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  • ट्रंप और जिनपिंग के साथ बैठक करेंगे पुतिन….त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन का रखा प्रस्ताव

    ट्रंप और जिनपिंग के साथ बैठक करेंगे पुतिन….त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन का रखा प्रस्ताव


    मास्को।
    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने अगले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) के साथ एक त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन का प्रस्ताव रखा है। इस सम्मेलन में यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा होगी। इसका उद्देश्य एक ऐसा शांति समझौता करना है जो मॉस्को के पक्ष में हो। यह जानकारी ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार है।

    रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रस्ताव राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बेहतर होते संबंधों का फायदा उठाने की पुतिन की कोशिश को दिखाता है। इस कदम ने यूक्रेन और वाशिंगटन के यूरोपीय सहयोगियों के बीच चिंताएं पैदा कर दी हैं, खासकर इसलिए क्योंकि इसमें यूक्रेन का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।


    पुतिन ने बातचीत का प्रस्ताव कब रखा?

    इस मामले की जानकारी रखने वाले रूस के एक पूर्व खुफिया अधिकारी का हवाला देते हुए, डब्लूएसजे ने बताया कि पुतिन ने सबसे पहले 9 अक्तूबर को ट्रंप के साथ फोन पर बातचीत के दौरान एक त्रिपक्षीय बैठक का विचार रखा था। इसी बातचीत के दौरान एक समझौता भी हुआ, जिसके तहत अमेरिका को रूस से डीजल खरीदने और उसे वैश्विक बाजारों में वितरित करने की अनुमति मिल गई।


    क्रेमलिन के प्रवक्ता ने क्या कहा?

    क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने डब्लूएसजे को पुष्टि की कि एक संभावित बैठक को लेकर बातचीत चल रही है। पेस्कोव ने डब्लूएसजे से कहा, ‘बैठक या इसके संभावित एजेंडे को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट सहमति नहीं बनी है, हालांकि तीनों पक्ष इस बात को मानते हैं कि ऐसी बैठक होने की एक संभावना हो सकती है।’


    अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने क्या कहा?

    वहीं, अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ को बताया कि ट्रंप ने इस शिखर सम्मेलन के लिए औपचारिक रूप से सहमति नहीं दी है, लेकिन अधिकारी ने संकेत दिया कि युद्ध को सुलझाने की अपनी कोशिशों को देखते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति इस प्रस्ताव पर विचार कर सकते हैं।


    कब हो सकती है बैठक?

    बातचीत से जुड़े सूत्रों ने ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ को बताया कि क्रेमलिन ने सुझाव दिया है कि यह त्रिपक्षीय वार्ता आगामी ‘एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन’ (APEC) शिखर सम्मेलन के साथ आयोजित की जा सकती है। यह सम्मेलन 18 और 19 नवंबर को दक्षिणी चीन के टेक हब, शेन्जेन में होने वाला है।

    मॉस्को और बीजिंग के बीच हाल ही में हुई बातचीत से जुड़े सूत्रों ने ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ को बताया कि रूसी राजनयिकों ने चीनी अधिकारियों के सामने एक प्रस्ताव रखा। चीनी अधिकारियों ने संकेत दिया कि अगर ट्रंप इसमें शामिल होने के लिए सहमत हो जाते हैं, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी।


    ट्रंप ने जेलेंस्की पर क्या आरोप लगाया?

    रविवार को ट्रंप ने दावा किया कि रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने के लिए चल रही बातचीत में काफी प्रगति हो रही है। उन्होंने मॉस्को के प्रति अपने प्रशासन के राजनयिक रुख का बचाव किया और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की पर आरोप लगाया कि वे दो साल पहले एक बेहतर समझौता करने में विफल रहे थे।

    इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और रूसी ऊर्जा खरीदने वाले बड़े देशों पर नए कड़े प्रतिबंधों और टैरिफ को फिलहाल लागू न करने के अपने फैसले का बचाव किया है। उनका कहना है कि वह यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए चल रही शांति वार्ता को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते। ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत में प्रगति कर रही है। उनके मुताबिक, अगर इस समय रूस पर नए आर्थिक दबाव डाले गए, तो वह बातचीत की मेज छोड़ सकता है।

  • संबंध सुधारने में जुटे अमेरिका-चीन….. इस साल दो बार होगी ट्रंप और जिनपिंग की मुलाकात

    संबंध सुधारने में जुटे अमेरिका-चीन….. इस साल दो बार होगी ट्रंप और जिनपिंग की मुलाकात


    वॉशिंगटन।
    अमेरिका और चीन (America and China) के बीच संबंध सुधरने लगे हैं। अमेरिका (America) के अपने राजकीय दौरे के समापन से पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (President Xi Jinping) ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस साल उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) से दो बार और मुलाकात होगी। शी ने ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया को नवंबर में चीन के शेनझेन में होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) शिखर सम्मेलन में आने का निमंत्रण दिया। चीन के राष्ट्रपति ने कहा कि इसके एक महीने बाद फ्लोरिडा में ‘ट्रंप नेशनल डोरल मियामी गोल्फ क्लब’ में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान उनकी फिर से मुलाकात हो सकती है।

    शी ने कहा, ”मैं राष्ट्रपति और प्रथम महिला को चीन आने के लिए आमंत्रित करता हूं।” इस पर ट्रंप ने कहा, ”हम आएंगे और हम काफी बातचीत करेंगे।” चीनी राष्ट्रपति के दौरे के समापन से पहले ट्रंप उन्हें राष्ट्रीय अभिलेखागार भी ले जाएंगे। ट्रंप दुनिया के सबसे शक्तिशाली साम्यवादी देश के नेता को अमेरिकी लोकतंत्र के महत्वपूर्ण मूल दस्तावेज दिखाएंगे।

    शी के अमेरिका के राष्ट्रीय अभिलेखागार का दौरा करने के बाद वाशिंगटन से रवाना होने की संभावना है। यहां स्वतंत्रता की घोषणा, संविधान और अधिकार विधेयक जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित रखे गए हैं। शी की यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब अमेरिका अपनी स्थापना की 250वीं वर्षगांठ मना रहा है। ट्रंप ने बृहस्पतिवार को कहा था कि वह शी को ”उस गौरवशाली इतिहास के कुछ सबसे महत्वपूर्ण खजाने” दिखाना चाहते हैं।

    ट्रंप दंपति ने गुरुवार रात प्रौद्योगिकी उद्योग के दिग्गजों की मौजूदगी में अपने मेहमानों के सम्मान में रात्रिभोज का आयोजन किया था। दोनों नेताओं ने बृहस्पतिवार को बंद कमरे में 90 मिनट तक बैठक भी की। बैठक के बाद चीन सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व, यूक्रेन और कोरियाई प्रायद्वीप जैसे मुद्दों पर चर्चा की। अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस ने इस चर्चा के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की है।

    वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से साफ शब्दों में कहा है कि ईरान को किसी भी प्रकार की सीधे-सीधे या छिपकर की जाने वाले मदद उन्हें बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है, चाहे यह मदद खुफिया जानकारी से लेकर, सैन्य उपकरण और तकनीकी पुर्जे मुहैया कराने जैसी हो। चीन में अमेरिका के राजदूत डेविड पेड्यू ने अमेरिका में हुई दोनों शीर्ष नेताओं की बैठक के संदर्भ में यह जानकारी दी।

    पेड्यू ने बताया कि गुरुवार को व्हाइट हाउस में हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने इस मुद्दे पर अमेरिका का रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन पिछले कुछ हफ्तों से लगातार इस विषय को उठाता रहा है और इसे ताइवान से जुड़ी अमेरिकी प्रतिबद्धताओं से अलग रखकर देखा जा रहा है।

  • PM मोदी की जिनपिंग को दो टूक… बोले- सीमा पर शांति होगी .. तभी आगे बढ़ेंगे रिश्ते…

    PM मोदी की जिनपिंग को दो टूक… बोले- सीमा पर शांति होगी .. तभी आगे बढ़ेंगे रिश्ते…


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने पिछले सप्ताह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) से इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) के साथ हुई मुलाकात के दौरान चीन के साथ संबंधों को लेकर भारत (India) की चिंताओं को स्पष्ट रूप से सामने रखा। भारत सरकार के अनुसार, मोदी ने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के संबंध में विदेश मंत्रालय चीनी पक्ष की ओर से जारी बयान पर पूछे गए सवाल का जवाब दिया। चीनी बयान में मोदी के हवाले से कहा गया था कि तिब्बत और ताइवान को लेकर भारत की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है और भारत अपनी धरती पर किसी को भी चीन विरोधी गतिविधियां संचालित करने की अनुमति नहीं देता। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने भारतीय चिंताओं का भी उल्लेख किया और इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों को एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।’


    सीमा पर शांति को रिश्ते आगे बढ़ाने की बुनियाद बताया

    जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने शी जिनपिंग के साथ बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों को तीन पारस्परिक सिद्धांतों- आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता से निर्देशित होना चाहिए।


    भारत ने चीन के साथ संबंधों में अपनी चिंताएं रखीं

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शी जिनपिंग को यह भी स्पष्ट किया कि सीमा पर शांति दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए एक आवश्यक आधार है। भारत और चीन के बीच सीमा पर बार-बार पैदा हुए तनाव के बीच भारत ने पिछले 16 वर्षों से सार्वजनिक रूप से अपनी ‘वन चाइना’ नीति को उसी तरह स्पष्ट रूप से व्यक्त करना बंद कर दिया है।


    तिब्बत और ताइवान पर भारत की नीति में बदलाव नहीं

    हालांकि व्यवहार में तिब्बत और ताइवान को लेकर भारत की स्थिति लगातार बनी हुई है। केंद्र सरकार का कहना है कि ताइवान को लेकर उसकी नीति स्पष्ट और निरंतर है। भारत व्यापार, निवेश, पर्यटन, संस्कृति, शिक्षा और लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे क्षेत्रों में ताइवान के साथ संबंधों को बढ़ावा देता है और सहयोग की सुविधा प्रदान करता है।


    तिब्बत को लेकर भारत का रुख भी स्पष्ट

    तिब्बत के मामले में भारत अब भी यह मानता है कि तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र चीन जनवादी गणराज्य के क्षेत्र का हिस्सा है। यह स्थिति वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के बीच हस्ताक्षरित ‘संबंधों और व्यापक सहयोग के सिद्धांतों पर घोषणा’ में भी दर्ज की गई थी। इस घोषणा में यह भी कहा गया था कि भारत अपनी जमीन से तिब्बतियों को चीन विरोधी राजनीतिक गतिविधियां संचालित करने की अनुमति नहीं देता।


    चीन के बयान में भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का भी जिक्र
    चीनी पक्ष की ओर से जारी बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने शी जिनपिंग से यह भी कहा कि भारत एक स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता है और चीन के प्रति भारत के दृष्टिकोण का किसी तीसरे देश से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, भारत की ओर से जारी आधिकारिक बयान में तिब्बत या ताइवान का कोई उल्लेख नहीं किया गया।


    ‘दोस्त, प्रतिद्वंद्वी नहीं’ वाले फॉर्मूले पर भी चर्चा

    दिलचस्प बात यह है कि इस बार भारत ने अपने बयान में चीन के उस ‘दोस्त, प्रतिद्वंद्वी नहीं’ वाले फॉर्मूले का इस्तेमाल नहीं किया, जिसका उल्लेख पिछले साल तियानजिन में मोदी-शी मुलाकात के बाद चीन की ओर से जारी बयान में किया गया था।


    जयशंकर और वांग यी की बातचीत में भी उठा था मुद्दा

    जुलाई में मनीला में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ हुई मुलाकात के बाद भी चीन ने जयशंकर के हवाले से भारत द्वारा चीन की संप्रभुता का सम्मान करने जैसी बातें कही थीं। इसके बाद विदेश मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा था कि जयशंकर ने वांग यी से बातचीत में यह बात कही थी कि संप्रभुता से जुड़े मुद्दे भारत को चीन के सामने उठाने चाहिए।

    चीन के कब्जे को लेकर भारत ने जताई आपत्ति
    उन्होंने कहा कि भारत किसी भी तरह से चीन की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं करता। हालांकि, चीन 1963 से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जा किए हुए है, जबकि इन क्षेत्रों पर भारत के अधिकार को चीन भी स्वीकार करता रहा है।

  • ट्रंप ने एआई को बताया भविष्य की ताकत, चीन की जासूसी, शी जिनपिंग और कनाडा के नेताओं पर भी खुलकर बोले

    ट्रंप ने एआई को बताया भविष्य की ताकत, चीन की जासूसी, शी जिनपिंग और कनाडा के नेताओं पर भी खुलकर बोले

    नई दिल्ली ।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आयरलैंड से अमेरिका लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, चीन, कनाडा और व्यापार से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। ट्रंप ने एआई को लेकर अमेरिका की स्थिति को मजबूत बताया, वहीं चीन और कनाडा के साथ संबंधों पर भी अपनी बात रखी।

    चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को लेकर ट्रंप ने कहा कि उनका रवैया अब तक ठीक रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने चीन के साथ सही व्यवहार किया है। चीन की ओर से अमेरिका की जासूसी किए जाने से जुड़े सवाल पर ट्रंप ने कहा कि चीन अमेरिका पर नजर रखता है, लेकिन अमेरिका भी चीन की जानकारी लेता है।

    ट्रंप ने अमेरिकी बाजार में चीनी कारों की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अभी तक उन्होंने चीनी कारों को अमेरिका में आने की अनुमति नहीं दी है। इसके पीछे उन्होंने चीन के सामान पर लगाए गए भारी टैक्स को प्रमुख कारण बताया। ट्रंप के अनुसार, इन उत्पादों पर टैक्स 100 से 150 प्रतिशत तक रहा है।

    उन्होंने यूरोप का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां विदेशी कारों की वजह से परेशानी बढ़ रही है। इसके विपरीत अमेरिका में अभी ऐसी स्थिति नहीं बनी है। ट्रंप ने इस संदर्भ में अमेरिकी बाजार में चीनी वाहनों के प्रवेश को लेकर अपनी नीति का संकेत दिया।

    बोइंग के विमानों से जुड़े सौदे के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा कि वह इसे पूरा करेंगे। उन्होंने अपनी बातचीत और कारोबारी शैली का जिक्र करते हुए कहा कि वह हर डील पूरी कर लेते हैं। इस दौरान उन्होंने व्यापार से जुड़े अपने रुख को भी स्पष्ट किया।

    कनाडा के साथ संबंधों को लेकर ट्रंप ने कहा कि वहां की सरकार के साथ काम करना उनके लिए मुश्किल है। हालांकि उन्होंने कनाडा के आम लोगों और वहां के नेताओं के बीच अंतर करते हुए कहा कि उन्हें कनाडा के लोगों से कोई परेशानी नहीं है। उनके मुताबिक, कनाडा के लोग अच्छे हैं, लेकिन वहां के नेताओं के साथ काम करना आसान नहीं है।

    ट्रंप ने दावा किया कि कनाडा अब अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कनाडा ने लंबे समय तक अमेरिका से फायदा उठाया, लेकिन अब स्थिति बदल गई है और ऐसा नहीं हो रहा है।

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर ट्रंप ने इसे भविष्य की महत्वपूर्ण ताकत के तौर पर पेश किया। उन्होंने कहा कि जिस देश का एआई सबसे आगे होगा, वही आगे रहेगा। ट्रंप ने दावा किया कि इस क्षेत्र में अमेरिका काफी आगे है।

    जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह खुद एआई का इस्तेमाल करते हैं, तो उन्होंने इसका जवाब हां में दिया। हालांकि, उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि वह एआई का इस्तेमाल किस काम के लिए करते हैं।

    ट्रंप की इस बातचीत में एआई के साथ-साथ चीन और कनाडा के साथ अमेरिका के संबंधों को लेकर उनका मौजूदा रुख भी सामने आया। चीन के साथ जासूसी और व्यापार, कनाडा के साथ बातचीत तथा एआई में अमेरिकी बढ़त जैसे मुद्दों पर उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया।

  • BRICS Summit 2026 केदिल्ली पहुंचे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, प्रधानमंत्री मोदी से शाम को द्विपक्षीय बैठक में कई मुद्दों पर होगी चर्चा

    BRICS Summit 2026 केदिल्ली पहुंचे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, प्रधानमंत्री मोदी से शाम को द्विपक्षीय बैठक में कई मुद्दों पर होगी चर्चा

    नई दिल्ली ।18वें BRICS शिखर सम्मेलन 2026 में शामिल होने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को दिल्ली पहुंच गए। उनके भारत आगमन पर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने दिल्ली के पालम हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। शी जिनपिंग के दिल्ली पहुंचने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक को लेकर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं।

    जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच आज शाम करीब पौने छह बजे द्विपक्षीय बैठक होने वाली है। BRICS शिखर सम्मेलन से इतर होने वाली इस मुलाकात में दोनों देशों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

    शी जिनपिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत पहुंचे हैं। उनके साथ चीन का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी दिल्ली आया है। इस प्रतिनिधिमंडल में चीन कम्युनिस्ट पार्टी के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य काई ची और चीन के विदेश मंत्री वांग यी शामिल हैं।

    काई ची चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के जनरल ऑफिस के निदेशक भी हैं। शी जिनपिंग के साथ उनकी मौजूदगी को दोनों देशों के बीच होने वाली महत्वपूर्ण बातचीत के संदर्भ में देखा जा रहा है।

    प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक में सीमा विवाद और दोनों देशों के संबंधों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है। इसके अलावा व्यापार, कृषि क्षेत्र और बाजार में आपूर्ति श्रृंखला से संबंधित विषय भी चर्चा में शामिल हो सकते हैं।

    बैठक के दौरान आर्थिक और तकनीकी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत होने की उम्मीद है। इसके साथ ही वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर मजबूत सैन्य सुरक्षा व्यवस्था और आयात से जुड़े विषयों पर भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा हो सकती है।

    BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए कई देशों के प्रमुख नेता पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 11 सितंबर को दिल्ली पहुंचे थे। भारत पहुंचने पर केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने उनका स्वागत किया था।

    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं। उनका स्वागत केंद्रीय राज्य मंत्री शंतनु ठाकुर ने किया था। इस तरह शिखर सम्मेलन के लिए कई प्रमुख देशों के नेताओं की दिल्ली में मौजूदगी हो चुकी है।

    शी जिनपिंग के भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ होने वाली बैठक पर विशेष ध्यान रहेगा। दोनों नेताओं के बीच बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े विभिन्न मुद्दों के साथ व्यापार, आर्थिक और तकनीकी विषयों पर चर्चा की संभावना है।

    सीमा से जुड़े विषय और LAC पर सुरक्षा व्यवस्था भी प्रस्तावित बातचीत के महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा कृषि, आपूर्ति श्रृंखला और आयात से संबंधित विषयों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

    फिलहाल शी जिनपिंग के दिल्ली पहुंचने के बाद BRICS शिखर सम्मेलन की गतिविधियों के बीच प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक अहम कार्यक्रमों में शामिल है। दोनों नेताओं की मुलाकात आज शाम करीब पौने छह बजे प्रस्तावित है, जिसके दौरान दोनों देशों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत होने की उम्मीद है।

  • दिल्ली आ रहे चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग… भारत के साथ हो सकती है दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति पर बड़ी डील

    दिल्ली आ रहे चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग… भारत के साथ हो सकती है दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति पर बड़ी डील


    नई दिल्ली।
    देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) में इस सप्ताह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) में हिस्सा लेने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) भारत (India) आ रहे हैं। इस दौरे पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। जिनपिंग अपने साथ तोहफा भी ला रहे हैं।

    दुर्लभ खनिजों (Rare Minerals) की आपूर्ति को लेकर भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय समझौते के आसार हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा के मद्देनजर इस समझौते की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 12 सितंबर की शाम को द्विपक्षीय वार्ता होगी। वहीं रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के साथ 11 को द्विपक्षीय वार्ता होगी।

    गौरतलब है कि पूर्व में चीन के साथ हुई बातचीत में वह भारत को दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति का भरोसा दिला चुका है। अब सूत्रों का कहना है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय वार्ता में इस समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।


    भारत तीसरे स्थान पर

    इससे पहले भारत में दुनिया के करीब छह फीसदी दुर्लभ खनिज होने का अनुमान है। इस मामले में भारत तीसरे स्थान पर है। हालांकि अभी तक इनका पर्याप्त दोहन नहीं हो पाया है। कुछ समय पहले भारत ने नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन शुरू किया है, जिसका मकसद ऐसे दुलर्भ खनिजों की खोजना है। सरकार ने बताया था कि भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग ने आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, झारखंड, राजस्थान, गुजरात,महाराष्ट्र में 7.23 मिलियन टन दुर्लभ खनिजों की मौजूदगी का पता लगाया है।


    क्या है दुर्लभ खनिज?

    दुर्लभ खनिजों की श्रेणी में कुल 17 तत्व हैं, जिनमें से सात चीन में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। इनमें स्कैडियम, सैमरियम, डिस्प्रोसियम, टेरबियम, इट्रियम, गैडोलिनियम और ल्यूटेनियम शामिल हैं। दुनिया में इन दुर्लभ खनिजों की उपलब्धता का करीब 80 फीसदी हिस्सा अकेले चीन में है। ऐसे में कई देश इनकी आपूर्ति के लिए चीन पर निर्भर हैं। यदि भारत के साथ यह समझौता होता है तो भारत को भी इन खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

    रूस सहयोग को तैयार

    इस बीच, रूस ने भी कहा है कि वह भारत को दुर्लभ खनिजों की खोज में मदद करने के लिए तैयार है। यह एक बेहद जटिल कार्य है और रूस की कंपनियों के पास इस क्षेत्र में विशेषज्ञता है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस इस संबंध में भारत को सहयोग देने के लिए तैयार है। पुतिन की भारत यात्रा के दौरान द्विपक्षीय वार्ता में इस मुद्दे पर भी चर्चा होने की संभावना है।

  • पश्चिम एशिया तनाव में भी चीन में पेट्रोल-LPG की हो रही भरपूर सप्लाई…. जिनपिंग ने ढूंढा नया रास्ता!

    पश्चिम एशिया तनाव में भी चीन में पेट्रोल-LPG की हो रही भरपूर सप्लाई…. जिनपिंग ने ढूंढा नया रास्ता!


    बीजिंग।
    मिडल ईस्ट (Middle East) में छिड़ी भीषण जंग और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की तालाबंदी ने दुनिया के कई देशों में हाहाकार मचा दिया है. तेल संकट से जूझ रहे देशों में चीन (China) भी शामिल होता लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने एक रास्ता ढूंढ़ लिया है. ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा देखते हुए बीजिंग (Beijing) ने पुराने ट्रे़ड रास्तों का विकल्प ढूंढना शुरू कर दिया है. ऐसे में म्यांमार चीन के लिए सिर्फ एक पड़ोसी नहीं, बल्कि हिंद महासागर में उतरने का सबसे सुरक्षित ‘बैकडोर’ बन गया है. चीन-म्यांमार आर्थिक गलियारा (CMEC) अब केवल व्यापार का जरिया नहीं, बल्कि एक रणनीतिक ढाल बन चुका है।

    बड़ी-बड़ी पाइपलाइनें: चीन ने म्यांमार के क्यायुकफ्यू बंदरगाह से लेकर चीन के कुनमिंग शहर तक दो बड़ी-बड़ी पाइपलाइनें बिछाई हैं. इनका सबसे बड़ा मकसद ‘मलक्का डिलेमा’ से बचना है.

    कच्चा तेल: यह पाइपलाइन सालाना 2.2 करोड़ टन यानी लगभग 2,40,000 बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल ले जाने की क्षमता रखती है. खाड़ी देशों और अफ्रीका से आने वाले बड़े टैंकर म्यांमार के तट पर तेल उतारते हैं, जो पाइपलाइन के जरिए सीधे चीन पहुंचता है.

    नैचुरल गैस: इसके साथ ही एक गैस पाइपलाइन भी है जो सालाना 12 अरब क्यूबिक मीटर गैस सप्लाई करती है. इसमें म्यांमार के अपने अपतटीय क्षेत्रों की गैस भी शामिल है.


    हिंद महासागर में चीन की बिसात

    चीन अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए ‘मोतियों की माला’ (String of Pearls) की नीति को और मजबूत कर रहा है. मालदीव में चीन ने इंफ्रास्ट्रक्चर और ‘फ्रेंडशिप ब्रिज’ जैसे प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश किया है ताकि भारत के प्रभाव को कम किया जा सके।

    भारत ने ग्रेट निकोबार द्वीप पर नया एयरपोर्ट और मिलिट्री बेस बनाकर चीन की घेराबंदी तेज कर दी है. यह बेस बंगाल की खाड़ी और मलक्का जलडमरूमध्य के बीच एक ‘नेचुरल बैरियर’ की तरह काम करेगा.

    म्यांमार: चीन का ‘ट्रम्प कार्ड’
    सारे रास्तों के बंद होने पर म्यांमार ही वो एकमात्र रास्ता है जो चीन को सीधे बंगाल की खाड़ी से जोड़ता है. चीन ने इसके लिए कई तरह की चालें चली हैं, जिसमें से एक म्यांमार के आंतरिक संघर्षों में एक ‘मध्यस्थ’ की भूमिका भी है, ताकि CMEC के प्रोजेक्ट्स सुरक्षित रहें. चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए वाशिंगटन में भी अब चर्चा शुरू हो गई है कि क्या म्यांमार पर लगाए गए प्रतिबंध उसे पूरी तरह चीन की गोद में धकेल रहे हैं?