Tag: Jio

  • जियो आईपीओ की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को, ग्रे मार्केट में ₹248 प्रीमियम से निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें

    जियो आईपीओ की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को, ग्रे मार्केट में ₹248 प्रीमियम से निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें

    नई दिल्ली । रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ पर निवेशकों की नजरें अब शेयर बाजार में होने वाली लिस्टिंग पर टिकी हैं। कंपनी के सार्वजनिक निर्गम को कुल 22.19 गुना सब्सक्रिप्शन मिला है। अब निवेशक शेयरों के अलॉटमेंट, ग्रे मार्केट प्रीमियम और बाजार में संभावित शुरुआती कीमत को लेकर उत्सुक हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, कंपनी के शेयर 28 अक्टूबर 2026 को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध होंगे।

    24 अक्टूबर को शाम पांच बजे उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी करीब 248 रुपये प्रति शेयर था। कंपनी ने आईपीओ के लिए 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था। ऊपरी प्राइस बैंड में 248 रुपये का प्रीमियम जोड़ने पर अनुमानित लिस्टिंग कीमत लगभग 1,367 रुपये बनती है। यह इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 22.16 प्रतिशत प्रीमियम का संकेत देता है।

    हालांकि, ग्रे मार्केट प्रीमियम को शेयर की वास्तविक लिस्टिंग कीमत नहीं माना जा सकता। यह अनौपचारिक बाजार में चल रही खरीद-बिक्री से मिलने वाला संकेत है। इसमें लिस्टिंग से पहले बदलाव हो सकता है। शेयर बाजार में कंपनी के शेयर किस भाव पर कारोबार शुरू करेंगे, यह वास्तविक मांग, निवेशकों के व्यवहार और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसलिए मौजूदा जीएमपी को संभावित संकेत के रूप में ही देखना जरूरी है।

    जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को निर्धारित है। कारोबार शुरू होने से पहले सुबह नौ बजे से 9:45 बजे तक विशेष प्री-ओपन सत्र आयोजित किया जाएगा। इस अवधि में निवेशक अपने ऑर्डर दे सकेंगे, उनमें बदलाव कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें रद्द भी कर सकेंगे। इसके बाद शेयर का शुरुआती भाव निर्धारित करने की प्रक्रिया पूरी होगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सुबह दस बजे कारोबार शुरू होना है।

    आईपीओ के अलॉटमेंट की प्रक्रिया 26 अक्टूबर को पूरी होने की उम्मीद है। जिन आवेदकों को शेयर आवंटित नहीं होंगे, उनके रिफंड की प्रक्रिया 27 अक्टूबर को होने की संभावना है। इसी दिन सफल आवेदकों के डीमैट खातों में शेयर जमा किए जाने की भी उम्मीद है। अलॉटमेंट पूरा होने के बाद निवेशक बीएसई, एनएसई या आईपीओ रजिस्ट्रार की वेबसाइट पर अपने आवेदन की स्थिति देख सकेंगे। इसके लिए पैन नंबर या आवेदन से संबंधित विवरण की जरूरत पड़ सकती है।

    इस आईपीओ का कुल आकार 30,213 करोड़ रुपये था। निवेशकों के लिए एक लॉट में 12 शेयर रखे गए थे। ऊपरी प्राइस बैंड 1,119 रुपये के हिसाब से एक लॉट के लिए न्यूनतम 13,428 रुपये का निवेश जरूरी था।

    सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों के अनुसार, योग्य संस्थागत खरीदारों की श्रेणी में आईपीओ 70.55 गुना सब्सक्राइब हुआ। गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी में यह आंकड़ा 14 गुना रहा, जबकि खुदरा निवेशकों की श्रेणी में 2.72 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। कुल मिलाकर इश्यू को 22.19 गुना आवेदन प्राप्त हुए।

    लिस्टिंग से पहले निवेशकों के लिए अलॉटमेंट की स्थिति और बाजार में बन रहे संकेत महत्वपूर्ण रहेंगे। हालांकि, केवल जीएमपी के आधार पर मुनाफे का अनुमान लगाना उचित नहीं है। वास्तविक लिस्टिंग कीमत अनुमान से कम या अधिक हो सकती है। निवेश संबंधी निर्णय लेते समय कंपनी की वित्तीय स्थिति, आईपीओ से जुड़ी जानकारी और अपनी जोखिम सहने की क्षमता पर ध्यान देना जरूरी है।

  • एलन मस्क के आरोपों पर रिलायंस का जवाब, कहा- स्टारलिंक समेत सभी कंपनियों पर भारत के नियम समान रूप से लागू

    एलन मस्क के आरोपों पर रिलायंस का जवाब, कहा- स्टारलिंक समेत सभी कंपनियों पर भारत के नियम समान रूप से लागू

    नई दिल्ली । भारत में सैटेलाइट संचार सेवाओं को लेकर प्रतिस्पर्धा के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एलन मस्क के आरोपों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। कंपनी ने कहा कि भारत में सैटेलाइट संचार क्षेत्र के लिए निर्धारित नियम और नीतियां घरेलू तथा विदेशी सभी कंपनियों पर समान रूप से लागू होती हैं। रिलायंस ने इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का स्वागत करते हुए कहा कि हर कंपनी को देश के कानूनों का पालन करना होगा। यह बयान ऐसे समय आया है, जब स्टारलिंक की भारत में सेवाएं शुरू करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
    रिलायंस ने कहा कि वह सैटेलाइट संचार क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का स्वागत करती है और इसमें स्टारलिंक भी शामिल है। कंपनी के मुताबिक, जियो समेत सभी कंपनियों की जिम्मेदारी भारतीय उपभोक्ताओं को सेवाएं देना और देश के कानूनों तथा नीतियों का पालन करना है। रिलायंस ने स्पष्ट किया कि भारत में निवेश और नवाचार के लिए खुला माहौल है। देश में विकसित होने वाली तकनीक हो या विदेश से आने वाला निवेश, लोगों के जीवन में सुधार लाने वाली पहल का स्वागत किया जाता है।
    कंपनी ने कहा कि इस खुलेपन का आधार कानून का शासन और सभी के लिए समान प्रक्रिया है। भारत सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए भारतीय और विदेशी आवेदकों के साथ समान व्यवहार किया जाता है। रिलायंस ने यह भी बताया कि जियो की अपनी सैटेलाइट सेवाएं शुरू करने के लिए भी विभिन्न मंजूरियों का इंतजार है। कंपनी के अनुसार, नियामकीय प्रक्रिया किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि संबंधित नियम सभी आवेदकों पर लागू होते हैं।
    रिलायंस ने प्रतिस्पर्धा को लेकर अपनी नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि उसने कभी मुकाबले से पीछे हटने का रुख नहीं अपनाया। कंपनी के मुताबिक, प्रतिस्पर्धा से यह तय होता है कि कौन उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराता है। रिलायंस की दूरसंचार इकाई जियो ने वर्ष 2016 में भारतीय दूरसंचार बाजार में प्रवेश किया था। कंपनी ने बताया कि शुरुआत में उसके पास कोई ग्राहक नहीं था, लेकिन दस वर्षों में जियो के ग्राहकों की संख्या 53 करोड़ से अधिक हो गई। रिलायंस ने इसे डिजिटल सेवाओं और किफायती डेटा उपलब्ध कराने की अपनी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
    स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट संचार सेवाएं उपलब्ध कराने का लाइसेंस मिल चुका है। हालांकि, व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने से पहले कंपनी को सुरक्षा संबंधी मंजूरियों और अन्य आवश्यक स्वीकृतियों की जरूरत है। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही भारत में उसकी सेवाओं की शुरुआत का रास्ता साफ हो सकेगा।
    इस विवाद की पृष्ठभूमि में एलन मस्क की वे टिप्पणियां हैं, जिनमें उन्होंने भारत में स्टारलिंक की शुरुआत को लेकर उद्योगपति मुकेश अंबानी पर निशाना साधा था। पिछले सप्ताह सोशल मीडिया मंच एक्स पर मस्क ने व्यंग्यात्मक अंदाज में उन्हें “प्रिय प्रधानमंत्री अंबानी” कहकर संबोधित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अंबानी भारत में अपना एकाधिकार बनाए रखना चाहते हैं और स्टारलिंक को प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति नहीं देना चाहते।
    मस्क ने अपनी पोस्ट में कहा कि उन्हें यह समझने में देर हुई कि भारत में वास्तविक फैसले लेने वाले अंबानी हैं। इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि क्या स्टारलिंक को भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने का अवसर दिया जाएगा। इन आरोपों के जवाब में रिलायंस ने समान नियमों और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा पर जोर दिया है।
    भारत में सैटेलाइट इंटरनेट क्षेत्र में कंपनियों की भागीदारी और सेवाओं की शुरुआत नियामकीय मंजूरियों से जुड़ी है। ऐसे में रिलायंस का बयान इस बात पर केंद्रित है कि बाजार में प्रवेश करने वाली सभी कंपनियों को निर्धारित कानूनी और सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।
  • TRAI के नए रिचार्ज नियमों पर Jio, Airtel और Vi की अलग-अलग दलीलें, सस्ते वॉइस प्लान को लेकर जताई ये चिंताएं

    TRAI के नए रिचार्ज नियमों पर Jio, Airtel और Vi की अलग-अलग दलीलें, सस्ते वॉइस प्लान को लेकर जताई ये चिंताएं


    नई दिल्ली ।
    महंगे मोबाइल रिचार्ज से राहत देने के उद्देश्य से भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण ने टेलीकॉम कंज्यूमर प्रोटेक्शन रेगुलेशन 2026 जारी किया है। नए नियमों के तहत टेलीकॉम कंपनियों को बिना डेटा वाले कॉलिंग और SMS प्लान उपलब्ध कराने होंगे। इसके साथ ही 28 दिन के बजाय 30 दिन की वैलिडिटी वाले रिचार्ज भी पेश करने होंगे।

    इन नियमों का फायदा खास तौर पर उन ग्राहकों को मिलने की उम्मीद है जिन्हें मोबाइल इंटरनेट की जरूरत नहीं होती या जो अतिरिक्त सिम को केवल चालू रखने के लिए रिचार्ज करते हैं। हालांकि, टेलीकॉम कंपनियां इस व्यवस्था को लेकर पहले से अपनी चिंताएं जाहिर करती रही हैं।

    रिलायंस जियो ने स्टैंडअलोन वॉइस प्लान को लेकर तर्क दिया है कि कम कीमत और कम वैलिडिटी वाले ऐसे प्लान साइबर जालसाजों और स्पैम कॉल करने वालों के लिए प्रवेश की बाधा कम कर सकते हैं। कंपनी का कहना है कि इससे अनचाही व्यावसायिक कॉल और धोखाधड़ी वाले कॉल में बढ़ोतरी का खतरा हो सकता है।

    जियो ने यह भी कहा है कि उसका नेटवर्क मुख्य रूप से आधुनिक 4G और 5G तकनीक पर आधारित है। कंपनी के मुताबिक ऐसे नेटवर्क में केवल वॉइस सेवाओं वाले प्लान तकनीकी और व्यावसायिक रूप से अलग तरह की चुनौती पेश करते हैं। जियो का दावा है कि उसके करीब 80 प्रतिशत एंट्री-लेवल ग्राहक डेटा सेवाओं का भी इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में कंपनी के अनुसार केवल वॉइस वाले प्लान की मांग सीमित रह सकती है।

    वोडाफोन आइडिया यानी Vi ने अपनी चिंता को अलग तरीके से सामने रखा है। कंपनी का कहना है कि यदि किसी प्लान में डेटा पूरी तरह हटा दिया जाता है, तो स्मार्टफोन में चलने वाले बैकग्राउंड अपडेट, ऐप सिंक और नोटिफिकेशन जैसी गतिविधियां उपभोक्ता के लिए अतिरिक्त शुल्क का कारण बन सकती हैं। कंपनी ने इसे ‘बिल शॉक’ की स्थिति से जोड़ा है।

    Vi के मुताबिक, पे-एज-यू-गो व्यवस्था में ऐसे ग्राहक जिनको मोबाइल डेटा की तकनीकी जानकारी कम है, अनजाने में डेटा इस्तेमाल कर सकते हैं और बाद में उन्हें अपेक्षा से ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है।

    एयरटेल ने इन प्लान को लेकर डिजिटल सेवाओं के विस्तार से जुड़ी चिंता जताई है। कंपनी के अनुसार भारत का डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा अब मोबाइल और इंटरनेट पर काफी हद तक निर्भर है। इसमें आधार आधारित सेवाएं, UPI और कई सरकारी कल्याणकारी सेवाएं शामिल हैं। एयरटेल का तर्क है कि केवल वॉइस प्लान को बढ़ावा मिलने से कुछ ग्राहक इंटरनेट आधारित सेवाओं से दूर हो सकते हैं।

    दूसरी ओर, इन दलीलों को लेकर यह सवाल भी उठाया गया है कि जिन ग्राहकों को इंटरनेट की जरूरत नहीं है, उनके लिए डेटा के बिना सस्ता रिचार्ज उपलब्ध कराने में क्या समस्या है। फीचर फोन इस्तेमाल करने वालों के लिए बैकग्राउंड डेटा की समस्या भी नहीं होती। वहीं स्मार्टफोन में मोबाइल डेटा बंद करने का विकल्प पहले से मौजूद है।

    ऐसे प्लान उन ग्राहकों के लिए उपयोगी हो सकते हैं जिनके पास मुख्य सिम पर पहले से डेटा उपलब्ध है और दूसरी सिम को केवल कॉलिंग या सक्रिय रखने के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं। कंपनियों की ओर से दिए गए तर्कों के बीच यह भी चर्चा है कि सस्ते स्टैंडअलोन वॉइस प्लान से औसत प्रति ग्राहक राजस्व पर असर पड़ सकता है।

    TRAI के नए नियमों के बाद टेलीकॉम कंपनियों को ग्राहकों के लिए स्टैंडअलोन वॉइस और SMS वाउचर तथा 30 दिन की वैलिडिटी वाले विकल्प उपलब्ध कराने होंगे। इससे मोबाइल रिचार्ज में ग्राहकों के लिए डेटा के बिना अपनी जरूरत के मुताबिक प्लान चुनने का विकल्प बढ़ेगा।

  • Jio IPO कब आएगा? अक्टूबर के अंत या नवंबर में 37,800 करोड़ रुपये के इश्यू की तैयारी, बन सकता है सबसे बड़ा आईपीओ

    Jio IPO कब आएगा? अक्टूबर के अंत या नवंबर में 37,800 करोड़ रुपये के इश्यू की तैयारी, बन सकता है सबसे बड़ा आईपीओ

    नई दिल्ली ।रिलायंस इंडस्ट्रीज के टेलीकॉम और डिजिटल कारोबार से जुड़ी कंपनी Jio Platforms के प्रस्तावित आईपीओ को लेकर निवेशकों की नजर अब इसकी संभावित लॉन्च तारीख पर है। कंपनी करीब 4 अरब डॉलर यानी लगभग 37,800 करोड़ रुपये का सार्वजनिक निर्गम ला सकती है। यदि यह इश्यू तय योजना के मुताबिक बाजार में आता है, तो यह भारतीय शेयर बाजार का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है।

    कंपनी के आईपीओ के अक्टूबर के अंत या नवंबर की शुरुआत में आने की संभावना जताई जा रही है। संभावित समय को लेकर नवरात्रि और दिवाली के आसपास का दौर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नवरात्रि 11 से 20 अक्टूबर तक है, जबकि दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी। हालांकि अंतिम तारीख की औपचारिक घोषणा अभी बाकी है।

    कंपनी की ओर से आईपीओ की तारीख तय होने के बाद निवेशकों तक पहुंच बनाने के लिए रोड शो और प्रचार अभियान शुरू किए जाने की योजना है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार विदेशों में करीब तीन सप्ताह और भारत में लगभग दो सप्ताह तक रोड शो आयोजित किए जा सकते हैं। तारीख जल्दी तय होने पर विदेश और घरेलू निवेशकों के साथ बातचीत का अभियान भी जल्द शुरू हो सकता है।

    Jio Platforms ने आईपीओ की दिशा में महत्वपूर्ण नियामकीय प्रक्रिया पूरी कर ली है। कंपनी ने जून में ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP दाखिल किया था। इसके बाद 28 अगस्त को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी से आईपीओ को मंजूरी मिल गई। इससे कंपनी के लिए सार्वजनिक निर्गम की राह आगे बढ़ी है।

    प्रस्तावित आईपीओ का आकार करीब 37,800 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। यह रकम जुटने पर Jio का इश्यू अब तक के सबसे बड़े आईपीओ का रिकॉर्ड अपने नाम कर सकता है। फिलहाल पूरा हो चुका सबसे बड़ा आईपीओ हुंडई मोटर इंडिया का करीब 27,000 करोड़ रुपये का है। वहीं राष्ट्रीय शेयर बाजार यानी NSE का लगभग 31,000 करोड़ रुपये का आईपीओ अभी बाजार में आना बाकी है।

    Jio Platforms के प्रस्तावित इश्यू में करीब 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। यह कंपनी की कुल हिस्सेदारी का लगभग 2.9 प्रतिशत हिस्सा होगा। खास बात यह है कि इस आईपीओ में मौजूदा शेयरधारकों की ओर से Offer for Sale यानी OFS के जरिए शेयर बेचने का प्रस्ताव नहीं है।

    यह रिलायंस समूह से करीब दो दशक बाद आने वाला बड़ा आईपीओ भी होगा। इससे पहले 2006 में रिलायंस पेट्रोलियम का आईपीओ आया था। ऐसे में Jio का सार्वजनिक निर्गम समूह और भारतीय पूंजी बाजार दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    आईपीओ से जुटाई जाने वाली रकम का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में इस्तेमाल किया जाएगा। प्रस्तावित योजना के अनुसार करीब 27,500 करोड़ रुपये Jio की ऑपरेटिंग कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम यानी RJIL के कर्ज को समय से पहले चुकाने के लिए लगाए जा सकते हैं। शेष राशि का इस्तेमाल कंपनी की अन्य जरूरतों के लिए किया जाएगा।

    Jio Platforms अपनी सहायक कंपनी RJIL को जरूरत के अनुसार शेयर, प्रेफरेंस शेयर, डिबेंचर या कर्ज के माध्यम से भी वित्तीय सहायता उपलब्ध करा सकती है। इससे आईपीओ से मिलने वाली पूंजी का उपयोग समूह के टेलीकॉम कारोबार की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में भी किया जा सकता है।

    Jio Platforms में कई बड़े वैश्विक निवेशकों की हिस्सेदारी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रमुख निवेशकों के पास कंपनी की करीब 30.9 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इनमें मेटा से जुड़ी जाधू होल्डिंग्स की लगभग 9.98 प्रतिशत और गूगल इंटरनेशनल की करीब 7.73 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है।

    इसके अलावा सऊदी अरब का पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड, सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी, जनरल अटलांटिक, केकेआर और अबू धाबी की निवेश एजेंसी ADIA भी Jio Platforms में निवेश कर चुके हैं। प्रस्तावित आईपीओ के आकार और वैश्विक निवेशकों की मौजूदगी के कारण बाजार में इसकी लॉन्चिंग को लेकर खास दिलचस्पी बनी हुई है।

  • VIP मोबाइल नंबर चाहिए? Jio और Vi पर ऐसे चुनें लकी नंबर, जानें कीमत और बुकिंग का तरीका

    VIP मोबाइल नंबर चाहिए? Jio और Vi पर ऐसे चुनें लकी नंबर, जानें कीमत और बुकिंग का तरीका


    नई दिल्ली । 
    अगर आप अपने मोबाइल नंबर में कोई खास पैटर्न, लकी डिजिट या याद रखने में आसान नंबर चाहते हैं, तो टेलीकॉम कंपनियों के जरिए ऐसा नंबर चुनने का विकल्प उपलब्ध है। Jio और Vi अपने यूजर्स को पसंदीदा या फैंसी मोबाइल नंबर चुनने की सुविधा देते हैं। इसमें 9999, 786 या जन्मतिथि से जुड़े अंकों जैसे खास पैटर्न वाले नंबर तलाशे जा सकते हैं।

    इस सुविधा की मदद से यूजर्स घर बैठे अपनी पसंद का नंबर खोज सकते हैं। इसके लिए Jio ग्राहकों को MyJio ऐप और Vi ग्राहकों को Vi ऐप का इस्तेमाल करना होता है। हालांकि, पसंदीदा नंबर की उपलब्धता और उसकी कीमत उसके पैटर्न तथा संबंधित कैटेगरी पर निर्भर करती है।

    Jio यूजर्स MyJio ऐप खोलकर होम स्क्रीन पर नीचे की ओर स्क्रॉल करने के बाद Quick Links सेक्शन में जा सकते हैं। यहां Matching Number का विकल्प दिखाई देता है। इस पर क्लिक करने के बाद यूजर अपने मौजूदा नंबर से मिलता-जुलता नंबर भी तलाश सकता है।

    अगर किसी ग्राहक को कोई खास VIP या फैंसी नंबर चाहिए, तो Looking for VIP number? विकल्प का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके बाद ग्राहक अपनी पसंद के चार से आठ अंकों का पैटर्न दर्ज करके नंबर की तलाश कर सकता है। उपलब्ध विकल्पों में से पसंदीदा नंबर चुनकर आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।

    Jio पर केवल मिलते-जुलते नंबर ही नहीं, बल्कि विशेष पैटर्न वाले नंबर भी खोजे जा सकते हैं। इससे उन ग्राहकों को सुविधा मिलती है जो अपने मौजूदा नंबर जैसा कोई नंबर रखना चाहते हैं या किसी खास संख्या को नए मोबाइल नंबर में शामिल करना चाहते हैं।

    Vi ग्राहकों के लिए भी प्रक्रिया काफी सरल है। इसके लिए Vi ऐप में जाकर VIP Number विकल्प चुनना होता है। इसके बाद जिस नंबर या अंक पैटर्न को ग्राहक अपने मोबाइल नंबर में चाहता है, उसे संबंधित बॉक्स में दर्ज करना होता है।

    सर्च करने के बाद स्क्रीन पर उपलब्ध VIP नंबरों की सूची दिखाई देती है। इनमें कुछ नंबर मुफ्त हो सकते हैं, जबकि कुछ Premium VIP नंबरों के लिए अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है। ग्राहक अपनी पसंद का नंबर चुनने के बाद पिनकोड और डिलीवरी एड्रेस जैसी जरूरी जानकारी दर्ज करके ऑर्डर की प्रक्रिया पूरी कर सकता है।

    VIP नंबर की कीमत एक जैसी नहीं होती। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मौजूदा नंबर से मिलता-जुलता नंबर चुनने की शुरुआती कीमत करीब 50 रुपये हो सकती है। वहीं Jio की कुछ विशेष गोल्ड कैटेगरी के VIP नंबरों के लिए ऑफलाइन स्टोर से वाउचर लेना पड़ सकता है और इसकी कीमत 12,000 रुपये तक पहुंच सकती है।

    Vi पर भी फैंसी नंबरों की अलग-अलग कैटेगरी उपलब्ध हैं। कुछ नंबर मुफ्त मिल सकते हैं, जबकि प्रीमियम कैटेगरी के नंबरों की कीमत करीब 590 रुपये से 2,000 रुपये तक हो सकती है। अंतिम कीमत चुने गए नंबर और उसकी कैटेगरी पर निर्भर करेगी।

    नंबर चुनने और भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ग्राहक अपने ऑपरेटर के निर्देश के अनुसार सिम प्राप्त कर सकता है। ऐसे में अगर आप अपना लकी नंबर, जन्मतिथि से जुड़ा पैटर्न या आसानी से याद रहने वाला नंबर चाहते हैं, तो पहले उपलब्ध नंबरों की सूची और उसकी कीमत जरूर जांचना बेहतर रहेगा।