नाम पर सहमति से आदिवासी और पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधित्व को भी ध्यान में रखा गया है।

    हालांकि चुनाव की प्रक्रिया अभी जारी है, लेकिन JMM और कांग्रेस के बीच विवाद के शांत होने से महागठबंधन की छवि बेहतर बनी है। दोनों दलों के नेताओं ने आपसी सहयोग और संवाद को ही भविष्य में निर्णय लेने का आधार बनाने का संकल्प जताया है। इससे राज्यसभा चुनाव की तैयारी और रणनीति को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

  • RS चुनाव : MP में नटराजन का विरोध, झारखंड में JMM-कांग्रेस के बीच खींचतान…. BJP में उम्मीद जगी

    RS चुनाव : MP में नटराजन का विरोध, झारखंड में JMM-कांग्रेस के बीच खींचतान…. BJP में उम्मीद जगी


    नई दिल्ली।
    राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha elections) में मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में कांग्रेस (Congress) और झारखंड (Jharkhand) में झामुमो-कांग्रेस (JMM-Congress) के बीच जारी खींचतान में भाजपा (BJP) को अपने लिए नई उम्मीद नजर आ रही है। मध्यप्रदेश में जहां कांग्रेस में बाहरी मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natarajan) को उम्मीदवार बनाने से असंतोष है, वहीं सहमति के बिना कांग्रेस के झारखंड में उम्मीदवार घोषित करने से झामुमो नाराज है। इस स्थिति से खुश भाजपा जरूरी संख्याबल की कमी के बावजूद झारखंड में एक और मप्र में तीसरा उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है।

    दरअसल मध्यप्रदेश में पूर्व सीएम दिग्विजय की ना के बाद दूसरे पूर्व सीएम कलमनाथ को उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा थी। हालांकि बृहस्पतिवार को जारी सूची में पार्टी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की करीबी और तेलंगाना की प्रभारी मीनाक्षी नटराजन का नाम था। सूची जारी होने के बाद कांग्रेस में असंतोष है और यह असंतोष पिछले चुनाव की तरह ही क्रॉस वोटिंग का कारण बन सकता है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, कमलनाथ को राज्यसभा टिकट नहीं मिलने से छिंदवाड़ा क्षेत्र के पांच कांग्रेस विधायकों को झटका लगा है। उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी पूर्व सीएम को उम्मीदवार बनाएगी। ऐसे में अब इन विधायकों का रुख क्या रहता है, इस पर सभी की नजरें है।

    हालांकि असंतोष की भनक के बाद सतर्क कांग्रेस नेतृत्व ने शनिवार को विधायकों की बैठक बुलाई है। बिहार, हरियाणा और ओडिशा जैसे राज्यों में क्रॉस वोटिंग का नुकसान झेल चुकी पार्टी इस बार मध्य प्रदेश में कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। यही वजह है कि हाल ही में हाईकमान ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व ने साफ संदेश दिया है कि क्रॉस वोटिंग की स्थिति में जवाबदेही तय की जाएगी।


    झारखंड में भी उबाल

    राज्य में दो सीटों पर चुनाव है। यहां एक सीट के लिए प्रथम वरीयता के 28 मतों की जरूरत है। विपक्षी गठबंधन के पास दो सीट जीतने के लिए ठीक 56 मत हैं। जबकि भाजपा के पास 24 मत हैं। यहां झामुमो बिना चर्चा के कांग्रेस के उम्मीदवार उतारने से नाराज है। सीएम हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को विधायकों की बैठक् बुलाई, जिसमें एक सुर में दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने की मांग की गई। चूंकि कांग्रेस के पास महज 16 विधायक हैं, ऐसे में उसे 12 मत हासिल करने के लिए सहयोगियों का समर्थन चाहिए। दूसरी ओर भाजपा पहले से ही एक उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर चुकी है। ऐसे में यहां भी विपक्ष के सामने एकजुटता बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।


    क्या है गणित

    प्रदेश विधानसभा में इस समय 229 विधायक हैं। इनमें भाजपा के पास 164, कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। एक सीट के लिए जरूरत 58 विधायकों के समर्थन की है। इस प्रकार दो सीट जीतने के बाद भाजपा के पास प्रथम वरीयता के अतिरिक्त 48 वोट होंगे। दूसरी ओर कांग्रेस के पास 64 वोट हैं जो जरूरी संख्या बल से 6 ज्यादा हैं। ऐसे में तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए भाजपा को दस अतिरिक्त मत की जरूरत पड़ेगी, जबकि कांग्रेस का हर हाल में एकजुटता दिखानी होगी।

  • Jharkhand: रांची से उड़ी एयर एंबुलेंस चतरा में हुई क्रैश …7 की मौत, पढ़े हादसे की पूरी कहानी

    Jharkhand: रांची से उड़ी एयर एंबुलेंस चतरा में हुई क्रैश …7 की मौत, पढ़े हादसे की पूरी कहानी


    रांची।
    रांची से दिल्ली जा रही एयर एंबुलेंस (Air Ambulance) सोमवार देर शाम करीब 7:30 बजे चतरा में क्रैश हो गई। विमान में मरीज समेत कुल सात लोग सवार थे। इस हादसे में सभी सात लोगों की मौत हो गई।

    चतरा एसपी सुमित अग्रवाल ने बताया कि एयर एंबुलेंस क्रैश (Air ambulance crash.) होकर सिमरिया के जंगल में गिरी है। इस हादसे में संजय कुमार नाम के मरीज की भी मौत हो गई जो ढाबे में भीषण आग लगने के कारण झुलस गए थे और दिल्ली इलाज करवाने के लिए जा रहे थे।

    आग की भयावह लपटों से जूझते हुए जिंदगी बचाने की जंग लड़ रहे संजय की कहानी अब एक मार्मिक त्रासदी बन चुकी है। पेशे से ढाबा चलाने वाले संजय कुछ दिन पहले गंभीर रूप से झुलस गए थे। हादसे में उन्हें इलेक्ट्रिक बर्न हुआ था, जिससे उनका शरीर 65 फीसदी बुरी तरह जल गया था। परिजनों ने उन्हें तुरंत रांची के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां पिछले करीब दस दिनों से उनका इलाज चल रहा था।

    दस दिनों में परिवार ने हर संभव कोशिश की। डॉक्टरों ने पूरी मेहनत की, लेकिन संजय की हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया। हर गुजरते दिन के साथ उम्मीद और चिंता के बीच झूलते परिवार ने अंततः बड़ा फैसला लिया-संजय को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जाया जाएगा। पैसों की परवाह किए बिना परिजनों ने एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की। ढाबा चलाकर परिवार का गुजारा करने वाले संजय की जिंदगी बचाने के लिए रिश्तेदारों और परिचितों ने भी सहयोग दिया।


    जिंदगी बचाने का सफर बनी आखिरी उड़ान

    एयर एंबुलेंस की बुकिंग के बाद परिवार में एक बार फिर उम्मीद की किरण जगी। सभी को भरोसा था कि राजधानी में बेहतर इलाज से संजय की जिंदगी बच जाएगी। इसी उम्मीद के साथ मरीज को एयर एंबुलेंस में शिफ्ट किया गया। उनके साथ परिजन भी इस उड़ान में सवार हुए, दिल में दुआ और आंखों में उम्मीद लिए। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। दिल्ली की ओर बढ़ती यह उड़ान अचानक एक दर्दनाक हादसे में बदल गई। एयर एंबुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गया और पलक झपकते ही जिंदगी बचाने की कोशिश कर रहे सभी लोग मौत के आगोश में समा गए। जिस उड़ान से जीवन की नई शुरुआत की उम्मीद थी, वही अंतिम सफर साबित हुई।

    इस हादसे ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है। संजय, जो रोज सैकड़ों लोगों को अपने ढाबे में खाना खिलाते थे, आज खुद नियति के हाथों हार गए। परिवार, जिसने हर संभव कोशिश की, अब गहरे शोक में डूबा है। बेहतर इलाज की उम्मीद में भरी उड़ान का इस तरह अंत हो जाना हर किसी को भीतर तक झकझोर दिया है। उम्मीद, संघर्ष और नियति की इस दर्दनाक कहानी ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया है।

    संजय कुमार मूल रूप से चंदवा के रखात गांव के रहने वाले थे। वर्तमान में चंदवा स्थित गायत्री मोहल्ले में मकान बनाकर परिवार के साथ रह रहे थे। वे पलामू के बकोरिया में ढाबा चलाते थे। चार दिन पहले उनके ढाबे में भीषण आग लग गई थी, जिसमें वे गंभीर रूप से झुलस गए थे। इसके बाद उन्हें रांची स्थित देवकमल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका इलाज चल रहा था। सोमवार को हालत नाजुक होने पर चिकित्सकों ने उन्हें दिल्ली रेफर किया था। वहीं हादसे के शिकार हुए डॉ. विकास गुप्ता पूर्व में गारू और चंदवा में पदस्थापित रह चुके थे और प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल चुके थे।

    देवकमल में 16 फरवरी को मरीज भर्ती हुआ था
    लातेहार के चंदवा का मरीज संजय (41 वर्ष) 16 फरवरी को रांची के देवकमल अस्पताल में भर्ती हुआ था। बिजली से वह 65 फीसदी जल गया था और उसकी स्थिति ठीक नहीं थी। देवकमल अस्पताल के चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर ले जाने को कहा था। सोमवार को मरीज के परिजनों ने एयर एंबुलेंस बुक किया और इलाज के लिए दिल्ली जा रहे थे। संजय के परिजनों ने सवाल उठाया है कि जब मौसम खराब हो गया था तो एयर एंबुलेंस को उड़ान की अनुमति कैसे दी गई? क्या सुरक्षा मानकों का पालन हुआ? पूरा मामला गंभीर लापरवाही की आशंका पैदा करता है। इसकी उच्चस्तरीय जांच जरूरी है। वहीं रांची एयरपोर्ट के निदेशक विनोद कुमार ने कहा, एयर एंबुलेंस के दुर्घटना के कई कारण हो सकते हैं। इन कारणों का खुलासा जांच के बाद ही होगा।


    कैसे टूटा संपर्क

    जानकारी के मुताबिक विमान रांची से उड़ान भरने के आधे घंटे बाद ही क्रैश हो गया। विमान में एक मरीज, डॉक्टर, पैरामेडिक, दो सहायक, एक पायलट और एक सह-पायलट सवार थे। पायलट का नाम विवेक विकास भगत और सह-पायलट सवराजदीप सिंह थे। विमान ने न तो वाराणसी एटीसी से संपर्क किया और न ही लखनऊ एटीसी से जुड़ पाया। विमान का संपर्क वाराणसी के दक्षिण-पूर्व इलाके के आसपास टूटा। आखिरी बार विमान का संपर्क कोलकाता एयर ट्रैफिक कंट्रोल से हुआ था। इसके बाद बात नहीं हो सकी। बताया जा रहा है कि इस दौरान विमान ने खराब मौसम के चलते रास्ता बदलने की इजाजत मांगी थी। उड़ान के दौरान कुछ देर तक एटीसी से संपर्क बना रहा, लेकिन बाद में अचानक संपर्क टूट गया। 7:07 बजे शाम में विमान ने रांची से उड़ान भरी थी और रात 10 बजे दिल्ली पहुंचने की उम्मीद थी। रेडबर्ड एयरवेज का छोटा मेडिकल विमान था, जो मरीज को इलाज के लिए दिल्ली ले जा रहा था।


    इनकी गई जान

    इस हादसे में जिन लोगों की जान गई उनमें मरीज 40 साल के संजय कुमार, उनकी 35 वर्षीय पत्नी अर्चना देवी, भगीना 17 वर्षीय ध्रुव कुमार, चिकित्सक डॉ. विकास कुमार गुप्ता, पारा मेडिकल कर्मी सचिन कुमार मिश्रा, पायलट विवेक विकास भगत, सौराजदीप सिंह शामिल हैं।

  • कर्नाटक में झारखंड के मजदूर को बांग्लादेशी होने के शक में पीटा, महिला ने बचाया; 4 आरोपियों पर मामला दर्ज

    कर्नाटक में झारखंड के मजदूर को बांग्लादेशी होने के शक में पीटा, महिला ने बचाया; 4 आरोपियों पर मामला दर्ज


    झारखंड । कर्नाटक के मंगलुरु में एक झारखंड के प्रवासी मजदूर को कथित तौर पर बांग्लादेशी नागरिक होने के शक में चार लोगों ने बेरहमी से पीटा। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। घटना रविवार को मंगलुरु के बाहरी इलाके कुलूर में हुई, जहां आरोपियों ने मजदूर से उसकी नागरिकता को लेकर सवाल किए और पहचान पत्र दिखाने की मांग की। झारखंड के दिलजान अंसारी पिछले 10 से 15 वर्षों से काम की तलाश में मंगलुरु में रह रहे थे। वह हर साल चार से छह महीने शहर में काम करते हैं।
    अंसारी ने आरोपियों को बार-बार बताया कि वह भारतीय नागरिक हैं, लेकिन आरोपियों ने उनकी बातों को नजरअंदाज किया और उन्हें बांग्लादेशी समझते हुए लगातार परेशान किया। आरोपी अपने शक के आधार पर अंसारी के साथ अपमानजनक व्यवहार करते रहे। इस दौरान एक स्थानीय महिला ने उनकी मदद की और उन्हें आरोपियों के चंगुल से बचाया हालांकि, डर के कारण अंसारी ने शुरू में पुलिस से संपर्क नहीं किया और बिना शिकायत के घर लौट गए। लेकिन बाद में स्थानीय नेताओं ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया।
    मंगलुरु सिटी पुलिस कमिश्नर सुधीर कुमार रेड्डी ने बताया कि सत्यापन के बाद यह पुष्टि हुई कि दिलजान अंसारी भारतीय नागरिक हैं और काम के सिलसिले में मंगलुरु आए थे। पुलिस ने कुलूर के निवासी सागर, धनुष, लालू उर्फ रतीश और मोहन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने के निर्देश दिए गए हैं और जांच जारी है। यह मामला एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि देश में प्रवासी श्रमिकों के प्रति भेदभाव और असहिष्णुता का क्या स्तर है, खासकर उन पर जो बाहरी राज्य से आकर काम करते हैं। पुलिस और स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई से यह उम्मीद जताई जा रही है कि आगे से ऐसी घटनाएं नहीं होंगी।

  • रामगढ़ में हाथियों का आतंक जारी 56 घंटे में 6 लोगों की मौत 2 और मरे

    रामगढ़ में हाथियों का आतंक जारी 56 घंटे में 6 लोगों की मौत 2 और मरे


    रामगढ़ । झारखंड के रामगढ़ जिले में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को दो और लोगों की जान चली गई जिससे पिछले 56 घंटों में यहां हाथियों के हमले में मरने वालों की संख्या 6 हो गई है। शुक्रवार की घटनाओं में एक व्यक्ति का नाम लोकनाथ मुंडा था जो कुजू ओपी क्षेत्र के सुगिया गांव का निवासी था। वह अपनी पत्नी के साथ जलावन के लिए कोयला चुनने सीसीएल के करमा परियोजना की ओर जा रहे थे तभी उनका सामना हाथियों के झुंड से हो गया। हाथियों ने उन्हें पटककर मार डाला जबकि उनकी पत्नी किसी तरह भागकर अपनी जान बचाने में सफल रही।

    दूसरी घटना रामगढ़ प्रखंड के कुंदरूकलां पंचायत में हुई जहां काजल देवी नाम की महिला ईंट भट्ठे में काम करने आई थी। जब वह रात में शौच के लिए बाहर गई तो हाथियों ने उसे घेर लिया और उसे पटक-पटककर मार डाला। इस दौरान वहां मौजूद आधे दर्जन से अधिक लोग बाल-बाल बच गए। इसके अलावा हाथियों ने पास में मौजूद फसलों को भी नुकसान पहुंचाया। वन विभाग अब इस नुकसान का मूल्यांकन करने में जुटा है।

    इन घटनाओं से पहले मंगलवार को भी रामगढ़ जिले के घाटो थाना क्षेत्र के आरा सारूबेड़ा में हाथियों के हमले में चार लोग मारे गए थे जिनमें एक सीसीएल का सुरक्षाकर्मी और तीन अन्य स्थानीय लोग शामिल थे।स्थानीय लोगों और वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि हाथियों के आक्रामक होने का मुख्य कारण उनके पारंपरिक रास्तों में बढ़ती मानवीय गतिविधि और जंगलों का सिमटना है। इसके कारण हाथी भोजन और पानी की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों में घुसने पर मजबूर हो रहे हैं।

    वर्तमान में वन विभाग ने क्षेत्र में हाथियों से बचाव के लिए निगरानी बढ़ा दी है और उनके मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है। साथ ही ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी समाधान और मुआवजे के साथ-साथ हाथियों के सुरक्षित मार्ग को बहाल करने की अपील की है। तोपा माइनस कॉलोनी उखरबेड़वा और हरवे क्षेत्र में हाथियों का झुंड खुलेआम विचरण कर रहा है जिससे ग्रामीणों में चिंता का माहौल है।प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को तत्काल 25 हजार रुपये की सहायता राशि दी है और मुआवजे के रूप में 3 लाख 75 हजार रुपये 10 दिनों के अंदर भुगतान करने का आश्वासन दिया है।

  • सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 के फाइनल में हरियाणा और झारखंड की टक्कर मिलेगा नया विजेता

    सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 के फाइनल में हरियाणा और झारखंड की टक्कर मिलेगा नया विजेता


    पुणे । सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 के फाइनल में हरियाणा और झारखंड की टीमें आमने-सामने होंगी और इस बार यह टूर्नामेंट एक नया विजेता पैदा करने की ओर बढ़ रहा है। मंगलवार को हरियाणा ने अपनी शानदार बल्लेबाजी और गेंदबाजी के साथ हैदराबाद को 124 रनों से करारी शिकस्त दी और फाइनल में अपनी जगह पक्की की। वहीं झारखंड ने भी अपनी शानदार प्रदर्शन से फाइनल में प्रवेश किया है। यह दोनों टीमें पहली बार सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के फाइनल में पहुंची हैं जो इस मैच को और भी रोमांचक बना देता है।

    हरियाणा की धमाकेदार जीत
    हरियाणा ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 246 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। सलामी बल्लेबाज अंकित कुमार ने 27 गेंदों में 57 रन बनाये और अपनी टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। उन्होंने अर्श रंगा  के साथ मिलकर 81 रनों की साझेदारी की। अंकित की आक्रामक बल्लेबाजी में छह छक्के और एक चौका शामिल था। इसके बाद सामंत जाखड़ ने 22 गेंदों में आठ छक्कों और एक चौके की मदद से 60 रन बनाकर टीम को और ऊंचाई तक पहुंचाया। अंत में पार्थ वत्स ने भी 19 गेंदों में चार चौके और तीन छक्के जड़ते हुए 45 रन बनाये।

    हैदराबाद के लिए लक्ष्य का पीछा करना आसान नहीं था। हैदराबाद की टीम केवल 122 रन बनाकर ऑल आउट हो गई। अमित राणा ने गेंदबाजी में शानदार प्रदर्शन करते हुए 14 रन पर तीन विकेट लिए वहीं सामंत जाखड़ इशांत भारद्वाज और अंशुल कंबोज ने भी दो-दो विकेट चटकाए।

    झारखंड की टीम भी फाइनल में

    सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 का फाइनल भी रोमांचक होने की संभावना है क्योंकि झारखंड की टीम ने भी शानदार क्रिकेट खेला है। ईशान किशन की कप्तानी में झारखंड ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और अब वे हरियाणा के खिलाफ खिताबी भिड़ंत के लिए तैयार हैं।

    फाइनल का रोमांच

    फाइनल में हरियाणा और झारखंड दोनों ही टीमों ने इस सीजन में अपने शानदार खेल से सभी को प्रभावित किया है। हरियाणा की ओर से अंकित कुमार और सामंत जाखड़ की तूफानी बल्लेबाजी ने उन्हें सेमीफाइनल में हैदराबाद को हराने में मदद की जबकि झारखंड ने भी अपने सामूहिक प्रदर्शन से फाइनल में जगह बनाई। इस मुकाबले में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या हरियाणा अपना पहला सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी खिताब जीत पाती है या फिर झारखंड अपने पहले खिताब के साथ इतिहास रचने में सफल होता है।

    मुकाबला पुणे में

    सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 का फाइनल मैच 18 दिसंबर को पुणे के महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में खेला जाएगा। यह मैच दो शानदार टीमों के बीच होगा जो दोनों ही पहली बार इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंची हैं और इस कारण इस मुकाबले का रोमांच काफी बढ़ चुका है। अब देखना यह है कि कौन सी टीम इस ऐतिहासिक खिताबी भिड़ंत में बाजी मारती है और नया विजेता बनता है!