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  • झारखंड के 2.5 लाख कोयला कर्मियों के PF के 727 करोड़ डूबने के मामले की 'CBI' करेगी जांच, HC ने दिए निर्देश

    झारखंड के 2.5 लाख कोयला कर्मियों के PF के 727 करोड़ डूबने के मामले की 'CBI' करेगी जांच, HC ने दिए निर्देश


    रांची।
    कोल माइंस प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (Coal Mines Provident Fund Organisation- CMPFO) के निवेश में 727.67 करोड़ रुपये डूबने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) ने CBI जांच का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक (Chief Justice MS Sonak) की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कोल इम्प्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन के संजीव कुमार श्रीवास्ताव द्वारा 2022 में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को यह आदेश दिया। अदालत ने सीबीआई जांच का निर्देश देते हुए जनहित याचिका निष्पादित कर दी।

    मामला दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (DHFL) में CMPFO के 1300 करोड़ रुपये के निवेश से जुड़ा है। DHFL के दिवालिया होने के बाद इसमें से 727.67 करोड़ राशि डूब गई। CMPFO के फंड मैनेजर एसबीआई और यूटीआई ने 24 जून 2019 को ही रेड अलर्ट जारी कर DHFL की खराब आर्थिक स्थिति की जानकारी दी थी। फंड मैनेजरों ने CMPFO को निवेश की रकम निकालने की सलाह भी दी थी।

    फंड मैनेजरों की चेतावनी के बावजूद तत्कालीन ट्रस्टी ने समय रहते कदम नहीं उठाया और दिवालिया होने के करीब छह महीने बाद 20 दिसंबर 2019 को रकम वापस निकालने का प्रस्ताव पारित किया गया। 22 नवंबर 2021 को बोर्ड की सब-कमेटी ने 727.67 करोड़ को राइट ऑफ करने का प्रस्ताव रखा, जिसका कर्मचारियों ने कड़ा विरोध किया। बाद में कोल इंडिया ने भरपाई के लिए कोयला उत्पादन पर 10 रुपये प्रति टन सेस लगाने का प्रस्ताव भी लाया था।

    मामले में तत्कालीन कोल सेक्रेटरी अनिमेष भारती के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू हुई थी, लेकिन रिपोर्ट आने से पहले ही सीएमपीएफओ ने शपथपत्र दाखिल कर अपने पदाधिकारियों को क्लीन चिट दे दी। हाईकोर्ट ने इस पहलू को गंभीरता से लेते हुए सीबीआई जांच का आदेश सुनाया। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अनिल कुमार सिंह ने पक्ष रखा।

    JSSC की CGL परीक्षा रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि जांच में प्रश्नपत्र लीक के साक्ष्य मिले हैं। ऐसे में दोषी व निर्दोष अभ्यर्थियों में अंतर करना कठिन है। इसी वजह से केवल कुछ अभ्यर्थियों की परीक्षा या परिणाम रद्द करने के बजाय पूरी परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया।

  • नर्सिंग नौकरी का झांसा देकर दुबई ले जाई गई झारखंड की मोनिका कच्छप बंधक, परिवार ने सुरक्षित वापसी की लगाई गुहार

    नर्सिंग नौकरी का झांसा देकर दुबई ले जाई गई झारखंड की मोनिका कच्छप बंधक, परिवार ने सुरक्षित वापसी की लगाई गुहार

    नई दिल्ली ।झारखंड के रांची स्थित छोटा घाघरा इलाके की 37 वर्षीय आदिवासी महिला मोनिका कच्छप को नर्सिंग की नौकरी का झांसा देकर विदेश ले जाने और वहां बंधक बनाए जाने का मामला सामने आया है। परिवार का आरोप है कि मोनिका को अच्छी नौकरी, रहने, खाने और आवास की सुविधा का भरोसा देकर शारजाह ले जाया गया, लेकिन वहां पहुंचते ही उसका मूल पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिया गया। परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए उसकी सुरक्षित वापसी के लिए राज्य सरकार और विदेश मंत्रालय से मदद की गुहार लगाई है।

    मोनिका ने रांची के बुंडू से साढ़े तीन साल का नर्सिंग कोर्स पूरा किया था। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब है और घर का खर्च खेती-किसानी से चलता है। इसी वजह से मोनिका नौकरी करना चाहती थी। इसी दौरान वह ऑनलाइन माध्यम से एक एजेंसी और उसकी एजेंट प्रियंका के संपर्क में आई। परिवार के मुताबिक, प्रियंका ने उसे दुबई में अच्छी नौकरी मिलने और विदेश में रहने, खाने तथा आवास की सुविधा उपलब्ध होने का भरोसा दिया। इस पर विश्वास करते हुए मोनिका ने 22 अप्रैल 2026 को प्रियंका द्वारा बताए गए बैंक खाते में फोनपे के जरिए 5 हजार रुपये भेजे। आगे की यात्रा और विमान टिकट की व्यवस्था एजेंसी ने की और 5 मई को मोनिका दिल्ली एयरपोर्ट से शारजाह के लिए रवाना हुई।

    परिवार की शिकायत के अनुसार, 6 मई को शारजाह पहुंचने के बाद एजेंसी की ओर से भेजी गई गाड़ी के चालक ने मोनिका का मूल पासपोर्ट अपने पास रख लिया। अगले दिन उसे अजमान स्थित एजेंसी के कार्यालय ले जाया गया। वहां रितेश और मोहम्मद मेराज अंसारी नाम के लोगों ने अरबी भाषा में लिखे कुछ दस्तावेजों पर उसके हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए। मोनिका अरबी भाषा नहीं जानती थी। आरोप है कि उसका मोबाइल फोन भी ले लिया गया और प्रियंका के साथ हुई व्हाट्सएप बातचीत मिटा दी गई। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए उसे बताया गया कि उसने एजेंसी से 2600 दिरहम का कर्ज लिया है और 25 मई तक रकम नहीं चुकाने पर जेल भेजने की धमकी दी गई।

    परिवार का आरोप है कि इसके बाद मोनिका को मोहम्मद मेराज अंसारी के घर ले जाया गया, जहां करीब एक महीने तक उसे बंधक बनाकर रखा गया। इस दौरान उससे झाड़ू-पोछा लगाने, बर्तन साफ करने और बाथरूम की सफाई जैसे काम कराए गए। इसके बाद 22 जून को उसे बिना वैध वर्क परमिट के दूसरे घर में घरेलू देखभाल के काम के लिए भेजे जाने की बात सामने आई। वहां की भाषा समझने में परेशानी होने के कारण वह काम नहीं कर सकी और अगले ही दिन उसे वापस कार्यालय छोड़ दिया गया।

    मोनिका के पिता रतना कच्छप की शिकायत के आधार पर 29 सितंबर 2026 को रांची के एयरपोर्ट थाने में मामला दर्ज किया गया। शिकायत में दुबई और अजमान में नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी, मानव तस्करी, बंधक बनाने, जबरन मजदूरी कराने और रंगदारी मांगने जैसे आरोप लगाए गए हैं। परिवार ने अब राज्य सरकार और विदेश मंत्रालय से हस्तक्षेप कर मोनिका को सुरक्षित घर वापस लाने की मांग की है। परिवार और स्थानीय ग्रामीणों की अपील है कि उसे जल्द सुरक्षित वापस लाया जाए।

  • रांची में बनेंगे तीन नए फ्लाईओवर, 2,335 करोड़ रुपये होंगे खर्च, शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने की तैयारी तेज

    रांची में बनेंगे तीन नए फ्लाईओवर, 2,335 करोड़ रुपये होंगे खर्च, शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने की तैयारी तेज

    नई दिल्ली ।झारखंड की राजधानी रांची में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और शहर के सुनियोजित विकास के लिए तीन नए फ्लाईओवर बनाने की तैयारी की जा रही है। इन प्रस्तावित परियोजनाओं पर कुल 2,335.87 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। नगर विकास विभाग ने तीनों फ्लाईओवर से संबंधित प्रस्ताव तैयार कर लिया है।

    प्रस्ताव के अनुसार पहला फ्लाईओवर बिरसा चौक से तुपुदाना चौक तक बनाया जाना है। इसका प्रस्तावित मार्ग टेंडर हार्ट स्कूल के आसपास से होकर जाएगा। दूसरा फ्लाईओवर कटहल मोड़ से दलादिली चौक के बीच प्रस्तावित है। तीसरी परियोजना लालपुर, फिरायालाल और डंगराटोली क्षेत्र को जोड़ने वाले इंटीग्रेटेड फ्लाईओवर की है।

    इन तीनों परियोजनाओं का उद्देश्य रांची के ऐसे इलाकों में यातायात का दबाव कम करना है, जहां बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही होती है। प्रस्तावित फ्लाईओवर बनने के बाद प्रमुख मार्गों पर वाहनों के आवागमन को अलग स्तर पर ले जाने में मदद मिल सकती है, जिससे सड़क पर जाम की समस्या कम करने की योजना है।

    फिलहाल तीनों फ्लाईओवर की परियोजनाएं प्रस्ताव के शुरुआती चरण में हैं। इनके अंतिम अनुमोदन, बजट आवंटन और निर्माण कार्य शुरू करने की समयसीमा को लेकर औपचारिक प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। इसलिए अभी यह स्पष्ट नहीं है कि तीनों परियोजनाओं का निर्माण किस तारीख से शुरू होगा।

    राज्य में शहरी विकास और राजधानी के भविष्य के विस्तार को लेकर हाल में अधिकारियों के साथ चर्चा की गई थी। इस दौरान रांची के सुनियोजित विकास और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शहर में अधोसंरचना तैयार करने से जुड़े प्रस्तावों पर विचार किया गया। इसी क्रम में राजधानी के सौंदर्यीकरण और विकास से संबंधित रिपोर्ट तथा डिजाइन भी प्रस्तुत किया गया।

    रांची में कुछ अन्य फ्लाईओवर और कॉरिडोर की प्रक्रिया इससे पहले आगे बढ़ चुकी है। करमटोली-चिरौंदी, अरगोड़ा-चापूटोली और हरमू रोड फ्लाईओवर के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और निर्माण एजेंसियों के चयन की जानकारी दी गई है। इन परियोजनाओं का निर्माण जल्द शुरू होने की संभावना है।

    करमटोली-चिरौंदी कॉरिडोर की लंबाई करीब तीन किलोमीटर प्रस्तावित है। यह करमटोली चौक से साइंस सिटी होते हुए चिरौंदी तक जाने वाला मार्ग होगा। वहीं अरगोड़ा-चापूटोली कॉरिडोर करीब चार किलोमीटर लंबा होगा और हरमू रोड से डिबडीह ब्रिज तक सीधी कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की योजना है।

    हरमू रोड फ्लाईओवर का निर्माण सहजानंद चौक के आसपास से जज कॉलोनी के नजदीक तक प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं के जरिए राजधानी के अलग-अलग हिस्सों के बीच यातायात संपर्क बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है।

    प्रस्तावित फ्लाईओवर से घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सड़क यातायात का दबाव कम करने पर भी जोर है। इन इलाकों में वाहनों की अधिक आवाजाही के कारण अक्सर जाम की स्थिति बनती है। फ्लाईओवर बनने से मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    रिंग रोड से कनेक्टिविटी भी इन परियोजनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कुछ प्रस्तावित मार्गों के अंतिम छोर रिंग रोड के नजदीक तक पहुंचने की योजना है। इससे शहर के अंदरूनी हिस्सों से बाहर जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक और अपेक्षाकृत सुगम मार्ग मिल सकता है।

    रांची में बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या को देखते हुए सड़क अधोसंरचना के विस्तार की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है। तीन नए फ्लाईओवर का प्रस्ताव इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना है। हालांकि इनके निर्माण से पहले प्रशासनिक मंजूरी, वित्तीय स्वीकृति और अन्य प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा।

  • कोलकाता बुलाया, पेपर की जानकारी दी और लाखों वसूले, झारखंड CGL लीक केस में पटना से आरोपी गिरफ्तार

    कोलकाता बुलाया, पेपर की जानकारी दी और लाखों वसूले, झारखंड CGL लीक केस में पटना से आरोपी गिरफ्तार


    पटना। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा के पेपर लीक मामले (Paper leak cases) में जांच आगे बढ़ने के साथ एक और आरोपी पुलिस के शिकंजे में आ गया है। झारखंड CID की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने पटना से राजन कुमार को गिरफ्तार किया है। राजन पटना में कारोबार करता है। जांच के दौरान रैकेट से उसके कथित जुड़ाव के संकेत मिलने के बाद CID की टीम काफी समय से उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थी।

    परीक्षार्थियों को कोलकाता बुलाने का आरोप
    जांच में सामने आया है कि राजन कुमार ने कथित तौर पर कई परीक्षार्थियों को कोलकाता बुलाया था। आरोप है कि वहां उन्हें परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र से जुड़ी जानकारी दी गई और संभावित सवालों के जवाब बताए गए। इसके बदले परीक्षार्थियों से मोटी रकम वसूलने का भी आरोप है।

    CID को आशंका थी कि राजन पेपर लीक से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा है। टीम ने उसकी गतिविधियों पर निगरानी के साथ मामले से जुड़े सबूत जुटाए। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद SIT ने पटना पहुंचकर उसे हिरासत में लिया और पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया।

    पेपर सेट करने वाली एजेंसी से कनेक्शन की जांच
    पूरे मामले में ICN एजेंसी का नाम भी सामने आया है, जिसे परीक्षा का पेपर सेट करने वाली एजेंसी बताया जा रहा है। जांच के मुताबिक, राजन कुमार को ICN एजेंसी से जुड़े मिथिलेश सिंह का करीबी माना जाता है। इसी कथित संपर्क के जरिए राजन तक परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

    अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि पेपर लीक के इस नेटवर्क में राजन के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल हैं। साथ ही CID मिथिलेश सिंह की कथित भूमिका और राजन के साथ उसके संबंधों की भी पड़ताल कर रही है।

    नेटवर्क के दूसरे लोगों तक पहुंचने की कोशिश
    CID की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र की जानकारी किस स्तर से बाहर निकली और इसे परीक्षार्थियों तक पहुंचाने में किन लोगों ने मदद की। जांच एजेंसी को आशंका है कि रैकेट का नेटवर्क राजन कुमार और मिथिलेश सिंह तक सीमित नहीं है। पूछताछ और आगे की जांच के आधार पर इस मामले में आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।

  • वैवाहिक विवाद में हर अपमान आपराधिक क्रूरता नहीं, झारखंड हाईकोर्ट ने 498A की कानूनी सीमा स्पष्ट की

    वैवाहिक विवाद में हर अपमान आपराधिक क्रूरता नहीं, झारखंड हाईकोर्ट ने 498A की कानूनी सीमा स्पष्ट की

    नई दिल्ली । झारखंड हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पति के खिलाफ धारा 498A के तहत चल रही आपराधिक कार्रवाई रद्द कर दी। पत्नी ने आरोप लगाया था कि पति उसके रंग, शर्मीले स्वभाव, समझ और बातचीत करने के तरीके को लेकर लगातार ताने देता था। अदालत ने माना कि इस तरह की टिप्पणियां अनुचित और दुख पहुंचाने वाली हो सकती हैं, लेकिन केवल इन्हीं आरोपों के आधार पर धारा 498A के तहत आपराधिक क्रूरता का मामला नहीं बनता।

    मामला एक ऐसे दंपती से जुड़ा है, जिनकी शादी ऑनलाइन मैट्रिमोनियल वेबसाइट के माध्यम से हुई थी। विवाह के कुछ समय बाद दोनों के बीच मतभेद शुरू हो गए। पत्नी का आरोप था कि पति उसके रंग को लेकर टिप्पणी करता था और उसके व्यक्तित्व, कम IQ तथा बातचीत करने के तरीके का मजाक उड़ाता था। विवाद बढ़ने के बाद पति ने उसे अलग रहने के लिए कहा।

    इसके बाद पत्नी पहले बेंगलुरु में अपनी छोटी बहन के पास रहने लगी और बाद में कोलकाता में अपनी बड़ी बहन के पास चली गई। इसी दौरान पति ने रांची की फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दाखिल की। वैवाहिक संबंधों में बढ़ते विवाद के बीच पत्नी ने भी पति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की।

    पत्नी ने धारा 498A के तहत क्रूरता का आरोप लगाने के अलावा करीब 35 लाख रुपये के स्त्रीधन को वापस नहीं करने की शिकायत भी की। उसका कहना था कि पति ने वैवाहिक जीवन जारी रखने में भी बाधा डाली। दूसरी ओर, पति ने अपने बचाव में पत्नी पर एक बीमारी से संबंधित आरोप लगाया और कहा कि विवाद के कारण परिस्थितियां खराब हुईं।

    11 जून 2024 को रांची की निचली अदालत ने शिकायत और उपलब्ध सामग्री के आधार पर पति को समन जारी किया। इसके बाद पति ने इस कार्रवाई को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी और आपराधिक कार्यवाही समाप्त करने की मांग की।

    मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की पीठ ने की। अदालत ने धारा 498A में परिभाषित क्रूरता की कानूनी कसौटी पर आरोपों को परखा। कोर्ट ने कहा कि इस प्रावधान के तहत ऐसे जानबूझकर किए गए व्यवहार को देखा जाता है, जिससे महिला आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो सकती हो या उसके जीवन, शरीर अथवा स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता हो। इसके अलावा गैरकानूनी संपत्ति या दहेज की मांग से जुड़ा उत्पीड़न भी इस प्रावधान के दायरे में आता है।

    अदालत ने पाया कि शिकायत में पति की ओर से किसी गैरकानूनी संपत्ति या दहेज की मांग का आरोप नहीं था। साथ ही ऐसे व्यवहार का स्पष्ट आरोप भी नहीं था, जिससे पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर होने या गंभीर शारीरिक अथवा स्वास्थ्य संबंधी खतरे का सामना करना पड़ा हो।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी के रंग, IQ और बातचीत करने की क्षमता पर टिप्पणी करना अपने आप में उचित व्यवहार नहीं माना जा सकता। हालांकि, केवल इन आरोपों को धारा 498A के तहत आपराधिक क्रूरता मानने के लिए कानून में निर्धारित आवश्यक तत्वों का पूरा होना जरूरी है।

    अदालत ने कहा कि आरोपों को पूरी तरह सही मान लेने के बाद भी इस मामले में धारा 498A के तहत अपराध स्थापित नहीं होता। ऐसे में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत का समन आदेश और पति के खिलाफ संबंधित आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।

    फैसले का मुख्य संदेश यह है कि वैवाहिक जीवन में अपमानजनक व्यवहार और आपराधिक क्रूरता के बीच कानूनी अंतर होता है। हर वैवाहिक विवाद या ताने को स्वतः धारा 498A के अपराध के रूप में नहीं देखा जा सकता। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि पति-पत्नी के बीच अपमानजनक या असम्मानजनक व्यवहार उचित है। अदालत ने इस मामले में केवल यह तय किया कि उपलब्ध आरोप धारा 498A की कानूनी कसौटी पर आपराधिक कार्यवाही जारी रखने के लिए पर्याप्त हैं या नहीं।

  • Jharkhand: धनबाद में फिर धंसी जमीन…. 13 घरों को नुकसान, रहवासियों ने भागकर बचाई जान

    Jharkhand: धनबाद में फिर धंसी जमीन…. 13 घरों को नुकसान, रहवासियों ने भागकर बचाई जान


    धनबाद।
    झारखंड (Jharkhand) के धनबाद (Dhanbad) में जमीन धंसने (Land subsidence) की एक और घटना सामने आई है। बस्ताकोला क्षेत्र (Bastakola area) अंतर्गत बंद झरिया आरएसपी कॉलेज के समीप स्थित कामिनी कल्याण बस्ती में शनिवार की दोपहर जोरदार आवाज के साथ जमीन धंस गई। इससे करीब एक दर्जन घरों में दरार पड़ गई। घटना से पूरी बस्ती में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया। इस घटना के बाद लोग अपने घरों से निकलकर जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।

    भू-धंसान इतना भीषण था कि कई घरों की भूमिगत पाइपलाइन टूट गई, जिससे बस्ती में जलापूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। माइंस रेस्क्यू की पूरी तकनीकी टीम ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। घटना से आक्रोशित लोगों ने झरिया-धनबाद मुख्य मार्ग पर आकर जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान लोगों ने सड़क के बीचोंबीच खड़े होकर आवागमन पूरी तरह ठप कर दिया। इससे मुख्य मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

    मेयर संजीव सिंह सबसे पहले पहुंचे। उन्होंने बीसीसीएल अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर युद्धस्तर पर राहत कार्य शुरू करने के लिए कहा। इसके बाद बस्ताकोला जीएम एसके गायकवाड़ और राजापुर परियोजना पदाधिकारी एम कुंडू पहुंचे। अधिकारियों ने प्रभावित स्थल का निरीक्षण कर पीड़ितों के साथ वार्ता की। मौके पर सिंदरी डीएसपी प्रकाश चंद महतो दलबल के साथ मौजूद थे। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने आक्रोशित लोगों को समझा-बुझाकर और उचित कार्रवाई का भरोसा देकर किसी तरह शांत कराया।


    मेयर संजीव के समझाने पर शांत हुए प्रभावित

    मेयर संजीव सिंह ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। कहा कि सभी प्रभावितों को सुरक्षित जगहों पर बसाया जाएगा। तत्काल राहत के तौर पर मेयर ने बेघर हुए आशीष रवानी, निरंजन रवानी, बेबी देवी और विश्वजीत दे के परिवार को रात गुजारने के लिए बस्ताकोला रेस्क्यू स्कूल स्थित जीएम ऑफिस में रहने की व्यवस्था कराई।

  • झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी छात्र आंदोलन में शामिल हुए अभिनेता पीयूष मिश्रा, दिया समर्थन

    झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी छात्र आंदोलन में शामिल हुए अभिनेता पीयूष मिश्रा, दिया समर्थन

    नई दिल्ली । झारखंड की राजधानी रांची में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं का विरोध प्रदर्शन लगातार गहराता जा रहा है। जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों को लेकर छात्र अनिश्चितकालीन आंदोलन और भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। इस बीच, प्रसिद्ध अभिनेता और गायक पीयूष मिश्रा ने आंदोलन स्थल पहुंचकर प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की और उनकी मांगों का प्रत्यक्ष समर्थन किया।

    रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में एकत्र हुए अभ्यर्थियों के बीच पहुंचे पीयूष मिश्रा ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले युवाओं के संघर्ष और पीड़ा को देखकर वे उनके साथ खड़े होने आए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी विशेष एजेंडे के तहत नहीं, बल्कि छात्रों की तकलीफों और उनके आंसुओं को देखकर वे इस आंदोलन से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के साथ एकजुटता दर्शाने के लिए वे अपनी ओर से हर संभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    आंदोलनकारी छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के दौरान अभिनेता ने अपनी चर्चित फिल्म का क्रांतिकारी गीत ‘आरंभ है प्रचंड’ भी गाया, जिससे पूरे प्रदर्शन स्थल पर मौजूद युवाओं में भारी उत्साह देखा गया। यह गीत अपने प्रेरणादायक और संघर्षशील बोलों के लिए जाना जाता है। पीयूष मिश्रा ने बताया कि प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए भोजन, तिरपाल और अन्य आवश्यक सामग्रियां उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए हैं, ताकि उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा किया जा सके।

    उल्लेखनीय है कि झारखंड में वर्ष 2019 के बाद आयोजित हुई कई प्रमुख भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्र बेहद असंतोष व्यक्त कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि जेएसएससी सीजीएल, जेएसएससी जेई और पीजीटी जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में व्यापक पैमाने पर धांधली और लीक के मामले सामने आए हैं, जिससे योग्य उम्मीदवारों का भविष्य अधर में लटक गया है।

    प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मुख्य मांगों में विवादित परीक्षाओं को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाना, पूरे प्रकरण की केंद्रीय जांच ब्यूरो से निष्पक्ष जांच कराया जाना और इसमें संलिप्त दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई किया जाना शामिल है। छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक यह अनिश्चितकालीन आंदोलन और भूख हड़ताल जारी रहेगी।

    प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर चल रहे इस आंदोलन को अब विभिन्न सामाजिक व सांस्कृतिक वर्गों का भी समर्थन मिलने लगा है। युवाओं के इस विरोध-प्रदर्शन ने राज्य में प्रशासनिक एवं परीक्षा प्रणाली में सुधारों को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

  • झारखंड भर्ती परीक्षा विवाद में 14वें दिन भी छात्रों का आंदोलन जारी, अनशनकारी राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

    झारखंड भर्ती परीक्षा विवाद में 14वें दिन भी छात्रों का आंदोलन जारी, अनशनकारी राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

    नई दिल्ली । झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। शुक्रवार को आंदोलन का 14वां दिन रहा। बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि कई छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इसी बीच अनशन कर रहे छात्र राहुल क्रांति की तबीयत अचानक बिगड़ गई। हालत ज्यादा खराब होने पर उन्हें रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम से तत्काल सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें भर्ती कराया गया। इस घटना के बाद आंदोलन कर रहे छात्रों में चिंता बढ़ गई है। दूसरी ओर, भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर झारखंड विधानसभा के बाहर और सदन के भीतर भी राजनीतिक माहौल गरम रहा।

    भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों में राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। बताया गया कि राज्य में छह छात्र अनशन पर बैठे हैं। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि लंबे समय से प्रदर्शन और अनशन के बावजूद सरकार की ओर से उनकी मांगों पर बातचीत के लिए कोई आधिकारिक बुलावा नहीं भेजा गया है। छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर विधानसभा तक मार्च निकालने का भी ऐलान किया है। इससे आने वाले दिनों में आंदोलन के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

    छात्रों की सबसे प्रमुख मांग 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने की है। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। छात्रों की मांग है कि मामले की जांच सीबीआई या राज्य के बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों की टीम से कराई जाए। इसके अलावा छात्र झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की कार्यप्रणाली में बड़े सुधार की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल करना जरूरी है।

    भर्ती परीक्षा विवाद का असर झारखंड विधानसभा में भी दिखाई दिया। विपक्षी विधायकों ने छात्रों के आंदोलन को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और जोरदार विरोध किया। विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए मामले की सीबीआई और ईडी से जांच कराने की मांग करने लगे। विपक्ष की ओर से मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और पूरे मामले में उचित कार्रवाई होनी चाहिए।

    वहीं सरकार की ओर से भी विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया गया। सरकार ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों को गंभीरता से देखा जा रहा है। साथ ही सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि पहले से सामने आए पुरानी भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों पर भी जवाब दिया जाना चाहिए। कांग्रेस ने कहा कि सरकार छात्रों के मुद्दे को गंभीरता से देख रही है।

    फिलहाल छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और आंदोलन समाप्त करने के संकेत नहीं दिए हैं। अनशनकारी राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ने से आंदोलन का मामला और संवेदनशील हो गया है। अब छात्रों की नजर सरकार की ओर से होने वाली किसी औपचारिक बातचीत पर है। वहीं सरकार के सामने भी छात्रों की मांगों और लगातार बढ़ते आंदोलन के बीच समाधान निकालने की चुनौती है। आने वाले दिनों में विधानसभा के भीतर और बाहर इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और छात्र आंदोलन दोनों के और तेज होने की संभावना बनी हुई है।

  • रांची छात्र आंदोलन के बीच सीआईडी की बड़ी कार्रवाई, पांच और गिरफ्तार; वार्ता को लेकर सक्रिय हुई हेमंत सरकार

    रांची छात्र आंदोलन के बीच सीआईडी की बड़ी कार्रवाई, पांच और गिरफ्तार; वार्ता को लेकर सक्रिय हुई हेमंत सरकार

    नई दिल्ली । झारखंड में प्रतियोगी परीक्षा में कथित धांधली को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। एक तरफ जहां जांच एजेंसियां अपनी कार्रवाई तेज कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच वार्ता के रास्ते तलाशने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। आपराधिक जांच विभाग यानी सीआईडी ने इस प्रकरण में पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिससे इस मामले में अब तक हुई गिरफ्तारियों का दायरा और बढ़ गया है।

    इस हालिया कार्रवाई में परीक्षा आयोजन से जुड़े एक पूर्व अधिकारी के कार्यालय में तैनात कर्मचारी, कुछ अभ्यर्थी और बिचौलिए पुलिस की गिरफ्त में आए हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और जब्त दस्तावेजों के आधार पर यह गिरफ्तारियां की गई हैं। सीआईडी की टीमें पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के उद्देश्य से लगातार विभिन्न ठिकानों पर दबिश दे रही हैं और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

    इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूरे मामले पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए आंदोलनकारी छात्रों से संवाद की पेशकश की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार युवाओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और सभी जायज मांगों पर नियमानुसार विचार किया जाएगा।

    दूसरी ओर, आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे बंद कमरे में वार्ता के पक्षधर नहीं हैं। छात्रों की मांग है कि बातचीत किसी सार्वजनिक मंच पर हो या फिर पूरी प्रक्रिया का सीधा प्रसारण किया जाए, ताकि सभी अभ्यर्थियों के सामने पूरी पारदर्शिता बनी रहे। कुछ छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि मुख्यमंत्री को स्वयं अनशन स्थल पर आकर छात्रों की समस्याएं सुननी चाहिए और तुरंत समाधान की घोषणा करनी चाहिए।

    प्रदर्शन स्थल पर अनशन पर बैठे छात्रों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। आंदोलनकारी मुख्य रूप से विवादित परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने, दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और भविष्य की भर्ती परीक्षाओं के लिए सख्त कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। मध्य प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों के छात्र संगठन भी झारखंड के इस घटनाक्रम पर अपनी नजर बनाए हुए हैं और लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से आंदोलन को समर्थन मिल रहा है।

    संभावित विधानसभा घेराव और प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए हैं। शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। फिलहाल सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बने इस गतिरोध का नतीजा क्या निकलता है, इस पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।

  • JPPSC-JSSC विवाद पर झारखंड सरकार का वार्ता प्रस्ताव, छात्रों ने सार्वजनिक बातचीत की मांग रखकर आंदोलन जारी रखा

    JPPSC-JSSC विवाद पर झारखंड सरकार का वार्ता प्रस्ताव, छात्रों ने सार्वजनिक बातचीत की मांग रखकर आंदोलन जारी रखा

    नई दिल्ली । झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर जारी छात्र आंदोलन आठवें दिन भी जारी रहा। राजधानी रांची में आंदोलनरत छात्र झारखंड लोक सेवा आयोग (JPPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से जुड़ी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने छात्रों को बातचीत का प्रस्ताव दिया है, जिससे पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है।

    बुधवार को रांची के धरना स्थल पर प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे और प्रदर्शनकारी छात्रों से सरकार की ओर से वार्ता का संदेश दिया। अधिकारियों ने छात्रों से पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बनाकर सरकार के साथ बातचीत करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से सर्किट हाउस में वार्ता का प्रस्ताव भेजा गया, ताकि छात्रों की मांगों पर चर्चा कर समाधान का रास्ता निकाला जा सके।

    हालांकि प्रदर्शनकारी छात्रों ने बंद कमरे में बातचीत करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि यदि सरकार वास्तव में उनकी बात सुनना चाहती है तो बातचीत सार्वजनिक रूप से और मीडिया की मौजूदगी में होनी चाहिए। छात्रों ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं धरना स्थल पर आकर उनसे संवाद करें, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे और जनता भी बातचीत को देख सके।

    धरना स्थल पर प्रशासन और छात्रों के बीच लगातार संवाद की कोशिशें जारी रहीं। प्रशासन प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से वार्ता शुरू कराने का प्रयास करता रहा, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम रहे। छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर ठोस और स्पष्ट निर्णय के बिना आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। उनका उद्देश्य केवल निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    इस आंदोलन ने राज्य की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। विपक्षी दलों ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों का समर्थन जताया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में विपक्षी प्रतिनिधियों ने आंदोलन स्थल पहुंचकर छात्रों से मुलाकात की और उनकी मांगों पर चर्चा की। इसके अलावा कई सामाजिक और साहित्यिक हस्तियां भी आंदोलन को समर्थन देने के लिए धरना स्थल पहुंचीं और छात्रों का मनोबल बढ़ाया।

    झारखंड में चल रहे इस आंदोलन को राज्य के युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता से जुड़े बड़े मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की नजर सरकार और छात्रों के बीच संभावित वार्ता पर टिकी हुई है। यदि दोनों पक्ष सहमति के साथ किसी समाधान पर पहुंचते हैं तो लंबे समय से जारी गतिरोध समाप्त हो सकता है। फिलहाल प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत की संभावनाएं बनी हुई हैं, जबकि छात्र अपनी मांगों पर अडिग हैं और आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।